प्राकृतिक गैस धरातल के बहुत नीचे पाए जाते हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए गहन वूफपों की खुदाइर् की जाती है, इसे प्रवेधन कहते हैं ;चित्रा 3.4द्ध। सतह के निकट स्िथत खनिजों को जिस प्रिया द्वारा आसानी से खोदकर निकाला जाता है, उसे आखनन कहते हैं। खनिजों का वितरण खनिज विभ्िान्न प्रकार की शैलों में पाए जाते हैं। वुफछ आग्नेय शैलों में पाए जाते हैं, वुफछ कायांतरित शैलों में जबकि अन्य अवसादी शैलों में पाए जाते हैं। धात्िवक खनिज आग्नेय और कायांतरित शैल समूहों, जिनसे विशालपठारों का निमार्ण होता है, में पाए जाते हैं। उत्तरी स्वीडन में लौह अयस्क,औंटेरियो ;कनाडाद्ध में ताँबा और निकेल के निक्षेप, दक्ष्िाण अÚीका में लोहा, निकेल, क्रोमाइट और प्लेटिनम, आग्नेय और कायांतरित शैलों में पाए जाने वाले खनिजों के उदाहरण हैं। मैदानों और नवीन वलित पवर्तों के अवसादीशैल समूहों में अधात्िवक खनिज जैसे चूना पत्थर पाए जाते हैं। Úांस के काॅकेशस प्रदेश के चूना पत्थर निक्षेप, जा£जया और यूव्रेफन के मैंगनीज निक्षेप और अल्जीरिया के पफास्पेफट संस्तर इसके वुफछ उदाहरण हैं। खनिज ईंधन जैसे कोयला और पेट्रोलियम भी अवसादी स्तर में पाए जाते हैं। चित्रा 3.5: विश्व: लोहे, ताँबे और बाॅक्साइट का वितरण 26 संसाध्न एवं विकास अभ्रकः अभ्रक निक्षेप मुख्यतः झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में पाए जाते हैं। भारत विश्व में अभ्रक का सबसे बड़ा उत्पादक और नियार्तक है। ताँबाः यह मुख्यतः राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, कनार्टक और आंध्र प्रदेश में उत्पादित होता है। मैंगनीजः भारत के मैंगनीज निक्षेप महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कनार्टक और आंध्र प्रदेश में स्िथत हैं। सोनाः भारत में कनार्टक में कोलार में सोने के निक्षेप हैं। ये चित्रा 3.7: चूना पत्थर का आखननखानें विश्व की गहरी खानों में से एक हैं जो इस अयस्क के खनन को बहुत खचीर्ली प्रिया बनाती हैं। चूना पत्थरः भारत में चूना पत्थर उत्पादन करने वाले महत्त्वपूणर् राज्य बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु हैं। नमकः यह समुद्र, झील और शैलों से प्राप्त किया जाता है ;चित्रा 3.8द्ध। भारत नमक का अग्रणी उत्पादक और नियार्तक है। खनिजों के उपयोग खनिजों का उपयोग कइर् उद्योगों में होता है। रत्नों के लिए चित्रा 3.8ः राजस्थान की साँभर झील से नमकप्रयोग किए जाने वाले खनिज प्रायः कठोर होते हैं। इन्हें निष्कषर्ण आभूषण बनाने के लिए विभ्िाÂ शैलियों में जड़ा जाता है। ताँबा एक अन्य धातु है जिसका उपयोग सिक्के से लेकर पाइप तक प्रत्येक वस्तु में किया जाता है। वंफप्यूटर उद्योग में प्रयुक्त होने वाला सिलिकन, क्वाट्जर् से प्राप्त किया जाता है। ऐलुमिनियम जिसे उसके अयस्क बाॅक्साइट से प्राप्त किया जाता है, का उपयोग आॅटोमोबाइल और हवाइर् जहाश, बोतलबंदी उद्योग, भवन निमार्ण और रसोइर् के बतर्न तक में होता है। खनिजों का संरक्षण खनिज अनवीकरणीय संसाधन है। खनिजों के निमार्ण और संचयन में हशारों वषर् लगते हैं। मानवीय उपभोग की दर की तुलना में निमार्ण की दर बहुत धीमी है। खनन की प्रिया में बबार्दी को घटाना आवश्यक है। धातुओं का पुनचर्क्रण एक अन्य तरीका है जिससे खनिज संसाधनों को संरक्ष्िात किया जा सकता है। शक्ित संसाधन सन्नी की माँ अपने दिन की शुरुआत गाइजर का बटन दबाने से करती है। सोचें और करेंवह सन्नी को जगाने से पहले उसके विद्यालय की वदीर् पर इस्त्राी करती खनिज और शक्ित संसाध्न 29 क्या आप जानते हैं? संपीडित प्राकृतिक गैस ;ब्छळद्ध एक प्रचलित पयार्वरण हितैषी आॅटोमोबाइल ईंधन है, क्योंकि यह पेट्रोलियम और डीजल की तुलना में कम प्रदूषण करती है। चित्रा 3.14: सलल जल विद्युत परियोजना, जम्मू और कश्मीर क्या आप जानते हैं? विश्व का पहला जल विद्युत उत्पन्न करने वाला देश नावेर् था। मुख्य उत्पादक देश इर्रान, इराक, सऊदी अरब और कतर हैं। अन्य मुख्य उत्पादक संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, वेनेजुएला और अल्जीरिया हैं। भारत में मुख्य उत्पादक क्षेत्रा असम में डिग्बोइर्, मुंबइर् में ‘बाम्बे हाइर्’ तथा कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा हैं। प्राकृतिक गैस प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम निक्षेपों के साथ पायी जाती है और तब निमर्ुक्त होती है जब अपरिष्वृफत तेल को धरातल पर लाया जाता है। इसका प्रयोग घरेलू और वाण्िाज्ियक ईंधनों के रूप में किया जा सकता है। रूस, नावेर्, यू.के. और नीदरलैंड प्राकृतिक गैस के प्रमुख उत्पादक हैं।भारत में जैसलमेर, कृष्णा - गोदावरी डेल्टा, त्रिापुरा और मुंबइर् के वुफछ अपतटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस संसाधन हैं। विश्व के बहुत कम देशों के पास प्राकृतिक गैस के अपने पयार्प्त भंडार हैं। हमारे द्वारा जीवाश्मी ईंधनों के उपभोग की तीव्र वृि ने चिंताजनक दर से इन्हें समाप्ित तक पहुँचा दिया है। इन ईंधनों के जलने से निकलने वाले विषैले प्रदूषक भी चिंता का विषय हैं। जीवाश्मी ईंधन का अनियंत्रिात जलना अनियंत्रिात टोंटी के टपकने के समान है जो अंततः सूख जाती है। इसने हमारा ध्यान उफजार् के विभ्िान्न गैर - परंपरागत ड्डोतों के दोहन की ओर बढ़ाया जो कि जीवाश्मी ईंधनों के स्वच्छतर विकल्प हैं। जल विद्युत बाँधों में वषार् जल अथवा नदी जल ऊँचाइर् से गिराने के लिए संग्रहित किया जाता है। बाँध के अंदर से पाइप के द्वारा बहता जल बाँध के नीचे स्िथत टरबाइन के ऊपर गिरता है। घूमते हुए ब्लेड जेनरेटर को विद्युत के लिए घुमाते हैं। यह जल विद्युत कहलाती है। विद्युत उत्पन्न करने के बाद जो जल बहता है चित्रा 3.15: जल विद्युत 32 संसाध्न एवं विकास क्या आप जानते हैं? विश्व का पहला ज्वारीयऊजार् स्टेशन Úांस में बनाया गया था। प्राप्त करने और नहाने के लिए प्रयोग में लाइर् जाती है। यू.एस.ए. विश्व का सबसे बड़ा भूतापीय ऊजार् का सयंत्रा है, इसके बाद न्यूजीलैंड, आइसलैंड, पिफलीपींस और मध्य अमेरिका हैं। भारत में भूतापीय ऊजार् के संयंत्रा हिमाचल प्रदेश में मण्िाकरण और लद्दाख में पूगाघाटी में स्िथत हैं। ज्वारीय ऊजार् ज्वार से उत्पन्न ऊजार् को ज्वारीय ऊजार् कहते हैं। इस ऊजार् का विदोहन समुद्र के सँकरे मुँहाने में बाँध के निमार्ण से किया जाता है। उच्च ज्वार के समय ज्वारों की ऊजार् का उपयोग बाँध में स्थापित टरबाइन को घुमाने के लिए किया जाता है। रूस, Úांस और भारत में कच्छ की खाड़ी में विशाल ज्वारीय मिल के क्षेत्रा हैं। चित्रा 3.23ः बायोगैस चित्रा 3.22ः ज्वारीय ऊजार् बायोगैस जैविक अपश्िाष्ट जैसे मृत पौधे और जंतुओं के अवशेष, पशुओं का गोबर, रसोइर् के अपश्िाष्ट को गैसीय ईंधन में बदला जा सकता है, इसे बायोगैस कहते हैं। जैविक अपश्िाष्ट बैक्टीरिया द्वारा बायोगैस संयंत्रा में अपघटित होते हैं जो कि अनिवायर् रूप में मिथेन और काबर्न डाइर्आॅक्साइड का मिश्रण है। बायोगैस खाना पकाने तथा विद्युत उत्पादन का सवोर्त्तम ईंधन है और इससे प्रति वषर् बड़ी मात्रा में जैव खाद का उत्पादन होता है।ऊजार् सवर्व्यापी है लेकिन इस ऊजार् का विदोहन बहुत ही कठिन और खचीर्ला है। हममें से प्रत्येक व्यक्ित ऊजार् को नष्ट न करके एक भ्िान्नता ला सकता है। ऊजार् की बचत ही ऊजार् का उत्पादन है। अभी कायर् करें एवं ऊजार् के भविष्य को सुनहरा बनाएँ। 36 संसाध्न एवं विकास 4.निम्नलिख्िात में अंतर स्पष्ट कीजिए - ;पद्ध परंपरागत और गैर - परंपरागत ऊजार् के ड्डोत ;पपद्ध बायो गैस और प्राकृतिक गैस ;पपपद्ध लौह और अलौह खनिज ;पअद्ध धात्िवक और अधात्िवक खनिज 5.ियाकलाप ;पद्ध हमारे जीवन में उपयोग किए जाने वाले विभ्िान्न प्रकार के ईंधनों को प्रद£शत करने के लिए पुरानी पत्रिाकाओं से चित्रों का प्रयोग करें और उन्हें अपने सूचनापट पर प्रद£शत करें। ;पपद्ध ऊजार् संरक्षण की युक्ितयाँ जिन्हें आप अपने विद्यालय में अपनाएँगे, पर प्रकाश डालते हुए एक चाटर् बनाइए। ;पपपद्ध सलमा की कक्षा ने विद्युत उपभेाग सवेर्क्षण के द्वारा अपने विद्यालय का ऊजार् लेखा परीक्षण करने के लिए एक कायर् अभ्िायान चलाया। उन्होंने विद्यालय के छात्रों के लिए सवेर्क्षण पत्राक तैयार किए। विद्युत लेखा क्र.सं उपकरण ;यदि हैद्ध मात्रा ;प्रयुक्त हो रही संख्याद्ध उपयोग समय ;कायर् घंटों की अनुमानित संख्याद्ध मात्रा ;वास्तविक आवश्यक संख्याद्ध क्या उपयोग न किए जाने पर भी ये चालू रहते हैं? ;हाँ या नहींद्ध 1 प्रतिदीप्ित नलिका 40 वाॅट 2 तापदीप्त बल्ब 40वाॅट/60 वाॅट 3 सह - प्रभाव प्रतिदीप्ित लैंप ;सी.एपफ.एल.द्ध 4 पंखे 5 निवार्त पंखे 6 विद्युत घंटी/गुंजक 7 दूरदशर्न 8 वफम्प्यूटर 9 वातानुवूफलक 10 रेपि्रफजरेटर 38 संसाध्न एवं विकास

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