छठा पाठ गारो मेघालय राज्य की एक प्रमुख जनजाति है गारो। गारो लोग स्वभाव से ही शांतिपि्रय, परिश्रमी और प्रवृफति को प्यार करने वाले होते हैं। इसी गारो समाज के दो महापुरुषों के नाम हैं - जा पा जलिन पा और सुक पा बुंगि पा। गारो समाज इन दो महापुरुषों को बड़ी श्र(ा से याद करता है। गारो लोग ‘मेघालय’ में वैफसे बस गए, इसके बारे में एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि हशारों साल पहले गारो लोगों के पूवर्ज चीन और तिब्बत की ओर सुदूर घाटियों में इधर - उधर भटकते रहते थे। जहाँ खाने - पीने का साधन मिल जाता, वहाँ रुक जाते। जब भोजन की कठिनाइर् होती तो नए स्थानों की खोज में निकल पड़ते। यह खानाबदोश जीवन कब तक चलता रहा होगा, वुफछ सही - सही नहीं कहा जा सकता। भोजन की तलाश में भटकने के अतिरिक्त गारो लोगों को विषम मौसम और जंगली जानवरों का भी सामना करना पड़ता था। इस कारण गारो लोग बहुत परेशान होते थे। उन्हीं दिनों गारो समाज में जा पा जलिन पा और सुक पा बुंगि पा का जन्म हुआ था। इन दो महापुरुषों ने अपने लोगों की परेशानियों को देखा और समझा। दोनों ने गारो लोगों को उस विषम परिस्िथति से निकालकर कहीं अच्छे स्थान पर ले जाने का प़्ौफसला किया। दोनों महापुरुषों ने गारो लोगों को एकत्रिात किया। उन्होंने बताया कि वे उन्हें एक सुंदर स्थान पर ले जाएँगे। गारो लोग उनका बहुत सम्मान करते थे। सभी लोगों ने उनकी बात मान ली। कहा जाता है कि जलिन पा और बुंगि पा इतने निडर 30ध्दूवार् और प्रभावशाली व्यक्ित थे कि जंगलों के खूँखार जानवर भी उनकी आहट या आवाश सुनकर भागने लगते थे। वे भयंकर तूप़्ाफानों में भी सही मागर् और दिशा का पता लगा लेते थे। रात में भी उन्हें अपने साथ्िायों का मागर्दशर्न करने में कभी परेशानी नहीं होती थी। अपने सहज बोध और विवेक द्वारा वे आने वाले संकट का पूवार्नुमान कर लेते और अपने साथ्िायों को मुसीबतों से बचा लेते। इस तरह सारे गारो एक साथ हिमालय की तराइर् को पार करते हुए ब्रह्मपुत्रा नदी - घाटी की ओर बढ़े। वेअपनी संपिाμघोड़े, जानवर आदि अपने साथ लेकर चल रहे थे। कभी - कभी महीनों तक चलते रहते और कहीं - कहीं वषो± ठहर जाते। वषो± तक इस प्रकार यात्रा होती रही। वे हिमालय की घाटियों के बीच रास्ता नापते रहे। जलिन पा और बुंगि पा ने अपने साथ्िायों को सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। गारोध्31 कइर् वषो± की कठिन यात्रा के बाद गारो लोग असम के मैदानी जंगलों में आ पहुँचे। कहा जाता है कि उनका पहला पड़ाव वुफचविहार के वनों में हुआ। वुफचविहार पर उन दिनों असम के राजा का अिाकार था। उसने गारो लोगों को आगे बढ़ने से रोक दिया। गारो लोग प्रारंभ से ही शंातिपि्रय रहे हंै। उन्होंने लड़ाइर् का रास्ता नहीं अपनाया। जलिन पा और बुंगि पा ने असम के राजा से बातचीत करके उन्हें समझाया। असम का राजा उन्हें मागर् देने के लिए सहमत हो गया। उसका विवाह एक गारो सुंदरी से करा दिया गया। इस तरह वातावरण मित्रातापूणर् हो गया। वुफछ विद्वानों का अनुमान है कि यह घटना लगभग प्रथम सदी इर्सा पूवर् की है। आज वुफचविहार इलाका पश्िचम बंगाल राज्य में पड़ता है। कहा जाता है कि गारो समाज के वुफछ लोग वुफचविहार क्षेत्रा में बस गए थे। आज भी वुफचविहार क्षेत्रा में तथा आसपास के कइर् स्थानों में गारो समाज के लोग रहते हैं। अब जलिन पा और बुंगि पा ने अपने लोगों को गारो पहाड़ी की घाटियों की ओर चलने की सलाह दी। यह घाटी बहुत ही सुंदर थी। यहाँ पहाड़ी झरने, जंगली पूफल, पफल, जड़ी - बूटियाँ और पशु - पक्षी वातावरण को और अिाक आकषर्क बना रहे थे। शमीन भी बहुत उपजाउफ थी। इस कारण उन्होंने वहीं बसने का पैफसला किया। आज यह क्षेत्रा गारो समाज का मूल निवास स्थान बन गया है। गारो लोग इस क्षेत्रा को अपनी पवित्रा भूमि मानते हैं। गारो लोग प्रारंभ से ही प्रवृफति के विभ्िान्न प्रकार के संसाधनों की तलाश करना ही अपना मनोरंजन मानते हैं। जंगलों में घूमना, पफल - पूफलों, अन्न, कंद - मूल आदि की खोज करना, खेती के लिए उपजाउफ भूमि की पहचान करना आदि उनको शुरू से ही पसंद रहे हैं। आज भी गारो लोगों ने अपने पारंपरिक हुनर को कायम रखा हुआ है। गारो समाज और गारो संस्वृफति भारत का गौरव है। गारो समाज आज भी जलिन पा और बुंगि पा को बड़ी श्र(ा और आदर से याद करते हैं। 32ध्दूवार् सुदूर - बहुत दूर में आ रहा हो विषम - कठिन कायम - स्थायी प्रोत्साहित करना - बढ़ावा देना पड़ाव - मुकाम, यात्रिायों के सहमत - राशी होना रातभर या वुफछ समय अनुमान - अंदाशा के लिए ठहरने का पारंपरिक - बहुत समय से चला स्थान आ रहा हुनर - कारीगरी, कौशल 1. पढ़ो और समझो जन $ जाति त्र जनजाति शांति $ पि्रय त्र शांतिपि्रय महा $ पुरुष त्र महापुरुष मित्राता $ पूणर् त्र मित्रातापूणर् 2. पाठ संबंधी प्रश्न क पाठ के आधार पर गारो जनजाति के बारे में वुफछ पंक्ितयाँ लिखो। ख गारो लोग एक स्थान पर क्यों बस जाना चाहते थे? ग जा पा जलिन पा और सुक पा बुंगि पा का नाम आदर से क्यों लिया जाता है? 3. सोचो और जवाब दो क जंगलों से हमें कौन - कौन सी चीशें प्राप्त होती हैं? ख गारो पहाड़ किस प्रदेश में हैं? मानचित्रा पर उस प्रदेश का नाम लिखो। 4. वुफछ यह भी करो क अपने प्रदेश या किसी अन्य राज्य की किसी जनजाति के बारे में पता करो। उसके बारे में अपनी कक्षा में बताओ। गारोध्33 ख यह पाठ एक लोककथा पर आधारित है। अगर तुमने भी कभी कोइर् लोककथा सुनी है तो लोककथा और सामान्य कहानी के बारे में अपनी कक्षा में चचार् करो। ग गारो लोगों ने बहुत लंबी यात्रा की थी। यदि तुमने भी कोइर् लंबी यात्रा की हो तो अपनी यात्रा के बारे में लिखो। 5. बार - बार बोलो वषो± तक इस प्रकार यात्रा होती रही। वषो± तक इस प्रकार यात्रा होती ही रही। नीचे लिखे वाक्यों में सही जगह पर ‘ही’ लगाकर बोलोμ क सुधा सुबह तक पढ़ती रही। ख यह पंखा हमेशा आवाश करता रहता है। ग गारो लोगों का खानाबदोश जीवन कइर् सालों तक चलता रहा। घ सुशील थककर सो गया।घ दो घंटे बाद बस चल पड़ी। 6. सही - सही नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो - वि......य साह..... आक......र्क पुरु..... ......ेष वि..... वि......म ......त्राु ......टकोण व......ार् व......र् ......मुद्र ......हज 7. इन शब्दों की रचना देखोे सामाजिक, पारंपरिक। ये शब्द इक ;तितद्ध प्रत्यय लगाकर बनाए गए हैं। इसी प्रकार इक प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाओ।

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