7ण्1 भूमिका अब आप एक बहुत ही महत्त्वपूणर् ज्यामितीय संकल्पना ‘सवा±गसमता’ को सीखने जा रहे हैं । विशेषकर, आप त्रिाभुजों की सवा±गसमता के बारे में बहुत वुफछ पढे़ंगे । सवा±गसमता को समझने के लिए, हम वुफछ ियाकलाप करेंगे । दो वस्तुओं के सवा±गसम होने के संबंध् को सवा±गसमता कहते हैं । इस अध्याय में, हम केवलतल में बनी आकृतियों की चचार् करेंगे यद्यपि सवा±गसमता एक साधरण विषय है जिसका उपयोग हम त्रिाआयामी ;3.क्पउमदेपवदंसद्ध आकारों के लिए भी करते हैं । अब हम तल में बनी ऐसी आकृतियों की सवा±गसमता का विध्िपूवर्क अथर् जानने की कोश्िाश करेंगे जिन्हें हम पहले से जानते हैं । 7ण्2 तल - आकृतियों की सवा±गसमता हैद्ध उसे मोड़ने या पफैलाने की आपको छूट नहीं है ।आकृति 7.3 में, यदि आकृति थ्, आकृति थ्के सवा±गसम है तो हम लिखेंगे थ्≅ थ्ण्12 127ण्3 रेखाखंडों में सवा±गसमता दो रेखाखंड कब सवा±गसम होते हैं ? नीचे दिए गए रेखाखंडों के दो युग्मों को देख्िाए ।;पद्ध ;पपद्ध आकृति 7ण्4 प्रत्येक रेखाखंड युग्म के लिए अक्स प्रतिलिपि बनाकर अध्यारोपण विध्ि का प्रयोग कीजिए ख्आकृति 7.4;पद्ध, ब्क् का अक्स बनाकर इसे ।ठ पर रखें । आप देखेंगे कि ब्क् ।ठ को पूणर्तया ढक लेता है और ब्ए । पर तथा क्ए ठ पर स्िथत है । अतः हम कह सकते हैं कि दोनों रेखाखंड सवा±गसम हैं और हम लिखेंगे ।ठ ≅ ब्क् ण् आकृति 7.4 ;पपद्ध के रेखाखंड युग्म के लिए इस ियाकलाप को दोहराइए । आप क्या देखते हैं ? ये रेखाखंड सवा±गसम नहीं हैं । यह आपने कैसे जाना ? क्योंकि जब एक रेखाखंड को दूसरे रेखाखंड पर रखा जाता है तो वे एक दूसरे को पूणर्तया नहीं ढकते हैं ।आकृति 7.4 ;पद्ध में आपने देखा होगा कि रेखाखंडों के युग्म का एक दूसरे के साथ सुमेलन ;उंजबीपदहद्ध होता है क्योंकि उनकी लंबाइर् बराबर है परंतु आकृति 7.4;पपद्ध में ऐसी स्िथति नहीं है । यदि दो रेखाखंडों की लंबाइर् समान ;यानी बराबरद्ध है तो वे सवा±गसम होते हैं। यदि दो रेखाखंड सवा±गसम हैं तो उनकी लंबाइयाँ समान होती हैं । उफपर दिए गए तथ्य को ध्यान में रखते हुए, जब दो रेखाखंड सवा±गसम होते हैं तो हम कहते हैं कि रेखाखंड बराबर हैंऋ और हम लिखते हैं ।ठ त्र ब्क्। ;हमारा वास्तव में अथर् है कि ।ठ ≅ ब्क् द्ध। 7ण्4 कोणों की सवा±गसमता ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध आकृति 7ण्5 ∠च्फत् का अक्स बनाइए और इससे ∠।ठब् को ढकने का प्रयास कीजिए । इसके लिए,नननत सबसे पहले फ को ठ पर और फच् को पर रख्िाए । कहाँ पर आएगा ? यह केनननतन फत्डछल्र्ठब् उफपर होगा ।ल्ग्ठ। इस प्रकार, ∠च्फत् का सुमेलन ∠।ठब् से होता है । इस सुमेलन में ∠।ठब् और ∠च्फत् सवा±गसम हैं । ;ध्यान दीजिए कि इन दोनों सवा±गसम कोणों की माप समान हैद्ध हम लिखते हैं ∠।ठब् ≅∠च्फत् ;पद्ध या उ∠।ठब् त्र उ ∠च्फत् ;इस स्िथति में माप 40° हैद्ध डस् अब आप ∠स्डछ का अक्स बनाइए और इसे ∠।ठब् पर रख्िाए । ड को ठ पर तथा को पर रख्िाए । क्या ए पर आता है ? नहीं, इस स्िथति में ऐसा नहीं होता है । आपने देखाकि ∠।ठब् और ∠स्डछ एक दूसरे को पूणर्तया नहीं ढकते हैं । इसलिए वे सवा±गसम नहीं हैं । ;ध्यान दीजिए, इस स्िथति में ∠।ठब् और ∠स्डछ की माप बराबर नहीं हैद्ध ∠ग्ल्र् और ∠।ठब् के बारे में आप क्या कहेंगे। आकृति 7.5;पअद्धमें किरण और क्रमशः किरण और से अध्िक लंबी प्रतीत होती है । इसके आधर पर आप सोचसकते हैं कि ∠।ठब्ए ∠ग्ल्र् से छोटा है । परंतु याद रख्िाए कि आकृति में किरण केवल दिशा को ही प्रद£शत करती है न कि लंबाइर् को। आप देखेंगे कि ये दोनों कोण भी सवा±गसम हैं । हम लिखते हैं ∠।ठब् ≅∠ग्ल्र् ;पपद्ध या उ∠।ठब् त्र उ∠ग्ल्र् ;पद्ध और ;पपद्ध को ध्यान में रखते हुए, हम यह भी लिख सकते हैं: ∠।ठब् ≅∠च्फत् ≅∠ग्ल्र् यदि दो कोणों की माप समान हो तो वे सवा±गसम होते हैं । यदि दो कोण सवा±गसम हैं तो उनकी माप भी समान होती है। कोणों की सवा±गसमता पूणर्तया उनके मापों की समानता के उफपर निभर्र करती है जैसाकि रेखाखंडों की स्िथति में बताया गया है । इस प्रकार, यह कहना कि दो कोण सवा±गसम हैं, हम कइर् बार केवल यही कहते हैं कि कोण बराबर हैंऋ और हम लिखते हैंः ∠।ठब् त्र ∠च्फत् ;अथार्त ∠।ठब् ≅∠च्फत्द्धण् 7ण्5 त्रिाभुजों की सवा±गसमता हमने देखा कि दो रेखाखंड सवा±गसम होते हैं जब उनमें से एक, दूसरे की प्रतिलिपि हो । इसी प्रकार, दो कोण सवा±गसम होते हैं यदि उनमें से एक, दूसरे की प्रतिलिपि हो । हम इस संकल्पना को अब त्रिाभुजों के लिए भी देखते हैं । दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं यदि वे एक दूसरे की प्रतिलिपियाँ हों और एक को दूसरे के उफपर रखे जाने पर, वे एक दूसरे को आपस में पूणर्तया ढक लें । ;पद्ध ;पपद्ध आकृति 7ण्6 Δ।ठब् और Δच्फत् समान आकार एवं समान आमाप के हैं । ये सवा±गसम हैं । अतः इनको निम्नलिख्िात प्रकार से दशार्एँगे: Δ।ठब् ≅Δच्फत्ण् इसका अथर् यह है कि यदि आप Δच्फत् को Δ।ठब् पर रखते हैं, तो च्ए । के उफपरऋ फए ठ नतननके उफपर और त्ए ब् के उफपर आता है । इसी प्रकार ए ।ठ के अनुदिशऋ फत् एठब् के अनुदिश तथा च्त्ए ।ब् के अनुदिश आते हैं । यदि दिए गए सुमेलन ;बवततमेचवदकमदबमद्ध में दो त्रिाभुज सवा±गसम हैं तो उनके संगत भाग ;अथार्त् कोण और भुजाएँद्ध समान होते हैं । अतः इन दोनों सवा±गसम त्रिाभुजों में, हमें प्राप्त होता हैः संगत शीषर् रू। और च्ए ठ और फए ब् और त्ण् संगत भुजाएँ रू ।ठ और च्फ ए ठब् और फत् ए ।ब् और च्त् ण् संगत कोण रू ∠। और ∠च्ए ∠ठ और ∠फए ∠ब् और ∠त्ण् यदि आप Δच्फत् को Δ।ठब् पर इस प्रकार से आरोपित करते हैं कि च्ए ठ के उफपर रखें तो क्या दूसरे शीषर् भी यथायोग्य सुमेलित होंगे ? ऐसा होना आवश्यक नहीं है ? आप त्रिाभुजों की अक्स प्रतिलिपियाँ लीजिए और यह ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए । यह दशार्ता है कि त्रिाभुजों की सवा±गसमता के बारे में चचार् करते समय न केवल कोणों की माप और भुजाओं की लंबाइयाँ महत्त्वरखती हैं, परंतु शीषो± का सुमेलन भी उतना ही महत्त्व रखता है।उफपर दी गइर् स्िथति में, सुमेलन हैः । ↔ च्ए ठ ↔ फए ब् ↔ त् हम इसे, इस प्रकार भी लिख सकते हैं।ठब् ↔ च्फत् उदाहरण 1 यदि Δ।ठब् और Δच्फत् सुमेलन ।ठब् ↔ त्फच् के अंतगर्त सवा±गसम हों, तो Δ।ठब् के वे भाग लिख्िाए जो निम्न के संगत हों ;पद्ध ∠च् ;पपद्ध ∠फ ;पपपद्ध त्च् हल इस सवा±गसमता को अच्छे ढंग से समझने के लिए, आइए हम एक आकृति;आकृति 7.7द्ध का प्रयोग करते हैं । आकृति 7ण्7 यहाँ सुमेलन।ठब् ↔ त्फच् है । अथार्त् । ↔ त् यठ ↔ फय ब् ↔ च्ण् अतः ;पद्ध च्फ ↔ ब्ठ ;पपद्ध ∠फ ↔ ∠ठ ;पपपद्ध त्च् ↔ ।ठ जब दो त्रिाभुज, मान लीजिए ।ठब् और च्फत्ए दिए हुए हों तो उनमें आपस में वुफल छः संभव सुमेलन होते हैं। उनमें से दो सुमेलन ये हैंः ;पद्ध ।ठब् ↔ च्फत् और ;पपद्ध ।ठब् ↔ फत्च् दो त्रिाभुजों के कट - आउट ;बनजवनजेद्ध का प्रयोग करके अन्य चार सुमेलनों को ज्ञात कीजिए । क्या ये सभी सुमेलन सवा±गसमता दशार्ते हैं ? इसके बारे में विचार कीजिए । 1ण् निम्न कथनों को पूरा कीजिए: ;ंद्ध दो रेखाखंड सवा±गसम होते हैं यदि ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;इद्ध दो सवा±गसम कोणों में से एक की माप 70° है, दूसरे कोण की माप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। ;बद्ध जब हम ∠। त्र ∠ठ लिखते हैं, हमारा वास्तव में अथर् होता है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। 2ण् वास्तविक जीवन से संबंध्ित सवा±गसम आकारों के कोइर् दो उदाहरण दीजिए । 3ण् यदि सुमेलन ।ठब् ↔ थ्म्क् के अंतगर्त Δ।ठब् ≅Δथ्म्क् तो त्रिाभुजों के सभी संगत सवा±गसम भागों को लिख्िाए । 4ण् यदि Δक्म्थ् ≅Δठब्। हो, तो Δठब्। के उन भागों को लिख्िाए जो निम्न के संगत हो: ;पद्ध ∠म् ;पपद्ध म्थ् ;पपपद्ध ∠थ् ;पअद्ध क्थ् 7ण्6 त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए प्रतिबंध् हम अपने दैनिक जीवन में त्रिाभुजाकार संरचनाओं और नमूनों का प्रायः प्रयोग करते हैं । अतः यहज्ञात करना लाभकारी होगा कि दो त्रिाभुजाकार आकृतियाँ कब सवा±गसम होंगी । यदि आपकी नोटबुक में दो त्रिाभुज बने हैं और आप प्रमाण्िात करना चाहते हैं कि क्या वे सवा±गसम हैं तब आप हर बार उनमें से एक को काटकर दूसरे पर रखने ;आरोपणद्ध वाली विध्ि का प्रयोग नहीं कर सकते हैं । इसके बदले यदि हम सवा±गसमता को सटीक मापों द्वारा निश्िचत कर सवेंफ तो यह अध्िक उपयोगी होगा। चलिए ऐसा करने का प्रयत्न करें। एक खेल आकृति 7ण्8 अप्पू और टिप्पू एक खेल खेलते हैं । अप्पू ने एक त्रिाभुज ।ठब्;आकृति 7.8द्ध अप्पू द्वारा निमिर्त बनाया । उसने प्रत्येक भुजा की लंबाइर् और इसके प्रत्येक कोण की माप को ध्यान त्रिाभुज में रख लिया । टिप्पू ने यह सब ध्यान से नहीं देखा । अप्पू, टिप्पू को चुनौती देता है कि क्या वह वुफछ दी सूचनाओं के आधर पर उसके Δ।ठब् की प्रतिलिपि बना सकता है? अप्पू द्वारा दी गइर् सूचनाओं का प्रयोग करके टिप्पू Δ।ठब् के सवा±गसम एक त्रिाभुज बनाने का प्रयास करता है । खेल आरंभ होता है । सावधनी से उनके वातार्लाप और उनके खेल का अवलोकन कीजिए । ैैै खेल अप्पू: Δ।ठब् की एक भुजा 5ण्5 बउ है । टिप्पू: इस सूचना से, मैं अनेक त्रिाभुजों को बना सकता हूँ ;आकृति 7.9द्ध। लेकिन यह आवश्यक नहीं कि वे Δ।ठब् की प्रतिलिपि हों। मैं जो त्रिाभुज बनाता हूँ वह त्रिाभुज अिाक कोण ; वइजनेम ंदहसमकद्ध या समकोण ; त्पहीज ंदहसमकद्ध या न्यून कोण ; ंबनजम ंदहसमकद्ध हो सकता है । यहाँ पर वुफछ उदाहरण दिए गए हैं: 5ण्5 बउ 5ण्5 बउ 5ण्5 बउ ;अध्िक कोणद्ध ;समकोणद्ध ;न्यूनकोणद्ध आकृति 7ण्9 मैंने अन्य भुजाओं के लिए स्वेच्छा से लंबाइयों का प्रयोग किया । इससे मुझे 5ण्5 बउ लंबाइर् के आधर वाले कइर् त्रिाभुज मिलते हैं । अतः दी गइर् केवल एक ही भुजा की लंबाइर् से Δ।ठब् की प्रतिलिपि बनाना, मेरे लिए संभव नहीं। अप्पू: अच्छा । मैं तुम्हें एक और भुजा की लंबाइर् दूँगा । Δ।ठब् की दो भुजाओं की लंबाइयाँ 5.5 बउ और 3.4 बउ हैं। टिप्पू: यह सूचना भी त्रिाभुज बनाने के लिए पयार्प्त नहीं है । मैं इस दी गइर् सूचना से बहुत से त्रिाभुज बना सकता हँू जो Δ।ठब् की प्रतिलिपि नहीं होंगे । यहाँ पर वुफछ त्रिाभुज दिए गए हैं जो मेरी बात का समथर्न करते हैं, आकृति 7.10 आपके त्रिाभुज जैसी प्रतिलिपि कोइर् भी नहीं बना सकता यदि केवल दो भुजाओं की लंबाइयाँ दी गइर् हों । अप्पू: ठीक है ! मैं तुम्हें त्रिाभुज की तीनों भुजाओं की माप देता हूँ । Δ।ठब् में, मेरे पास ।ठ त्र 5 बउ, ठब् त्र 5ण्5 बउ और ।ब् त्र 3ण्4 बउ है । टिप्पू: मैं सोचता हूँ कि त्रिाभुज बनाना अब संभव होना चाहिए । मैं अब कोश्िाशकरता हूँ । सबसे पहले मैं एक खाका ;कच्चीद्ध आकृति बनाता हूँ जिससे मैं आसानी से लंबाइयाँ याद रख सकूँ । मैं 5ण्5 बउ ठब् खींचता हूँ । श्ठश् को वेंफद्र लेकर, मैं 5 बउ त्रिाज्या वाली एक चाप खींचता हूँ । ¯बदु ष्।ष् इस आकृति 7ण्11 चाप पर कहीं स्िथत होना चाहिए । श्ब्श् को वेंफद्र लेकर 3.4 बउ त्रिाज्या वाली एक चाप खींचता हूँ । ¯बदु ष्।ष् इस चाप पर भी होना चाहिए । अथार्त्, ष्।ष् ¯बदु खींची गइर् दोनों चापों पर स्िथत है । अथार्त् ष्।ष् दोनों चापों का प्रतिच्छेदी ¯बदु है । मैं अब ¯बदुओं ।ए ठ और ब् की स्िथति जानता हूँ । अहा! मैं इन्हें मिलाकर Δ।ठब् प्राप्त कर सकता हूँ । ;आकृति 7.11द्ध अप्पू: बहुत अच्छा ! अतः एक दिए हुए Δ।ठब् की प्रतिलिपि बनाने के लिए ;अथार्त् Δ।ठब् के सवा±गसमद्ध हमें तीनों भुजाओं की लंबाइयों की आवश्यकता होती है । क्या हम इस स्िथति को भुजा - भुजा - भुजा ;ेपकम.ेपकम.ेपकमद्ध प्रतिबंध् कह सकेंगे? टिप्पू: क्यों न हम इसे संक्षेप में, ैैै प्रतिबंध् कहें । ैैै सवा±गसमता प्रतिबंध् यदि दिए गए सुमेलन के अंतगर्त, एक त्रिाभुज की तीनों भुजाएँ क्रमशः किसी दूसरे त्रिाभुज की संगत भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं । उदाहरण 2 त्रिाभुज ।ठब् और च्फत् में ।ठ त्र 3ण्5 बउ, ठब् त्र 7ण्1 बउ, ।ब् त्र 5 बउ, च्फ त्र 7ण्1 बउ, फत् त्र 5 बउ, और च्त् त्र 3ण्5 बउ है ;आवृफति 7.1द्ध।जाँचिए कि क्या दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं या 7ण्1 बउ फनहीं ? यदि हाँ, तो सुमेलन संबंध् को सांकेतिक रूप में लिख्िाए । हल यहाँए ।ठ त्र त्च् ;त्र 3ण्5 बउद्धए ठब् त्र च्फ ; त्र 7ण्1 बउद्ध त् ।ब् त्र फत् ;त्र 5 बउद्ध आकृति 7ण्12 यह दशार्ता है कि पहले त्रिाभुज की तीनों भुजाएँ, दूसरे त्रिाभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हैं । अतः ैैै सवा±गसमता प्रतिबंध् के अंतगर्त, दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं । उफपर दी गइर् तीनों समानता वाले संबंधें से, यह आसानी से देखा जा सकता है कि । ↔त्ए ठ ↔च् और ब् ↔फण् अतः Δ।ठब् ≅Δत्च्फ महत्त्वपूणर् जानकारी: सवा±गसम त्रिाभुजों के नामों में अक्षरों का क्रम संगत संबंधें को दशार्ता है । इस प्रकार, जब आप Δ।ठब् ≅Δत्च्फए लिखते हैं, आपको ज्ञात हो जाता है कि ।ए त् परऋ ठए च् परऋ ब्ए फ परऋ ।ठए त्च् की दिशा मेंऋ ठब्ए च्फ की दिशा में तथा ।ब्ए त्फ की दिशा में है। उदाहरण 3 आकृति 7ण्13 मेंए ।क् त्र ब्क् और।ठ त्र ब्ठ है । ;पद्ध Δ।ठक् और Δब्ठक् में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए । ;पपद्ध क्या Δ।ठक् ≅Δब्ठक् घ् क्यों या क्यों नहीं ? ;पपपद्ध क्या ठक्ए ∠।ठब् को समद्विभाजित करता है? कारण बताइए । हल ;पद्ध Δ।ठक् और Δब्ठक् में, बराबर भागों के तीन युग्म निम्नलिख्िात हैंः ।ठ त्र ब्ठ ;दिया गया हैद्ध ।क् त्र ब्क् ;दिया गया हैद्ध और ठक् त्र ठक् ;दोनों में उभयनिष्ठद्ध ;पपद्ध उफपर दिए गए ;पद्ध से ए Δ।ठक् ≅Δब्ठक् ;ैैै सवा±गसमता प्रतिबंध्द्ध आकृति 7ण्13 ;पपपद्ध ∠।ठक् त्र ∠ब्ठक् ;सवा±गसम त्रिाभुजों के संगत भागद्ध अतः ठक्ए ∠।ठब् को समद्विभाजित करता है । ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है जिसमें ।ठ त्र ।ब् ;आकृति 7ण्17द्ध है। Δ।ठब् की एक अक्स प्रतिलिपि लीजिए और इसे भी Δ।ठब् का नाम दीजिए ;पद्ध Δ।ठब् और Δ।ब्ठ में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए । ;पपद्ध क्या Δ।ठब् ≅Δ।ब्ठ है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ? । ;पपपद्ध क्या ∠ठ त्र ∠ब् है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ? अप्पू और टिप्पू अब पिछले खेल में वुफछ परिवतर्न करके पुनः खेलते हैं । ठै।ै खेल आकृति 7ण्17अप्पू: अब मैं त्रिाभुजों की प्रतिलिपि बनाने वाले खेल के नियमों में परिवतर्न करता हूँ । टिप्पू: ठीक है, करिए । अप्पू: आप पहले से जान चुके हैं कि त्रिाभुज की केवल एक भुजा की लंबाइर् का दिया जाना ही पयार्प्त नहीं होता है । टिप्पू: हाँ । अप्पू: उस स्िथति में, मैं कहता हूँ कि Δ।ठब् में एक भुजा 5.5 बउ और एक कोण 65° का है। टिप्पू: यह, पिफर त्रिाभुज बनाने के लिए पयार्प्त नहीं है । मैं ऐसे बहुत सारे त्रिाभुजों को बना सकता हूँ जो आपकी सूचना को संतुष्ट करते हों, परंतु वे Δ।ठब् की प्रतिलिपि न हों । उदाहरणके लिए, मैंने वुफछ त्रिाभुजों को यहाँ पर दिया है ;आकृति 7.18द्ध। अप्पू: अतः, हम क्या करें ? टिप्पू: हमें और सूचना की आवश्यकता है । अप्पू: तब, मैं अपने पहले वाले कथन में परिवतर्न करता हूँ । Δ।ठब् में, दो भुजाओं की लंबाइर्5.5 बउ और 3.4 बउ है, तथा इन भुजाओं के अंतगर्त 65° का कोण है । टिप्पू: यह सूचना मेरी सहायता करेगी । मैं कोश्िाश करता हूँ । मैं पहले 5.5 बउ लंबाइर् वाला रेखाखंड ठब् खींचता हूँ ;आकृति 7ण्19 ;पद्धद्ध । अब मैं ष्ब्ष् पर 65° का कोण बनाता हूँ ;आकृति 7ण्19 ;पपद्धद्ध। ब्ठ ब्ठ 5ण्5 बउ 5ण्5 बउ ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्धआकृति 7ण्19 हाँ, मुझे ¯बदु । प्राप्त हो गया । यह ब् से खींची गइर् इस कोणीय भुजा की दिशा में, ब् से 3.4 बउ की दूरी पर स्िथत होना चाहिए । ब् को वेंफद्र लेकर, मैं 3.4 बउ की एक चाप खींचता हूँ । यह कोण की भुजा को । पर काटता है । अब मैं ।ठ को मिलाता हूँ और Δ।ठब् को प्राप्त करता हूँ ;आकृति 7ण्19 ;पपद्धद्ध। अप्पू: आपने यहाँ भुजा - कोण - भुजा का उपयोग किया है जहाँ कोण भुजाओं के बीच में स्िथत है । टिप्पू: हाँ । हम इस प्रतिबंध् को क्या नाम देंगे ? अप्पू: यह ै।ै प्रतिबंध् है, क्या आप समझ गए हैं ? टिप्पू: हाँ। अवश्य। ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् यदि एक सुमेलन के अंतगर्त, एक त्रिाभुज की दो भुजाएँ और उनके अंतगर्त कोण दूसरे त्रिाभुज की संगत दो भुजाओं और उनके अंतगर्त कोण के बराबर हों, तो ये त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं । उदाहरण 4 दो त्रिाभुजों के वुफछ भागों की निम्न माप दी गइर् है । ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् का उपयोग करके जाँच कीजिए कि दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं अथवा नहीं ? यदि त्रिाभुज सवा±गसम हैं तो उन्हें सांकेतिक रूप में लिख्िाए । Δ।ठब् Δक्म्थ् ;ंद्ध ।ठ त्र 7 बउए ठब् त्र 5 बउए ∠ठ त्र 50° क्म् त्र 5 बउए म्थ् त्र 7 बउए ∠म् त्र 50° ;इद्ध ।ठ त्र 4ण्5 बउए ।ब् त्र 4 बउए ∠। त्र 60° क्म् त्र 4 बउए थ्क् त्र 4ण्5 बउए ∠क् त्र 55° ;बद्ध ठब् त्र 6 बउए ।ब् त्र 4 बउए ∠ठ त्र 35° क्थ् त्र 4 बउए म्थ् त्र 6 बउए ∠म् त्र 35° ;यह हमेशा बहुत उपयोगी होगा कि पहले एक खाका ;कच्चीद्ध आकृति को बनाकर उनकी मापों को अंकित कर दिया जाए और उसके बाद प्रश्न को देखा जाएद्ध। हल ;ंद्ध यहाँ, ।ठ त्र म्थ् ; त्र 7 बउद्धए ठब् त्र क्म् ; त्र 5 बउद्ध और अंतगर्त ∠ठ त्र अंतगर्त ∠म् ; त्र 50°द्धण् आकृति 7ण्21आकृति 7ण्20 इस प्रकार ए । ↔ थ् ठ ↔ म् और ब् ↔ क्ण् अतःए Δ।ठब् ≅Δथ्म्क् ;ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् के अंतगर्तद्ध ;आकृति 7ण्20द्ध ;इद्ध यहाँए ।ठ त्र थ्क् और ।ब् त्र क्म् है ;आकृति 7ण्21द्ध। परंतु अंतगर्त ∠। ≠ अंतगर्त ∠क्य अतः हम नहीं कह सकते हैं कि त्रिाभुज सवा±गसम हैं । ;बद्ध यहाँए ठब् त्र म्थ्ए ।ब् त्र क्थ् और ∠ठ त्र ∠म्ण् परंतु ∠ठ भुजाओं।ब् और ठब् का अंतगर्त कोण नहीं है । 4बइसी प्रकारए ∠म् भुजाओं म्थ् और क्थ् का अंतगर्त कोण नहीं है । अतः यहाँ पर ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् का उपयोग नहीं कर सकते म् थ् हैं और हम यह निष्कषर् नहीं निकाल सकते हैं कि दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं अथवा नहीं । 6बउ आकृति 7ण्22 ।उदाहरण 5 आकृति 7ण्23 मेंए ।ठ त्र ।ब् है और ।क्ए ∠ठ।ब् का समद्विभाजक है । ;पद्ध त्रिाभुज ।क्ठ और ।क्ब् में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए । ;पपद्ध क्या Δ।क्ठ ≅Δ।क्ब् घ् कारण दीजिए । ;पपपद्ध क्या ∠ठ त्र ∠ब् घ् कारण दीजिए । हल ठ क् ;पद्ध बराबर भागों के तीन युग्म निम्न हैं: आकृति 7ण्23।ठ त्र ।ब् ;दिया गया हैद्ध ∠ठ।क् त्र ∠ब्।क् ;।क्ए ∠ठ।ब् को समद्विभाजित करता हैद्धऔर ।क् त्र ।क् ;उभयनिष्ठद्ध ;पपद्ध हाँए Δ।क्ठ ≅Δ।क्ब् ;ै।ै सवा±गसमता प्रतिबंध् के अंतगर्तद्ध ;पपपद्ध ∠ठ त्र ∠ब् ;सवा±गसम त्रिाभुजों के संगत भागद्ध ।ै। खेल क्या आप अप्पू के त्रिाभुज को बना सकते हैं, यदि आप जानते हैं: ;पद्ध इसके केवल एक कोण को ? ;पपद्ध इसके केवल दो कोणों को ? ;पपपद्ध दो कोणों और कोइर् एक भुजा को ? ;पअद्ध दो कोण ओर उनके बीच की भुजा को ? उपरोक्त प्रश्नों के हल निकालने के प्रयास हमें निम्न प्रतिबंध् से अवगत कराते हैं । ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध्ः यदि एक सुमेलन में, एक त्रिाभुज के दो कोण और उनके अंतगर्त भुजा, किसी दूसरे त्रिाभुज के दो संगत कोणों और अंतगर्त भुजा के बराबर हो, तो वे त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं । उदाहरण 6 ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध् का उपयोग करके Δ।ठब् ≅Δफत्च् स्थापित करना है यदि यह दिया गया है कि ठब् त्र त्च् ।इस सवा±गसमता को स्थापित करने के लिए अन्य किन तथ्यों की आवश्यकता है ? हल ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध् के लिए हमें दो दिए कोणों के साथ अंतगर्त भुजाओं ठब् और त्च् की आवश्यकता है। अतः अन्य आवश्यक तथ्य निम्न हैंः ∠ठ त्र ∠त् और ∠ब् त्र ∠च् उदाहरण 7 आकृति 7ण्26 में, क्या आप ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध् का उपयोग करके यह निष्कषर् निकाल सकते हैं कि Δ।व्ब् ≅Δठव्क् है ? हल दो त्रिाभुजों।व्ब् और ठव्क् में, ∠ब् त्र ∠क् ;प्रत्येक 70°द्ध और ∠।व्ब् त्र ∠ठव्क् त्र 30° ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध अतः ∠। त्र 180° दृ ;70° ़ 30°द्ध त्र 80° ;त्रिाभुज के कोणों का योग गुणध्मर् का प्रयोगद्ध इसी प्रकार ∠ठ त्र 180° दृ ;70° ़ 30°द्ध त्र 80° अतः हमारे पास, ∠। त्र ∠ठए ।ब् त्र ठक् और ∠ब् त्र ∠क् है । अब, ∠। और ∠ब् के अंतगर्त भुजा ।ब् तथा ∠ठ और ∠क् के अंतगर्त भुजा ठक् है । अतः ।ै। सवा±गसमता प्रतिबंध् से, Δ।व्ब् ≅Δठव्क्ण् टिप्पणी यदि एक त्रिाभुज के दो कोण दिए हुए हों तो आप त्रिाभुज के तीसरे कोण को हमेशा ज्ञात कर सकते हैं । अतः जब एक त्रिाभुज के दो कोण और एक भुजा किसी दूसरे त्रिाभुज के दो संगत कोणों और एक भुजा के बराबर हो, तब आप इसे ‘दो कोणों और अंतगर्त भुजा’ वाली सवा±गसमता में रूपांतरित कर सकते हैं और तब सवा±गसमता प्रतिबंध् का उपयोग कर सकते हैं । 7ण्7 समकोण त्रिाभुजों में सवा±गसमता दो समकोण त्रिाभुजों की स्िथति में सवा±गसमता को यथायोग्य विशेष ध्यान देना होता है । ऐसे त्रिाभुजों में, दो समकोण पहले ही बराबर होते हैं । अतः सवा±गसमता प्रतिबंध् आसान हो जाता है । क्या आप एक Δ।ठब् बना सकते हैं जिसमें∠ठ त्र 90° हो ;आकृति 7.29 में दिखाया गयाद्ध यदिः;पद्ध केवल भुजा ठब् ज्ञात हो ? ;पपद्ध केवल ∠ब् का पता हो? ;पपपद्ध ∠। और ∠ब् की जानकारी हो ? ;पअद्ध भुजा ।ठ और ठब् की जानकारी हो ? ;अद्ध कणर् ।ब् और।ठ या ठब् में से एक भुजा की जानकारी हो ?आकृति 7ण्29 इनकी खाका आकृतियांँ बनाने का प्रयास कीजिए । आप देखेंगे कि ;पअद्ध और ;अद्ध त्रिाभुज बनाने में आपकी सहायता करते हैं । परंतु स्िथति ;पअद्ध साधरणतया ै।ै प्रतिबंध् ही है । स्िथति ;अद्ध वुफछ नयी है । यह निम्न प्रतिबंध् की ओर अग्रसर करता है । ;पपद्ध यहाँए ∠। त्र ∠फ;त्र 90ह्द्ध और भुजा ।ब् त्र भुजा च्फ ; त्र 5 बउद्ध लेकिन कणर् ठब् ≠कणर् च्त् ख्आकृति 7ण्30 ;पपद्ध, अतः त्रिाभुज सवा±गसम नहीं हैं । उदाहरण 9 आकृति7ण्31में, क्। ⊥।ठए ब्ठ ⊥।ठ और ।ब् त्र ठक् है । ;ंद्ध Δ।ठब् और Δक्।ठ में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए । थ्पह 7ण्31 ;इद्ध निम्न में कौन - सा कथन सत्य है? ;पद्ध Δ।ठब् ≅Δठ।क् ;पपद्ध Δ।ठब् ≅Δ।ठक् हल बराबर भागों के तीन युग्म ये हैंः ∠।ठब् त्र ∠ठ।क् ;त्र 90ह्द्ध ।ब् त्र ठक् ;दिया गया हैद्ध ।ठ त्र ठ। ;उभयनिष्ठ भुजाद्ध अतः Δ।ठब् ≅Δठ।क् ;त्भ्ै सवा±गसमता प्रतिबंध् सेद्ध इसलिए कथन ;पद्ध सत्य है। कथन ;पपद्ध सत्य नहीं है क्योंकि शीषो± में सुमेलन सही नहीं है । अब हम अभी तक देखे गए प्रतिबंधें पर आधरित वुफछ उदाहरणों और प्रश्नों को देखेंगे । । क्1ण् निम्न में आप कौन से सवा±गसम प्रतिबंधें का प्रयोग करेंगे ? ;ंद्ध दिया है रू ।ब् त्र क्थ्ए ।ठ त्र क्म्ए ठब् त्र म्थ् इसलिए, Δ।ठब् ≅Δक्म्थ् ठ ;इद्ध दिया है रू र्ग् त्र त्च्ए त्फ त्र र्ल् त् ∠च्त्फ त्र ∠ग्र्ल् इसलिए, Δच्फत् ≅Δग्ल्र् च् ग् ;बद्ध दिया है रू ∠डस्छ त्र ∠थ्ळभ् भ्स् ∠छडस् त्र ∠ळथ्भ् छ डस् त्र थ्ळ थ् इसलिए, Δस्डछ ≅Δळथ्भ् ड ळक् ;कद्ध दिया है रू म्ठ त्र क्ठ म् ।म् त्र ठब् ∠। त्र ∠ब् त्र 90° इसलिए, Δ।ठम् ≅Δब्क्ठ ठ ब् 2ण् आप Δ।त्ज् ≅Δच्म्छ दशार्ना चाहते हैं, ;ंद्ध यदि आप ैैै सवा±गसमता प्रतिबंध् का प्रयोग करें तो आपको दशार्ने की आवश्यकता है: ;पद्ध ।त् त्र ;पपद्ध त्ज् त्र ;पपपद्ध ।ज् त्र ;इद्ध यदि यह दिया गया है कि ∠ज् त्र ∠छ और आपको ै।ै प्रतिबंध् का प्रयोग करना है, तो आपको आवश्यकता होगी: ;पद्ध त्ज् त्र और ;पपद्ध च्छ त्र ;बद्ध यदि यह दिया गया है कि ।ज् त्र च्छ और आपको ।ै। प्रतिबंध् का प्रयोग करना है तो आपको आवश्यकता होगी: ;पद्ध घ्त्र ;पपद्ध घ् त्र 3ण् आपको Δ।डच् ≅Δ।डफ दशार्ना है । निम्न चरणों में, रिक्त कारणों को भरिए । क्रम कारण ;पद्ध च्ड त्र फड ;पद्ध ण्ण्ण् ;पपद्ध ∠च्ड। त्र ∠फड। ;पपद्ध ण्ण्ण् ;पपपद्ध ।ड त्र ।ड ;पपपद्ध ण्ण्ण् ;पअद्ध Δ।डच् ≅ Δ।डफ ;पअद्ध ण्ण्ण् 4ण् Δ।ठब् में, ∠। त्र 30° ए ∠ठ त्र 40° और ∠ब् त्र 110° Δच्फत् में, ∠च् त्र 30° ए ∠फ त्र 40° और ∠त् त्र 110° एक विद्याथीर् कहता है कि ।।। सवा±गसमता प्रतिबंध् त्से Δ।ठब् ≅Δच्फत् है। क्या यह कथन सत्य है ? क्यों या क्यों नहीं ? 5ण् आकृति में दो त्रिाभुज ।त्ज् तथा व्ॅछ सवा±गसम । हैं जिनके संगत भागों को अंकित किया गया है । हम छ लिख सकते हैं Δत्।ज् ≅ घ् 6ण् कथनों को पूरा कीजिए: ॅ फ त्च् Δठब्। ≅ घ् Δफत्ै ≅ घ् 7ण् एक वगा±कित शीट पर, बराबर क्षेत्रापफलों वाले दो त्रिाभुजों को इस प्रकार बनाइए कि ;पद्ध त्रिाभुज सवा±गसम हो । ;पपद्ध त्रिाभुज सवा±गसम न हो । आप उनके परिमाप के बारे क्या कह सकते हैं ? 8ण् आकृति में एक सवा±गसम भागों का एक अतिरिक्त युग्म बताइए जिससे Δ।ठब् और Δच्फत् सवा±गसम हो जाएँ । आपने किस प्रतिबंध् का प्रयोग किया ? 9ण् चचार् कीजिए, क्यों ? Δ।ठब् ≅Δथ्म्क्ण् ज्ञानवध्र्क ियाकलाप ;म्दतपबीउमदज ।बजपअपजलद्ध ठ हमने देखा कि अध्यारोपण तल - आकृतियों की सवा±गसमता को जाँचने की एक उपयोगी विध्ि है । हमने रेखाखंडों, कोणों और त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए प्रतिबंधें का वणर्न किया । अब आप इस संकल्पना को बढ़ाकर तल की दूसरी आकृतियों के लिए प्रयत्न कर सकते हैं । 1ण् अलग - अलग माप के वगो± के कट - आउट ;बनजवनजद्ध सोचिए । अध्यारोपण विध्ि का प्रयोग वगो± की सवा±गसमता के लिए प्रतिबंध् ज्ञात करने के लिए कीजिए । कैसे फ्सवा±गसम भागोंय् की संकल्पना सवा±गसम के अंतगर्त उपयोग होती है ? क्या यहाँ संगत भुजाएँ हैं ? क्या यहाँ संगत विकणर् हैं ? 2ण् यदि आप वृत्त लेते हैं तो क्या होता है ? दो वृत्तों की सवा±गसमता के लिए प्रतिबंध् क्या है ? क्या, आप पिफर अध्यारोपण विध्ि का प्रयोग कर सकते हैं, पता लगाइए । 3ण् इस संकल्पना को बढ़ाकर तल की दूसरी आकृतियाँ, जैसे समषट्भुज इत्यादि के लिए प्रयत्न कीजिए । 4ण् एक त्रिाभुज की दो सवा±गसम प्रतिलिपियाँ लीजिए । कागज को मोड़कर पता लगाइए कि क्या उनके शीषर्लंब बराबर हैं । क्या उनकी माियकाएँ समान हैं ? आप उनके परिमाप तथा क्षेत्रापफलों के बारे में क्या कह सकते हैं ? हमने क्या चचार् की ? 1ण् सवा±गसम वस्तुएँ एक दूसरे की प्रतिलिपियाँ होती हैं । 2ण् अध्यारोपण विध्ि तल - आकृतियों की सवा±गसमता की जाँच करती है । 3ण् दो तल आकृतियाँ, मानाए थ्और थ्सवा±गसम होती हैं यदि थ्की अक्स - प्रतिलिपि थ्ण् को12 12पूणर्तया ढक लेती है । हम इसे थ्≅ थ्के रूप में लिखते हैं ।1 2 4ण् दो रेखाखंड, माना, ।ठ और ब्क् ए सवा±गसम होते हैं यदि उनकी लंबाइयाँ बराबर हों । हम इसे ।ठ ब्क् के रूप में लिखते हैं । यद्यपि, साधरणतया इसे ।ठ त्र ब्क् लिखते हैं । 5ण् दो कोण, माना, ∠।ठब् और ∠च्फत्ए सवा±गसम होते हैं यदि उनकी माप बराबर हो । हम इसे ∠।ठब् ≅∠च्फत् या उ∠।ठब् त्र उ∠च्फत्ण् के रूप में लिखते हैं । यद्यपि, अभ्यास में इसे साधरणतया ∠।ठब् त्र ∠च्फत् के रूप में लिखते हैं । 6ण् दो त्रिाभुजों की ैैै सवा±गसमताः एक दिए हुए सुमेलन के अंतगर्त, दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं यदि एक त्रिाभुज की तीनों भुजाएँ किसी दूसरे त्रिाभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हो । 7ण् दो त्रिाभुजों की ै।ै सवा±गसमताः एक दिए हुए सुमेलन के अंतगर्त, दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं यदि एक त्रिाभुज की दो भुजाएँ और उनके अंतगर्त कोण, दूसरे त्रिाभुज की दो संगत भुजाओं और उनके अंतगर्त कोण के बराबर हो । 8ण् दो त्रिाभुजों की ।ै। सवा±गसमताः एक दिए हुए सुमेलन के अंतगर्त, दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं यदि एक त्रिाभुज के दो कोण और उनकी अंतगर्त भुजा किसी दूसरे त्रिाभुज के दो संगत कोणों और अंतगर्त भुजा के बराबर हो । 9ण् दो त्रिाभुजों की त्भ्ै सवा±गसमताः एक दिए हुए सुमेलन के अंतगर्त, दो समकोण त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं यदि किसी समकोण त्रिाभुज का कणर् और एक भुजा किसी दूसरे समकोण त्रिाभुज के कणर् और संगत भुजा के बराबर हो । 10ण् दो त्रिाभुजों में ।।। सवा±गसमता नहीं होती है। यह आवश्यक नहीं है कि बराबर संगत कोणों के दो त्रिाभुज सवा±गसम हों । ऐसे सुमेलनों में, इनमें से एक, दूसरे की बढ़ी हुइर् प्रतिलिपि हो सकती है । ;वे सवा±गसम होंगे यदि वे एक दूसरे की एक जैसी प्रतिलिपि होद्ध।

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अध्याय 7


त्रिभुजों की सर्वांगसमता


7.1 भूमिका

अब आप एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण ज्यामितीय संकल्पना ‘सर्वांगसमता’ को सीखने जा रहे हैं । विशेषकर, आप त्रिभुजों की सर्वांगसमता के बारे में बहुत कुछ पढ़ेंगे ।

सर्वांगसमता को समझने के लिए, हम कुछ क्रियाकलाप करेंगे ।

एक ही प्रकार (denomination) की दो टिकटे लीजिए (आकृति 7.1)। एक टिकट को दूसरी पर रखिए । आप क्या देखते हैं ?

1645.png

आकृति 7.1

एक टिकट दूसरे को पूर्णतया ढक लेती है । इसका अर्थ यह है कि दोनों टिकटें एक ही आकार और एक ही माप की हैं । एेसी वस्तुएँ सर्वांगसम कहलाती हैं । आपके द्वारा प्रयोग की गई दोनों टिकटें एक दूसरे के सर्वांगसम हैं । सर्वांगसम वस्तुएँ एक दूसरे की हू-ब-हू प्रतिलिपियाँ होती हैं ।

क्या अब, आप, बता सकते हैं कि निम्न वस्तुएँ सर्वांगसम हैं या नहीं?

1. एक ही कंपनी के शेविंग ब्लेड [आकृति 7.2 (i)]

2. एक ही लेटर पैड की शीटें [आकृति 7.2 (ii)]

3. एक ही पैकट के बिस्कुट [आकृति 7.2 (iii)]

4. एक ही साँचे से बने खिलौने [आकृति 7.2 (iv)]

दो वस्तुओं के सर्वांगसम होने के संबंध को सर्वांगसमता कहते हैं । इस अध्याय में, हम केवल तल में बनी आकृतियों की चर्चा करेंगे यद्यपि सर्वांगसमता एक साधारण विषय है जिसका उपयोग हम त्रिआयामी (3-Dimensional) आकारों के लिए भी करते हैं । अब हम तल में बनी एेसी आकृतियों की सर्वांगसमता का विधिपूर्वक अर्थ जानने की कोशिश करेंगे जिन्हें हम पहल से जानते हैं ।


7.2 तल-आकृतियों की सर्वांगसमता

यहाँ दी गई दो आकृतियों को देखिए (आकृति 7.3)। क्या ये आकृतियाँ सर्वांगसम हैं ?

1654.png
1664.png
1673.png
1683.png

आकृति 7.3

आप अध्यारोपण विधि का प्रयोग कर सकते हैं । इनमें से एक का अक्स (trace-copy) बनाकर दूसरी आकृति पर रखते हैं । यदि ये आकृतियाँ एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेती हैं तो वे सर्वांगसम कहलाती हैं । दूसरे ढंग से, आप इनमें से एक आकृति को काट कर उसे दूसरी आकृति पर रख सकते हैं । लेकिन सावधान ! जिस आकृति को आपने काटा है (या अक्स बनाया है) उसे मोड़ने या फैलाने की आपको छूट नहीं है ।

आकृति 7.3 में, यदि आकृति F1, आकृति F2 के सर्वांगसम है तो हम लिखेंगे F1 F2.

7.3 रेखाखंडों में सर्वांगसमता

दो रेखाखंड कब सर्वांगसम होते हैं ? नीचे दिए गए रेखाखंडों के दो युग्मों को देखिए ।

(i) (ii)

आकृति 7.4

प्रत्येक रेखाखंड युग्म के लिए अक्स प्रतिलिपि बनाकर अध्यारोपण विधि का प्रयोग कीजिए [आकृति 7.4(i)] 3184.pngका अक्स बनाकर इसे 3192.pngपर रखें । आप देखेंगे कि 3200.png 3204.pngको पूर्णतया ढक लेता है और C, A पर तथा D, B पर स्थित है । अतः हम कह सकते हैं कि दोनों रेखाखंड सर्वांगसम हैं और हम लिखेंगे 3208.png.


आकृति 7.4 (ii) के रेखाखंड युग्म के लिए इस क्रियाकलाप को दोहराइए । आप क्या देखते हैं ? ये रेखाखंड सर्वांगसम नहीं हैं । यह आपने कैसे जाना ? क्योंकि जब एक रेखाखंड को दूसरे रेखाखंड पर रखा जाता है तो वे एक दूसरे को पूर्णतया नहीं ढकते हैं ।

आकृति 7.4 (i) में आपने देखा होगा कि रेखाखंडों के युग्म का एक दूसरे के साथ सुमेलन (matching) होता है क्योंकि उनकी लंबाई बराबर है परंतु आकृति 7.4(ii) में एेसी स्थिति नहीं है ।

यदि दो रेखाखंडों की लंबाई समान (यानी बराबर) है तो वे सर्वांगसम होते हैं। यदि दो रेखाखंड सर्वांगसम हैं तो उनकी लंबाइयाँ समान होती हैं ।

ऊपर दिए गए तथ्य को ध्यान में रखते हुए, जब दो रेखाखंड सर्वांगसम होते हैं तो हम कहते हैं कि रेखाखंड बराबर हैं; और हम लिखते हैं AB = CD। (हमारा वास्तव में अर्थ है कि 3220.png 3224.png)।

7.4 कोणों की सर्वांगसमता

यहाँ दिए गए चार कोणों को देखिए (आकृति 7.5) ः

(i) (ii) (iii) (iv)

आकृति 7.5

PQR का अक्स बनाइए और इससे ABC को ढकने का प्रयास कीजिए । इसके लिए, सबसे पहले Q को B पर और 3228.png को 3239.png पर रखिए । 3250.png कहाँ पर आएगा ? यह 3262.png के ऊपर होगा ।

इस प्रकार, PQR का सुमेलन ABC से होता है ।

इस सुमेलन में ABC और PQR सर्वांगसम हैं ।

(ध्यान दीजिए कि इन दोनों सर्वांगसम कोणों की माप समान है)

हम लिखते हैं ABC PQR (i)

या mABC = m PQR (इस स्थिति में माप 40° है)

अब आप LMN का अक्स बनाइए और इसे ABC पर रखिए । M को B पर तथा 3271.png को 3283.pngपर रखिए । क्या 3294.png, 3304.pngपर आता है ? नहीं, इस स्थिति में एेसा नहीं होता है । आपने देखा कि ABC और LMN एक दूसरे को पूर्णतया नहीं ढकते हैं । इसलिए वे सर्वांगसम नहीं हैं ।

(ध्यान दीजिए, इस स्थिति में ABC और LMN की माप बराबर नहीं है)

XYZ और ABC के बारे में आप क्या कहेंगे । आकृति 7.5(iv)में किरण 3315.png और 3326.pngक्रमशः किरण 3337.png और 3348.png से अधिक लंबी प्रतीत होती है । इसके आधार पर आप सोच सकते हैं कि ABC, XYZ से छोटा है । परंतु याद रखिए कि आकृति में किरण केवल दिशा को ही प्रदर्शित करती है न कि लंबाई को। आप देखेंगे कि ये दोनों कोण भी सर्वांगसम हैं ।

1743.png
1733.png

हम लिखते हैं ABC XYZ (ii)

या mABC = mXYZ

(i) और (ii) को ध्यान में रखते हुए, हम यह भी लिख सकते हैं ः

ABC PQR XYZ

यदि दो कोणों की माप समान हो तो वे सर्वांगसम होते हैं । यदि दो कोण सर्वांगसम हैं तो उनकी माप भी समान होती है।

कोणों की सर्वांगसमता पूर्णतया उनके मापों की समानता के ऊपर निर्भर करती है जैसाकि रेखाखंडों की स्थिति में बताया गया है । इस प्रकार, यह कहना कि दो कोण सर्वांगसम हैं, हम कई बार केवल यही कहते हैं कि कोण बराबर हैं; और हम लिखते हैंः

ABC = PQR (अर्थात ABC PQR).

7.5 त्रिभुजों की सर्वांगसमता

हमने देखा कि दो रेखाखंड सर्वांगसम होते हैं जब उनमें से एक, दूसरे की प्रतिलिपि हो । इसी प्रकार, दो कोण सर्वांगसम होते हैं यदि उनमें से एक, दूसरे की प्रतिलिपि हो । हम इस संकल्पना को अब त्रिभुजों के लिए भी देखते हैं ।

दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि वे एक दूसरे की प्रतिलिपियाँ हों और एक को दूसरे के ऊपर रखे जाने पर, वे एक दूसरे को आपस में पूर्णतया ढक लें ।

(i) (ii)

आकृति 7.6

ABC और PQR समान आकार एवं समान आमाप के हैं । ये सर्वांगसम हैं । अतः इनको निम्नलिखित प्रकार से दर्शाएँगे ः

ABC PQR.

इसका अर्थ यह है कि यदि आप PQR को ABC पर रखते हैं, तो P, A के ऊपर; Q, B के ऊपर और R, C के ऊपर आता है । इसी प्रकार 3353.png, 3362.png के अनुदिश; 3374.png,3383.pngके अनुदिश तथा 3391.png, 3400.png के अनुदिश आते हैं । यदि दिए गए सुमेलन (correspondence) में दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं तो उनके संगत भाग (अर्थात् कोण और भुजाएँ) समान होते हैं । अतः इन दोनों सर्वांगसम त्रिभुजों में, हमें प्राप्त होता हैः

संगत शीर्ष : A और P, B और Q, C और R.

संगत भुजाएँ : 3407.pngऔर 3414.png, 3426.png और 3430.png, 3434.png और 3440.png.

संगत कोण : A और P, B और Q, C और R.

1753.png

यदि आप PQR को ABC पर इस प्रकार से आरोपित करते हैं कि P, B के ऊपर रखेें तो क्या दूसरे शीर्ष भी यथायोग्य सुमेलित होंगे ? एेसा होना आवश्यक नहीं है ? आप त्रिभुजों की अक्स प्रतिलिपियाँ लीजिए और यह ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए । यह दर्शाता है कि त्रिभुजों की सर्वांगसमता के बारे में चर्चा करते समय न केवल कोणों की माप और भुजाओं की लंबाइयाँ महत्त्व रखती हैं, परंतु शीर्षों का सुमेलन भी उतना ही महत्त्व रखता है । ऊपर दी गई स्थिति में, सुमेलन हैः

A P, B Q, C R

हम इसे, इस प्रकार भी लिख सकते हैं ABC PQR

उदाहरण 1 यदि ABC और PQR सुमेलन ABC RQP के अंतर्गत सर्वांगसम हों, तो ABC के वे भाग लिखिए जो निम्न के संगत हों

(i) P (ii) Q (iii) 3445.png

हल इस सर्वांगसमता को अच्छे ढंग से समझने के लिए, आइए हम एक आकृति (आकृति 7.7) का प्रयोग करते हैं ।


यहाँ सुमेलन ABC RQP है । अर्थात् A R ; B Q; C P.

अतः (i) 3454.png 3462.png (ii) Q ↔ ∠B (iii) 3467.png 3472.png

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

जब दो त्रिभुज, मान लीजिए ABC और PQR, दिए हुए हों तो उनमें आपस में कुल छः संभव सुमेलन होते हैं । उनमें से दो सुमेलन ये हैंः

(i) ABC PQR और (ii) ABC QRP

दो त्रिभुजों के कट-आउट (cutouts) का प्रयोग करके अन्य चार सुमेलनों को ज्ञात कीजिए । क्या ये सभी सुमेलन सर्वांगसमता दर्शाते हैं ? इसके बारे में विचार कीजिए ।

1871.png

आकृति 7.8

अप्पू द्वारा निर्मित त्रिभुज

प्रश्नावली 7.1

1. निम्न कथनों को पूरा कीजिए ः

(a) दो रेखाखंड सर्वांगसम होते हैं यदि ___________।

(b) दो सर्वांगसम कोणों में से एक की माप 70° है, दूसरे कोण की माप ___________ है।

(c) जब हम A = B लिखते हैं, हमारा वास्तव में अर्थ होता है ___________।

2. वास्तविक जीवन से संबंधित सर्वांगसम आकारों के कोई दो उदाहरण दीजिए ।

3. यदि सुमेलन ABC FED के अंतर्गत ABC FED तो त्रिभुजों के सभी संगत सर्वांगसम भागों को लिखिए ।

4. यदि DEF BCA हो, तो BCA के उन भागों को लिखिए जो निम्न के संगत होः

(i) E (ii) 3476.png (iii) F (iv) 3484.png

7.6 त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबंध

हम अपने दैनिक जीवन में त्रिभुजाकार संरचनाओं और नमूनों का प्रायः प्रयोग करते हैं । अतः यह ज्ञात करना लाभकारी होगा कि दो त्रिभुजाकार आकृतियाँ कब सर्वांगसम होंगी । यदि आपकी नोटबुक में दो त्रिभुज बने हैं और आप प्रमाणित करना चाहते हैं कि क्या वे सर्वांगसम हैं तब आप हर बार उनमें से एक को काटकर दूसरे पर रखने (आरोपण) वाली विधि का प्रयोग नहीं कर सकते हैं । इसके बदले यदि हम सर्वांगसमता को सटीक मापों द्वारा निश्चित कर सकें तो यह अधिक उपयोगी होगा। चलिए एेसा करने का प्रयत्न करें।

एक खेल

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1832.png

अप्पू और टिप्पू एक खेल खेलते हैं । अप्पू ने एक त्रिभुज ABC(आकृति 7.8) बनाया । उसने प्रत्येक भुजा की लंबाई और इसके प्रत्येक कोण की माप को ध्यान में रख लिया । टिप्पू ने यह सब ध्यान से नहीं देखा । अप्पू, टिप्पू को चुनौती देता है कि क्या वह कुछ दी सूचनाओं के आधार पर उसके ABC की प्रतिलिपि बना सकता है? अप्पू द्वारा दी गई सूचनाओं का प्रयोग करके टिप्पू ABC के सर्वांगसम एक त्रिभुज बनाने का प्रयास करता है । खेल आरंभ होता है । सावधानी से उनके वार्तालाप और उनके खेल का अवलोकन कीजिए ।

SSS खेल

अप्पू ः ABC की एक भुजा 5.5 cm है ।

टिप्पू ः इस सूचना से, मैं अनेक त्रिभुजों को बना सकता हूँ (आकृति 7.9)। लेकिन यह आवश्यक नहीं कि वे ABC की प्रतिलिपि हों। मैं जो त्रिभुज बनाता हूँ वह त्रिभुज अधिक कोण ( obtuse angled) या समकोण ( Right angled) या न्यून कोण ( acute angled) हो सकता है । यहाँ पर कुछ उदाहरण दिए गए हैं ः

1842.png
1851.png
1861.png
1890.png

आकृति 7.11

मैंने अन्य भुजाओं के लिए स्वेच्छा से लंबाइयों का प्रयोग किया । इससे मुझे 5.5 cm लंबाई के आधार वाले कई त्रिभुज मिलते हैं ।

अतः दी गई केवल एक ही भुजा की लंबाई से ABC की प्रतिलिपि बनाना, मेरे लिए संभव नहीं।

अप्पू ः अच्छा । मैं तुम्हें एक और भुजा की लंबाई दूँगा । ABC की दो भुजाओं की लंबाइयाँ 5.5 cm और 3.4 cm हैं।

टिप्पू ः यह सूचना भी त्रिभुज बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है । मैं इस दी गई सूचना से बहुत से त्रिभुज बना सकता हूँ जो ABC की प्रतिलिपि नहीं होंगे ।

यहाँ पर कुछ त्रिभुज दिए गए हैं जो मेरी बात का समर्थन करते हैं,

आपके त्रिभुज जैसी प्रतिलिपि कोई भी नहीं बना सकता यदि केवल दो भुजाओं की लंबाइयाँ दी गई हों ।

अप्पू ः ठीक है ! मैं तुम्हें त्रिभुज की तीनों भुजाओं की माप देता हूँ । ABC में, मेरे पास AB = 5 cm, BC = 5.5 cm और AC = 3.4 cm है ।

टिप्पू ः मैं सोचता हूँ कि त्रिभुज बनाना अब संभव होना चाहिए । मैं अब कोशिश करता हूँ । सबसे पहले मैं एक खाका (कच्ची) आकृति बनाता हूँ जिससे मैं आसानी से लंबाइयाँ याद रख सकूँ । मैं 5.5 cm 3493.png खींचता हूँ ।

1911.png

आकृति 7.12

1921.png

'B' को केंद्र लेकर, मैं 5 cm त्रिज्या वाली एक चाप खींचता हूँ । बिंदु ‘A’ इस चाप पर कहीं स्थित होना चाहिए । 'C' को केंद्र लेकर 3.4 cm त्रिज्या वाली एक चाप खींचता हूँ । बिंदु ‘A’ इस चाप पर भी होना चाहिए । अर्थात्, ‘A’ बिंदु खींची गई दोनों चापों पर स्थित है । अर्थात् ‘A’ दोनों चापों का प्रतिच्छेदी बिंदु है ।

मैं अब बिंदुओं A, B और C की स्थिति जानता हूँ । अहा! मैं इन्हें मिलाकर ABC प्राप्त कर सकता हूँ । (आकृति 7.11)

अप्पू ः बहुत अच्छा ! अतः एक दिए हुए ABC की प्रतिलिपि बनाने के लिए (अर्थात् ABC के सर्वांगसम) हमें तीनों भुजाओं की लंबाइयों की आवश्यकता होती है । क्या हम इस स्थिति को भुजा-भुजा-भुजा (side-side-side) प्रतिबंध कह सकेंगे?

टिप्पू ः क्यों न हम इसे संक्षेप में, SSS प्रतिबंध कहें ।

SSS सर्वांगसमता प्रतिबंध

यदि दिए गए सुमेलन के अंतर्गत, एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ क्रमशः किसी दूसरे त्रिभुज की संगत भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं ।

उदाहरण 2 त्रिभुज ABC और PQR में AB = 3.5 cm, BC = 7.1 cm, AC = 5 cm,
PQ = 7.1 cm,
QR = 5 cm, और PR = 3.5 cm है (आकृति 7.1)। जाँचिए कि क्या दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं या नहीं ? यदि हाँ, तो सुमेलन संबंध को सांकेतिक रूप में लिखिए ।

हल यहाँ, AB = RP (= 3.5 cm),

BC = PQ ( = 7.1 cm)

AC = QR (= 5 cm)


आकृति 7.14

2. आकृति 7.15 में AB = AC और D, 3566.png का मध्य बिंदु है ।

(i) ADB और ADC में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए ।

(ii) क्या ADB ADC है? कारण दीजिए ।

(iii) क्या B = C है? क्यों?

3. आकृति 7.16 में, AC = BD और AD = BC है । निम्नलिखित कथनों में कौन-सा कथन सत्य है?

(i) ABC ABD (ii) ABC BAD

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC (आकृति 7.17) है। ABC की एक अक्स प्रतिलिपि लीजिए और इसे भी ABC का नाम दीजिए

(i) ABC और ACB में बराबर भागों के तीन युग्म बताइए ।

(ii) क्या ABC ACB है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?

(iii) क्या B = C है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?

अप्पू और टिप्पू अब पिछले खेल में कुछ परिवर्तन करके पुनः खेलते हैं ।


ज्ञानवर्धक क्रियाकलाप (Enrichment Activity)

हमने देखा कि अध्यारोपण तल-आकृतियों की सर्वांगसमता को जाँचने की एक उपयोगी विधि है । हमने रेखाखंडों, कोणों और त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबंधों का वर्णन किया । अब आप इस संकल्पना को बढ़ाकर तल की दूसरी आकृतियों के लिए प्रयत्न कर सकते हैं ।

1. अलग-अलग माप के वर्गों के कट-आउट (cutout) सोचिए । अध्यारोपण विधि का प्रयोग वर्गों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबंध ज्ञात करने के लिए कीजिए । कैसे "सर्वांगसम भागों" की संकल्पना सर्वांगसम के अंतर्गत उपयोग होती है ? क्या यहाँ संगत भुजाएँ हैं ? क्या यहाँ संगत विकर्ण हैं ?

2. यदि आप वृत्त लेते हैं तो क्या होता है ? दो वृत्तों की सर्वांगसमता के लिए प्रतिबंध क्या है ? क्या, आप फिर अध्यारोपण विधि का प्रयोग कर सकते हैं, पता लगाइए ।

3. इस संकल्पना को बढ़ाकर तल की दूसरी आकृतियाँ, जैसे समषट्भुज इत्यादि के लिए प्रयत्न कीजिए ।

4. एक त्रिभुज की दो सर्वांगसम प्रतिलिपियाँ लीजिए । कागज को मोड़कर पता लगाइए कि क्या उनके शीर्षलंब बराबर हैं । क्या उनकी माध्यिकाएँ समान हैं ? आप उनके परिमाप तथा क्षेत्रफलों के बारे में क्या कह सकते हैं ?

हमने क्या चर्चा की?

1. सर्वांगसम वस्तुएँ एक दूसरे की प्रतिलिपियाँ होती हैं ।

2. अध्यारोपण विधि तल-आकृतियों की सर्वांगसमता की जाँच करती है ।

3. दो तल आकृतियाँ, माना, F1 और F2 सर्वांगसम होती हैं यदि F1 की अक्स-प्रतिलिपि F2. को पूर्णतया ढक लेती है । हम इसे F1  F2 के रूप में लिखते हैं ।

4. दो रेखाखंड, माना, 3623.png और 3628.png, सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी लंबाइयाँ बराबर हों । हम इसे 3633.pngके रूप में लिखते हैं । यद्यपि, साधारणतया इसे 3638.png = 3643.pngलिखते हैं ।

5. दो कोण, माना, ABC और PQR, सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी माप बराबर हो । हम इसे ABC  PQR याmABC = mPQR. के रूप में लिखते हैं । यद्यपि, अभ्यास में इसे साधारणतया ABC = PQR के रूप में लिखते हैं ।

6. दो त्रिभुजों की SSS सर्वांगसमताः

एक दिए हुए सुमेलन के अंतर्गत, दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ किसी दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हो ।

7. दो त्रिभुजों की SAS सर्वांगसमताः

एक दिए हुए सुमेलन के अंतर्गत, दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके अंतर्गत कोण, दूसरे त्रिभुज की दो संगत भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हो ।

8. दो त्रिभुजों की ASA सर्वांगसमताः

एक दिए हुए सुमेलन के अंतर्गत, दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा किसी दूसरे त्रिभुज के दो संगत कोणों और अंतर्गत भुजा के बराबर हो ।

9. दो त्रिभुजों की RHS सर्वांगसमताः

एक दिए हुए सुमेलन के अंतर्गत, दो समकोण त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि किसी समकोण त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा किसी दूसरे समकोण त्रिभुज के कर्ण और संगत भुजा के बराबर हो ।

10. दो त्रिभुजों में AAA सर्वांगसमता नहीं होती है।

यह आवश्यक नहीं है कि बराबर संगत कोणों के दो त्रिभुज सर्वांगसम हों । एेसे सुमेलनों में, इनमें से एक, दूसरे की बढ़ी हुई प्रतिलिपि हो सकती है । (वे सर्वांगसम होंगे यदि वे एक दूसरे की एक जैसी प्रतिलिपि हो)।


3163.png



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