भोर और बरखा रजनी बीती, भोर भयो है, घर - घर खुले ¯वफवारे। गोपी दही मथत, सुनियत हैं वंफगना के झनकारे।। उठो लालजी! भोर भयो है, सुर - नर ठाढे़ द्वारे। ग्वाल - बाल सब करत वुफलाहल, जय - जय सबद उचारै।। माखन - रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै।। बरसे बदरिया सावन की। सावन की, मन - भावन की।। नन्हीं - नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की। मीरा के प्रभु गिरधर नागर! आनंद - मंगल गावन की।। ऽ कविता से 1.‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन - कौन सी बातें कहती हैं? 2.नीचे दी गइर् पंक्ित का आशय अपने शब्दों में लिख्िाएμ ‘माखन - रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।’ 3.पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वणर्न कीजिए। 4.मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा? 5.पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिख्िाए। 1.मीरा भक्ितकाल की प्रसि( कवयित्राी थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक - एक रचना का नाम लिख्िाए। 2.सावन वषार् )तु का महीना है, वषार् )तु से संबंिात दो अन्य महीनों के नाम लिख्िाए।120 भोर और बरखा 1.सुबह जगने के समय आपको क्या अच्छा लगता है? 2.यदि आपको अपने छोटे भाइर् - बहन को जगाना पड़े, तो वैफसे जगाएँगे? 3.वषार् में भीगना और खेलना आपको वैफसा लगता है? 4.मीरा बाइर् ने सुबह का चित्रा खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिख्िाए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह वैफसी होती हैμ ;कद्ध गाँव, गली या मुहल्ले में ;खद्ध रेलवे प्लेटप़्ाफाॅमर् पर ;गद्ध नदी या समुद्र के किनारे ;घद्ध पहाड़ों पर 1.कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे’ कहा गया है जिसका अथर् है गौओं का पालन करनेवाले। इसके लिए एक शब्द दें। 2.नीचे दो पंक्ितयाँ दी गइर् हैं। इनमें से पहली पंक्ित में रेखांकित शब्द दो बार आए हैं, और दूसरी पंक्ित में भी दो बार। इन्हें पुनरुक्ित ;पुनः उक्ितद्ध कहते हैं। पहली पंक्ित में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और दूसरी पंक्ित में संज्ञा। ‘नन्हीं - नन्हीं बूँदन मेहा बरसे’ ‘ ऽ वुफछ करने को ऽ 121

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भोर और बरखा 16



जागो बंसीवारे ललना!

जागो मोरे प्यारे!

रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किवारे।

गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे।।

उठो लालजी! भोर भयो है, सुर-नर ठाढ़े द्वारे।

ग्वाल-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै।।

माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै।।

2

बरसे बदरिया सावन की।

सावन की, मन-भावन की।।

सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।

उमड़-घुमड़ चहुँदिस से आया, दामिन दमकै झर लावन की।।

नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर! आनंद-मंगल गावन की।।


मीरा बाई


प्रश्न-अभ्यास

कविता से

  1. ‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं?
  2. नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए-
  3. ‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।’
  4. पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।
  5. मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा?
  6. पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।

    कविता से आगे

  1. मीरा भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
  2. सावन वर्षा ऋतु का महीना है, वर्षा ऋतु से संबंधित दो अन्य महीनों के नाम लिखिए।

    अनुमान और कल्पना

  1. सुबह जगने के समय आपको क्या अच्छा लगता है?
  2. यदि आपको अपने छोटे भाई-बहन को जगाना पड़े, तो कैसे जगाएँगे?
  3. वर्षा में भीगना और खेलना आपको कैसा लगता है?
  4. मीरा बाई ने सुबह का चित्र खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिखिए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह कैसी होती है-

    (क) गाँव, गली या मुहल्ले में

    (ख) रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर

    (ग) नदी या समुद्र के किनारे

    (घ) पहाड़ों पर

    भाषा की बात

  1. कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे’ कहा गया है जिसका अर्थ है गौओं का पालन करनेवाले। इसके लिए एक शब्द दें।
  2. नीचे दो पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें से पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द दो बार आए हैं, और दूसरी पंक्ति में भी दो बार। इन्हें पुनरुक्ति (पुनः उक्ति) कहते हैं। पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और दूसरी पंक्ति में संज्ञा।

    नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे’

    घर-घर खुले किवारे’

    इस प्रकार के दो-दो उदाहरण खोजकर वाक्य में प्रयोग कीजिए और देखिए कि विशेषण तथा संज्ञा की पुनरुक्ति के अर्थ में क्या अंतर है?

    जैसे–मीठी-मीठी बातें, फूल-फूल महके।

    कुछ करने को

    कृष्ण को ‘गिरधर’ क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कौन सी कथा है? पता कीजिए और कक्षा में बताइए।



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