वनः हमारी जीवन रेखा क शाम बूझो एक वृ( व्यक्ित के साथ पावर्फ मेंएगया। उसने उनका परिचय अपने मित्रों से करवाया। प्रो. अहमद, विश्वविद्यालय में कायर्रत एक वैज्ञानिक थे। बच्चे खेलने लगे और प्रो. अहमद एक बेन्च पर बैठ गए। वे थके हुए थे, क्योंकि उन्होंने शहर के स्वणर् जयंती समारोह में भागीदारी की थी। थोड़ी देर में बच्चे उनके इदर्गिदर् आकर बैठ गए। बच्चे समारोह के बारे में जानना चाहते थे। प्रो. अहमद ने उन्हें बतायाकि सांस्कृतिक कायर्क्रम के पश्चात्, वरिष्ठ नागरिकों ने शहर की बेरोज़्ागारी की समस्या पर चचार् की थी। शहर के ठीक बाहर स्िथत वन्य क्षेत्रा की सपफाइर् करवेफ़एक कारखाना स्थापित करने की योजना प्रस्तुत की गइर् थी। इससे शहर की बढ़ती जनसंख्या को नौकरी पाने का एक मौका मिलेगा। बच्चों को बहुत आश्चयर् हुआ, जब प्रो. अहमद ने उन्हें बताया कि अनेक लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध् किया था। प्रस्ताव के विरोध् का कारण बताते हुए प्रो. अहमदने समझाया, फ्हरे - भरे वन हमारे लिए उतने ही महत्त्वपूणर् हैं, जितना हमारे पेफपफड़े हैं। इसलिए इन्हें हरे पेफपफड़े भी कहा जाता है। वन, जल शोध्न तंत्रों के रूप में भी कायर् करते हैं।य् उनकी बातें सुनकर बच्चे भ्रमित हो गए। प्रो. अहमद समझ गए कि बच्चों ने वन नहीं देखा है। बच्चे, वन के बारे में और अध्िक जानना चाहते थे। अतः, उन्होंने प्रो. अहमद के साथ वन में जाने का निश्चय किया। 17.1 वन भ्रमण एक रविवार, प्रातः बच्चे चावूफ, हैंडलेंस, छड़ी, नोटबुक आदि जैसी वुफछ वस्तुएँ साथ लेकर प्रो. अहमद के साथ गाँव के समीप के वन की ओर निकल पड़े। रास्ते में उन्हें पास के गाँव का अपनी उम्र का एक लड़का टीबू मिला, जो अपनी चाची के साथ मवेश्िायों को वन में चराने ले जा रहा था। उन्होंने पाया कि टीबू बहुत पुफतीर्ला है, क्योंकि वह मवेश्िायों के झुंड को एक साथ रखने के लिए आनन - पफानन में यहाँ - वहाँ जा रहा था। बच्चों को देखकर टीबू ने भी उनके साथ चलना शुरू कर दिया, जबकि मवेश्िायों को लेकर उसकी चाची दूसरी ओर निकल गइर्। जैसे ही उन लोगों ने वन में प्रवेश किया, टीबू ने अपना हाथ उठाकर सबको शांत रहने के लिए संकेत दिया, क्योंकि शोर से वन में रहने वाले जंतुओं को परेशानी हो सकती थी।पिफर टीबू उन्हें वन में ऊँचाइर् पर स्िथत ऐसे स्थान पर ले गया, जहाँ से सभी वन का व्यापक दृश्य देख सवेंफ। बच्चे आश्चयर्चकित हो गए, क्योंकि उन्हेें दूर - दूर तक कहीं भी शमीन दिखाइर् नहीं दे रही थी ;चित्रा 17.1द्ध। विभ्िान्न वृक्षों के श्िाखरों ने भूमि केऊपर हरा आवरण - सा बना दिया था। यद्यपि आवरण चित्रा 17.2 वुफछ वन्य जंतु समान रूप से हरा नहीं था। वहाँ का वातावरण शांत था और ठंडी हवा मंद गति से बह रही थी। इससे बच्चे कापफी तरोताशा और प्रसन्न हो गए।़नीचे आते समय बच्चे अचानक पक्ष्िायों कीचहचहाहट और वृक्षों की ऊँची - ऊँची शाखाओं कीओर से वुफछ विश्िाष्ट ध्वनियों का शोर सुनकर उत्तेजित हो गए। टीबू ने उन्हें शांत रहने को कहा, क्योंकि यह वहाँ की सामान्य घटना थी। बच्चों की उपस्िथति केकारण वुफछ बंदर, वृक्षों पर और ऊँची शाखाओं पर चढ़ गए थे, जिससे वहाँ विश्राम कर रहे पक्षी अशान्त हो गए थे। जंतु अकसर अन्य जंतुओं को सचेत करने के लिए विश्िाष्ट प्रकार की ध्वनि करके चेतावनी देते हैं। टीबू ने यह भी बताया कि शूकर ;वराह या सूअरद्ध, गौर ;बाइसनद्ध, गीदड़, सेही, हाथी जैसे जन्तु वन के अिाक सघन क्षेत्रों में रहते हैं ;चित्रा 17.2द्ध। प्रो. अहमद ने बच्चों को सावधान किया कि उन्हें वन के अध्िक सघन क्षेत्रों में नहीं जाना चाहिए। बूझो और पहेली को याद आया कि उन्होंने कक्षा 6 में वनों को आवासों के रूप में पढ़ा था जिस भूमि पर बच्चे चल रहेथे, वह ऊबड़ - खाबड़ थी और अनेक वृक्षों से ढकी थी ;चित्रा 17.4द्ध। टीबू ने साल, टीक, सेमल, शीशम, नीम, पलाश, अंजीर, खैर, आँवला, बाँस, कचनार आदि के वृक्षों की पहचान करने में उनकी मदद की। प्रो. अहमद ने बताया कि वन में अनेक प्रकार के वृक्ष, झाडि़याँ, शाक और घास पाइर् जाती हैं। वृक्षों पर विभ्िान्न प्रकार की विसपीर् लताएँ और आरोही लताएँ भी लिपटी हुइर् थी। वृक्षों की घनीपिायों के आवरण के कारण सूयर् मुश्िकल से ही कहीं दिखाइर् दे रहा था, जिससे वन के अंदर कापफी़अंधकार था। ियाकलाप 17.1 अपने घर की विभ्िान्न वस्तुओं को ध्यान से देखकर उन वस्तुओं की सूची बनाइए, जो ऐसी सामग्री से बनाइर् गइर् हैं, जिन्हें वनों से प्राप्त किया गया होगा। आपकी सूची में काष्ठ से बनी अनेक वस्तुएँ, जैसे - प्लाइर्वुड, ईंध्न की लकड़ी, बक्से, कागज़्ा, माचिस की तीलियाँ और पफनीर्चर हो सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि गोंद, तेल, मसाले, जंतुओं का चारा और औषधीय पादप ;जड़ी - बूटीद्ध भी वनों से प्राप्त उत्पाद हैं ;चित्रा 17.5द्ध। शीला समझ नहीं पा रही थी कि आख्िार इन वृक्षों को किसने लगाया होगा? प्रो. अहमद ने बताया कि प्रकृति में वृक्ष, पयार्प्त मात्रा में बीज उत्पन्न करते हैं। वन की भूमि, उनके अंवुफरण और नवोद्भ्िाद और पौध में विकसित होने के लिए अनुवूफल परिस्िथतियाँ प्रदान करती है। इनमें से वुफछ वृक्ष के रूप में वृि कर जाते हैं। उन्होंने यह भी बतायाकि किसी वृक्ष का शाखीय भाग तने से ऊपर उठ जाता है, जो श्िाखर कहलाता है ;चित्रा 17.6द्ध। प्रो. अहमद ने बच्चों से ऊपर की ओर देखकर यहनोट करने को कहा कि वन में ऊँचे वृक्षों की शाखाएँकिस प्रकार कम ऊँचाइर् के वृक्षों के ऊपर छत की तरह दिखाइर् देती हैं। उन्होंने बताया कि यह वितान ;वैफनोपीद्ध कहलाता है ;चित्रा 17.7द्ध। ियाकलाप 17.2 अपने आस - पास के किसी वन अथवा उद्यान में जाइए। वृक्षों को देख्िाए और उनके नाम जानने का प्रयास कीजिए। इस कायर् में आप अपने बुजुगो±, अध्यापकों़अथवा पुस्तकों की सहायता ले सकते हैं। जिन वृक्षों को आप देखेंऋ उनकी विशेषताओं, जैसे - लंबाइर्,पिायों का आकार, श्िाखर, पुष्पों और पफलों को सूचीब( कीजिए। वुफछ वृक्षों के श्िाखर के चित्रा भी बनाइए। प्रो. अहमद ने बताया कि वृक्षों के श्िाखर कीआकृति और आमाप ;साइशद्ध में परस्पर भ्िान्न होतेहैं। इसी कारण किसी वन में विभ्िान्न ऊँचाइयों पर क्षैतिज परतें बनी होती हैं। इन्हें अधेतल कहते हैं;चित्रा 17.7द्ध। विशाल और ऊँचे वृक्ष शीषर् परत बनातेहैं, जिनके नीचे झाडि़याँ और ऊँची घास की परतें होती हैं, और सबसे नीचे की परत शाक बनाती है। ‘‘क्या सभी वनों में वृक्ष समान प्रकार के होते हैं?’’ बूझो ने पूछा। प्रो. अहमद ने कहा, ‘‘नहीं, विभ्िान्न जलवायवीय परिस्िथतियों के कारण वृक्षों और अन्य प्रकार के पादपों की किस्मों में भ्िान्नताएँ पाइर् जाती हैं। जंतुओं के प्रकार भी विभ्िान्न वनों में भ्िान्न होते हैं।’’ चित्रा 17.6 वुफछ श्िाखर आकार श्िाखर अधेतल वुफछ बच्चे झाडि़यों और शाकों के पुष्पों पर यहाँ - वहाँ मंडराने वाली खूबसूरत तितलियों को देखने में व्यस्त थे। उन्होंने झाडि़यों के नशदीक जाकर उन्हें देखने का प्रयास किया था। ऐसा करते समय उनके बालों और वस्त्रों पर बीज और झाडि़याँ चिपक गईं।बच्चों को वृक्षों की छाल, पौधें की पिायों और वनभूमि पर सड़ - गल रही ;क्षयमानद्ध पिायों पर अनेक कीट, मकडि़याँ, गिलहरियाँ, चींटे और विभ्िान्न छोटे जंतु भी दिखाइर् दिए ;चित्रा 17.8द्ध। उन्होंने उन जीवों के चित्रा बनाने आरंभ कर दिए। वन भूमि की सतह गहरे रंग की दिखाइर् दे रही थी तथा वह सूखी और क्षयमानपिायों, पफलों, बीजों, टहनियों और छोटे शाकों से ढकी हुइर् थी। क्षयमान पदाथर् आदर््र और गमर् थे। बच्चों ने अपने संग्रह के लिए विभ्िान्न बीज औरपिायाँ एकत्रिात कर ली। वन भूमि पर सूखी पिायों केऊपर चलना, किसी स्पंजी गलीचे पर चलने के समान प्रतीत हो रहा था। क्या क्षयमान पदाथर् सदैव गमर् होते हैं? प्रो. अहमदने सुझाया कि बच्चे इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिए ियाकलाप कर सकते हैं। ियाकलाप 17.3 एक छोटा गइा खोदिए। इसे सब्िजयों के कचरे औरसूखी पिायों आदि से भरकर मि‘ी से ढक दीजिए। इसके ऊपर वुफछ जल भी डाल दीजिए। तीन दिन बाद मि‘ी की ऊपरी परत हटा दीजिए। क्या गइा भीतर से गमर् लगता है? विज्ञान पहेली ने पूछा, फ्वन में इतने सारे वृक्ष हैं। यदि हम कारखाने के लिए वुफछ वृक्षों को काट दें, तो क्या प़्ाफवर्फ पड़ेगा?य् प्रो. अहमद ने बताया, फ्तुमने स्वपोष्िायों, परपोष्िायों और मृतपोष्िायों के बारे में पढ़ा है। तुमने पढ़ा है कि हरे पादप किस प्रकार भोजन का निमार्ण करते हैं। सभी जंतु, चाहे वे शाकभक्षी हों अथवा मांसभक्षी, अंततः भोजन के लिए पादपों पर ही निभर्र होते हैं। जो जीव पादपों का भोजन करते हैं, उन्हें अकसर अन्य जंतुओं द्वारा भोजन के रूप में ले लिया जाता है और इस प्रकार यह क्रम चलता रहता है। उदाहरण के लिए, घास को कीटों द्वारा खाया जाता है, जिन्हें मेंढक खा लेते हैं। मेंढक को सपर् खा लेते हैं। इसे खाद्य शृंखला कहा जाता हैः घास → कीट → मेंढक → सपर् → उकाब ;गरूड़द्ध वन में अनेक खाद्य शृंखलाएँ पाइर् जाती हैं। सभी खाद्य शृंखलाएँ परस्पर संब( होती है। यदि किसी एक खाद्य शृंखला में कोइर् विघ्न पड़ता है, तो यह अन्य शृंखलाओं को प्रभावित करता है। वन का प्रत्येक भाग अन्य भागों पर निभर्र होता है। यदि हम वन के किसी घटक, जैसे - वृक्ष को अलग कर दें, तो इससे अन्य सभी घटक प्रभावित होते हैं। प्रो. अहमद ने बच्चों से वन भूमि की सतह सेपिायों को उठाकर उन्हें हैंडलेंस से देखने के लिएकहा। उन्हें क्षयमान पिायों पर नन्हें मशरूम दिखाइर् दिए। उन्हें नन्हें कीटों, मिलीपीडों ;सहस्त्रापादोंद्ध, चींटों और भृंगों की सेना भी उन पर दिखाइर् दी। उन्हें आश्चयर् हो रहा था कि ये जीव वहाँ वैफसे रहते हैं। प्रोअहमद ने समझाया कि आसानी से देखे जा सकने वाले इन जीवों के अतिरिक्त यहाँ अनेक जीव और चित्रा 17.9 वन में पादप, मृदा और अपघटकों का परस्पर संबंध् सूक्ष्मजीव ऐसे भी हैं, जो मृदा के भीतर रहते हैं। पहेली को आश्चयर् हो रहा था कि मशरूम और अन्य सूक्ष्म जीव क्या खाते हैं? प्रो. अहमद ने बताया कि ये मृतपादपों और जंतु ऊतकों को खाते हैं और उन्हें एक गहरे रंग के पदाथर् में परिवतिर्त कर देते हैं, जिसे ह्यूमस कहते हैं। आपने ह्यूमस के बारे में अध्याय 9 में पढ़ा था। आपको मृदा की कौन - सी परत में ह्यूमस मिलता है? मृदा के लिए इसकी क्या उपयोगिता है? पादपों और जंतुओं के मृत शरीर को ह्यूमस में परिवतिर्त करने वाले सूक्ष्म जीव, अपघटक कहलातेहैं। इस प्रकार के सूक्ष्म जीव वन में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। यह जानकारी मिलते ही पहेली नेमृत पिायों को हटाना आरंभ कर दिया और वुफछ ही देर में भूमि पर ह्यूमस की परत को खोज निकाला। ह्यूमस की उपस्िथति यह सुनिश्िचत करती है किमृत पादपों और जंतुओं के पोषक तत्त्व मृदा मेंनिमुर्क्त होते रहते हैं। वहाँ से ये पोषक तत्त्व पुनः सजीव पादपों के मूलों द्वारा अवशोष्िात कर लिए जाते हैं। शीला ने पूछा, फ्जब वन में कोइर् जंतु मरजाता है, तो उसका क्या होता है?य् टीबू ने उत्तर दिया कि मृत जंतु गि(ों, कौओं, गीदड़ों और कीटोंका भोजन बन जाते हैं। इस प्रकार, पोषक तत्त्वों का चक्र चलता रहता है, जिससे वन में वुफछ भी व्यथर् नहीं जाता है ;चित्रा 17.9द्ध। पहेली ने प्रो. अहमद को याद दिलाया कि उन्होंने यह नहीं समझाया है कि वनों को हरे पेफपफड़े क्यों कहा जाता है। प्रो. अहमद ने समझाया कि पादप प्रकाश संश्लेषण के प्रक्रम द्वारा आॅक्सीजन निमुर्क्त करते हैं। इस प्रकार पादप जंतुओं के श्वसन के लिए आॅक्सीजन उपलब्ध् कराने में सहायक होते हैं। वे वायुमंडल में आॅक्सीजन और काबर्न डाइआॅक्साइड के संतुलन को भी बनाए रखते हैं ;चित्रा 17.10द्ध। इसलिए वनों को हरे पेफपफड़े कहा जाता है। चित्रा 17.10 आॅक्सीजन और काबर्न डाइआॅक्साइड का संतुलन बच्चों ने देखा कि आसमान में बादल बन रहे हैं। बूझो ने याद दिलाया कि उसने कक्षा 6 में जलचक्र के बारे में पढ़ा था। वृक्ष अपने मूलों से जल अवशोष्िात करते हैं और वाष्पोत्सजर्न द्वारा जलवाष्प निमुर्क्त करते हैं। यदि वृक्षों की संख्या कम होती, तो जलचक्र किस प्रकार प्रभावित होता? टीबू ने उन्हें बताया कि वन केवल पादपों और जंतुओं का आवास ही नहीं है। वन क्षेत्रा में अनेक मानव समुदाय भी रहते हैं। इनमें से वुफछ विभ्िान्न जनजातियों के हो सकते हैं। टीबू ने समझाया कि ये लोग अपनी अध्िकतर आवश्यकताओं के लिए वनों पर निभर्र करते हैं। वन उन्हें भोजन, आश्रय, जल और औषध्ियाँ प्रदान करते हैं। वन क्षेत्रा में रहने वाले ये लोग वहाँ के अनेक औषध्ीय पादपों के बारे में जानते हैं। बूझो एक छोटे झरने से पानी पी रहा था, तो उसने देखा कि हिरणों का एक झुंड उससे वुफछ दूरी पर झरने को पार कर रहा था ;चित्रा 17.11द्ध। वुफछ ही पल में सभी हिरण झाडि़यों में गायब हो गए। सघनझाडि़याँ और ऊँची घास, जंतुओं को भोजन और विज्ञान चित्रा 17.11 वन में हिरण आश्रय प्रदान करती हैं। ये उन्हें वन में रहने वाले मांसभक्षी जीवों से सुरक्षा भी प्रदान करती हैं। टीबू ने ध्यान से वन के पफशर् को देखना आरंभ़कर दिया। अचानक वुफछ देखकर उसने बच्चों को अपने पास बुलाया। उसने उन्हें वुफछ जंतुओं की लीद दिखाइर् और विभ्िान्न जंतुओं की लीदों के बीच अंतर समझाया। प्रो. अहमद ने उन्हें बताया कि वन अिाकारी, वन में वुफछ जंतुओं की उपस्िथति की जानकारी उनकीलीद और पदचिÉों के आधर पर करते हैं। बूझो ने सबका ध्यान जंतुओं की लीद की एक बड़ी क्षयमान ढ़ेरी की ओर आकष्िार्त किया। उस ढेर पर अनेक भृंग और वैफटरपिलर ;लावार्द्ध पनप रहे थे तथा अनेक नवोद्भ्िाद भी अंवुफरित हो रहे थे। प्रो. अहमद ने बताया, फ्ये नवोद्भ्िाद वुफछ शाकों और झाडि़यों के हैं। जंतु भी वुफछ पादपों के बीजों को प्रकीण्िार्त करते हैं। इस प्रकार जंतु, वनों में पादपों को वृि करने और उनके पुनजर्नन में सहायक होते हैं। जंतुओं का क्षयमान गोबर, नवोद्भ्िादों को उगने केलिए पोषक तत्त्व भी प्रदान करता है।य् यह सुनने के बाद बूझो ने अपनी नोटबुक में नोट किया फ्पादपों की अध्िक किस्मों को आश्रय देकर, वन शाकाहारी जन्तुओं को भोजन और आवास के लिए अध्िक अवसर प्रदान करते हैं। शाकाहारियों वनः हमारी जीवन रेखा चित्रा 17.12 दीवार पर उगा एक पौध की अध्िक संख्या का अथर् है, विभ्िान्न प्रकार के मांसभक्ष्िायों के लिए भोजन की अध्िक उपलब्ध्ता। जंतुओं की विविध् किस्में वन के पुनजर्नन और वृि में सहायक होती हैं। अपघटक, वन में उगने वालेपादपों के लिए पोषक तत्त्वों की आपूतिर् को बनाए रखने में सहायक होते हैं। इस प्रकार, वन एक गतिक सजीव इकाइर् है जो जीवन और जीवनक्षमता से भरपूर है।य् अब लगभग दोपहर हो गइर् थी और बच्चे वापस जाना चाहते थे। टीबू ने वापस जाने के लिए एक और रास्ता सुझाया। जब वे वापस जा रहे थे, तभी वषार् होने लगी। उन्हें यह देखकर आश्चयर् हुआ कि वषार् की बूँदें, वन भूमि पर सीध्े नहीं पड़ रही थी। वन 223 वितान की सबसे ऊपरी परत वषार् की बूँदों को विच्िछन्न कर रही थी, अथार्त् छोटी - छोटी पुफहार में परिवतिर्त कर रही थी। अध्िकांश जल वृक्षों कीशाखाओं, पिायों और तनों से होता हुआ नीचे की झाडि़यों और शाकों पर ध्ीमे - ध्ीमे गिर रहा था ;चित्रा 17.13द्ध। उन्होंने पाया कि कइर् स्थानों पर भूमि अब भी सूखी थी। लगभग आध घंटे बाद वषार् रुक गइर्। उन्होंने पाया कि वन भूमि की सतह पर गिरी मृतपिायों की परत अब वुफछ - वुफछ गीली हो गइर् है, लेकिन वन में कहीं भी जल का जमाव होता दिखाइर् नहीं दिया। बूझो मन ही मन में सोच रहा था कि यदि इतनी तेज वषार् उसके शहर में हुइर् होती, तो नाले और सड़वेंफ़पानी से भर गइर् होती। विज्ञान प्राप्त की। उन्हें यह जानकर आश्चयर् हुआ कि उसक्षेत्रा के गाँव और कृष्िा के लिए खेत लगभग साठ वषर् पहले वन को काटकर उपलब्ध् किए गए थे। टीबू के दादाजी ने उन्हें बताया कि जब वे छोटे थे, प्रमुख शब्द वृक्ष श्िाखर पुनजर्नन अधे - तल अपघटक बीज प्रकीणर्न वन अपरोपण विज्ञान जब आपके शहर में तेज वषार् होती है, तो क्या होता है? प्रो. अहमद ने उन्हें बताया कि वन, वषार्जल केप्राकृतिक अवशोषक का कायर् करते हैं और उसेअवड्डावित होने देते हैं। यह वषर् भर भौमजल स्तर को बनाए रखने में सहायक होता है। वन न सिप़्ार्फ बाढ़ों को नियंत्रिात करने में सहायक होते हैं, बल्िक नदियों में जल के प्रवाह को बनाए रखने में भी सहायक होते हैं, जिससे हमें जल की सतत् आपूतिर् मिलती रहती है। इसके विपरीत यदि वृक्ष न हों, तो वषार्जल सीध्े भूतल पर गिरकर आस - पास के क्षेत्रा में भर सकता है। तेज़वषार्, मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत को भी क्षति पहुँचा सकती है। वृक्षों तथा अन्य पौधें के मूल सामान्यतः मृदा को एक साथ बाँध्े रखते हैं, लेकिन उनकी अनुपस्िथति में मृदा वषार्जल के साथ बह जाती है, अथार्त् उसका अपरदन हो जाता है। लौटते समय बच्चों ने टीबू के गाँव में एक घंटे का समय बिताया। गाँव का मौसम काप़्ाफी सुहावना था। गाँववासियों ने उन्हें बताया कि आस - पास वन से घ्िारा होने के कारण यहाँ अच्छी वषार् होती है। हवा भी ठंडी रहती है। यहाँ ध्वनि प्रदूषण भी कम है, क्योंकि वन वहाँ से गुज़्ारने वाली सड़वफ के वाहनों के शोर को अवशोष्िात कर लेते हैं। बच्चों ने गाँव के इतिहास के बारे में भी जानकारी तब गाँव का क्षेत्रा इतना बड़ा नहीं था, जितना आज है। यह वनों से घ्िारा हुआ भी था। सड़कों, इमारतों आदि के निमार्ण, औद्योगिक विकास और लकड़ी की बढ़ती हुइर् माँग के कारण वनों का कटाव हो रहा है और वे लुप्त होने लगे हैं। दादाजी खुश नहीं थे, क्योंकि उनके गाँव के समीप वेफ वन का पुनजर्नन नहीं हो रहा है और वह पालतू पशुओं द्वारा अत्यध्ि क चराइर् और वृक्षों की अंधाध्ुंध् कटाइर् के कारण लुप्त होने के कगार पर है। प्रो. अहमद ने कहा कि यदि हम समझदारी से काम लें, तो हम वनों और पयार्वरण को संरक्ष्िात रखने के साथ - साथ विकास कायर् भी कर सकते हैं। बच्चों ने ऐसी घटनाओं के परिणामों को दिखाने के लिए वुफछ चित्रा बनाए। वन भ्रमण के उपरांत प्रो. अहमद ने बच्चों सेसारांश में वनों के महत्त्व के बारे में लिखने को कहा। बच्चों ने लिखाμवन हमंे आॅक्सीजन प्रदान करते हैं। वे मृदा की सुरक्षा करते हैं और अनेक जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं। वन आस - पास के क्षेत्रों में वषार् का उचित स्तर बनाए रखने में सहायक होते हैं। वन औषध्ीय पादपों, काष्ठ और अनेक अन्य उपयोगीउत्पादों के ड्डोत हैं। हमें अपने वनों को संरक्ष्िात रखने के लिए हर संभव प्रयास करते रहना चाहिए। आपने क्या सीखा ऽ वनों से हमें अनेक उत्पाद मिलते हैं। ऽ ‘वन’, विभ्िान्न पादपों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवों से मिलकर बना एक तंत्रा है। ऽ वनों की सबसे ऊपरी परत वृक्ष श्िाखर बनाते हैं, जिसके नीचे झाडि़यों द्वारा बनी परत होती है। शाक वनस्पतियाँ सबसे नीचे की परत बनाती हैं। ऽ वनों में वनस्पतियों की विभ्िान्न परतें जंतुओं, पक्ष्िायों और कीटों वफो भोजन और आश्रय प्रदान करती हैं। ऽ वन के विभ्िान्न घटक एक - दूसरे पर निभर्र होते हैं। ऽ वन वृि करते और परिवतिर्त होते रहते हैं, तथा उनका पुनजर्नन हो सकता है। ऽ वन में मृदा, जल, वायु और सजीवों के बीच परस्पर िया होती रहती है। ऽ वन, मृदा को अपरदन से बचाते हैं। ऽ मृदा, वनों की वृि करने और उनके पुनजर्नन में सहायक होती है। ऽ वन्य क्षेत्रों में वास करने वाले समुदायों को वन उनके जीवन के लिए आवश्यक सभी सामग्री उपलब्ध् कराते हैं। वन इन समुदायों को जीवन का आधर प्रदान करते हैं। ऽ ‘वन’, जलवायु, जलचक्र और वायु की गुणवत्ता को नियमित करते हैं। अभ्यास 1.समझाइए कि वन में रहने वाले जंतु किस प्रकार वनों की वृि करने और पुनजर्नन में सहायक होते हैं। 2. समझाइए कि वन, बाढ़ की रोकथाम किस प्रकार करते हैं? 3. अपघटक किन्हें कहते हैं? इनमें से किन्हीं दो के नाम बताइए। ये वन में क्या करते हैं? 4.वायुमंडल में आॅक्सीजन और काबर्न डाइआॅक्साइड के बीच संतुलन को बनाए रखने में वनों की भूमिका को समझाइए। 5. समझाइए कि वनों में वुफछ भी व्यथर् क्यों नहीं होता है? 6. ऐसे पाँच उत्पादों के नाम बताइए, जिन्हें हम वनों से प्राप्त करते हैं। 7. रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;कद्ध कीट, तितलियाँ, मध्ुमक्िखयाँ और पक्षी, पुष्पीय पादपों की - - - - - - - - - - - - - - - में सहायता करते हैं। ;खद्ध वन परिशु( करते हैं - - - - - - - - - - - - - - - और - - - - - - - - - - - - - - - को। ;गद्ध शाक वन में - - - - - - - - - - - - - - - परत बनाते हैं। ;घद्ध वन में क्षयमान पिायाँ और जंतुओं की लीद - - - - - - - - - - - - को समृ( करते हैं। 8 हमें अपने से दूर स्िथत वनों से संबंिात परिस्िथतियों और मुद्दों के विषय में चिंतित होने की क्यों आवश्यकता है? 9 समझाइए कि वनों में विभ्िान्न प्रकार के जंतुओं और पादपों के होने की आवश्यकता क्यों है? 10.चित्रा 17.15 में चित्राकार, चित्रा को नामांकित करना और तीरों द्वारा दिशा दिखाना भूल गया है। तीरों पर दिशा को दिखाइए और चित्रा को निम्नलिख्िात नामों द्वारा नामांकित करिएः बादल, वषार्, वायुमंडल, काबर्न डाइआॅक्साइड, आॅक्सीजन, पादप, जंतु, मृदा, अपघटक, मूल, भौमजल स्तर। 11.निम्नलिख्िात में से कौन - सा वन उत्पाद नहीं है? ;पद्ध गोंद ;पपद्ध प्लाइर्वुड ;पपपद्ध सील करने की लाख ;पअद्ध वैफरोसीन 12.निम्नलिख्िात में से कौन - सा वक्तव्य सही नहीं है? ;पद्ध वन, मृदा को अपरदन से बचाते हैं। ;पपद्ध वन में पादप और जंतु एक - दूसरे पर निभर्र नहीं होते हैं। ;पपपद्ध वन जलवायु और जलचक्र को प्रभावित करते हैं। ;पअद्ध मृदा, वनों की वृि और पुनजर्नन में सहायक होती है। 13.सूक्ष्मजीवों द्वारा मृत पादपों पर िया करने से बनने वाले एक उत्पाद का नाम हैः ;पद्ध बालू ;पपद्ध मशरूम ;पपपद्ध ह्यूमस ;पअद्ध काष्ठ विस्तारित अध्िगम - ियाकलाप और परियोजना कायर् 1.पयार्वरण विभाग को निणर्य करना है कि क्या आवासीय काॅम्प्लैक्स बनाने के लिए आपके क्षेत्रा के वन के वुफछ हिस्से को काटकर सापफ करना उचित होगा। एक सजग़नागरिक के नाते सरकार के विभाग को अपना मत बताते हुए एक पत्रा लिख्िाए। 2.किसी वन का भ्रमण कीजिए। यहाँ वुफछ बातें बताइर् गइर् हैं, जो आपकी यात्रा को अध्िक उपयोगी बना देंगी। ऽ सुनिश्िचत कर लीजिए कि आपके पास वन में जाने की अनुमति है। ऽ सुनिश्िचत कर लीजिए कि आप वहाँ भटवेंफगे नहीं और अपनी राह स्वयं ढूँढ लेंगे। वहाँ का मानचित्रा लीजिए और किसी ऐसे व्यक्ित को अपने साथ ले जाइए, जो उस स्थान से परिचित हो। ऽ आप वहाँ जो वुफछ देखते और करते हैं, उसका विवरण नोट कीजिए। ध्यानपूवर्क किए गए प्रेक्षण आपके भ्रमण को दिलचस्प बना देंगे। चित्रा बनाना और तस्वीरें खींचना भी उपयोगी होते हैं। ऽ आप पक्ष्िायों की ध्वनियों को रिकाॅडर् कर सकते हैं। ऽ विभ्िान्न प्रकार के बीज और कठोर पफलों, जैसे - बादाम, सुपारी, नारियल आदि गिरीपफल एकत्रिात कीजिए। ऽ विभ्िान्न प्रकार के वृक्षों, झाडि़यों, शाकों आदि को पहचानने का प्रयास करें। वन के विभ्िान्न स्थानों और विभ्िान्न परतों से पादपों की सूची बनाइए। आप सभी पादपों के नाम संभवतः नहीं जान पाएँ, लेकिन वे कहाँ उगते हैं, यहदेखना और रिकाॅडर् करना उपयोगी होगा। पादपों की औसत ऊँचाइर्, श्िाखर केआकार, छाल के गठन, पत्ती के आमाप ;साइजद्ध और पुष्प के रंग को नोट़कीजिए। ऽ जंतुओं की लीद को पहचानना सीख्िाए। ऽ वन अध्िकारियों और आस - पास के गाँवों के व्यक्ितयों और अन्य दशर्कों का साक्षात्कार लीजिए। आपको कभी पक्ष्िायों के अंडे एकत्रिात नहीं करने चाहिए और न ही उनके घोंसलों को कभी छेड़ना चाहिए। आप और अध्िक जानकारी के लिए निम्नलिख्िात वेबसाइट देख सकते हैंμ ूूूण्ूपसक.पदकपंण्बवउ

RELOAD if chapter isn't visible.