अध्यायएक चर वाले रैख्िाक समीकरण 2 2ण्1 भूमिका पिछली कक्षाओं में, आपने अनेक बीजीय व्यंजकों और समीकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की है। ऐसे व्यंजक जो हमने देखे, उनके वुफछ उदाहरण हैं - 5गए 2ग दृ 3ए 3ग ़ लए 2गल ़ 5ए गल्र ़ ग ़ ल ़ ्रए ग2 ़ 1ए ल ़ ल2 5 37 समीकरणों के वुफछ उदाहरण हैंः 5ग त्र 25ए 2ग दृ 3 त्र 9ए 2ल ़त्र ए6 ्र ़ 10 त्र−2 22 आपको याद होगा कि समीकरणों में सदैव समता ष्त्रष् का चिह्न प्रयोग होता है, जो व्यंजकों में नहीं होता। इन व्यंजकों में, वुफछ में एक से अध्िक चर प्रयोग हुए हैं। उदाहरण के लिए, 2गल ़ 5 में दो चर हैं। तथापि, हम अब समीकरण बनाने में केवल एक चर वाले व्यंजक ही प्रयोग करेंगे और जो व्यंजक समीकरण बनाने में लिखे जाएँगे वे रैख्िाक ही होंगे। इससे तात्पयर् है कि व्यंजकों में प्रयोग होने वाले चर की अध्िकतम घात एक होगी। वुफछ रैख्िाक व्यंजक हैं - 5 2गए 2ग ़ 1ए 3ल दृ 7ए 12 दृ 5्रए ;ग दृ 4द्ध ़ 10 4 3ये रैख्िाक व्यंजक नहीं हैंः ग2 ़ 1ए ल ़ ल2ए 1 ़ ्र ़ ्र2 ़ ्र;ध्यान दीजिए चर की अध्िकतम घात 1 से अध्िक हैद्ध अब हम समीकरणों में, केवल एक चर वाले व्यंजकों का ही प्रयोग करेंगे। ऐसे समीकरण, एक चर वाले रैख्िाक समीकरण कहलाते हैं। पिछली कक्षाओं में जिन सरल समीकरणों को आपने हल करना सीखा वे इसी प्रकार के थे। आइए, जो हम जानते हैं, उसे संक्ष्िाप्त में दोहरा लें - ;ंद्ध एक बीजीय समीकरण में चरों को प्रयोग करते हुए एक समता 2ग दृ 3 त्र7 होती है। इसमें एक समता का चिह्न होता है। इस समता के 2ग दृ 3 त्र बायाँ पक्षबाईं ओर वाला व्यंजक बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध और दाईं ओर वाला 7 त्र दायाँ पक्षव्यंजक दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध कहलाता है। गण्िात ;इद्ध एक समीकरण में बाएँ पक्ष में व्यंजक का मान, दाएँ पक्ष में व्यंजक के मान के बराबर होता है। ऐसा, चर के वुफछ मानों के लिए ही संभव होता है और चर के ऐसे मानों को ही चर के हल कहते हैं। ;बद्ध किसी समीकरण का हल वैफसे ज्ञात करें? 2ग दृ 3 त्र 7ण् इस समीकरण का हल है - ग त्र 5 क्योंकि ग त्र 5 होने पर बाएँ पक्ष का मान होगा 2 × 5 दृ 3 त्र 7 जो दाएँ पक्ष का मान है लेकिन ग त्र 10 इसका हल नहीं है, क्योंकि ग त्र 10 होने पर बाएँ पक्ष का मान होगा, 2 × 10 दृ3 त्र 17 जो दाएँ पक्ष के बराबर नहीं है। हम मानते हैं कि समीकरण के दोनों पक्ष, तुला के पलड़ों की तरह संतुलन में हैं। अतः हम समीकरण के दोनों पक्षों पर एक जैसी ही गण्िातीय संियाएँ करते हैं जिससे समीकरण का संतुलन बना रहेऋ बिगड़े नहीं, लेकिन समीकरण सरल, अध्िक सरल होता जाए। इस प्रकार वुफछ चरणों के बाद समीकरण का हल प्राप्त हो जाता है। 2ण्2 समीकरणों को हल करना, जिनके एक पक्ष में रैिक व्यंजक तथा दूसरे में केवल संख्या हो वुफछ उदाहरण लेकर, समीकरणों को हल करने की विध्ि पिफर ध्यान में लाते हैं। हलों पर ध्यान दीजिए। हल के रूप में कोइर् भी परिमेय संख्या प्राप्त हो सकती है। उदाहरण 1 रू हल ज्ञात कीजिए 2ग दृ 3 त्र 7 हल रू चरण 1 दोनों पक्षों में 3 जोड़ने पर 2ग दृ 3 ़ 3 त्र7 ़ 3 ;संतुलन नहीं बिगड़ाद्ध या 2ग त्र 10 चरण 2 दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर 2ग10 त्र 22 या ग त्र5 ;अपेक्ष्िात हलद्ध उदाहरण 2 रू हल कीजिए 2ल ़ 9 त्र 4 हल रू 9 का, दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने पर 2ल त्र4 दृ 9 या 2ल त्रदृ 5 − 5 दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर, ल त्र ;हलद्ध2 हल की जाँच: बायाँ पक्ष त्र 2 −5 ़ 9 त्र दृ 5 ़ 9 त्र 4 त्र दायाँ पक्ष ;जैसा चाहिएद्ध 2 क्या आपने ध्यान दिया कि संख्या −5 एक परिमेय संख्या है? सातवीं कक्षा में जो समीकरण 2 हल किए गए उनके हल ऐसी संख्याएँ नहीं थीं। ग 53 उदाहरण 3 रू हल कीजिए ़ त्र − 32 2 5 ग −35 8 हल रू को दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने पर त्र − त्र− 2 3 222 गया त्रदृ 4 3 दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर ग त्रदृ 4 × 3 या ग त्र दृ 12 ;हलद्ध 12 5 5 −8 ़ 5 −3 जाँच: बायाँ पक्ष त्र − ़त्र− 4 ़त्र त्रत्र दायाँ पक्ष ;जैसा चाहिएद्ध3 2 222 ध्यान दीजिए कि समीकरण में चर का गुणांक आवश्यक नहीं कि सदैव एक पूणा±क ही हो। 15 उदाहरण 4 रू हल कीजिए दृ 7ग त्र 9 415 हल रू ज्ञात है दृ 7ग त्र9 415 15 या दृ 7ग त्र9 दृ ; दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने परद्ध44 21 या दृ 7ग त्र 4 21 या ग त्र ;दोनों पक्षों को - 7 से भाग करने परद्ध4×;−7द्ध 3×7 या ग त्र − 4×7 3 या ग त्र − ;अपेक्ष्िात हलद्ध4 15 −3 15 21 36 जाँच: बायाँ पक्ष त्र − 7त्र ़त्र त्र9 त्र दायाँ पक्ष ;जैसा चाहिएद्ध4 4 444 प्रश्नावली 2ण्1 निम्न समीकरणों को हल कीजिए: 1ण् ग दृ 2 त्र 7 2ण् ल ़ 3 त्र 10 3ण् 6 त्र ्र ़ 2 3 17 ज 4ण् ़ ग त्र 5ण् 6ग त्र 12 6ण् त्र 10 77 5 गण्िात 2गल 7ण् त्र 18 8ण् 1ण्6 त्र 9ण् 7ग दृ 9 त्र 16 3 1ण्5 ग 7 10ण् 14ल दृ 8 त्र 13 11ण् 17 ़ 6च त्र 9 12ण् ़ 1 त्र 3 15 2ण्3 वुफछ अनुप्रयोग हम एक सरल उदाहरण से आरंभ करते हैं: दो संख्याओं का योग 74 है। उनमें एक संख्या दूसरी से 10 अध्िक है। वे संख्याएँ कौन - सी हैं? यह एक पहेली की तरह है। हमें दोनों में कोइर् भी संख्या पता नहीं और उन्हें ज्ञात करना है। हमें दो शते± दी गइर् हैं: ;पद्ध एक संख्या दूसरी से 10 अध्िक है, तथा ;पपद्ध उनका योग 74 है। हम कक्षा टप्प् में सीख चुके हैं कि इस तरह की समस्या वैफसे आरंभ करते हैं। हम मानते हैं कि छोटी संख्या ग है। तब बड़ी संख्या है ग से 10 अध्िक अथार्त् ग ़ 10 । दूसरी शतर् है कि संख्याओं का योग 74 है। अतः ग ़ ;ग ़ 10द्ध त्र 74 या 2ग ़ 10 त्र 74 10 को दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने पर 2ग त्र 74 दृ 10 या 2ग त्र 64 दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर ग त्र 32 अथार्त् छोटी संख्या है 32 तथा दूसरी बड़ी संख्या है ग ़ 10 त्र 32 ़ 10 त्र 42 अथार्त् अपेक्ष्िात संख्याएँ 32 तथा 42 हैं, जो दोनों शते± भी पूरी करती हैं। इस विध्ि की उपयोगिता दिखाने के लिए हम वुफछ और उदाहरणों पर विचार करते हैं। −73 उदाहरण 5 रू परिमेय संख्या के दुगुने में क्या जोड़ा जाए जिससे प्राप्त हो?37−7 −7 −14 हल रू परिमेय संख्या का दुगुना है 2× त्र ण् 3 33 −14 3 माना इसमें ग जोड़ने पर 3 प्राप्त होता है। अतः ग ़ त्र 737 14 3 या ग − त्र 37 3 14 −14 या ग त्र ़ ; को दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने परद्ध73 3 ;3× 3द्ध ़;14×7द्ध 9 ़ 98 107 त्र त्र त्र ण् 21 21 21 3 −7 107 इस प्रकार प्राप्त करने के लिए 2× में जोड़ा जाना चाहिए।73213 उदाहरण 6 रू एक आयत का परिमाप 13 बउ है और उसकी चैड़ाइर् 2 बउ है। उसकी लंबाइर्4 ज्ञात कीजिए। हल रू मान लेते हैं कि आयत की लंबाइर् ग बउ है। आयत का परिमाप त्र2 × ;लंबाइर् ़ चैड़ाइर्द्ध 3 11 त्र 2× ग ़2 त्र 2× ग ़ 44 परिमाप 13 बउ दिया गया है। 11 अतः 2 ग ़ त्र 13 4 11 13 या ग ़ त्र 42 ;दोनों पक्षों को 2 से भाग करने परद्ध या ग त्र 13 − 11 ; 11 को दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने परद्ध 2 4 4 26 11 15 3 त्र − त्र त्र 3 4 4 4 4 आयत की लंबाइर् 3 3 बउ है। 4 उदाहरण 7 रू साहिल की माँ की वतर्मान आयु साहिल की वतर्मान आयु की तीन गुनी है। 5 वषर् बाद उन दोनों की आयु का योग 66 वषर् हो जाएगा। उनकी वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए। हल रू माना साहिल की वतर्मान आयु त्र ग वषर् हम साहिल की 5 वषर् बाद वाली आयु ग वषर् मानकर भी चल सकते थे। आप इस प्रकार चलकर प्रयत्न कीजिए। साहिल माँ योग वतर्मान आयु ग 3ग 5 वषर् बाद आयु ग ़ 5 3ग ़ 5 4ग ़ 10 उनकी आयु का योग 66 वषर् दिया है अतः 4ग ़ 10 त्र 66 इस समीकरण में ग साहिल की वतर्मान आयु है। समीकरण हल करने के लिए 10 दाएँ पक्ष में पक्षांतरित करते हैं। 4ग त्र 66 दृ 10 या 4ग त्र 56 56 या ग त्र त्र 14 ;हलद्ध4गण्िात इस प्रकार साहिल की वतर्मान आयु 14 वषर् है तथा उसकी माँ की आयु 42 वषर् है। आप जाँच कर सकते हैं कि 5 वषर् बाद उन दोनों की आयु का योग 66 वषर् हो जाएगा। उदाहरण 8 रू बंसी के पास वुफछ सिक्के ृ 2 वाले तथा वुफछ ृ 5 वाले हैं। यदि ृ 2 वाले सिक्कों की संख्या ृ 5 वाले सिक्कों की संख्या की तिगुनी है और उनके मूल्यों का वुफल योग ृ 77 है तो दोनों प्रकार के सिक्कों की संख्या ज्ञात कीजिए। हल रू माना बंसी के पास ृ 5 वाले सिक्कों की संख्या ग है। तब ृ 2 वाले सिक्कों की संख्या त्र 3ग अतः ;पद्ध ृ 5 वाले ग सिक्कों का मूल्य त्र 5 × ग त्र ृ 5ग तथा ;पपद्ध ृ 2 वाले 3ग सिक्कों का मूल्य त्र 2 × 3ग त्र ृ 6ग अतः वुफल मूल्य त्र 5ग ़ 6ग त्र ृ 11ग ृ2 वुफल मूल्य दिया है ृ 77 ृ5 अतः 11ग त्र 77 77 या ग त्र त्र 7 ;दोनों पक्षों को 11 से भाग करने परद्ध11अथार्त् ृ 5 वाले सिक्कों की संख्या त्र ग त्र 7 तथा ृ 2 वाले सिक्कों की संख्या त्र 3ग त्र 21 ;हलद्ध आप जाँच कर सकते हैं कि इन दोनों का मूल्य ृ 77 ही होता है। उदाहरण 9 रू यदि 11 के तीन लगातार गुणजों का योग 363 है तो उन्हें ज्ञात कीजिए। हल रू यदि 11 का एक गुणज ग है तब अगला गुणज होगा ग ़ 11 और उससे अगला गुणज होगा ग ़ 11 ़ 11 या ग ़ 22 उदाहरण 10 रू दो पूणर् संख्याओं का अंतर 66 है। यदि उनमें 2 रू 5 का अनुपात है तो वे संख्याएँ ज्ञात कीजिए। हल रू क्योंकि दोनों संख्याएँ 2 रू 5 के अनुपात में हैं, अतः हम एक संख्या 2ग और दूसरी 5ग मान सकते हैं। ;ध्यान दीजिए 2ग रू 5ग में 2 रू 5 का अनुपात है।द्ध इनमें अंतर है, 5ग दृ 2ग जो 66 के बराबर दिया है। अतः 5ग दृ 2ग त्र 66 या 3ग त्र 66 या ग त्र 22 क्योंकि संख्याएँ 2ग तथा 5ग हैं। अतः संख्याएँ हुईं 2 × 22 तथा 5 × 22 अथार्त् 44 तथा 110 और इनका अंतर 110 दृ 44 त्र 66 ही है जो वांछित है। उदाहरण 11 रू देवेशी के पास ृ 50, ृ 20 तथा ृ 10 वाले वुफल मिलाकर 25 नोट हैं जिनका मूल्य ृ 590 बनता है। यदि ृ 50 तथा ृ 20 वाले नोटों की संख्या में अनुपात 3 रू 5 है तो प्रत्येक प्रकार के नोटों की संख्या ज्ञात कीजिए। हल रू मानते हैं कि ृ 50 तथा ृ 20 वाले नोटों की संख्या क्रमशः 3ग तथा 5ग है। लेकिन वुफल नोटों की संख्या 25 है। अतः ृ 10 वाले नोटों की संख्या त्र 25 दृ ;3ग ़ 5गद्ध त्र 25 दृ 8ग इन नोटों से उसके पास ध्न हुआ ृ 50 वाले नोटों से: 3ग × 50 त्र ृ 150ग ृ 20 वाले नोटों में: 5ग × 20 त्र ृ 100ग ृ 10 वाले नोटों में ;25 दृ 8गद्ध × 10 त्र ृ ;250 दृ 80गद्ध और वुफल ध्न हुआ त्र 150ग ़ 100ग ़ ;250 दृ 80गद्ध त्र ृ ;170ग ़ 250द्ध यह ध्न ृ 590 के बराबर दिया है। अतः 170ग ़ 250 त्र 590 या 170ग त्र 590 दृ 250 त्र 340 या ग त्र 340 170 त्र 2 अथार्त् देवेशी के पास ृ 50 वाले नोट त्र 3ग त्र 3 × 2 त्र 6 नोट ृ 20 वाले नोट त्र 5ग त्र 5 × 2 त्र 10 नोट तथा ृ 10 वाले नोट त्र 25 दृ 8ग त्र 25 दृ ;8 × 2द्ध त्र 25 दृ 16 त्र 9 गण्िात प्रश्नावली 2ण्2 1 1 घटाने और परिणाम को से गुणा करने पर 1 प्राप्त 2 2एक आयताकार तरण - ताल ;ेूपउउपदह चववसद्ध की लंबाइर् उसकी चैड़ाइर् के दुगुने से 2 मीटर अिाक है। यदि इसका परिमाप 154 मीटर है तो इसकी लंबाइर् व चैड़ाइर् ज्ञात कीजिए। 42 3ण् एक समद्विबाहु त्रिाभुज का आधर बउ तथा उसका परिमाप 4 बउ है। उसकी दो3 15 बराबर भुजाओं की माप ज्ञात कीजिए। 4ण् दो संख्याओं का योग 95 है। यदि एक संख्या दूसरी से 15 अध्िक है तो दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 5ण् दो संख्याओं में अनुपात 5 रू 3 है। यदि उनमें अंतर 18 है तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 6ण् तीन लगातार पूणा±कों का योग 51 है। पूणा±क ज्ञात कीजिए। 7ण् 8 के तीन लगातार गुणजों का योग 888 है। गुणजों को ज्ञात कीजिए। 8ण् तीन लगातार पूणा±क बढ़ते क्रम में लेकर उन्हें क्रमशः 2, 3 तथा 4 से गुणा कर योग करने पर योगपफल 74 प्राप्त होता है। तीनों पूणा±क ज्ञात कीजिए। 9ण् राहुल और हारुन की वतर्मान आयु में अनुपात 5 रू 7 है। 4 वषर् बाद उनकी आयु का योग 56 वषर् हो जाएगा। उनकी वतर्मान आयु क्या है? 10ण् किसी कक्षा में बालक और बालिकाओं की संख्याओं में अनुपात 7 रू 5 है। यदि बालकों की संख्या बालिकाओं की संख्या से 8 अध्िक है तो कक्षा में वुफल कितने विद्याथीर् हैं? 11ण् बाइचंुग के पिताजी उसके दादाजी से 26 वषर् छोटे हैं और उससे 29 वषर् बड़े हैं। यदि उन तीनों की आयु का योग 135 वषर् है तो उनकी आयु अलग - अलग ज्ञात कीजिए। 12ण् 15 वषर् बाद रवि की आयु, उसकी वतर्मान आयु से चार गुनी हो जाएगी। रवि की वतर्मान आयु क्या है? 52 13ण् एक परिमेय संख्या को से गुणा कर जोड़ने पर −7 प्राप्त होता है। वह संख्या क्या है?2312 14ण् लक्ष्मी एक बैंक में खजांची है। उसके पास नगदी के रूप में ृ 100, ृ 50 व ृ 10 वाले नोट हैं। उनकी संख्याओं में क्रमशः 2 रू 3 रू 5 का अनुपात है और उनका वुफल मूल्य ृ 4,00,000 है। उसके पास प्रत्येक प्रकार के कितने - कितने नोट हैं? 15ण् मेरे पास ृ 300 मूल्य के, ृ 1, ृ 2 और ृ 5 वाले सिक्के हैं। ृ 2 वाले सिक्कों की संख्या ृ 5 वाले सिक्कों की संख्या की तिगुनी है और सिक्कों की वुफल संख्या 160 है। मेरे पास प्रत्येक प्रकार के कितने - कितने सिक्के हैं? 16ण् एक निबंध् प्रतियोगिता में आयोजकों ने तय किया कि प्रत्येक विजेता को ृ 100 और विजेता को छोड़कर प्रत्येक प्रतिभागी को ृ 25 पुरस्कार के रूप में दिए जाएँगे। यदि पुरस्कारों में बाँटी गइर् राश्िा ृ 3ए000 थी तो वुफल 63 प्रतिभागियों में विजेताओं की संख्या ज्ञात कीजिए। 2ण्4 समीकरण हल करना जब दोनों ही पक्षों में चर उपस्िथत हो एक समीकरण, दो बीजीय व्यंजकों के मानों में समता होती है। समीकरण 2ग दृ 3 त्र 7 में एक व्यंजक है 2ग दृ 3 तथा दूसरा है 7 । अभी तक लिए गए लगभग सभी उदाहरणों में दाएँ पक्ष में एक ही संख्या थी। लेकिन ऐसा होना सदैव आवश्यक नहीं है। चर राश्िा दोनों पक्षों में भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, समीकरण 2ग दृ 3 त्र ग ़ 2 में, दोनों ही पक्षों में चर वाले व्यंजक हैं। बाएँ पक्ष में व्यंजक है ;2ग दृ 3द्ध तथा दाएँ में है ;ग ़ 2द्ध। ऽ अब हम ऐसे ही समीकरणों के हल करने की चचार् करेंगे जिनके दोनों ही पक्षों में चर वाले व्यंजक हों। उदाहरण 12 रू हल कीजिए 2ग दृ 3 त्र ग ़ 2 हल रू दिया हैः 2ग त्र ग ़ 2 ़ 3 या 2ग त्र ग ़ 5 या 2ग दृ ग त्र ग ़ 5 दृ ग ;दोनों पक्षों से ग घटाने परद्ध या ग त्र5 ;हलद्ध यहाँ, हमने समीकरण के दोनों पक्षों से, एक संख्या या स्िथरांक ही नहीं, बल्िक चर वाला पद घटाया। हम ऐसा कर सकते हैं क्योंकि चर का मान भी कोइर् संख्या ही है। ध्यान दीजिए कि ग दोनों पक्षों से घटाने से तात्पयर् है ग को बाएँ पक्ष में पक्षांतरण करना। 73 उदाहरण 13 रू हल कीजिए 5ग ़ त्र ग − 14 22 हल रू दोनों पक्षों को 2 से गुणा करने पर प्राप्त होता है 73 2× 5ग ़ त्र 2× ग − 14 22 73या ;2 × 5गद्ध ़ 2× त्र2× ग − ;2 ×14द्ध 22 या 10ग ़ 7 त्र3ग दृ 28 या 10ग दृ 3ग ़ 7 त्र दृ 28 ;3ग को बाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने परद्ध या 7ग ़ 7 त्र दृ 28 या 7ग त्र दृ 28 दृ 7 या 7ग त्र दृ 35 −35 या ग त्र 7 या ग त्रदृ 5 ;हलद्ध प्रश्नावली 2ण्3 निम्न समीकरणों को हल कीजिए और अपने उत्तर की जाँच कीजिए। 1ण् 3ग त्र 2ग ़ 18 2ण् 5ज दृ 3 त्र 3ज दृ 5 3ण् 5ग ़ 9 त्र 5 ़ 3ग गण्िात 4ण् 4्र ़ 3 त्र 6 ़ 2्र 5ण् 2ग दृ 1 त्र 14 दृ ग 6ण् 8ग ़ 4 त्र 3 ;ग दृ 1द्ध ़ 7 4 2ग 7ग 5 26 7ण् ग त्र ;ग ़ 10द्ध 8ण् ़ 1 त्र 3़ 9ण् 2ल ़ त्र − ल 5 3 15 3 3 8 10ण् 3उ त्र 5 उ दृ 5 2ण्5 वुफछ और उदाहरण उदाहरण 14 रू दो अंकों वाली एक संख्या के दोनों अंकों में 3 का अंतर है। इस संख्या में, इसके अंकों को बदलकर प्राप्त संख्या को जोड़ने पर 143 प्राप्त होता है। संख्या ज्ञात कीजिए। हल रू उदाहरण के तौर पर दो अंकों वाली कोइर् एक संख्या, जैसे 56 लेते हैं। इसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है, 56 त्र ;10 × 5द्ध ़ 6 इस संख्या के अंक बदलने पर संख्या मिलती है 65 जिसे इस प्रकार लिखा जा सकता है, 65 त्र ;10 × 6 द्ध ़ 5 हम दो अंकों वाली संख्या में इकाइर् का अंक इ मानते हैं। क्योंकि दोनों अंकों का अंतर 3 है। अतः दहाइर् का अंक त्र इ ़ 3 अथार्त् दो अंकों वाली संख्या त्र 10 ;इ ़ 3द्ध ़ इ त्र 10इ ़ 30 ़ इ त्र 11इ ़ 30 अंकों के बदलने पर संख्या होगी 10इ ़ ;इ ़ 3द्ध त्र 11इ ़ 3 यदि इकाइर् का अंक इ हैइन दोनों संख्याओं को जोड़ने पर मिलता है 143 तब क्या हम दहाइर् का अतः ;11इ ़ 30द्ध ़ ;11इ ़ 3द्ध त्र 143 अंक ;इ दृ 3द्ध भी ले सकते हैं? लेकर देख्िाएया 11इ ़ 11इ ़ 30 ़ 3 त्र 143 क्या उत्तर मिलता है।या 22इ ़ 33 त्र 143 या 22इ त्र 143 दृ 33 या 22इ त्र 110 110 या इ त्र 22 या इ त्र5 अथार्त् इकाइर् का अंक त्र 5 तब दहाइर् का अंक त्र 5 ़ 3 त्र 8 अतः संख्या त्र 85 जाँच: अंक बदलने पर संख्या 58 मिलती है। और 58 तथा 85 का योग है 143 जैसा कि दिया है। उदाहरण 15 रू अजुर्न की आयु श्रीया की आयु की दुगुनी है। 5 वषर् पहले उसकी आयु श्रीया की आयु की तिगुनी थी। दोनों की आयु ज्ञात कीजिए। हल रू माना श्रीया की वतर्मान आयु त्र ग वषर् तब अजुर्न की वतर्मान आयु त्र 2ग वषर् श्रीया की 5 वषर् पहले आयु थी ;ग दृ 5द्ध वषर् तथा अजुर्न की 5 वषर् पहले आयु थी ;2ग दृ 5द्ध वषर् दिया है कि 5 वषर् पहले अजुर्न की आयु श्रीया की आयु की तिगुनी थी अतः 2ग दृ 5 त्र 3;ग दृ 5द्ध या 2ग दृ 5 त्र3ग दृ 15 या 15 दृ 5 त्र 3ग दृ 2ग या 10 त्र ग अतः श्रीया की वतर्मान आयु त्र ग त्र 10 वषर् तथा अजुर्न की वतर्मान आयु त्र 2ग त्र 2 × 10 त्र 20 वषर् प्रश्नावली 2ण्4 5 1ण् अमीना एक संख्या सोचती है। वह इसमें से घटाकर परिणाम को 8 से गुणा करती है।2अब जो परिणाम मिलता है वह सोची गइर् संख्या की तिगुनी है। वह सोची गइर् संख्या ज्ञात कीजिए। 2ण् दो संख्याओं में पहली संख्या दूसरी की पाँच गुनी है। प्रत्येक संख्या में 21 जोड़ने पर पहली संख्या दूसरी की दुगुनी हो जाती है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 3ण् दो अंकों वाली दी गइर् एक संख्या के अंकों का योग 9 है। इस संख्या के अंकों के स्थान बदलकर प्राप्त संख्या, दी गइर् संख्या से 27 अिाक है। दी गइर् संख्या ज्ञात कीजिए। 4ण् दो अंकों वाली दी गइर् एक संख्या में एक अंक दूसरे का तीन गुना है। इसके अंकों के स्थान बदलकर प्राप्त संख्या को, दी गइर् संख्या में जोड़ने पर 88 प्राप्त होता है। दी गइर् संख्या ज्ञात कीजिए। 5ण् शोबो की माँ की आयु, शोबो की आयु की छः गुनी है। 5 वषर् बाद शोबो की आयु, उसकी माँ की वतर्मान आयु की एक तिहाइर् हो जाएगी। उनकी आयु ज्ञात कीजिए। 6ण् महूली गाँव में, एक तंग आयताकार भूखंड विद्यालय बनाने के लिए सुरक्ष्िात है। इस भूखंड की लंबाइर् और चैड़ाइर् में 11 रू 4 का अनुपात है। गाँव पंचायत को इस भूखंड की बाड़ ;मिदबमद्ध कराने में, ृ 100 प्रति मीटर की दर से ृ 75000 व्यय करने होंगे। भूखंड की माप ;कपउमदेपवदद्ध ज्ञात कीजिए। 7ण् हसन, स्कूल वदीर् बनाने के लिए दो प्रकार का कपड़ा खरीदता है। इसमें कमीज़्ा के कपड़े का भाव ृ 50 प्रति मीटर तथा पतलून के कपड़े का भाव ृ 90 प्रति मीटर है। वह कमीश के प्रत्येक 3 मीटर कपड़े के लिए पतलून का 2 मीटर कपड़ा खरीदता है। वह इस कपड़े को क्रमशः 12ः तथा 10ः लाभ पर बेचकर ृ 36ए600 प्राप्त करता है। उसने पतलूनों के लिए कितना कपड़ा खरीदा? गण्िात 8ण् हिरणों के एक झुंड का आध भाग मैदान में चर रहा है और शेष का तीन चैथाइर् पड़ोस में ही खेलकूद रहा है। शेष बचे 9 हिरण एक तालाब में पानी पी रहे हैं। झुंड में हिरणों की संख्या ज्ञात कीजिए। 9ण् दादाजी की आयु अपनी पौत्राी की आयु की दस गुनी है। यदि उनकी आयु पौत्राी की आयु से 54 वषर् अध्िक है तो उन दोनों की आयु ज्ञात कीजिए। 10ण् अमन की आयु उसके पुत्रा की आयु की तीन गुनी है। 10 वषर् पहले उसकी आयु पुत्रा की आयु की पाँच गुनी थी। दोनों की वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए। 2ण्6 समीकरणों को सरल रूप में बदलना 6ग ़ 1 ग − 3 6 से ही क्यों?उदाहरण 16 रू हल कीजिए: ़ 1 त्र 36 ध्यान दीजिए हरों का ल.स.पहल रू दोनों पक्षों को 6 से गुणा करने पर ;स्ण्ब्ण्डण्द्ध 6 है। 6 ;6 ग ़ 1द्ध 6; ग − 3द्ध ़6×1 त्र 36 या 2 ;6ग ़ 1द्ध ़ 6 त्र ग दृ 3 या 12ग ़ 2 ़ 6 त्र ग दृ 3 ;कोष्ठक हटाने परद्ध या 12ग ़ 8 त्र ग दृ 3 या 12ग दृ ग ़ 8 त्रदृ 3 या 11ग ़ 8 त्रदृ 3 या 11ग त्र दृ3 दृ 8 या 11ग त्र दृ11 या ग त्रदृ 1 ;वांछित हलद्ध 6; −1द्ध ़ 1 −6 ़ 1 −53 −5 ़ 3 −2 जाँच: बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध त्र ़ 1 त्ऱ1 त्र ़त्र त्र 3 3 3333 ;−1द्ध − 3 − 4 −2 दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध त्र त्रत्र 6 63 बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध त्र दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध ;जैसा वांछित थाद्ध 7 उदाहरण 17 रू हल कीजिए: 5ग दृ 2 ;2ग दृ 7द्ध त्र 2 ;3ग दृ 1द्ध ़ 2 हल रू कोष्ठक हटाने पर बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध त्र 5ग दृ 4ग ़ 14 त्र ग ़ 14 7 473दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध त्र 6ग दृ 2 ़ त्र 6ग −़ त्र 6ग ़ 2222 3 अतः समीकरण ग ़ 14 त्र 6ग ़ हुआ2 3 या 14 त्र 6ग दृ ग ़ 2 3 या 14 त्र 5ग ़ 2 33 या 14 दृ त्र5ग ; का पक्षांतरण करने परद्ध2228 −3 या त्र5ग 2 क्या आपने ध्यान दिया कि हमने 25 समीकरण को वैफसे सरल बनाया?या त्र5ग 2हमने समीकरण के दोनों पक्षों को 251 5×5 5 सभी व्यंजकों के हरों के ल.स.प. सेया ग त्र× त्रत्र 2 52×5 2 गुणा किया। 5 अतः वांछित हल है ग त्र 2 जाँच: बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध त्र 5× 5 − 2 5×2 दृ7 22 25 25 25 25 ़ 8 33 त्र − 2;5 − 7द्ध त्र− 2; −2द्ध त्ऱ4 त्र त्र 2 2 222 ⎛ 5 ⎞ 7दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध त्र × 3दृ 1 ध्यान दीजिए, इस उदाहरण में2 ़⎜⎟⎝ 2 ⎠ 2 हमने कोष्ठकों को हटाकर और समान पदों को मिलाकर15 2 72×13 7 त्र2 दृ ़त्र ़ समीकरण सरल बनाया। 222 22 26 ़ 7 33 त्र त्र त्र स्भ्ै ;यथावांछितद्ध22 प्रश्नावली2ण्5 निम्न रैख्िाक समीकरणों को हल कीजिए: ग 1 ग 1 द 3द 5द 8ग 17 5ग 1ण् −त्र ़ 2ण् −़त्र 21 3ण् ग ़ 7 −त्र− 2534 246 362 ग − 5 ग − 33ज − 22ज ़ 32 4ण् त्र 5ण् − त्र− ज 35 433 उ −1 उ − 2 6ण् उ −त्र 1 − 23 गण्िात निम्न समीकरणों को सरल रूप में बदलते हुए हल कीजिए: 7ण् 3;ज दृ 3द्ध त्र 5;2ज ़ 1द्ध 8ण् 15;ल दृ 4द्ध दृ2;ल दृ 9द्ध ़ 5;ल ़ 6द्ध त्र 0 9ण् 3;5्र दृ 7द्ध दृ 2;9्र दृ 11द्ध त्र 4;8्र दृ 13द्ध दृ 17 10ण् 0ण्25;4 िदृ 3द्ध त्र 0ण्05;10 िदृ 9द्ध 2ण्7 रैख्िाक रूप में बदल जाने वाले समीकरण ग ़ 13 त्रउदाहरण 18 रू हल कीजिए: 2ग ़ 38 हल रू ध्यान दीजिए यह समीकरण रैख्िाक नहीं है क्योंकि इसके बाएँ पक्ष में व्यंजक रैख्िाक नहीं है। लेकिन इसे हम एक रैख्िाक समीकरण के रूप में बदल सकते हैं। हम समीकरण के दोनों पक्षों को ;2ग ़ 3द्ध से गुणा करते हैं, ग ़ 1 3 × ;2 ग ़ 3द्ध त्र × ;2 ग ़ 3द्ध 2ग ़3 8 ;2ग ़ 3द्ध बाएँ पक्ष में निरस्त ;बंदबमसद्ध हो जाता है और हमें प्राप्त होता है: 3 ;2 ग ़ 3द्ध ग ़ 1 त्र 8 अब हमें एक रैख्िाक समीकरण मिला जिसे हम हल करना जानते हैं। दोनों पक्षों को 8 से गुणा करने पर 8 ;ग ़ 1द्ध त्र 3 ;2ग ़ 3द्ध या 8ग ़ 8 त्र6ग ़ 9 या 8ग त्र6ग ़ 9 दृ 8 या 8ग त्र6ग ़ 1 या 8ग दृ 6ग त्र1 या 2ग त्र1 1 या ग त्र 2 अतः हल ग त्र1 है।211 ़ 23 जाँच: बाएँ पक्ष में अंश त्र ़ 1 त्र त्र है।222 1 बाएँ पक्ष में हर त्र 2ग ़ 3 त्र 2× ़ 3 त्र 1 ़ 3 त्र 4 है।23 313 अतः बायाँ पक्ष त्र अंश झ् हर त्र झ्4 त्र × त्र 2 248 अथार्त् बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्ध त्र दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध उदाहरण 19 रू अनु तथा राज की वतर्मान आयु का अनुपात 4 रू 5 है। 8 वषर् बाद उनकी आयु का अनुपात 5 रू 6 होगा। उनकी वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए। हल रू माना कि अनु तथा राज की वतर्मान आयु क्रमशः 4ग तथा 5ग हैं। 8 वषर् बाद अनु की आयु त्र ;4ग ़ 8द्ध वषर् 8 वषर् बाद राज की आयु त्र ;5ग ़ 8द्ध वषर् 4ग ़ 8उनकी आयु का अनुपात त्र , जो दिया है 5 रू 6 5ग ़ 8 4ग ़ 85 अतः त्र 5ग ़86 वज्र - गुणन करने पर 6 ;4ग ़ 8द्ध त्र 5 ;5ग ़ 8द्ध या 24ग ़ 48 त्र 25ग ़ 40 या 24ग ़ 48 दृ 40 त्र 25ग या 24ग ़ 8 त्र 25ग या 8 त्र 25ग दृ 24ग या 8 त्र ग अतः अनु की वतर्मान आयु 4ग त्र 4 × 8 त्र 32 वषर् तथा राज की वतर्मान आयु 5ग त्र 5 × 8 त्र 40 वषर् प्रश्नावली2ण्6 निम्न समीकरणों को हल कीजिए: 8ग − 39ग ्र 4 त्र 2 त्र 15 त्र1ण् 2ण् 3ण् 3ग 7 − 6ग्र ़ 15 9 3ल ़ 4 −2 7 ल ़ 4 − 4 त्र त्र4ण् 5ण्2दृ6 ल 5 ल ़ 23 6ण् हरी और हैरी की वतर्मान आयु का अनुपात 5 रू 7 है। अब से 4 वषर् बाद उनकी आयु का अनुपात 3 रू 4 हो जाएगा। उनकी वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए। 7ण् एक परिमेय संख्या का हर उसके अंश से 8 अध्िक है। यदि अंश में 17 जोड़ दिया जाए 3 तथा हर में से 1 घटा दिया जाए तब हमें प्राप्त होता है। वह परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।2गण्िात हमने क्या चचार् की?

>Chapter_1>

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अध्याय 1

परिमेय संख्याएँ

1.1 भूमिका

गणित में हमें प्राय: साधारण समीकरण दिखाई देते हैं। उदाहरणार्थ समीकरण

x + 2 = 13

(1)

को x = 11 के लिए हल किया जाता है क्योंकि x का यह मान इस समीकरण को संतुष्ट करता है। हल 11, एक प्राकृत संख्या है। दूसरी तरफ समीकरण

x + 5 = 5

 (2)

का हल शून्य है जो एक पूर्ण संख्या है। यदि हम केवल प्राकृत संख्याओं तक सीमित रहें तो समीकरण (2) को हल नहीं किया जा सकता। समीकरण (2) जैसे समीकरणों को हल करने के लिए हमने प्राकृत संख्याओं के समूह में शून्य को शामिल किया और इस नए समूह को पूर्ण संख्याओं का नाम दिया। यद्यपि

x + 18 = 5

 (3)

जैसे समीकरणों को हल करने के लिए पूर्ण संख्याएँ भी पर्याप्त नहीं हैं। क्या आप जानते हैं ‘क्यों’? हमें संख्या –13 की आवश्यकता है जो कि पूर्ण संख्या नहीं है। इसने हमें पूर्णांकों (धनात्मक एवं ऋणात्मक) के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया। ध्यान दीजिए धनात्मक पूर्णांक प्राकृत संख्याओं के अनुरूप हैं। आप सोच सकते हैं कि सभी साधारण समीकरणों को हल करने के लिए हमारे पास उपलब्ध पूर्णांकों की सूची में पर्याप्त संख्याएँ हैं। निम्नलिखित समीकरणों के बारे में विचार करते हैं:

2x = 3

(4)

5x + 7 = 0

(5)

इनका हल हम पूर्णांकों में ज्ञात नहीं कर सकते (इसकी जाँच कीजिए)।

समीकरण (4) को हल करने के लिए संख्या

और समीकरण (5) को हल करने के लिए संख्या की आवश्यकता है। इससे हम परिमेय संख्याओं के समूह की तरफ अग्रसर होते हैं। हम पहले ही परिमेय संख्याओं पर मूल संक्रियाएँ पढ़ चुके हैं। अभी तक हमने जितनी भी विभिन्न प्रकार की संख्याएँ पढ़ी हैं उनकी संक्रियाओं के कुछ गुणधर्म खोजने का अब हम प्रयत्न करते हैं।

1.2 परिमेय संख्याओं के गुणधर्म

1.2.1 संवृत

(i) पूर्ण संख्याएँ

आइए, एक बार पुन: संक्षेप में पूर्णसंख्याओं के लिए सभी संक्रियाओं पर संवृत गुणधर्म की चर्चा करते हैं।
संक्रिया संख्याएँ  टिप्पणी
योग 0 + 5 = 5, एक पूर्णसंख्या है। 
4 + 7 = ...क्या यह एक पूर्ण
संख्या है? व्यापक रूप से किन्हीं
दो पूर्ण संख्याओं a तथा b के 
लिए a + b एक पूर्ण संख्या है।
पूर्ण संख्याएँ योग के अंतर्गत
संवृत हैं।
व्यवकलन 5 – 7 = – 2, जो कि एक पूर्ण
संख्या नहीं है।
पूर्ण संख्याएँ व्यवकलन के
 अंतर्गत संवृत नहीं हैं।
गुणन 0 × 3 = 0, एक पूर्ण संख्या है।
3 × 7 = ... . क्या यह एक पूर्ण
संख्या है? व्यापक रूप से यदि a तथा b 
कोई भी दो पूर्ण संख्याएँ हैं तो उनका
गुणनफल ab एक पूर्ण संख्या है।
पूर्ण संख्याएँ गुणन के अंतर्गत  संवृत हैं।
भाग 5 ÷ 8 = , यह एक पूर्ण संख्या नहीं है। पूर्ण संख्याएँ भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं।

प्राकृत संख्याओं के लिए सभी चार संक्रियाओं के अंतर्गत संवृत गुण की जाँच कीजिए।

(ii) पूर्णांक

आइए, अब हम उन संक्रियाओं का स्मरण करते हैं जिनके अंतर्गत पूर्णांक संवृत हैं।

संक्रिया  संख्याएँ टिप्पणी
योग – 6 + 5 = – 1, एक पूर्णांक है। 
क्या – 7 + (–5) एक पूर्णांक है ?
क्या 8 + 5 एक पूर्णांक है ?
व्यापक रूप से किन्हीं दो पूर्णांकाें
a तथा b के लिए a + b एक पूर्णांक है।
पूर्णांक योग के अंतर्गत
संवृत हैं।
व्यवकलन 7 – 5 = 2, एक पूर्णांक है।
क्या 5 – 7 एक पूर्णांक है ?
– 6 – 8 = – 14, एक पूर्णांक है।
– 6 – (– 8) = 2, एक पूर्णांक है
क्या 8 – (– 6) एक पूर्णांक है ?
व्यापक रूप से किन्हीं दो पूर्णांकों
a तथा b के लिए a – b भी एक
पूर्णांक है। जाँच कीजिए कि क्या
b – a भी एक पूर्णांक है।
 पूर्णांक व्यवकलन के
 अंतर्गत संवृत हैं।
गुणन 5 × 8 = 40, एक पूर्णांक है।
क्या – 5 × 8 एक पूर्णांक है?
– 5 × (– 8) = 40, एक पूर्णांक है।
व्यापक रूप से किन्हीं दो पूर्णांकों
a तथा b के लिए a × b भी एक
पूर्णांक है।
 पूर्णांक गुणन के अंतर्गत संवृत हैं।
भाग
5 ÷ 8 = , यह एक पूर्णांक नहीं हैं।  पूर्णांक भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं।

आपने देखा कि पूर्ण संख्याएँ योग और गुणन के अंतर्गत संवृत हैं परंतु भाग और व्यवकलन के अंतर्गत संवृत नहीं हैं। तथापि पूर्णांक योग, व्यवकलन एवं गुणन के अंतर्गत संवृत हैं लेकिन भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं।

(iii) परिमेय संख्याएँ

स्मरण कीजिए कि एेसी संख्या परिमेय संख्या कहलाती है जिसे के रूप में लिखा जा सकता हो, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q 0 है। उदाहरणार्थ परिमेय संख्याएँ हैं। क्योंकि संख्याएँ 0, –2, 4, , के रूप में लिखी जा सकती हैं इसलिए ये भी परिमेय संख्याएँ हैं। (इसकी जाँच कीजिए।)

(a) आप जानते हैं कि परिमेय संख्याओं को कैसे जोड़ा जाता है। आइए कुछ युग्मों का योग ज्ञात करते हैं

= (एक परिमेय संख्या)

= (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

= ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

हम देखते हैं कि दो परिमेय संख्याओं का योग भी एक परिमेय संख्या है। कुछ और परिमेय संख्याओं के युग्मों के लिए इसकी जाँच कीजिए। इस प्रकार हम कहते हैं कि परिमेय संख्याएँ योग के अंतर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a + b भी एक परिमेय संख्या है।

(b) क्या दो परिमेय संख्याओं का अंतर भी एक परिमेय संख्या होगा?

हम प्राप्त करते हैं, = (एक परिमेय संख्या है?)

= = ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

= ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्मों के लिए इसकी जाँच कीजिए। इस प्रकार हम पाते हैं कि परिमेय संख्याएँ व्यवकलन के अंतर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a – b भी एक परिमेय संख्या है

(c) आइए, अब हम दो परिमेय संख्याओं के गुणनफल की चर्चा करते हैं।

= (दोनों गुणनफल परिमेय संख्याएँ हैं)

= ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्म लीजिए और जाँच कीजिए कि उनका गुणनफल भी एक परिमेय संख्या है। अत: हम कह सकते हैं कि परिमेय संख्याएँ गुणन के अंतर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a × b भी एक परिमेय संख्या है।

(d) हम नोट करते हैं कि (एक परिमेय संख्या है)

= ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

= ... (क्या यह एक परिमेय संख्या है?)

क्या आप कह सकते हैं कि परिमेय संख्याएँ भाग के अंतर्गत संवृत हैं? हम जानते हैं कि किसी भी परिमेय संख्या a के लिए a ÷ 0 परिभाषित नहीं है। अत: परिमेय संख्याएँ भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं। तथापि, यदि हम शून्य को शामिल नहीं करें तो दूसरी सभी परिमेय संख्याओं का समूह, भाग के अंतर्गत संवृत है।

प्रयास कीजिए
निम्नलिखित सारणी में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
संख्याएँ अंतर्गत संवृत हैं
योग के व्यवकलन के गुणन के भाग के
परिमेय संख्याएँ
पूर्णांक
पूर्ण संख्याएँ
प्राकृत संख्याएँ
हाँ
...
...
...
हाँ
हाँ
...
नहीं
...
...
हाँ
...
नहीं
नहीं
...
...

1.2.2 क्रमविनिमेयता

(i) पूर्ण संख्याएँ

निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरते हुए विभिन्न संक्रियाओं के अंतर्गत पूर्ण संख्याओं की क्रमविनिमेयता का स्मरण कीजिए:

संक्रिया  संख्याएँ टिप्पणी
योग  0 + 7 = 7 + 0 = 7
2 + 3 = ... + ... = ....
किन्हीं दो पूर्ण संख्याओं
a तथा b के लिए
a + b = b + a
योग क्रमविनिमेय है।
व्यवकलन(घटाना) ......... व्यवकलन क्रमविनिमेय नहीं है।
गुणन   ......... गुणन क्रमविनिमेय है।
भाग     ......... भाग क्रमविनिमेय नहीं है

जाँच कीजिए कि क्या प्राकृत संख्याओं के लिए भी ये संक्रियाएँ क्रम विनिमेय हैं।

(ii) पूर्णांक

निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरिए और पूर्णांकों के लिए विभिन्न संक्रियाओं की क्रम विनिमेयता जाँचिए:

संक्रिया संख्याएँ टिप्पणी
योग  
व्यवकलन
गुणन
भाग
.........
 क्या 5 – (–3) = – 3 – 5? 
.........
.........
योग क्रमविनिमेय है।
व्यवकलन क्रमविनिमेय नहीं है।
गुणन क्रमविनिमेय है।
भाग क्रमविनिमेय नहीं है।

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग

आप जानते हैं कि दो परिमेय संख्याओं को कैसे जोड़ा जाता है। आइए, हम यहाँ कुछ युग्मों को जोड़ते हैं।

इसलिए,

इसके अतिरिक्त = ...

क्या ?

क्या ?

आप पाते हैं कि दो परिमेय संख्याओं को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है। हम कहते हैं कि परिमेय संख्याओं के लिए योग क्रम विनिमेय है। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a + b = b + a

(b) व्यवकलन

क्या है?

क्या है?

आप पाएँगे कि परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन क्रम विनिमेय नहीं है

ध्यान दीजिए कि पूर्णांकों के लिए व्यवकलन क्रम विनिमेय नहीं है तथा पूर्णांक परिमेय संख्याएँ भी हैं। अत: व्यवकलन परिमेय संख्याओं के लिए भी क्रम विनिमेय नहीं होता है।

(c) गुणन

हम पाते हैं,

क्या है?

एेसे कुछ और गुणनफलों के लिए भी जाँच कीजिए।

आप पाएँगे कि परिमेय संख्याओं के लिए गुणन क्रम विनिमेय है। व्यापक रूप से किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a × b = b × a होता है।

(d) भाग

क्या है?

आप पाएँगे कि दोनों पक्षों के व्यंजक समान नहीं हैं।

इसलिए परिमेय संख्याओं के लिए भाग क्रम विनिमेय नहीं है

प्रयास कीजिए

निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए:

संख्याएँ क्रमविनिमेय
योगके लिए  व्यवकलन के लिए  गुणन के लिए  भाग के लिए
परिमेयसंख्याएँ 
पूर्णांक
पूर्णसंख्याएँ
प्राकृत संख्याएँ
हाँ
...
...
...
...
नहीं
...
...
...
...
हाँ
...
...
...
...
नहीं

1.2.3 साहचर्यता (सहचारिता)

(i) पूर्ण संख्याएँ

निम्नलिखित सारणी के माध्यम से पूर्ण संख्याओं के लिए चार संक्रियाओं की साहचर्यता को स्मरण कीजिए।

संक्रिया संख्याएँ   टिप्पणी
योग  ......... योग साहचर्य है।
व्यवकलन  ......... व्यवकलन साहचर्य नहीं है।
गुणन क्या 7 × (2 × 5) = (7 × 2) × 5?
क्या 4 × (6 × 0) = (4 × 6) × 0?
किन्हीं तीन पूर्ण संख्याओं
 a, b तथा c के लिए
a × (b × c) = (a × b) × c
गुणन साहचर्य है।
भाग  ......... भाग साहचर्य नहीं है।


इस सारणी को भरिए और अंतिम स्तंभ में दी गई टिप्पणियों को सत्यापित कीजिए।

प्राकृत संख्याओं के लिए विभिन्न संक्रियाओं की साहचर्यता की स्वयं जाँच कीजिए।

(ii) पूर्णांक

पूर्णांकों के लिए चार संक्रियाओं की साहचर्यता निम्नलिखित सारणी से देखी जा सकती है :

संक्रिया संख्याएँ  टिप्पणी
योग क्या (–2) + [3 + (– 4)] 
= [(–2) + 3)] + (– 4) है?
क्या (– 6) + [(– 4) + (–5)]
= [(– 6) +(– 4)] + (–5)है? किन्हीं
तीन पूर्ण संख्याओं a, b तथा c
के लिए a + (b + c) = (a + b) + c
योग साहचर्य है।
व्यवकलन
 क्या 5 – (7 – 3) = (5 – 7) – 3 है?
व्यवकलन साहचर्य नहीं है।
गुणन

क्या 5 × [(–7) × (– 8) 
= [5 × (–7)] × (– 8) है?
क्या (– 4) × [(– 8) × (–5)]
 = [(– 4) × (– 8)] × (–5)है? किन्हीं
तीन पूर्ण संख्याओं a, b तथा c
के लिए a × (b × c) = (a × b) × c
 गुणन साहचर्य है।

भाग  क्या [(–10) ÷ 2] ÷ (–5)
= (–10) ÷ [2 ÷ (– 5)] है?
 भाग साहचर्य नहीं है।

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग

हम पाते हैं :

इसलिए,

ज्ञात कीजिए

क्या ये दोनों योग समान हैं?

कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए, उपर्युक्त उदाहरणों की तरह उन्हें जोड़िए और देखिए कि क्या दोनों योग समान हैं। हम पाते हैं कि परिमेय संख्याओं के लिए योग साहचर्य है, अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए a + (b + c) = (a + b) + c

(b) व्यवकलन

आप पहले से जानते हैं कि व्यवकलन पूर्णांकोंें के लिए सहचारी नहीं है। परिमेय संख्याओं के बारे में आप क्या कह सकते हैैं?

क्या है?

स्वयं जाँच कीजिए।

परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन साहचर्य नहीं है।

(c) गुणन

आइए, हम गुणन के लिए साहचर्यता की जाँच करते हैं।

हम पाते हैं कि

क्या है?

कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए और स्वयं जाँच कीजिए। हम पाते हैं कि परिमेय संख्याओं के लिए गुणन साहचर्य है। अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए a × (b × c) = (a × b) × c

(d) भाग

याद कीजिए कि पूर्णांकों के लिए विभाजन सहचारी नहीं है। परिमेय संख्याओं के बारे में आप क्या कह सकते हैं? आइए, देखते हैं कि यदि

है? हम पाते हैं,

बायाँ पक्ष (L.H.S) =

= (का व्युत्क्रम है)

=

= ...

पुन: दायाँ पक्ष (R.H.S) =

=

= = ...

क्या L.H.S. = R.H.S. है? स्वयं जाँच कीजिए। आप पाएँगे कि परिमेय संख्याओं के लिए भाग साहचर्य नहीं है।

प्रयास कीजिए

निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए:

संख्याएँ साहचर्य
योग के लिए   व्यवकलन के लिए गुणन के लिए  भाग के लिए
परिमेय संख्याएँ
पूर्णांक
पूर्ण संख्याएँ
प्राकृत संख्याएँ
...
...
 हाँ
...
...
...
...
नहीं
...
 हाँ
...
...
नहीं
...
...
...

उदाहरण 1 : ज्ञात कीजिए

हल :


प्रयास कीजिए

=

(नोट कीजिए कि 7, 11, 21 तथा 22 का ल.स.प. 462 है।)

= =

हम इसे निम्नलिखित प्रकार से भी हल कर सकते हैं:

= (क्रम विनिमेयता और साहचर्यता के उपयोग से)

=

(7 और 21 का ल.स.प. 21 है। 11 और 22 का ल.स.प. 22 है।)

= =

क्या आप सोचते हैं कि क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के गुणधर्मों की सहायता से परिकलन आसान हो गया है?

उदाहरण 2 : ज्ञात कीजिए

हल : हमें प्राप्त है,

=

=

हम इसे निम्नलिखित प्रकार से भी हल कर सकते हैं:

= (क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के उपयोग से)

= =

1.2.4 शून्य (0) की भूमिका

निम्नलिखित पर विचार कीजिए:

2 + 0 = 0 + 2 = 2 (शून्य को पूर्ण संख्या में जोड़ना)

– 5 + 0 = ... + ... = – 5 (शून्य को पूर्णांक में जोड़ना)

+ ... = 0 + = (शून्य को परिमेय संख्या में जोड़ना)

आप पहले भी इस प्रकार के योग ज्ञात कर चुके हैं।

एेसे कुछ और योग ज्ञात कीजिए। आप क्या देखते हैं? आप पाएँगे कि जब किसी पूर्ण संख्या में शून्य जोड़ा जाता है तो योग फिर से वही पूर्ण संख्या होती है। यह तथ्य पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं के लिए भी सत्य है।

व्यापक रूप से 

a + 0 = 0 + a = a, (जहाँ a एक पूर्ण संख्या है)

b + 0 = 0 + b = b, (जहाँ b एक पूर्णांक है)

c + 0 = 0 + c = c, (जहाँ c एक परिमेय संख्या है)

परिमेय संख्याओं के योग के लिए शून्य एक तत्समक कहलाता है। यह पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी योज्य तत्समक है।

1.2.5 1 की भूमिका

हम प्राप्त करते हैं कि

5 × 1 = 5 = 1 × 5 (पूर्ण संख्या के साथ 1 का गुणन)

× 1 = ... × ... =

× ... = 1 × =

आप क्या पाते हैं?

आप पाएँगे कि जब आप किसी भी परिमेय संख्या के साथ 1 से गुणा करते हैं तो आप उसी परिमेय संख्या को गुणनफल के रूप में पाते हैं। कुछ और परिमेय संख्याओं के लिए इसकी जाँच कीजिए। आप पाएँगे कि किसी भी परिमेय संख्या a के लिए, a × 1 = 1 × a = a है। हम कहते हैं कि 1 परिमेय संख्याओं के लिए गुणनात्मक तत्समक है। क्या 1 पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी गुणनात्मक तत्समक हैं?


यदि कोई गुणधर्म परिमेय संख्याओं के लिए सत्य है तो क्या वह गुणधर्म, पूर्णांकों, पूर्ण संख्याओं के लिए भी सत्य होगा? कौन-से गुणधर्म इनके लिए सत्य होंगे और कौन-से सत्य नहीं होंगे?

1.2.6 एक संख्या का ऋणात्मक

पूर्णांकों का अध्ययन करते समय आपने पूर्णांकों के ऋणात्मक पाए हैं। 1 का ऋणात्मक क्या है? यह – 1 है, क्योंकि 1 + (– 1) = (–1) + 1 = 0 है।

अत: (–1) का ऋणात्मक क्या होगा? यह 1 होगा।

इसके अतिरिक्त, 2 + (–2) = (–2) + 2 = 0 है। इस प्रकार हम कहते हैं कि –2 का ऋणात्मक अथवा योज्य प्रतिलोम 2 है जो विलोमत: भी सत्य है। व्यापक रूप से किसी भी पूर्णांक a के लिए a + (– a) = (– a) + a = 0; इस प्रकार a का ऋणात्मक a है और a का ऋणात्मक a है।

किसी परिमेय संख्या के लिए, हम पाते हैं,

=


सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

इसके अतिरिक्त = 0 (कैसे ?)

इसी प्रकार =

=

व्यापक रूप से किसी परिमेय संख्या के लिए प्राप्त है। 

हम कहते हैं कि का योज्य प्रतिलोम है औ का योज्य प्रतिलोम है

1.2.7 व्युत्क्रम

आप को किस परिमेय संख्या से गुणा करेंगे ताकि गुणनफल 1 हो जाए? स्पष्ट रूप से है।

इसी प्रकार, को से गुणा करना चाहिए ताकि गुणनफल 1 प्राप्त हो सके।

हम कहते हैं कि का व्युत्क्रम है और का व्युत्क्रम है।

क्या आप बता सकते हैं कि शून्य का व्युत्क्रम क्या है? क्या कोई एेसी परिमेय संख्या है जिसे शून्य से गुणा करने पर 1 प्राप्त हो जाए। अत: शून्य का को व्युत्क्रम नहीं है। हम कहते हैं कि– एक परिमेय संख्या दूसरी शून्येतर संख्या का व्युत्क्रम अथवा गुणात्मक प्रतिलोम कहलाती है यदि है।

1.2.8 परिमेय संख्याओं के लिए गुणन की योग पर वितरकता

इस तथ्य को समझने के लिए परिमेय संख्याएँ और को लीजिए:

=

= =

इसके अतिरिक्त =

और =

इसलिए, =

अत: =

योग एवं व्यवकलन पर गुणन की वितरकता

सभी परिमेय संख्याओं ab और के लिए

a (b + c) = ab ac

a (b – c) = ab – ac


वितरकता के उपयोग से निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए:

(i)  (ii) 


जब आप वितरकता का उपयोग करते हैं तो आप एक गुणनफल को दो गुणनफलों के योग अथवा अंतर के रूप में विभक्त करते हैं।

उदाहरण 3 : निम्नलिखित के योज्य प्रतिलोम लिखिए:

(i) (ii)

हल :

(i) का योज्य प्रतिलोम है क्योंकि + = = 0 है।

(ii) का योज्य प्रतिलोम है। (जाँच कीजिए )

उदाहरण 4 : सत्यापित कीजिए कि निम्न के लिए – (– x) और x समान हैं।

(i) x = (ii)


हल :

(i) हमें प्राप्त है x =

x = का योज्य प्रतिलोमx = है, क्योंकि है।

समिका , दर्शाती है कि का योज्य प्रतिलोम है,

अथवा = , अर्थात्् – (– x) = x


(ii) का योज्य प्रतिलोमx = है, क्योंकि है।

समिका , दर्शाती है कि का योज्य प्रतिलोम है, अर्थात्
– (–
x) = x है।

उदाहरण 5 : ज्ञात कीजिए



हल : = (क्रमविनिमेयता से )

= = (वितरकता से)

= =

प्रश्नावली 1.1

1. उचित गुणधर्मोंं के उपयोग से निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए:

(i) (ii)

2. निम्नलिखित में से प्रत्येक के योज्य प्रतिलोम लिखिए:

(i) (ii) (iii) (iv) (v)

3. (i) x = (ii) के लिए सत्यापित कीजिए कि – (– x) = x

4. निम्नलिखित के गुणनात्मक प्रतिलोम ज्ञात कीजिए:

(i) – 13 (ii) (iii) (iv)

(v) – 1 × (vi) – 1

5. निम्नलिखित प्रत्येक में गुणन के अंतर्गत उपयोग किए गए गुणधर्म (गुण) का नाम लिखिए:

(i) (ii)

(iii)

6. को के व्युत्क्रम से गुणा कीजिए।

7. बताइए कौन से गुणधर्म (गुण) की सहायता से आप के रूप में अभिकलन करते हैं।

8. क्या का गुणात्मक प्रतिलोम है? क्यों अथवा क्यों नहीं?

9. क्या का गुणनात्मक प्रतिलोम 0.3 है? क्यों अथवा क्यों नहीं?

10. लिखिए:


(i) एेसी परिमेय संख्या जिसका कोई व्युत्क्रम नहीं है।

(ii) परिमेय संख्याएँ जो अपने व्युत्क्रम के समान है।

(iii) परिमेय संख्या जो अपने ऋणात्मक के समान है।

11. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(i) शून्य का व्युत्क्रम ________ है।

(ii) संख्याएँ ________ तथा ________ स्वयं के व्युत्क्रम हैं।

(iii) – 5 का व्युत्क्रम ________ है।

(iv) (x 0) का व्युत्क्रम ________ है।

(v) दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा _______ है।

(vi) किसी धनात्मक परिमेय संख्या का व्युत्क्रम ________ है।

1.3 परिमेय संख्याओं का संख्या रेखा पर निरूपण

आप प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित करना सीख चुके हैं। हम उनकी पुनरावृत्ति करेंगे।

प्राकृत संख्याएँ

(i)

यह रेखा केवल 1 के दाईं तरफ़ अपरिमित रूप से बढ़ती है।

पूर्ण संख्याएँ

(ii)

यह रेखा शून्य के दाईं तरफ़ अपरिमित रूप से बढ़ती है परंतु शून्य के बाईं तरफ़ कोई संख्या नहीं है।

पूर्णांक

(iii)

यह रेखा दोनों तरफ़ अपरिमित रूप से बढ़ती है। परंतु अब आप –1, 0; 0, 1 इत्यादि के बीच में संख्याएँ पाते हैं।

परिमेय संख्याएँ

(iv)


यह रेखा दोनों तरफ़ अपरिमित रूप से बढ़ती है। क्या आप –1, 0; 0, 1 इत्यादि के बीच में कुछ संख्याएँ पाते हैं?

(v)

संख्या रेखा (iv) पर वह बिंदु जो 0 और 1 के मध्य स्थित है उसे के रूप में अंकित किया गया है। संख्या रेखा (v) पर 0 और 1 के बीच की दूरी को तीन बराबर भागों में बाँटने वाले समदूरस्थ बिंदुओं में से प्रथम बिंदु को के रूप में अंकित किया जा सकता है। संख्या रेखा (v) पर भाजक बिंदुओं में से दूसरे बिंदु को आप कैसे अंकित करेंगे?

अंकित किए जाने वाला यह बिंदु शून्य के दाईं तरफ़ के रूप में अंकित बिंदु से दुगुनी दूरी पर है, इस प्रकार यह से दुगुना है, अर्थात् है। आप इसी प्रकार संख्या रेखा पर समदूरस्थ बिंदुओं को अंकित कर सकते हैं। इस शृंखला में अगला चिह्न 1 है। आप देख सकते हैं कि 1 और एक समान हैं।

जैसा की संख्या रेखा (vi) पर दर्शाया गया है इसके पश्चात् (अथवा 2), आते हैं।

(vi)

इसी प्रकार, को निरूपित करने के लिए संख्या रेखाखंड को आठ बराबर भागों में बाँटा जा सकता है जैसा कि निम्न आकृति में दर्शाया गया है:

इस विभाजन के प्रथम बिंदु को नाम देने के लिए हम संख्या का उपयोग करते हैं। विभाजन का दूसरा बिंदु के रूप में अंकित किया जाएगा, तीसरा बिंदु के रूप में और इसी प्रकार आगे भी, जैसा कि संख्या रेखा (vii) पर दर्शाया गया है।

(vii)

इसी प्रकार संख्या रेखा पर किसी भी परिमेय संख्या को निरूपित किया जा सकता है। एक परिमेय संख्या में रेखा के नीचे का संख्यांक अर्थात् हर, यह दर्शाता है कि प्रथम इकाई को कितने समान भागों में बाँटा गया है। रेखा के ऊपर का संख्यांक अर्थात् अंश, यह दर्शाता है कि इन समान भागों में से कितने भागों को शामिल किया गया है। इस प्रकार परिमेय संख्या का अर्थ है कि शून्य के दाईं तरफ़ नौ समान भागों में से चार को लिया गया है (संख्या रेखा viii) और , के लिए हम शून्य से शुरू करते हुए बाईं तरफ़ 7 चिह्न लगाते हैं जिनमें से प्रत्येक की दूरी है। सातवाँ चिह्न है [संख्या रेखा (ix)]

(viii)

(ix)

प्रयास कीजिए

अक्षर द्वारा अंकित प्रत्येक बिंदु के लिए परिमेय संख्या लिखिए:

(i)

(ii)

1.4 दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ

क्या आप 1 और 5 के बीच प्राकृत संख्याएँ बता सकते हैं? वे प्राकृत संख्याएँ 2, 3 और 4 हैं।

7 और 9 के बीच में कितनी प्राकृत संख्याएँ हैं? केवल एक, और वह है 8

10 और 11 के बीच कितनी प्राकृत संख्याएँ हैं? स्पष्ट रूप से एक भी नहीं।

–5 और 4 के बीच स्थित पूर्णांकों की सूची बनाइए। यह है, – 4, – 3, –2, –1, 0, 1, 2, 3.

–1 और 1 के बीच कितने पूर्णांक हैं?

–9 –10 के बीच कितने पूर्णांक हैं?

आप दो प्राकृत संख्याओं (पूर्णांकों) के बीच निश्चित प्राकृत संख्याएँ (पूर्णांक) पाएँगे।

और के बीच कितनी परिमेय संख्याएँ हैं? शायद आप सोच सकते हैं कि ये संख्याएँ और हैं। परंतु आप को और को लिख सकते हैं।

अब संख्याएँ, , सभी और के बीच में हैं। इन परिमेय संख्याओं की संख्या 39 है।

इसके अतिरिक्त को तथा को के रूप में लिखा जा सकता है। अब हम पाते हैं कि परिमेय संख्याएँ सभी और के बीच में हैं। ये कुल 3999 संख्याएँ हैं।

इस प्रकार हम और के बीच में अधिक से अधिक संख्याओं का समावेश कर सकते हैं। इसलिए प्राकृत संख्याओं और पूर्णांकों की तरह दो परिमेय संख्याओं के बीच पाई जाने वाली परिमेय संख्याएँ परिमित नहीं हैं। एक और उदाहरण पर विचार करते हैं। और के बीच में कितनी परिमेय संख्याएँ हैं? स्पष्ट रूप से दी हुई संख्याओं के बीच में परिमेय संख्याएँ हैं।

यदि हम को तथा को के रूप में लिखते हैं तो हम और के बीच में , , परिमेय संख्याएँ प्राप्त करते हैं।

आप कोई भी दो परिमेय संख्याओं के बीच में अपरिमित परिमेय संख्याएँ प्राप्त करेंगे।

उदाहरण 6 : –2 और 0 के मध्य 3 परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

हल : –2 को और 0 को के रूप में लिखा जा सकता है। अत: हम –2 और 10 के बीच में परिमेय संख्याएँ प्राप्त करते हैं। आप इनमें से कोई भी तीन संख्याएँ ले सकते हैं।

उदाहरण 7 : और के बीच में दस परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

हल : सर्वप्रथम हम और को समान हर वाली परिमेय संख्याओं के रूप में परिवर्तित करते हैं।

और

इसी प्रकार हम और के मध्य निम्नलिखित परिमेय संख्याएँ प्राप्त करते हैं। आप इनमें से कोई भी दस संख्याएँ ले सकते हैं

अन्य विधि

आइए 1 और 2 के बीच में परिमेय संख्याएँ ज्ञात करते हैं। उनमें से एक संख्या 1.5 अथवा अथवा है। यह 1 और 2 का माध्य है। आपने कक्षा VII में माध्य के बारे में पढ़ा है।

इस प्रकार हम पाते हैं कि दी हुई दो संख्याओं के बीच में पूर्णांक प्राप्त होना आवश्यक नहीं है परंतु दी हुई दो संख्याओं के बीच में एक परिमेय संख्या हमेशा स्थित होती है। हम दी हुई दो परिमेय संख्याओं के बीच में परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने के लिए माध्य की अवधारणा का उपयोग कर सकते हैं।

उदाहरण 8 : और के मध्य एक परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।

हल : हम दी हुई परिमेय संख्याओं का माध्य ज्ञात करते हैं =

और के मध्य स्थित है।

इसे संख्या रेखा पर भी देखा जा सकता है।

हम AB का मध्य बिंदु C प्राप्त करते हैं जो = द्वारा निरूपित है। हम पाते हैं कि है।

यदि a और b कोई दो परिमेय संख्याएँ हैं तो a और b के मध्य एक परिमेय संख्या इस प्रकार है कि a < < b

इससे यह भी प्रदर्शित होता है कि दी हुई दो परिमेय संख्याओं के बीच अपरिमित परिमेय संख्याएँ होती हैं।

उदाहरण 9 : और के मध्य तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

हल : हम दी हुई संख्याओं का माध्य ज्ञात करते हैं। जैसा कि उपर्युक्त उदाहरण में दिया हुआ है इन संख्याओं का माध्य है और है।    

अब के बीच में एक और परिमेय संख्या ज्ञात करते हैं। इसके लिए हम पुन: का माध्य ज्ञात करते हैं। अर्थात् = है।

             

अब का माध्य ज्ञात कीजिए। हम = = प्राप्त करते हैं।

इस प्रकार हमें प्राप्त होता है।


इस प्रकार के मध्य तीन परिमेय संख्याएँ हैं।

इसे स्पष्ट रूप से संख्या रेखा पर निम्न रूप में दर्शाया जा सकता है:

इसी प्रकार हम दी हुई दो परिमेय संख्याओं के बीच में अपनी इच्छानुसार कितनी भी परिमेय संख्याएँ ज्ञात कर सकते हैं। आप देख चुके हैं कि दी हुई दो परिमेय संख्याओं के बीच में अपरिमित परिमेय संख्याएँ होती हैं।

प्रश्नावली 1.2

1. निम्नलिखित संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए: (i) (ii)

2. को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए।

3. एेसी पाँच परिमेय संख्याएँ लिखिए जो 2 से छोटी हों।

4. के मध्य दस परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

5. (i) (ii)

(iii) के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

6. –2 से बड़ी पाँच परिमेय संख्याएँ लिखिए।

7. के बीच में दस परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।


हमने क्या चर्चा की?

1. परिमेय संख्याएँ योग व्यवकलन और गुणन की संक्रियाओं के अंतर्गत संवृत हैं।

2. परिमेय संख्याओं के लिए योग और गुणन की संक्रियाएँ

(i) क्रमविनिमेय हैं।

(ii) साहचर्य हैं।

3. परिमेय संख्याओं के लिए परिमेय संख्या शून्य योज्य तत्समक है।

4. परिमेय संख्याओं के लिए परिमेय संख्या 1 गुणनात्मक तत्समक है।

5. परिमेय संख्या  का योज्य प्रतिलोम  है और विलोमत: भी सत्य है।

6. यदि  तो परिमेय संख्या  का व्युत्क्रम अथवा गुणनात्मक प्रतिलोम  है।

7. परिमेय संख्याओं की वितरकता : परिमेय संख्याएँ ab और c के लिए

a(b + c) = ab + ac और a(b – c) = ab – ac है।

8. परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है।

9. दी हुई दो परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित परिमेय संख्याएँ होती हैं। दो परिमेय संख्याओं के मध्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने में माध्य की अवधारणा सहायक है।


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