10ण्1 भूमिका आप अनेक प्रकार के आकारों से परिचित हैं। आप पिछली कक्षाओं में इनमें से वुफछ आकारों की रचना करना सीख चुके हैं। उदाहरणतः अब आप एक दी हुइर् लंबाइर् का रेखाखंड, एक रेखाखंड पर एक लंब रेखा, एक कोण, कोण का समद्विभाजक, एक वृत्त, इत्यादि की रचना कर सकते हैं। अब आप समांतर रेखाएँ तथा कुछ प्रकार के त्रिाभुजों को खींचना सीखेंगे। 10ण्2 एक दी हुइर् रेखा के समांतर उस ¯बदु से होकर रेखा खींचना जो उस रेखा पर स्िथत नहीं है आइए एक ियाकलाप से प्रारंभ करें। ;आकृति 10ण्1द्ध ;पद्ध एक कागश की शीट लीजिए और इसे ;पद्ध ;पपद्धमोड़कर एक निशान बनाइए। यह मोड़ का निशान एक रेखा स को निरूपित करता है। ;पपद्ध कागश को खोल लीजिए। इस कागश पर स के बाहर एक ¯बदु । अंकित कीजिए। ;पपपद्ध;पपपद्ध इस ¯बदु। से होकर जाता हुआ और रेखा स ;पअद्ध पर लंब एक मोड़ का निशान बनाइए। इस लंब का नाम ।छ रख्िाए। ;पअद्ध अब, ¯बदु । से होकर इस लंब के लंबवत एक मोड़ का निशान बनाइए। इस नयी ;अद्ध लंबवत रेखा का नाम उ रख्िाए। अब, स द्यद्य उ आकृति 10ण्1 है क्या आप देख सकते हैं कि ऐसा क्यों है? यहाँ समांतर रेखाओं का कौन - सा गुण या कौन - से गुण यह कहने मंे सहायता कर सकता है या कर सकते हैं कि रेखाएँ स और उ समांतर हैं? आप तियर्क रेखा और समांतर रेखाओं से संबंध्ित गुणों में से किसी भी गुण का प्रयोग करके इस रचना को केवल पैमाना ;रूलरद्ध और परकार का प्रयोग करके कर सकते हैं। चरण 1 एक रेखाष्सष्और उसके बाहर स्िथत कोइर् ¯बदुष्।ष्लीजिए ख्आकृति10ण्2 ;पद्ध, । चरण 2 चरण 3 ¯बदु ठ को वेंफद्र मान कर और कोइर् सुविधजनक त्रिाज्या लेकर, स को ब् पर और ठ। को क् पर प्रतिच्छेद करता ;काटताद्ध हुआ एक चाप खींचिए ख्आकृति 10ण्2;पपपद्ध,। चरण 4 अब, । ¯बदु को वेंफद्र मान कर और चरण 3 वाली ही त्रिाज्या लेकर, ।ठ को ळ पर काटता हुआ एक चाप म्थ् खींचिए ख्आकृति 10ण्2 ;पअद्ध,। चरण 5 परकार के नुकीले सिरे को ब् पर रख्िाए और इसे खोल कर इस प्रकार समायोजित कीजिए कि पेंसिल की नोक क् पर रहे ख्आकृति 10ण्2 ;अद्ध,। चरण 6 ळ को वेंफद्र मानकर और परकार का खुलाव ;वचमदपदहद्ध चरण 5 वाला ही रखते हुए, एक चाप खींचिए जो चाप म्थ् को भ् पर काटे ख्आकृति 10ण्2 ;अपद्ध, । चरण 7 अब।भ् को मिलाकर रेखा उ खींचिए ख्आकृति 10ण्2 ;अपपद्ध,। ध्यान दीजिए कि∠।ठब् और ∠ठ।भ् एकांतर अंतःकोण हैं, आकृति10ण्2 ;पद्ध.;अपपद्ध जो परस्पर बराबर हैं। इसलिए उ द्यद्य स है। 1ण् उपरोक्त रचना में, क्या आप । से होकर जाती हुइर् अन्य रेखा खींच सकते हैं जो स के समांतर हो? 2ण् क्या आप इस रचना मंे इस प्रकार का परिवतर्न कर सकते हैं कि बराबर एकांतर अंतःकोण बनाने के स्थान पर बराबर संगत कोण बनें? 1ण् एक रेखा, ;मान लीजिए ।ठद्ध खींचिए और इसके बाहर स्िथत कोइर् ¯बदु ब् लीजिए। केवल पैमाना ;रूलरद्ध और परकार का प्रयोग करते हुए, ब् से होकर ।ठ के समांतर एक रेखा खींचिए। 2ण् एक रेखा स खींचिए और स पर स्िथत किसी भी ¯बदु पर स पर लंब खींचिए। इस लंब रेखा पर एक ¯बदु ग् लीजिए जो स से 4 बउ की दूरी पर हो। ग् से होकर स के समांतर एक रेखा उ खींचिए। 3ण् मान लीजिए स एक रेखा है और च् एक ¯बदु है जो स पर स्िथत नहीं है। च् से होकर स के समंातर एक रेखा उ खींचिए। अब च् को स के किसी ¯बदु फ से जोडि़ए। उ पर कोइर् अन्य ¯बदु त् चुनिए। त् से होकर, च्फ के समांतर एक रेखा खींचिए। मान लीजिए यह रेखा, रेखा स से ¯बदु ै पर मिलती है। समांतर रेखाओं के इन दोनों युग्मों से क्या आकृति बनती है? 10ण्3 त्रिाभुजों की रचना इस अनुच्छेद को पढ़ने से पहले, यह अच्छा होगा कि आप त्रिाभुजों की अवधारणाओं, विशेष रूप से त्रिाभुजों के गुणों और त्रिाभुजों की सवा±गसमता वाले अध्यायों को याद करें।आप भुजाओं और कोणों के आधरों पर त्रिाभुजों को वगीर्कृत करना तथा त्रिाभुजों से संबंध्ित निम्नलिख्िात महत्वपूणर् गुणों के बारे में जानते हैं: ;पद्ध एक त्रिाभुज का बाह्यकोण उसके दोनों अभ्िामुख अंतःकोणों के योगपफल के बराबर होता है। ;पपद्ध त्रिाभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है। ;पपपद्ध त्रिाभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं की लंबाइयों का योग तीसरी भुजा की लंबाइर् से अध्िक होता है। ;पअद्ध एक समकोण त्रिाभुज में कणर् पर बना वगर् शेष दो भुजाओं के वगो± के योगपफल के बराबर होता है। ‘त्रिाभुजों की सवा±गसमता’ वाले अध्याय मंे हमने देखा था कि एक त्रिाभुज प्राप्त किया जा सकता है, यदि उसके निम्नलिख्िात माप समूहों में से कोइर् एक दिया हुआ हैः ;पद्ध तीन भुजाएँ ;पपद्ध दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण ;पपपद्ध दो कोण और उनके बीच की भुजा ;पअद्ध समकोण त्रिाभुज के लिए, कणर् और एक पाद ;समहद्ध अब, हम इन अवधरणाओं का त्रिाभुजों की रचनाओं में प्रयोग करेंगे। 10ण्4 एक त्रिाभुज की रचना जब उसकी तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ दी हों ;ैैै कसौटीद्ध इस अनुच्छेद मंे, हम त्रिाभुजों की रचना करेंगे जब उसकी तीनों भुजाएँ ज्ञात हों। पहले हम इसकी एक रप़फ ;तवनहीद्ध आकृति खींचते हैं, जिससे उसकी भुजाओं का कुछ अनुमान लग जाए और पिफर तीनों भुजाओं में से एक भुजा लेकर रचना प्रारंभ करते हैं। निम्नलिख्िात उदाहरण को समझिए: उदाहरण 1 एक त्रिाभुज ।ठब् की रचना कीजिए, जबकि ।ठ त्र 5 बउ, ठब् त्र 6 बउ और ।ब् त्र 7 बउ दिया है। हल चरण 1 पहले हम दी हुइर् मापों की एक रपफ आकृति खींचते हैं ;इससे हमें आगे बढ़ने में सहायता मिलेगीद्ध ख्आकृति 10ण्3;पद्ध,। ;पद्धचरण 2 6 बउ लंबाइर् का रेखा खंड ठब् खींचिए ख्आकृति10ण्3;पपद्ध,। ;पपद्ध चरण 3 ¯बदु ठ से, ¯बदु ।ए 5 बउ की दूरी पर है। अतः, ठ को वेंफद्र मान कर और 5 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींचिए। ;अब । इस चाप पर कहीं स्िथत एक ¯बदु है। यह ज्ञात करना हमारा काम है कि । बिल्वुफल ठीक इस चाप पर कहाँ हैद्ध ख्आकृति 10ण्3;पपपद्ध,। ;पपपद्ध चरण 4 ब् से, ¯बदु ।, 7 बउ की दूरी पर है। अतः, ब् को वेंफद्र मान कर और 7 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींचिए। ;। इस चाप पर कहीं स्िथत होगा। हमें इसका पता लगाना हैद्धख्आकृति10ण्3;पअद्ध,। ;पअद्ध चरण 5 । को खींचे गए इन दोनों चापों पर स्िथत होना चाहिए। अतः, यह इन दोनों चापों का प्रतिच्छेद ¯बदु है। इन चापों के प्रतिच्छेद ¯बदु को । से अंकित कीजिए। ।ठ और।ब् को जोडि़ए। अब Δ।ठब् तैयार है ख्आकृति 10ण्3;अद्ध,। ;अद्धआकृति 10ण्3 ;पद्ध . ;अद्ध हम देखते हैं कि Δक्म्थ्ए Δ।ठब् को पूणर्तया ढक लेता है, अथार्त्् उसके साथ संपाती हो जाता है। ;ध्यान दीजिए कि इन दोनों त्रिाभुजों की रचना दी हुइर् तीन भुजाओं से की गइर् है।द्ध इस प्रकार, यदि एक त्रिाभुज की तीन भुजाएँ दूसरे त्रिाभुज की संगत तीन भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। यह ैैै सवा±गसमता नियम ;या कसौटीद्ध कहलाता है, जिसे आप पिछले अध्याय मंे पढ़ चुके हैं। एक विद्याथीर् ने एक ऐसा त्रिाभुज खींचने का प्रयत्न किया, जिसकी रप़फच् आकृति यहाँ दी गइर् है। पहले उसने फत् खींचा। पिफर उसने फ को वंेफद्र मान कर और 3 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींची तथा त् को वेंफद्र मानत्फ 6बउ कर और 2 बउ त्रिाज्या लेकर एक अन्य चाप खींची। परंतु वह च् नहीं प्राप्त आकृति 10ण्4: सोचिए, क्या यह सही कर सका। इसका क्या कारण है? इस प्रश्न से संबंध्ित त्रिाभुज के किस है। सही है? गुण को आप जानते हैं? क्या ऐसे त्रिाभुज का अस्ितत्व है? ;त्रिाभुजों के इस गुण को याद कीजिएः किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं का योग सदैव तीसरी भुजा से बड़ा होता हैद्ध। 10ण्5 एक त्रिाभुज की रचना जब दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके बीच के कोण की माप दी हो ;ै।ै कसौटीद्ध यहाँ, हमें दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हुआ है। पहले हम एक रप़फ आकृति खींचते हैं और पिफर दिए हुए रेखाखंडों में से एक रेखाखंड खींचते हैं। इसके बाद अन्य चरणों का अनुसरण किया जाता है। उदाहरण 2 देख्िाए। ;रप़फ आकृतिद्धउदाहरण 2 एक त्रिाभुज च्फत् की रचना कीजिए, जब दिया है कि च्फ त्र 3 बउ, फत् त्र 5ण्5 बउ और ∠च्फत् त्र 60° है। हल चरण 1 पहले हम दी हुइर् मापों के अनुसार, एक;पद्ध रप़फ आकृति खींचते हैं। ;इससे हमें रचना की प्रिया निधर्रित करने में सहायता मिलेगीद्ध ख्आकृति 10ण्5;पद्ध,। ;पपद्ध चरण 2 5ण्5 बउ लंबाइर् का एक रेखाखंड फत् खींचिएख्आकृति10ण्5;पपद्ध,। चरण 3 फ पर किरण फग् खींचिए, जो फत् के ;पपपद्ध साथ 60° का कोण बनाए। ;¯बदु च् कोण की इसी किरण पर कहीं स्िथत होगाद्ध ख्आकृति10ण्5;पपपद्ध,। चरण 4 ;च् को निश्िचत करने के लिए, दूरी फच् दी हुइर् है।द्ध फ को वेंफद्र मान कर 3 बउ त्रिाज्या वाली एक चाप खींचिए। यह फग् को ¯बदु च् पर काटता है। ख्आकृति10ण्5;पअद्ध,। ;पअद्ध चरण 5 च्त् को जोडि़ए। इस प्रकार, Δच्फत् प्राप्त हो जाता है ख्आकृति 10ण्5 ;अद्ध,। ;अद्धआकृति 10ण्5 ;पद्ध.;अद्ध रचना करने के लिए, दिए हुए आँकड़े पयार्प्त नहीं हैं। अब Δ।ठब् की रचना करने का प्रयत्न कीजिए, जब ।ठ त्र 3 बउ, ।ब् त्र 5 बउ और ∠ठ त्र 30° है। हम क्या प्रेक्ष्िात करते हैं? पुनः, Δ।ठब् की रचना अद्वितीय रूप से नहीं की जा सकती है। इस प्रकार, हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि एक अद्वितीय त्रिाभुज की रचना तभी की जा सकती है जब उसकी दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके मध्य स्िथत ;बीच केद्ध कोण का माप दिया हुआ हो। 10ण्6 एक त्रिाभुज की रचना जब उसके दो कोणों के माप और इन कोणों के बीच की भुजा की लंबाइर् दी हो ;।ै। कसौटीद्ध जैसा पहले किया था, एक रप़फ आकृति खींिचए। अब, दिया हुआ रेखाखंड खींचिए। दोनों अंत ¯बदुओं पर कोण बनाइए। उदाहरण 3 देख्िाए। उदाहरण 3 Δग्ल्र् की रचना कीजिए, यदि, ग्ल् त्र 6 बउ, उ∠र्ग्ल् त्र 30° और उ∠ग्ल्र् त्र 100° है। हल ;रप़फ आकृतिद्ध चरण 1 वास्तविक रचना से पहले, हम इस पर अंकित मापों के अनुसार एक रप़फ आकृति खींचते हैं। ;इससे वुफछ अनुमान लग जाता है कि वैफसे रचना की जाएद्धख्आकृति10ण्6;पद्ध,। ;पद्धचरण 2 6 बउ लंबाइर् का रेखाखंड ग्ल् खींचिए ख्आकृति10ण्6;पपद्ध,। ;पपद्ध चरण 3 ग् पर एक किरण ग्च् खींचिए जो ग्ल् से 30° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध् के अनुसार ¯बदु र् किरण ग्च् पर कहीं स्िथत ;पपपद्धहोना चाहिए ख्आकृति10ण्6;पपपद्ध,। चरण 4 ल् पर एक किरणल्फ खींचिए, जो ल्ग् से 100° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध् के अनुसार र् किरण ल्फ पर भी अवश्य स्िथत होना चाहिए ख्आकृति10ण्6;पअद्ध,। ;पअद्ध ;संकेत: त्रिाभुज के कोण योग गुण को याद कीजिएद्ध। 3ण् जाँच कीजिए कि आप Δक्म्थ् की रचना कर सकते हैं या नहीं, यदि म्थ् त्र 7ण्2 बउ, उ∠म् त्र 110° और उ∠थ् त्र 80° है। अपने उत्तर की पुष्िट कीजिए। 10ण्7 एक समकोण त्रिाभुज की रचना, जब उसके एक पाद ;भुजाद्ध और कणर् की लंबाइर्याँ दी हुइर् हों। ;त्भ्ै कसौटीद्ध यहाँ, रप़फ आकृति बनाना सरल है। अब दी हुइर् भुजा के अनुसार, एक रेखाखंड खींचिए। इसके एक अंत्य ¯बदु पर एक समकोण बनाइए। त्रिाभुज की दी हुइर् लंबाइयों की भुजा और कणर् खींचने के लिए परकार का प्रयोग कीजिए। त्रिाभुज को पूरा कीजिए। निम्नलिख्िात उदाहरण पर विचार कीजिए: उदाहरण 4 Δस्डछ की रचना कीजिए, जिसका ∠स्डछ समकोण है तथा दिया है कि स्छ त्र 5 बउ और डछ त्र 3 बउ । ;रप़फ आकृतिद्धहल चरण 1 एक रप़फ आकृति खींचिए और उस पर दिए हुए माप को अंकित कीजिए। समकोण अंकित करना याद रख्िाए ;आकृति 10ण्7;पद्धद्ध। ;पद्धचरण 2 3 बउ लंबाइर् का रेखाखंड डछ खींचिए। ख्आकृति10ण्7;पपद्ध, ;पपद्ध चरण 3 ड पर डग् ⊥ डछ खींचिए। ;स् इसी लंब पर कहीं स्िथत होना चाहिएद्ध ख्आकृति10ण्7;पपपद्ध,। चरण 4 छ को वेंफद्र मानकर, 5 बउ त्रिाज्या का एक चाप खींचिए।;स् इसी चाप पर स्िथत होना चाहिए, क्योंकि यह छ से 5 बउ की दूरी पर हैद्ध ख्आकृति10ण्7;पअद्ध,। चरण 5 स् को लंब रेखा डग् पर और वेंफद्रछ वाले चाप पर स्िथत होना चाहिए। अतः, स् इन दोनों का प्रतिच्छेद ¯बदु होगा। स्छ को जोडि़ए। अब Δस्डछ प्राप्त हो जाता है। ख्आकृति 10ण्7;अद्ध,। आकृति 10ण्7 ;पद्ध.;अद्ध ;अद्ध विविध् प्रश्न नीचे कुछ त्रिाभुजों की भुजाओं और कोणों के माप दिए गए हैं। इनमें से उनकी पहचान कीजिए, जिनकी रचना नहीं की जा सकती तथा यह भी बताइए कि आप इनकी रचना क्यों नहींकर सकते। शेष त्रिाभुजों की रचना कीजिए। त्रिाभुज दिए हुए माप 1ण् Δ।ठब् उ∠। त्र 85°ए उ∠ठ त्र115°ए ।ठत्र5बउ 2ण् Δच्फत् उ∠फ त्र 30°ए उ∠त् त्र60°ए फत्त्र4ण्7 बउ 3ण् Δ।ठब् उ∠। त्र 70°ए उ∠ठ त्र 50°ए ।ब् त्र 3बउ 4ण् Δस्डछ उ∠स् त्र 60°ए उ∠छ त्र 120°, स्ड त्र5 बउ 5ण् Δ।ठब् ठब् त्र2बउ, ।ठ त्र 4बउ, ।ब् त्र 2बउ 6ण् Δच्फत् च्फ त्र 3ण्5 बउ, फत् त्र 4बउ, च्त् त्र 3ण्5 बउ 7ण् Δग्ल्र् ग्ल् त्र 3बउ, ल्र् त्र 4बउ, ग्र् त्र 5बउ 8ण् Δक्म्थ् क्म् त्र 4ण्5 बउ, म्थ् त्र 5ण्5 बउ, क्थ् त्र 4बउ हमने क्या चचार् की? इस अध्याय में हमने पैमाना ;रूलरद्ध और परकार की वुफछ रचनाओं की विध्ियों का अध्ययनकिया है। 1ण् एक दी हुइर् रेखा और ऐसे ¯बदु के लिए जो इस रेखा पर स्िथत नहीं है, हमने तियर्क छेदीरेखा आकृति में, रेखा के समांतर एक रेखा खींचने के लिए समान एकांतर कोणों कीअवधरणा का उपयोग किया है। इस रचना के लिए हम समान संगत कोणों की अवधरणा का उपयोग भी कर सकते हैं। 2ण् त्रिाभुजों की सवा±गसमता की संकल्पना का अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हुए हमने त्रिाभुजकी रचना की विध्ि का अध्ययन किया है। इस अध्याय में निम्नलिख्िात उदाहरणों की चचार् की गइर् है। ;पद्ध ैैैरू त्रिाभुज की तीन भुजाओं की लंबाइर् दी हुइर् है। ;पपद्ध ै।ैरू किन्हीं दो भुजाओं की लंबाइर् और इन भुजाओं के मध्य स्िथत कोण का माप दिया हुआ है। ;पपपद्ध ।।ैरू दो कोणों के माप और इनके मध्य स्िथत भुजा की लंबाइर् दी हुइर् है। ;पअद्ध त्भ्ैरू समकोण त्रिाभुज के कणर् एवं एक पाद की लंबाइर् दी हुइर् है।

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अध्याय 10


प्रायोगिक ज्यामिति


10.1 भूमिका

आप अनेक प्रकार के आकारों से परिचित हैं। आप पिछली कक्षाओं में इनमें से कुछ आकारों की रचना करना सीख चुके हैं। उदाहरणतः अब आप एक दी हुई लंबाई का रेखाखंड, एक रेखाखंड पर एक लंब रेखा, एक कोण, कोण का समद्विभाजक, एक वृत्त, इत्यादि की रचना कर सकते हैं।

अब आप समांतर रेखाएँ तथा कुछ प्रकार के त्रिभुजों को खींचना सीखेंगे।


10.2 एक दी हुई रेखा के समांतर उस बिंदु से होकर रेखा खींचना जो उस रेखा पर स्थित नहीं है

आइए एक क्रियाकलाप से प्रारंभ करें। (आकृति 10.1)

(i) एक कागज़ की शीट लीजिए और इसे मोड़कर एक निशान बनाइए। यह मोड़ का निशान एक रेखा l को निरूपित करता है।

(ii) कागज़ को खोल लीजिए। इस कागज़ पर l के बाहर एक बिंदु A अंकित कीजिए।

(iii) इस बिंदु A से होकर जाता हुआ और रेखा l पर लंब एक मोड़ का निशान बनाइए। इस लंब का नाम AN रखिए।

(iv) अब, बिंदु A से होकर इस लंब के लंबवत एक मोड़ का निशान बनाइए। इस नयी लंबवत रेखा का नाम m रखिए। अब, l || m है क्या आप देख सकते हैं कि एेसा क्यों है?

यहाँ समांतर रेखाओं का कौन-सा गुण या कौन-से गुण यह कहने में सहायता कर सकता है या कर सकते हैं कि रेखाएँ l और m समांतर हैं?

आप तिर्यक रेखा और समांतर रेखाओं से संबंधित गुणों में से किसी भी गुण का प्रयोग करके इस रचना को केवल पैमाना (रूलर) और परकार का प्रयोग करके कर सकते है

11

12

चरण 5 परकार के नुकीले सिरे को C पर रखिए और इसे खोल कर इस प्रकार समायोजित कीजिए कि पेंसिल की नोक D पर रहे [आकृति 10.2 (v)]।

13

चरण 6 G को केंद्र मानकर और परकार का खुलाव (opening) चरण 5 वाला ही रखते हुए, एक चाप खींचिए जो चाप EF को H पर काटे [आकृति 10.2 (vi)] ।

14

चरण 7 अब AH को मिलाकर रेखा m खींचिए [आकृति 10.2 (vii)]।

15

ध्यान दीजिए कि ABC और BAH एकांतर अंतःकोण हैं, जो परस्पर बराबर हैं। इसलिए m || l है।


सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

1. उपरोक्त रचना में, क्या आप A से होकर जाती हुई अन्य रेखा खींच सकते हैं जो l के समांतर हो?

2. क्या आप इस रचना में इस प्रकार का परिवर्तन कर सकते हैं कि बराबर एकांतर अंतःकोण बनाने के स्थान पर बराबर संगत कोण बनें?

प्रश्नावली 10.1

1. एक रेखा, (मान लीजिए AB) खींचिए और इसके बाहर स्थित कोई बिंदु C लीजिए। केवल पैमाना (रूलर) और परकार का प्रयोग करते हुए, C से होकर AB के समांतर एक रेखा खींचिए।

2. एक रेखा l खींचिए और l पर स्थित किसी भी बिंदु पर l पर लंब खींचिए। इस लंब रेखा पर एक बिंदु X लीजिए जो l से 4 cm की दूरी पर हो। X से होकर l के समांतर एक रेखा m खींचिए।

3. मान लीजिए l एक रेखा है और P एक बिंदु है जो l पर स्थित नहीं है। P से होकर l के समांतर एक रेखा m खींचिए। अब P को l के किसी बिंदु Q से जोड़िए। m पर कोई अन्य बिंदु R चुनिए। R से होकर, PQ के समांतर एक रेखा खींचिए। मान लीजिए यह रेखा, रेखा l से बिंदु S पर मिलती है। समांतर रेखाओं के इन दोनों युग्मों से क्या आकृति बनती है?

10.3 त्रिभुजों की रचना

इस अनुच्छेद को पढ़ने से पहले, यह अच्छा होगा कि आप त्रिभुजों की अवधारणाओं, विशेष रूप से त्रिभुजों के गुणों और त्रिभुजों की सर्वांगसमता वाले अध्यायों को याद करें।

3 = 1 + 2
1474.png


a + b > c

1464.png

आप भुजाओं और कोणों के आधारों पर त्रिभुजों को वर्गीकृत करना तथा त्रिभुजों से संबंधित निम्नलिखित महत्वपूर्ण गुणों के बारे में जानते हैं :

(i) एक त्रिभुज का बाह्यकोण उसके दोनों अभिमुख अंतःकोणों के योगफल के बराबर होता है।

(ii) त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है।

(iii) त्रिभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं की लंबाइयों का योग तीसरी भुजा की लंबाई से अधिक होता है।



1 + 2 + 3 = 180°

1495.png
1506.png

b2+ a2 = c2

(iv) एक समकोण त्रिभुज में कर्ण पर बना वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योगफल के बराबर होता है।

‘त्रिभुजों की सर्वांगसमता’ वाले अध्याय में हमने देखा था कि एक त्रिभुज प्राप्त किया जा सकता है, यदि उसके निम्नलिखित माप समूहों में से कोई एक दिया हुआ हैः

(i) तीन भुजाएँ

(ii) दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण

(iii) दो कोण और उनके बीच की भुजा

(iv) समकोण त्रिभुज के लिए, कर्ण और एक पाद (leg)

अब, हम इन अवधारणाओं का त्रिभुजों की रचनाओं में प्रयोग करेंगे।


10.4 एक त्रिभुज की रचना जब उसकी तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ दी हों (SSS कसौटी)

इस अनुच्छेद में, हम त्रिभुजों की रचना करेंगे जब उसकी तीनों भुजाएँ ज्ञात हों। पहले हम इसकी एक रफ़ (rough) आकृति खींचते हैं, जिससे उसकी भुजाओं का कुछ अनुमान लग जाए और फिर तीनों भुजाओं में से एक भुजा लेकर रचना प्रारंभ करते हैं। निम्नलिखित उदाहरण को समझिए :

उदाहरण 1 एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए, जबकि AB = 5 cm, BC = 6 cm और AC = 7 cm दिया है।

हल

चरण 1 पहले हम दी हुई मापों की एक रफ आकृति खींचते हैं (इससे हमें आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी) [आकृति 10.3(i)]।

चरण 2 6 cm लंबाई का रेखा खंड BC खींचिए

16

[आकृति 10.3(ii)]।

चरण 3 बिंदु B से, बिंदु A, 5 cm की दूरी पर है। अतः, B को केंद्र मान कर और 5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए। (अब A इस चाप पर कहीं स्थित एक बिंदु है। यह ज्ञात करना हमारा काम है कि A बिल्कुल ठीक इस चाप पर कहाँ है) [आकृति 10.3(iii)]।

चरण 4 C से, बिंदु A, 7 cm की दूरी पर है। अतः, C को केंद्र मान कर और 7 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए। (A इस चाप पर कहीं स्थित होगा। हमें इसका पता लगाना है) [आकृति 10.3(iv)]।

चरण 5 A को खींचे गए इन दोनों चापों पर स्थित होना चाहिए। अतः, यह इन दोनों चापों का प्रतिच्छेद बिंदु है। इन चापों के प्रतिच्छेद बिंदु को A से अंकित कीजिए। AB और AC को जोड़िए। अब ABC तैयार है [आकृति 10.3(v)]




इन्हें कीजिए

DoThis5L.tifआइए अब एक अन्य त्रिभुज DEF की रचना करें, जिसमें DE = 5 cm, EF = 6 cm और DF = 7 cm है। DEF को काट कर उसे ABC पर रखिए।

हम देखते हैं कि DEF, ABC को पूर्णतया ढक लेता है, अर्थात्् उसके साथ संपाती हो जाता है। (ध्यान दीजिए कि इन दोनों त्रिभुजों की रचना दी हुई तीन भुजाओं से की गई है।) इस प्रकार, यदि एक त्रिभुज की तीन भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की संगत तीन भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। यह SSS सर्वांगसमता नियम (या कसौटी) कहलाता है, जिसे आप पिछले अध्याय में पढ़ चुके हैं।


सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

एक विद्यार्थी ने एक एेसा त्रिभुज खींचने का प्रयत्न किया, जिसकी रफ़ आकृति यहाँ दी गई है। पहले उसने QR खींचा। फिर उसने Q को केंद्र मान कर और 3 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींची तथा R को केंद्र मान कर और 2 cm त्रिज्या लेकर एक अन्य चाप खींची। परंतु वह P नहीं प्राप्त कर सका। इसका क्या कारण है? इस प्रश्न से संबंधित त्रिभुज के किस गुण को आप जानते हैं? क्या एेसे त्रिभुज का अस्तित्व है? (त्रिभुजों के इस गुण को याद कीजिएः किसी त्रिभुज की दो भुजाओं का योग सदैव तीसरी भुजा से बड़ा होता है)।

 17

 

प्रश्नावली 10.2

1. xyz की रचना कीजिए, जिसमें xy = 4.5 cm, yz = 5 cm और zx = 6 cm है।

2. 5.5 cm भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए।

3. PQR की रचना कीजिए, जिसमें PQ = 4 cm, QR = 3.5 cm और PR = 4 cm है। यह किस प्रकार का त्रिभुज है?

4. ABC की रचना कीजिए, ताकि AB = 2.5 cm, BC = 6 cm और AC = 6.5 cm हो।
B को मापिए।

10.5 एक त्रिभुज की रचना जब दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके बीच के कोण की माप दी हो (SAS कसौटी)

यहाँ, हमें दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हुआ है। पहले हम एक रफ़ आकृति खींचते हैं और फिर दिए हुए रेखाखंडों में से एक रेखाखंड खींचते हैं। इसके बाद अन्य चरणों का अनुसरण किया जाता है। उदाहरण 2 देखिए।

उदाहरण 2 एक त्रिभुज PQR की रचना कीजिए, जब दिया है कि PQ = 3 cm, QR = 5.5 cm और PQR = 60° है।

हल


चरण 1 पहले हम दी हुई मापों के अनुसार, एक रफ़ आकृति खींचते हैं। (इससे हमें रचना की प्रक्रिया निर्धारित करने में सहायता मिलेगी) [आकृति 10.5(i)]।

1740.png

चरण 2 5.5 cm लंबाई का एक रेखाखंड QR खींचिए [आकृति 10.5(ii)]।

1758.png


चरण 3 Q पर किरण QX खींचिए, जो QR के साथ 60° का कोण बनाए। (बिंदु P कोण की इसी किरण पर कहीं स्थित होगा) [आकृति 10.5(iii)]।

 1774.png


चरण 4 (P को निश्चित करने के लिए, दूरी QP दी हुई है।) Q को केंद्र मान कर
3 cm त्रिज्या वाली एक चाप खींचिए।

1797.png
यह QX को बिंदु P पर काटता है।

[आकृति 10.5(iv)]।

चरण 5 PR को जोड़िए। इस प्रकार, PQR प्राप्त हो जाता है [आकृति 10.5(v)]।

आकृति 10.5 (i)-(v)

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कीजिए

आईए अब एक अन्य त्रिभुज ABC की रचना करें ताकि Ab = 3 cm, BC = 6.5 cm और ABC = 60° हो। इस ABC को काट कर PQR पर रखिए। हम क्या देखते हैं? हम देखते हैं कि ABC पूर्णतया PQR के साथ संपाती हो जाता है, अर्थात्् उसे ढक लेता है। इस प्रकार, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके मध्य स्थित (बीच का) कोण एक अन्य त्रिभुज की संगत भुजाओं और उनके मध्य स्थित कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। यह SAS सर्वांगसमता नियम या कसौटी है, जिसे हम पिछले अध्याय में पढ़ चुके हैं। (ध्यान दीजिए कि दोनों त्रिभुजों की रचना दी हुई दो भुजाओं और उनके मध्य स्थित (बीच के) कोण द्वारा की गई है।)


सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

उपरोक्त रचना में, दो भुजाओं की लंबाइयाँ और एक कोण का माप दिया हुआ था। अब, निम्नलिखित समस्या का अध्ययन कीजिए :

एक ABC में, यदि AB = 3 cm, AC = 5 cm और C = 30° है, तो क्या हम इस त्रिभुज की रचना कर सकते हैं? हम AC = 5 cm खींच कर, C = 30° खींच सकते हैं। C की एक भुजा CA है। बिंदु B को इस कोण C की दूसरी भुजा पर स्थित होना चाहिए। परंतु, ध्यान दीजिए कि बिंदु B को एक अद्वितीय रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता है। अतः, त्रिभुज ABC की रचना करने के लिए, दिए हुए आँकड़े पर्याप्त नहीं हैं।

अब ABC की रचना करने का प्रयत्न कीजिए, जब AB = 3 cm, AC = 5 cm औरB = 30° है। हम क्या प्रेक्षित करते हैं? पुनः, ABC की रचना अद्वितीय रूप से नहीं की जा सकती है। इस प्रकार, हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि एक अद्वितीय त्रिभुज की रचना तभी की जा सकती है जब उसकी दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके मध्य स्थित (बीच के) कोण का माप दिया हुआ हो।


प्रश्नावली 10.3

1. DEF की रचना कीजिए, ताकि DE = 5 cm, DF = 3 cm और mEDF = 90° हो।

2. एक समद्विबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी प्रत्येक समान भुजा की लंबाई 6.5 cm हो और उनके बीच का कोण 110° का हो।

3. BC = 7.5 cm और AC = 5 cm और mC = 60° वाले ABC की रचना कीजिए।

10.6 एक त्रिभुज की रचना जब उसके दो कोणों के माप और इन कोणों के बीच की भुजा की लंबाई दी हो (ASA कसौटी)

जैसा पहले किया था, एक रफ़ आकृति खींεंचए। अब, दिया हुआ रेखाखंड खींचिए। दोनों अंत बिंदुओं पर कोण बनाइए। उदाहरण 3 देखिए।

उदाहरण 3 xyz की रचना कीजिए, यदि, XY = 6 cm, mZXY = 30° और mXYZ = 100° है।

हल

चरण 1 वास्तविक रचना से पहले, हम इस पर अंकित मापों के अनुसार एक रफ़ आकृति खींचते हैं। (इससे कुछ अनुमान लग जाता है कि कैसे रचना की जाए) [आकृति 10.6(i)]

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चरण 2 6 cm लंबाई का रेखाखंड xy खींचिए

[आकृति 10.6(ii)]।

1927.png

चरण 3 x पर एक किरण XP खींचिए जो XY से 30° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध के अनुसार बिंदु Z किरण xP पर कहीं स्थित होना चाहिए [आकृति 10.6(iii)]।

1952.png

चरण 4 y पर एक किरण yq खींचिए, जो YX से 100° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध के अनुसार z किरण yQ पर भी अवश्य स्थित होना चाहिए

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चरण 5 z को दोनों किरणों xp और Yq पर स्थित होना चाहिए। अतः, इन दोनों किरणों का प्रतिच्छेद बिंदु ही z है। अब xyz पूरा बन जाता है [आकृति 10.6(v)]।

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इन्हें कीजिए

अब एक अन्य त्रिभुज LMN खींचिए, जिसमें mNLM = 30°, LM = 6 cm और mNML = 100° हो। इस त्रिभुज LMN को काटकर त्रिभुज xyz पर रखिए। हम देखते हैं कि त्रिभुज LMN त्रिभुज xyz के साथ पूर्णतया संपाती हो जाता है। इस प्रकार, यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनके मध्य स्थित भुजा दूसरे त्रिभुज के संगत दो कोणों और उनके मध्य स्थित भुजा के बराबर हो, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। यह ASA सर्वांगसमता नियम या कसौटी है, जिसे आप पिछले अध्याय में पढ़ चुके हैं। (ध्यान दीजिए कि यहाँ दो त्रिभुजों की रचना की गई है, जब दो कोण और उनके मध्य स्थित भुजा दी गई है।)


सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

उपरोक्त उदाहरण में, एक भुजा की लंबाई और दो कोणों के माप दिए गए थे। अब निम्नलिखित समस्या का अध्ययन कीजिए :


ABC, में, यदि AC = 7 cm, mA = 60° और mB = 50° है, तो क्या आप त्रिभुज की रचना कर सकते हैं? (त्रिभुज का कोण योग गुण आपकी सहायता कर सकता है!)

प्रश्नावली 10.4

1. ABC, की रचना कीजिए, जब mA = 60°, mB = 30° और AB = 5.8 cm दिया है।

2. PQR की रचना कीजिए, यदि PQ = 5 cm, mPQR = 105° और mQRP = 40° दिया है।

(संकेत ः त्रिभुज के कोण योग गुण को याद कीजिए)।

3. जाँच कीजिए कि आप DEF की रचना कर सकते हैं या नहीं, यदि EF = 7.2 cm, 
m
E = 110° और mF = 80° है। अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

10.7 एक समकोण त्रिभुज की रचना, जब उसके एक पाद (भुजा) और कर्ण की लंबाईयाँ दी हुई हों। (RHS कसौटी)

यहाँ, रफ़ आकृति बनाना सरल है। अब दी हुई भुजा के अनुसार, एक रेखाखंड खींचिए। इसके एक अंतः बिंदु पर एक समकोण बनाइए। त्रिभुज की दी हुई लंबाइयों की भुजा और कर्ण खींचने के लिए परकार का प्रयोग कीजिए। त्रिभुज को पूरा कीजिए। निम्नलिखित उदाहरण पर विचार कीजिए :

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प्रश्नावली 10.5

1. समकोण PQR की रचना कीजिए, जहाँ mQ = 90°, QR = 8 cm और PR = 10 cm है।

2. एक समकोण त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसका कर्ण 6 cm लंबा है और एक पाद 4 cm लंबा है।

3. एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज ABC की रचना कीजिए, जहाँ mACB = 90° है और AC = 6 cm है।

विविध प्रश्न

नीचे कुछ त्रिभुजों की भुजाओं और कोणों के माप दिए गए हैं। इनमें से उनकी पहचान कीजिए, जिनकी रचना नहीं की जा सकती तथा यह भी बताइए कि आप इनकी रचना क्यों नहीं कर सकते। शेष त्रिभुजों की रचना कीजिए।

त्रिभुज दिए हुए माप

1. ABC mA = 85°, mB = 115°, AB = 5 cm

2. PQR mQ = 30°, mR = 60°, QR = 4.7 cm

3. ABC mA = 70°, mB = 50°, AC = 3 cm

4. LMN mL = 60°, mN = 120°] LM = 5 cm

5. ABC BC = 2 cm, AB = 4 cm, AC = 2 cm

6. PQR PQ = 3.5 cm, QR = 4 cm, PR = 3.5 cm

7. xyz xy = 3 cm, yz = 4 cm, xz = 5 cm

8. DEF DE = 4.5 cm, EF = 5.5 cm, DF = 4 cm

हमने क्या चर्चा की?

इस अध्याय में हमने पैमाना (रूलर) और परकार की कुछ रचनाओं की विधियों का अध्ययन किया है।

1. एक दी हुई रेखा और एेसे बिंदु के लिए जो इस रेखा पर स्थित नहीं है, हमने तिर्यक छेदी रेखा आकृति में, रेखा के समांतर एक रेखा खींचने के लिए समान एकांतर कोणों की अवधारणा का उपयोग किया है।

इस रचना के लिए हम समान संगत कोणों की अवधारणा का उपयोग भी कर सकते हैं।

2. त्रिभुजों की सर्वांगसमता की संकल्पना का अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हुए हमने त्रिभुज की रचना की विधि का अध्ययन किया है।

इस अध्याय में निम्नलिखित उदाहरणों की चर्चा की गई है।

(i) SSS: त्रिभुज की तीन भुजाओं की लंबाई दी हुई है।

(ii) SAS: किन्हीं दो भुजाओं की लंबाई और इन भुजाओं के मध्य स्थित कोण का माप दिया हुआ है।

(iii) ASA: दो कोणों के माप और इनके मध्य स्थित भुजा की लंबाई दी हुई है।

(iv) RHS: समकोण त्रिभुज के कर्ण एवं एक पाद की लंबाई दी हुई है।

 

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