14ण्1 भूमिका सममिति ;ैलउउमजतलद्ध एक महत्वपूणर् ज्यामितीय अवधारणा है, जो सामान्यतः प्रकृति में प्रद£शत होती है तथा ियाकलाप के लगभग सभी क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है । कलाकार, व्यवसायी, कपड़े या ज्वैलरी डिशाइन करने वाले, कार निमार्ता, आ£कटेक्ट तथा अनेक अन्य सममिति कीसंकल्पना का प्रयोग करते हैं । मधुमक्िखयों के छत्तों, पफूलों, पेड़ की पिायों, धा£मक चिÉों, कंबलों और रूमालों, इन सभी स्थानों पर आपको सममित डिशाइन दिखाइर् देंगे। आ£कटेक्चर इंजीनिय¯रंग प्रकृति आप पिछली कक्षा में, रैख्िाक सममिति का कुछ ‘अनुभव’ कर चुके हैं ।एक आकृति मे रैख्िाक सममिति होती है, यदि उसमें एक रेखा ऐसी हो जिसके अनुदिश उसआकृति को मोड़ने पर, आकृति के दोनों भाग परस्पर संपाती हो जाते हों । इन अवधारणाओं को आप याद कर सकते हैं । आपकी सहायता के लिए यहाँ कुछ ियाकलाप दिए जा रहे हैं । सममिति दशार्ने वाली एक कुछ रंगीन आकषर्क कागश के कटे हुए कुछ पिक्चर एलबम बनाइए इंक - डाट डेविल्स बनाइए सममिति डिशाइन बनाइए आपके द्वारा एकत्रिात किए गए डिशाइन में सममित रेखाओं ;या अक्षोंद्ध को पहचानने का आनंद लीजिए । आइए अब सममिति पर अपनी अवधारणाओं को और अिाक प्रबल बनाएँ । निम्नलिख्िातआकृतियों का अध्ययन कीजिए, जिनमें सममित रेखाओं को ¯बदुकित रेखाओं से अंकित किया गया है ;आकृति 14ण्1 ;पद्ध.;पअद्धद्ध । ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्धआकृति 14ण्1 14ण्2 सम बहुभुजों के लिए सममित रेखाएँ आप जानते हैं कि बहुभुज ;चवसलहवदद्ध एक ऐसी बंद आकृति है, जो अनेक रेखाखंडों से बनी होती है। सबसे कम रेखाखंडों से बना बहुभुज एक त्रिाभुज है । ;क्या आप इन रेखाखंडों से कम रेखाखंडों वाला कोइर् अन्य बहुभुज बना सकते हैं ? इसके बारे में सोचिए ।द्ध एक बहुभुज, सम बहुभुज ;तमहनसंत चवसलहवदद्ध कहलाता है, यदि इसकी सभी भुजाओं की लंबाइयाँ बराबर हों तथा सभी कोणों के माप बराबर हों । इस प्रकार, एक समबाहु त्रिाुभज, तीन भुजाओं वाला एक सम बहुभुज होता है । क्या चार भुजाओं वाला एक सम बहुभुज होता है ? क्या आप चार भुजाओं वाले एक सम बहुभुज का नाम बता सकते हैं ? एक समबाहु त्रिाभुज एक सम बहुभुज है, क्योंकि इसकी प्रत्येक भुजा की लंबाइर् समान होती है तथा इसके प्रत्येक कोण की माप 60° होती है ;आकृति 14ण्2द्ध । ं वगर् भी एक सम बहुभुज है, क्योंकि इसकी सभी भुजाएँ समान लंबाइयों की होती हैं तथा इसका प्रत्येक कोण एक समकोण ;अथार्त्् 90°द्ध होता है । इसके विकणर् परस्पर समकोण पर समद्विभाजित होते हैं ;आकृति 14ण्3द्ध। यदि एक पंचभुज ;चमदजंहवदद्ध एक सम बहुभुज है, तो स्वाभाविक है कि इसकी भुजाएँ बराबर लंबाइयों की होनी चाहिए तथा इसके कोणों के माप बराबर होने चाहिए । बाद में आप पढ़ेंगे कि इसके प्रत्येक कोण की माप 108° होती है ;आकृति 14ण्4द्ध । एक सम षड्भुज ;तमहनसंत ीमगंहवदद्ध की सभी भुजाएँ बराबर होती हैं तथा इसके प्रत्येक कोण की माप 120° होती है । इस आकृति के बारे में आप और अिाक बाद में पढ़ंेगे ;आकृति 14ण्5द्ध । सम बहुभुज सममित आकृतियाँ होती हैं और इसीलिए इनकी सममित रेखाएँ बहुत रोचक हैं । प्रत्येक समबहुभुज की उतनी ही सममित रेखाएँ होती हैं, जितनी उसकी भुजाएँ हैं ख्आकृति 14ण्6 ;पद्ध से ;पअद्ध,। आकृति 14ण्5 आकृति 14ण्6 एक आकार ;ेींचमद्ध में रैख्िाक सममिति तब होती है, जब उसका एक आधा भाग दूसरे आधे भाग आकृति 14ण्7 का दपर्ण प्रतिबिंब ;उपततवत पउंहमद्ध हो;आकृति 14.7द्ध। इस प्रकार एक दपर्ण रेखा हमें एकसममित रेखा देखने या ज्ञात करने में सहायता करती है ;आकृति 14.8द्ध । दपर्ण रेखा है? हाँ। दपर्ण रेखा है? नहीं। यहाँ आकार तो समान हैंऋ परंतु दिशाएँ विपरीत हैं। दपर्ण परावतर्न के साथ कायर् करते समय, यह ध्यान रखना चाहिए कि एक आकृति के अभ्िामुखों ;वतपमदजंजपवदेद्ध में दाएँ - बाएँ ;समजि.तपहीजद्ध परिवतर्न हो जाता है ;आकृति 14ण्9द्ध। छेद करने वाला यह खेल खेलिए ! एक कागश को 2 आधों में मोडि़ए एक छेद करिए मोड़ के निशान के अनुदिश दो छेद आकृति 14ण्10 मोड़ का निशान एक सममित रेखा ;या अक्षद्ध है । मोड़े हुए कागश पर विभ्िान्न स्थानों पर बनाए गए छेदों तथा संगत सममित रेखाओं का अध्ययन कीजिए ;आकृति 14ण्10द्ध। 1ण् निम्नलिख्िात छेद की हुइर् आकृतियों की प्रतिलिपियाँ बनाकर ;खींच करद्ध उनमें से प्रत्येक 2ण् नीचे सममित रेखा ;रेखाएँद्ध दी हुइर् हंै । अन्य छेद ज्ञात कीजिए । 3ण् निम्नलिख्िात आकृतियों में, दपर्ण रेखा ;अथार्त्् सममित रेखाद्ध ¯बदुकित रेखा के रूप मंे दी गइर् है ।¯बदुकित ;दपर्णद्ध रेखा में प्रत्येक आकृति का परावतर्न करके, प्रत्येक आकृति को पूरा कीजिए । ;आप ¯बदुकित रेखा के अनुदिश एक दपर्ण रख सकते हैं और पिफर प्रतिबिंब ;पउंहमद्ध के लिए दपर्ण में देख सकते हैं द्ध। क्या आपको पूरी की गइर् आकृति का नाम याद है ? ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;मद्ध ;द्धि 4ण् निम्नलिख्िात आकृतियों की एक से अिाक सममित रेखाएँ हैं । ऐसी आकृतियों के लिए यह कहा जाता है कि इनकी अनेक सममित रेखाएँ हैं । ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध निम्नलिख्िात आकृतियों में से प्रत्येक में विविध सममित रेखाओं ;यदि हों तोद्ध, की पहचान कीजिए: 6ण् निम्नलिख्िात आरेखों की प्रतिलिपियाँ बनाइए तथा प्रत्येक आकार को इस तरह पूरा कीजिए ताकि वह आकार दपर्ण रेखा ;या रेखाओंद्ध के अनुदिश सममित हो: ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध 7ण् निम्नलिख्िात आकृतियों के लिए सममित रेखाओं की संख्याएँ बताइए: ;ंद्ध एक समबाहु त्रिाभुज ;इद्ध एक समद्विबाहु त्रिाभुज ;बद्ध एक विषमबाहु त्रिाभुज ;कद्ध एक वगर् ;मद्ध एक आयत ;द्धि एक समचतुभुर्ज ;हद्ध एक समांतर चतुभर्ुज ;ीद्ध एक चतुभुर्ज ;पद्ध एक सम षड्भुज ;रद्ध एक वृत्त 8ण् अंग्रेजी वणर्माला के किन अक्षरों में निम्नलिख्िात के अनुदिश परावतर्न सममिति ;दपर्ण परावतर्न से संबंिात सममितिद्ध है: ;ंद्ध एक उफध्वार्धर दपर्ण ;इद्ध एक क्षैतिज दपर्ण ;बद्ध उफध्वार्धर और क्षैतिज दपर्ण दोनों 9ण् ऐसे आकारों के तीन उदाहरण दीजिए, जिनमें कोइर् सममित रेखा न हो । 10ण् आप निम्नलिख्िात आकृतियों की सममित रेखा के लिए अन्य क्या नाम दे सकते हैं ? ;ंद्ध एक समद्विबाहु त्रिाभुज ;इद्ध एक वृत्त 14ण्3 घूणर्न सममिति जब घड़ी की सुइयाँ घूमती हैं, तो आप क्या कहते हैं? आप कहते हैं कि ये घूणर्न ;त्वजंजमद्ध कर रही हैं। घड़ी की सुइयाँ केवल एक ही दिशा में घूमती हैं । यह घूमना एक ¯बदु के चारों ओर होता है, जो घड़ी के पटल ;ंिबमद्ध का वेंफद्र है । घडि़यों की सुइयाँ जिस दिशा में घूमती हैं, वह घूणर्न ;तवजंजपवदद्ध दक्ष्िाणावतर् ;बसवबाूपेमद्ध घूणर्न कहलाता है, अन्यथा घूणर्न वामावतर् ;ंदजपबसवबाूपेम तवजंजपवदद्ध कहलाता है। छत के पंखे की पँखुडि़यों के घूणर्न के बारे में आप क्या कह सकते हैं ? क्या ये दक्ष्िाणावतर् दिशा में घूमती हैं या वामावतर् दिशा में घूमती हैं ? अथवा क्या ये दोनों दिशाओं में घूमती हैं ? यदि आप साइकिल के एक पहिए को घुमाते हैं, तो वह घूणर्न करता है । यह दोनों ही दिशाओं, अथार्त्् दक्ष्िाणावतर् और वामावतर् दिशाओं में घूणर्न कर सकता है । ;पद्ध दक्ष्िाणावतर् घूणर्न और ;पपद्ध वामावतर् घूणर्न में से प्रत्येक के लिए तीन उदाहरण दीजिए । जब कोइर् वस्तु घूणर्न करती है, तो उसके आकार और माप में कोइर् परिवतर्न नहीं होता है । घूणर्न उस वस्तु को एक निश्िचत ¯बदु के चारों तरपफ घुमाता है । यह निश्िचत ¯बदु घूणर्न का वेंफद्र ;बमदजतम व ितवजंजपवदद्ध कहलाता है । घड़ी की सुइर्यों के घूणर्न का वेंफद्र क्या है ? इसके बारे में सोचिए । घूणर्न के दौरान घूमे गए कोण को घूणर्न कोण ;ंदहसम व ितवजंजपवदद्ध कहते हैं । आप जानते हैं कि एक पूरे चक्कर में 360° का घूणर्न होता है । ;पद्ध एक आधे या अधर् चक्कर और ;पपद्ध एक चैथाइर् चक्कर के घूणर्न कोणों के क्रमशः क्या माप हैं ? एक अधर् चक्र का अथर् 180° का घूणर्न है तथा एक - चैथाइर् चक्कर का अथर् 90° का घूणर्न है । जब 12 बजते हैं, तो घड़ी की दोनों सुइयाँ एक साथ होती हैं । 3 बजने तक मिनट की सुइर् तो तीन पूरे चक्कर लगा लेती है, परंतु घंटे की सुइर् केवल एक - चैथाइर् चक्कर ही लगा पाती है । 6 बजे की उनकी स्िथतियों के बारे में आप क्या कह सकते हैं ? क्या आपने कभी कागश की हवाइर् चकरी ;या पिफरकीद्ध ;चंचमत ूपदकउपससद्ध बनाइर् है ? आकृति में दिखाइर् गइर् कागश की हवाइर् चकरी सममित दिखाइर् देती है ;आकृति 14ण्11द्धए परंतु आपको इसकी कोइर् सममिति रेखा प्राप्त नहीं होती है । इसको किसी प्रकार से मोड़ने पर भी दोनों आधे भाग संपाती नहीं होंगे । यदि आप इसके वेंफद्र ;बीचद्ध वाले स्िथर ;या निश्चतद्ध ¯बदु के परित 90° के कोण पर घुमाएँ, तो आप देखेंगेकी हवाइर् चकरी का आकार, आकृति 14.11 की स्िथति के अनुसार, पहले जैसा ही है । हम कहते हैं कि चकरी में एक घूणर्न सममिति ;तवजंजपवदंस ेलउउमजतलद्ध है । क्ब्ठ। क् ब्क् ठब् क्। ब्। ।ठ ठ । क् ब् ठ 90° 90° 90° 90° आकृति 14ण्12 एक पूरे चक्कर में, ऐसी चार स्िथतियाँ हैं ;90°ए 180°ए 270° और 360° के कोणों पर घुमानेया घूणर्न करने परद्ध, जब चकरी पहली जैसी ही दिखती है। ;आकृति 14.12द्ध। इसी कारण, हम कहते हैं कि चकरी में क्रम 4 ;वतकमत 4द्ध की घूणर्न सममिति है । घूणर्न सममिति का एक और उदाहरण देख्िाए । एक वगर् पर विचार कीजिए, जिसका एक कोना ;या शीषर्द्ध च् है;आकृति 14.13द्ध। आइए इस वगर् के वेंफद्र को × से अंकित करके इसके परित इस वगर् को एक - चैथाइर् चक्कर पर घुमाएँ। ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ;अद्ध आकृति ण्14ण्13 आकृति 14.13 ;पद्ध इसकी प्रारंभ्िाक स्िथति है । वेंफद्र के चारों ओर 90° घूमाने परआकृति 14.13 ;पपद्ध प्राप्त होती है । अब ¯बदु च् की स्िथति को देख्िाए । वगर् को पुनः 90° के कोण पर घुमाइए ;घूणर्न दीजिएद्ध । आपको आकृति 14.13;पपपद्ध प्राप्त होती है । इस प्रकार, जब आप वगर् को चार एक - चैथाइर् चक्कर घुमा देते हैं, तो वह अपनी प्रारंभ्िाक स्िथति पर आ जाती है ।अब यह आकृति 14.13 ;पद्ध जैसी ही दिखती है । इसे च् द्वारा ली गइर् विभ्िान्न स्िथतियों से देखा जा सकता है। इस प्रकार, एक वगर् में उसके वेंफद्र के चारों ओर क्रम 4 की घूणर्न सममिति होती है । ध्यान दीजिए कि इस स्िथति में, ;पद्ध घूणर्न का वेंफद्र वगर् का वेंफद्र है । ;पपद्ध घूणर्न का कोण 90° है । ;पपपद्ध घूणर्न की दिशा दक्ष्िाणावतर् है । ;पअद्ध घूणर्न सममिति का क्रम 4 है । उदाहरणाथर्, जब कुछ पफलों को काटते हैं, तो उनके अनुप्रस्थ काट ;बतवेे.ेमबजपवदद्ध ऐसे आकारों के होते हैं, जिनमें घूणर्न सममिति होती है । जब आप इन्हें देखेंगे तो आप आश्चयर्चकितहो सकते हैं ¹आकृति 14.17;पद्धह्। पफल सड़क संकेत पहिया ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध आकृति 14ण्17 ऐसे कइर् सड़क संकेत ;तवंक ेपहदेद्ध भी हैं, जो घूणर्न सममिति प्रदश्िार्त करते हैं । अगली बार जब आप किसी व्यस्त सड़क पर घूमने निकलें, तो ऐसे सड़क संकेतों को पहचानिए और उनकी घूणर्न सममिति के क्रमों को ज्ञात कीजिए ख्आकृति 14ण्17;पपद्ध, । घूणर्न सममिति के कुछ अन्य उदाहरणों के बारे में सोचिए । प्रत्येक स्िथति में, निम्नलिख्िात की चचार् कीजिए: ;पद्ध घूणर्न का वेंफद्र ;पपद्ध घूणर्न का कोण ;पपपद्ध घूणर्न किस दिशा में किया गया है ;पअद्ध घूणर्न सममिति का क्रम 1ण् निम्नलिख्िात आकृतियों में से किन आकृतियों में 1 से अध्िक क्रम की घूणर्न सममिति है? ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;मद्ध ;द्धि 2ण् प्रत्येक आकृति के घूणर्न सममिति का क्रम बताइए । ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;मद्ध ;द्धि ;हद्ध ;ीद्ध 14ण्4 रैख्िाक सममिति और घूणर्न सममिति आप अभी तक अनेक आकारों और उनकी सममितियों को देखते आ रहे हैं । अब तक आपने यह समझ लिया होगा कि कुछ आकारों में केवल रैख्िाक सममिति होती है, कुछ में केवल घूणर्न सममिति होती है तथा कुछ आकारों में रैख्िाक तथा घूणर्न दोनों प्रकार की सममितियाँ होती हैं ।उदाहरणाथर्, एक वगर् के आकार को देख्िाए ;आकृति 14.19द्ध । इसकी कितनी सममित रेखाएँ हैं ? क्या इसमें कोइर् घूणर्न सममिति है ?यदि उत्तर ‘हाँ’ है, तो इस घूणर्न सममिति का क्रम क्या है ? इसके बारे में सोचिए ।आकृति 14ण्19एक वृत्त सबसे अिाक पूणर् सममित आकृति है, क्योंकि इसकोइसके वेंफद्र के परित किसी भी कोण पर घुमा कर वही आकृति प्राप्त की जा सकती है, अथार्त्् इसमें अपरिमित रूप से अनेक क्रम की घूणर्न सममिति है तथा साथ ही इसकी अपरिमित सममितरेखाएँ हैं । वृत्त के किसी भी प्रतिरूप को देख्िाए । वेंफद्र से होकर जाने वाली प्रत्येक रेखा ;अथार्त्् प्रत्येक व्यासद्ध परावतर्न सममिति की एक सममिति रेखा है तथा वेंफद्र के परित प्रत्येक कोण के लिए इसकी एक घूणर्न सममिति है । इन्हें कीजिए अंग्रेशी वणर्माला के कुछ अक्षरों में अद्भुत एवं आकषर्क सममितीय संरचनाएँ ;ेजतनबजनतमेद्ध हैं । किन बड़े अक्षरों में केवल एक ही सममित रेखा है ;जैसे म्द्ध? किन बड़े अक्षरों में क्रम 2 की घूणर्न सममिति है;जैसे प्द्ध? उपरोक्त प्रकार से सोचते हुए, आप निम्नलिख्िात सारणी को भरने में समथर् हो पाएँगेः वणर्माला का अक्षर रैख्िाक सममिति सममित रेखाओं की संख्या घूणर्न सममित घूणर्न सममिति का क्रम र् नहीं 0 हाँ 2 ै भ् हाँ हाँ व् हाँ हाँ म् हाँ छ हाँ ब् 1ण् किन्हीं दो आकृतियों के नाम बताइए, जिनमें रैख्िाक सममिति और क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति दोनों ही हों । 2ण् जहाँ संभव हो, निम्नलिख्िात की एक रप़फ आकृति खींचिए: ;पद्ध एक त्रिाभुज, जिसमें रैख्िाक सममिति और क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति दोनों ही हों। ;पपद्ध एक त्रिाभुज, जिसमें केवल रैख्िाक सममिति और क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति न हो। ;पपपद्ध एक चतुभुर्ज जिसमें क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति हो, पंरतु रैख्िाक सममिति न हो। ;पअद्ध एक चतुभुर्ज जिसमें केवल रैख्िाक सममिति हो और क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति न हो । 3ण् यदि किसी आकृति की दो या अिाक सममित रेखाएँ हों, तो क्या यह आवश्यक है कि उसमें क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति होगी ? 4ण् रिक्त स्थानों को भरिए: आकार वगर् आयत समचतुभुर्ज समबाहु त्रिाभुज समषड्भुज वृत्त अधर्वृत्त घूणर्न का वेंफद्र घूणर्न सममिति का क्रम घूणर्न का कोण 5ण् ऐसे चतुभर्ुजों के नाम बताइए, जिनमें रैख्िाक सममिति और क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति दोनों ही हों । 6ण् किसी आकृति को उसके वेंफद्र के परित 60° के कोण पर घुमाने पर, वह उसकी प्रारंभ्िाकस्िथति जैसी ही दिखाइर् देती है । इस आकृति के लिए ऐसे कौन - से अन्य कोणों के लिए भी हो सकता है ? 7ण् क्या हमें कोइर् ऐसी क्रम 1 से अध्िक की घूणर्न सममिति प्राप्त हो सकती है, जिसके घूणर्न के कोण निम्नलिख्िात हों ? ;पद्ध 45° ;पपद्ध 17 ° हमने क्या चचार् की ? 1ण् एक आकृति मे रैख्िाक सममिति तब होती है, जब कोइर् ऐसी रेखा प्राप्त की जा सकेजिसके अनुदिश उस आकृति को मोड़ने पर, उसके दोनों भाग परस्पर संपाती हो जाएँ । 2ण् सम बहुभुजों में बराबर भुजाएँ और बराबर कोण होते हैं । उनकी अनेक अथार्त्् एक से अिाक, सममित रेखाएँ होती हैं । 3ण् प्रत्येक सम बहुभुज की उतनी ही सममित रेखाएँ होती हैं, जितनी उसकी भुजाएँ होती हैं। 4ण् दपर्ण परावतर्न से ऐसी सममिति प्राप्त होती है, जिसमें बाएँ - दाएँ अभ्िामुखों का ध्यान रखना होता है । 5ण् घूणर्न में एक वस्तु को एक निश्िचत ¯बदु के परित घुमाया जाता है । यह निश्िचत ¯बदु घूणर्न का वेंफद्र कहलाता है । जिस कोण पर वस्तु घूमती है, उसे घूणर्न का कोण कहते हैं । आधे या अधर् चक्कर का अथर् 180° का घूणर्न है तथा एक - चैथाइर् चक्कर का अथर् 90° का घूणर्न है । घूणर्न दक्ष्िाणावतर् और वामावतर् दोनों ही दिशाओं में हो सकता है । 6ण् यदि घूणर्न के बाद, वस्तु, स्िथति के अनुसार, पहले जैसी ही दिखाइर् देती है, तो हम कहते हैं कि उसमें घूणर्न सममिति है । 7ण् एक पूरे चक्कर ;360° केद्ध में, एक वस्तु जितनी बार स्िथति के अनुसार, पहले जैसी हीे दिखाइर् देती है, वह संख्या उस घूणर्न सममिति का क्रम कहलाती है । उदाहरणाथर्, एक वगर् की घूणर्न सममिति का क्रम 4 है तथा एक समबाहु त्रिाभुज की घूणर्न सममिति का क्रम 3 है । कुछ आकारों में केवल एक ही सममिति रेखा होती है, जैसे अक्षरम्य कुछ में केवल घूणर्न सममिति ही होती है, जैसे अक्षर ैतथा कुछ में दोनों प्रकार की सममितियाँ होती हैं, जैसे अक्षर भ् है। सममिति का अध्ययन इसलिए महत्वपूणर् है, क्योंकि इसका दैनिक जीवन में अिाकांशतः प्रयोग होता है तथा इससे भी अिाक महत्व इस कारण है कि यह हमें सुंदर एवं आकषर्क डिज़ाइन प्रदान कर सकती है । समबहुभुज समषड्भुज समपंचभुज वगर् समबाहु त्रिाभुज सममित रेखाओं की संख्या 6 5 4 3

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अध्याय 14


सममिति



14.1 भूमिका

सममिति (Symmetry) एक महत्वपूर्ण ज्यामितीय अवधारणा है, जो सामान्यतः प्रकृति में प्रदर्शित होती है तथा क्रियाकलाप के लगभग सभी क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है । कलाकार, व्यवसायी, कपड़े या ज्वैलरी डिज़ाइन करने वाले, कार निर्माता, आर्किटेक्ट तथा अनेक अन्य सममिति की संकल्पना का प्रयोग करते हैं । मधुमक्खियों के छत्तों, फूलों, पेड़ की पत्तियों, धार्मिक चिह्नो, कंबलों और रूमालों, इन सभी स्थानों पर आपको सममित डिज़ाइन दिखाई देंगे।

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आप पिछली कक्षा में, रैखिक सममिति का कुछ ‘अनुभव’ कर चुके हैं ।

एक आकृति मे रैखिक सममिति होती है, यदि उसमें एक रेखा एेसी हो जिसके अनुदिश उस आकृति को मोड़ने पर, आकृति के दोनों भाग परस्पर संपाती हो जाते हों ।

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इन अवधारणाओं को आप याद कर सकते हैं । आपकी सहायता के लिए यहाँ कुछ क्रियाकलाप दिए जा रहे हैं ।

आपके द्वारा एकत्रित किए गए डिज़ाइन में सममित रेखाओं (या अक्षों) को पहचानने का आनंद लीजिए ।

आइए अब सममिति पर अपनी अवधारणाओं को और अधिक प्रबल बनाएँ । निम्नलिखित आकृतियों का अध्ययन कीजिए, जिनमें सममित रेखाओं को बिंदुकित रेखाओं से अंकित किया गया है (आकृति 14.1 (i)-(iv))

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14.2 सम बहुभुजों के लिए सममित रेखाएँ

आप जानते हैं कि बहुभुज (polygon) एक एेसी बंद आकृति है, जो अनेक रेखाखंडों से बनी होती है। सबसे कम रेखाखंडों से बना बहुभुज एक त्रिभुज है । (क्या आप इन रेखाखंडों से कम रेखाखंडों वाला कोई अन्य बहुभुज बना सकते हैं ? इसके बारे में सोचिए ।)

एक बहुभुज, सम बहुभुज (regular polygon) कहलाता है, यदि इसकी सभी भुजाओं की लंबाइयाँ बराबर हों तथा सभी कोणों के माप बराबर हों । इस प्रकार, एक समबाहु त्रिुभज, तीन भुजाओं वाला एक सम बहुभुज होता है । क्या चार भुजाओं वाला एक सम बहुभुज होता है ? क्या आप चार भुजाओं वाले एक सम बहुभुज का नाम बता सकते हैं ?

एक समबाहु त्रिभुज एक सम बहुभुज है, क्योंकि इसकी प्रत्येक भुजा की लंबाई समान होती है तथा इसके प्रत्येक कोण की माप 60° होती है (आकृति 14.2)।

वर्ग भी एक सम बहुभुज है, क्योंकि इसकी सभी भुजाएँ समान लंबाइयों की होती हैं तथा इसका प्रत्येक कोण एक समकोण (अर्थात् 90°) होता है । इसके विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित होते हैं (आकृति 14.3)।


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यदि एक पंचभुज (pentagon) एक सम बहुभुज है, तो स्वाभाविक है कि इसकी भुजाएँ बराबर लंबाइयों की होनी चाहिए तथा इसके कोणों के माप बराबर होने चाहिए । बाद में आप पढ़ेंगे कि इसके प्रत्येक कोण की माप 108° होती है (आकृति 14.4) ।

एक सम षड्भुज (regular hexagon) की सभी भुजाएँ बराबर होती हैं तथा इसके प्रत्येक कोण की माप 120° होती है । इस आकृति के बारे में आप और अधिक बाद में पढ़ेंगे (आकृति 14.5) ।

1494.png

आकृति 14.5

सम बहुभुज सममित आकृतियाँ होती हैं और इसीलिए इनकी सममित रेखाएँ बहुत रोचक हैं । प्रत्येक समबहुभुज की उतनी ही सममित रेखाएँ होती हैं, जितनी उसकी भुजाएँ हैं [आकृति 14.6 (i) से (iv)]।


1415.png

आकृति 14.6


संभवतः, आप कागज़ मोड़ने के क्रियाकलापों द्वारा इसकी खोज करना चाहेंगे । कोई बात नहीं, आगे बढ़िए!

1557.png

आकृति 14.7


रैखिक सममिति की अवधारण का दर्पण परावर्तन (mirror reflection) से निकट का संबंध है । एक आकार (shape) में रैखिक सममिति तब होती है, जब उसका एक आधा भाग दूसरे आधे भाग का दर्पण प्रतिबिंब (mirror image) हो(आकृति 14.7)। इस प्रकार एक दर्पण रेखा हमें एक सममित रेखा देखने या ज्ञात करने में सहायता करती है (आकृति 14.8)

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दर्पण परावर्तन के साथ कार्य करते समय, यह ध्यान रखना चाहिए कि एक आकृति के अभिमुखों (orientations) में दाएँ-बाएँ (left-right) परिवर्तन हो जाता है (आकृति 14.9)

छेद करने वाला यह खेल खेलिए !

एक कागज़ को 2 आधों में मोड़िए एक छेद करिए मोड़ के निशान के अनुदिश दो छेद

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आकृति 14.10

मोड़ का निशान एक सममित रेखा (या अक्ष) है । मोड़े हुए कागज़ पर विभिन्न स्थानों पर बनाए गए छेदों तथा संगत सममित रेखाओं का अध्ययन कीजिए (आकृति 14.10)।

प्रश्नावली 14.1

1. निम्नलिखित छेद की हुई आकृतियों की प्रतिलिपियाँ बनाकर (खींच कर) उनमें से प्रत्येक की सममित रेखाएँ ज्ञात कीजिए ः

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3. निम्नलिखित आकृतियों में, दर्पण रेखा (अर्थात्् सममित रेखा) बिंदुकित रेखा के रूप में दी गई है । बिंदुकित (दर्पण) रेखा में प्रत्येक आकृति का परावर्तन करके, प्रत्येक आकृति को पूरा कीजिए । (आप बिंदुकित रेखा के अनुदिश एक दर्पण रख सकते हैं और फिर प्रतिबिंब (image) के लिए दर्पण में देख सकते हैं )। क्या आपको पूरी की गई आकृति का नाम याद है ?

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निम्नलिखित आकृतियों में से प्रत्येक में विविध सममित रेखाओं (यदि हों तो), की पहचान कीजिए :

5. यहाँ दी हुई आकृति की प्रतिलिपि बनाइए ।

किसी एक विकर्ण की सममित रेखा लीजिए तथा कुछ और वर्गों को इस तरह छायांकित कीजिए, कि यह आकृति इस विकर्ण के अनुदिश सममित हो जाए । क्या एेसा करने की एक से अधिक विधियाँ हैं ? क्या यह आकृति दोनों विकर्णों के अनुदिश सममित होगी ?

6. निम्नलिखित आरेखों की प्रतिलिपियाँ बनाइए तथा प्रत्येक आकार को इस तरह पूरा कीजिए ताकि वह आकार दर्पण रेखा (या रेखाओं) के अनुदिश सममित हो :

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7. निम्नलिखित आकृतियों के लिए सममित रेखाओं की संख्याएँ बताइए :

(a) एक समबाहु त्रिभुज (b) एक समद्विबाहु त्रिभुज (c) एक विषमबाहु त्रिभुज

(d) एक वर्ग (e) एक आयत (f) एक समचतुर्भुज

(g) एक समांतर चतुर्भुज (h) एक चतुर्भुज (i) एक सम षड्भुज

(j) एक वृत्त

8. अंग्रेजी वर्णमाला के किन अक्षरों में निम्नलिखित के अनुदिश परावर्तन सममिति (दर्पण परावर्तन से संबंधित सममिति) है ः

(a) एक ऊर्ध्वाधर दर्पण (b) एक क्षैतिज दर्पण

(c) ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दर्पण दोनों

9. एेसे आकारों के तीन उदाहरण दीजिए, जिनमें कोई सममित रेखा न हो ।

10. आप निम्नलिखित आकृतियों की सममित रेखा के लिए अन्य क्या नाम दे सकते हैं ?

(a) एक समद्विबाहु त्रिभुज (b) एक वृत्त


14.3 घूर्णन सममिति

जब घड़ी की सुइयाँ घूमती हैं, तो आप क्या कहते हैं? आप कहते हैं कि ये घूर्णन (Rotate) कर रही हैं ।

घड़ी की सुइयाँ केवल एक ही दिशा में घूमती हैं । यह घूमना एक बिंदु के चारों ओर होता है, जो घड़ी के पटल (face) का केंद्र है ।

घड़ियों की सुइयाँ जिस दिशा में घूमती हैं, वह घूर्णन (rotation) दक्षिणावर्त (clockwise) घूर्णन कहलाता है, अन्यथा घूर्णन वामावर्त (anticlockwise rotation) कहलाता है।

छत के पंखे की पँखुड़ियों के घूर्णन के बारे में आप क्या कह सकते हैं ? क्या ये दक्षिणावर्त दिशा में घूमती हैं या वामावर्त दिशा में घूमती हैं ? अथवा क्या ये दोनों दिशाओं में घूमती हैं ?

यदि आप साइकिल के एक पहिए को घुमाते हैं, तो वह घूर्णन करता है । यह दोनों ही दिशाओं, अर्थात्् दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशाओं में घूर्णन कर सकता है । (i) दक्षिणावर्त घूर्णन और (ii) वामावर्त घूर्णन में से प्रत्येक के लिए तीन उदाहरण दीजिए ।

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जब कोई वस्तु घूर्णन करती है, तो उसके आकार और माप में कोई परिवर्तन नहीं होता है । घूर्णन उस वस्तु को एक निश्चित बिंदु के चारों तरफ घुमाता है । यह निश्चित बिंदु घूर्णन का केंद्र (centre of rotation) कहलाता है । घड़ी की सुईयों के घूर्णन का केंद्र क्या है ? इसके बारे में सोचिए ।

घूर्णन के दौरान घूमे गए कोण को घूर्णन कोण (angle of rotation) कहते हैं । आप जानते हैं कि एक पूरे चक्कर में 360° का घूर्णन होता है । (i) एक आधे या अर्ध चक्कर और (ii) एक चौथाई चक्कर के घूर्णन कोणों के क्रमशः क्या माप हैं ? एक अर्ध चक्र का अर्थ 180° का घूर्णन है तथा एक-चौथाई चक्कर का अर्थ 90° का घूर्णन है ।

जब 12 बजते हैं, तो घड़ी की दोनों सुइयाँ एक साथ होती हैं । 3 बजने तक मिनट की सुई तो तीन पूरे चक्कर लगा लेती है, परंतु घंटे की सुई केवल एक-चौथाई चक्कर ही लगा पाती है । 6 बजे की उनकी स्थितियों के बारे में आप क्या कह सकते हैं ?

क्या आपने कभी कागज़ की हवाई चकरी (या फिरकी) (paper windmill) बनाई है ? आकृति में दिखाई गई कागज़ की हवाई चकरी सममित दिखाई देती है (आकृति 14.11), परंतु आपको इसकी कोई सममिति रेखा प्राप्त नहीं होती है । इसको किसी प्रकार से मोड़ने पर भी दोनों आधे भाग संपाती नहीं होंगे । यदि आप इसके केंद्र (बीच) वाले स्थिर (या निश्चत) बिंदु के परित 90° के कोण पर घुमाएँ, तो आप देखेंगे की हवाई चकरी का आकार, आकृति 14.11 की स्थिति के अनुसार, पहले जैसा ही है । हम कहते हैं कि चकरी में एक घूर्णन सममिति (rotational symmetry) है ।

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आकृति 14.11


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आकृति 14.12

एक पूरे चक्कर में, एेसी चार स्थितियाँ हैं (90°, 180°, 270° और 360° के कोणों पर घुमाने या घूर्णन करने पर), जब चकरी पहली जैसी ही दिखती है। (आकृति 14.12)। इसी कारण, हम कहते हैं कि चकरी में क्रम 4 (order 4) की घूर्णन सममिति है ।

घूर्णन सममिति का एक और उदाहरण देखिए । एक वर्ग पर विचार कीजिए, जिसका एक कोना (या शीर्ष) P है (आकृति 14.13)।

आइए इस वर्ग के केंद्र को × से अंकित करके इसके परित इस वर्ग को एक-चौथाई चक्कर पर घुमाएँ।

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आकृति .14.13

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आकृति 14.14

आकृति 14.13 (i) इसकी प्रारंभिक स्थिति है । केंद्र के चारों ओर 90° घूमाने पर
आकृति 14.13
(ii) प्राप्त होती है । अब बिंदु P की स्थिति को देखिए । वर्ग को पुनः 90° के कोण पर घुमाइए (घूर्णन दीजिए) । आपको आकृति 14.13(iii) प्राप्त होती है । इस प्रकार, जब आप वर्ग को चार एक-चौथाई चक्कर घुमा देते हैं, तो वह अपनी प्रारंभिक स्थिति पर आ जाती है । अब यह आकृति 14.13 (i) जैसी ही दिखती है । इसे P द्वारा ली गई विभिन्न स्थितियों से देखा जा सकता है ।

इस प्रकार, एक वर्ग में उसके केंद्र के चारों ओर क्रम 4 की घूर्णन सममिति होती है । ध्यान दीजिए कि इस स्थिति में,

(i) घूर्णन का केंद्र वर्ग का केंद्र है । (ii) घूर्णन का कोण 90° है ।

(iii) घूर्णन की दिशा दक्षिणावर्त है । (iv) घूर्णन सममिति का क्रम 4 है ।

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दो एक जैसे (सर्वासम समांतर चतुर्भुज खींचिए, एक समांतर चतुर्भुज ABCD एक कागज़ पर तथा दूसरा समांतर चतुर्भुज A'B'C'D' एक पारदर्शक शीट (transparent sheet) पर । उनके विकर्णों के प्रतिच्छेद बिंदुओं को क्रमशः O और O' से अंकित (या व्यक्त) कीजिए (आकृति 14.16) ।

समांतर चतुर्भुजों को इस प्रकार रखिए कि A' शीर्ष A पर रहे, B' शीर्ष B पर रहे, इत्यादि ।

इन आकारों में, अब बिंदु O पर एक पिन को लगाइए । अब पारदर्शक शीट को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाइए । एक पूरे चक्कर में पारदर्शक शीट पर बना आकार कागज़ पर बने आकार से कितनी बार संपाती होता है ? इसमें घूर्णन सममिति का क्या क्रम है ?

वह बिंदु, जहाँ हमने पिन लगाई है, घूर्णन का केंद्र है । इस स्थिति में, यह विकर्णों का प्रतिच्छेद बिंदु है ।

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आकृति 14.16


प्रत्येक वस्तु (या आकृति) में, क्रम 1 की घूर्णन सममिति होती है, क्योंकि 360° के घूर्णन के बाद (अर्थात् पूरे एक चक्कर के बाद) वह अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाता है । एेसी स्थितियों में हमारी कोई रूचि नहीं होगी ।

आपके परिवेश में अनेक एेसे आकार हैं जिनमें घूर्णन सममिति होती है (आकृति 14.17)।

उदाहरणार्थ, जब कुछ फलों को काटते हैं, तो उनके अनुप्रस्थ काट (cross-section) एेसे आकारों के होते हैं, जिनमें घूर्णन सममिति होती है । जब आप इन्हें देखेंगे तो आप आश्चर्यचकित हो सकते हैं [आकृति 14.17(i)]।

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आकृति 14.17


एेसे कई सड़क संकेत (road signs) भी हैं, जो घूर्णन सममिति प्रदर्शित करते हैं । अगली बार जब आप किसी व्यस्त सड़क पर घूमने निकलें, तो एेसे सड़क संकेतों को पहचानिए और उनकी घूर्णन सममिति के क्रमों को ज्ञात कीजिए [आकृति 14.17(ii)]।

घूर्णन सममिति के कुछ अन्य उदाहरणों के बारे में सोचिए । प्रत्येक स्थिति में, निम्नलिखित की चर्चा कीजिए


(i) घूर्णन का केंद्र (ii) घूर्णन का कोण

(iii) घूर्णन किस दिशा में किया गया है (iv) घूर्णन सममिति का क्रम


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प्रश्नावली 14.2

1. निम्नलिखित आकृतियों में से किन आकृतियों में 1 से अधिक क्रम की घूर्णन सममिति है?

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14.4 रैखिक सममिति और घूर्णन सममिति


आप अभी तक अनेक आकारों और उनकी सममितियों को देखते आ रहे हैं । अब तक आपने यह समझ लिया होगा कि कुछ आकारों में केवल रैखिक सममिति होती है, कुछ में केवल घूर्णन सममिति होती है तथा कुछ आकारों में रैखिक तथा घूर्णन दोनों प्रकार की सममितियाँ होती हैं ।

उदाहरणार्थ, एक वर्ग के आकार को देखिए (आकृति 14.19) ।

इसकी कितनी सममित रेखाएँ हैं ?

क्या इसमें कोई घूर्णन सममिति है ?

यदि उत्तर ‘हाँ’ है, तो इस घूर्णन सममिति का क्रम क्या है ?

इसके बारे में सोचिए ।

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एक वृत्त सबसे अधिक पूर्ण सममित आकृति है, क्योंकि इसको इसके केंद्र के परित किसी भी कोण पर घुमा कर वही आकृति प्राप्त की जा सकती है, अर्थात् इसमें अपरिमित रूप से अनेक क्रम की घूर्णन सममिति है तथा साथ ही इसकी अपरिमित सममित रेखाएँ हैं । वृत्त के किसी भी प्रतिरूप को देखिए । केंद्र से होकर जाने वाली प्रत्येक रेखा (अर्थात् प्रत्येक व्यास) परावर्तन सममिति की एक सममिति रेखा है तथा केंद्र के परित प्रत्येक कोण के लिए इसकी एक घूर्णन सममिति है ।

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आकृति 14.19

अंग्रेज़ी वर्णमाला के कुछ अक्षरों में अद्भुत एवं आकर्षक सममितीय संरचनाएँ (structures) हैं । किन बड़े अक्षरों में केवल एक ही सममित रेखा है (जैसे E)? किन बड़े अक्षरों में क्रम 2 की घूर्णन सममिति है (जैसे I)?

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प्रश्नावली 14.3

1. किन्हीं दो आकृतियों के नाम बताइए, जिनमें रैखिक सममिति और क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति दोनों ही हों ।

2. जहाँ संभव हो, निम्नलिखित की एक रफ़ आकृति खींचिए :

(i) एक त्रिभुज, जिसमें रैखिक सममिति और क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति दोनों ही हों।

(ii) एक त्रिभुज, जिसमें केवल रैखिक सममिति और क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति न हो।

(iii) एक चतुर्भुज जिसमें क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति हो, पंरतु रैखिक सममिति न हो।

(iv) एक चतुर्भुज जिसमें केवल रैखिक सममिति हो और क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति न हो ।

3. यदि किसी आकृति की दो या अधिक सममित रेखाएँ हों, तो क्या यह आवश्यक है कि उसमें क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति होगी ?

4. रिक्त स्थानों को भरिए :

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5. एेसे चतुर्भुजों के नाम बताइए, जिनमें रैखिक सममिति और क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति दोनों ही हों ।

6. किसी आकृति को उसके केंद्र के परित 60° के कोण पर घुमाने पर, वह उसकी प्रारंभिक स्थिति जैसी ही दिखाई देती है । इस आकृति के लिए एेसे कौन-से अन्य कोणों के लिए भी हो सकता है ?

7. क्या हमें कोई एेसी क्रम 1 से अधिक की घूर्णन सममिति प्राप्त हो सकती है, जिसके घूर्णन के कोण निम्नलिखित हों ?

(i) 45° (ii) 17°

हमने क्या चर्चा की ?

1. एक आकृति मे रैखिक सममिति तब होती है, जब कोई एेसी रेखा प्राप्त की जा सके जिसके अनुदिश उस आकृति को मोड़ने पर, उसके दोनों भाग परस्पर संपाती हो जाएँ ।

2. सम बहुभुजों में बराबर भुजाएँ और बराबर कोण होते हैं । उनकी अनेक अर्थात्् एक से अधिक, सममित रेखाएँ होती हैं ।

3. प्रत्येक सम बहुभुज की उतनी ही सममित रेखाएँ होती हैं, जितनी उसकी भुजाएँ होती हैं।

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4. दर्पण परावर्तन से एेसी सममिति प्राप्त होती है, जिसमें बाएँ-दाएँ अभिमुखों का ध्यान रखना होता है ।

5. घूर्णन में एक वस्तु को एक निश्चित बिंदु के परित घुमाया जाता है । यह निश्चित बिंदु घूर्णन का केंद्र कहलाता है । जिस कोण पर वस्तु घूमती है, उसे घूर्णन का कोण कहते हैं ।

आधे या अर्ध चक्कर का अर्थ 180° का घूर्णन है तथा एक-चौथाई चक्कर का अर्थ 90° का घूर्णन है । घूर्णन दक्षिणावर्त और वामावर्त दोनों ही दिशाओं में हो सकता है ।

6. यदि घूर्णन के बाद, वस्तु, स्थिति के अनुसार, पहले जैसी ही दिखाई देती है, तो हम कहते हैं कि उसमें घूर्णन सममिति है ।

7. एक पूरे चक्कर (360° के) में, एक वस्तु जितनी बार स्थिति के अनुसार, पहले जैसी हीे दिखाई देती है, वह संख्या उस घूर्णन सममिति का क्रम कहलाती है । उदाहरणार्थ, एक वर्ग की घूर्णन सममिति का क्रम 4 है तथा एक समबाहु त्रिभुज की घूर्णन सममिति का क्रम 3 है ।

8. कुछ आकारों में केवल एक ही सममिति रेखा होती है, जैसे अक्षर E; कुछ में केवल घूर्णन सममिति ही होती है, जैसे अक्षर S तथा कुछ में दोनों प्रकार की सममितियाँ होती हैं, जैसे अक्षर H है। सममिति का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका दैनिक जीवन में अधिकांशतः प्रयोग होता है तथा इससे भी अधिक महत्व इस कारण है कि यह हमें सुंदर एवं आकर्षक डिज़ाइन प्रदान कर सकती है ।

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