सोलहवाँ पाठ मि‘ी की मूतिर्याँ मि‘ी से विभ्िान्न तरह के ख्िालौने बनाना तुममें से कइर् लोग जानते होगे। कइर्यों का तो यह पि्रय खेल भी होगा। पर क्या तुम जानते हो कि मि‘ी के ख्िालौने या चीशें बनना कब शुरू हुआ? इतिहास में तुमने पढ़ा होेगा कि सिंधु घाटी की सभ्यता में मि‘ी से बनी और पकी हुइर् वुफछ मूतिर्याँ खुदाइर् के दौरान मिली हैं। सिंधु घाटी की सभ्यता लगभग 2500 - 3000 वषर् पुरानी मानी जाती है। सोचो केवल मि‘ी से बनी ये मूतिर्याँ इतने लंबे समय तक वैफसे सुरक्ष्िात रही होंगी? जबकि मि‘ी तो पानी में घुल जाती है। वास्तव में मि‘ी से बनी और आग में पकी मूतिर्याँ या वस्तुएँ पानी में नहीं घुलती हैं। ऐसी मूतिर्यों को मृणमूतिर् कहा जाता है। पकाने से मि‘ी एक तरह से मृत हो जाती है यानी पकने के बाद उसका पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता । वास्तव में मि‘ी की मूतिर्यों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना मानव का। मानव के पास अपनी भावनाओं को अभ्िाव्यक्त करने का चित्रा और मूतिर् के अलावा शायद अन्य कोइर् माध्यम नहीं था। आओ देखते हैं कि मि‘ी से मूतिर् बनाने की व्यवस्िथत प्रवि्रफया क्या है। मि‘ी से मूतिर्याँ दो तरह से बनाइर् जा सकती हैं। एक तरीका है केवल हाथ से बनाना। इस तरीके से ठोस, पोली तथा उभरी;रिलीपफद्ध मूतिर्याँ बनाइर् जा सकती हैं। दूसरा तरीका है चाक की मदद से बनाना। चाक पर वुफम्हार को मटके या वुफल्हड़ बनाते हुए तो तुमने देखा ही होगा। क्या कभी इसके लिए मि‘ी तैयार करते हुए भी देखा है? मि‘ी तैयार करना हर जगह अलग - अलग तरह की मि‘ी मिलती है, कहीं चिकनी, कहीं रेतीली, कहीं लाल, तो कहीं पीली, सपेफद, काली मि‘ी। मूतिर् बनाने लायक मि‘ी तैयार करने के लिए उसमें दूसरी मि‘ी मिलानी पड़ती है। जैसे मि‘ी चिकनी है तो उसमें थोड़ी रेतीली मि‘ी, राख या रेत मिलानी पड़ेगी। मि‘ी को साप़्ाफ करके ;यानी उसमें से कंकड़, पत्थर या और कोइर् कचरा आदि हो तो निकाल दोद्ध किसी बतर्न, होद या तसले में पानी के साथ गला दो। मि‘ी जब 88ध्दूवार् पानी में घुल जाए तो उसे एक - दो बार नीचे तक हिलाकर छोड़ दो। जिससे अगर बारीक वंफकड़ वगैरा रह गए हों तो वे भी नीचे बैठ जाएँ। अब बतर्न को एकाध दिन के लिए छोड़ दो। एक - दो दिन बाद उफपर - उफपर की मि‘ी किसी दूसरे बतर्न में निकाल लो। थोड़ी देर बाद उस मि‘ी का पानी उफपर आ जाएगा। बतर्न को तिरछा करके इस पानी को निकाल दो। मि‘ी श्यादा गीली हो तो साप़्ाफ जगह में प़्ौफला दो। अगर लिपी हुइर् शमीन होगी तो पानी सोख लेगी। वुफछ समय बाद मि‘ी को हाथ में लेकर गोली जैसी बनाकर देखो, अगर गोली बनने लगे तो समझो अपने काम लायक मि‘ी तैयार हो गइर् है। अब सारी मि‘ी को समेट लो और पत्थर की सिल पर रखकर उसे लकड़ी के चपटे हथौडे़ से वूफटो। साथ - ही - साथ मि‘ी को उफपर नीचे करते रहो। बीच - बीच में हाथ से आटे की तरह माड़ते भी जाओ। मि‘ी की वुफटाइर् अच्छी प्रकार होनी चाहिए। अगर वुफटाइर् अच्छी नहीं होगी तो मूतिर् चटक जाएगी और पकते समय टूट भी सकती है। वूफट कर तैयार हुइर् मि‘ी को गीले कपडे़ या बोरी में लपेटकर पाॅलीथीन से ढक दो ताकि मि‘ी सूख न पाए। अगर सूख गइर् तो तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। अब हमें यह तय करना है कि हम किस तरीके से मूतिर् बनाना चाहते हैं। चाक पर बनाने के लिए तो चाक न केवल चाहिए होगा वरन् उसे वैफसे चलाते हैं यह भी सीखना होगा। अपने गाँव के वुफम्हार के पास जाकर तुम चाक चलाना सीख सकते हो। बहरहाल हम तुम्हें दोनों ही तरीके बताएँगे। तुम खुद करके देखना कौन सा तरीका सुविधाजनक या आसान है। मूतिर् बनाते समय हमें वुफछ छोटी - मोटी चीशों की शरूरत पड़ेेगी। जैसे बाँस के टुकड़े, जिन्हें चावूफ से छीलकर अलग - अलग आकार दिया जा सके। बाँस के इन टुकड़ों की मदद से हम मूतिर् में से अनावश्यक मि‘ी खुरच सकते हैं। इनकी मदद से मूतिर् में कोइर् अंग उभार सकते हैं। इसके अलावा पुराना चावूफ, लकड़ी आदि की भी आवश्यकता होगी। हाथ से मूतिर् बनाना हाथ से तीन तरह की मूतिर्याँ बनाइर् जा सकती हैं। ठोस, पोली तथा रिलीपफ ;उभरी हुइर्द्ध। मि‘ी की मूतिर्याँध्89 ठोस मूतिर् पहले ठोस मूतिर् की बात करें। यह सबसे सरल तथा आसान है। पर इस तरह की मूतिर्याँ श्यादा बड़ी नहीं बना सकते। अिाक से अिाक एक बिलांस यानी 15 - 20 सेंटीमीटर उँफची। अच्छा बताओ सबसे पहले क्या बनाएँ ! अरे यह क्या.... कोइर् बिल्ली बनाना चाहताहै, कोइर् वुफत्ता, कोइर् शेर, गधा, हाथी, घोड़ा, पक्षी...! चलो ऐसा करते हैं घोड़ा बनाते हैं। इसके बाद तुम स्वयं अन्य मनचाही चीशें बनाना। तैयार मि‘ी से रोटी की लोइर् के बराबर दो हिस्से लो। लोइर् जैसे दो गोले बनाओ। अब दोनों गोलों को एक - एक करके पत्थर या प‘े पर रखकर लंबा करो। जब वह एक बिलांस लंबे हो जाएँ तो दोनों को चित्रानुसार बीच से जोड़ते हुए खड़ा करो। अब थोड़ी - सी मि‘ी और लो और इस मि‘ी से घोड़े के सिर का आकार बनाकर जोड़ पर लगा दो। मि‘ी को थोड़ा सा दबाकर दोनों तरप़्ाफ कान बना दो। तीली या सींक से छेद करके आँखें बना दो। लो बन गया अपना घोड़ा! भइर् ये एकदम सचमुच के घोड़े जैसा तो नहीं दिखेगा। इस तरीके से तुम लगभग सभी चैपाए जानवर बना सकते हो और मानव आवृफतियाँ भी बना सकते हो। पर छोटी - छोटी ही। ठोस रूप में श्यादा बड़ी बनाने से सूखते समय या पकाते समय चटकने या टूटने का अंदेशा रहता है। पोली मूतिर् आओ अब पोली मूतिर् बनाने का तरीका देखें।पोली मूतिर् चाहे जितनी बड़ी बना सकते हैं, बशतेर् उसे सँभाला जा सके यानीऐसा न हो कि हम बाहर का हिस्सा मिला रहे हैं और अंदर की मि‘ी गिर रही है याइतनी शोर से ठोक रहे हैं कि कहीं और से टेड़ा हो रहा है। वास्तव में आधर से बहुतश्यादा बाहर की ओर निकली हुइर् चीशें इस तरीके से नहीं बना सकते। साधारण रूपसे एक बार में 3 पुफट लंबी मूतिर् बना सकते हैं। साॅकेट सिस्टम से चाहे जितनी उफँचीमूतिर् बना सकते हैं यानी यदि मानव की मूतिर् बनानी हो तो हाथ अलग, पैर अलग,सिर अलग बनाकर पिफर उन्हें जोड़ लिया जाता है। इन्हें शरूरत पड़ने पर अलग भीकिया जा सकता है।जैसे पहले मि‘ी की लंबी प‘ियाँ बनाइर् थीं, वैसी ही आठ - दस प‘ियाँ बना लो।प‘ियों के दोनों सिरे जोड़कर छल्ले बनाओ और इन्हें एक के उफपर एक रखते जाओ। 90ध्दूवार् तुम यह तो समझ ही गए होगे कि प‘ियों की लंबाइर् तथा छल्लोंका आकार लगभग समान होना चाहिए। छल्लों से एक लंबी जारजैसी रचना बन जाएगी। अब अंदर की तरप़्ाफ हाथ का सहारालगाकर बाहर से छल्लों के जोड़ों को मिलाकर एक सा कर लो।इसी तरह बाहर से हाथ का आधार देकर अंदर के जोड़ भी मिलादो। तुमने वुफम्हार को मटकों को ठोक - ठोक कर बनाते देखा होगा।उसी तरह कोइर् बेलनाकार लकड़ी की वस्तु या टूटा बेलन लेकरअंदर से हाथ लगाते हुए बाहर से ठोको और पिफर बाहर से हाथलगाकर अंदर से ठोको। ठोकना धीरे - धीरे ही, क्योंकि गीली मि‘ी होने के कारणठोकने से पैफलेगी। इस बात का ध्यान रखना कि श्यादा नहीं पैफले। क्योंकि श्यादा पतलाहोने पर तुम्हारी जार जैसी रचना टूट सकती है। यह एक - डेढ़ सेंटीमीटर से अिाकपतला नहीं होना चाहिए।इस बार हम मानव आवृफति बनाते हैं। पर इसमें भी हाथ - पैर सबचिपके हुए होंगे। कहीं दबाकर, कहीं उभारकर, कहीं छेद करके याकाटकर इसे आकार देना होगा। इसे वैफसे बनाना है यह चित्रों कोदेखकर समझने की कोश्िाश करो।भारत में वुफछ जगह इन मृण - मूतिर्यों के लिए प्रसि( हैं जैसेबंगाल में बाँवुफराऋ उत्तर प्रदेश में गोरखपुरऋ राजस्थान में मुलैला औरमध्य प्रदेश में बस्तर। राजस्थान के मुलैला नामक गाँव, जो नाथद्वाराके पास है, के कलाकार रिलीपफ बनाने के लिए प्रसि( हैं। ये बहुतबडे़ - बड़े लगभग 7ग7 पुफट के बनते हैं, इन्हें पकाया भी जाता है। इन कलाकारों मेंसे वुफछ नाम हैंμकिशनलाल वुफम्हार, खेमराज वुफम्हार, लोगरलाला वुफम्हार। यहाँ केवुफछ वुफम्हारों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार फ्मास्टर व्रफाफ्रट मैनय् भी मिल चुका है।देश के इन आदिवासी और लोक कलाकारों की वृफतियाँ विदेशों में भी प्रदश्िार्त की गइर् हैं। उभरी हुइर् ;रिलीपफद्ध मूतिर् अब देखते हैं कि रिलीपफ यानी उभारदार मूतिर् वैफसे बनाइर् जाती है। ऐसी उभारदार मूतिर्याँ तुमने अपने आसपास घरों में देखी होंगी। इन्हें मि‘ी से बनाने की एक कोश्िाश हम भी कर देखते हैं। पहले एक छोटी मूतिर् बनाते हैं। पिफर तुम चाहो तो बड़ी या अपने घर की दीवार पर बनाना चाहो तो बना सकते हो। पत्थर या लकड़ी का एक समतल 45ग45 मि‘ी की मूतिर्याँध्91 सेंटीमीटर का या इससे बड़ा टुकड़ा लो। उस पर तैयार मि‘ी से लगभग 3 सेंटीमीटर मोटी और 30 सेंटीमीटर लंबी और 30 सेंटीमीटर चैड़ी तह जमाओ। चारों तरप़्ाफ से और उफपर से भी इसे एक सा कर लो। इस पर बनाने के लिए ऐसी चीश चुनो जिसमें बहुत श्यादा गइे या उभार न हों क्योंकि इसी से आगे चलकर हम तुम्हें प्लास्टर में साँचा बनाना और साँचे से मूतिर् ढालना बताएँगे। तब ऐसी रचना होने से आसानी होगी। इस बार हम हाथी चुनते हैं। अब मि‘ी से बनी अपनी प्लेट पर हाथी की उभारदार आवृफति बनाते हैं। चाहो तो सींक से हाथी की आवृफति प्लेट पर बना लो और पिफर मि‘ी लगाना शुरू करो। मान लो हाथी का यह चित्रा तुमने अपनी मि‘ी की प्लेट पर बनाया । इसके पीछे की तरप़्ाफ वाले जो दो छोटे पैर दिख रहे हैं उसे थोड़ी सी मि‘ी लगाकर उभारो। आगे की तरप़्ाफ जो थोड़े लंबे पैर दिख रहे हैं उन्हें थोड़ी श्यादा मि‘ी लगाकर उभारो। पेट;धड़द्धको पैरों से थोड़ा और उँफचा बनाओ। चेहरे को पेट से थोड़ा कम, पैरों के बराबर उभारो। कान के लिए एक पतली सी मि‘ी की तह जमाकर कान का आकार दे दो। छोटी सी पूँछ भी बना दो। आँख के लिए सींक से छेद कर सकते हो, हलका - सा बहुत गहरा नहीं। अब हाथी के शरीर को गोलाइर् देना है। यह तुम पुराने चावूफ या बाँस की चिकनी प‘ी से दे सकते हो। अब हाथ थोड़ा गीला करके इन सबको एक सा करो। एक - दो घंटे इसे गीलेकपड़े और पÂी से ढक कर रख दो। मि‘ी थोड़ी कड़क हो जाएगी। पिफर चावूफ या बाँस से थोड़ा रगड़कर उसे चिकना करो। जब ये मूतिर् चिकनी हो जाए तो इस पर हलकी सी चमक आ जाएगी। ;अगर इसे इस तरह से चिकना कर लोेगे तो बाद में ढालने में आसानी होगी।द्ध चाक की मदद से मूतिर् आओ अब देखते हैं कि चाक पर मूतिर् वैफसे बनाते हैं। वास्तव में चाक पर पूरी मूतिर् नहीं बनती। मूतिर् के वुफछ हिस्सांे को चाक पर बनाया जाता है। उदाहरण के लिए हम 92ध्दूवार् हाथी वफी ही बात करें। अगर तुमने चाक चलाना सीख लिया है तो मि‘ी के चार वुफल्हड़, एक दिया, दो मटके ;एक छोटा, एक बड़ाद्ध बना लो। अब वुफल्हड़ों को उल्टा करके इस तरह जमाओ कि वे हाथी के पैरों का रूप ले लें। इन पैरों पर बड़ा मटका रख कर मि‘ी से जोड़ दो। छोटे मटके को आगे सिर की जगह रखकर जोड़ो। नीचे से वुफछ आधार लगाओ, नहीं तो सिर गिर पड़ेगा। अब दिये को बीच से काटकर दो भागोें में बाँट लो। इनसे कान बनाओ। गीली मि‘ी लेकर हाथी वफी सूँड और पूँछभी बना लो। आँखों की जगह दो बड़े छेद चवÂी के आकार के बना दो। देखो कितनाप्यारा हाथी बना है। छत्तीसगढ़ के एक इलाके में ऐसा हाथी बहुतायत मात्रा में बनाया जाता है। जानते हो, खरीददार क्या कीमत देते हैं इसकी? कीमत के रूप में उसी हाथी के पेट में धान भरकर एक नयी चादर से ढक दिया जाता है। यानी जितना बड़ा हाथी होगा वुफम्हार को उतनी ही श्यादा धान मिलेगी। मूतिर् तो बना ली। अब अगर इन्हें श्यादा दिन तक सुरक्ष्िात रखना चाहते हो तो पकाना पड़ेगा। तुमने वुफम्हार वफो आवा;भ‘ीद्धलगाते हुए देखा होगा। अपनी बनाइर् हुइर् मूतिर् को तुम खुद भी पका सकते हो। वैफसे पकाना है, यह हम बता रहे हैं। पर अगर जगह और साधन का जुगाड़ नहीं कर सकते, तो इसे वुफम्हार के यहाँ देकर भी पकवा सकते हो। वुफम्हार अपने मटके, गमले आदि के साथ तुम्हारी मूतिर् भी पका देगा। पकाने के पहले सुखाना मूतिर् को पकाने के लिए सुखाना पड़ता है। सुखाते समय वुफछ सावधानियाँ रखनी होती हैं वरना मूतिर् चटक या टूट सकती है। सूखने में समय भी लगता है। जब तुम्हारी मूतिर्बन जाए तो इसे एकदम खुली जगह में मत छोड़ो। पÂी से ढककर रखो। पर दिन में तीन - चार बार एक - दो घंटे के लिए खोल भी दो, ताकि उसे हवा लग सके। यह भी देखते रहना कि कहीं तुम्हारी मूतिर् में दरार तो नहीं पड़ रही। अगर पड़ रही हो तो उसे बंद करने की कोश्िाश करो। इस तरह तीन - चार दिन तक सुखाओ। इसके बाद मूतिर् को कपड़े से लपेट दो, धीरे - धीरे मूतिर् सूखने लगेगी।दो - तीन दिन बाद कपड़ा और पÂी हटाकर देखो। अगर उफपर की सतह सूख गइर् है तो अब मूतिर् को खुला छोड़ दो। जब तुम्हें लगे कि मूतिर् बिलवुफल सूख गइर् है, तो दिन भर के लिए उसे धूप में रख दो। इससे अगर मूतिर् के भीतर थोड़ी - बहुत नमी रह गइर् होगी तो वह सूख जाएगी। अब मूतिर् पकने के लिए तैयार है। मि‘ी की मूतिर्याँध्93 पकाने के लिए भ‘ी मूतिर् पकाने के लिए ऐसा दिन चुनो जब मौसम बिलवुफल सापफ हो और बारिश होने़का अँदेशा न हो। भ‘ी लगाने के लिए 20.25 कंडे, लकड़ी के छोटे - छोटे टुकड़े, सूखी घास ;पै¯कग में काम आने वाला भूसा या पुआलद्ध, मि‘ी और एक बालटी पानी की जुगाड़ करो। अब खुली शमीन पर एक इतना बड़ा गइा खोदो कि जिसमें तुम्हारी मूतिर् आसानी से खड़ी हो सके। यह एक बिलांस यानी करीब आधा पुफट गहरा गइा हो। गइे में वंफडे के टुकड़ों की एक तह बिछा दो और उस पर अपनी मूतिर् खड़ी कर दो। अब मूतिर् को चारों तरप़्ाफ से लकड़ी के टुकड़ों तथा वंफडों के टुकड़ों से ढक दो। बीच - बीच में पुआल भी लगा दो। अब चारों तरपफ से बड़े - बड़े वंफडे लगा दो और उफपर से पुआल। मि‘ी को पानी में घोलकर गाढ़ा सा घोल बनाओ। इस घोल की एक मोटी परत पुआल के उफपर चढ़ा दो यानी लीप दो। हाँ, दो - तीन जगह धुआँ निकलने व एक जगह नीचे की तरप़्ाफ आग लगाने के लिए छेद छोड़ दो। तो इस तरह तुम्हारी भ‘ी तैयार है। कागश की एक पुँगी बना लो और उसमें आग लगाकर नीचे वाले छेद से धीरे - धीरे अंदर डालो। जब अंदर का पुआल व वंफडे जलने लगें तो उसे छोड़ दो। वंफडे धीरे - धीरे जलेंगे। अब पाँच - छह घंटे के लिए इसे भूल जाओ। यह अपने आप धीरे - धीरे जलेगा और बुझेगा। तुम इसे बिलवुफल मत छेड़ना, न जल्दी जलाने या बुझाने की कोश्िाश करना, वरना गड़बड़ हो जाएगी। पाँच - छः घंटे बाद जब भ‘ी ठंडी हो जाए तब इसे ध्ीरे - ध्ीरे खोलना। मूतिर् को एकदम उतावली में हाथ मत लगाना, वह गरम होगी। मूतिर् को अपने आप ठंडी होने देना, पानी डालकर ठंडी मत करना। तो लो तुम्हारी मूतिर् तैयार है अगर इसे सँभालकर रखो तो यह लंबे समय तक रह सकती है। एक और बात, मूतिर् पकने के बाद हल्के लाल रंग की होगी, जैसा मटके का रंग होता है। इसे श्यादा लाल करना चाहो तो गेरू से कर सकते हो। वैसे तो तुम अपने मन चाहे रंग उफपर से लगा सकते हो। इसमें एक मशेदार बात है, ये मूतिर्याँ पकने के बाद काले रंग की भी हो सकती हैं, मगर वैफसे? यह हम तुम्हारे लिए छोड़ते हैं। तुम्हीं करके देखो और हमें भी बताओ। पर उफपर से काला रंग मत कर लेना। μ जया विवेक

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