सप्तभगिन्यः ¹‘सप्तभगिनी’ यह एक उपनाम है। उत्तर - पूवर् के सात राज्य विशेष को उक्त उपाध्ि दीगयी है। इन राज्यों का प्राकृतिक सौन्दयर् अत्यन्त विलक्षण है। इन्हीं के सांस्कृतिक और सामाजिक वैश्िाष्ट्य को ध्यान में रखकर प्रस्तुत पाठ का सृजन किया गया है।ह् बाढम् - बहुत अच्छा पठनीयम् - पढ़ना है ज्ञातुम् - जानने के लिए कति - कितने चतुवि±शतिः - चैबीस प×च¯वशतिः - पचीस भगिनी - बहन अष्टा¯वशतिः - अठाइर्स केन्द्रशासितप्रदेशाः - केन्द्र द्वारा शासित प्रदेश अतिरिच्य - अतिरिक्त भवतु - अच्छा समवायः - समूह प्रथ्िातः - प्रसि( प्रतीकात्मकः - साघेड्ढतिक ;प्रतीक$आत्मकःद्ध कदाचित् - सम्भवतः साम्याद् - समानता के कारण उक्तोपाध्िना - कही गयी उपाध्ि से/के कारण ;उक्त$उपाध्िनाद्ध नाम्िन - नाम में अपरतः - दूसरी ओर क्षेत्रापरिमाणैः - क्षेत्रापफल से लघूनि - छोटे गुणगौरवदृष्ट्या - गुण एवं गौरव की दृष्िट से बृहत्तराण्िा - बड़े स्वाध्ीनाः ;स्व$अध्ीनाःद्ध - स्वतन्त्रा स्वायत्तीकृताः - अपने अध्ीन किये गये महत्त्वाधयिनी - महत्त्व को रखने वाली, महत्त्वपूणर् ;महत्त्व$आधयिनीद्ध श्रुतमध्ुरशब्दः - सुनने में मध्ुर शब्द प्रभृतिभ्िाः - आदि से विहितम् - विध्िपूवर्क किया गया प्राकृतिकसम्पिः - प्राकृतिक सम्पदाओं से सुसमृ(ानि - बहुत समृ( भारतवृक्षे - भारत रूपी वृक्ष में/पर पुष्पस्तबकसदृशानि - पुष्प के गुच्छे के समान हृद्या - पि्रय ;हृदय को पि्रय लगने वालीद्ध मनोरम रम्या - रमणीय सावहितमनसा - सावधन मन से ऊजर्स्िवनः - ऊजार् युक्त पवर्परम्पराभ्िाः - पवो± की परम्परा से परिपूरिताः - पूणर्, भरे - पूरे समभ्िानन्दनीयम् - स्वागत योग्य समीचीनः - बहुत अच्छा स्वलीलाकलाभ्िाः - अपनी िया एवं कलाओं से निष्णाताः - पारघõत, निपुण वंशवृक्षनिमिर्तानाम् - बाँस के वृक्षों से निमिर्त अवाप्तः - प्राप्त बह्नाकषर्कः ;बहु$आकषर्कःद्ध - अत्यन्त आकषर्क/अत्यध्िक आकषर्क 1.उच्चारणं वुफरुत - सुप्रभातम् महत्त्वाधयिनी पवर्परम्पराभ्िाः चतुवि±शतिः द्विसप्ततितमे वंशवृक्षनिमिर्तानाम् सप्तभगिन्यः प्राकृतिकसम्पिः वंशोद्योगो{यम् गुणगौरवदृष्ट्या पुष्पस्तबकसदृशानि अन्ताराष्िट्रयख्यातिम् 2.प्रश्नानाम् उत्तराण्िा एकपदेन लिखत - ;कद्ध अस्मावंफ देशे कति राज्यानि सन्ित? ;खद्ध प्राचीनेतिहासे काः स्वाध्ीनाः आसन्? ;गद्ध केषां समवायः ‘सप्तभगिन्यः’ इति कथ्यते? ;घद्ध अस्मावंफ देशे कति केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ित? ;घद्ध सप्तभगिनी - प्रदेशे कः उद्योगः सवर्प्रमुखः? 3.अधेलिख्िातपदेषु प्रकृति - प्रत्ययविभागं वुफरुत - पदानि प्रकृतिः प्रत्ययः यथा - गन्तुम् गम् $ तुमुन् ज्ञातुम् $ ग्रहीतुम् $ पातुम् $ श्रोतुम् $ भ्रमितुम् $ 4.पाठात् चित्वा तद्भवपदानां कृते संस्कृतपदानि लिखत - तद्भव - पदानि संस्कृत - पदानि यथा - सात सप्त बहिन संगठन बाँस आज खेत 5.भ्िान्नप्रकृतिवंफ पदं चिनुत - ;कद्ध गच्छति, पठति, धवति, अहसत्, क्रीडति। ;खद्ध छात्राः, सेवकः, श्िाक्षकः, लेख्िाका, क्रीडकः। ;गद्ध पत्राम्, मित्राम्, पुष्पम्, आम्रः, नक्षत्राम्। ;घद्ध व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, वृषभः, ¯सहः। ;घद्ध पृथ्िावी, वसुन्ध्रा, ध्रित्राी, यानम्, वसुध। 6.म×जूषातः ियापदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत - सन्ित अस्ित प्रतीयन्ते वतर्ते इच्छामि निवसन्ित वतर्न्ते ..............।;कद्ध अयं प्रयोगः प्रतीकात्मकः ..............।;खद्ध सप्त केन्द्रशासितप्रदेशाः ..............।;गद्ध अत्रा बहवः जनजातीयाः ;घद्ध अहं किमपि श्रोतुम् ..............। ;घद्ध तत्रा हस्तश्िाल्िपनां बाहुल्यं ..............। ..............।;चद्ध सप्तभगिनीप्रदेशाः रम्याः हृद्या च ..............।;छद्ध गुणगौरवदृष्ट्या इमानि वृहत्तराण्िा 7.विशेष्य - विशेषणानाम् उचितं मेलनम् वुफरुत - विशेष्य - पदानि विशेषण - पदानि अयम् संस्कृतिः संस्कृतिविश्िाष्टायाम् इतिहासे महत्त्वाधयिनी प्रदेशः प्राचीने समवायः एकः भारतभूमौ योग्यता - विस्तारः अद्वयं मत्रायं चैव न - त्रिा - युक्तं तथा द्वयम्।’ सप्तराज्यसमूहो{यं भगिनीसप्तवंफ मतम्।। यह राज्यों के नामों को याद रखने का एक सरल तरीका है। इसका अथर् है अ से आरम्भ होने वाले दो, म से आरम्भ होने वाले तीन, न से नगालैण्ड और त्रिा से त्रिापुरा का बोध् होता है। इसी प्रकार अठारह पुराणों के नाम याद रखने के लिये यह श्लोक प्रसि( है - मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रायं वचतुष्टयम्। अ - ना - प - ¯लग - वूफस्कानि पुराणानि प्रचक्षते।। ‘सप्तभगिनी’ इस उपनाम का सवर्प्रथम प्रयोग 1972 में श्री ज्योति प्रसाद सैकिया’ ने आकाशवाणी के साथ भेंटवातार् के क्रम में किया था। इनके अन्तगर्त आने वाले राज्यों का उल्लेख प्राचीन ग्रन्थों में भी प्राप्त होता है’ यथा - महाभारत, रामायण, पुराण आदि। इन राज्यों की राजधनी क्रमशः इस प्रकार है - ’ अरुणाचल प्रदेश - इटानगर असम - दिसपुर मण्िापुर - इम्पफाल मिजोरम - ऐजोल मेघालय - श्िालाघõ नगालैण्ड - कोहिमा त्रिापुरा - अगरतल्ला बिहू, मण्िापुरी, नानक्रम आदि इस प्रदेश के प्रमुख नृत्य हैं।’ नगा, मिजो, खासी, असमी, बांग्ला, पदम, बोडो, गारो, जयन्ितया आदि यहाँ की’ प्रमुख भाषाएँ हैं। सप्तसंख्या पर वुफछ अन्य प्रचलित नाम हैं - सप्तसिन्ध्ु - ‘सप्तभगिनी’ के समान सप्तसिन्ध्ु भी हैं। ये सप्तसिन्ध्ु हैं - सिन्ध्ु, शुतुद्री ;सतलजद्ध, इरावती ;इरावदीद्ध, वितस्ता ;झेलमद्ध, विपाशा ;व्यासद्ध, असिक्नी ;चिनाबद्ध और सरस्वती। सप्तपवर्त - महेन्द्र, मलय, हिमवान्, अबुर्द, विन्ध्य, सह्यादि्र, श्रीशैल। सप्तष्िार् - मरीचि, पुलस्त्य, अंगिरा, क्रतु, अत्रिा, पुलह, वसिष्ठ। कृष्णनाथ की पुस्तक अरुणाचल यात्रा ;वाग्देवी प्रकाशन, बीकानेर 2002द्ध पठनीय है। परियोजना - कायर्म् पाठ में स्िथत अद्वयं ..... वाली पहेली से सातों राज्यों के नाम को समझो।

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