अध्याय चतुभुर्जों को समझना 3 3ण्1 भूमिका आप जानते हैं कि कागश, समतल का एक प्रतिरूप है। जब आप कागश से पेंसिल को हटाए बिना ¯बदुओं को आपस में जोड़ते हैं ;अकेले ¯बदुओं को छोड़कर आवृफति के किसी भी भाग को अनुरेख्िात किए बिनाद्ध तो आप एक समतलीय वक्र प्राप्त करते हंै। पिछली कक्षाओं में अलग - अलग प्रकार के देखे गए वक्रों को स्मरण करने का प्रयास कीजिए। निम्न आवृफतियों का सुमेलन कीजिए: ;ध्यान रख्िाए! एक आवृफति का एक से अध्िक आवृफतियों से सुमेलन हो सकता है।द्ध आवृफति नमूना ;1द्ध ;ंद्ध सरल बंद वक्र है। ;2द्ध ;इद्ध बंद वक्र जो सरल नहीं है। ;3द्ध ;बद्ध सरल वक्र जो बंद नहीं है। ;4द्ध ;कद्ध सरल वक्र नहीं है। अपने मित्रों से इस मिलान की तुलना कीजिए, क्या वे सहमत हैं? 3ण्2 बहुभुज केवल रेखाखंडों से बना सरल बंद वक्र बहुभुज कहलाता है। वक्र जो बहुभुज हैं वक्र जो बहुभुज नहीं हैं वुफछ और बहुभुजों के उदाहरण देने का प्रयास कीजिए तथा वुफछ और ऐसे उदाहरण दीजिए जो बहुभुज न हों। एक बहुभुज की एक कच्ची ;त्वनहीद्ध आवृफति खींचिए और उसकी भुजाओं और शीषो± की पहचान कीजिए। 3ण्2ण्1 बहुभुजों का वगीर्करण हम बहुभुजों का वगीर्करण उनकी भुजाओं ;या शीषो±द्ध के अनुसार करते हैं। भुजाओं या शीषो± की संख्या वगीर्करण आवृफति नमूना 3 त्रिाभुज 4 चतुभुर्ज 5 पंचभुज 6 षड्भुज 7 सप्तभुज 8 अष्टभुज 9 नवभुज 10 दसभुज ड ड ड द द.भुज 3ण्2ण्2 विकणर् किसी बहुभुज का विकणर् उसके किन्हीं दो शीषो± ;आसन्न शीषो± को छोड़करद्ध को जोड़ने से प्राप्त रेखाखंड होता है। ;आवृफति 3.1द्ध आवृफति 3ण्1 क्या आप ऊपर दी गइर् आवृफतियों में प्रत्येक विकणर् का नाम दे सकते हैं? ;आवृफति 3ण्1द्ध क्या च्फ एक विकणर् है? स्छ के बारे में आप क्या कह सकते हैंघ् एक बंद वक्र में अभ्यंतर और बहिभार्ग का क्या अथर् होता है यह आप भलीभाँति जानते हंै ;आवृफति 3ण्2द्ध। अभ्यंतर आवृफति 3ण्2 बहिभार्ग अभ्यंतर की एक परिसीमा होती है। क्या बहिभार्ग की परिसीमा होती है? अपने दोस्तों के साथ चचार् कीजिए। 3ण्2ण्3 उत्तल और अवतल बहुभुज यहाँ पर वुफछ उत्तल ;बवदअमगद्ध बहुभुज और वुफछ अवतल ;बवबंअमद्ध बहुभुज दिए गए हंैः;आवृफति 3.3द्ध आवृफति 3ण्3 क्या आप बता सकते हंै कि इस प्रकार के बहुभुज एक दूसरे से अलग क्यों हैं? जो बहुभुजउत्तल होते हैं उनके विकणो± का कोइर् भी भाग बहिभार्ग में नहीं होता है। क्या यह अवतल बहुभुजोंके लिए भी सत्य होता है? दी गइर् आवृफतियों का अध्ययन कीजिए। तदुपरांत अपने शब्दों में उत्तल बहुभुज तथा अवतल बहुभुज समझाने का प्रयास कीजिए। प्रत्येक प्रकार की दो आवृफतियाँ बनाइए। इस कक्षा में हम केवल उत्तल बहुभुजों के बारे में अध्ययन करेंगे। 3ण्2ण्4 सम तथा विषम बहुभुज ;त्महनसंत ंदक प्ततमहनसंत च्वसलहवदेद्ध एक सम बहुभुज, समभुज तथा समकोण्िाक होता है। उदाहरणाथर्, एक वगर् में भुजाएँ तथा कोण बराबर माप के होते हैं। इसलिए यह एक सम बहुभुज है। एक आयत समकोण्िाक तो होता है परंतु समभुज नहीं होता है। क्या एक आयत एक सम बहुभुज है? क्या एक समबाहु त्रिाभुज एक सम बहुभुज है? क्यों? सम बहुभुज ;त्महनसंत विषम बहुभुज ;प्ततमहनसंत चवसलहवदेद्ध चवसलहवदेद्ध ख्संकेत: या का उपयोग बराबर लंबाइर् वाले रेखाखंडों को दशार्ता है, पिछली कक्षाओं में, क्या आप किसी ऐसे चतुभुर्ज के बारे में पढ़ा है जो समभुज तो हो परंतु समकोण्िाक न हो? पिछली कक्षाओं में देखे गए चतुभुर्जों की आवृफतियों का स्मरण कीजिए जैसे आयत, वगर्, सम चतुभुर्ज इत्यादि। क्या कोइर् ऐसा त्रिाभुज है जो समभुज तो हो परंतु समकोण्िाक न हो? 3ण्2ण्5 कोण - योग गुणध्मर् क्या आपको एक त्रिाभुज के कोण - योग वाला गुणध्मर् याद है? एक त्रिाभुज के तीनों कोणों की मापों का योग 180° होता है। हमने इस तथ्य को समझाने के लिए जिस विध्ि का उपयोग किया उसे स्मरण कीजिए। अब हम इन अवधरणाओं को एक चतुभुर्ज के लिए प्रयोग करेंगे। 1ण् यहाँ पर वुफछ आवृफतियाँ दी गइर् हैं: ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ;अद्ध ;अपद्ध ;अपपद्ध ;अपपपद्ध प्रत्येक का वगीर्करण निम्नलिख्िात आधर पर कीजिए: ;ंद्ध साधरण वक्र ;इद्ध साधरण बंद वक्र ;बद्ध बहुभुज ;कद्ध उत्तल बहुभुज ;मद्ध अवतल बहुभुज 2ण् निम्नलिख्िात प्रत्येक में कितने विकणर् हैं? ;ंद्ध एक उत्तल चतुभुर्ज ;इद्ध एक समषड्भुज ;बद्ध एक त्रिाभुज 3ण् उत्तल चतुभुर्ज के कोणों की मापों का योगपफल क्या है? यदि चतुभुर्ज, उत्तल न हो तो क्यायह गुण लागू होगा? ;एक चतुभुर्ज बनाइए जो उत्तल न हो और प्रयास कीजिए।द्ध 4ण् तालिका की जाँच कीजिए: ;प्रत्येक आवृफति को त्रिाभुजों में बाँटिए और कोणों का योगपफल ज्ञात कीजिएद्ध आवृफति भुजा 3 4 5 6 कोणों का योगपफल 180ह् 2 × 180° त्र ;4 दृ 2द्ध × 180° 3 × 180° त्र ;5 दृ 2द्ध × 180° 4 × 180° त्र ;6 दृ 2द्ध × 180° एक बहुभुज के कोणों के योग के बारे में आप क्या कह सकते हैं जिसकी भुजाओं की संख्या निम्नलिख्िात हो? ;ंद्ध 7 ;इद्ध8 ;बद्ध10 ;कद्ध द 5ण् सम बहुभुज क्या है? एक सम बहुभुज का नाम बताइए जिसमें ;पद्ध 3 भुजाएँ ;पपद्ध 4 भुजाएँ ;पपपद्ध 6 भुजाएँ हों। 6ण् निम्नलिख्िात आवृफतियों में ग ;कोण की मापद्ध ज्ञात कीजिए: ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध 3ण्3 एक बहुभुज के बाह्य कोणों की मापों का योग कइर् अवसरों पर बाह्य कोणों की जानकारी अंतः कोणों और भुजाओं की प्रवृफति पर प्रकाश डालती है। एक सम षड्भुज लीजिए ;आवृफति 3ण्10द्ध। ;पद्ध बाह्य कोणों गए लए ्रए चए ु तथा त की मापों का योग क्या है? ;पपद्ध क्या ग त्र ल त्र ्र त्र च त्र ु त्र त हैघ् क्योंघ् ;पपपद्ध प्रत्येक की माप क्या हैघ् ;पद्ध बाह्य कोण ;पपद्ध अंतः कोण ;पअद्ध इस ियाकलाप को निम्नलिख्िात के लिए दोहराएँ ;पद्ध एक सम अष्टभुज ;पपद्ध एक सम 20 भुज आवृफति 3ण्10 उदाहरण 2 रू एक सम बहुभुज की भुजाओं की संख्या ज्ञात कीजिए जिसके प्रत्येक बाह्य कोण की माप 45° है। हल रू सभी बाह्य कोणों की वुफल माप त्र 360° प्रत्येक बाह्य कोण की माप त्र 45° 360 इसलिए, बाह्य कोणों की संख्या त्र त्र 845अतः बहुभुज की 8 भुजाएँ हैं। प्रश्नावली 3ण्2 1ण् निम्नलिख्िात आवृफतियों में ग का मान ज्ञात कीजिए: ;ंद्ध ;इद्ध 2ण् एक सम बहुभुज के प्रत्येक बाह्य कोण की माप ज्ञात कीजिए जिसकी ;पद्ध 9 भुजाएँ ;पपद्ध 15 भुजाएँ हों। 3ण् एक सम बहुभुज की कितनी भुजाएँ हांेगी यदि एक बाह्य कोण की माप 24° होघ् 4ण् एक सम बहुभुज की भुजाओं की संख्या ज्ञात कीजिए यदि इसका प्रत्येक अंतःकोण 165° का होघ् 5ण् ;ंद्ध क्या ऐसा सम बहुभुज संभव है जिसके प्रत्येक बाह्य कोण की माप 22° होघ् ;इद्ध क्या यह किसी सम बहुभुज का अंतःकोण हो सकता है? क्यों? 6ण् ;ंद्ध किसी सम बहुभुज में कम से कम कितने अंश का अंतःकोण संभव है? क्यों? ;इद्ध किसी सम बहुभुज में अध्िक से अध्िक कितने अंश का बाह्य कोण संभव है? 3ण्4 चतुभुर्जों के प्रकार एक चतुभुर्ज की भुजाओं व कोणों की प्रवृफति के आधर पर इसे विशेष नाम दिए जाते हैं। 3ण्4ण्1 समलंब समलंब एक ऐसा चतुभुर्ज होता है जिसमें भुजाओं का एक युग्म समांतर होता है। ये समलंब हैं ये समलंब नहीं हैं उपरोक्त आवृफतियों का अध्ययन कीजिए और अपने मित्रों के साथ चचार् कीजिए कि क्यों इनमें से वुफछ समलंब हैं और वुफछ समलंब नहीं हैं। ;संकेत: तीर का निशान समांतर रेखाओं को दशार्ता है।द्ध 3ण्4ण्2 पतंग पतंग विश्िाष्ट प्रकार का एक चतुभुर्ज है। प्रत्येक आवृफति में एक जैसे चिÉ बराबर भुजाओं को दशार्ते हैं। उदाहरणाथर् ।ठ त्र ।क् और ठब् त्र ब्क् ये पतंग हैं ये पतंग नहीं हैं इन आवृफतियों का अध्ययन कीजिए और यह बताने का प्रयास कीजिए कि पतंग क्या है। निरीक्षण कीजिए कि: ;पद्ध एक पतंग में 4 भुजाएँ होती हैं ;यह एक चतुभुर्ज हैद्ध। ;पपद्ध इसमें अलग - अलग आसन्न भुजाओं के दो युग्म होते हैं जिनकी लंबाइर् बराबर होती है। 3ण्4ण्3 समांतर चतुभुर्ज समांतर चतुभुर्ज एक चतुभुर्ज ही है। जैसा कि नाम संकेत करता है इसका संबंध् समांतर रेखाओं से है। ।ठ क्ब् ।ठ ब्क् ।क् ठब् स्ड व्छ फच् ैत् ।ठ म्क् स्व् डछ फै च्त् ठब् थ्म् ये समांतर चतुभुर्ज हंै ये समांतर चतुभुर्ज नहीं हैं इन आवृफतियों का अध्ययन कीजिए और अपने शब्दों में बताने का प्रयास कीजिए कि समांतर चतुभुर्ज क्या है। अपने निष्कषर् अपने मित्रों के साथ बाँटिए। ।ठ और क्ब् ए इसकी सम्मुख भुजाएँ हैं। ।क् तथा ठब् सम्मुख भुजाओं का दूसरा युग्म बनाते हैं। ∠। और ∠ब् सम्मुख कोणों का एक युग्म है और इसी प्रकार ∠ठ तथा ∠क् सम्मुख कोणों का एक दूसरा युग्म है। ।ठ और ठब् समांतर चतुभुर्ज की आसन्न भुजाएँ हैं। अथार्त् जहाँ पर एक भुजा समाप्त होती है वहीं से दूसरी भुजा प्रारंभ होती है। क्या ठब् और ब्क् भी आसन्न भुजाएँ हैं? दो और आसन्न भुजाओं के युग्मों को ढूँढने का प्रयास कीजिए। ∠। और ∠ठ समांतर चतुभुर्ज के आसन्न कोण हैं। दोनों ही कोण उभयनिष्ठ भुजा के अंत ¯बदुओं पर बने हंै। ∠ठ तथा ∠ब् भी आसन्न कोण हैं। समांतर चतुभुर्ज के आसन्न कोणों के दूसरे युग्मों की पहचान कीजिए। 30° दृ 60° दृ 90° कोणों वाले दो समान सेट - स्क्वेयर लीजिए। अब इन्हें आपस में इस प्रकार मिलाकर रख्िाए जिससे एक समांतर चतुभुर्ज बन जाए ;आवृफति 3ण्20द्ध। क्या यह ऊपर बताए गए गुण की पुष्िट करने में आपकी सहायता करता है? आप तवर्फ - वितवर्फ के द्वारा इस अवधरणा को प्रभावी बना सकते हैं। एक समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् पर विचार कीजिए आवृफति 3ण्21 ;आवृफति 3.21द्ध। एक विकणर्, ।ब् खींचिए। हम देखते हंै कि ∠1 त्र ∠2 और ∠3 त्र ∠4 ;क्योंघ्द्ध क्योंकि त्रिाभुज ।ठब् और ।क्ब् में ∠1 त्र ∠2ए ∠3 त्र ∠4 और ।ब् उभयनिष्ठ है इसलिए, ।ै। सवा±गसमता कसौटी द्वारा Δ ।ठब् ≅ Δ ब्क्। ;यहाँ ।ै। कसौटी वैफसे प्रयोग हुइर्घ्द्ध अतः ।ठ त्र क्ब् और ठब् त्र ।क्ण् उदाहरण 3 रू समांतर चतुभुर्ज च्फत्ै का परिमाप ज्ञात कीजिए ;आवृफति 3.22द्ध हल रू समांतर चतुभुर्ज में, सम्मुख भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हंै। इसलिए, च्फ त्र ैत् त्र 12 बउ और फत् त्र च्ै त्र 7 बउ अतः परिमाप त्र च्फ ़ फत् ़ त्ै ़ ैच् त्र 12 बउ ़ 7 बउ ़ 12 बउ ़ 7 बउ त्र 38 बउ 3ण्4ण्5 समांतर चतुभुर्ज के कोण हमने समांतर चतुभुर्ज की सम्मुख भुजाओं से संबंध्ित एक गुण का अध्ययन आवृफति 3ण्22 किया। हम कोणों के बारे में क्या कह सकते हैं? क्या यह कोण । तथा कोण ब् की मापों के बारे में आपको वुफछ बताता है? कोण ठ तथा क् की मापों के लिए जाँच कीजिए। अपने निष्कषर् की चचार् कीजिए। गुण रू समांतर चतुभुर्ज के सम्मुख कोण बराबर माप के होते हैं। 30° दृ 60° दृ 90° कोणों वाले दो समान सेट - स्क्वेयर लेकर पहले की तरह ही एक समांतर चतुभुर्जबनाइए। क्या प्राप्त आवृफति ऊपर बताए गए गुण की पुष्िट करने में आपकी सहायता करती है? आप इस अवधरणा की तवर्फ - वितवर्फ के द्वारा पुष्िट कर सकते हैं। यदि ।ब् और ठक् समांतर चतुभुर्ज के विकणर् हांे ;आवृफति 3ण्24द्ध तो आप देखेंगे कि ∠1 त्र∠2 और ∠3 त्र ∠4;क्योंघ्द्ध Δ ।ठब् तथा Δ ।क्ब् का अलग - अलग अध्ययन करने पर आप देखेंगे कि ;आवृफति 3ण्25द्ध ।ै। सवा±गसम कसौटी के द्वारा Δ ।ठब् ≅Δ ब्क्। ;वैफसेघ्द्ध आवृफति 3ण्24 आवृफति 3ण्25 यह दशार्ता है कि ∠ठ और ∠क् समान माप के हैं। इस प्रकार आप प्राप्त करते हैं उ∠। त्र उ∠ब् उदाहरण 4 रू आवृफति 3ण्26 में ठम्ैज् एक समांतर चतुभुर्ज है। गए ल तथा ्र के मान ज्ञात कीजिए। हल रू ¯बदु ैए ¯बदु ठ के विपरीत है। अतः ग त्र 100° ;सम्मुख कोण गुणद्ध ल त्र 100° ;∠ग के संगत कोण की मापद्ध ्र त्र 80° ;क्योंकि ∠ल और ∠्र रैख्िाक युग्म बनाते हैंद्ध अब हम अपना ध्यान एक समांतर चतुभुर्ज के आसन्न कोणों पर वेंफदि्रत करते हैं। समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् में;आवृफति3ण्27द्ध ∠। और ∠क् संपूरक कोण हैं, क्योंकि क्ब् ।ठ और क्। ए एक तियर्क रेखा है। अतः दोनांे कोण अंतः सम्मुख कोण हैं। आवृफति 3ण्27∠। और ∠ठ भी संपूरक कोण हैं। क्या आप बता सकते हैं ‘क्यांे’? ।क् ठब् और ठ। एक तियर्क रेखा है जो ∠। तथा ∠ठ को अंतः सम्मुख कोण बनाती है। आवृफति से दो और संपूरक कोणों के युग्मों की पहचान कीजिए। गुण: समांतर चतुभुर्ज के आसन्न कोण संपूरक होते हंै। उदाहरण 5 रू समांतर चतुभुर्ज त्प्छळ में ; आवृफति 3ण्28द्ध यदि उ∠त् त्र 70° हो तो दूसरे सभी कोण ज्ञात कीजिए। हल रू दिया है उ∠त् त्र 70° तब उ∠छ त्र 70° क्योंकि ∠त् तथा ∠प् संपूरक कोण हैं आवृफति 3ण्28 उ∠प् त्र 180° दृ 70° त्र 110° और उ∠ळ त्र 110° क्योंकि ∠ळए ∠प् का सम्मुख कोण है। साधरणतया समांतर चतुभुर्ज के विकणर् बराबर माप के नहीं होते। ;क्या आपने अपने पूवर् ियाकलाप में इसे जाँचा?द्ध यद्यपि समांतर चतुभुर्ज के विकणो± में एक रोचक गुण होता है। गुण: समांतर चतुभुर्ज के विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करते हंै। ;अवश्य ही उनके प्रतिच्छेदी ¯बदु पर।द्ध इस गुण का तवर्फ - वितवर्फ तथा पुष्िट करना मुश्िकल नहीं है। आवृफति 3.30 से, ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध् द्वारा बड़ी आसानी से देखा जा सकता है कि Δ।व्ठ ≅Δब्व्क् ;यहाँ पर ।ै। प्रतिबंध् का वैफसे प्रयोग हुआ घ्द्ध आवृफति 3ण्30अतः ।व् त्र ब्व् तथा ठव् त्र क्व् उदाहरण 6 रू आवृफति 3ण्31 में, भ्म्स्च् एक समांतर चतुभुर्ज है। दिया है ;लंबाइर् बउ में हैद्धः व्म् त्र 4 और भ्स्ए च्म् से 5 अध्िक है। व्भ् ज्ञात कीजिए। हल रू यदि व्म् त्र 4 तब व्च् त्र 4 ;क्योंघ्द्ध अतः च्म् त्र8ए ;क्योंघ्द्ध इसलिए भ्स् त्र 8 ़ 5 त्र 13 आवृफति 3ण्31 1अतः व्भ् त्र ×13 त्र 6ण्5 बउ2 प्रश्नावली 3ण्3 1ण् ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है। प्रत्येक कथन को परिभाषा या प्रयोग किए गए गुण द्वारा पूरा कीजिए: ;पद्ध ।क् त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण् ;पपद्ध ∠क्ब्ठ त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण् ;पपपद्ध व्ब् त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण् ;पअद्ध उ ∠क्।ठ ़ उ ∠ब्क्। त्र ण्ण्ण्ण्ण्ण् 2ण् निम्न समांतर चतुभुर्जों में अज्ञात गए लए ्र के मानों को ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ;अद्ध 3ण् क्या एक चतुभुर्ज ।ठब्क् समांतर चतुभुर्ज हो सकता है यदि ;पद्ध ∠क् ़ ∠ठ त्र 180°घ् ;पपद्ध ।ठ त्र क्ब् त्र 8 बउए।क् त्र 4 बउ और ठब् त्र 4ण्4 बउघ् ;पपपद्ध ∠। त्र 70° और ∠ब् त्र 65°घ् 4ण् एक चतुभुर्ज की कच्ची ;त्वनहीद्ध आवृफति खींचिए जो समांतर चतुभुर्ज न हो परंतु जिसके दो सम्मुख कोणों की माप बराबर हो। 5ण् किसी समांतर चतुभुर्ज के दो आसन्न कोणों का अनुपात 3: 2 है। समांतर चतुभुर्ज के सभी कोणों की माप ज्ञात कीजिए। 6ण् किसी समांतर चतुभुर्ज के दो आसन्न कोणों की माप बराबर है। समांतर चतुभुर्ज के सभी कोणों की माप ज्ञात कीजिए। 7ण् संलग्न आवृफति भ्व्च्म् एक समांतर चतुभुर्ज है। गए ल और ्र कोणों की माप ज्ञात कीजिए। ज्ञात करने में प्रयोग किए गए गुणों को बताइए। 8ण् निम्न आवृफतियाँ ळन्छै और त्न्छै समांतर चतुभुर्ज हैं। ग तथा ल ज्ञात कीजिए ;लंबाइर् बउ में हैद्धः 10ण् बताइए वैफसे यह आवृफति एक समलंब है। इसकी कौन सी दो भुजाएँ समांतर हैंघ् ;आवृफति 3.32द्ध 11ण् आवृफति 3.33 में उ∠ब् ज्ञात कीजिए यदि ।ठ क्ब् है। ध्यान दीजिए कि सम चतुभुर्ज की सभी भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हंै परंतु पतंग की स्िथति में ऐसा नहीं है। सम चतुभुर्ज एक चतुभुर्ज है जिसकी सभी भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हैं। क्योंकि सम चतुभुर्ज की सम्मुख भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हैं, इसलिए यह एक समांतर चतुभुर्ज भी है। अतः एक सम चतुभुर्ज में एक समांतर चतुभुर्ज और एक पतंग के भी सभी गुण विद्यमान हैं। उनकी सूची तैयार करने का प्रयास कीजिए। तब आप अपनी सूची पुस्तक में दी गइर् जाँच सूची के साथ मिलाकर पुष्िट कर सकते हैं। एक सम चतुभुर्ज का सबसे उपयोगी गुण उसके विकणो± का है। गुण रू एक सम चतुभुर्ज के विकणर् परस्पर लंब समद्विभाजक होते हैं। पतंग सम चतुभुर्ज तवर्फ - पूणर् चरणों का उपयोग कर यहाँ एक खाका दिया गया है जो इस गुण की पुष्िट करता है। ।ठब्क् एक सम चतुभुर्ज है ;आवृफति 3.35द्ध। अतः यह एक समांतर चतुभुर्ज भी है। चूँकि विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, आवृफति 3ण्35 अतः व्। त्र व्ब् और व्ठ त्र व्क् चूँकि ।व् त्रब्व् ;क्योंघ्द्ध हमें यह दशार्ना है कि उ∠।व्क् त्र उ∠ब्व्क् त्र 90° है। ।क् त्रब्क् ;क्योंघ्द्ध व्क् त्र व्क् ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् से यह देखा जा सकता है कि Δ।व्क् ≅Δब्व्क् अतः उ ∠।व्क् त्र उ ∠ब्व्क् क्योंकि ∠।व्क् और ∠ब्व्क् रैख्िाक युग्म बनाते हैं, उ ∠।व्क् त्र उ ∠ब्व्क् त्र 90° उदाहरण 7 रू त्प्ब्म् एक सम चतुभुर्ज है ;आवृफति 3.36द्ध। गए लए तथा ्र का मान ज्ञात कीजिए और अपने उत्तर की पुष्िट कीजिए। हल रू आवृफति 3ण्36 ग त्रव्म् ल त्रव्त् ्र त्र सम चतुभुर्ज की भुजा त्रव्प् ;विकणर् त्र व्ब् ;विकणर् त्र 13 ;सम चतुभुर्ज की सभी समद्विभाजित करते हैंद्ध समद्विभाजित करते हैद्धं भुजाएँ बराबर माप की होती हैंद्ध त्र5 त्र12 3ण्5ण्2 एक आयत आयत एक समांतर चतुभुर्ज है जिसके सभी कोण समान माप के होते हैं ;आवृफति 3.37द्ध। इस परिभाषा का पूणर् अथर् क्या है? इसकी चचार् अपने मित्रों के साथ कीजिए।यदि आयत समकोण्िाक हो तो प्रत्येक कोण की माप क्या होगी? माना प्रत्येक कोण की माप ग° होगी। आवृफति 3ण्37 तब 4ग° त्र 360° ;क्यों द्धघ् इसलिएए ग° त्र 90° अतः आयत का प्रत्येक कोण समकोण होता है। अतः एक आयत समांतर चतुभुर्ज होता है जिसमें प्रत्येक कोण समकोण होता है। एक समांतर चतुभुर्ज होने के कारण आयत की सम्मुख भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हैं और विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। समांतर चतुभुर्ज में विकणर् अलग - अलग लंबाइर् के हो सकते हैं ;जाँच कीजिएद्ध: परंतु आयत ;विशेष स्िथति मेंद्ध के विकणर् बराबर माप ;लंबाइर्द्ध के होते हैं। गुण रू आयत के विकणर् बराबर लंबाइर् के होते हैं। आवृफति 3ण्38 आवृफति 3ण्39 आवृफति 3ण्40 इसकी पुष्िट आसानी से हो सकती है। यदि ।ठब्क् एक आयत है ;आवृफति 3.38द्ध तो त्रिाभुज ।ठब् तथा ।ठक् को अलग - अलग ;आवृफति 3.39 और आवृफति 3.40द्ध देखने पर, हमें प्राप्त होता है, Δ।ठब् ≅Δ।ठक् क्योंकि ।ठ त्र।ठ ;उभयनिष्ठद्ध ठब् त्र।क् ;क्योंघ्द्ध उ ∠। त्र उ ∠ठ त्र 90° ;क्योंघ्द्ध ै।ै प्रतिबंध् से सवा±गसमता होती है। अतः ।ब् त्र ठक् और एक आयत में विकणर् बराबर लंबाइर् के होने के अतिरिक्त एक दूसरे को समद्विभाजित करते हंै। ;क्यों?द्ध उदाहरण 8 रू त्म्छज् एक आयत है ;आवृफति 3.41द्ध। इसके विकणर् एक दूसरे को श्व्श् पर प्रतिच्छेद करते हैं। गए का मान ज्ञात कीजिए यदि व्त् त्र 2ग ़ 4 और व्ज् त्र 3ग ़ 1 हैं। हल रू व्ज् ए विकणर् ज्म् का आध है। व्त् ए विकणर् त्छ का आध है। यहाँ पर विकणर् बराबर लंबाइर् के हंै। ;क्यों?द्ध अतः उनके आध्े भी आपस में बराबर हैं। इसलिए 3ग ़ 1 त्र2ग ़ 4 अथार्त् ग त्र3 आवृफति 3ण्41 3ण्5ण्3 वगर् वगर् एक आयत होता है जिसकी भुजाएँ बराबर होती हंै। इसका मतलब यह है कि एक वगर् में एक आयत के सभी गुण होने के साथ - साथ एक अतिरिक्त गुण भी होता है कि इसकी भुजाएँ बराबर लंबाइर् की होती हंै। वगर् के विकणर्, आयत के विकणो± की तरह ही, बराबर लंबाइर् के होते हैं। एक आयत में विकणो± का एक दूसरे पर लंब होना आवश्यक नहीं होता है ;जाँचिएद्ध। किसी वगर् में विकणर् ;पद्ध एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं ;वगर् एक समांतर चतुभुर्ज हैद्ध। ठम्स्ज् एक वगर् है जिसमेंए ;पपद्ध बराबर लंबाइर् के होते हैं। ;वगर् एक आयत है।द्ध और ठम् त्र म्स् त्र स्ज् त्र ज्ठ ∠ठए ∠म्ए ∠स्ए ∠ज् तथा समकोण हैं।;पपपद्ध एक दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। इस प्रकार, हमें निम्नलिख्िात गुणध्मर् प्राप्त होता है। ठस् त्र म्ज् और ठस् ⊥ म्ज् व्ठ त्र व्स् और व्म् त्र व्ज्गुण रू वगर् के विकणर् एक दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। तवर्फ - वितवर्फ की सहायता से हम इसकी पुष्िट कर सकते हैं। ।ठब्क् एक वगर् है जिसके विकणर् एक दूसरे को श्व्श् पर प्रतिच्छेद करते हैं ;आवृफति 3.43द्ध। व्।त्रव्ब् ;क्योंकि वगर् एक समांतर चतुभुर्ज है द्ध ैैै सवा±गसमता प्रतिबंध् के अनुसार Δ।व्क् ≅Δब्व्क् ;वैफसेघ्द्ध अतः उ∠।व्क् त्र उ∠ब्व्क् आवृफति 3ण्43 ये कोण रैख्िाक युग्म बनाते हंै। अतः प्रत्येक कोण समकोण है। प्रश्नावली 3ण्4 ;मद्ध सभी पतंगंे सम चतुभुर्ज होती हैं ;इद्ध सभी सम चतुभुर्ज समांतर चतुभुर्ज होते हंै ;द्धि सभी सम चतुभुर्ज पतंग होते हंै ;बद्ध सभी वगर् सम चतुभुर्ज और आयत भी होते हैं ;हद्ध सभी समांतर चतुभुर्ज समलंब होते हैं ;कद्ध सभी वगर् समांतर चतुभुर्ज नहीं होते। ;ीद्ध सभी वगर् समलंब होते हंै। 2ण् उन सभी चतुभुर्जों की पहचान कीजिए जिनमें ;ंद्ध चारों भुजाएँ बराबर लंबाइर् की हों ;इद्ध चार समकोण हों 3ण् बताइए वैफसे एक वगर् ;पद्ध एक चतुभुर्ज ;पपद्ध एक समांतर चतुभुर्ज ;पपपद्ध एक सम चतुभुर्ज ;पअद्ध एक आयत है। 4ण् एक चतुभुर्ज का नाम बताइए जिसके विकणर् ;पद्ध एक दूसरे को समद्विभाजित करते हंै ;पपद्ध एक दूसरे पर लंब समद्विभाजक हो ;पपपद्ध बराबर हों। 5ण् बताइए एक आयत उत्तल चतुभुर्ज वैफसे है। 6ण् ।ठब् एक समकोण त्रिाभुज है और श्व्श् समकोण की सम्मुख भुजा का मध्य ¯बदु है। बताइए वैफसे श्व्श् ¯बदु ।ए ठ तथा ब् से समान दूरी पर स्िथत है। ;¯बदुओं से चिित अतिरिक्त भुजाएँ आपकी सहायता के लिए खींची गइर् हैंद्ध 61 सोचिए, चचार् कीजिए और लिख्िाए 1ण् एक राजमिस्त्राी एक पत्थर की पट्टी बनाता है। वह इसे आयताकार बनाना चाहता है। कितने अलग - अलग तरीकों से उसे यह विश्वास हो सकता है कि यह आयताकार है। 2ण् वगर् को आयत के रूप में परिभाष्िात किया गया था जिसकी सभी भुजाएँ बराबर होती हैं। क्या हम इसे सम चतुभुर्ज के रूप में परिभाष्िात कर सकते हैं जिसके कोण बराबर माप के हांे? इस विचार को स्पष्ट कीजिए। 3ण् क्या एक समलंब के सभी कोण बराबर माप के हो सकते हंै? क्या इसकी सभी भुजाएँ बराबर हो सकती हैं? वणर्न कीजिए। हमने क्या चचार् की? चतुभुर्ज गुण समांतर चतुभुर्ज रू ;1द्ध सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। एक चतुभुर्ज जिसमें ;2द्ध सम्मुख कोण बराबर होते हैैं। सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म समांतर होता है। ;3द्ध विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैंै। सम चतुभुर्ज रू एक चतुभुर्ज जिसकी सभी भुजाएँ बराबर माप की होती हैं। ;1द्ध समांतर चतुभुर्ज के सभी गुण होते हैैं। ;2द्ध विकणर् परस्पर लंब होते हैैं। आयत रू ;1द्ध समांतर चतुभुर्ज के सभी गुण होते हैं। एक समांतर चतुभुर्ज ;2द्ध प्रत्येक कोण समकोण होता हैं। जिसमें एक कोण ;3द्ध विकणर् बराबर माप के होते हैैं। समकोण होता है। वगर् रू एक आयत जिसकी सभी भुजाएँ बराबर होती हैं। समांतर चतुभुर्ज, सम चतुभुर्ज तथा आयत सभी के गुण होते हैं। पतंग रू ;1द्ध विकणर् एक दूसरे पर लंब होते हैं। एक चतुभुर्ज जिसमें दो ;2द्ध एक विकणर् दूसरे विकणर् को समद्विभाजित आसन्न भुजाओं के युग्म करता है। बराबर होते हैं। ;3द्ध आवृफति में, उ∠ठ त्र उ∠क् परंतु उ∠। ≠ उ∠ब् नोट

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