चिडि़या और चुरंफगुन छोड़ घोंसला बाहर आया, देखी डालें, देखे पात,और सुनी जो पत्ते हिलमिल करते हैं आपस में बातऋ - माँ, क्या मुझको उड़ना आया? ‘नहीं, चुरंफगुन, तू भरमाया’ 2 ध्दूवार् कच्चे - पक्के पफल पहचाने, खाए और गिराए काट, खाने - गाने के सब साथी देख रहे हैं मेरी बाटऋ - माँ, क्या मुझको उड़ना आया? ‘नहीं, चुरंफगुन, तू भरमाया’ उस तरफ से इस तरफ पर आता, जाता हूँ धरती की ओर, दाना कोइर् कहीं पड़ा हो चुन लाता हूँ ठोक - ठठोरऋ माँ, क्या मुझको उड़ना आया? ‘नहीं, चुरंफगुन, तू भरमाया’ मैं नीले अज्ञात गगन की सुनता हूँ अनिवार पुकार कोइर् अंदर से कहता है उड़ जा, उड़ता जा पर मारऋ - 1. नमूने के अनुसार लिखो क डाली से डाली पर पहुँचा, देखी कलियाँ देखे पूफल। ख खाने - गाने के सब साथी, देख रहे हैं मेरी बाट। ग कच्चे - पक्के पफल पहचाने, खाए और गिराए काट। घ उस तरफ से इस तरफ पर आता, जाता हूँ धरती की ओर। 2. कविता से क चुरुंगुन अपने ‘उड़ने’ के बारे में बार - बार अपनी माँ से क्यों पूछता है? ख चुरंफगुन को कौन - कौन सी चीशें अच्छी लगती हैं? चुरंफगुन अभी - अभी अपने घोंसले से निकला है। पिफर भी वह पूरी दुनिया के बारे में जानना चाहता है। तुम किन चीशों के बारे में जानना चाहते हो? 4 ध्दूवार् 3. क्रम से लगाओ नीचे वुफछ चीशों के नाम लिखे हैं। चुरुंगुन ने पहले किसे देखा? व्रफम से लगाओ। कली μ पूफल μ पफल μ साथी μ तरफ μ दाना μ डैना μ 6. बार - बार बोलो और प्रत्येक शब्द से वाक्य बनाओ μ ढाल μ भात μ मूल μ धान μ पल

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