अध्यायगुणनखंडन 14 14ण्1 भूमिका 14ण्1ण्1 प्रावृफत संख्याओं के गुणनखंड आपको याद होगा कि आपने गुणनखंडों ;ंिबजवतेद्ध के बारे में कक्षा टप् में पढ़ा था। आइए, एक प्रावृफत संख्या लेते हैं। मान लीजिए यह संख्या 30 है। हम इसे अन्य प्रावृफत संख्याओं के गुणनपफल के रूप में लिखते हैं, जैसे30 त्र 2 × 15 हम जानते हैं कि 30 को इस रूप में भी लिखा जा सकता है: त्र3 × 10 त्र 5 × 6 30 त्र 1 × 30 इस प्रकार 1ए 2ए 3ए 5ए 6ए 10ए 15 और 30 इस प्रकार, 1 और 30 भी 30 के गुणनखंड हैं। आप देखेंगे संख्या 30 के गुणनखंड हैं। इनमें से 2ए 3 और 5ए कि 1 प्रत्येक संख्या का एक गुणनखंड होता है उदाहरणाथर्, संख्या 30 के अभाज्य गुणनखंड हैं ;क्यों?द्ध। जब 101 त्र 1 × 101 होता है। कोइर् संख्या अभाज्य गुणनखंडों के गुणनपफल के परंतु जब भी हम किसी संख्या को गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में लिखी हो, तो वह उसका अभाज्य गुणनखंड रूप में लिखेंगे, तो हम, 1 को गुणनखंड के रूप में तब तक रूप कहलाता है। उदाहरण के लिए 30 को नहीं लिखेंगे। जब तक विशेष रूप से आवश्यक न हो। अभाज्य गुणनखंड रूप में 2 × 3 × 5 लिखते हैं। 70 का अभाज्य गुणनखंड रूप 2 × 5 × 7 है। 90 का अभाज्य गुणनखंड रूप 2 × 3 × 3 × 5 है, इत्यादि। इसी प्रकार, हम बीजीय व्यंजकों ;ंसहमइतंपब मगचतमेेपवदद्ध को भी उनके गुणनखंडों के गुणनपफलों के रूप में व्यक्त कर सकते हैं। इसका ध्यान दीजिए कि 1 पद 5गलए का एक हम इस अध्याय में अध्ययन करेंगे। गुणनखंड है, क्योंकि 14ण्1ण्2 बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड 5गल त्र 1× 5× ग × ल वास्तव में, 1 प्रत्येक पद का एक गुणनखंडहम कक्षा टप्प् में देख चुके हैं कि बीजीय व्यंजकों के पद ;जमतउेद्ध होता है। प्रावृफत संख्याओं की स्िथति कीगुणनखंडों के गुणनपफलों के रूप में बनते हैं। उदाहरणाथर्, बीजीय ही तरह, जब तक विशेष रूप से आवश्यकव्यंजक 5गल ़ 3ग में, पद 5गल गुणनखंडों 5ए ग और ल से बना है, अथार्त् न हो, हम 1 को किसी भी पद का5गल त्र5× ग × ल अलग से गुणनखंड नहीं लिखते हैं।ध्यान दीजिए कि 5गल के गुणनखंड 5ए ग और ल को और आगे गुणनखंडित नहीं किया जा सकता है, अथार्त् उन्हें गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। हम कह सकते हैं कि 5गल के अभाज्य गुणनखंड ;चतपउम ंिबजवतेद्ध 5ए ग और ल हैं। बीजीय व्यंजकों में, हम ‘अभाज्य’ के स्थान पर शब्द ‘अखंडनीय ;पततमकनबपइसमद्धश् का प्रयोग करते हैं। हम कहते हैं कि 5गल का अखंडनीय रूप 5 × ग × ल है। ध्यान दीजिए कि 5 × ;गलद्ध पद 5गल का अखंडनीय रूप नहीं है, क्योंकि गुणनखंड गल को और आगे ग एवं ल के गुणनपफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, अथार्त् गल त्र ग × ल है। अब, व्यंजक 3ग ;ग ़ 2द्ध पर विचार कीजिए। इसे गुणनखंडों 3ए ग और ;ग ़ 2द्ध के गुणनपफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। अथार्त् 3ग;ग ़ 2द्ध त्र3× ग ×;ग ़ 2द्ध व्यंजक 3ग ;ग ़ 2द्ध के अखंडनीय गुणनखंड 3ए ग और ;ग ़ 2द्ध हैं। इसी प्रकार, व्यंजक 10ग ;ग ़ 2द्ध ;ल ़ 3द्ध को अखंडनीय रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जाता हैः 10ग ;ग ़ 2द्ध ;ल ़ 3द्ध त्र 2 × 5 × ग × ;ग ़ 2द्ध × ;ल ़ 3द्ध 14ण्2 गुणनखंडन क्या हैघ् जब हम किसी बीजीय व्यंजक के गुणनखंड करते हैं, तो हम उसे गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में लिखते हैं। ये गुणनखंड, संख्याएँ, बीजीय चर या बीजीय व्यंजक हो सकते हैं। 3गलए 5ग2 ल ए 2ग ;ल ़ 2द्धए 5 ;ल ़ 1द्ध ;ग ़ 2द्ध जैसे व्यंजक पहले से ही गुणनखंड रूप में हैं। जैसा कि हम पहले से ही जानते हैं, हम उपरोक्त व्यंजकों के गुणनखंड इन्हें देखकर ही पढ़ सकते हैं। इसके विपरीत 2ग ़ 4ए 3ग ़ 3लए ग2 ़ 5गए ग2 ़ 5ग ़ 6 जैसे व्यंजकों पर विचार कीजिए। यह स्पष्ट नहीं है कि इनके गुणनखंड क्या हैं। इस प्रकार के व्यंजकों के गुणनखंड करने के लिए, हमें क्रमब( विध्ियाँ विकसित करने की आवश्यकता है। यही अब हम करेंगे। 14ण्2ण्1 सावर् गुणनखंडों की विध्ि ऽ हम एक सरल उदाहरण से प्रारंभ करते हैं: 2ग ़ 4 के गुणनखंड कीजिए। हम इसके प्रत्येक पद को अखंडनीय गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में लिखेंगे: 2ग त्र2× ग 4 त्र2 × 2 अतः 2ग ़ 4 त्र ;2 × गद्ध ़ ;2 × 2द्ध ध्यान दीजिए कि गुणनखंड 2 दोनों पदों में उभयनिष्ठ ;सावर्द्ध है। देख्िाए, बंटन नियम द्वारा 2 × ;ग ़ 2द्ध त्र ;2 × गद्ध ़ ;2 × 2द्ध अतः हम लिख सकते हैं कि 2ग ़ 4 त्र2 × ;ग ़ 2द्ध त्र 2 ;ग ़ 2द्ध इस प्रकार, व्यंजक 2ग ़ 4 वही है जो 2 ;ग ़ 2द्ध है। अब हम इसके गुणनखंड पढ़ सकते हैंः ये 2 और ;ग ़ 2द्ध हैं। ये गुणनखंड अखंडनीय हैं। अब, 5गल ़ 10ग के गुणनखंड कीजिए। 5गल और 10ग के अखंडनीय गुणनखंड रूप क्रमशः हैं: 5गल त्र5 × ग × ल 10ग त्र2 × 5 × ग 227 ध्यान दीजिए कि दोनों पदों में 5 और ग उभयनिष्ठ गुणनखंड हैं। अब, 5गल ़ 10ग त्र ;5 × ग × लद्ध ़ ;5 × ग × 2द्ध त्र;5ग × लद्ध ़ ;5ग × 2द्ध हम दोनों पदों को बंटन नियम द्वारा संयोजित करते हैं: ;5ग× लद्ध ़ ;5ग× 2द्ध त्र 5ग × ; ल ़ 2द्ध अतः 5गल ़ 10ग त्र 5 ग ;ल ़ 2द्ध ;यही वांछित गुणनखंड रूप है।द्ध उदाहरण 1 रू 12ं2इ ़ 15ंइ2 के गुणनखंड कीजिए। हल रू हम पाते हैं: 12ं2इ त्र2 × 2 × 3 × ं × ं × इ 15ंइ2त्र3 × 5 × ं × इ × इ इन दोनों पदों में 3ए ं और इ सावर् गुणनखंड हैं अतः 12ं2इ ़ 15ंइ2त्र ;3 × ं × इ × 2 × 2× ंद्ध़ ;3 × ं × इ × 5 × इद्ध त्र3 × ं × इ × ख्;2 × 2 × ंद्ध ़ ;5 × इद्ध, त्र3ंइ × ;4ं ़ 5इद्ध;पदों को मिलाने परद्ध त्र3ंइ ;4ं ़ 5इद्ध ;वांछित गुणनखंड रूपद्ध उदाहरण 2 रू 10ग2 दृ 18ग3 ़ 14ग4 के गुणनखंड कीजिए। हल रू 10ग2 त्र2 × 5 × ग × ग 18ग3 त्र2 × 3 × 3 × ग × ग × ग 14ग4त्र2 × 7 × ग × ग × ग × ग इन तीनों पदों में सावर् गुणनखंड 2ए ग और ग हैं। अतः 10ग2 दृ 18ग3 ़ 14ग4 त्र ;2 × ग × ग × 5द्ध दृ ;2 × ग × ग × 3 × 3 × गद्ध ़ ;2 × ग × ग × 7 × ग × गद्ध त्र2 × ग × ग ×ख्;5 दृ ;3 × 3 × गद्ध ़ ;7 × ग × गद्ध, 2;7ग2 ग2 − 9ग ़ 5द्ध ;तीनों पदों को3त्र2ग2 × ;5दृ 9ग ़ 7ग2द्ध त्र 1442444मिलाने परद्ध 14ण्2ण्2 पदों के पुनः समूहन द्वारा गुणनखंडन व्यंजक 2गल ़ 2ल ़ 3ग ़ 3 पर विचार कीजिए। आप देखेंगे कि पहले दो पदों में सावर् गुणनखंड 2 और ल हैं तथा अंतिम दो पदों में सावर् गुणनखंड 3 है। परंतु सभी पदों में कोइर् सावर् गुणनखंड नहीं है। हम किस प्रकार प्रारंभ करेंगेघ् आइए, ;2गल ़ 2लद्ध को गुणनखंड रूप में लिखें। 2गल ़ 2ल त्र ;2 × ग × लद्ध ़ ;2 × लद्ध त्र ;2 × ल × गद्ध ़ ;2 × ल × 1द्ध त्र;2ल × गद्ध ़ ;2ल × 1द्ध त्र 2ल ;ग ़ 1द्ध इसी प्रकार, 3ग ़ 3 त्र ;3 × गद्ध़ ;3 × 1द्ध त्र3 × ;ग ़ 1द्ध त्र 3 ; ग ़ 1द्ध क्या आप देख रहे हैं कि एक व्यंजक के गुणनखंड रूप में केवल एक हीपद होता है? ध्यान दीजिए: यहाँ हमें 1 को गुणनखंड के रूप में दशार्ने की आवश्यकता है। क्यों? अतः 2गल ़ 2ल ़ 3ग ़ 3 त्र2ल ;ग ़ 1द्ध ़ 3 ;ग ़1द्ध ध्यान दीजिए कि यहाँ दाएँ पक्ष के दोनों पदों में एक सावर् गुणनखंड ;ग ़ 1द्ध है। दोनों पदों को मिलाने पर, 2गल ़ 2ल ़ 3ग ़ 3 त्र 2ल ;ग ़ 1द्ध ़ 3 ;ग ़ 1द्ध त्र ;ग ़ 1द्ध ;2ल ़ 3द्ध अब, व्यंजक 2गल ़ 2ल ़ 3ग ़ 3 गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में है। इसके गुणनखंड ;ग ़ 1द्ध और ;2ल ़ 3द्ध हैं। ध्यान दीजिए कि ये गुणनखंड अखंडनीय हैं। पुनः समूहन ;तमहतवनचपदहद्ध क्या हैघ् मान लीजिए कि उपरोक्त व्यंजक 2गल ़ 3 ़ 2ल ़ 3ग के रूप में दिया है, तब इसका गुणनखंडन देखना सरल नहीं है। इसी व्यंजक को 2गल ़ 2ल ़ 3ग ़ 3 के रूप में पुनव्यर्वस्िथत करने पर, इसके ;2गल ़ 2लद्ध और ;3ग ़ 3द्ध समूह बनाकर गुणनखंडन किया जा सकता है, यही पुनः समूहन है। पुनः समूहन एक से अध्िक विध्ियों द्वारा संभव हो सकता है। मान लीजिए कि हम उपरोक्त व्यंजक को 2गल ़ 3ग ़ 2ल ़ 3 के रूप में पुनः समूहन करते हैं। इससे भी हम गुणनखंड प्राप्त कर सकते हैं। आइए, प्रयास करें: 2गल ़ 3ग ़ 2ल ़ 3 त्र2 × ग × ल ़ 3 × ग ़ 2ल ़ 3 त्र ग × ;2ल ़ 3द्ध ़ 1 × ;2ल ़ 3द्ध त्र; 2ल ़ 3द्ध ;ग ़ 1द्ध गुणनखंड वही हैं ;जैसा कि उन्हें होना चाहिएद्ध, यद्यपि वे विभ्िान्न क्रम में दिखाइर् दे रहे हैं। उदाहरण 3 रू 6गल दृ 4ल ़ 6 दृ 9ग के गुणनखंड कीजिए। हल रू चरण 1 जाँच कीजिए कि क्या सभी पदों में कोइर् सावर् गुणनखंड है। यहाँ कोइर् नहीं है। चरण 2 समूहन के बारे में सोचिए। ध्यान दीजिए कि पहले दो पदों में सावर् गुणनखंड 2ल है। अतः, 6गल दृ 4ल त्र2ल ;3ग दृ 2द्ध ;ंद्ध अंतिम दो पदों के बारे में क्या कहा जा सकता है? उन्हें देख्िाए। यदि आप इनका क्रम बदलकर दृ 9ग ़ 6ए लिख लें, तो गुणनखंड ; 3ग दृ 2द्ध आ जाएगा। अतः दृ9ग ़ 6 त्र दृ3 ;3गद्ध ़ 3 ;2द्ध त्रदृ 3 ;3ग दृ 2द्ध ;इद्ध चरण 3 ;ंद्ध और ;इद्ध को एक साथ रखने पर, 6गल दृ 4ल ़ 6 दृ 9ग त्र6गल दृ 4ल दृ 9ग ़ 6 त्र2ल ;3ग दृ 2द्ध दृ 3 ;3ग दृ 2द्ध त्र;3ग दृ 2द्ध ;2ल दृ 3द्ध इस प्रकार, ;6गल दृ 4ल ़ 6 दृ 9 गद्ध के गुणनखंड ;3ग दृ 2द्ध और ;2ल दृ 3द्ध हंै। प्रश्नावली 14ण्1 1ण् दिए हुए पदों में सावर् गुणनखंड ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 12गए 36 ;पपद्ध 2लए 22गल ;पपपद्ध 14 चुए 28च2ु2 ;पअद्ध 2गए 3ग2ए 4 ;अद्ध 6 ंइबए 24ंइ2ए 12 ं2इ ;अपद्ध 16 ग3ए दृ 4ग2ए 32ग ;अपपद्ध 10 चुए 20ुतए 30तच ;अपपपद्ध 3ग2 ल3ए 10ग3 ल2ए6 ग2 ल2्र 2ण् निम्नलिख्िात व्यंजकों के गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध 7ग दृ 42 ;पपद्ध 6च दृ 12ु ;पपपद्ध 7ं2 ़ 14ं ;पअद्ध दृ 16 ्र ़ 20 ्र3 ;अद्ध 20 स2 उ ़ 30 ं स उ ;अपद्ध 5 ग2 ल दृ 15 गल2 ;अपपद्ध 10 ं2 दृ 15 इ2 ़ 20 ब2 ;अपपपद्ध दृ 4 ं2 ़ 4 ंइ दृ 4 बं ;पगद्ध ग2 ल ्र ़ ग ल2्र ़ ग ल ्र2 ;तीनों पदों को मिलाने परद्ध;गद्ध ं ग2 ल ़ इ ग ल2 ़ ब ग ल ्र 3ण् गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध ग2 ़ ग ल ़ 8ग ़ 8ल ;पपद्ध 15 गल दृ 6ग ़ 5ल दृ 2 ;पपपद्ध ंग ़ इग दृ ंल दृ इल ;पअद्ध 15 चु ़ 15 ़ 9ु ़ 25च ;अद्ध ्र दृ 7 ़ 7 ग लदृ ग ल ्र 14ण्2ण्3 सवर्समिकाओं के प्रयोग द्वारा गुणनखंडन हम जानते हैं कि ;ं ़ इद्ध2 त्र ं2 ़ 2ंइ ़ इ2 ;प्द्ध ;ं दृ इद्ध2 त्र ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 ;प्प्द्ध ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध त्र ं2 दृ इ2 ;प्प्प्द्ध निम्नलिख्िात हल किए उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि गुणनखंडन के लिए इन सवर्समिकाओं ;पकमदजपजपमेद्ध का किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है। पहले हम दिए हुए व्यंजक को देखते हैं। यदि यह उपरोक्त सवर्समिकाओं में से किसी एक के दाएँ पक्ष के रूप का है, तो उस सवर्समिका के बाएँ पक्ष के संगत व्यंजक से वांछित गुणनखंड प्राप्त हो जाते हैं। उदाहरण 4 रू ग2 ़ 8ग ़ 16 के गुणनखंड कीजिए। हल रू इस व्यंजक को देख्िाए। इसके तीन पद हैं। अतः इसमें सवर्समिका प्प्प् का प्रयोग नहीं कियाजा सकता है। साथ ही, इसके पहले और तीसरे पद पूणर् वगर् हैं तथा बीच वाले पद का चिÉ ध्नात्मक है। अतः यह ं2 ़ 2ंइ ़ इ2 के रूप का है, जहाँ ं त्र ग और इ त्र 4 हैं। इस प्रकार, ं2 ़ 2ंइ ़ इ2 त्र ग2 ़ 2 ;गद्ध ;4द्ध ़ 42 ध्यान दीजिए कि दिया हुआ त्र ग2 ़ 8ग ़ 16 व्यंजक ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 केक्योंकि ं2 ़ 2ंइ ़ इ2 त्र;ं ़ इद्ध2ए रूप का है, जहाँ ं त्र 2लए तुलना करने पर, ग2 ़ 8ग ़ 16 त्र ; ग ़ 4द्ध2 ;वांछित गुणनखंडनद्ध इ त्र 3 तथा 2ंइ त्र 2 × 2ल × 3 त्र 12ल हैं।उदाहरण 5 रू 4ल2 दृ 12ल ़ 9 के गुणनखंड कीजिए। हल रू ध्यान दीजिए कि 4ल2 त्र ;2लद्ध2ए 9 त्र 32 और 12ल त्र 2 × 3 × ;2लद्ध अतः 4ल2 दृ 12ल ़ 9 त्र ;2लद्ध2 दृ 2 × 3 × ;2लद्ध ़ ;3द्ध2 त्र; 2ल दृ 3द्ध2 ;वांछित गुणनखंडनद्ध उदाहरण 6 रू 49च2 दृ 36 के गुणनखंड कीजिए। हल रू यहाँ दो पद हैं। दोनों ही पूणर् वगर् हैं तथा दूसरा )णात्मक है अथार्त् यह व्यंजक ;ं2 दृ इ2द्ध के रूप का है। यहाँ सवर्समिका प्प्प् का प्रयोग किया जाएगा।49च2 दृ 36 त्र ;7चद्ध2 दृ ; 6 द्ध2 त्र;7च दृ 6 द्ध ; 7च ़ 6द्ध ;वांछित गुणनखंडनद्ध उदाहरण 7 रू ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 दृ ब2 के गुणनखंड कीजिए। हल रू दिए हुए व्यंजक के पहले तीन पदों से ;ं दृ इद्ध2 प्राप्त होता है। चैथा पद एक वगर् है। इसलिए इस व्यंजक को दो वगोर्ं के अंतर के रूप में परिव£तत किया जा सकता है। इस प्रकार ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 दृ ब2 त्र;ं दृ इद्ध2दृ ब2;सवर्समिका प्प् सेद्ध त्र ख्;ं दृ इद्ध दृ बद्ध ;;ं दृ इद्ध ़ बद्ध, ;सवर्समिका प्प्प् सेद्ध त्र;ं दृ इ दृ बद्ध ;ं दृ इ ़ बद्ध;वांछित गुणनखंडनद्ध ध्यान दीजिए कि वांछित गुणनखंडन प्राप्त करने के लिए, हमने किस प्रकार एक के बाद एक दो सवर्समिकाओं का प्रयोग किया है। उदाहरण 8 रू उ4 दृ 256 के गुणनखंड कीजिए। हल रू हम देखते हैं कि उ4 त्र;उ2द्ध2 और 256 त्र ;16द्ध 2 अतः दिए हुए व्यंजक में सवर्समिका प्प्प् का प्रयोग होगा। इसलिए उ4 दृ 256 त्र ;उ2द्ध2 दृ ;16द्ध 2त्र ;उ2 दृ16द्ध ;उ2 ़16द्ध ख्;सवर्समिका ;प्प्प्द्धसे, अब उ2 ़ 16 के आगे गुणनखंड नहीं किए जा सकते हैं, परंतु ;उ2 दृ16द्ध के सवर्समिका प्प्प् के प्रयोग से और भी गुणनखंड किए जा सकते हैं। अब उ2दृ16 त्र उ2 दृ 42 त्र;उ दृ 4द्ध ;उ ़ 4द्ध इसलिए उ4 दृ 256 त्र ;उ दृ 4द्ध ;उ ़ 4द्ध ;उ2 ़16द्ध 14ण्2ण्4 ; ग ़ ंद्ध ; ग ़ इद्ध के रूप के गुणनखंड आइए अब चचार् करें कि हम एक चर वाले व्यंजकों, जैसे ग2 ़ 5ग ़ 6ए ल2 दृ 7ल ़ 12ए ्र2 दृ 4्र दृ 12ए 3उ2 ़ 9उ ़ 6ए इत्यादि के गुणनखंड किस प्रकार कर सकते हैं। ध्यान दीजिए कि ये व्यंजक ;ं ़ इद्ध 2 या ;ं दृ इद्ध 2 के प्रकार के नहीं है, अथार्त् ये पूणर् वगर् नहीं हैं। उदाहरणाथर्, ग2 ़ 5ग ़ 6 में पद 6 एक पूणर् वगर् नहीं है। स्पष्टतः इस प्रकार के व्यंजक ;ं2 दृ इ2द्ध के प्रकार के भी नहीं हैं। परंतु ये ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ के प्रकार के प्रतीत होते हैं। इसलिए इस प्रकार के गुणनखंड करने के लिए, हम पिछले अध्याय में अध्ययन की गइर् सवर्समिका सात का प्रयोग कर सकते हैं। यह सवर्समिका है: ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ ;प्टद्ध इसके लिए हमें ग के गुणांक ;बवमपििबपमदजद्ध और अचर पद को देखना होगा। आइए, निम्नलिख्िात उदाहरण में देखें कि ऐसा किस प्रकार किया जाता है। उदाहरण 9 रू ग2 ़ 5ग ़ 6 के गुणनखंड कीजिए। हल रू यदि हम सवर्समिका ;प्टद्ध के दाएँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध से ग2 ़ 5ग ़ 6 की तुलना करें, तो हम पाएँगे कि ंइ त्र 6 और ं ़ इ त्र 5 है। यहाँ से हमें ं और इ ज्ञात करने चाहिए। तब ;ग ़ ंद्ध और ;ग ़ इद्ध गुणनखंड होंगे। यदि ंइ त्र 6 है, तो इसका अथर् है कि ं और इ संख्या 6 के गुणनखंड हैं। आइए, ं त्र 6 और इ त्र 1 लेकर प्रयास करें। इन मानों के लिए ं ़ इ त्र 7 है और 5 नहीं है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है। आइए ं त्र 2 और इ त्र 3 लेकर प्रयास करें। इसके लिए, ं ़ इ त्र 5 है, जो ठीक वही है जो हम चाहते हैं। तब, इस दिए हुए व्यंजक का गुणनखंड रूप ;ग ़2द्ध ;ग ़ 3द्ध है। व्यापक रूप में, ग2 ़ चग ़ ु के प्रकार के बीजीय व्यंजक के गुणनखंड करने के लिए, हम ु के ;अथार्त् अचर पद केद्ध दो गुणनखंड ं और इ इस प्रकार ज्ञात करते हैं कि ंइ त्र ु और ं ़ इ त्र च हो। तब, यह व्यंजक हो जाता है: ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ या ग2 ़ ंग ़ इग ़ ंइ या ग;ग ़ ंद्ध ़ इ;ग ़ ंद्ध या ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध जो, वांछित गुणनखंड हैं। उदाहरण 10 रू ल2 दृ7ल ़12 के गुणनखंड ज्ञात कीजिए। हल रू हम देखते हैं कि 12 त्र 3 × 4 और 3 ़ 4 त्र 7 है। इसलिए ल2 दृ 7ल़ 12 त्र ल2 दृ 3ल दृ 4ल ़ 12 त्र ल ;ल दृ3द्ध दृ 4 ;ल दृ3द्ध त्र ;ल दृ3द्ध ;ल दृ 4द्ध ध्यान दीजिए कि इस बार हमने ं और इ ज्ञात करने के लिए, दिए हुए व्यंजक की तुलना सवर्समिका प्ट से नहीं की। पयार्प्त अभ्यास के बाद, आपको दिए हुए व्यंजकों के गुणनखंड करने के लिए उनकी तुलना सवर्समिकाओं के व्यंजकों से करने की आवश्यकता नहीं है तथा आपसीध्े ही गुणनखंड कर सकते हैं जैसा हमने ऊपर किया है। उदाहरण 11 रू ्र2 दृ 4्र दृ 12 के गुणनखंड प्राप्त कीजिए। हल रू यहाँ ं इ त्र दृ12 है। इसका अथर् है कि ं और इ में से एक )णात्मक है। साथ ही, ं ़ इ त्र दृ 4 है। इसका अथर् है कि बड़े संख्यात्मक मान वाला )णात्मक है। हम ं त्र दृ 4 और इ त्र 3य लेकर प्रयास करते हैं। परंतु यह कायर् नहीं करेगा, क्योंकि ं ़ इ त्र दृ1 है। इनसे अगले संभव मान ं त्र दृ 6 और इ त्र 2 हैं, तब ं ़ इ त्र दृ 4 है, जो हमें चाहिए। अतः ्र2 दृ 4्र दृ12 त्र ्र2 दृ 6्र ़ 2्र दृ12 त्र ्र;्र दृ 6द्ध ़ 2;्र दृ 6 द्ध त्र ;्र दृ 6द्ध ;्र ़ 2द्ध उदाहरण 12 रू 3उ2 ़ 9उ ़ 6 के गुणनखंड प्राप्त कीजिए। हल रू हम देखते हैं कि 3 सभी पदों का एक सावर् गुणनखंड है। अतः 3उ2 ़ 9उ ़ 6 त्र 3;उ2 ़ 3उ ़ 2द्ध अबए उ 2 ़ 3उ ़ 2 त्र उ2 ़ उ ़ 2उ ़ 2 ;क्योंकि 2 त्र 1 × 2द्ध त्र उ;उ ़ 1द्ध़ 2; उ ़ 1द्ध त्र;उ ़ 1द्ध ;उ ़ 2द्ध अतः 3उ2 ़ 9उ ़ 6 त्र 3;उ ़ 1द्ध ;उ ़ 2द्ध प्रश्नावली 14ण्2 1ण् निम्नलिख्िात व्यंजकों के गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध ं2 ़ 8ं ़ 16 ;पपद्ध च2 दृ 10 च ़ 25 ;पपपद्ध 25उ2 ़ 30उ ़ 9 ;पअद्ध 49ल2 ़ 84ल्र ़ 36्र2 ;अद्ध 4ग2 दृ 8ग ़ 4 ;अपद्ध 121इ2 दृ 88इब ़ 16ब2 ;अपपद्ध ;स ़ उद्ध2 दृ 4सउ ;संकेत: पहले ; स ़ उद्ध2 को प्रसारित कीजिए।द्ध ;अपपपद्ध ं4 ़ 2ं2इ2 ़ इ4 2ण् गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध 4च2 दृ 9ु2 ;पपद्ध 63ं2 दृ 112इ2 ;पपपद्ध 49ग2 दृ 36 ;पअद्ध 16ग5 दृ 144ग3 ;अद्ध ;स ़ उद्ध2 दृ ;स दृ उद्ध2 ;अपद्ध 9ग2 ल2 दृ 16 ;अपपद्ध ;ग2 दृ 2गल ़ ल2द्ध दृ ्र2 ;अपपपद्ध 25ं2 दृ 4इ2 ़ 28इब दृ 49ब2 3ण् निम्नलिख्िात व्यंजकों के गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध ंग2 ़ इग ;पपद्ध 7च2 ़ 21ु2 ;पपपद्ध 2ग3 ़ 2गल2 ़ 2ग्र2 ;पअद्ध ंउ2 ़ इउ2 ़ इद2 ़ ंद2 ;अद्ध ;सउ ़ सद्ध ़ उ ़ 1 ;अपद्ध ल ;ल ़ ्रद्ध़9 ;ल ़ ्रद्ध ;अपपद्ध 5ल2 दृ 20ल दृ 8्र ़ 2ल्र ;अपपपद्ध 10ंइ ़ 4ं ़ 5इ ़ 2 ;पगद्ध 6गल दृ 4ल ़ 6 दृ 9ग 4ण् गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध ं4 दृ इ4 ;पपद्ध च4 दृ 81 ;पपपद्ध ग4 दृ ;ल ़ ्रद्ध4 ;पअद्ध ग4 दृ ;ग दृ ्रद्ध4 ;अद्ध ं4 दृ 2ं2इ2 ़ इ4 5ण् निम्नलिख्िात व्यंजकों के गुणनखंड कीजिए: ;पद्ध च2 ़ 6च ़ 8 ;पपद्ध ु2 दृ 10ु ़ 21 ;पपपद्ध च2 ़ 6च दृ 16 14ण्3 बीजीय व्यंजकों का विभाजन हम सीख चुके हैं कि बीजीय व्यंजकों को किस प्रकार जोड़ा और घटाया जाता है। हम यह भी जानते हैं कि दो व्यंजकों को किस प्रकार गुणा किया जाता है। परंतु हमने एक बीजीय व्यंजक से दूसरे व्यंजक के विभाजन पर अभी तक चचार् नहीं की है इस अनुच्छेद में, हम यही करना चाहते हैें। आपको याद होगा कि विभाजन;कपअपेपवदद्ध गुणन ;उनसजपचसपबंजपवदद्ध की प्रतिलोम संिया है। इस प्रकार, 7 × 8 त्र 56 से 56 झ् 8 त्र 7 या 56 झ् 7 त्र 8 प्राप्त होता है। यही हम बीजीय व्यंजकों के विभाजन ;या भाग देनेद्ध के लिए भी कर सकते हैं। उदाहरणाथर्ए ;पद्ध 2ग× 3ग2 त्र6ग3 अतः 6ग3 झ् 2गत्र3ग2 तथा साथ हीए6ग3 झ् 3ग2 त्र2ग ;पपद्ध 5ग;ग ़ 4द्ध त्र 5ग2 ़ 20ग अतः ;5ग2 ़ 20गद्ध झ् 5गत्र ग़ 4 तथा साथ ही, ;5ग2 ़ 20गद्ध झ् ;ग ़ 4द्ध त्र 5ग अब हम ध्यानपूवर्क देखेंगे कि एक व्यंजक को अन्य व्यंजक से किस प्रकार विभाजित किया जा सकता है। प्रारंभ करने के लिए, हम एक एकपदी ;उवदवउपंसद्ध का एक अन्य एकपदी से विभाजन पर विचार करेंगे। 14ण्3ण्1 एकपदी का एक अन्य एकपदी से विभाजन 6ग3 झ् 2गपर विचार कीजिए। हम 2गऔर 6ग3 को अखंडनीय गुणनखंड रूपों में लिख सकते हैं: 2ग त्र2× ग 6ग3त्र2 × 3 × ग× ग× ग अब हम 2गको अलग करने के लिए, 6ग3 के गुणनखंडों के समूह बनाते हैं। 6ग3 त्र2× ग× ;3 × ग× गद्ध त्र ;2गद्ध × ;3ग2द्ध इस प्रकार, 6ग3 झ् 2गत्र3ग2 सावर् गुणनखंडों को निरस्त करने की एक संक्ष्िाप्त विध्ि वह है जो हम संख्याओं के विभाजन में करते हैं। 77 711 ×जैसे 77 झ् 7 त्र त्र त्र 11 77 6ग3 इसी प्रकार, 6ग3 झ् 2गत्र 2ग 23 गगग×××× त्र त्र 3 × ग× गत्र 3ग2 2 ×ग उदाहरण 13 रू निम्नलिख्िात विभाजन कीजिए: ;पद्ध दृ20ग4 झ् 10ग2 ;पपद्ध 7ग2ल2्र2 झ् 14गल्र हल रू ;पद्ध दृ20ग4 त्र दृ2 × 2 × 5 × ग× ग× ग× ग10ग2 त्र 2 × 5 × ग× ग 225 गगगग−×××××× अतः ;दृ20ग4द्ध झ् 10ग2 त्र त्र दृ2 × ग× गत्र दृ2ग2 25 गग×××7 गगलल्र्र×××××× ;पपद्ध 7ग2ल2्र2 झ् 14गल्र त्र 27 गल××××्र गल्र1××त्र त्र गल्र22 भाग दीजिए: ;पद्ध 24गल2्र3 को 6ल्र2 से ;पपद्ध 63ं2इ4ब6 को 7ं2इ2ब3 से 14ण्3ण्2 एक बहुपद का एक एकपदी से विभाजन आइए, एक त्रिापद ;जतपदवउपंसद्ध 4ल3 ़ 5ल2 ़ 6ल का एकपदी 2ल से विभाजन पर विचार करें। 4ल3 ़ 5ल2 ़ 6ल त्र ;2 × 2 × ल × ल × लद्ध ़ ;5 × ल × लद्ध ़ ;2 × 3 × लद्ध ख्यहाँ, हम बहुपद ;चवसलदवउपंसद्ध के प्रत्येक पद को गुणनखंड के रूप में लिखते हैं।, हम पाते हैं कि 2 × ल दो पदों में एक सावर् गुणनखंड है साथ ही, हम इसे तीसरे पद 5ल2 के लिए भी एक सावर् गुणनखंड के रूप में बदल सकते हैं। तब, हम प्राप्त करते हैं: ⎛5 ⎞4ल3 ़ 5ल2 ़ 6ल त्र2 × ल × ;2 × ल × लद्ध ़ 2 × ल × ⎜×ल⎟़ 2 × ल × 3⎝⎠2 5⎛⎞⎜⎟त्र2ल ;2ल2द्ध ़ 2लल ़ 2ल ;3द्ध⎝⎠2 ⎛ 25 ⎞ त्र2ल ⎜2ल ़ल ़3⎠⎟;सावर् गुणनखंड 2ल को अलग दशार्या गया है⎝ 2 अतः ;4ल3 ़ 5ल2 ़ 6लद्ध झ् 2ल 25 32 लल ल 3द्ध 2;2 ़़ 4 ल ़5ल ़6ल 25 त्र त्र त्र 2ल2 ़ 2 ल ़ 32ल 2ल वैकल्िपक रूप में, हम त्रिापद के प्रत्येक पद को, निरस्तीकरण की विध्ि का प्रयोग करते हुए, उस एकपदी से भाग दे सकते थे: 4ल3 ़5ल2 ़6लयहाँ हम अंश में ;4ल3 ़ 5ल2 ़ 6लद्ध झ् 2लत्र 2लबहुपद के प्रत्येक पद को हर में एकपदी से 4ल35ल26 ल 5भाग देते हैं। त्र ़़ त्र 2ल2 ़ ल ़ 32ल 2ल 2 ल 2 उदाहरण 14 रू उपरोक्त दोनों विध्ियों का प्रयोग करते हुए, 24;ग2ल्र ़ गल2्र ़ गल्र2द्ध को 8गल्र से भाग दीजिए। हल रू 24 ;ग2ल्र ़ गल2्र ़ गल्र2द्ध त्र 2 × 2 × 2 × 3 × ख्;ग × ग × ल × ्रद्ध ़ ;ग × ल × ल × ्रद्ध ़ ;ग × ल × ्र × ्रद्ध, त्र2 × 2 × 2 × 3 × ग × ल × ्र × ;ग ़ ल ़ ्रद्ध ;सावर् गुणनखंड बाहर लेने परद्ध त्र 8 × 3 × गल्र × ;ग ़ ल ़ ्रद्ध अतः 24 ;ग2ल्र ़ गल2्र ़ गल्र2द्ध झ् 8गल्र 83 गल्र × ़़ ;गल्रद्ध×× त्र त्र 3 × ;ग ़ ल ़ ्रद्ध त्र 3 ;ग ़ ल ़ ्रद्ध8 ×गल्र 2 2224ग ल्र 24गल ्र 24गल्रवैकल्िपक रूप में ं24;ग2ल्र ़ गल2्र ़ गल्र2द्ध झ् 8गल्र त्र ़़8गल्र 8गल्र 8गल्र त्र 3ग़ 3ल़ 3्र त्र 3;ग ़ ल ़ ्रद्ध 14ण्4 बहुपद का बहुपद से विभाजन ऽ ;7ग2 ़ 14गद्ध झ् ;ग ़ 2द्ध पर विचार कीजिए। हर के साथ ;7ग2 ़ 14गद्ध के गुणनखंडों की जाँच एवं मिलान करने के लिए, पहले इसके गुणनखंड करेंगे। 7ग2 ़ 14ग त्र ;7 × ग × गद्ध ़ ;2 × 7 × गद्ध क्या यह अंश केप्रत्येक पद को हर मेंत्र7 × ग × ;ग ़ 2द्ध त्र 7ग;ग ़ 2द्ध दिए द्विपद से भाग देने2 में कोइर् सहायता7ग ़14 गअब, ;7ग2 ़ 14गद्ध झ् ;ग ़ 2द्ध त्र करेगा?ग ़2 7; ़2द्ध गग त्र ग ़2 त्र 7ग ;गुणनखंड ;ग ़ 2द्ध को काटने परद्ध उदाहरण 15 रू 44;ग4 दृ 5ग3 दृ 24ग2द्ध को 11ग ;ग दृ 8द्ध से भाग दीजिए। हल रू 44;ग4 दृ 5ग3 दृ 24ग2द्धए के गुणनखंड करने पर, हमें प्राप्त होता है: 44;ग4 दृ 5ग3 दृ 24ग2द्ध त्र 2 × 2 × 11 × ग2;ग2 दृ 5ग दृ 24द्ध ;कोष्ठक में से सावर् गुणनखंड ग2 बाहर करने पर द्ध त्र 2 × 2 × 11 × ग2;ग2 दृ 8ग ़ 3ग दृ 24द्ध त्र 2 × 2 × 11 × ग2 ख्ग ;ग दृ 8द्ध ़ 3;ग दृ 8द्ध, त्र 2 × 2 × 11 × ग2 ;ग दृ 8द्ध ;ग ़ 3द्ध अतः 44;ग4 दृ 5ग3 दृ 24ग2द्ध झ् 11ग;ग दृ 8द्ध 2 211 गग ;ग 3द्ध ;ग दृ 8द्ध ××××× ़× त्र 11 ××ग ;ग दृ 8द्ध त्र2 × 2 × ग ;ग ़ 3द्ध त्र 4ग;ग ़ 3द्ध उदाहरण 16 रू ्र;5्र2 दृ 80द्ध को 5्र;्र ़ 4द्ध से भाग दीजिए। हम अंश और हर में से सावर् हल रू भाज्य त्र ्र;5्र2 दृ 80द्ध गुणनखंड 11, ग और ;ग दृ 8द्ध त्र ्रख्;5 × ्र2द्ध दृ ;5 × 16द्ध, को काट देते हैं। त्र ्र × 5 × ;्र2 दृ 16द्ध त्र5्र × ;्र ़ 4द्ध ;्र दृ 4द्ध ख्सावर्समिकां2 दृ इ2 त्र ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध , 5; − 4द्ध ; ्र्र ्रइस प्रकार, ्र;5्र2 दृ 80द्ध झ् 5्र;्र ़ 4द्ध त्र त्र ;्र दृ 4द्ध5; ़4द्ध ्र्र प्रश्नावली 14ण्3 1ण् निम्नलिख्िात विभाजन कीजिए: ;पद्ध 28ग4 झ् 56ग ;पपद्ध दृ36ल3 झ् 9ल2 ;पपपद्ध 66चु2त3 झ् 11ुत2 ;पअद्ध 34ग3ल3्र3 झ् 51गल2्र3 ;अद्ध 12ं8इ8 झ् ;दृ 6ं6इ4द्ध 2ण् दिए हुए बहुपद को दिए हुए एकपदी से भाग दीजिए: ;पद्ध ;5ग2 दृ 6गद्ध झ् 3ग ;पपद्ध ;3ल8 दृ 4ल6 ़ 5ल4द्ध झ् ल4 ;पपपद्ध 8;ग3ल2्र2 ़ ग2ल3्र2 ़ ग2ल2्र3द्ध झ् 4ग2ल2्र2 ;पअद्ध ;ग3 ़ 2ग2 ़ 3गद्ध झ् 2ग ;अद्ध ;च3ु6 दृ च6ु3द्ध झ् च3ु3 3ण् निम्नलिख्िात विभाजन कीजिए: ;पद्ध ;10ग दृ 25द्ध झ् 5 ;पपद्ध ;10ग दृ 25द्ध झ् ;2ग दृ 5द्ध ;पपपद्ध 10ल;6ल ़ 21द्ध झ् 5;2ल ़ 7द्ध ;पअद्ध 9ग2ल2;3्र दृ 24द्ध झ् 27गल;्र दृ 8द्ध ;अद्ध 96ंइब ;3ं दृ 12द्ध ;5इ दृ 30द्ध झ् 144;ं दृ 4द्ध ;इ दृ 6द्ध 4ण् निदेर्शानुसार भाग दीजिए: ;पद्ध 5;2ग ़ 1द्ध ;3ग ़ 5द्ध झ् ;2ग ़ 1द्ध ;पपद्ध 26गल;ग ़ 5द्ध;ल दृ 4द्ध झ् 13ग;ल दृ 4द्ध ;पपपद्ध 52चुत ;च ़ ुद्ध ;ु ़ तद्ध ;त ़ चद्ध झ् 104 चु;ु ़ तद्ध ;त ़ चद्ध ;पअद्ध 20;ल ़ 4द्ध ;ल2 ़ 5ल ़ 3द्ध झ् 5;ल ़ 4द्ध ;अद्ध ग;ग ़ 1द्ध ;ग ़ 2द्ध ;ग ़ 3द्ध झ् ग;ग ़ 1द्ध 5ण् ;पद्ध ;ल2 ़ 7ल ़ 10द्ध झ् ;ल ़ 5द्ध ;पपद्ध ;उ2 दृ 14उ दृ 32द्ध झ् ;उ ़ 2द्ध ;पपपद्ध ;5च2 दृ 25च ़ 20द्ध झ् ;च दृ 1द्ध ;पअद्ध 4ल्र;्र2 ़ 6्र दृ 16द्ध झ् 2ल;्र ़ 8द्ध ;अद्ध 5चु;च2 दृ ु2द्ध झ् 2च;च ़ ुद्ध ;अपद्ध 12गल;9ग2 दृ 16ल2द्ध झ् 4गल;3ग ़ 4लद्ध ;अपपद्ध 39ल3;50ल2 दृ 98द्ध झ् 26ल2;5ल ़ 7द्ध 14ण्5 क्या आप त्राुटि ज्ञात कर सकते हैं? कायर् ;ज्ंेाद्ध 1 किसी पद के गुणांक 1निम्नलिख्िात प्रकार से हल करती है: को प्रायः दशार्या नहींजाता है। परंतु समान3ग ़ ग ़ 5ग त्र72 पदों को जोड़ते समय,अतः 8ग त्र72 हम इसे योग में72 सम्िमलित करते हैं।और इसलिए, ग त्र8 त्र 9 उसने कहाँ त्राुटि की है? सही उत्तर ज्ञात कीजिए। कायर् ;ज्ंेाद्ध 2 अप्पू ने यह किया: एक )णात्मक मानग त्र दृ3 ए 5ग त्र 5 दृ 3 त्र 2 रखते समय, कोष्ठकोंक्या उसकी प्रिया सही है? यदि नहीं, तो इसे सही कीजिए। का प्रयोग करनायाद रखें।कायर् ;ज्ंेाद्ध 3 नम्रता और सलमा ने बीजीय व्यंजकों का गुणा निम्नलिख्िात प्रकारों से किया: नम्रता सलमा याद रख्िाए, जब आप कोष्ठकों मेंबंद किसी व्यंजक को उसके बाहर;ंद्ध 3;ग दृ 4द्ध त्र 3ग दृ 4 3;ग दृ 4द्ध त्र 3ग दृ 12 लिखे अचर ;या चरद्ध से गुणाकरते हैं, तो व्यंजक के प्रत्येक पद;इद्ध ;2गद्ध2 त्र 2ग2 ;2गद्ध2 त्र 4ग2 से उस अचर ;या चरद्ध को गुणाकिया जाता है।;बद्ध ;2ं दृ 3द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र 2ं2 दृ 6 ;2ं दृ 3द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र 2ं2 ़ ं दृ 6 याद रख्िाए, जब आप किसीएकपदी का वगर् करते हैं, तो;कद्ध ;ग ़ 8द्ध2 त्र ग2 ़ 64 ;ग ़ 8द्ध2 संख्यात्मक गुणांक और प्रत्येककोइर् भी सूत्रा गुणनखंड का वगर् किया जाता है। प्रयोग करने सेत्र ग2 ़ 16ग ़ 64 पहले, यह;मद्ध ;ग दृ 5द्ध2 त्र ग2 दृ 25 ;ग दृ 5द्ध2 त्र ग2 दृ 10ग ़ 25 सुनिश्िचत कर लेंकि क्या वह सूत्राक्या नम्रता और सलमा द्वारा किए गए गुणन सही हैं? कारण सहित अपने उत्तर दीजिए। वास्तव में प्रयोग किया जा सकतां ़5 ंकायर् ;ज्ंेाद्ध 4 जोसपफ ने एक विभाजन इस प्रकार किया रू त्ऱ1 है।5 ं ़5उसके मित्रा श्िारीश ने यह विभाजन इस प्रकार किया रू त्रं5 एक बहुपद को एकपदी से ं ़5 ंभाग देते समय, हम अंश के उसके अन्य मित्रा सुमन ने इसे इस प्रकार किया रू त्ऱ155बहुपद के प्रत्येक पद को हर में दिए एकपदी से भाग देते हैं। किसने विभाजन सही किया? किसने विभाजन गलत विध्ि से किया? और क्यों? कुछ मनोरंजन! अतुल सदैव अलग तरीके से सोचता है। वह सुमथ्िा अध्यापिका से पूछता है, फ्यदि आप जो 64 4कुछ कहती हैं वह सत्य है, तो मैं त्रत्र4 के लिए सही उत्तर क्यों प्राप्त कर रहा हूँ?य्16 1 64 16×44 त्रत्रअध्यापिका स्पष्ट करती है, फ्ऐसा इसलिए है कि 64 त्र 16 × 4य है तथा है।16 161 × 1 वस्तुतः हम सावर् गुणनखंड 16 को काटते हंैय 6 को नहीं, जैसा कि आप देख सकते हैं। वास्तव में, 6 न तो 64 का और न ही 16 का गुणनखंड है।य् अध्यापिका आगे कहती है, फ्साथ ही, 664 46664 4 64 त्रए त्र ए इत्यादि भी हैं।य् क्या यह रोचक नहीं है? क्या आप के प्रकार के166 11666 1 16 कुछ अन्य उदाहरण ज्ञात करने में अतुल की सहायता कर सकते हैंघ् प्रश्नावली 14ण्4 निम्नलिख्िात गण्िातीय कथनों में त्राुटि ज्ञात करके उसे सही कीजिए: 1ण् 4;ग दृ 5द्ध त्र 4ग दृ 5 2ण् ग;3ग ़ 2द्ध त्र 3ग2 ़ 2 3ण् 2ग ़ 3ल त्र 5गल 4ण् ग ़ 2ग ़ 3ग त्र 5ग 5ण् 5ल ़ 2ल ़ ल दृ 7ल त्र 0 6ण् 3ग ़ 2ग त्र 5ग2 7ण् ;2गद्ध2 ़ 4;2गद्ध ़ 7 त्र 2ग2 ़ 8ग ़ 7 8ण् ;2गद्ध2 ़ 5ग त्र 4ग ़ 5ग त्र 9ग 9ण् ;3ग ़ 2द्ध2 त्र 3ग2 ़ 6ग ़ 4 10ण् ग त्रदृ 3 प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त होता है। ;ंद्ध ग2 ़ 5ग ़ 4 से ;दृ 3द्ध2 ़ 5 ;दृ 3द्ध ़ 4 त्र 9 ़ 2 ़ 4 त्र 15 प्राप्त होता है। ;इद्ध ग2 दृ 5ग ़ 4 से ;दृ 3द्ध2 दृ 5 ; दृ 3द्ध ़ 4 त्र 9 दृ 15 ़ 4 त्र दृ 2 प्राप्त होता है। ;बद्ध ग2 ़ 5ग से ;दृ 3द्ध2 ़ 5 ;दृ3द्ध त्र दृ 9 दृ 15 त्र दृ 24 प्राप्त होता है। 11ण् ;ल दृ 3द्ध2 त्र ल2 दृ 9 12ण् ;्र ़ 5द्ध2 त्र ्र2 ़ 25 13ण् ;2ं ़ 3इद्ध ;ं दृ इद्ध त्र 2ं2 दृ 3इ2 14ण् ;ं ़ 4द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र ं2 ़ 8 3ग2 15ण् ;ं दृ 4द्ध ;ं दृ 2द्ध त्र ं2 दृ 8 16ण् 2 त्र0 3ग 3ग2 ़13ग 1 31 त्रत्र17ण् त्ऱत्र 112 18ण् 19ण्23ग ़22 4ग ़34ग3ग 4ग ़57ग ़520ण् त्र5 21ण् त्र7ग 4ग 5 हमने क्या चचार् की? नोट

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