जनसंख्या संघटन हमारी यह जानने में सहायता करता है कि कितने पुरुष हैं और कितनी स्ित्रायाँ हैं, वे किस आयु वगर् के हैं, कितने श्िाक्ष्िात हैं और वे किस प्रकार के व्यवसाय में लगे हैं, उनकी आय का क्या स्तर है और स्वास्थ्य दशाएँ वैफसी हैं? एक देश के जनसंख्या संघटन का अध्ययन करने की एक रुचिकर वििा ‘जनसंख्या पिरामिड’ है जिसे आयु लिंग पिरामिड भी कहते हैं। एक जनसंख्या पिरामिड दशार्ता है ऽ वुफल जनसंख्या विभ्िान्न आयु वगो± में विभाजित है, उदाहरणाथर् 5 से 9 ऽ वुफल जनसंख्या का प्रतिशत इन वगो± में से प्रत्येक वगर् में पुरुष और स्ित्रायाँ उपविभाजित हैं। जनसंख्या पिरामिड का आकार उस विश्िाष्ट देश में रहने वाले लोगों की कहानी बताता है। बच्चों की संख्या ;15 वषर् से नीचेद्ध निचले भाग में दिखाइर् गइर् है और यह जन्म के स्तर को दशार्ती है। उफपर का आकार वृ( लोगों ;65 वषर् से अिाकद्ध की संख्या दशार्ता है और मृतकों की संख्या को दशार्ता है। जनसंख्या पिरामिड एक देश में आश्रित लोगों की संख्या भी बताता है। युवा आश्रित लोग ;15 वषर् से कम आयु केद्ध और वृ( आश्रित लोग ;65 वषर् से अिाक आयु केद्ध आश्रित आयु जनसंख्या के अंतगर्त आते हैं। कायर्रत आयु वगर् ;15 - 65द्ध के लोगों को आथ्िार्क रूप से सवि्रफय वगर् में रखा गया है। एक देश का जनसंख्या पिरामिड जिसमें जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही ऊँचेहैं, आधार पर चैड़ा है और ऊपर तीव्रता से सँकरा हो जाता है। ऐसा इसलिए है कि बहुत से बच्चे जन्म लेते हैं लेकिन उनमें से अिाकतर की मृत्यु शैशव काल में ही हो जाती है और वुफछ ही बड़े हो पाते हैं। इसलिए वहाँ वृ( लोग बहुत कम हैं। इस स्िथति को केन्या के पिरामिड द्वारा दशार्या गया है ;चित्रा 6.7द्ध। जिन देशों में मृत्यु दर ;विशेष रूप से बहुत छोटे बच्चों मेंद्ध कम हो रही है, युवा आयु वगर् का पिरामिड चैड़ा है क्यांेकि श्िाशु प्रौढ़ावस्था तक जीवित रहते हैं। यह भारत के पिरामिड में दृष्िटगोचर होता है ;चित्रा 6.8द्ध। इस प्रकार की जनसंख्या में युवा सापेक्षतः अिाक हैं इसका अथर् मशबूत और वधर्मान बढ़ती हुइर् श्रम शक्ित है। कम जन्म दर वाले जापान जैसे देशों में आधार पर पिरामिड सँकरा है ;चित्रा 6.9द्ध। घटी मृत्यु दर के कारण अिाक लोग वृ( आयु तक पहुँच जाते हैं। वुफशल, उत्साही, आशावादी और सकारात्मक दृष्िट जैसे युवा जन किसी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। हम भारतवासी भाग्यशाली हैं कि हमारे पास ऐसा संसाधन है। उन्हें योग्य एवं उत्पादक बनाने के लिए, वुफशल बनाने और अवसर प्रदान करने के लिए अवश्य ही श्िाक्ष्िात किया जाना चाहिए।

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