रेशम की खोज रेशम की खोज का यथाथर् समय संभवतः अज्ञात है। एक प्राचीन चीनी विंफवदंती के अनुसार, सम्राट हुआंग - टी ने साम्राज्ञी सी - लुंग - ची से अपने बगीचे में उगने वाले शहतूत के वृक्षों की पिायों के क्षतिग्रस्त होने का कारण पता लगाने के लिए कहा था। साम्राज्ञी ने पाया कि सप़्ोफद कृमि शहतूत की पिायों को खा रहे थे। उन्होंने यह भी देखा कि कृमि अपने इदर् - गिदर् चमकदार कोवूफन बुन लेते थे। संयोग से एक कोवूफन उनके चाय के प्याले में गिर गया और कोवूफन में से नाशुक धागों का गुच्छा पृथक हो गया। रेशम उद्योग चीन में आरंभ हुआ और सैंकड़ों वषो± तक इसे कड़ी पहरेदारी में गुप्त रखा गया। बाद में यात्रिायों और व्यापारियों ने रेशम को अन्य देशों में प्रचलित किया। जिस मागर् से उन्होंने यात्रा की थी, उसे आज भी ‘सिल्क रूट’ कहते हैं। वैफटरपिलर खाना बंद कर देते हैं और कोवूफन बनाने के लिए वे बाँस के बने छोटे - छोटे कक्षों में चले जाते हैं ¹चित्रा 3.10 ;कद्धह्। ;इसके लिए ट्रे में छोटी रैक या टहनियाँ रख दी जाती हैं, जिनसे कोवूफन जुड़ जाते हैं।द्ध वैफटरपिलर अथवा रेशम कीट कोवूफन बनाते हैं, जिसके भीतर प्यूपा विकसित होता है। रेशम का संसाध्न - रेशम पफाइबर प्राप्त करने वेफ़लिए कोवूफनों की बड़ी ढेरी का उपयोग किया जाता है। वयस्क कीट में विकसित होने से पहले ही कोवूफनों को धूप में रखा जाता है अथवा पानी में उबाला जाता है या भाप में रखा जाता है। इस प्रक्रम में रेशम के पफाइबर पृथक हो जाते हैं। रेशम के रूप में उपयोग वेफ़प्रमुख शब्द लिए कोवूफन में से रेशे निकालने के पश्चात उनसे धगे बनाने की प्रिया रेशम की रीलिंग कहलाती है। रीलिंग विशेष मशीनों में की जाती है, जो कोवूफन में से पफाइबर या रेशों को निकालती हैं। पिफर रेशम वेफ़पफाइबरों की़कताइर् की जाती है, जिससे रेशम के धगे प्राप्त हो जाते हैं। बुनकरों द्वारा रेशम के इन्हीं धागों से वस्त्रा बुने जाते हैं। आपने क्या सीखाविज्ञान 5.किसी ने पहेली को बताया कि एक जंतु जिसे ‘विवुफना’ कहते हैं, से भी ऊन प्राप्त होती है। क्या आप उसे बता सकते हैं कि यह जंतु कहाँ पाया जाता है। इसके बारे में शब्दकोश अथवा एन्साइक्लोपीडिया/ज्ञानकोश में देख्िाए। 6.हथकरघा और वस्त्रा प्रदशर्नियों में प्रायः वुफछ दुकानों पर रेशम की विभ्िान्न किस्मों के कीटों और उनके जीवनचक्र की भ्िान्न - भ्िान्न अवस्थाओं को उनके वास्तविक नमूनों द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है। इन दुकानों पर अपने बुशुगो± अथवा श्िाक्षकों के साथ जाकर इन कीटों और उनके जीवनचक्र की अवस्थाओं को देखने का प्रयास कीजिए। 7.अपने बगीचे अथवा उद्यान या पौधें से भरपूर किसी अन्य स्थान पर किसी कीट अथवा तितली के अंडों को खोजिए। इन्हें पिायों पर छोटे बिंदुओं के रूप में देखा जा सकता है। अंडेयुक्त पिायों को तोड़ लीजिए और उन्हें गत्ते के डिब्बे में रख दीजिए। उसी पौध्े अथवा उसी किस्म के किसी अन्य पौध्े की वुफछ पिायों को काटकर डिब्बे में डाल दीजिए। संभवतः अंडों में से वैफटरपिलर निकल आए। यदि ऐसा हुआ तो आप पाएंगे कि वैफटरपिलर दिन - रात खाने में व्यस्त रहते हैं। उनके खाने के लिए डिब्बे में प्रतिदिन पिायाँ डालते रहें। कभी - कभी आपको पौधें की पिायों में वैफटरपिलर भी मिल सकते हैं। लेकिन सावधन रहिए। वैफटरपिलर को पकड़ने के लिए कागज के नैपकिन अथवा कागज़्ा का उपयोग करना चाहिए।़इन्हें प्रतिदिन देख्िाए। नोट कीजिए ;पद्ध अंडों में से वैफटरपिलर के निकलने में कितने दिन लगते हैं, ;पपद्ध कोवूफन अवस्था तक पहुँचने मेें कितने दिन लगते हैं, और ;पपपद्ध जीवनचक्र को पूणर् होने में कितने दिन लगते हैं। अपने प्रेक्षणों को अपनी नोटबुक में लिख्िाए। क्या आप जानते हैं? भेड़ों की संख्या की दृष्िट से, चीन और आॅस्ट्रेलिया के बाद भारत का विश्व में तीसरा स्थान है। यद्यपि न्यूजीलैंड की भेड़ों से सबसे अच्छी ऊन प्राप्त होती है। 36 विज्ञान

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