जलः एक बहुमूल्य संसाध्न फ् जल है तो कल है य् ‘‘यदि जल उपलब्ध् है तो आपका भविष्य सुरक्ष्िात है’’ आप शायद जानते हों कि प्रतिवषर् 22 माचर् का दिन विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है। एक विद्यालय में ‘जल दिवस’ मनाया गया और आपके आयु वगर् के बच्चों से पोस्टर आमंत्रिात किए गए। उस दिन प्रस्तुत किए गए वुफछ पोस्टरों को चित्रा 16.1 में दिखाया गया है। चित्रा 16.1 बच्चों द्वारा बनाए गए वुफछ पोस्टर इन पोस्टरों से आपको क्या संदेश मिलता है? अपने प्रेक्षणों को अपनी नोटबुक में लिख्िाए और उनकी चचार् अपनी कक्षा में कीजिए। क्या आपने कभी घर अथवा विद्यालय में जल की कमी महसूस की है? आपके माता - पिता और श्िाक्षक प्रायः आपको जल बबार्द न करने की सलाह देते होंगे।हर व्यक्ित का जल संरक्षण के महत्त्व की ओर ध्यान आकष्िार्त करने के लिए ही हम प्रतिवषर् जल दिवस मनाते हैं। पेयजल, ध्ुलाइर्, खाना पकाने और उचित सप़्ाफाइर् बनाए रखने के लिए, संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक व्यक्ित के लिए सुझाइर् गइर् जल की न्यूनतम मात्रा, 50 लिटर प्रति व्यक्ित है। यह मात्रा प्रति व्यक्ित प्रतिदिन लगभग ढाइर् बाल्टी जल के बराबर है। क्या आपके परिवार को कम से कम इतना जल मिल रहा है? यदि हाँ, तो आपको अपने आप को भाग्यशाली समझना चाहिए। क्योंकि, हमारे देश में लाखों लोगों को पयार्प्त जल नहीं मिलता है। आपके मित्रों और उनके परिवारों की जल की उपलब्ध्ता की स्िथति वैफसी है? अपने अनुभवों की उनके साथ चचार् कीजिए। वुफछ स्थानों पर जल की अत्यध्िक कमी है। नलों में पानी का न आना, जल भरने के लिए लंबी कतारें ;चित्रा 16.2द्ध, लड़ाइर् - झगड़े, जल की माँग के लिए ध्रने और प्रदशर्न आदि, जैसे दृश्य, विशेषकर ग्रीष्म चित्रा 16.2 जल एकत्रा करने के लिए लंबी कतार चित्रा 16.3 समाचार पत्रों की कतरनें काल में सामान्य रूप से दिखाइर् देते हैं। चित्रा 16.3 में दिखाइर् गइर् वुफछ समाचारपत्रों की कतरनें इस स्िथति की ओर स्पष्ट रूप से इंगित करती हैं। क्या यह सत्य नहीं है कि हम जल की अत्यध्िक कमी का सामना कर रहे हैं? ियाकलाप 16.1 समाचारपत्रों और पत्रिाकाओं से जल की कमी से संबंिात समाचार, लेख और चित्रा की कतरनें एकत्रिात कीजिए। उन्हें अपनी स्व्रैफप पुस्ितका में चिपकाइए और उनके बारे में अपने मित्रों से चचार् कीजिए। जनता द्वारा झेली जाने वाली वुफछ समस्याओं को सूचीब( कीजिए और कक्षा में उन पर चचार् कीजिए। जल की कमी पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गइर् है। ऐसा अनुमान है कि अब से वुफछ ही वषो± में विश्व के एक - तिहाइर् से अध्िक जनसंख्या को जल की कमी का सामना करना पड़ेगा। जल की कमी के विषय में चचार् करने से पहले हमें यह जानना आवश्यक है कि हमारी पृथ्वी पर उपयोग के लिए कितना जल उपलब्ध् है। 16.1 कितना जल उपलब्ध् है अंतरिक्ष से लिए गए पृथ्वी के चित्रा को देख्िाए ;चित्रा 16.4द्ध। यह नीला क्यों दिखाइर् देता है? निश्चय ही आप अनुमान लगा सकते हैं। चित्रा 16.4 अंतरिक्ष से पृथ्वी नीली आभा लिए दिखाइर् देती है आप जानते हैं कि पृथ्वी की सतह का लगभग 71» भाग जल से ढका है। पृथ्वी पर उपस्िथत लगभग समस्त जल समुद्रों और महासागरों, नदियों, तालों, ध््रुवीय बप़्ार्फ, भौमजल और वायुमंडल में पाया जाता है, परंतु इसमें से अध्िकांश जल मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। उपयोग के लिए उपयुक्त जल अलवण जल है, जिसे बोल - चाल की भाषा में ताज़्ाा जल कहते हैं। ऊपर बताए वुफछ ड्डोतों से उपलब्ध् अलवण ;ताशाद्ध जल की सापेक्ष मात्रा का आकलन करने के लिए ियाकलाप 16.2 कीजिए। विज्ञान ियाकलाप 16.2 सारणी में दिए गए विभ्िान्न चरणों का अनुसरण करते हुए पृथ्वी में उपलब्ध् अलवण जल का आकलन कीजिए। चरण चित्रा टिप्पणी मध्यम आमाप ;साइज़्ाद्ध की एक बाल्टी लेकर उसे जल से भर लीजिए। इसमें लगभग 20 लिटर जल आता है। मान लीजिए कि बाल्टी का जल पृथ्वी पर उपलब्ध् वुफल जल को प्रदश्िार्त करता है। एक 5 उस् क्षमता का चम्मच लीजिए और बाल्टी में से 100 चम्मच जल मग जैसे किसी छोटे पात्रा में डाल लीजिए। मग से तीस चम्मच जल को काँच के किसी गिलास में डालिए। अंत में मग में से एक - चैथाइर् ;( वाँ भागद्ध चम्मच जल निकालिए। यह पृथ्वी पर उपलब्ध् अलवण जल को प्रदश्िार्त करता है। यह भौमजल के रूप में पाए जाने वाले उपयोग योग्य जल की मात्रा के समान है। यह विश्व की सभी झीलों और नदियों में उपस्िथत वुफल अलवण जल की मात्रा को प्रदश्िार्त करता है। ऽ बाल्टी में बचा जल समुद्रों और महासागरों में उपस्िथत लवण जल ;खारे पानीद्ध और आंश्िाक रूप से भौमजल के रूप में पाए जाने वाले जल को दशार्ता है। यह जल मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। ऽ नहाने के मग में बचा जल उस जल को प्रदश्िार्त करता है, जो हिमीकृत रूप में हिमनदों, ध््रुवीय बप़्ार्फ और पवर्तों की स्थायी बप़्ार्फ में पाया जाता हैऋ यह जल भी हमें आसानी से उपलब्ध् नहीं है। 205 हम में से अध्िकांश लोग जल को एक असीमित संसाधन मानते हैं। ियाकलाप 16.2 से क्या आपको मानव उपयोग के लिए उपलब्ध् जल की वास्तविक मात्रा का आभास हुआ है? क्या इस जानकारी से आपको चिंता हो रही है? इस विषय में अपनी कक्षा में चचार् करिए। 16.2 जल की अवस्थाएँ क्या आपको डर है कि सतत् उपयोग से किसी दिन उपयोग के लिए उपलब्ध् समस्त जल समाप्त होजाएगा? आप जानते हैं कि विभ्िान्न प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा पृथ्वी पर जल की निरंतर उपलब्ध्ता करोड़ों वषो± से बनी हुइर् है। यह सभी प्रक्रम सम्िमलित रूप से जल चक्र का निमार्ण करते हैं। आपने कक्षा 6 में जल चक्र के विषय में पढ़ा था। अपने शब्दों में लिख्िाए कि आप जल चक्र के बारे में क्या जानते हैं। आप जानते हैं कि जल चक्र द्वारा परिचव्रफण के दौरान जल इसकी तीनों अवस्थाओं अथार्त् ठोस, द्रव और गैस में से किसी एक अवस्था में पृथ्वी पर कहीं भी पाया जा सकता है। ठोस अवस्था में जल बप़्ार्फ और हिम के रूप में पृथ्वी के ध््रुवों पर ;बपर्फ छत्राकद्ध,़बप़्ार्फ से ढके पवर्तों और हिमनदों ;ग्लेश्िायरद्ध में पाया जाता है। द्रव अवस्था में जल महासागरों, झीलों, नदियों के अतिरिक्त भू - तल के नीचे ;भौमजलद्ध भी पाया जाता है। गैसीय अवस्था में जल हमारे आस - पास की वायु में जलवाष्प के रूप में उपस्िथत रहता है। जल का उसकी तीनों अवस्थाओं के बीच सतत् चक्रण द्वारा पृथ्वी पर जल की वुफल मात्रा स्िथर बनी रहती है, जबकि समस्त मानव जनसंख्या तथा अन्य सभी जीव जल का उपयोग करते हैं। क्या इस जानकारी से आपको कोइर् राहत मिलती है? क्या आपको जल चक्र में सम्िमलित प्रक्रम याद हैं? ियाकलाप 16.3 आपको इसमें सहायता कर सकता है। ियाकलाप 16.3 चित्रा 16.5 में जल चक्र में सम्िमलित प्रक्रमों कोसंख्याओं द्वारा चिित किया गया है। इन संख्याओं की सहायता से अस्त - व्यस्त क्रम में लिखे गए प्रक्रमों के लिए सही शब्द लिख्िाए। 1. मजभौल 2. ष्पवा 3. नसंघन 4. लदबा 5. नजर्ष्पोवात्स 6. स्यंअंदतःन 7. णवषर् विज्ञान अध्िकांश शहरों और नगरों की अपनी जल आपूतिर् व्यवस्था होती है, जो नागरिक निकायों द्वारा संचालित होती है। जल को आस - पास की किसी झील, नदी, तालाब अथवा वुफँओं से लाया जाता है। जल की आपूतिर् पाइपों के विशेष क्रम में बिछाए जाल द्वारा की जाती है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में जल की आपूतिर् इस प्रकार नहीं होती। वहाँ लोग अपने उपयोग के लिएजल, सीध्े उसके ड्डोत से ही प्राप्त करते हैं। प्रायः महिलाओं और बच्चों को जल लाने के लिए उसकेड्डोत तक पैदल जाना पड़ता है। कभी - कभी जल ड्डोत कइर् किलोमीटर की दूरी पर होता है ;चित्रा 16.6द्ध। बच्चों के लिए जल ढोने का यह कायर् अत्यध्िक कष्टकारी है। ऐसे बच्चे प्रायः नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा पाते हैं क्योंकि उन्हें ड्डोत से जल लाने में ही बहुत समय लग जाता है। हमारी जनसंख्या का एक बड़ा भाग अपने उपयोग के लिए जल, वुँफओं, नलवूफपों अथवा हैंडपंपों से प्राप्तकरता है। इन ड्डोतों को जल कहाँ से मिलता है? 16.3 जल का एक महत्त्वपूणर् ड्डोत: भौमजल यदि हम किसी जलाशय के निकट भूमि में गइा खोदें, तो हमें वहाँ की मृदा आद्रर् ;नमद्ध मिल सकती है। मृदा में आद्रर्ता भूमिगत जल की उपस्िथति को इंगित करती है। यदि हम और अध्िक गहराइर् तक खोदते चले जाएँ, तो हम उस स्तर तक पहुँच सकते हैं जहाँ मृदा के कणों के बीच के सारे के सारे रिक्त स्थान ;अवकाशद्ध और च‘ानों के बीच के स्थान जल सेभरे होते हैं ;चित्रा 16.7द्ध। इस परत की ऊपरी सीमा भौमजल स्तर कहलाती है। भौमजल स्तर विभ्िान्न स्थानों पर भ्िान्न - भ्िान्न होता है और यह किसी दिए गए स्थान पर परिवतिर्त भी हो सकता है। भौमजल स्तर एक मीटर से भी कम गहराइर् पर अथवा भूमि में अनेक मीटर की गहराइर् में हो सकता है। भौमजल स्तर के नीचे पाया जाने वाला जल भौमजल कहलाता है।इस भौमजल का ड्डोत क्या है?वषार्जल और अन्य ड्डोतों, जैसे नदियों और तालाबों का जल मृदा में से रिसकर भूमि के नीचे गहराइर् में रिक्त स्थानों और दरारों को भर देता है। भूमि में जल का रिसाव अंतःस्यंदन कहलाता है। अतः इस प्रक्रम द्वारा उपयोग किए जा चुके भौमजल की पुनः परिपूतिर् हो जाती है। वुफछ स्थानों पर भौमजल स्तर के नीचे स्िथर कठोर शैलों ;च‘ानोंद्ध की परतों के बीच भौमजल संचित हो जाता है। इस प्रकार संचित भौमजल के भंडारों को जलभर कहते हैं। जलभरों के जल को सामान्यतः नलवूफपों अथवा हैंडपंपों की सहायता से बाहर निकाला जाता है। 207 चित्रा 16.7 भौमजल और भौमजल स्तर क्या आप किसी ऐसे स्थान पर गए हैं जहाँ निमार्ण कायर् हो रहा हो? श्रमिकों को निमार्ण के लिए जल कहाँ से मिलता है? आपने शायद देखा होगा कि ऐसे स्थानों पर भौमजल स्तर पर पहुँचने के लिए संछिद्रण ;बोरिंगद्ध की जाती है। वहाँ कायर् करने वाले लोगों से मालूम कीजिए कि उन्हें जल पाने के लिए कितनी गहरी खुदाइर् करनी पड़ी। क्या हम भूमि के नीचे से निरंतर जल निकाल सकते हैं? ऐसा करने से भौमजलस्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 16.4 भौमजल स्तर का अवक्षय भूमि के नीचे से निकाले गए भौमजल की पुनःपूतिर्प्रायः वषार्जल के अवड्डवण ;रिसावद्ध द्वारा हो जाती है। भौमजल स्तर तब तक प्रभावित नहीं होता, जब तक कि हम केवल उतना ही जल निकालते हैं जितने की प्राकृतिक प्रक्रमों द्वारा पुनःपूतिर् हो जाती है। तथापि, जल की पयार्प्त रूप से पुनःपूतिर् न होने पर भौमजल स्तर नीचे गिर सकता है। ऐसा अनेक कारणों से हो सकताहै। जनसंख्या में वृि, औद्योगिक और कृष्िा गतिवििायाँ आदि भौमजल स्तर को प्रभावित करने वाले वुफछ सामान्य कारक हैं। अल्प वषार् एक अन्य कारक है, जो भौमजल स्तर को नीचा कर सकता है। भौमजल स्तर को प्रभावित करने वाले अन्य कारक हैं वनअपरोपण;वनोन्मूलनद्ध और जल के अवड्डवण के लिए प्रभावित क्षेत्रा में कमी। जनसंख्या प्रसार जनसंख्या बढ़ने से भवनों, दुकानों, कायार्लयों और सड़कों के निमार्ण की माँग भी बढ़ जाती है। इससेकृष्िा हेतु भूमि, उद्यानों और खेल के मैदानों जैसे खुले क्षेत्रों में कमी आ जाती है। इसके कारण भूमि में विज्ञान वषार्जल के अवड्डवण की दर कम हो जाती है। यदि खुले क्षेत्रों में इसी तरह कमी होती रही तो इसका क्या परिणाम होगा? याद रख्िाए कि पक्के प़्ाफशर् से जलआसानी से अवड्डवित नहीं होता, जबकि घास केबगीचे, मैदानों आदि से जल तुरंत अवड्डवित हो जाता है। यही नहीं, निमार्ण कायर् के लिए भी बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। इसके लिए प्रायः भौमजल का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार, एक ओर हम अध्िक भौमजल का उपयोग कर रहे हैं, और दूसरी ओर विभ्िान्न प्रकार के निमार्ण कायो± के परिणामस्वरूप हम भूमि में जल केअवड्डवण के अवसर कम कर रहे हैं। इसके कारण भौमजल स्तर का निरंतर अवक्षय हो रहा है। वास्तव में, अनेक शहरों के वुफछ भागों में भौमजल स्तर चिंताजनक रूप से अत्यध्िक निम्न स्तरों तक पहुँच गया है। बढ़ते हुए उद्योग जल का उपयोग सभी उद्योगों द्वारा किया जाता है। हमारे उपयोग में आने वाली लगभग हर वस्तु के उत्पादन में कहीं न कहीं जल की आवश्यकता होती है। उद्योगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अिाकांश उद्योगों द्वारा उपयोग किया जाने वाला जल भूमि से निकाला जाता है। ियाकलाप 16.4 ऐसे वुफछ उद्योगों के नाम बताइए, जिनसे आप परिचित हैं। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले और इनसे प्राप्त होने वाले उत्पादों की एक सूची बनाइए। अपने श्िाक्षक/श्िाक्ष्िाका और माता - पिता से इस बारे में बातचीत करिए कि किस प्रकार बढ़ते हुए उद्योग धंधेभौमजल स्तर के नीचे गिरने के लिए उत्तरदायी हैं। कृष्िा कायर् भारत में अध्िकांश किसान अपनी पफसलों की सिंचाइर् के लिए वषार् पर निभर्र करते हैं। नहरों, जैसे सिंचाइर् जलः एक बहुमूल्य संसाध्न तंत्रा केवल वुफछ ही क्षेत्रों में उपलब्ध् हैं। इन तंत्रों में भी अनियमित वषार् के कारण जल की उपलब्ध्ता में कमी हो सकती है। अतः, किसानों को सिंचाइर् के लिए भौमजल का उपयोग करना पड़ता है। जनसंख्या केबढ़ते दबाव के कारण कृष्िा के लिए भौमजल का उपयोग दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप भौमजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। 16.5 जल का वितरण अनेक कारणों से विश्व के विभ्िान्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले जल के वितरण में बहुत असमानता है। वुफछ स्थानों पर अच्छी वषार् होती है और वह जल से समृ( हैं। इसके विपरीत रेगिस्तान हैं जहाँ बहुत कम वषार् होती है। भारत बहुत विशाल देश है, जिसके सभी क्षेत्रों में एकसमान रूप से वषार् नहीं होती। वुफछ स्थानों पर अत्यध्िक वषार् होती है, जबकि वुफछ अन्य स्थानों पर बहुत कम वषार् होती है। अत्यध्िक वषार् से प्रायः बाढ़ आ जाती हैं, जबकि वषार् की कमी से सूखा पड़ता है। अतः, हमारे देश में एक ही समय में पर वुफछ क्षेत्रों में बाढ़ और वुफछ में सूखा हो सकता है। ियाकलाप 16.5 हमारे देश में औसत वाष्िार्क वषार् का वितरण, चित्रा 16.8 में दिखाया गया है। ऽ मानचित्रा में उस स्थान को ढूँढि़ए, जहाँ आप रहते हैं। ऽ क्या आपके क्षेत्रा में पयार्प्त वषार् होती है? ऽ क्या आपके क्षेत्रा में वषर्भर पयार्प्त जल उपलब्ध्रहता है? यह भी संभव है कि हम किसी ऐसे क्षेत्रा में रह रहे हों, जहाँ वषार् तो पयार्प्त होती है, पिफर भी जल की कमी रहती है। क्या हम कह सकते हैं कि यह जल संसाध्नों के वुफप्रबंध्न के कारण होता है। 209 चित्रा 16.8 भारत का वषार् मानचित्राआभार 1.भारत सरकार का प्रतिलिप्याध्िकार, 2007। 2.भारत के महासवेर्क्षक की अनुज्ञानुसार भारतीय सवेर्क्षण विभाग के मानचित्रा पर आधरित। 3.समुद्र में भारत का जलप्रदेश, उपयुक्त आधर - रेखा से मापे गये बारह समुद्री मील की दूरी तक है। 4.भारत की बाह्य सीमायें तथा समुद्र तटीय रेखायें भारतीय सवेर्क्षण विभाग द्वारा सत्यापित अभ्िालेख/प्रधान प्रति से मेल खाती है। विज्ञान 16.6 जल प्रबंध्न आपने कक्षा 6 में पढ़ा था कि अनेक स्थानों पर जल की नियमित आपूतिर् सुनियोजित पाइप तंत्रा के द्वारा की जाती है। जब नागरिक प्राध्िकरण पाइपों द्वारा जल की आपूतिर् करते हैं, तो यह संभव है कि जल गंतव्य तक न पहुँच पाए। आपने संभवतः जल आपूतिर् पाइपों में रिसाव को देखा होगा, जिससे बड़ी मात्रा में जल पाइपों से रिसकर बह जाता है। यह नागरिक अिाकारियोंका उत्तरदायित्व है कि बहुमूल्य जल को इस प्रकार व्यथर् होने से रोका जाए। वुुफप्रबंध्न अथवा बबार्दी व्यक्ितगत स्तरों पर भी हो सकती है। हम सभी जानबूझकर अथवा अनजाने में दाँतों में मंजन करने, दाढ़ी बनाने, नहाने और कइर् अन्य ियाकलापों के दौरान जल की बबार्दी करते हैं। त्राुटिपूणर् टोंटियों से जल रिसाव उसकी बबार्दी का एकअन्य ड्डोत है। उपयोग के दौरान जल की बबार्दी से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे भविष्य में हमें जल की आवश्यकता नहीं होगी। हमने देखा है कि वषार् के रूप में जो जल हमें प्राप्त होता है उसमें से अध्िकांश ऐसे ही बह जाता है।यह बहुमूल्य प्राकृतिक संसाध्न की बबार्दी है। वषार् जल का उपयोग भौमजल स्तर की पुनःपूतिर् करने के लिए किया जा सकता है। इसे जल संग्रहण अथवा वषार्जल संग्रहण कहते हैं, जिसके बारे में आपने कक्षा 6 में पढ़ा था। यह मालूम कीजिए कि क्या आपके आस - पास की किसी इमारत में जल संग्रहण तंत्रों को लगाया गया है। हमारे देश में अनेक स्थानों पर जल भंडारण और जल का पुनःपूतिर् करने के लिए बावड़ी बनाने की प्रथाओं का सदियों से चलन रहा है। बावड़ी जल संचित करने का पारंपरिक तरीका था। समय के साथ बावडि़यों का रखरखाव बंद कर दिया गया, जिनसे इन जलाशयों में ध्ीरे - ध्ीरे गाद जमा होती गइर्। तथापि, जल की अत्यध्िक कमी के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को इस प्रकार की तकनीकों पर पुनः विचार करना पड़ा। बावडि़यों को पुनः बनाया जा रहा है। जिन स्थानों में बावडि़यों का पुनःउत्थान किया गया है वहाँ कम वषार् के बावजूद जल की आवश्यकताओं का प्रबंध्न भली भाँति हो रहा है। किसान भी अपने खेत में जल का उपयोग मितव्ययता से कर सकते हैं। संभवतः आपने बूँद ;डिªपद्ध सिंचाइर् व्यवस्था के बारे में सुना होगा ;चित्रा 16.9द्ध। डिªप सिंचाइर् व्यवस्था कम व्यास के पाइपों द्वारा पौधें को पानी देने की तकनीक है, जो सीध्े उनकी जड़ों तक जल पहुँचाती है। एक केस अध्ययन गुजरात के कच्छ क्षेत्रा के भुजपुर नामक स्थान में वषार् बहुत अनिश्िचत रूप से होती है। वहाँ का ताशे जल काएकमात्रा ड्डोत भूमिगत जल ही है, क्योंकि इस क्षेत्रा में नदियों में वषर्भर पयार्प्त जल नहीं होता है। पिछले वषो± में, जल की माँग बढ़ गइर् है। भौमजल का उपयोग पुनःपूतिर् होने वाले जल से कहीं अध्िक है। इसके परिणामस्वरूप भौमजल स्तर चिंताजनक रूप से नीचे गिरता चला गया है। वषर् 1989 में, गाँववासियों ने एक गैर - सरकारी संगठन के साथ मिलकर, वषार्जल संग्रहण का निश्चय किया। रूक्मावती नदी और उसकी अनेक सहायक नदियों पर 18 चैकडैम ;बंध्द्ध बनाए गए। इस तरह एकत्रिात किएगए जल से मृदा में अंतःड्डवण की दर को बढ़ा दिया, जिससे जलभरों की पुनःपूतिर् हो गइर्। इस क्षेत्रा के किसानों के अनुसार अब वुफँओं में पानी वषर्भर उपलब्ध् रहता है और जो जल बहकर समुद्र में चला जाता था और व्यथर् हो जाता था, अब सिंचाइर् के लिए उपलब्ध् हो गया है। 211 चित्रा 16.9 खेत में बूँद ;डिªपद्ध सिंचाइर् व्यवस्था 16.7 आपकी भूमिका क्या आप कभी अपने घर, विद्यालय अथवा किसी अन्य स्थान पर नल से पानी बहता देखकर उसे बंद करते हैं? रिसते हुए नलों से बहुत - सा जल व्यथर् बह जाता है। जल की बबार्दी को कम करने के लिए आप अनेवफ कदम उठा सकते हैं। आइए, आपकी सहायता के लिए हम वुफछ उदाहरणों पर विचार करते हैं। आप इनमें कइर् और तरीके जोड़ सकते हैं। जल बचत आदतें 1.मंजन/ब्रुश करते समय नल को लगातार खुला न रखें। 2.पफशर् की ध्ुलाइर् करने की बजाए उस पर पौंछा़लगाएँ। 3. - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 16.8 पादपों पर जल की कमी का प्रभाव आपने देखा होगा कि गमले के पादपों ;पौधेंद्ध को यदि वुफछ दिनों तक पानी न दिया जाए तो वह मुरझा जाते हैं और अंततः सूख जाते हैं। आपने अध्याय 1 में पढ़ा था कि पादपों को अपना भोजन तैयार करने केलिए मृदा में से पोषक तत्त्व प्राप्त करने के लिए जल की आवश्यकता होती है। कल्पना कीजिए कि यदि पादपों के लिए जल उपलब्ध् नहीं होगा, तो उसका क्या परिणाम होगा। पृथ्वी पर से हरियाली लुप्त हो जाएगी। इसका अथर् जीवन का अंत हो सकता है, क्योंकि पादपों के न रहने का परिणाम यह होगा कि पृथ्वी पर न ही पयार्प्त भोजन, न ही आॅक्सीजन उपलब्ध् होगी, न ही पयार्प्त वषार् होगी और इनसे संब( अनेकों अन्य समस्याएँ उत्पन्न हो जाएँगी। एक सपफल प्रयास राजस्थान एक गमर् और शुष्क क्षेत्रा है। जल की प्राकृतिक कमी की चुनौती को एक सपफल प्रयास द्वारा हल करदिया गया। सामाजिक कायर्कत्तार्ओं के एक दल ने अलवर जिले में एक शुष्क क्षेत्रा को हरित स्थान में परिवतिर्त कर दिया। उन्होंने पाँच सूख चुकी नदियों अखेरी, रूपारेल, सरसा, भगिनी और जहाजवाली को जल संग्रहण द्वारा पुनजीर्वित कर दिया। विज्ञान प्रमुख शब्द अंतःस्यंदन भौमजल स्तर अलवण जल आपने क्या सीखा ऽ जल सभी सजीव जीवों के लिए अनिवायर् है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। ऽ जल तीन अवस्थाओं में पाया जाता है - ठोस, द्रव और वाष्प। ऽ यद्यपि, जल चक्र के द्वारा जल की आपूतिर् बनी रहती है पिफर भी विश्व के अनेक भागों में उपयोग योग्य जल की कमी है। ऽ विश्व के विभ्िान्न भागों में जल का वितरण असमान है। ऐसा बहुत वुफछ मानव ियाकलापों के कारण भी है। ऽ उद्योगों की तेशी से वृि, बढ़ती जनसंख्या, सिंचाइर् की बढ़ती आवश्यकताएँ और वुफप्रबंध्न जल की कमी के वुफछ कारण हैं। ऽ हमें पाइपों द्वारा जल आपूतिर् के समय, भवनों और अन्य स्थानों में रिसते नलों के कारण होने वाले जल की बबार्दी के प्रति जागरुक होना चाहिए। जल के अनावश्यक उपयोग और अत्यिाक मात्रा में भौमजल का उपयोग करने से बचना चाहिए। भूमि में जल के पुनःपूतिर् को बढ़ाया जाना चाहिए। ऽ समय की माँग है कि हर व्यक्ित जल का उपयोग मितव्ययता से करे। ऽ यदि पौधें को वुफछ दिनों तक पानी न दिया जाए तो वह मुरझा जाते हैं और अंततः सूख जाते हैं। अभ्यास 1. निम्नलिख्िात वक्तव्य ‘सत्य’ हैं अथवा ‘असत्य’μ ;कद्ध भौमजल विश्वभर की नदियों और झीलों में पाए जाने वाले जल से कहीं अिाक है। ;खद्ध जल की कमी की समस्या का सामना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी करते हैं। ;गद्ध नदियों का जल खेतों में सिंचाइर् का एकमात्रा ड्डोत है। ;घद्ध वषार् जल का चरम ड्डोत है। 2.समझाइए कि भौमजल की पुनःपूतिर् किस प्रकार होती है? 3.किसी गली में पचास घर हैं, जिनके लिए दस नलवूफप ;ट्यूबवैलद्ध लगाए गए हैं। भौमजल स्तर पर इसका दीघार्वध्ि प्रभाव क्या होगा? 4.मान लीजिए आपको किसी बगीचे का रखरखाव करने की जिम्मेदारी दी जाती है। आप जल का सदुपयोग करने के लिए क्या कदम उठाएँगे? 5.भौमजल स्तर के नीचे गिरने के लिए उत्तरदायी कारकों को समझाइए। 6.रिक्त स्थानों की उचित शब्द भरकर पूतिर् कीजिए - ;कद्ध भौमजल प्राप्त करने के लिए - - - - - - - - - - - - - - - तथा - - - - - - - - - - - - - - - का उपयोग होता है। ;खद्ध जल की तीन अवस्थाएँ - - - - - - - - - - - - , - - - - - - - - - - - - और - - - - - - - - - - - - हैं। ;गद्ध भूमि की जल धरण करने वाली परत - - - - - - - - - - - - - - - कहलाती है। ;घद्ध भूमि में जल के अवड्डवण के प्रक्रम को - - - - - - - - - - - - - - - कहते हैं। 7.निम्नलिख्िात में से कौन सा कारक जल की कमी के लिए उत्तरदायी नहीं है? ;कद्ध औद्योगीकरण में वृि ;खद्ध बढ़ती जनसंख्या ;गद्ध अत्यध्िक वषार् ;घद्ध जल संसाध्नों का वुफप्रबंध्न 8.सही विकल्प का चयन कीजिए - ;कद्ध विश्व की सभी झीलों और नदियों में जल की वुफल मात्रा नियत ;स्िथरद्ध रहती है। ;खद्ध भूमिगत जल की वुफल मात्रा नियत रहती है। ;गद्ध विश्व के समुद्रों और महासागरों में जल की वुफल मात्रा नियत है। ;घद्ध विश्व में जल की वुफल मात्रा नियत है। 9.भौमजल और भौमजल स्तर को दिखाते हुए एक चित्रा बनाइए। उसे चिित कीजिए। विस्तारित अध्िगम - ियाकलाप और परियोजना कायर् 1.नाटक में भूमिका आप अपने विद्यालय में जल खोजी गुप्तचर हैं। आपके दल में छह सदस्य हैं। विद्यालय परिसर का सवेर्क्षण करके निम्नलिख्िात जानकारी एकत्रा कीजिए - ऽ नलों की वुफल संख्या ऽ टपक रहे नलों की संख्या विज्ञान ऽ रिसने के कारण व्यथर् हो रहे जल की मात्रा ऽ रिसाव के कारण ऽ अपनाए गए सुधर के उपाय 2.भौमजल का दोहन यह जानने का प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्रा में कितने हैंडपंप हैं। इनमें से वुफछ के मालिकों अथवा उपयोग करने वालों से बातचीत कर यह मालूम कीजिए कि जल कितनी गहराइर् पर मिला था? यदि गहराइयों में कोइर् अंतर हो तो उसके संभावित कारणों के बारे में विचार कीजिए। अपनी जानकारी के आधर पर रिपोटर् लिख्िाए और उस पर अपनी कक्षा में चचार् कीजिए। यदि संभव हो, तो किसी ऐसे स्थान पर जाइए, जहाँ हैंडपंप लगाने के लिए बोरिंग ;संछिद्रणद्ध की जा रही हो। पूरे प्रक्रम को सावधनीपूवर्क नोट कीजिए और उस स्थान पर भौमजल स्तर की गहराइर् का पता लगाइए। 3.वषार्जल को संचित करना - पारंपरिक विध्ियाँ कक्षा में 4 से 5 छात्रों के समूह बना लीजिए और जल संग्रहण की विभ्िान्न पारंपरिक वििायों पर एक रिपोटर् तैयार करिए। यदि संभव हो तो, निम्नलिख्िात वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कीजिए। ूूूण्तंपदूंजमतींतअमजपदहण्वतह 4.जल का संरक्षण घरों में और विद्यालय में जल संरक्षण के लिए एक अभ्िायान चलाइए। अन्य लोगोंको जल संसाध्नों के महत्त्व के बारे में बताने के लिए पोस्टर बनाइए। 5.किसी ‘प्रतीक’ अथवा ‘लोगो’ का सृजन जल की कमी को दशार्ने वाला कोइर् ‘लोगो’ अथवा ‘प्रतीक’ बनाने के लिए एक प्रतिस्पधर् का आयोजन कीजिए।

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