बीजीय व्यंजक एवं सवर्समिकाएँ 9ण्1 व्यंजक क्या है? पिछली कक्षाओं में हम बीजीय व्यंजकों ;अथवा केवल व्यंजकोंद्ध के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। ग ़ 3ए 2ल दृ 5ए 3ग2ए 4गल ़ 7 इत्यादि व्यंजकों के उदाहरण हैं। आप और अध्िक व्यंजक बना सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं व्यंजकों का निमार्ण चरों एवं अचरों की सहायता से होता है। व्यंजक 2ल दृ 5 को चर ल एवं अचरों 2 तथा 5 से बनाया गया है। व्यंजक 4गल ़ 7 को चरों ग तथा ल एवं अचरों 4 तथा 7 से बनाया गया है। 5 −7हम जानते हैं कि व्यंजक 2ल दृ 5 में ल का मान कुछ भी हो सकता है। यह 2ए 5ए दृ3ए 0ए 2ए 3 इत्यादि हो सकता है। वास्तव में ल के असंख्य विभ्िान्न मान हो सकते हैं। व्यंजक के चर का मान बदलने पर व्यंजक का मान बदल जाता है। इस प्रकार ल को विभ्िान्न मान देने पर 2ल दृ 5 का मान बदलता जाता है। जब ल त्र 2ए 2ल दृ 5 त्र 2 ;2द्ध दृ 5 त्र दृ 1ए जब ल त्र 0ए 2ल दृ 5 त्र 2 × 0 दृ 5 त्र दृ 5 इत्यादि। ल के कुछ अन्य दिए हुए मानों के लिए व्यंजक 2ल दृ 5 के मान ज्ञात कीजिए। संख्या रेखा और व्यंजक व्यंजक ग ़ 5 की चचार् करते हैं। आइए, मान लेते हैं कि संख्या रेखा पर चर ग की स्िथति ग् है। ग्ए संख्या रेखा पर कहीं भी हो सकता है परंतु यह निश्िचत है कि ग ़ 5 का मान, ग के दाईं तरप़फ 5 इकाइर् की दूरी पर ¯बदु च् से निरूपित किया जाएगा। इसी प्रकार, गदृ 4 का मान ग् के बाईं तरप़फ 4 इकाइर् की दूरी पर होगा। 4ग एवं 4ग ़ 5 की स्िथति के बारे में क्या कहा जा सकता है? 4ग की स्िथति ¯बदु ब् पर होगी। मूल ¯बदु से ब् की दूरी ग् की दूरी से चार गुना होगी। 4ग ़ 5 की स्िथति क्ए ब् के दाईं तरप़फ 5 इकाइर् की दूरी पर होगी। अध्याय9 ऽ एक चर वाले और दो चरों वाले व्यंजकों के पाँच - पाँच उदाहरण दीजिए। ऽ गए ग दृ 4ए 2ग ़ 1ए 3ग दृ 2 को संख्या रेखा पर दशार्इए। 9ण्2 पद, गुणनखंड एवं गुणांक व्यंजक 4ग ़ 5 को लीजिए। यह व्यंजक 4ग एवं 5 दो पदों से बना हुआ है। पदों को जोड़कर व्यंजक बनाया जाता है। पद स्वयं भी गुणनखंडों के गुणनपफल के रूप में बनाए जा सकते हैं। पद 4ग अपने गुणनखंडों 4 एवं ग का गुणनपफल है। पद 5 केवल एक गुणनखंड 5 से बना हुआ है। व्यंजक 7गल दृ 5ग के दो पद 7गल एवं 5ग हैं। पद 7गल गुणनखंडों 7, गव्यंजक ग2ल2 दृ 10ग2ल ़ 5गल2 दृ 20 एवं ल का गुणनपफल है। किसी पद का संख्यात्मक गुणनखंड उसकाके प्रत्येक पद के गुणांक को संख्यात्मक गुणांक ;छनउमतपबंस ब्वमपििबपमदजद्ध या गुणांक कहलाता है।पहचानिए। पद 7गल का गुणांक 7 है और पद दृ 5ग का गुणांक दृ 5 है। 9ण्3 पदी, द्विपद एवं बहुपद जिस व्यंजक में केवल एक पद होता है उसे एकपदी कहते हैं। दो पदों वाला व्यंजक द्विपद कहलाता है। तीन पदों वाले व्यंजक को त्रिापद कहते हैं और इसी प्रकार अन्य। व्यापकतः एक अथवा अध्िक पदों वाला व्यंजक जिसके गुणांक शून्येतर हों और जिसके चरों की घात )णेतर हों, बहुपद कहलाता है। बहुपद के पदों की संख्या एक अथवा एक से अध्िक कुछ भी हो सकती है। एकपद के उदाहरणः 4ग2ए 3गलए दृ7्रए 5गल2ए 10लए दृ 9ए 82उदच इत्यादि। द्विपद के उदाहरण: ं ़ इए 4स ़ 5उए ं ़ 4ए 5 दृ 3गलए ्र2 दृ 4ल2 इत्यादि। त्रिापद के उदाहरण: ं ़ इ ़ बए 2ग ़ 3ल दृ 5ए ग2ल दृ गल2 ़ ल2 इत्यादि। बहुपद के उदाहरण: ं ़ इ ़ ब ़ कए 3गलए 7गल्र दृ 10ए 2ग ़ 3ल ़ 7्र इत्यादि। 1ण् निम्नलिख्िात बहुपदों को एकपद, द्विपद एवं त्रिापद के रूप में वगीर्वृफत कीजिए: दृ ्र ़ 5ए ग ़ ल ़ ्रए ल ़ ्र ़ 100ए ंइ दृ ंबए 17 2ण् बनाइए: ;ंद्ध तीन ऐसे द्विपद जिनमें केवल एक चर ग हो। ;इद्ध तीन ऐसे द्विपद जिनमें ग और ल चर हों। ;बद्ध तीन एकपद जिनमें ग और ल चर हों। ;कद्ध चार अथवा अध्िक पदों वाले 2 बहुपद। 9ण्4 समान एवं असमान पद निम्नलिख्िात व्यंजकों को देख्िाए: 7गए 14गए दृ13गए 5ग2ए 7लए 7गलए दृ9ल2ए दृ9ग2ए दृ5लग 147 इनमें समान पद इस प्रकार है: ;पद्ध 7गए 14गए एवं दृ13ग ;पपद्ध 5ग2 एवं दृ9ग2 ;पपपद्ध 7गल एवं दृ5लग 7ग एवं 7ल समान पद क्यों नहीं हैं? निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के दो समान पद लिख्िाए:7ग एवं 7गल समान पद क्यों नहीं हैं? ;पद्ध 7गल ;पपद्ध 4उद2 ;पपपद्ध 2स 7ग एवं 5ग2 समान पद क्यों नहीं हैं? 9ण्5 बीजीय व्यंजकों का योग एवं व्यवकलन पिछली कक्षाओं में हमने यह भी सीखा है कि बीजीय व्यंजकों को वैफसे जोड़ा और घटाया जाता है, उदाहरणाथर् 7ग2 दृ 4ग ़ 5 एवं 9ग दृ 10ए को जोड़ने के लिए हम इस प्रकार करते हैं: 7ग2 दृ 4ग ़5 ़ 9ग दृ10 7ग2 ़ 5ग दृ5 विचार कीजिए कि हम योगपफल वैफसे ज्ञात करते हैं। जोड़े जाने वाले प्रत्येक व्यंजक को हम विभ्िान्नपंक्ितयों में लिखते हैं। ऐसा करते समय हम समान पदों को एक दूसरे के ऊपर - नीचे लिखते हैं और,जैसा ऊपर दशार्या गया है, हम उन समान पदों को जोड़ते हैं। अतः 5 ़ ;दृ10द्ध त्र 5 दृ10 त्र दृ5 इसी प्रकारए दृ 4ग ़ 9ग त्र ;दृ 4 ़ 9द्धग त्र 5गण् आइए कुछ और उदाहरण हल करते हैं। उदाहरण 1 रू 7गल ़ 5ल्र दृ 3्रगए 4ल्र ़ 9्रग दृ 4ल ए दृ3ग्र ़ 5ग दृ 2गल का योग ज्ञात कीजिए। हल रू समान पदों को एक दूसरे के ऊपर - नीचे रखकर तीन व्यंजकों को विभ्िान्न पंक्ितयों में लिखते हुए, हम प्राप्त करते हैं: 7गल ़ 5ल्र दृ3्रग ़4ल्र ़ 9्रग दृ 4ल ़ दृ2गल दृ3्रग ़ 5ग ;ध्यान दीजिए ग्र और ्रग एक समान हैं द्ध 5गल ़ 9ल्र ़3्रग ़ 5ग दृ 4ल इस प्रकार व्यंजकों का योग 5गल ़ 9ल्र ़ 3्रग ़ 5ग दृ 4ल है। ध्यान दीजिए दूसरे व्यंजक के पद दृ 4ल और तीसरे व्यंजक के पद 5ग को योगपफल में वैसे ही लिखा गया है जैसे वे हैं क्योंकि दूसरे व्यंजकों में उनका कोइर् समान पद नहीं है। उदाहरण 2 रू 7ग2 दृ 4गल ़ 8ल2 ़ 5ग दृ 3ल में से 5ग2 दृ 4ल2 ़ 6ल दृ 3 को घटाइए। हल रू 7ग2 दृ 4गल ़ 8ल2 ़ 5ग दृ3ल 5ग2 दृ4ल2 ़6ल दृ 3 ;दृद्ध ;़द्ध ;दृद्ध ;़द्ध 2ग2 दृ 4गल ़12ल2 ़ 5ग दृ 9ल ़ 3 नोट किसी संख्या का घटाना उसके योज्य प्रतिलोम को जोड़ने के समान है। इस प्रकार दृ 3 को घटाना, ़ 3 को जोड़ने के समान है, इसी प्रकार 6ल को घटाना, दृ 6ल को जोड़ने जैसा है। दृ 4ल2 को घटाना 4ल2 को जोड़ने के समान है और इसी प्रकार अन्य दूसरी पंक्ित के प्रत्येक पद के नीचे तीसरी पंक्ित में लिखे चिह्न से यह जानने में सहायता मिलती है कि कौन सी संिया की जाती हैं। प्रश्नावली 9ण्1 निम्नलिख्िात व्यंजकों में से प्रत्येक के पदों एवं गुणांकों को पहचानिए: ;पपद्ध 1 ़ ग ़ ग2 ;पपपद्ध 4ग2ल2 दृ 4ग2ल2्र2 ़ ्र2 ग ल़− गल ;अपद्ध 0ण्3ं दृ 0ण्6ंइ ़ 0ण्5इ 22 निम्नलिख्िात बहुपदों को एकपदी, द्विपद एवं त्रिापद के रूप में वगीर्कृत कीजिए। कौन - सा बहुपद इन तीन श्रेण्िायों में से किसी में भी नहीं है? ग ़ लए 1000ए ग ़ ग2 ़ ग3 ़ ग4ए 7 ़ ल ़ 5गए 2ल दृ 3ल2ए 2ल दृ 3ल2 ़ 4ल3ए 5ग दृ 4ल ़ 3गलए 4्र दृ 15्र2ए ंइ ़ इब ़ बक ़ कंए चुतए च2ु ़ चु2ए 2च ़ 2ु 3ण् निम्नलिख्िात का योग ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ंइ दृ इबए इब दृ बंए बं दृ ंइ ;पपद्ध ं दृ इ ़ ंइए इ दृ ब ़ इबए ब दृ ं ़ ंब ;पपपद्ध 2च2ु2 दृ 3चु ़ 4ए 5 ़ 7चु दृ 3च2ु2 ;पअद्ध स2 ़ उ2ए उ2 ़ द2ए द2 ़ स2ए 2सउ ़2उद ़ 2दस 4ण् ;ंद्ध 12ं दृ 9ंइ ़ 5इ दृ 3 में से 4ं दृ 7ंइ ़ 3इ ़ 12 को घटाइए। ;इद्ध 5गल दृ 2ल्र दृ 2्रग ़ 10गल्र में से 3गल ़ 5ल्र दृ 7्रग को घटाइए। ;बद्ध 18 दृ 3च दृ 11ु ़ 5चु दृ 2चु2 ़ 5च2ु में से 4च2ु दृ 3चु ़ 5चु2 दृ 8च ़ 7ु दृ 10 को घटाइए। 9ण्6 बीजीय व्यंजकों का गुणन ;पद्ध ¯बदुओं के निम्नलिख्िात प्रतिरूप को देख्िाए: ¯बदुओं के प्रतिरूप ¯बदुओं की वुफल संख्या 4 × 9 5 × 7 ;पपद्ध क्या आप ऐसी और परिस्िथतियों के बारे में सोच सकते हैं जिनमें दो बीजीय व्यंजकों को गुणा करना पड़ता हो? अमीना उठकर कहती है। ‘‘हम आयत के क्षेत्रापफल के बारे में सोच सकते हैं।’’ आयत का क्षेत्रापफल स × इए हैं जिसमें स लंबाइर् है और इ चैड़ाइर् है। यदि आयत की लंबाइर् 5 इकाइर् बढ़ा दी जाए, अथार्त्, ;स ़ 5द्ध कर दी जाए और चैड़ाइर् 3 इकाइर् कम कर दी जाए अथार्त् ;इ दृ 3द्ध कर दी जाए तो आयत का क्षेत्रापफल ;स ़ 5द्ध × ;इ दृ 3द्ध होगा। ;पपपद्ध क्या आप आयतन के बारे में सोच सकते हैं? ;एक आयताकार बक्से का आयतन उसकी लंबाइर्, चैड़ाइर् औरऊँचाइर् के गुणनपफल से प्राप्त होता है।द्ध ;पअद्ध सरिता कहती है कि जब हम वस्तुएँ खरीदते हैं तो हमें गुणा करना पड़ता है। उदाहरणाथर् यदि प्रति दजर्न केलांे का मूल्य च रुपये है और स्वूफल पिकनिक के लिए ्र दजर्न केलों की आवश्यकता है, तो हमें ;च × ्रद्ध रुपयों का भुगतान करना पड़ेगा। मान लीजिए, प्रति दजर्न केलों का मूल्य 2 रुपये कम होता और पिकनिक के लिए 4 दजर्न कम केलों की आवश्यकता होती तो, प्रति दजर्न केलों का मूल्य ;चदृ2द्ध रुपये होता और ;्र दृ 4द्ध दजर्न केलों की आवश्यकता होती। इसलिए, हमें ;च दृ 2द्ध × ;्र दृ 4द्ध रुपयों का भुगतान करना पड़ता है। बीजीय व्यंजकों के रूप में दी हुइर् हैं और हमें उनका गुणनपफल ज्ञात करना है तो इसका अथर् यह हुआ कि हमें यह जानना चाहिए कि यह गुणनपफल वैफसे प्राप्त किया जाए। आइए, इसे क्रमानुसार करते हैं। सबसे पहले हम दो एकपदियों का गुणन करते हैं। 9ण्7 एकपदी को एकपदी से गुणा करना 9ण्7ण्1 दो एकपदियों को गुणा करना हम प्रारंभ करते हैं 4 × ग त्र ग ़ ग ़ ग ़ ग त्र 4ग से जो पहले सीख चुके हैं। इसी प्रकार, 4 × ;3गद्ध त्र3ग ़ 3ग ़ 3ग ़ 3ग त्र 12ग ध्यान दीजिए एकपदियों केअब निम्नलिख्िात गुणनपफलों पर विचार कीजिए: तीनों गुणनपफल 3गलए 15गलए ;पद्ध ग × 3ल त्र ग × 3 × ल त्र 3 × ग × ल त्र 3गल दृ15गल भी एकपदी हैं।;पपद्ध 5ग × 3ल त्र5× ग × 3 × ल त्र 5 × 3 × ग × ल त्र 15गल ;पपपद्ध 5ग × ;दृ3लद्ध त्र5 × ग × ;दृ3द्ध × ल त्र5 × ;दृ3द्ध × ग × ल त्र दृ15गल कुछ और उपयोगी उदाहरण इस प्रकार हैं: नोट कीजिए: 5 × 4 त्र 20 ;पअद्ध 5ग × 4ग2 त्र ;5 × 4द्ध × ;ग × ग2द्ध अथार्त्, गुणनपफल का गुणांक त्र प्रथम एकपदी कात्र 20 × ग3 त्र 20ग3 गुणांक × द्वितीय एकपदी का गुणांक और;अद्ध 5ग × ;दृ 4गल्रद्ध त्र ;5 × दृ 4द्ध × ;ग × गल्रद्ध ग × ग2 त्र ग3 त्र दृ20 × ;ग × ग × ल्रद्ध त्र दृ20ग2ल्र अथार्त्, गुणनपफल का बीजीय गुणनखंड त्र प्रथमध्यान दीजिए कि हमने दोनों एकपदियों के बीजीय भागों के एकपदी का बीजीय गुणनखंड × द्वितीय एकपदीविभ्िान्न चरों की घातों को वैफसे इकट्ठा किया है। ऐसा करने के का बीजीय गुणनखंड।लिए हमने घातों के नियमों का उपयोग किया है। 9ण्7ण्2 तीन अथवा अध्िक एकपदियों को गुणा करना निम्नलिख्िात उदाहरणों पर विचार कीजिए: ;पद्ध 2ग × 5ल × 7्र त्र;2ग × 5लद्ध × 7्र त्र 10गल × 7्र त्र 70गल्र ;पपद्ध 4गल × 5ग2ल2 × 6ग3ल3 त्र;4गल × 5ग2ल2द्ध × 6ग3ल3 त्र 20ग3ल3 × 6ग3ल3 त्र 120ग3ल3 × ग3ल3 त्र 120 ;ग3 × ग3द्ध × ;ल3 × ल3द्ध त्र 120ग6 × ल6 त्र 120ग6ल6 यह स्पष्ट है कि हम सवर्प्रथम पहले दो एकपदियों को गुणा करते हैं और इस प्रकार गुणनपफल के रूप में प्राप्त एकपदी को तीसरे एकपदी से गुणा करते हैं। बहुसंख्य एकपदियों को गुणा करने के लिए इस विध्ि का विस्तार किया जा सकता है। 151 उदाहरण 3 रू एक आयत के, जिसकी लंबाइर् और चैड़ाइर् दी हुइर् है, क्षेत्रापफल की सारणी को पूरा कीजिए: हल रू लंबाइर् चैड़ाइर् क्षेत्रापफल 3ग 5ल 3ग × 5ल त्र 15गल 9ल 4ल2 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् 4ंइ 5इब ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् 2स2उ 3सउ2 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् उदाहरण 4 रू निम्नलिख्िात सारणी में तीन आयताकार बक्सों की लंबाइर्, चैड़ाइर् और ऊँचाइर् दी हुइर् हैं। प्रत्येक का आयतन ज्ञात कीजिए: लंबाइर् चैड़ाइर् ऊँचाइर् ;पद्ध 2ंग 3इल 5ब्र ;पपद्ध उ2द द2च च2उ ;पपपद्ध 2ु 4ु2 8ु3 हल रू आयतन त्र लंबाइर् × चैड़ाइर् × ऊँचाइर् अतः ;पद्ध आयतन त्र;2ंगद्ध × ;3इलद्ध × ;5ब्रद्ध त्र2 × 3 × 5 × ;ंगद्ध × ;इलद्ध × ;ब्रद्ध त्र 30ंइबगल्र ;पपद्ध आयतन त्र उ2द × द2च × च2उ त्र;उ2 × उद्ध × ;द × द2द्ध × ;च × च2द्ध त्र उ3द3च3 ;पपपद्ध आयतन त्र2ु × 4ु2 × 8ु3 त्र2 × 4 × 8 × ु × ु2 × ु3 त्र 64ु6 प्रश्नावली 9ण्2 1ण् निम्नलिख्िात एकपदी युग्मों का गुणनपफल ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 4ए 7च ;पपद्ध दृ 4चए 7च ;पपपद्ध दृ 4चए 7चु ;पअद्ध 4च3ए दृ 3च ;अद्ध 4चए 0 2ण् निम्नलिख्िात एकपदी युग्मों के रूप में लंबाइर् एवं चैड़ाइर् रखने वाले आयतों का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए: ;चए ुद्धय ;10उए 5दद्धय ;20ग2ए 5ल2द्धय ;4गए 3ग2द्धय ;3उदए 4दचद्ध 3ण् गुणनपफलों की सारणी को पूरा कीजिए: प्रथम एकपदी → द्वितीय एकपदी↓ 2ग दृ5ल 3ग2 दृ 4गल 7ग2ल दृ9ग2ल2 2ग 4ग2 ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् दृ5ल ण् ण् ण् ण् ण् ण् दृ15ग2ल ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् 3ग2 ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् दृ 4गल ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् 7ग2ल ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् दृ9ग2ल2 ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् ण् 4ण् ऐसे आयताकार बक्सों का आयतन ज्ञात कीजिए जिनकी लंबाइर्, चैड़ाइर् और ऊँचाइर् क्रमशः निम्नलिख्िात हैं: ;पद्ध 5ंए 3ं2ए 7ं4 ;पपद्ध 2चए 4ुए 8त ;पपपद्ध गलए 2ग2लए 2गल2 ;पअद्ध ंए 2इए 3ब 5ण् निम्नलिख्िात का गुणनपफल ज्ञात कीजिए: ;पद्ध गलए ल्रए ्रग ;पपद्ध ंए दृ ं2ए ं3 ;पपपद्ध 2ए 4लए 8ल2ए 16ल3 ;पअद्ध ंए 2इए 3बए 6ंइब ;अद्ध उए दृ उदए उदच 9ण्8 एकपदी को बहुपद से गुणा करना 9ण्8ण्1 एकपदी को द्विपद से गुणा करना आइए, एकपदी 3ग को द्विपद 5ल ़ 2 से गुणा करते हैं, अथार्त्, 3ग × ;5ल ़ 2द्ध ज्ञात करते हैं। स्मरण कीजिए कि 3ग और ;5ल ़ 2द्ध संख्याओं को निरूपित करते हैं। इसलिए विवरण के नियम का उपयोग करते हुए, 3ग × ;5ल ़ 2द्ध त्र ;3ग × 5लद्ध ़ ;3ग × 2द्ध त्र 15गल ़ 6ग एकपदी औरहम सामान्यतः अपने परिकलनों में वितरण के नियम का उपयोग करते हैं। उदाहरणाथर् द्विपद का7 × 106 त्र 7 × ;100 ़ 6द्ध गुणा द्विपदहोता है। त्र7 × 100 ़ 7 × 6 ;यहाँ हमने वितरण नियम का उपयोग किया है।द्ध त्र 700 ़ 42 त्र 742 7 × 38 त्र 7 × ;40 दृ 2द्ध त्र7 × 40 दृ 7 × 2 ;यहाँ हमने वितरण नियम का उपयोग किया है।द्ध त्र 280 दृ 14 त्र 266 इसी प्रकार, ;दृ3गद्ध × ;दृ5ल ़ 2द्ध त्र ;दृ3गद्ध × ;दृ5लद्ध ़ ;दृ3गद्ध × ;2द्ध त्र 15गल दृ 6ग और 5गल × ;ल2 ़ 3द्ध त्र ;5गल × ल2द्ध ़ ;5गल × 3द्ध त्र 5गल3 ़ 15गलण् द्विपद एवं एकपदी के गुणनपफल के बारे में आपका क्या विचार है? उदाहरणाथर् ;5ल ़ 2द्ध × 3ग त्र घ् हम 7 × 3 त्र 3 × 7य अथवा व्यापक रूप से ं × इ त्र इ × ं के रूप में क्रमविनिमेय नियम का उपयोग कर सकते हैं। इसी प्रकार ;5ल ़ 2द्ध × 3ग त्र 3ग × ;5ल ़ 2द्ध त्र 15गल ़ 6ग है। 153 गुणनपफल ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 2ग ;3ग ़ 5गलद्ध ;पपद्ध ं2 ;2ंइ दृ 5बद्ध 9ण्8ण्2 एकपदी को त्रिापद से गुणा करना 3च × ;4च2 ़ 5च ़ 7द्ध लीजिए। पहले की तरह हम वितरण नियम का उपयोग कर सकते हैं। 3च × ;4च2 ़ 5च ़ 7द्ध त्र ;3च × 4च2द्ध ़ ;3च × 5चद्ध ़ ;3च × 7द्ध त्र12च3 ़ 15च2 ़ 21च त्रिापद के प्रत्येक पद को एकपदी से गुणा कीजिए और गुणनपफल को जोड़ दीजिए। ;4च2 ़ 5च ़ 7द्ध × 3च का विचार कीजिए वितरण नियम के उपयोग से हम एक पद का एक पद के साथ गुणन करने में सक्षम हैं। गुणनपफल ज्ञात कीजिए। उदाहरण 5 रू व्यंजकों को सरल कीजिए और निदेर्शानुसार मान ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ग ;ग दृ 3द्ध ़ 2ए ग त्र 1 के लिए ;पपद्ध 3ल ;2ल दृ 7द्ध दृ 3 ;ल दृ 4द्ध दृ 63ए ल त्र दृ2 के लिए हल रू ;पद्ध ग ;ग दृ 3द्ध ़ 2 त्र ग2 दृ 3ग ़ 2 ग त्र 1 के लिए, ग2 दृ 3ग ़ 2 त्र ;1द्ध2 दृ 3 ;1द्ध ़ 2 त्र1 दृ 3 ़ 2 त्र 3 दृ 3 त्र 0 ;पपद्ध 3ल;2ल दृ 7द्ध दृ 3 ;ल दृ 4द्ध दृ 63 त्र6ल2 दृ 21ल दृ 3ल ़ 12 दृ 63 त्र6ल2 दृ 24ल दृ 51 ल त्र दृ2 के लिए, 6ल2 दृ 24ल दृ 51 त्र 6 ;दृ2द्ध2 दृ 24;दृ2द्ध दृ 51 त्र 6 × 4 ़ 24 × 2 दृ 51 त्र 24 ़ 48 दृ 51 त्र 72 दृ 51 त्र 21 उदाहरण 6 रू जोडि़ए: ;पद्ध 5उ ;3 दृ उद्ध एवं 6उ2 दृ 13उ ;पपद्ध 4ल ;3ल2 ़ 5ल दृ 7द्ध एवं 2 ;ल3 दृ 4ल2 ़ 5द्ध हल रू ;पद्ध प्रथम व्यंजक 5उ ;3 दृ उद्ध त्र ;5उ × 3द्ध दृ ;5उ × उद्ध त्र15उ दृ 5उ2 अब द्वितीय व्यंजक जोड़ने पर 15उ दृ 5उ2 ़ 6उ2 दृ 13उ त्र उ2 ़ 2उ ;पपद्ध प्रथम व्यंजक त्र 4ल ;3ल2 ़ 5ल दृ 7द्ध त्र ;4ल × 3ल2द्ध ़ ;4ल × 5लद्ध ़ ;4ल × ;दृ7द्धद्ध त्र12ल3 ़ 20ल2 दृ 28ल द्वितीय व्यंजक त्र 2 ;ल3 दृ 4ल2 ़ 5द्ध त्र 2ल3 ़ 2 × ;दृ 4ल2द्ध ़ 2 × 5 त्र2ल3 दृ 8ल2 ़ 10 दोनों व्यंजकों को जोड़ने पर 12ल3 ़20ल2 दृ 28ल ़ 2ल3 दृ8ल2 ़ 10 14ल3 ़12ल2 दृ 28ल ़ 10 उदाहरण 7 रू 2चु ;च ़ ुद्ध में से 3चु ;च दृ ुद्ध को घटाइए। हल रू हम प्राप्त करते हैं 3चु ;च दृ ुद्ध त्र 3च2ु दृ 3चु2 और 2चु ;च ़ ुद्ध त्र 2च2ु ़ 2चु2 घटाने पर 2च2ु ़2चु2 3च2ु दृ3चु2 दृ़ दृ च2ु ़5चु2 प्रश्नावली 9ण्3 निम्नलिख्िात युग्मों में प्रत्येक के व्यंजकों का गुणन कीजिए: ;पपद्ध ंइए ं दृ इ ;पपपद्ध ं ़ इए 7ं2इ2 ;पअद्ध ं2 दृ 9ए 4ं 3ण् गुणनपफल ज्ञात कीजिए: ⎛ 2 ⎞ ⎛−9 22 ⎞;पद्ध ;ं2द्ध × ;2ं22द्ध × ;4ं26द्ध ;पपद्ध ⎜ गल⎟ ×⎜ गल ⎟⎝ ⎠⎝ ⎠3 10 ⎛ 10 3 ⎞⎛ 63 ⎞;पपपद्ध ⎜− चु ⎟ ×⎜ चु ⎟ ;पअद्ध ग × ग2 × ग3 × ग4⎝ ⎠⎝⎠35 4ण् ;ंद्ध 3ग ;4ग दृ 5द्ध ़ 3 को सरल कीजिए और ;पद्ध ग त्र 3 एवं ;पपद्ध ग त्र 12 के लिए इसका मान ज्ञात कीजिए। ;इद्ध ं ;ं2 ़ ं ़ 1द्ध ़ 5 को सरल कीजिए और ;पद्ध ं त्र 0ए ;पपद्ध ं त्र 1 एवं ;पपपद्ध ं त्र दृ 1 के लिए इसका मान ज्ञात कीजिए। 5ण् ;ंद्ध च ; च दृ ुद्धए ु ; ु दृ तद्ध एवं त ; त दृ चद्ध को जोडि़ए। ;इद्ध 2ग ;्र दृ ग दृ लद्ध एवं 2ल ;्र दृ ल दृ गद्ध को जोडि़ए। ;बद्ध 4स ; 10द दृ 3उ ़ 2 स द्ध में से 3स ;स दृ 4उ ़ 5दद्ध को घटाइए। ;कद्ध 4ब ;दृ ं ़ इ ़ ब द्ध में से 3ं ;ं ़ इ ़ ब द्ध दृ 2 इ ;ं दृ इ ़ बद्ध को घटाइए। 155 9ण्9 बहुपद को बहुपद से गुणा करना 9ण्9ण्1 द्विपद को द्विपद से गुणा करना आइए, एक द्विपद ;2ं ़ 3इद्ध को दूसरे द्विपद ;3ं ़ 4इद्ध से गुणा करते हैं। जैसा कि हमने पहले किया है, वैसे ही गुणन के वितरण नियम का अनुसरण करते हुए हम इसे भी क्रम से करते हैंय ;3ं ़ 4इद्ध × ;2ं ़ 3इद्ध त्र3ं × ;2ं ़ 3इद्ध ़ 4इ × ;2ं ़ 3इद्ध त्र;3ं × 2ंद्ध ़ ;3ं × 3इद्ध ़ ;4इ × 2ंद्ध ़ ;4इ × 3इद्धध्यान दीजिए एक द्विपद का प्रत्येक पद दूसरे द्विपद के त्र6ं2 ़ 9ंइ ़ 8इं ़ 12इ2 प्रत्येक पद से गुणा होता है। त्र6ं2 ़ 17ंइ ़ 12इ2;क्योंकि इं त्र ंइ है।द्ध जब हम एक पद का एक के साथ गुणन करते हैं, तो हम आशा करते हैं कि 2 × 2 त्र 4 पद उपस्िथत होने चाहिए परंतु इनमें से दो पद समान हैं जिनको एक साथ इकट्ठा कर दिया है और इस प्रकार हमें 3 पद प्राप्त होते हैं। बहुपद को बहुपद से गुणा करते समय हमें समान पदों को ढूँढ़ लेना चाहिए और उन्हें मिला लेना चाहिए। उदाहरण 8 रू गुणा कीजिए: ;पद्ध ;ग दृ 4द्ध एवं ;2ग ़ 3द्ध को ;पपद्ध ;ग दृ लद्ध एवं ;3ग ़ 5लद्ध को हल रू ;पद्ध ;ग दृ 4द्ध × ;2ग ़ 3द्ध त्र ग × ;2ग ़ 3द्ध दृ 4 × ;2ग ़ 3द्ध त्र;ग × 2गद्ध ़ ;ग × 3द्ध दृ ;4 × 2गद्ध दृ ;4 × 3द्ध त्र 2ग2 ़ 3ग दृ 8ग दृ 12 त्र2ग2 दृ 5ग दृ 12 ;समान पदों को जोड़ने परद्ध ;पपद्ध ;ग दृ लद्ध × ;3ग ़ 5लद्ध त्र ग × ;3ग ़ 5लद्ध दृ ल × ;3ग ़ 5लद्ध त्र;ग × 3गद्ध ़ ;ग × 5लद्ध दृ ;ल × 3गद्ध दृ ; ल × 5लद्ध ;समान पदों को जोड़ने परद्धत्र3ग2 ़ 5गल दृ 3लग दृ 5ल2 त्र 3ग2 ़ 2गल दृ 5ल2 उदाहरण 9 रू गुणा कीजिए: ;पद्ध ;ं ़ 7द्ध और ;इ दृ 5द्ध को ;पपद्ध ;ं2 ़ 2इ2द्ध और ;5ं दृ 3इद्ध को हल रू ;पद्ध ;ं ़ 7द्ध × ;इ दृ 5द्ध त्र ं × ;इ दृ 5द्ध ़ 7 × ;इ दृ 5द्ध त्र ंइ दृ 5ं ़ 7इ दृ 35 नोट कीजिए कि इस गुणन में कोइर् भी समान पद नहीं हैं। ;पपद्ध ;ं2 ़ 2इ2द्ध × ;5ं दृ 3इद्ध त्र ं2 ;5ं दृ 3इद्ध ़ 2इ2 × ;5ं दृ 3इद्धत्र 5ं3 दृ 3ं2इ ़ 10ंइ2 दृ 6इ3 9ण्9ण्2 द्विपद को त्रिापद से गुणा करना इस गुणन में हमें त्रिापद के प्रत्येक पद को द्विपद के प्रत्येक पद से गुणा करना पड़ेगा। इस प्रकार हमें 3 × 2 त्र 6 पद प्राप्त होंगे, यदि एक पद को एक पद से गुणा करने पर समान पद बनते हैं, तो प्राप्त पदों की संख्या घटकर पाँच या उससे भी कम हो सकती है। 2;ं़7द्ध ;ं ़ 3ं ़123 × 5द्ध त्र ं × ;ं2 ़ 3ं ़ 5द्ध ़ 7 × ;ं2 ़ 3ं ़ 5द्ध वितरण नियम के उपयोग से1442443द्विपदत्रिापद त्र ं3 ़ 3ं2 ़ 5ं ़ 7ं2 ़ 21ं ़ 35 त्र ं3 ़ ;3ं2 ़ 7ं2द्ध ़ ;5ं ़ 21ंद्ध ़ 35 त्र ं3 ़ 10ं2 ़ 26ं ़ 35 ;अंतिम परिणाम में केवल 4 पद ही क्यों हैंघ्द्ध उदाहरण 10 रू सरल कीजिए: ;ं ़ इद्ध ;2ं दृ 3इ ़ बद्ध दृ ;2ं दृ 3इद्ध ब हल रू हम प्राप्त करते हैं: ;ं ़ इद्ध ;2ं दृ 3इ ़ बद्ध त्र ं ;2ं दृ 3इ ़ बद्ध ़ इ ;2ं दृ 3इ ़ बद्ध त्र2ं2 दृ 3ंइ ़ ंब ़ 2ंइ दृ 3इ2 ़ इब त्र2ं2 दृ ंइ दृ 3इ2 ़ इब ़ ंब ;ध्यान दीजिए दृ3ंइ एवं 2ंइ समान पद हैं।द्ध और ;2ं दृ 3इद्ध ब त्र2ंब दृ 3इब है। इसलिए, ;ं ़ इद्ध ;2ं दृ 3इ ़ बद्ध दृ ;2ं दृ 3इद्ध ब त्र2ं2 दृ ंइ दृ 3इ2 ़ इब ़ ंब दृ ;2ंब दृ 3इबद्ध त्र2ं2 दृ ंइ दृ 3इ2 ़ इब ़ ंब दृ 2ंब ़ 3इब त्र2ं2 दृ ंइ दृ 3इ2 ़ ;इब ़ 3इबद्ध ़ ;ंब दृ 2ंबद्ध त्र2ं2 दृ 3इ2 दृ ंइ ़ 4इब दृ ंब प्रश्नावली 9ण्4 1ण् द्विपदों को गुणा कीजिए: ;पद्ध ;2ग ़ 5द्ध और ;4ग दृ 3द्ध ;पपद्ध;ल दृ 8द्ध और ;3ल दृ 4द्ध ;पपपद्ध ;2ण्5स दृ 0ण्5उद्ध और ;2ण्5स ़ 0ण्5उद्ध ;पअद्ध ;ं ़ 3इद्ध और ;ग ़ 5द्ध ;अद्ध ;2चु ़ 3ु2द्ध और ;3चु दृ 2ु2द्ध ⎛ 32 2 ⎞⎛ 222 ⎞;अपद्ध ⎜ ं ़ 3इ ⎟ आरै 4⎜ ं दृ इ ⎟⎝ ⎠⎝⎠43 2ण् गुणनपफल ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ;5 दृ 2गद्ध ;3 ़ गद्ध ;पपद्ध ;ग ़ 7लद्ध ;7ग दृ लद्ध ;पपपद्ध ;ं2 ़ इद्ध ;ं ़ इ2द्ध ;पअद्ध ;च2 दृ ु2द्ध ;2च ़ ुद्ध 3ण् सरल कीजिए: ;पद्ध ;ग2 दृ 5द्ध ;ग ़ 5द्ध ़ 25 ;पपद्ध ;ं2 ़ 5द्ध ;इ3 ़ 3द्ध ़ 5 ;पपपद्ध ;ज ़ े2द्ध ;ज2 दृ ेद्ध ;पअद्ध ;ं ़ इद्ध ;ब दृ कद्ध ़ ;ं दृ इद्ध ;ब ़ कद्ध ़ 2 ;ंब ़ इकद्ध ;अद्ध ;ग ़ लद्ध;2ग ़ लद्ध ़ ;ग ़ 2लद्ध;ग दृ लद्ध ;अपद्ध ;ग ़ लद्ध;ग2 दृ गल ़ ल2द्ध ;अपपद्ध ;1ण्5ग दृ 4लद्ध;1ण्5ग ़ 4ल ़ 3द्ध दृ 4ण्5ग ़ 12ल ;अपपपद्ध ;ं ़ इ ़ बद्ध;ं ़ इ दृ बद्ध 9ण्10 सवर्समिका क्या है? समिका ;ं ़ 1द्ध ;ं ़2द्ध त्र ं2 ़ 3ं ़ 2 को लीजिए। ं के किसी मान ं त्र 10 के लिए हम इस समिका के दोनों पक्षों का मान ज्ञात करेंगे। ं त्र 10 के लिए बायाँ पक्ष स्भ्ै त्र ;ं ़ 1द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र ;10 ़ 1द्ध ;10 ़ 2द्ध त्र 11 × 12 त्र 132 दायाँ पक्ष त्भ्ै त्र ं2 ़ 3ं ़ 2 त्र 102 ़ 3 × 10 ़ 2 त्र 100 ़ 30 ़ 2 त्र 132 अतः ं त्र 10 के लिए समिका के दोनों पक्षों के मान समान हैं। आइए अब ं त्र दृ5 लेते हैं। स्भ्ै त्र ;ं ़ 1द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र ;दृ5 ़ 1द्ध ;दृ5 ़ 2द्ध त्र ;दृ 4द्ध × ;दृ3द्ध त्र 12 त्भ्ै त्र ं2 ़ 3ं ़ 2 त्र ;दृ5द्ध2 ़ 3 ;दृ5द्ध ़ 2 त्र 25 दृ 15 ़ 2 त्र 10 ़ 2 त्र 12 अतः ं त्र दृ5 के लिए, भी स्भ्ै त्र त्भ्ै है। इस प्रकार, हम प्राप्त करते हैं कि ं के किसी भी मान के लिए, इस समिका का स्भ्ै त्र त्भ्ै है। ऐसी समिका जो चर के सभी मानों के लिए सत्य होती है, सवर्समिका कहलाती है। इस प्रकार ;ं ़ 1द्ध ;ं ़ 2द्ध त्र ं2 ़ 3ं ़ 2 एक सवर्समिका है। एक समीकरण अपने चर के केवल कुछ निश्िचत मानों के लिए ही सत्य होता है, यह चर के सभी मानों के लिए सत्य नहीं होता है। उदाहरणाथर् समीकरण ं2 ़ 3ं ़ 2 त्र 132 की चचार् कीजिए। यह समीकरण ं त्र 10 के लिए सत्य है जैसा कि हम उपयुर्क्त पंक्ितयों में देख चुके हैं। परंतु ं त्र दृ5 अथवा ं त्र 0 इत्यादि के लिए यह सत्य नहीं है। दशार्इए कि ं2 ़ 3ं ़ 2 त्र 132ए ं त्र दृ5 एवं ं त्र 0 के लिए सत्य नहीं है। 9ण्11 मानक सवर्समिकाएँ अब हम ऐसी तीन सवर्समिकाओं के बारे में अध्ययन करेंगे जो बहुत उपयोगी हैं। एक द्विपद को दूसरे द्विपद से गुणा करते हुए इन सवर्समिकाओं को प्राप्त किया जाता है। सवर्प्रथम हम गुणनपफल ;ं ़ इद्ध ;ं ़ इद्ध अथवा ;ं ़ इद्ध2 के बारे में चचार् करते हैं। ;ं ़ इद्ध2 त्र;ं ़ इद्ध ;ं ़ इद्ध त्र ं;ं ़ इद्ध ़ इ ;ं ़ इद्ध त्र ं2 ़ ंइ ़ इं ़ इ2 त्र ं2 ़ 2ंइ ़ इ2;क्योंकि ंइ त्र इंद्ध अतः ;ं ़ इद्ध2 त्र ं2 ़ 2ंइ ़ इ2 ;प्द्ध स्पष्टतः यह एक सवर्समिका है क्योंकि वास्तविक गुणन द्वारा स्भ्ै से त्भ्ै प्राप्त किया गया है। आप सत्यापित कर सकते हैं कि ं तथा इ के किसी भी मान के लिए, सवर्समिका के दोनों पक्षों के मान समान हैं। ऽ इसके पश्चात् हम गुणनपफल ;ं दृ इद्ध ;ं दृ इद्ध अथवा ;ं दृ इद्ध2 के बारे में चचार् करते हैं। ;ं दृ इद्ध2 त्र;ं दृ इद्ध ;ं दृ इद्ध त्र ं ;ं दृ इद्ध दृ इ ;ं दृ इद्ध त्र ं2 दृ ंइ दृ इं ़ इ2 त्र ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 अथवा ;ं दृ इद्ध2 त्र ं2 दृ 2ंइ ़ इ2 ;प्प्द्ध ऽ अंततः ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध पर विचार करते हैं। हमें प्राप्त है: ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध त्र ं ;ं दृ इद्ध ़ इ ;ं दृ इद्ध त्र ं2 दृ ंइ ़ इं दृ इ2 त्र ं2 दृ इ2 ;क्योंकि ंइ त्र इंद्ध अथवा ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध त्र ं2 दृ इ2 ;प्प्प्द्ध सवर्समिका ;प्द्धए ;प्प्द्ध और ;प्प्प्द्ध मानक सवर्समिकाएँ कहलाती हैं। 1ण् सवर्समिका ;प्द्ध में इ के स्थान पर दृ इ रख्िाए। क्या आपको सवर्समिका ;प्प्द्ध प्राप्त होती है? ऽ अब हम एक और अध्िक उपयोगी सवर्समिका का अध्ययन करते हैं। ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग ;ग ़ इद्ध ़ ं ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ इग ़ ंग ़ ंइ अथवा ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ ;प्टद्ध 1ण् ं त्र 2ए इ त्र 3ए ग त्र 5 के लिए सवर्समिका ;प्टद्ध का सत्यापन कीजिए। 2ण् सवर्समिका ;प्टद्ध में ं त्र इ लेने पर, आप क्या प्राप्त करते हैं? क्या यह सवर्समिका ;प्द्ध से संबंध्ित हैघ् 3ण् सवर्समिका ;प्टद्ध में ं त्र दृ ब तथा इ त्र दृ ब लेने पर, आप क्या प्राप्त करते हैं? क्या यहसवर्समिका ;प्प्द्ध से संबंध्ित हैंघ् 4ण् सवर्समिका ;प्टद्ध में इ त्र दृ ं लीजिए। आप क्या पाते हैं? क्या यह सवर्समिका ;प्प्प्द्ध से संबंध्ित हैघ् हम देख सकते हैं कि सवर्समिका ;प्टद्ध अन्य तीनों सवर्समिकाओं का व्यापक रूप है। 9ण्12 सवर्समिकाओं का उपयोग अब हम देखेंगे कि सवर्समिकाओं का उपयोग द्विपद व्यंजकों के गुणन और संख्याओं के गुणन के लिए भी साधरण वैकल्िपक विध्ि प्रदान करता है। उदाहरण 11 रू सवर्समिका ;प्द्ध का उपयोग करते हुए ;पद्ध ;2ग ़ 3लद्ध2 ;पपद्ध 1032 ज्ञात कीजिए। हल रू ;पद्ध ;2ग ़ 3लद्ध2 त्र;2गद्ध2 ़ 2;2गद्ध ;3लद्ध ़ ;3लद्ध2 ख्सवर्समिका ;प्द्ध के उपयोग से, त्र4ग2 ़ 12गल ़ 9ल2 हम ;2ग ़ 3लद्ध2 का मान सीध्े ज्ञात कर सकते हैं: ;2ग ़ 3लद्ध2 त्र;2ग ़ 3लद्ध ;2ग ़ 3लद्ध त्र;2गद्ध ;2गद्ध ़ ;2गद्ध ;3लद्ध ़ ;3लद्ध ;2गद्ध ़ ;3लद्ध ;3लद्ध त्र4ग2़ 6गल ़ 6 लग ़ 9ल2;क्योंकि गल त्र लगद्ध त्र4ग2 ़ 12गल ़ 9ल2 ;क्योंकि गल त्र लगद्ध सवर्समिका ;प्द्ध के उपयोग से हम ;2ग ़ 3लद्ध का वगर् करने की वैकल्िपक विध्ि प्राप्त करते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि उपयुर्क्त सीध्ी विध्ि की तुलना में सवर्समिका विध्ि के चरणों की संख्या कम है? आप इस विध्ि की सरलता तब अध्िक महसूस करेंगे जब आप ;2ग ़ 3लद्ध की तुलना में अध्िक जटिल द्विपद व्यंजकों का वगर् करने का प्रयत्न करेंगे। ;पपद्ध ;103द्ध2 त्र ;100 ़ 3द्ध2 त्र 1002 ़ 2 × 100 × 3 ़ 32 त्र 10000 ़ 600 ़ 9 त्र 10609 हम 103 को 103 से सीध्े भी गुणा करके वांछित उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि 103 का सीध्ी विध्ि से वगर् करने की तुलना में सवर्समिका ;प्द्ध ने हमें सरल विध्ि प्रदान की है? 1013 का वगर् करने का प्रयत्न कीजिए। आप इस स्िथति में भी सीध्े गुणन विध्ि की तुलना में सवर्समिकाओं के उपयोग की विध्ि को अध्िक सरल पाएँगे। उदाहरण 12 रू सवर्समिका ;प्प्द्ध के उपयोग से ;पद्ध ;4च दृ 3ुद्ध2 ;पपद्ध ;4ण्9द्ध2 ज्ञात कीजिए। हल रू ;पद्ध ;4च दृ 3ुद्ध2 त्र;4चद्ध2 दृ 2 ;4चद्ध ;3ुद्ध ़ ;3ुद्ध2 ख्सवर्समिका ;प्प्द्ध के उपयोग से, त्र16च2 दृ 24चु ़ 9ु2 क्या आप सहमत हैं कि ;4च दृ 3ुद्ध2 का वगर् करने के लिए सीध्ी विध्ि की तुलना में सवर्समिकाओं की विध्ि श्यादा उबाने वाली हैघ् ;पपद्ध ;4ण्9द्ध2 त्र ;5ण्0 दृ 0ण्1द्ध2 त्र ;5ण्0द्ध2 दृ 2 ;5ण्0द्ध ;0ण्1द्ध ़ ;0ण्1द्ध2 त्र 25ण्00 दृ 1ण्00 ़ 0ण्01 त्र 24ण्01 क्या 4ण्9 का वगर् करना, सीध्ी गुणन विध्ि की तुलना में सवर्समिका ;प्प्द्ध की सहायता से सरल नहीं है? उदाहरण 13 रू सवर्समिका ;प्प्प्द्ध का उपयोग करते हुए, ⎛ 32 ⎞⎛ 32 ⎞;पद्ध ⎜ उ ़ द⎟⎜ उ − द⎟ ;पपद्ध 9832 दृ 172 ;पपपद्ध 194 × 206 ज्ञात कीजिए।⎝ ⎠⎝ ⎠2323 हल रू ⎛ 32 ⎞⎛ 32 ⎞⎛ 3 ⎞ 2 ⎛ 2 ⎞ 2 इसको सीध्े करने का प्रयास;पद्ध ⎜ उ ़ द⎟⎜ उ − द⎟ त्र ⎜ उ⎟ −⎜ द⎟⎝ 23 ⎠⎝ 23 ⎠⎝ 2 ⎠⎝ 3 ⎠ कीजिए। आप महसूस करेंगे कि हमारी सवर्समिका ;प्प्प्द्ध के उपयोग9 242उ − द की विध्ि कितनी आसान है।त्र 49 ;पपद्ध 9832 दृ 172 त्र ;983 ़ 17द्ध ;983 दृ 17द्ध ख्यहाँ ं त्र 983ए इ त्र17ए ं2 दृ इ2 त्र ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध, इसलिएए 9832 दृ 172 त्र 1000 × 966 त्र 966000 ;पपपद्ध 194 × 206 त्र;200 दृ 6द्ध × ;200 ़ 6द्ध त्र 2002 दृ 62 त्र 40000 दृ 36 त्र 39964 उदाहरण 14 रू निम्नलिख्िात को ज्ञात करने के लिए, ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ सवर्समिका का उपयोग कीजिए। ;पद्ध 501 × 502 ;पपद्ध 95 × 103 हल रू ;पद्ध 501 × 502 त्र;500 ़ 1द्ध × ;500 ़ 2द्ध त्र 5002 ़ ;1 ़ 2द्ध × 500 ़ 1 × 2 त्र 250000 ़ 1500 ़ 2 त्र 251502 ;पपद्ध 95 ×103 त्र;100 दृ 5द्ध × ;100 ़ 3द्ध त्र 1002 ़ ;दृ5 ़ 3द्ध 100 ़ ;दृ5द्ध × 3 त्र 10000 दृ 200 दृ 15 त्र 9785 प्रश्नावली 9ण्5 1ण् निम्नलिख्िात गुणनपफलों में से प्रत्येक को प्राप्त करने के लिए उचित सवर्समिका का उपयोग कीजिए: ;पद्ध ;ग ़ 3द्ध ;ग ़ 3द्ध ;पपद्ध ;2ल ़ 5द्ध ;2ल ़ 5द्ध ;पपपद्ध ;2ं दृ 7द्ध ;2ं दृ 7द्ध 11 ;पअद्ध ;3ं दृ द्ध ;3ं दृ द्ध ;अद्ध ;1ण्1उ दृ 0ण्4द्ध ;1ण्1उ ़ 0ण्4द्ध22 ;अपद्ध ;ं2 ़ इ2द्ध ;दृ ं2 ़ इ2द्ध ;अपपद्ध ;6ग दृ 7द्ध ;6ग ़ 7द्ध ;अपपपद्ध ;दृ ं ़ बद्ध ;दृ ं ़ बद्ध ⎛ ग 3ल⎞⎛ ग 3ल⎞;पगद्ध ⎜़ ⎟⎜ ़ ⎟ ;गद्ध ;7ं दृ 9इद्ध ;7ं दृ 9इद्ध⎝ ⎠⎝ ⎠24 2 4 2ण् निम्नलिख्िात गुणनपफलों को ज्ञात करने के लिए, सवर्समिका ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ का उपयोग कीजिए: ;पद्ध ;ग ़ 3द्ध ;ग ़ 7द्ध ;पपद्ध ;4ग ़ 5द्ध ;4ग ़ 1द्ध ;पपपद्ध ;4ग दृ 5द्ध ;4ग दृ 1द्ध ;पअद्ध ;4ग ़ 5द्ध ;4ग दृ 1द्ध ;अद्ध ;2ग ़ 5लद्ध ;2ग ़ 3लद्ध ;अपद्ध ;2ं2 ़ 9द्ध ;2ं2 ़ 5द्ध ;अपपद्ध ;गल्र दृ 4द्ध ;गल्र दृ 2द्ध 3ण् सवर्समिका का उपयोग करते हए निम्नलिख्िात वगोर्ं को ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ;इ दृ 7द्ध2 ;पपद्ध ;गल ़ 3्रद्ध2 ;पपपद्ध ;6ग2 दृ 5लद्ध2 ⎛ 23 ⎞ 2 ;पअद्ध ⎜ उ ़ द⎟ ;अद्ध ;0ण्4च दृ 0ण्5ुद्ध2 ;अपद्ध ;2गल ़ 5लद्ध2 ⎝⎠32 4ण् सरल कीजिए: ;पद्ध ;ं2 दृ इ2द्ध2 ;पपद्ध ;2ग ़ 5द्ध2 दृ ;2ग दृ 5द्ध2 ;पपपद्ध ;7उ दृ 8दद्ध2 ़ ;7उ ़ 8दद्ध2 ;पअद्ध ;4उ ़ 5दद्ध2 ़ ;5उ ़ 4दद्ध2 ;अद्ध ;2ण्5च दृ 1ण्5ुद्ध2 दृ ;1ण्5च दृ 2ण्5ुद्ध2 ;अपद्ध ;ंइ ़ इबद्ध2 दृ 2ंइ2ब ;अपपद्ध ;उ2 दृ द2उद्ध2 ़ 2उ3द2 161 5ण् दशार्इए कि: ;पद्ध ;3ग ़ 7द्ध2 दृ 84ग त्र ;3ग दृ 7द्ध2 ;पपद्ध ;9च दृ 5ुद्ध2 ़ 180चु त्र ;9च ़ 5ुद्ध2 ⎛ 43 ⎞ 2 16292;पपपद्ध ⎜ उ दृ द⎟ ़ 2उद त्र उ ़ द⎝ 34 ⎠9 16 ;पअद्ध ;4चु ़ 3ुद्ध2 दृ ;4चु दृ 3ुद्ध2 त्र 48चु2 ;अद्ध ;ं दृ इद्ध ;ं ़ इद्ध ़ ;इ दृ बद्ध ;इ ़ बद्ध ़ ;ब दृ ंद्ध ;ब ़ ंद्ध त्र 0 6ण् सवर्समिकाओं के उपयोग से निम्नलिख्िात मान ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 712 ;पपद्ध 992 ;पपपद्ध 1022 ;पअद्ध 9982 ;अद्ध 5ण्22 ;अपद्ध 297 × 303 ;अपपद्ध 78 × 82 ;अपपपद्ध 8ण्92 ;पगद्ध 1ण्05 × 9ण्5 7ण् ं2 दृ इ2 त्र ;ं ़ इद्ध ;ं दृ इद्ध का उपयोग करते हुए, निम्नलिख्िात मान ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 512 दृ 492 ;पपद्ध ;1ण्02द्ध2 दृ ;9ण्8द्ध2 ;पपपद्ध 1532 दृ 1472 ;पअद्ध 12ण्12 दृ 7ण्92 8ण् ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्ध ग ़ ंइ का उपयोग करते हुए निम्नलिख्िात मान ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 103 × 104 ;पपद्ध 5ण्1 × 5ण्2 ;पपपद्ध 103 × 98 ;पअद्ध 9ण्7 × 9ण्8 हमने क्या चचार् की?

>Chapter_9>


Ganit







अध्याय 9


बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ


9.1 व्यंजक क्या है?

पिछली कक्षाओं में हम बीजीय व्यंजकों (अथवा केवल व्यंजकों) के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। x + 3, 2y – 5, 3x2, 4xy + 7त्यादि व्यंजकों के उदाहरण हैं।

आप और अधिक व्यंजक बना सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं व्यंजकों का निर्माण चरों एवं अचरों की सहायता से होता है। व्यंजक 2y – 5 को चर y एवं अचरों 2 तथा 5 से बनाया गया है। व्यंजक 4xy + 7 को चरों x तथा y एवं अचरों 4 तथा 7 से बनाया गया है।

हम जानते हैं कि व्यंजक 2y – 5 में y का मान कुछ भी हो सकता है। यह 2, 5, –3, 0, , इत्यादि हो सकता है। वास्तव में y के असंख्य विभिन्न मान हो सकते हैं। व्यंजक के चर का मान बदलने पर व्यंजक का मान बदल जाता है। इस प्रकार y को विभिन्न मान देने पर 2y – 5 का मान बदलता जाता है। जब y = 2, 2y – 5 = 2 (2) – 5 = – 1, जब y = 0, 2y – 5 = 2 × 0 – 5 = – 5 इत्यादि। y के कुछ अन्य दिए हुए मानों के लिए व्यंजक 2y – 5 के मान ज्ञात कीजिए।

संख्या रेखा और व्यंजक

व्यंजक x + 5 की चर्चा करते हैं। आइए, मान लेते हैं कि संख्या रेखा पर चर x की स्थिति X है।

X, संख्या रेखा पर कहीं भी हो सकता है परंतु यह निश्चित है कि x + 5 का मान, x के दाईं तरफ़ 5 इकाई की दूरी पर बिंदु P से निरूपित किया जाएगा। इसी प्रकार, x 4 का मान X के बाईं तरफ़ 4 इकाई की दूरी पर होगा। 4x एवं 4x + 5 की स्थिति के बारे में क्या कहा जा सकता है?


4x की स्थिति बिंदु C पर होगी। मूल बिंदु से C की दूरी X की दूरी से चार गुना होगी।
4
x + 5 की स्थिति D, C के दाईं तरफ़ 5 इकाई की दूरी पर होगी।


प्रयास कीजिए

एक चर वाले और दो चरों वाले व्यंजकों के पाँच-पाँच उदाहरण दीजिए।

x, x – 4, 2x + 1, 3x – 2 को संख्या रेखा पर दर्शाइए।


9.2 पद, गुणनखंड एवं गुणांक

व्यंजक 4x + 5 को लीजिए। यह व्यंजक 4x एवं 5 दो पदों से बना हुआ है। पदों को जोड़कर व्यंजक बनाया जाता है। पद स्वयं भी गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में बनाए जा सकते हैं। पद 4x अपने गुणनखंडों 4 एवं x का गुणनफल है। पद 5 केवल एक गुणनखंड 5 से बना हुआ है।

व्यंजक 7xy – 5x के दो पद 7xy एवं 5x हैं। पद 7xy गुणनखंडों 7, x एवं y का गुणनफल है। किसी पद का संख्यात्मक गुणनखंड उसका संख्यात्मक गुणांक (Numerical Coefficient) या गुणांक कहलाता है। पद 7xy का गुणांक 7 है और पद – 5x का गुणांक – 5 है।


प्रयास कीजिए

व्यंजक x2y2 – 10x2y + 5xy2 – 20 के प्रत्येक पद के गुणांक को पहचानिए।

9.3 एकपदी, द्विपद एवं बहुपद

जिस व्यंजक में केवल एक पद होता है उसे एकपदी कहते हैं। दो पदों वाला व्यंजक द्विपद कहलाता है। तीन पदों वाले व्यंजक को त्रिपद कहते हैं और इसी प्रकार अन्य। व्यापकत: एक अथवा अधिक पदों वाला व्यंजक जिसके गुणांक शून्येतर हों और जिसके चरों की घात ऋणेतर पूर्णांक हों, बहुपद कहलाता है। बहुपद के पदों की संख्या एक अथवा एक से अधिक कुछ भी हो सकती है।

एकपद के उदाहरण : 4x2, 3xy, –7z, 5xy2, 10y, – 9, 82mnp इत्यादि।

द्विपद के उदाहरण : a + b, 4l + 5m, a + 4, 5 – 3xy, z2 – 4y2 इत्यादि।

त्रिपद के उदाहरण : a + b + c, 2x + 3y – 5, x2yxy2 + y2 इत्यादि।

बहुपद के उदाहरण : a + b + c + d, 3xy, 7xyz – 10, 2x + 3y + 7z इत्यादि।


प्रयास कीजिए

1. निम्नलिखित बहुपदों को एकपद, द्विपद एवं त्रिपद के रूप में वर्गीकृत कीजिए:

 z + 5, x + y + zy + z + 100, ab – ac, 17

2. बनाइए:

(a) तीन एेसे द्विपद जिनमें केवल एक चर हो।

(b) तीन एेसे द्विपद जिनमें x और y चर हों।

(c) तीन एकपद जिनमें x और y चर हों।

(d) चार अथवा अधिक पदों वाले 2 बहुपद।


9.4 समान एवं असमान पद

निम्नलिखित व्यंजकों को देखिए:

7x, 14x, –13x, 5x2, 7y, 7xy, –9y2, –9x2, –5yx

इनमें समान पद इस प्रकार है:

(i) 7x, 14x, एवं –13x (ii) 5x2 एवं –9x2

(iii) 7xy एवं –5yx

7x एवं 7y समान पद क्यों नहीं हैं?

7x एवं 7xy समान पद क्यों नहीं हैं?

7x एवं 5x2 समान पद क्यों नहीं हैं?

प्रयास कीजिए

निम्नलिखित में से प्रत्येक के दो समान पद लिखिए:

(i) 7xy (ii) 4mn2 (iii) 2l


9.5 बीजीय व्यंजकों का योग एवं व्यवकलन

पिछली कक्षाओं में हमने यह भी सीखा है कि बीजीय व्यंजकों को कैसे जोड़ा और घटाया जाता है, उदाहरणार्थ 7x2 – 4x + 5 एवं 9x – 10, को जोड़ने के लिए हम इस प्रकार करते हैं:

7x2 – 4x + 5

+ 9x – 10

__________

7x2 + 5x – 5

विचार कीजिए कि हम योगफ कैसे ज्ञात करते हैं जोड़े जाने वाले प्रत्येक व्यंजक को हम विभिन्न पंक्तियों में लिखते हैं। एेसा करते समय हम समान पदों को एक दूसरे के पर-नीचे लिखते हैं और, जैसा ऊपर दर्शाया गया है, हम उन समान पदों को जोड़ते हैं। अत: 5 + (–10) = 5 –10 = –5 इसी प्रकार, – 4x + 9x = (– 4 + 9)x = 5x. आइए कुछ और उदाहरण हल करते हैं।

उदाहरण 1 : 7xy + 5yz – 3zx, 4yz + 9zx – 4y , –3xz + 5x – 2xy का योग ज्ञात कीजिए।

हल : समान पदों को एक दूसरे के ऊपर-नीचे रखकर तीन व्यंजकों को विभिन्न पंक्तियों में लिखते हुए, हम प्राप्त करते हैं:

7xy + 5yz – 3zx

+ 4yz + 9zx – 4y

+ –2xy – 3zx + 5x (ध्यान दीजिए xz और zx एक समान हैं )

_________________

5xy + 9yz + 3zx + 5x – 4y

इस प्रकार व्यंजकों का योग 5xy + 9yz + 3zx + 5x – 4y है। ध्यान दीजिए दूसरे व्यंजक के पद – 4y और तीसरे व्यंजक के पद 5x को योगफल में वैसे ही लिखा गया है जैसे वे हैं क्योंकि दूसरे व्यंजकों में उनका कोई समान पद नहीं है।

उदाहरण 2 : 7x2 – 4xy + 8y2 + 5x – 3y में से 5x2 – 4y2 + 6y – 3 को घटाइए।

हल :

7x2 – 4xy + 8y2 + 5x – 3y

5x2 – 4y2 + 6y – 3

(–) (+) (–) (+)

2x2 – 4xy + 12y2 + 5x – 9y + 3

नोट किसी संख्या का घटाना उसके योज्य प्रतिलोम को जोड़ने के समान है। इस प्रकार – 3 को घटाना, + 3 को जोड़ने के समान है, इसी प्रकार 6y को घटाना, – 6y को जोड़ने जैसा है। – 4y2 को घटाना 4y2 को जोड़ने के समान है और इसी प्रकार अन्य दूसरी पंक्ति के प्रत्येक पद के नीचे तीसरी पंक्ति में लिखे चिह्न से यह जानने में सहायता मिलती है कि कौन सी संक्रिया की जाती हैं।


प्रश्नावली 9.1

1. निम्नलिखित व्यंजकों में से प्रत्येक के पदों एवं गुणांकों को पहचानिए:

(i) 5xyz2 – 3zy (ii) 1 + x + x2 (iii) 4x2y2 – 4x2y2z2 + z2

(iv) 3 – pq + qrrp (v) (vi) 0.3a – 0.6ab + 0.5b

2. निम्नलिखित बहुपदों को एकपदी, द्विपद एवं त्रिपद के रूप में वर्गीकृत कीजिए। कौन-सा बहुपद इन तीन श्रेणियों में से किसी में भी नहीं है?

x + y, 1000, x + x2 + x3 + x4, 7 + y + 5x, 2y – 3y2, 2y – 3y2 + 4y3, 5x – 4y + 3xy, 4z – 15z2, ab + bc + cd + da, pqr, p2q + pq2, 2p + 2q

3. निम्नलिखित का योग ज्ञात कीजिए:

(i) abbc, bcca, caab (ii) ab + ab, bc + bc, c a + ac

(iii) 2p2q2 – 3pq + 4, 5 + 7pq – 3p2q2 (iv) l2 + m2, m2 + n2, n2 + l2,

2lm + 2mn + 2nl

4. (a) 12a – 9ab + 5b – 3 में से 4a – 7ab + 3b + 12 को घटाइए।

(b) 5xy – 2yz – 2zx + 10xyz में से 3xy + 5yz – 7zx को घटाइए।

(c) 18 – 3p – 11q + 5pq – 2pq2 + 5p2q में से 4p2q – 3pq + 5pq2 – 8p + 7q – 10 को घटाइए।

9.6 बीजीय व्यंजकों का गुणन

(i) बिंदुओं के निम्नलिखित प्रतिरूप को देखिए:


बिंदुओं के प्रतिरूप बिंदुओं की कुल संख्या
 4 × 9
 5 × 7
 m × n
(m + 2) × (n + 3)

 


बिंदुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए हमें पंक्तियों की संख्या के व्यंजक को स्तंभों की संख्या के व्यंजक से गुणा करना है।


यहाँ पंक्तियों की संख्या 2 बढ़ाई गई है, अर्थात् m + 2 और स्तंभों की संख्या बढ़ाई गई है, अर्थात् n + 3

(ii) क्या आप एेसी और परिस्थितियों के बारे में सोच सकते हैं जिनमें दो बीजीय व्यंजकों को गुणा करना पड़ता हो? अमीना उठकर कहती है। ‘‘हम आयत के क्षेत्रफल के बारे में सोच सकते हैं।’’ आयत का क्षेत्रफल l × b,  हैं जिसमें l लंबाई है और b चौड़ाई है। यदि आयत की लंबाई 5 इकाई बढ़ा दी जाए, अर्थात्, (l + 5) कर दी जाए और चौड़ाई 3 इकाई कम कर दी जाए अर्थात्  (b – 3) कर दी जाए तो आयत का क्षेत्रफल (l + 5) ×  (b – 3) होगा।


आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए हमें l × b अथवा (l + 5) × (b – 3) के रूप के बीजीय व्यंजकों को गुणा करना पड़ता है।


(iii) क्या आप आयतन के बारे में सोच सकते हैं? (एक आयताकार बक्से का आयतन उसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई के गुणनफल से प्राप्त होता है।)

(iv) सरिता कहती है कि जब हम वस्तुएँ खरीदते हैं तो हमें गुणा करना पड़ता है। उदाहरणार्थ यदि प्रति दर्जन केलाें का मूल्य p रुपये है और स्कूल पिकनिक के लिए z दर्जन केलों की आवश्यकता है, तो हमें (p × z) रुपयों का भुगतान करना पड़ेगा।

मान लीजिए, प्रति दर्जन केलों का मूल्य 2 रुपये कम होता और पिकनिक के लिए 4 दर्जन कम केलों की आवश्यकता होती तो, प्रति दर्जन केलों का मूल्य (p2) रुपये होता और (z – 4) दर्जन केलों की आवश्यकता होती। इसलिए, हमें (p – 2) × (z – 4) रुपयों का भुगतान करना पड़ता है।


प्रयास कीजिए

क्या आप एेसी और दो परिस्थितियों के बारे में सोच सकते हैं जहाँ हमें बीजीय व्यंजकों को गुणा करना पड़ सकता है?

[नोट : चाल और समय के बारे में सोचिए।

साधारण ब्याज, मूलधन और साधारण ब्याज की दर इत्यादि के बारे में सोचिए।]


उपर्युक्त सभी उदाहरणों में हमने दो अथवा अधिक राशियों का गुणन किया है। यदि राशियाँ बीजीय व्यंजकों के रूप में दी हुई हैं और हमें उनका गुणनफल ज्ञात करना है तो इसका अर्थ यह हुआ कि हमें यह जानना चाहिए कि यह गुणनफल कैसे प्राप्त किया जाए। आइए, इसे क्रमानुसार करते हैं। सबसे पहले हम दो एकपदियों का गुणन करते हैं।

9.7 एकपदी को एकपदी से गुणा करना

9.7.1 दो एकपदियों को गुणा करना

हम प्रारंभ करते हैं

4 × x = x + x + x + x = 4x से जो पहले सीख चुके हैं।

इसी प्रकार, 4 × (3x) = 3x + 3x + 3x + 3x = 12x

ध्यान दीजिए एकपदियों के तीनों गुणनफल 3xy, 15xy, –15xy भी एकपदी हैं।

अब निम्नलिखित गुणनफलों पर विचार कीजिए:

(i) x × 3y = x × 3 × y = 3 × x × y = 3xy

(ii) 5x × 3y = 5 × x × 3 × y = 5 × 3 × x × y = 15xy

(iii) 5x × (–3y) = 5 × x × (–3) × y

= 5 × (–3) × x × y = –15xy

कुछ और उपयोगी उदाहरण इस प्रकार हैं:

(iv) 5x × 4x2 = (5 × 4) × (x × x2)

= 20 × x3 = 20x3

(v) 5x × (– 4xyz) = (5 × – 4) × (x × xyz)

= –20 × (x × x × yz) = –20x2yz

नोट कीजिए: 5 × 4 = 20

अर्थात्, गुणनफल का गुणांक प्रथम एकपदी का गुणांक × द्वितीय एकपदी का गुणांक और x × x2 =x3

अर्थात्, गुणनफल का बीजीय गुणनखंड = प्रथम एकपदी का बीजीय गुणनखंड × द्वितीय एकपदी का बीजीय गुणनखंड।

ध्यान दीजिए कि हमने दोनों एकपदियों के बीजीय भागों के विभिन्न चरों की घातों को कैसे इकट्ठा किया है। एेसा करने के लिए हमने घातों के नियमों का उपयोग किया है।

9.7.2 तीन अथवा अधिक एकपदियों को गुणा करना

निम्नलिखित उदाहरणों पर विचार कीजिए:

(i) 2x × 5y × 7z = (2x × 5y) × 7z = 10xy × 7z = 70xyz

(ii) 4xy × 5x2y2 × 6x3y3 = (4xy × 5x2y2) × 6x3y3 = 20x3y3 × 6x3y3 = 120x3y3 × x3y3

= 120 (x3 × x3) × (y3 × y3) = 120x6 × y6 = 120x6y6

यह स्पष्ट है कि हम सर्वप्रथम पहले दो एकपदियों को गुणा करते हैं और इस प्रकार गुणनफल के रूप में प्राप्त एकपदी को तीसरे एकपदी से गुणा करते हैं। बहुसंख्य एकपदियों को गुणा करने के लिए इस विधि का विस्तार किया जा सकता है।

हम दूसरे तरीके से भी इस गुणनफल को ज्ञात कर सकते हैं: 4xy × 5x2y2 × 6x3 y3

= (4 × 5 × 6) × (x × x2 × x3) ×

(y × y2 × y3) = 120 x6y6


प्रयास कीजिए

4x × 5y × 7ज्ञात कीजिए:

सर्वप्रथम 4x × 5y ज्ञात कीजिए और फिर उसे 7z से गुणा कीजिए,

अथवा सर्वप्रथम 5y × 7z ज्ञात कीजिए और इसे 4x से गुणा कीजिए।

क्या परिणाम एक जैसा है? आप क्या विचार करते हैं?

क्या गुणा करते समय क्रम का महत्त्व है?


उदाहरण 3 : एक आयत के, जिसकी लंबाई और चौड़ाई दी हुई है, क्षेत्रफल की सारणी को
पूरा कीजिए:

हल : 

लंबाई चौड़ाई क्षेत्रफल
3x
9y
4ab
2l2m
5y
 4y2
5bc
3lm2
  3x × 5y = 15xy
.......................
.......................
.......................

उदाहरण 4 : निम्नलिखित सारणी में तीन आयताकार बक्सों की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई दी हुई हैं। प्रत्येक का आयतन ज्ञात कीजिए:

लंबाई चौड़ाई  ऊँचाई
(i)
(ii)
(iii)
2ax
m2n
 2q
 3by
n2p
4q2
 5cz
p2m
 8q3


हल : आयतन = लंबाई × चौड़ाई × ऊँचाई

अत: (i) आयतन = (2ax) × (3by) × (5cz)

= 2 × 3 × 5 × (ax) × (by) × (cz) = 30abcxyz

(ii) आयतन = m2n × n2p × p2m

= (m2 × m) × (n × n2) × (p × p2) = m3n3p3

(iii) आयतन = 2q × 4q2 × 8q3

= 2 × 4 × 8 × q × q2 × q3 = 64q6


प्रश्नावली 9.2

1. निम्नलिखित एकपदी युग्मों का गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) 4, 7p (ii) – 4p, 7p (iii) – 4p, 7pq (iv) 4p3, – 3p

(v) 4p, 0

2. निम्नलिखित एकपदी युग्मों के रूप में लंबाई एवं चौड़ाई रखने वाले आयतों का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:

(p, q); (10m, 5n); (20x2, 5y2); (4x, 3x2); (3mn, 4np)

3. गुणनफलों की सारणी को पूरा कीजिए:

प्रथम एकपदी →
___________
द्वितीय एकपदी↓
2x –5y  3x2   – 4xy  7x2y –9x2y2
2x 4x2 ... ... ... ... ...
–5y ... ... –15x2y ... ... ...
3x2 ... ... ... ... ... ...
– 4xy ... ... ... ... ... ...
7x2y ... ... ... ... ... ...
–9x2y2 ... ... ... ... ... ...


4. एेसे घना आकार बक्सों का आयतन ज्ञात कीजिए जिनकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमश: निम्नलिखित हैं:

(i) 5a, 3a2, 7a4 (ii) 2p, 4q, 8r (iii) xy, 2x2y, 2xy2 (iv) a, 2b, 3c

5. निम्नलिखित का गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) xy, yz, zx (ii) a, – a2, a3 (iii) 2, 4y, 8y2, 16y3

(iv) a, 2b, 3c, 6abc (v) m, – mn, mnp

9.8 एकपदी को बहुपद से गुणा करना


9.8.1 एकपदी को द्विपद से गुणा करना

आइए, एकपदी 3x को द्विपद 5y + 2 से गुणा करते हैं, अर्थात्, 3x × (5y + 2) ज्ञात करते हैं।

स्मरण कीजिए कि 3x और (5y + 2) संख्याओं को निरूपित करते हैं। इसलिए विवरण के नियम का उपयोग करते हुए, 3x × (5y + 2) = (3x × 5y) + (3x × 2) = 15xy + 6x

हम सामान्यत: पने परिकलनों में वितरण के नियम का उपयोग रते हैं। उदाहरणार्थ

7 × 106 = 7 × (100 + 6)

= 7 × 100 + 7 × 6 (यहाँ हमने वितरण नियम का उपयोग किया है।)

= 700 + 42 = 742

7 × 38 = 7 × (40 – 2)

= 7 × 40 – 7 × 2 (यहाँ हमने वितरण नियम का उपयोग किया है।)

= 280 – 14 = 266


इसी प्रकार, (–3x) × (–5y + 2) = (–3x) × (–5y) + (–3x) × (2) = 15xy – 6x

और 5xy × (y2 + 3) = (5xy × y2) + (5xy × 3) = 5xy3 + 15xy.

द्विपद एवं एकपदी के गुणनफल के बारे में आपका क्या विचार है? उदाहरणार्थ (5y + 2) × 3x = ?

हम 7 × 3 = 3 × 7; अथवा व्यापक रूप से a × b = b × a के रूप में क्रमविनिमेय नियम का उपयोग कर सकते हैं।

इसी प्रकार (5y + 2) × 3x = 3x × (5y + 2) = 15xy + 6x है।

प्रयास कीजिए

गुणनफल ज्ञात कीजिए: (i) 2x (3x + 5xy) (ii) a2 (2ab – 5c)


9.8.2 एकपदी को त्रिपद से गुणा करना

3p × (4p2 + 5p + 7) लीजिए। पहले की तरह हम वितरण नियम का उपयोग कर सकते हैं।

3p × (4p2 + 5p + 7) = (3p × 4p2) + (3p × 5p) + (3p × 7)

= 12p3 + 15p2 + 21p

त्रिपद के प्रत्येक पद को एकपदी से गुणा कीजिए और गुणनफल को जोड़ दीजिए।

प्रयास कीजिए

विचार कीजि वितरण नियम के उपयोग से हम एक पद का एक पद के साथ गुणन करने में सक्षम हैं।

प्रयास कीजिए

(4p2 + 5p + 7) × 3p का गुणनफल ज्ञात कीजिए।


उदाहरण 5 : व्यंजकों को सरल कीजिए और निर्देशानुसार मान ज्ञात कीजिए:

(i) x (x – 3) + 2, x = 1 के लिए (ii) 3y (2y – 7) – 3 (y – 4) – 63, y = –2 के लिए

हल :

(i) x (x – 3) + 2 = x2 – 3x + 2

x = 1 के लिए, x2 – 3x + 2 = (1)2 – 3 (1) + 2

= 1 – 3 + 2 = 3 – 3 = 0

(ii) 3y(2y – 7) – 3 (y – 4) – 63 = 6y2 – 21y – 3y + 12 – 63

= 6y2 – 24y – 51

y = –2 के लिए, 6y2 – 24y – 51 = 6 (–2)2 – 24(–2) – 51

= 6 × 4 + 24 × 2 – 51

= 24 + 48 – 51 = 72 – 51 = 21

उदाहरण 6 : जोड़िए:

(i) 5m (3 – m) एवं 6m2 – 13m (ii) 4y (3y2 + 5y – 7) एवं 2 (y3 – 4y2 + 5)

हल :

(i) प्रथम व्यंजक 5m (3 m) = (5m × 3) – (5m × m) = 15m – 5m2

अब द्वितीय व्यंजक जोड़ने पर 15m – 5m2 + 6m2 – 13m = m2 + 2m

(ii) प्रथम व्यंजक = 4y (3y2 + 5y – 7) = (4y × 3y2) + (4y × 5y) + (4y × (–7))

= 12y3 + 20y2 – 28y

द्वितीय व्यंजक = 2 (y3 – 4y2 + 5) = 2y3 + 2 × (– 4y2) + 2 × 5

= 2y3 – 8y2 + 10

दोनों व्यंजकों को जोड़ने पर

12y3 + 20y2 – 28y

+ 2y3 – 8y2 + 10

________________

14y3 + 12y2 – 28y + 10

उदाहरण 7 : 2pq (p + q) में से 3pq (p q) को घटाइए।

हल : हम प्राप्त करते हैं 3pq (pq) = 3p2q – 3pq2 और

2pq (p + q) = 2p2q + 2pq2

घटाने पर

 2p2q + 2pq2

3p2q – 3pq2

   +

__________

p2q + 5pq2


प्रश्नावली 9.3

1. निम्नलिखित युग्मों में प्रत्येक के व्यंजकों का गुणन कीजिए:

(i) 4p, q + r (ii) ab, ab (iii) a + b, 7a2b2 (iv) a2 – 9, 4a

(v) pq + qr + rp, 0

2. सारणी पूरा कीजिए :

प्रथम व्यंजक द्वितीय व्यंजक गुणनफल
(i)
(ii)
(iii)
(iv)
(v)
a
  x + y – 5
p
 4p2q2
a + b + c
b + c + d
 5xy
6p2 – 7p + 5
p2 – q2
abc
  
 


 

  

3. गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) (a2) × (2a22) × (4a26) (ii) d1

(iii) (iv) x × x2 × x3 × x4

4. (a) 3x (4x – 5) + 3 को सरल कीजिए और (i) x = 3 एवं (ii) x = के लिए इसका मान ज्ञात कीजिए।

(b) a (a2 + a + 1) + 5 को सरल कीजिए और (i) a = 0, (ii) a = 1 एवं (iii) a = – 1

के लिए इसका मान ज्ञात कीजिए।

5. (a) p ( pq), q ( qr) एवं r ( rp) को जोड़िए।

(b) 2x (zxy) एवं 2y (zyx) को जोड़िए।

(c) 4l ( 10n – 3m + 2 l ) में से 3l (l – 4m + 5n) को घटाइए।

(d) 4c ( a + b + c ) में से 3a (a + b + c ) – 2 b (ab + c) को घटाइए।

9.9 बहुपद को बहुपद से गुणा करना

9.9.1 द्विपद को द्विपद से गुणा करना

आइए, एक द्विपद (2a + 3b) को दूसरे द्विपद (3a + 4b) से गुणा करते हैं। जैसा कि हमने पहले किया है, वैसे ही गुणन के वितरण नियम का अनुसरण करते हुए हम इसे भी क्रम से करते हैं;

(3a + 4b) × (2a + 3b) = 3a × (2a + 3b) + 4b × (2a + 3b)

d2= (3a × 2a) + (3a × 3b) + (4b × 2a) + (4b × 3b)

= 6a2 + 9ab + 8ba + 12b2

= 6a2 + 17ab + 12b2 (क्योंकि ba = ab है)

जब हम एक द्विपद का एक द्विपद के साथ गुणन करते हैं, तो हम आशा करते हैं कि

2 × 2 = 4 पद उपस्थित होने चाहिए परंतु इनमें से दो पद समान हैं जिनको एक साथ इकट्ठा कर दिया है और इस प्रकार हमें 3 पद प्राप्त होते हैं।

बहुपद को बहुपद से गुणा करते समय हमें समान पदों को ढूँढ़ लेना चाहिए और उन्हें मिला लेना चाहिए।

उदाहरण 8 : गुणा कीजिए:

(i) (x – 4) एवं (2x + 3) को (ii) (xy) एवं (3x + 5y) को

हल :

(i) (x – 4) × (2x + 3) = x × (2x + 3) – 4 × (2x + 3)

= (x × 2x) + (x × 3) – (4 × 2x) – (4 × 3) = 2x2 + 3x – 8x – 12

= 2x2 – 5x – 12 (समान पदों को जोड़ने पर)

(ii) (xy) × (3x + 5y) = x × (3x + 5y) – y × (3x + 5y)

= (x × 3x) + (x × 5y) – (y × 3x) – ( y × 5y)

= 3x2 + 5xy – 3yx – 5y2 = 3x2 + 2xy – 5y2

उदाहरण 9 : गुणा कीजिए:

(i) (a + 7) और (b – 5) को (ii) (a2 + 2b2) और (5a – 3b) को

हल :

(i) (a + 7) × (b – 5) = a × (b – 5) + 7 × (b – 5)

(समान पदों को जोड़ने पर)

= ab – 5a + 7b – 35

नोट कीजिए कि इस गुणन में कोई भी समान पद नहीं हैं।

(ii) (a2 + 2b2) × (5a – 3b) = a2 (5a – 3b) + 2b2 × (5a – 3b)

= 5a3 – 3a2b + 10ab2 – 6b3


9.9.2 द्विपद को त्रिपद से गुणा करना

इस गुणन में हमें त्रिपद के प्रत्येक पद को द्विपद के प्रत्येक पद से गुणा करना पड़ेगा। इस प्रकार हमें 3 × 2 = 6 पद प्राप्त होंगे, यदि एक पद को एक पद से गुणा करने पर समान पद बनते हैं, तो प्राप्त पदों की संख्या घटकर पाँच या उससे भी कम हो सकती है।

× = a × (a2 + 3a + 5) + 7 × (a2 + 3a + 5) वितरण नियम के उपयोग से

= a3 + 3a2 + 5a + 7a2 + 21a + 35

= a3 + (3a2 + 7a2) + (5a + 21a) + 35

= a3 + 10a2 + 26a + 35 (अंतिम परिणाम में केवल 4 पद ही क्यों हैं?)

उदाहरण 10 : सरल कीजिए: (a + b) (2a – 3b + c) – (2a – 3b) c

हल : हम प्राप्त करते हैं:

(a + b) (2a – 3b + c) = a (2a – 3b + c) + b (2a – 3b + c)

= 2a2 – 3ab + ac + 2ab – 3b2 + bc

= 2a2ab – 3b2 + bc + ac

(ध्यान दीजिए –3ab एवं 2ab समान पद हैं।)

और (2a – 3b) c = 2ac – 3bc है।

इसलिए, (a + b) (2a – 3b + c) – (2a – 3b) c = 2a2ab – 3b2 + bc + ac – (2ac – 3bc)

= 2a2ab – 3b2 + bc + ac – 2ac + 3bc

= 2a2ab – 3b2 + (bc + 3bc) + (ac – 2ac)

= 2a2 – 3b2ab + 4bcac


प्रश्नावली 9.4

1. द्विपदों को गुणा कीजिए:

(i) (2x + 5) और (4x – 3) (ii) (y – 8) और (3y – 4)

(iii) (2.5l – 0.5m) और (2.5l + 0.5m) (iv) (a + 3b) और (x + 5)

(v) (2pq + 3q2) और (3pq – 2q2)

(vi) d3

2. गुणनफल ज्ञात कीजिए:

(i) (5 – 2x) (3 + x) (ii) (x + 7y) (7xy)

(iii) (a2 + b) (a + b2) (iv) (p2q2) (2p + q)

3. सरल कीजिए:

(i) (x2 – 5) (x + 5) + 25 (ii) (a2 + 5) (b3 + 3) + 5

(iii) (t + s2) (t2s)

(iv) (a + b) (cd) + (ab) (c + d) + 2 (ac + bd)

(v) (x + y)(2x + y) + (x + 2y)(xy) (vi) (x + y)(x2xy + y2)

(vii) (1.5x – 4y)(1.5x + 4y + 3) – 4.5x + 12y

(viii) (a + b + c)(a + bc)

9.10 सर्वसमिका क्या है?

समिका (a + 1) (a +2) = a2 + 3a + 2 को लीजिए। a के किसी मान a = 10 के लिए हम इस समिका के दोनों पक्षों का मान ज्ञात करेंगे।

a = 10 के लिए बायाँ पक्ष LHS = (a + 1) (a + 2) = (10 + 1) (10 + 2) = 11 × 12 = 132

दायाँ पक्ष RHS = a2 + 3a + 2 = 102 + 3 × 10 + 2 = 100 + 30 + 2 = 132

अत: a = 10 के लिए समिका के दोनों पक्षों के मान समान हैं।

आइए अब a = –5 लेते हैं।

LHS = (a + 1) (a + 2) = (–5 + 1) (–5 + 2) = (– 4) × (–3) = 12

RHS = a2 + 3a + 2 = (–5)2 + 3 (–5) + 2

= 25 – 15 + 2 = 10 + 2 = 12

अत: a = –5 के लिए, भी LHS = RHS है।

इस प्रकार, हम प्राप्त करते हैं कि a के किसी भी मान के लिए, इस समिका का LHS = RHS है। एेसी समिका जो चर के सभी मानों के लिए सत्य होती है, सर्वसमिका कहलाती है। इस प्रकार (a + 1) (a + 2) = a2 + 3a + 2 एक सर्वसमिका है।

एक समीकरण अपने चर के केवल कुछ निश्चित मानों के लिए ही सत्य होता है, यह चर के सभी मानों के लिए सत्य नहीं होता है। उदाहरणार्थ समीकरण a2 + 3a + 2 = 132 की चर्चा कीजिए। यह समीकरण a = 10 के लिए सत्य है जैसा कि हम उपर्युक्त पंक्तियों में देख चुके हैं। परंतु a = –5 थवा a = 0 इत्यादि के लिए यह सत्य नहीं है।

दर्शाइए कि a2 + 3a + 2 = 132, a = –5 एवं a = 0 के लिए सत्य नहीं है।

9.11 मानक सर्वसमिकाएँ

अब हम एेसी तीन सर्वसमिकाओं के बारे में अध्ययन करेंगे जो बहुत उपयोगी हैं। एक द्विपद को दूसरे द्विपद से गुणा करते हुए इन सर्वसमिकाओं को प्राप्त किया जाता है।

सर्वप्रथम हम गुणनफल (a + b) (a + b) अथवा (a + b)2 के बारे में चर्चा करते हैं।

(a + b)2 = (a + b) (a + b)

= a(a + b) + b (a + b)

= a2 + ab + ba + b2

= a2 + 2ab + b2 (क्योंकि ab = ba)

अत:

 (a + b)2 = a2 + 2ab + b2 (I)


स्पष्टत: यह एक सर्वसमिका है क्योंकि वास्तविक गुणन द्वारा LHS से RHS प्राप्त किया गया है। आप सत्यापित कर सकते हैं कि a तथा b के किसी भी मान के लिए, सर्वसमिका के दोनों पक्षों के मान समान हैं।

इसके पश्चात् हम गुणनफल (ab) (ab) अथवा (ab)2 के बारे में चर्चा करते हैं।

(ab)2 = (ab) (ab) = a (ab) – b (ab)

= a2abba + b2 = a2 – 2ab + b2

अथवा

(a – b)2 = a2 – 2ab + b2 (II)


अंतत: (a + b) (ab) पर विचार करते हैं।

हमें प्राप्त है: (a + b) (ab) = a (ab) + b (ab)

= a2ab + bab2 = a2b2 (क्योंकि ab = ba)

अथवा

(a + b) (a – b) = a2 – b2 (III)


सर्वसमिका (I), (II) और (III) मानक सर्वसमिकाएँहलाती हैं।

प्रयास कीजिए

1. सर्वसमिका (I) में b के स्थान पर – b रखिए। क्या आपको सर्वसमिका (II) प्राप्तहोती है?


अब हम एक और अधिक उपयोगी सर्वसमिका का अध्ययन करते हैं।

(x + a) (x + b) = x (x + b) + a (x + b)

= x2 + bx + ax + ab


अथवा

(x + a) (x + b) = x2 + (bx + ab (IV)

प्रयास कीजिए

1. a = 2, b = 3, x = 5 के लिए सर्वसमिका (IV) का सत्यापन कीजिए।

2. सर्वसमिका (IV) में a = b लेने पर, आप क्या प्राप्त करते हैं? क्या यह सर्वसमिका (I) से संबंधित है?

3. सर्वसमिका (IV) में a = – c तथा b = – c लेने पर, आप क्या प्राप्त करते हैं? क्या यह सर्वसमिका(II) से संबंधित हैं?

4. सर्वसमिका (IV) में b = – लीजिए। आप क्या पाते हैं? क्या यह सर्वसमिका (III) से संबंधित है?


हम देख सकते हैं कि सर्वसमिका (IV) अन्य तीनों सर्वसमिकाओं का व्यापक रूप है।

9.12 सर्वसमिकाओं का उपयोग

अब हम देखेंगे कि सर्वसमिकाओं का उपयोग द्विपद व्यंजकों के गुणन और संख्याओं के गुणन के लिए भी साधारण वैकल्पिक विधि प्रदान करता है।

उदाहरण 11 : सर्वसमिका (I) का उपयोग करते हुए (i) (2x + 3y)2 (ii) 1032

ज्ञात कीजिए।

हल :

(i) (2x + 3y)2 = (2x)2 + 2(2x) (3y) + (3y)2 [सर्वसमिका (I) के उपयोग से]

= 4x2 + 12xy + 9y2

हम (2x + 3y)2 का मान सीधे ज्ञात कर सकते हैं:

(2x + 3y)2 = (2x + 3y) (2x + 3y)

= (2x) (2x) + (2x) (3y) + (3y) (2x) + (3y) (3y)

= 4x2 + 6xy + 6 yx + 9y2 (क्योंकि xy = yx)

= 4x2 + 12xy + 9y2 (क्योंकि xy = yx)

सर्वसमिका (I) के उपयोग से हम (2x + 3y) का वर्ग करने की वैकल्पिक विधि प्राप्त करते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि उपर्युक्त सीधी विधि की तुलना में सर्वसमिका विधि के चरणों की संख्या कम है? आप इस विधि की सरलता तब अधिक महसूस करेंगे जब आप (2x + 3y) की तुलना में अधिक जटिल द्विपद व्यंजकों का वर्ग करने का प्रयत्न करेंगे।

(ii) (103)2 = (100 + 3)2

= 1002 + 2 × 100 × 3 + 32

= 10000 + 600 + 9 = 10609

हम 103 को 103 से सीधे भी गुणा करके वांछित उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि 103 का सीधी विधि से वर्ग करने की तुलना में सर्वसमिका (I) ने हमें सरल विधि प्रदान की है? 1013 का वर्ग करने का प्रयत्न कीजिए। आप इस स्थिति में भी सीधे गुणन विधि की तुलना में सर्वसमिकाओं के उपयोग की विधि को अधिक सरल पाएँगे।

उदाहरण 12 : सर्वसमिका (II) के उपयोग से (i) (4p – 3q)2 (ii) (4.9)2 ज्ञात कीजिए।

हल :

(i) (4p – 3q)2 = (4p)2 – 2 (4p) (3q) + (3q)2 [सर्वसमिका (II) के उपयोग से]

= 16p2 – 24pq + 9q2

क्या आप सहमत हैं कि (4p – 3q)2 का वर्ग करने के लिए सीधी विधि की तुलना में सर्वसमिकाओं की विधि ज़्यादा उबाने वाली है?

(ii) (4.9)2 = (5.0 – 0.1)2 = (5.0)2 – 2 (5.0) (0.1) + (0.1)2

= 25.00 – 1.00 + 0.01 = 24.01

क्या 4.9 का वर्ग करना, सीधी गुणन विधि की तुलना में सर्वसमिका (II) की सहायता से सरल नहीं है?

उदाहरण 13 : सर्वसमिका (III) का उपयोग करते हुए,

(i)d4 (ii) 9832 – 172 (iii) 194 × 206 ज्ञात कीजिए।

हल :

(i)d5

=

(ii) 9832 – 172 = (983 + 17) (983 – 17)


[यहाँ a = 983, b = 17, a2b2 = (a + b) (ab)]

इसलिए, 9832 – 172 = 1000 × 966 = 966000d6

(iii) 194 × 206 = (200 – 6) × (200 + 6) = 2002 – 62

= 40000 – 36 = 39964

उदाहरण 14 : निम्नलिखित को ज्ञात करने के लिए, (x + a) (x + b) = x2 + (a + b) x + ab सर्वसमिका का उपयोग कीजिए।

(i) 501 × 502 (ii) 95 × 103

हल :

(i) 501 × 502 = (500 + 1) × (500 + 2) = 5002 + (1 + 2) × 500 + 1 × 2

= 250000 + 1500 + 2 = 251502

(ii) 95 × 103 = (100 – 5) × (100 + 3) = 1002 + (–5 + 3) 100 + (–5) × 3

= 10000 – 200 – 15 = 9785


प्रश्नावली 9.5

1. निम्नलिखित गुणनफलों में से प्रत्येक को प्राप्त करने के लिए उचित सर्वसमिका का उपयोग कीजिए:

(i) (x + 3) (x + 3) (ii) (2y + 5) (2y + 5) (iii) (2a – 7) (2a – 7)

(iv) (3a) (3a) (v) (1.1m – 0.4) (1.1m + 0.4)

(vi) (a2 + b2) (– a2 + b2) (vii) (6x – 7) (6x + 7) (viii) (– a + c) (– a + c)

(ix)d7  (x) (7a – 9b) (7a – 9b)

2. निम्नलिखित गुणनफलों को ज्ञात करने के लिए, सर्वसमिका (x + a) (x + b) = x2 +
(a + b) x + ab का उपयोग कीजिए:

(i) (x + 3) (x + 7) (ii) (4x + 5) (4x + 1)

(iii) (4x – 5) (4x – 1) (iv) (4x + 5) (4x – 1)

(v) (2x + 5y) (2x + 3y) (vi) (2a2 + 9) (2a2 + 5)

(vii) (xyz – 4) (xyz – 2)

3. सर्वसमिका का उपयोग करते हए निम्नलिखित वर्गों को ज्ञात कीजिए:

(i) (b – 7)2 (ii) (xy + 3z)2 (iii) (6x2 – 5y)2

(iv) d8(v) (0.4p – 0.5q)2 (vi) (2xy + 5y)2

4. सरल कीजिए:

(i) (a2b2)2 (ii) (2x + 5)2 – (2x – 5)2

(iii) (7m – 8n)2 + (7m + 8n)2 (iv) (4m + 5n)2 + (5m + 4n)2

(v) (2.5p – 1.5q)2 – (1.5p – 2.5q)2

(vi) (ab + bc)2 – 2ab2c (vii) (m2n2m)2 + 2m3n2

5. दर्शाइए कि:

(i) (3x + 7)2 – 84x = (3x – 7)2 (ii) (9p – 5q)2 + 180pq = (9p + 5q)2

(iii) + 2mn =

(iv) (4pq + 3q)2 – (4pq – 3q)2 = 48pq2

(v) (ab) (a + b) + (bc) (b + c) + (ca) (c + a) = 0

6. सर्वसमिकाओं के उपयोग से निम्नलिखित मान ज्ञात कीजिए:

(i) 712 (ii) 992 (iii) 1022 (iv) 9982

(v) 5.22 (vi) 297 × 303 (vii) 78 × 82 (viii) 8.92

(ix) 10.5 × 9.5

7. a2b2 = (a + b) (ab) का उपयोग करते हुए, निम्नलिखित मान ज्ञात कीजिए:

(i) 512 – 492 (ii) (1.02)2 – (0.98)2 (iii) 1532 – 1472

(iv) 12.12 – 7.92

8. (x + a) (x + b) = x2 + (a + b) x + ab का उपयोग करते हुए निम्नलिखित मान
ज्ञात कीजिए:

(i) 103 × 104 (ii) 5.1 × 5.2 (iii) 103 × 98 (iv) 9.7 × 9.8

हमने क्या चर्चा की?

1. चरों एवं अचरों की सहायता से व्यंजक बनते हैं।

2. व्यंजक बनाने के लिए पदों को जोड़ा जाता है। स्वयं पदों का निर्माण गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में होता है।

3. व्यंजक जिनमें एक, दो तथा तीन पद होते हैं क्रमश: एकपदी, द्विपदी और त्रिपदी कहलाते हैं। सामान्यत: एक अथवा अधिक पदों वाला व्यंजक जिसमें पदों के गुणांक शून्येतर पूर्णांक हैं और चरों की घात ऋणेतर है, बहुपद कहलाता है।

4. समान चरों से समान पद बनते हैं, और इन चरों की घात भी समान होती है। समान पदों के गुणांक समान होने आवश्यक नहीं है।

5. बहुपदों को जोड़ने (अथवा घटाने) के लिए सबसे पहले समान पदों को ढूँढ़िए और उन्हें जोड़ (अथवा घटा) दीजिए, उसके पश्चात् असमान पदों को उपयोग में लीजिए।

6. बहुत सी परिस्थितियों में हमें बीजीय व्यंजकों को गुणा करने की आवश्यकता होती है। उदाहरणार्थ आयत का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए, जिसकी भुजाएँ बीजीय व्यंजकों के रूप में दी हुई हैं।

7. एकपदी को एकपदी से गुणा करने पर हमेशा एकपदी प्राप्त होता है।

8. बहुपद को एकपदी से गुणा करने के लिए बहुपद का प्रत्येक पद एकपदी से गुणा किया जाता है।

9. बहुपद का द्विपद (अथवा त्रिपद) से गुणन करने के लिए हम एक पद को एक-एक पद से गुणा करते हैं, अर्थात् बहुपद का प्रत्येक पद द्विपद (अथवा त्रिपद) के प्रत्येक पद से गुणा किया जाता है। ध्यान दीजिए इस प्रकार के गुणन में, हमें गुणनफल में समान पद प्राप्त हो सकते हैं और उन्हें मिलाना पड़ सकता है।

10. सर्वसमिका एक एेसी समिका है जो चर के सभी मानों के लिए सत्य होती है, जबकि समीकरण चरों के कुछ निश्चित मानों के लिए सत्य होता है। समीकरण सर्वसमिका नहीं है।

11. निम्नलिखित मानक सर्वसमिकाएँ हैं:

(a + b)2 = a2 + 2ab + b2 (I)

(a – b)2 = a2 – 2ab + b2 (II)

(a + b) (a – b) = a2 – b2 (III)

12. (x + a) (x + b) = x2 + (a + bx + ab (IV) एक अन्य उपयोगी सर्वसमिका है।

13. उपर्युक्त चार सर्वसमिकाएँ बीजीय व्यंजकों का गुणनफल ज्ञात करने में एवं वर्ग करने में सहायक हैं। ये सर्वसमिकाएँ हमें संख्याओं का गुणनफल ज्ञात करने के लिए सरल वैकल्पिक विधियाँ प्रदान करती हैं।


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