वुफरनूल में कपास उगाने वाली एक किसान स्वप्ना, जो वुफरनूल ;आंध््र प्रदे}ाद्ध की एक छोटी किसान है, अपने छोटे - से खेत में कपास उगाती है। कपास के पौधें पर आए डोडे पक रहे हैं और उनमें से वुफछ चटक भी चुके हैं, इसलिए स्वप्ना रूइर् चुनने में व्यस्त है। डोडे, जिनमें रूइर् भरी है एक साथ चटक कर नहीं खुलते हैं। इसलिए रूइर् की पफसल इकट्ठा करने के लिए कइऱ्दिन का समय लग जाता है। रूइर् एकत्रा हो जाने के बाद स्वप्ना उसे अपने पति के साथ वुफरनूल के कपास बाशार में न ले जाकर एक स्थानीय व्यापारी के पास ले जाती है। प़्ाफसल की बोनी शुरू करने के समय स्वप्ना नेव्यापारी से खेती करने के लिए बीज, खाद, कीटना}ाक आदि खरीदने के लिए बहुत उँफची ब्याज दर पर 2,500 रफपए कशर् परलिए थे। उस समय स्थानीय व्यापारी ने स्वप्ना को एक }ातर् मानने के लिए सहमत कर लिया था। उसने स्वप्ना से वादा करवा लिया था कि वह अपनी सारी रूइर् उसे ही बेचेगी। कपास की खेती में बहुत अध्िक निवे}ा करने की शरूरत पड़ती़है, जैसे - उवर्रक, कीटना}ाक आदि। इन पर किसानों को कापफी व्यय करना पड़ता है। प्रायः छोटे किसानों को इन खचो± की पूतिर् करने के लिए पैसा उधर लेना पड़ता है। व्यापारी के परिसर में उसके दो आदमी रूइर् के बोरे तोल रहे थे। 1,500 रफपए प्रति क्िवंटल के हिसाब से रूइर् 6,000 रफपये की हुइर्। व्यापारी ने दिए हुए )ण तथा ब्याज के 3,000 रफपए काट लिए और स्वप्ना को 3,000 रफपये ही दिए। स्वप्ना μ केवल 3,000 रफपए! व्यापारी μ रूइर् बहुत सस्ती बिक रही है। बाशार में बहुत रूइर् आ गइर् है। स्वप्ना μ इस रूइर् को उगाने में मैंने चार महीने तक जी - तोड़ मेहनत की है। आप देख्िाए इस बार रूइर् कितनी बढि़या और साप़्ाफ है। इस बार मुझे बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद थी। क्या स्वप्ना को रूइर् का उचित मूल्य प्राप्त हुआ? व्यापारी ने स्वप्ना को कम मूल्य क्यों दिया? आपके विचार से बड़े किसान अपनी रूइर् कहाँ बेचंेगे? उनकी स्िथति किस प्रकार स्वप्ना से भ्िान्न है? व्यापारी μ अम्मा, मैं आपको अच्छी कीमत दे रहा हूँ। दूसरे व्यापारीइतनी भी नहीं देंगे। आपको मेरा वि}वास न हो, तो वुफरनूल के बाशार में जाकर पता लगा आओ। स्वप्ना μ नाराश न हों। मैं भला आप पर वैफसे संदेह कर सकती हँू? मैंने तो केवल उम्मीद की थी कि इस बार रूइर् की प़्ाफसल में इतनी आमदनी हो जाएगी कि वुफछ महीनों का गुशारा चल सके। यद्यपि स्वप्ना जानती है कि कपास कम - से - कम 1800 रफपए प्रति क्िवंटल में बिकेगी, लेकिन वह आगे बहस नहीं करती। व्यापारीगाँव का }ाक्ित}ााली आदमी है और किसानों को कशेर् के लिए उस पर निभर्र रहना पड़ता है - न केवल खेती के लिए वरन् अन्यआव}यकताओं के लिए भी, जैसे - बीमारी, बच्चों की स्वूफल की पफीस आदि। पिफर वषर् में ऐसा समय भी आता है, जब किसानों को कोइर् काम नहीं मिलता है और उनकी कोइर् आय भी नहीं होती है। उस समय केवल )ण लेकर ही जीवित रहा जा सकता है। कपास की पैदावार करके भी स्वप्ना की आय उस आय से बस थोड़ी ही श्यादा है, जो वह मशदूरी करके कमा लेती। इरोड का कपड़ा बाशार तमिलनाडु में सप्ताह में दो बार लगने वाला इरोड का कपड़ा बाशारसंसार के वि}ााल बाशारों में से एक है। इस बाशार में कइर् प्रकार का कपड़ा बेचा जाता है। आसपास के गाँवों में बुनकरों द्वारा बनाया गया कपड़ा भी इस बाशार में बिकने के लिए आता है। बाशार के पास कपड़ा व्यापारियों के कायार्लय हैं, जो इस कपड़े को खरीदतेहैं। दक्ष्िाणी भारत के }ाहरों के अन्य व्यापारी भी इस बाशार में कपड़ा खरीदने आते हैं। बाशार के दिनों में आपको वे बुनकर भी मिलेंगे, जो व्यापारियोंके आॅडर्र के अनुसार कपड़ा बनाकर यहाँ लाते हैं। ये व्यापारी दे}ाव विदे}ा के वस्त्रा निमार्ताओं और नियार्तकों को उनके आॅडर्र के अनुसार कपड़ा उपलब्ध कराते हैं। ये सूत खरीदते हैं और बुनकरोंको निदेर्}ा देते हैं कि किस प्रकार का कपड़ा तैयार किया जाना है। निम्नलिख्िात उदाहरण में हम देखेंगे कि यह कायर् वैफसे होता है। दादन व्यवस्था - बुनकरों द्वारा घर पर कपड़ा तैयार करना कपड़ा उपलब्ध् कराने के जो आॅडर्र मिलते हैं, उनके आधर पर व्यापारी बुनकरों के बीच काम बाँट देता है। बुनकर व्यापारी से सूत लेते हैं और तैयार कपड़ा देते हैं। इस व्यवस्था से बुनकरों को स्पष्टतया दो लाभ प्राप्त होते हैं। बुनकरों को सूत खरीदने के लिए अपना पैसा नहीं लगाना पड़ता है। साथ ही तैयार कपड़ों को बेचने की व्यवस्था भी हो जाती है। बुनकरों को प्रारंभ में ही पता चल जाता है कि उन्हें कौन - सा कपड़ा बनाना है और कितना बनाना है। कच्चे माल को प्राप्त करने और तैयार माल की बिक्री के लिए भी व्यापारियों पर बनी निभर्रता के चलते व्यापारियों का बहुत वचर्स्व बन जाता है। वे आॅडर्र देते हैं कि क्या कपड़ा बनाया जाना है और इसके लिए वे बहुत कम मूल्य देते हैं। बुनकरों के पास यह जानने का कोइर् साध्न नहीं है कि वे किसके लिए कपड़ा बना रहे हैं और 1. बाशार में यह एक व्यापारी की दुकान है। कइर् सालों में इन व्यापारियों ने देश - भर के वस्त्रा निमार्ताओं से संपकर् स्थापित कर लिए हैं, जिनसे उन्हें आॅडर्र मिलते रहते हैं। वे अन्य लोगों से सूत खरीद कर लाते हैं। 2. कपड़ा बुनने वाले बुनकर आस - पास के गाँवों में रहते हैं। वे इन व्यापारियों से सूत ले आते हैं। बुनाइर् करने के करघे रखने के लिए उन्होंने अपने घरों के पास ही व्यवस्था कर रखी है। इस तसवीर में आप ऐसे एक घर में रखे हुए पावरलूम ;बिजली - चालित करघेद्ध को देख सकते हैं। बुनकर अपने परिवार के साथ इन करघों पर कइर् घंटों तक काम करते हैं। बुनाइर् की अध्िकतर ऐसी इकाइयों में 2 से लेकर 8 करघे तक होते हैं, जिन पर सूत से कपड़ा बुनकर तैयार किया जाता है। तरह - तरह की साडि़याँ, तौलिए, शटि±ग, औरतों की पोशाकों के कपड़े और चादरें इन करघों पर बनाइर् जाती हैं। 3. बुनकर तैयार किए हुए कपड़े को शहर में व्यापारी के पास ले आते हैं। इस तसवीर में बुनकर, शहर में व्यापारी के पास जाने की तैयारी में बैठे हैं। व्यापारी यह हिसाब रखता है कि उन्हें कितना सूत दिया गया था और बुने हुए कपड़े का भुगतान उन्हें कर देता है। इरोड के कपड़ा बाशार में निम्नलिख्िात लोग क्या काम कर रहे हैं - व्यापारी, बुनकर, नियार्तक? बुनकर, व्यापारियों पर किस - किस तरह से निभर्र हैं? यदि बुनकर खुद सूत खरीदकर बने वह किस कीमत पर बेचा जाएगा। कपड़ा बाशार में व्यापारी यह हुए कपड़े बेचते हैं, तो उन्हंे तीन गुना कपड़ा, पहनने के वस्त्रा बनाने के कारखानों को बेचते हैं। इस तरहश्यादा कमाइर् होती है। क्या यह संभव से बाशार का झुकाव व्यापारियों के हित में ही अध्िक होता है।है? चचार् कीजिए। बुनकर अपनी सारी जमा - पूँजी लगा कर या उँफची ब्याज दर परक्या इसी तरह की दादन व्यवस्था )ण लेकर करघे खरीदते हैं। एक करघे का मूल्य 20,000 रफपए है। पापड़, बीड़ी और मसाले बनाने में भी इसलिए छोटे बुनकर को भी दो करघों के लिए लगभग 40,000 रफपयेदेखने को मिलती है? अपने इलाके से का निवे}ा करना पड़ता है। इन करघों पर अकेले काम नहीं किया जाइस संबंध् में जानकारी इकट्ठी कीजिए सकता है। कपड़ा बनाने के लिए बुनकर और परिवार के दूसरे वयस्कऔर कक्षा में उस पर चचार् कीजिए। सदस्यों को दिन में 12 घंटे तक काम करना पड़ता है। इस पूरे कायर् द्वारा वे महीने में लगभग 3,500 रफपये ही कमा पाते हैं।आपने अपने इलाके में सहकारी संस्थाओं के बारे में सुना होगा, जैसे - व्यापारी और बुनकरों के बीच की यह व्यवस्था ‘दादन व्यवस्था’दूध्, किराना, धन आदि के व्यवसाय ;च्नजजपदह.वनज ैलेजमउद्ध का एक उदाहरण है, जहाँ व्यापारीमें। पता लगाइए कि ये किस के लाभ कच्चा माल देता है और उसे तैयार माल प्राप्त होता है। भारत केके लिए स्थापित की गईं थीं? अनेक क्षेत्रों में कपड़ा बुनाइर् के उद्योग में यह व्यवस्था प्रचलित है। बुनकर सहकारी संस्थाएँ हमने देखा कि दादन व्यवस्था में व्यापारी, बुनकरों को बहुत कम पैसा देते हैं। व्यापारियों के उफपर निभर्रता को कम करने और बुनकरों की आमदनी बढ़ाने के लिए सहकारी व्यवस्था एक साध्न है। एक सहकारी संस्था में वे लोग, जिनके हित समान हंै, इकट्ठे होकर परस्पर लाभ के लिए काम करते हैं। बुनकरों की सहकारी संस्था में बुनकर एक समूह बना कर वुफछ गतिविध्ियाँ सामूहिक रूप से करते हैं। वे सूत व्यापारी से सूत प्राप्त करते हैं और उसे बुनकरों में बाँट देते हैं। सहकारी संस्था विक्रय का कायर् भी, करती है। इस तरह व्यापारी की भूमिका समाप्त हो जाती है और बुनकरों को कपड़ों का उचित मूल्य प्राप्त होता है। कभी - कभी सरकार, उचित मूल्य पर सहकारी संस्थाओं से कपड़ा खरीद कर उनकी मदद करती है। जैसाकि तमिलनाडु में सरकार, स्वूफल में निः}ाुल्क गणवे}ा योजना चलाती है। सरकार इसके लिए पावरलूम बुनकरों की सहकारी संस्था से कपड़ा लेती है। इसी तरह सरकार, हस्तकरघा बुनकर सहकारी समिति से भी कपड़ाखरीद कर ‘को - ओपटेक्स’ नामक दुकानों के माध्यम से बेचती है। आपने अपने }ाहर में }ाायद कहीं ऐसी दुकानें देखी होंगी। दिल्ली के निकट वस्त्रा नियार्त करने का कारखाना इरोड का व्यापारी, बुनकरों द्वारा निमिर्त कपड़ा दिल्ली के पास बने - बनाए वस्त्रा नियार्त करने वाले एक कारखाने को भेजता है। वस्त्रा नियार्त करने वाली पैफक्टरी इसका उपयोग कमीशें बनाने के लिए करती है। ये कमीशंे विदेशी खरीदारों को नियार्त की जाती हैं। कमीशों के विदेशी ग्राहकों में अमेरिका और यूरोप के ऐसे व्यवसायी भी हैं, जो स्टोसर् की शृंखला चलाते हैं। ये बड़े - बड़े स्टोसर् के स्वामी केवल अपनी शतो± पर ही व्यापार करते हैं। वे माल देने वालों से न्यूनतम मूल्य पर माल खरीदने की माँग करते हैं। साथ ही वे सामानकी उच्चतम स्तर की गुणवत्ता और समय पर सामान देने की शतर् भी रखते हैं। सामान शरा - सा भी दोषयुक्त होने पर या माल देने में शरा भी विलंब होने पर बड़ी सख्ती से निपटा जाता है। इसलिए नियार्तक इन शाक्ितशाली ग्राहकों द्वारा निश्िचत की गइर् शतो± को भरसक पूरा करने की कोश्िाश करते हैं। ग्राहकों की ओर से इस प्रकार के बढ़ते दबावों के कारण वस्त्रा नियार्त करने वाले कारखाने, खचेर् में कटौती करने का प्रयत्न करते हैं। वे काम करने वालों को जहाँ तक संभव हो सके, न्यूनतम मशदूरी देकर अध्िकतम काम लेते हैं। इस तरह से वे अपना लाभ तो बढ़ाते ही हैं और विदेशी ग्राहकों को भी सस्ते दामों पर वस्त्रा देते हैं। एक गामे±ट पैफक्टरी में महिला मशदूर बटन टाँक रही हैं। विदेशों में खरीदार वस्त्रा नियार्त करने वालों से क्या - क्या अपेक्षाएँ रखते हैं? वस्त्रा नियार्तक इन शतो± को क्यों स्वीकार कर लेते हैं? वस्त्रा नियार्तक विदशी खरीदारों की शतो± को किस प्रकार पूरा करते हैं? इम्पेक्स गामे±ंट पैफक्टरी में अध्िक संख्या में महिलाओं को काम पर क्यों रखा गया होगा? चचार् कीजिए। मंत्राी को संबोध्ित करते हुए एक पत्रा लिखकर आपके विचार से मशदूरों के लिए जो उचित भुगतान है, उसकी माँग कीजिए। नीचे दी गइर् कमीश के चित्रा में दिखाया गया है कि व्यवसायी को कितना मुनाप़्ाफा हुआ और उसको कितना खचर् उठाना पड़ा। यदि कमीश का लागत मूल्य 600 रु. है, तो इस चित्रा से जानिए कि इस कमीश की कीमत में क्या - क्या शामिल होता है? इम्पेक्स गारमेंट पैफक्टरी में 70 कामगार हैं। उनमें से अध्िकां}ा महिलाएँ हैं। इनमें से अध्िकतर कामगारों को अस्थाइर् रूप से कामपर लगाया गया है। इसका आ}ाय यह है कि जब भी पैफक्टरीमालिक को लगे कि कामगार की आव}यकता नहीं है, वह उसे जानेको कह सकता है। कामगारों की मशदूरी उनके कौ}ाल के अनुसार तय की जाती है। काम करने वालों में अध्िकतम वेतन दशीर् को मिलता है जो लगभग 3,000 रफपए प्रतिमाह होता है। स्ित्रायों को सहायक के रूप में धगे काटने, बटन टाँकने, इस्तरी करने और पै¯कग करने के लिए काम पर रखा जाता है। इन कामों के लिए न्यूनतम मशदूरी दी जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में वह कमीश संयुक्त राज्य अमेरिका के कपड़ों की एक बड़ी दुकान पर बहुत - सीकमीशें प्रदिार्त की गइर् हैं। इनकी कीमत 26 डालर रखी गइर् है, अथार्त् हर कमीश 26 डालर यानी 1200 रफपये में बेची जाएगी। दिए गए चित्रा के अनुसार रिक्त स्थानों की पूतिर् करें μ कमीशों के व्यवसायी ने दिल्ली के वस्त्रा नियार्तक से कमीशंे ..................... रफपए प्रति कमीश के हिसाब से खरीदीं। पिफर उसने .......................... रफपए संचार साध्नों द्वारा विज्ञापन के लिए खचर् किए, इसके बाद लगभग प्रति कमीश ........... रफपएस्टोर में रखने, प्रद}ार्न व अन्य मद में खचर् किए। इस तरह से इस व्यक्ित को कमीश 600 रफपए लागत की पड़ी, जबकि वह उसे 1, 200 रफपए में बेचता है। एक कमीश पर उसे ........ का मुनाप़्ाफा हुआ। वह जितनी अध्िक संख्या में कमीशें बेचेगा, उसे उतना ही अध्िक लाभ होगा। वस्त्रा नियार्तक ने 200 रफपए प्रति कमीश के हिसाब से कमीशें बेचीं। कपड़ा व कमीश में लगने वाले अन्य कच्चे माल का मूल्य 70 रफपए प्रति कमीश के हिसाब से पड़ा। कामगारों की मशदूरी 15 रफपए प्रति कमीश और कायार्लय चलाने का खचर् 15 रफपए प्रति कमीश की दर से हुआ। क्या आप वस्त्रा नियार्तक को प्रति कमीश पर मिलने वाले लाभ की गणना कर सकते हैं? बाशार में लाभ कमाने वाले कौन हैं? बाशारों की एक शृंखला रूइर् के उत्पादनकतार् को सुपरमाविर्फट के खरीदार से जोड़ देती है। इस शृंखला की हर कड़ी पर खरीदना और बेचना होता है। आइए, पिफर से याद करें कि वे कौन - कौन से लोग थे, जो खरीदने और बेचने की इस प्रिया में सम्िमलित थे। क्या उन सभी को समान रूप से लाभ हुआ या लाभ की मात्रा अलग - अलग लोगों के लिए अलग - अलग रही? वुफछ लोगों ने बाशार में लाभ कमाया, जबकि वुफछ को खरीदने - बेचने से वुफछ खास लाभ नहीं हुआ। बहुत परिश्रम करने के बाद भी उन्होंने बहुत कम कमाया। क्या आप इस तालिका में उन्हें दशार् सकते हैं? बाशार और समानता विदेशी व्यवसायी ने बाशार में अध्िक मुनाप़्ाफा कमाया। उसकी तुलना में वस्त्रा - नियार्तक का लाभ मध्यम श्रेणी का रहा। दूसरी ओर वस्त्रा नियार्तक पैफक्टरी के कामगार मुश्िकल से केवल अपनी रोशमरार् की शरूरतों की पूतिर् लायक ही कमा सके। इसी प्रकार हमने देखा कि कपास उगाने वाली छोटी किसान और इरोड के बुनकरों ने कड़ी मेहनत की, लेकिन बाशार में उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिला। व्यवसायी या व्यापारियों की स्िथति बीच की है। बुनकरों की तुलना में उनकी कमाइर् अध्िक हुइर् है, लेकिन नियार्तक की कमाइर् से बहुत कम है। इस तरह बाशार में सब बराबर नहीं कमाते हैं। प्रजातंत्रा के अंतगर्त सबको बाशार में उचित मशदूरी मिलनी चाहिए, पिफर चाहे वह कांता हो या स्वप्ना। यदि परिवार पयार्प्त नहीं कमाएँगे, तो वे अपने - आपको दूसरों के बराबर समझेंगे वैफसे? गामे±ट पैफक्टरी के मशदूर, गामेंर्ट के नियार्तक और विदेशी बाशार के व्यवसायी ने प्रत्येक कमीश पर कितना पैसा कमाया? तुलना करके पता लगाइए। व्यवसायी बाशार मंे उँफचा मुनाप़्ाफा कमा पाता है। इसका क्या कारण है? आपने विज्ञापन वाला अध्याय पढ़ा है। चचार् कीजिए कि व्यवसायी प्रत्येक कमीश पर विज्ञापन के लिए 300 रफपए की राश्िा क्यों खचर् करता है? बाशार में अध्िक लाभ कमाने वाले व्यक्ित 1ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 3ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ बाज़ार में अध्िक लाभ न कमाने वाले व्यक्ित 1ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 3ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ क्या आप यह जानते थे कि आप जो रेडीमेड वस्त्रा खरीदते हैं, उनके पीछे कितने अलग - अलग लोगों का प्रयास रहता है? एक ओर बाशार लोगों को काम करने, उन चीशों को बनाने और बेचने के अवसर देता है, जो वे उगाते या बनाते हैं। किसान यहाँ रूइर् बेच सकता है, तो बुनकर अपना बनाया हुआ कपड़ा। दूसरी ओर बाशार से ध्नवान और शक्ितशाली लोग ही प्रायः सवार्ध्िक कमाइर् करते हैं। ये वे लोग हैं, जिनके पास पैसा है, अपने कारखाने हैं, बड़ी - बड़ी दुकानें हैं और बहुत शमीनें हैं। गरीबों को अनेक चीशों के लिए ध्नी और शक्ितशाली लोगों के उफपर निभर्र रहना पड़ता है। गरीबों को उनके उफपर )ण के लिए ;जैसा छोटी किसान स्वप्ना के मामले में हुआद्ध कच्चा माल प्राप्त करने और अपना सामान बेचने के लिए ;जैसा दादन व्यवस्था में बुनकरों के साथ होता हैद्ध, और प्रायः नौकरी प्राप्त करने के लिए ;जैसा वस्त्रा के कारखाने में कामगारों के साथ हुआद्ध निभर्र रहना पड़ता है। इस निभर्रता के कारण बाशार में गरीबों का शोषण होता है। इन समस्याओं के समाधन के लिए भी रास्ते हैं, जैसे - उत्पादक मिल कर सहकारी संस्थाएँ बनाएँ और कानूनों का दृढ़ता से पालन हो। अन्ितम अध्याय में हम पढ़ेंगे कि तवा नदी पर मछुआरों ने वैफसे एक सहकारी संस्था प्रारंभ की। 1 स्वप्ना ने अपनी रूइर् वुफनूर्ल के रूइर् - बाशार में न बेचकर व्यापारी को क्यों बेच दी? 2 वस्त्रा नियार्तक कारखाने में काम करने वाले मशदूरों के काम के हालात और उन्हें दी जाने वाली मशदूरी का वणर्न कीजिए। क्या आप सोचते हैं कि मशदूरों के साथ न्याय होता है? 3 ऐसी किसी चीश के बारे में सोचिए, जिसे हम सब इस्तेमाल करते हैं। वह चीनी, चाय, दूध्, पेन, कागश, पेंसिल आदि वुफछ भी हो सकती है। चचार् कीजिए कि यह वस्तु बाशारों की किस शृंखला से होती हुइर्, आप तक पहुँचती है। क्या आप उन सब लोगों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्होंने इस वस्तु के उत्पादन व व्यापार में मदद की होगी? 4 यहाँ दिए गए नौ कथनों को सही क्रम मंे कीजिए और पिफर नीचे बनी कपास की डोडियों के चित्रों में सही कथन के अंक भर दीजिए। पहले दो चित्रों में आपके लिए अंक पहले से ही भर दिए गए हैंै। 1.स्वप्ना, व्यापारी को रूइर् बेचती है। 2.ग्राहक, सुपरमाकेर्ट में इन कमीशों को खरीदते हैं। 3.व्यापारी, जिनिंग मिलों को रूइर् बेचते हैं। 4.गामे±ट नियार्तक, कमीशें बनाने के लिए व्यापारियों से कपड़ा खरीदते हैं। 5.सूत के व्यापारी, बुनकरों को सूत देते हैं। 6.वस्त्रा नियार्तक, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यवसायी को कमीशें बेचता है। 7.सूत कातने वाली मिलें, रूइर् खरीदती हैं और सूत के व्यापारी को सूत बेचती हैं। 8.बुनकर कपड़ा तैयार कर के लाते हैं। 9.जिनिंग मिलें रूइर् को सापफ करती हैं और उनवेफ़गट्ठर बनाती हैं। शब्द - संकलन जिनिंग मिलμवह पैफक्टरी जहाँ रूइर् के गोलों से बीज अलग किए जाते हैं। यहाँ पर रूइर् को दबाकर गट्ठर भी बनाए जाते हैं, जो धगा बनाने के लिए भेज दिए जाते हैं। नियार्तकμवह व्यक्ित जो विदेशों में माल बेचता है। मुनाप़्ाफाμजो आमदनी हुइर् है, उसमें से सारे खचो± को घटा देने के बाद बचने वाली राश्िा। यदि खचेर् आमदनी से श्यादा हो जाएँ, तो घाटा हो जाता है।

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