पादपों में पोषण कक्षा 6 में आप पढ़ चुके हैं कि सभी जीवों के लिए भोजन आवश्यक है। आप यह भी पढ़ चुके हैं कि काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज भोजन के घटक हैं। भोजन के ये घटक हमारे शरीर के लिए आवश्यक हैं तथा इन्हें पोषक कहते हैं। सभी जीवों को भोजन की आवश्यकता होती है। पादप ;पौधेद्ध अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं, परंतु मानव सहित कोइर् भी प्राणी अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता। वे पादपों अथवा पादपों का आहार ग्रहण करने वाले जंतुओं से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। अतः मानव तथा अन्य प्राणी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से पादपों पर निभर्र करते हैं।1.1 पादपों में पोषण विध्ि केवल पादप ही ऐसे जीव हैं, जो जल, काबर्न डाइआॅक्साइड एवं खनिज की सहायता से अपना भोजन बना सकते हैं। ये सभी पदाथर् उनके परिवेश में उपलब्ध् होते हैं। पोषक पदाथर् सजीवों की शारीरिक संरचना, वृि तथा क्षतिग्रस्त भागों के रखरखाव के लिए समथर् बनाते हैं तथा विभ्िान्न जैव प्रक्रमों के लिए आवश्यकऊजार् भी प्रदान करते हैं। सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने एवं इसके उपयोग की विध्ि को पोषण कहते हैं। पोषण की वह विध्ि, जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेष्िात करते हैं, स्वपोषण कहलाती है। अतः ऐसे पादपों को स्वपोषी कहते हैं। जंतु एवं अिाकतर अन्य जीव पादपों द्वारा संश्लेष्िात भोजन ग्रहण करते हैं। उन्हें विषमपोषी कहते हैं। अब हम पूछ सकते हैं कि पादपों की खाद्य पैफक्िट्रयाँ कहाँ स्िथत हैं? क्या भोजन पादप के सभी भागों में निमिर्त होता है अथवा केवल वुफछ विशेष भागों में? पादप अपने परिवेश से कच्ची सामग्री किस प्रकार प्राप्त करते हैं? खाद्य पैफक्िट्रयों तक उनका स्थानांतरण किस प्रकार होता है? 1.2 प्रकाश संश्लेषण - पादपों में खाद्य संश्लेषण का प्रक्रम पिायाँ पादप की खाद्य पैफक्िट्रयाँ हैं। पादपों में खाद्यपदाथो± का संश्लेषण उनकी पिायों में होता है। अतः सभी कच्चे पदाथर् उन तक पहुँचने चाहिए। मृदा में उपस्िथत जल एवं खनिज जड़ ;मूलद्ध द्वारा अवशोष्िातकिए जाते हैं तथा तने के माध्यम से पिायों तकपहुँचाए जाते हैं। पत्ती की सतह पर उपस्िथत सूक्ष्म कोश्िाकाएँ आपने देखा है कि इमारतें ईंटों से बनती हैं। इसी प्रकार सजीवों का शरीर सूक्ष्म इकाइयों से बनता है, जो कोश्िाका कहलाती हैं। कोश्िाकाओं को सूक्ष्मदशीर् द्वारा देखा जा सकता है। वुफछ जीव मात्रा एक कोश्िाका के बने होते हैं। कोश्िाका एक पतली बा“य संरचना द्वारा घ्िारी होती है, जिसे कोश्िाका झिल्ली कहते हैं। इसमें वंेफद्र में स्िथत एक सुस्पष्ट संरचना भी होती है, जो वंेफद्रक कहलाती है ;चित्रा 1.1द्ध। वंेफद्रक चारों ओर से जेली के समान एक पदाथर् से घ्िारा होता है, जिसे कोश्िाका द्रव्य कहते हैं। चित्रा 1.1 कोश्िाका का आरेख चित्रा कोश्िाका झिल्ली कोश्िाका द्रव्य वेंफद्रक रंध्रों द्वारा वायु में उपस्िथत काबर्न डाइआॅक्साइड प्रवेश करती है। यह रंध््र द्वारकोश्िाकाओं द्वारा घ्िारे होते हैं। ऐसे छिद्रों को रंध््र कहते हैं।जल एवं खनिज, वाहिकाओं द्वारा पिायों तक पहुँचाए जाते हैं। ये वाहिकाएँ नली के समान होती हैंतथा जड़, तना, शाखाओं एवं पिायों तक पैफली होतीहैं। पोषकों को पिायों तक पहुँचाने के लिए ये वाहिकाएँ एक सतत् मागर् बनाती हैं। पादपों में पदाथो± के परिवहन के विषय में आप अध्याय 11 में पढ़ेंगे। पहेली जानना चाहती है कि पिायों में ऐसी क्या विशेषता है कि वे खाद्य पदाथो± का संश्लेषण कर सकती हैं परंतु पादप के दूसरे भाग नहीं। पिायों में एक हरा वणर्क होता है, जिसे क्लोरोपिफल कहते हैं। क्लोरोपिफल सूयर् के प्रकाश ;सौर प्रकाशद्धकी ऊजार् का संग्रहण करने में पत्ती की सहायताकरता है। इस ऊजार् का उपयोग जल एवं काबर्न डाइआॅक्साइड से खाद्य संश्लेषण में होता है, क्योंकि खाद्य संश्लेषण सूयर् के प्रकाश की उपस्िथति में होता है। इसलिए इसे प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। अतः हमने देखा कि क्लोरोपिफल, सूयर् का प्रकाश, काबर्न डाइआॅक्साइड एवं जल, प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं। इस पृथ्वी पर यह एक अद्वितीय प्रक्रमहै। पिायों द्वारा सौर ऊजार् संग्रहित की जाती है तथा पादप में खाद्य के रूप में संचित हो जाती है। अतः सभी जीवों के लिए सूयर् ऊजार् का चरम स्रोत है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि प्रकाश संश्लेषण नहीं होगा, तो क्या होगा? प्रकाश संश्लेषण न होने की स्िथति में पादपों का अस्ितत्व नहीं होगा। सभी जीवों का अस्ितत्व प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से पादपों द्वारा निमिर्त भोजन पर निभर्र करता है। इसके अतिरिक्त सभी जीवों के लिए परमावश्यक आॅक्सीजन भी प्रकाश संश्लेषण के दौरान निमिर्त होती है। प्रकाश संश्लेषण की अनुपस्िथति में, पृथ्वी पर जीवन की कल्पना असंभव है।प्रकाश संश्लेषण के दौरान पत्ती की क्लोरोपिफलयुक्त कोश्िाकाएँ ;चित्रा 1.2द्ध, सूयर् के प्रकाश की उपस्िथति में, काबर्न डाइआॅक्साइड एवं जल से काबोर्हाइड्रेट का संश्लेषण करती हैं ;चित्रा 1.3द्ध। इस प्रक्रम को निम्न समीकरण द्वारा दशार् सकते हैंः सयूर् का पक्राश काबर्ॅसाइड ़ जल →न डाइआक्⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯क्लोरोपिफल काबोर्हाइड्रेट $ आॅक्सीजन इस प्रक्रम में आॅक्सीजन निमुर्क्त होती है। काबोर्हाइड्रेट अंततः मंड ;स्टाचर्द्ध में परिवतिर्त हो ;इद्ध पत्ती की काट चित्रा 1.2 क्लोरोपिफल युक्त कोश्िाकाएँ दशार्ते हुए किसी पत्ती का काट चित्रा जाते हैं। पत्ती में स्टाचर् की उपस्िथति प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम का संपन्न होना दशार्ता है। स्टाचर् भी एक प्रकार का काबोर्हाइड्रेट है। ियाकलाप 1.1 एक ही प्रकार के पादपों के दो गमले लीजिए। एक को अंध्कार ;अथवा काले बक्सद्ध में 72 घंटों के लिए रख्िाए तथा दूसरे को सूयर् के प्रकाश में रख्िाए।दोनों पादपों की पिायों में आयोडीन परीक्षण उसी प्रकार कीजिए जैसे आपने कक्षा 6 में किया था। अपने अवलोकनों को नोट कीजिए। अब उस गमले को, जिसे आपने अंध्कार में रखा था, 3 - 4 दिनों के लिएसूयर् के प्रकाश में रख दीजिए तथा पुनः इसकी पत्ती पर आयोडीन परीक्षण कीजिए। अपने प्रेक्षण अपनी नोटबुक में लिखें।हरी पिायों के अतिरिक्त अन्य वणर् ;रंगद्ध कीपिायों में भी क्लोरोपिफल होता है। परंतु इन पिायों में उपस्िथत लाल, भूरे अथवा अन्य वणर्क क्लोरोपिफल के हरे रंग का प्रच्छादन कर देते हैं अथार्त् ढक लेतेहैं ;चित्रा 1.4द्ध। इन पिायों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है। आपने गीली दीवारों पर, तालाब अथवा ठहरे हुए जलाशय में हरे अवपंकी ;काइर् जैसे पादपद्ध देखे होंगे। ये सामान्यतः वुफछ जीवों की वृि के कारण बनते हैं, जिन्हें शैवाल कहते हैं। क्या आप कल्पना 3 कर सकते हैं कि इनका रंग हरा क्यों होता है? इनमें क्लोरोपिफल होता है, जिसके कारण ये हरे दिखाइर् देते हैं। शैवाल भी प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। पादपों में काबोर्हाइड्रेट के अतिरिक्त अन्य खाद्यों का संश्लेषण अभी आपने पढ़ा कि प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम द्वारा पादप ;पौध्ेद्ध काबोर्हाइडेªट का संश्लेषण करते हैं। ‘काबोर्हाइड्रेट’ काबर्न, हाइड्रोजन एवं आॅक्सीजन से बनते हैं। इनका उपयोग खाद्य के अन्य घटकों के संश्लेषण में होता है। परन्तु प्रोटीन नाइट्रोजनी पदाथर् हैं, जिनमें काबर्न, आॅक्सीजन एवं हाइड्रोजन के अतिरिक्त नाइट्रोजन भी होती है। पादपों को नाइट्रोजन कहाँ से प्राप्त होती है? याद कीजिए, वायु में नाइट्रोजन गैसीय अवस्था में प्रचुर मात्रा में पाइर् जाती है। परन्तु, पादप इसका अवशोषण इसी रूप में नहीं कर सकते। मि‘ी में वुफछ विशेष जीवाणु होते हैं, जो गैसीय नाइट्रोजन को उपयोगी यौगिकों में परिवतिर्त कर मृदा में निमुर्क्त करते हैं। यह विलेय पदाथर् पादपों द्वारा जल के साथ अवशोष्िात कर लिए जाते हैं। संभवतः आपने देखा है कि किसान अपने खेतों में उवर्रक तथा खाद डालते हैं, जिनमें नाइट्रोजनी पदाथो± की प्रचुरता होती है। इस प्रकार अन्य संघटकों के साथ पादपों की नाइट्रोजन की माँग की आपूतिर् हो जाती है। इसके पश्चात् पादप खाद्य के अन्य संघटकों, जैसे कि प्रोटीन एवं वसा का संश्लेषण करते हैं। 1.3 पादपों में पोषण की अन्य विध्ियाँ वुफछ पादप ;पौध्ेद्ध ऐसे भी हैं, जिनमें क्लोरोपिफल नहीं पाया जाता। वे अपना भोजन संश्लेष्िात नहीं कर सकते। वे वैफसे जीवित रहते हैं, तथा वे पोषक किस प्रकार प्राप्त करते हैं? मनुष्य एवं अन्य प्राण्िायों की तरह ये पादप भी अपने पोषण के लिए अन्य पादपों द्वारा निमिर्त खाद्य पर निभर्र होते हैं। वे विषमपोषी प्रणाली का उपयोग करते हैं। चित्रा 1.5 को ध्यान से देख्िाए। क्या आपको एक वृक्ष के तने एवं शाखाओं से लिपटी रस्सीनुमा पीले रंग की संरचना दिखाइर् देती है? ये अमरबेल का पादप है। इसमें क्लोरोपिफल नहीं होता है। ये अपना भोजन उस पादप से प्राप्त करते हैं, जिस पर ये आरोहित होते हैं। जिस पर ये आरोहित होते हैं, वह पादप परपोषी कहलाता है। क्योंकि अमरबेल जैसे पादप परपोषी को अमूल्य पोषकों से वंचित करते हैं, अतः इन्हें परजीवी कहते हैं। क्या हम एवं अन्य जंतु भी पादपों पर परजीवी हैं? आपको इस पर विचार करना चाहिए। अपने अध्यापक से इस विषय पर चचार् कीजिए। क्या आपने ऐसे पादपों को देखा अथवा उनके विषय में सुना है, जो जंतुओं का भक्षण करते हैं। वुफछ ऐसे पादप भी हैं, जो कीटों को पकड़ते हैं तथा उन्हें पचा जाते हैं। क्या यह विस्मयकारी नहीं है? ऐसे पौधे हरे या अन्य किसी रंग के हो सकते हैं। चित्रा 1.6 के पादप को देख्िाए। इसकी घड़े ;घटद्ध के समान दिखाइर्देने वाली संरचना वास्तव में उसकी पत्ती का रूपांतरितभाग है। पत्ते का शीषर् भाग घड़े का ढक्कन बनाता है। घड़े के अंदर अनेक रोम होते हैं जो नीचे की ओर ढलके रहते हैं अथार्त् अधोमुखी होते हैं। जब कोइर् ढक्कन चित्रा 1.6 घटपणीर् ;पिचर पादपद्ध में घड़े एवं ढक्कन जैसी संरचना होती है चित्रा 1.7 छत्राक के पैकेटऋ सड़ी - गली वस्तु पर उगा छत्राक ियाकलाप 1.2 ब्रेड ;डबल रोटीद्ध का एक टुकड़ा लेकर इसे जल में भ्िागो लें। इसे किसी नम एवं उष्ण स्थान पर 2 - 3 दिन के लिए रख दीजिए अथवा उस समय तक रखा रहने दीजिए, जब तक कि उस पर रोएँ जैसी संरचना न दिखाइर् देने लगे ;चित्रा 1.8द्ध। ये संरचनाएँ सपेफद, हरे, भूरे अथवा किसी अन्य रंग के ध्ब्बों के रूप में हो सकती हैं। किसी आवध्र्क लेंस अथवा सूक्ष्मदशीर् की सहायता से इनका अवलोकन कीजिए। अपने प्रेक्षणों को नोटबुक में लिख्िाए। बहुत संभव है कि आपको रुइर् के धागों के समान संरचनाएँ दिखाइर् पड़ें। यह जीव कवक या पंफजाइर् कहलाते हैं। इनकी पोषण प्रणाली अथवा पोषण वििा भ्िान्न प्रकार की होती है। ये मृत एवं विघटनकारी ;सड़नेवालीद्ध वस्तुओं ;जैव पदाथो±द्ध की सतह पर वुफछ पाचक रसों का स्राव करते हैं, जिससे वे विलयन रूप में परिवतिर्त हो जाते हैं। तत्पश्चात् वे इस विलयन का भोजन के रूप में अवशोषण करते हैं। इस प्रकार की पोषण प्रणाली को, जिसमें जीव किसी मृत एवं विघटित जैविकपदाथो± से पोषक तत्त्व प्राप्त करते हैं, मृतजीवी पोषण कहलाती है। मृतजीवी पोषण प्रणाली का उपयोग करने वाले पौधे मृतजीवी कहलाते हैं। कवक ;पंफजाइर्द्ध आचार, चमड़े, कपड़े एवं अन्य पदाथो± पर उगते हैं। ये उन स्थानों में भी उगते हैं, जो नम एवं उष्ण हों। कवकों की वृि के लिए वषार् )तु सबसे अच्छी परिस्िथतियाँ प्रदान करती हैं। इसी कारण वषार् )तु के दौरान अनेक वस्तुएँ कवकों की वृि के कारण नष्ट अथवा अनुपयोगी हो जाती हैं। अपने अभ्िाभावकों से कवक द्वारा होने वाले नुकसान पर चचार् कीजिए। पहेली को याद है कि उसके सुंदर जूते, जिन्हें वह विशेष अवसरों पर पहनती थी, वषार् )तु में कवक के कारण खराब हो गए। वह जानना चाहती है कि वषार् )तु में कवक अचानक वैफसे प्रकट हो जाते हैं। सामान्यतः कवकों के बीजाणु वायु में उपस्िथत होते हैं। जब वे किसी ऐसे जैव पदाथर् अथवा उत्पाद पर बैठते हैं, जो नम एवं उष्ण हो, तो वे अंवुफरित होकर नए कवक को जन्म देते हैं। क्या अब आप बता सकते हैं कि हम अपनी वस्तुओं को कवक द्वारा खराब होने से किस प्रकार बचा सकते हैं? बूझो को याद है कि उसके दादा जी ने बताया था कि एक बार उनकी गेहूँ की पफसल कवक द्वारा नष्ट हो गइर् थी। वह जानना चाहता है कि क्या कवक रोग कारक भी होते हैं? पहेली ने बताया कि यीस्ट एवं छत्राक जैसे अनेक कवक उपयोगी भी हैंऋ परंतु वुफछ कवक पादपों, जंतुओं एवं मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं। वुफछ कवकों का उपयोग औषध्ि के रूप में भी होता है। वुफछ जीव एक - दूसरे के साथ रहते हैं तथा अपनाआवास एवं पोषक तत्त्व एक - दूसरे के साथ बाँटते हैं। इसे सहजीवी संबंध कहते हैं। उदाहरणतः वुफछ कवक वृक्षों की जड़ों में रहते हैं। वृक्ष कवक को पोषण प्रदान करते हैं, बदले में उन्हें जल एवं पोषकों के अवशोषण में सहायता मिलती है। वृक्ष के लिए इस संबंध् का विशेष महत्व है। लाइकेन कहे जाने वाले वुफछ जीवों में दो भागीदार होते हैं। इनमें से एक शैवाल होता है तथा दूसरा कवक। शैवाल में क्लोरोपिफल उपस्िथत होता है, जबकि कवक में क्लोरोपिफल नहीं होता। कवक शैवाल कोरहने का स्थान ;आवासद्ध, जल एवं पोषक तत्त्व उपलब्ध् कराता है तथा बदले में शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा संश्लेष्िात खाद्य कवक को देता है। 1.5 मृदा में पोषकों की पुनः पूतिर् किस प्रकार होती है? क्या आपने किसानों को अपने खेतों में अथवा माली को बगीचे के लाॅन एवं गमलों में खाद अथवा उवर्रक डालते देखा है? क्या आप जानते हैं कि वे इन्हें मृदा में क्यों मिलाते हैं? आप पढ़ चुके हैं कि पादप मृदा से खनिज पोषकतत्त्व अवशोष्िात करते हैं। अतः मृदा में इनकी मात्रा लगातार कम होती जाती है। उवर्रक एवं खाद में नाइट्रोजन, पोटैश्िायम, पफाॅस्पफोरस जैसे पादप पोषक होते हैं। पादपों द्वारा लगातार उपयोग किए जाने के कारण मृदा में उनकी मात्रा ध्ीरे - ध्ीरे कम होती जाती है। इसलिए मृदा को इन पोषक तत्त्वों से समृ( करने के लिए भूमि में उवर्रक तथा खाद मिलाने की आवश्यकता होती है। यदि हमें पादप के पोषण की आवश्यकता के बारे में ज्ञान हो, तो हम न केवल पादपों को उगा सकते हैं बल्िक उन्हें स्वस्थ भी रख सकते हैं। पादपों को प्रोटीन बनाने के लिए सामान्यतः नाइट्रोजन की अध्िक आवश्यकता होती है। पफसल कटाइर् के बाद मृदा में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। यद्यपि वायु में नाइट्रोजन गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध् होती है, परंतु पादप इसका उपयोग उस प्रकार करने में असमथर् होते हैं, जैसे वे काबर्न डाइआॅक्साइड का उपयोग करते हैं। पौधे नाइट्रोजन को विलेय रूप में ही अवशोष्िात कर सकते हैं। वुफछ जीवाणु जो राइजोबियम कहलाते हैं, वायुमंडलीय नाइट्रोजन को विलय पदाथो± में परिवतिर्त कर देते हैं। परंतु राइजोबियम अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। ये चना, मटर, मूँग, सेम तथा अन्य पफलीदार पादपों की जड़ों में रहते हैं तथा उन्हें नाइट्रोजन की आपूतिर् करते हैं। अध्िकतर दालें पफलीदार पादपों से प्राप्त होती हैं। इसके बदले पादप राइजोबियम जीवाणु को आवास एवं खाद्य प्रदान करते हैं। उनमें सहजीवी संबंध होता है। इस संबंध् का किसानों के लिए विशेष महत्व है। दालों की पफसलों के लिए उन्हें मृदा में नाइट्रोजनी उवर्रक देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही नहीं दाल की पफसल उगाने के बाद अगली पफसल के लिए भी सामान्यतः उवर्रकों की आवश्यकता नहीं रहती। इस अध्याय में आपने पढ़ा कि अध्िकतर पादप स्वपोषी होते हैं। केवल बहुत कम पादप ही अन्य पोषण प्रणाली अपनाते हैं, जैसे कि परजीवी एवं मृतजीवी। परजीवी एवं मृतजीवी दूसरे पादपों से पोषण प्राप्त करते हैं। सभी प्राणी अपने भोजन के लिए पादप तथा अन्य प्राण्िायों पर निभर्र रहते हैं, अतः उन्हें विषमपोषी के रूप में समूहीकृत किया गया है। क्या हम कह सकते हैं कि कीटभक्षी पौधे आंश्िाक विषमपोषी हैं? प्रमुख शब्द 3.आप पत्ती में मंड ;स्टाचर्द्ध की उपस्िथति का परीक्षण वैफसे करेंगे? 4.हरे पादपों में खाद्य संश्लेषण प्रक्रम का संक्ष्िाप्त विवरण दीजिए। 5.किसी प्रवाह चित्रा की सहायता से दशार्इए कि पादप भोजन के मूलभूत ड्डोत हैं। 6.रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;कद्ध क्योंकि हरे पादप अपना खाद्य स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें - - - - - - - - - - - - - - - कहते हैं। ;खद्ध पादपों द्वारा संश्लेष्िात खाद्य का भंडारण - - - - - - - - - - - - - - - के रूप में किया जाता है। ;गद्ध प्रकाश संश्लेषण के प्रक्रम में जिस वणर्क द्वारा सौर ऊजार् संग्रहित की जाती - - - - - - - - - - - - - - - कहते हैं।है, उसे ;घद्ध प्रकाश संश्लेषण में पादप वायुमंडल से - - - - - - - - - - - - - - - लेते हैं तथा - - - - - - - - - - - - - - - का उत्पादन करते हैं। 7.निम्न कथनों से संब( पारिभाष्िाक शब्द बताइएः ;कद्ध पीत दुबर्ल तने वाला परजीवी पादप ;खद्ध एक पादप जिसमें स्वपोषण एवं विषमपोषण दोनों ही प्रणाली पाइर् जाती है। ;गद्ध वे रंध्र, जिनके द्वारा पिायों में गैसों का आदान - प्रदान ;विनिमयद्ध होता है। 8.सही उत्तर पर ;3द्ध का चिÉ लगाइए ;कद्ध अमरबेल उदाहरण है किसी ;पद्धस्वपोषी का। ;पपद्धपरजीवी का। ;पपपद्ध मृतजीवी का। ;पअद्ध परपोषी का। ;खद्ध कीटों को पकड़कर अपना आहार बनाने वाले पादप का नाम है ;पद्धअमरबेल ;पपद्धगुड़हल ;पपपद्ध घटपणीर् ;पिचर पादपद्ध ;पअद्ध गुलाब 9.काॅलम । में दिए गए शब्दों का मिलान काॅलम ठ के शब्दों से कीजिए काॅलम । काॅलम ठ ;कद्ध क्लोरोपिफल ;पद्ध जीवाणु ;खद्ध नाइट्रोजन ;पपद्ध परपोष्िात ;गद्ध अमरबेल ;पपपद्ध घटपणीर् ;पिचर पादपद्ध ;घद्ध जंतु ;पअद्ध पत्ती ;चद्ध कीटभक्षी ;अद्ध परजीवी 10.निम्न कथनों में से सत्य एवं असत्य कथनों का चयन कीजिए। ;कद्ध प्रकाश संश्लेषण में काबर्न डाइआॅक्साइड मुक्त होती है। ;खद्ध ऐसे पादप, जो अपना भोजन स्वयं संश्लेष्िात करते हैं, मृतजीवी कहलाते हैं। ;गद्ध प्रकाश संश्लेषण का उत्पाद प्रोटीन नहीं है। ;घद्ध प्रकाश संश्लेषण में सौर ऊजार् का रासायनिक ऊजार् में रूपांतरण हो जाता है। सही विकल्प चुनिएः 11.पादप के किस भाग द्वारा प्रकाश संश्लेषण हेतु वायु से काबर्न डाइआॅक्साइड ली जाती है? ;कद्ध मूल रोम ;खद्ध रंध्र ;गद्ध पणर्श्िाराएँ ;घद्ध बा“यदल 12.वायुमंडल से मुख्यतः जिस भाग द्वारा पादप काबर्न डाइआॅक्साइड प्राप्त करते हैं, वह है ;कद्ध जड;खद्ध तना ;गद्ध पुष्प ;घद्ध पिायाँ ़ विस्तारित अध्ययन - ियाकलाप एवं परियोजना कायर् 1.गमले में लगे चैड़ी पिायों वाले किसी पादप को लीजिए। काले कागज़्ा की दो प‘ियाँ लेकर उनके मध्य में लघुमाप कीवगार्कार आकृति काट लीजिए। इन कागज़्ाों से किन्ही दो पिायों को इस प्रकार ढकिए कि उनका वुफछ भाग काले कागज़्ा से ढका रहे, जबकि शेष भाग काटी गइर्वगार्कार आकृति के कारण खुला रहे। पिफर इन पर सावधनी से क्िलप लगा दीजिए ;चित्रा 1.9द्ध। पादप को 2 - 5 दिनों के लिए सूयर् के प्रकाश ;ध्ूपद्ध में रख दीजिए। पत्ती के ढके हुए एवं बिना ढके भाग के रंग का निरीक्षणकीजिए। क्या पत्ती के दोनों भागों में वुफछ अंतर दिखाइर् देता है? इनमें से एक पत्तीका आयोडीन परीक्षण कीजिए। अब दूसरी पत्ती पर से कागश हटाकर पादप को 2 - 3दिनों के लिए सूयर् के प्रकाश में रख दें तथा ढकी गइर् पत्ती का भी आयोडीन परीक्षण कीजिए। अपने प्रेक्षण की व्याख्या कीजिए। 2.यदि आपके घर के आस - पास कोइर् ग्रीन हाउस हो, तो वहाँ जाइए। देख्िाए, वहाँ पादप वैफसे उगाए जाते हैं। पता लगाइए कि वहाँ प्रकाश, जल एवं काबर्न डाइआॅक्साइड का नियमन किस प्रकार करते हैं? 3.शकरवंफद को केवल जल में उगाने का प्रयास कीजिए। अपने प्रयोग एवं प्रेक्षण का वणर्न कीजिए। अध्िक जानकारी के लिए आप निम्नलिख्िात वेबसाइट पर देख सकते हैंः ूूूण्चीेबीववसण्बवउध्ेबपमदबमध्इपवसवहलऋचसंबमध्इपवबवंबीध्चीवजवेलदजीध्वअमतअपमूण्ीजउ क्या आप जानते हैं? पादपों के लिए प्रकाश इतना अिाक महत्वपूणर् है कि उनकी पिायों की वृि अनेक प्रकार से होती है, जिससे कि उन्हें अध्िकतम प्रकाश ग्रहण करने में सुविध हो।

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