अध्याय 9 में हमने यह सीखा है कि सभी जीवों को वायु की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आपने कभी वायु को देखा है? आपने कभी नहीं देखा होगा, लेकिन निश्चय ही वायु की उपस्िथति कइर् तरीकों से अनुभव की होगी। इसेआप तब अनुभव करते हैं जब पेड़ों की पिायाँ खड़खड़ाती हैं या कपड़े सुखाने वाले तार पर लटके कपड़े धीरे - धीरे हिलते हैं। पंखे के चालू होेने पर खुली पुस्तक के पृष्ठ आवाश करने लगते हंै। वायु के बहने के कारण ही आपकी पतंग का उड़ना संभव होता है। क्या आपको अध्याय 5 का ियाकलाप 3 याद है जिसमें आपने रेत और बुरादे को निष्पावन द्वारा अलग किया था? निष्पावन की प्रिया बहती वायु में अिाक प्रभावी होती है। आपने ध्यान दिया होगा कि तूप़फानों के समय वायु बहुत तेश गति से चलती है। कभी - कभी तो यह पेड़ों को भी उखाड़ देती है तथा छतों के ऊपरी हिस्सों को भी उड़ाकर ले जाती है। ियाकलाप 1 आइए, चित्रा 15.2 में दिए गए निदेर्शों के अनुसार हम अपनी एक पिफरकी बनाते हैं। पिफरकी की डंडी को पकडि़ए और उसे एक खुले क्षेत्रा में भ्िान्न - भ्िान्न दिशाओं में रख्िाए। इसे थोड़ा चित्रा 15.2 एक साधरण पिफरकी बनाना है? क्या पिफरकी घूमती है? पिफरकी को कौन घुमाता है? क्या इसे वायु नहीं घुमा रही है? क्या आपने वातसूचक को घूमते हुए देखा है ;चित्रा 15.3द्ध? यह उस दिशा में रुक जाता है जिसमें कि उस स्थान पर वायु चल रही होती है। चित्रा 15.3 वातसूचक 15.1 क्या वायु हमारे चारों ओर हर जगह उपस्िथत है? अपनी मुऋी बंद करें। इसके अंदर क्या है? वुफछ नहीं? इसका पता लगाने के लिए निम्नलिख्िात ियाकलाप कीजिए। ियाकलाप 2 काँच की एक खाली बोतल लीजिए। क्या यह वास्तव में बिल्वुफल खाली है या इसके अंदर वुफछ है? अब इसे उल्टा कीजिए। क्या अब इसके अंदर वुफछ है? चित्रा 15.4 एक खाली बोतल से प्रयोग अब बोतल के खुले मुख को पानी से भरी हुइर् बाल्टी में चित्रा 15.4 के अनुसार डुबोएँ। बोतल को ध्यान से देख्िाए। क्या पानी बोतल के अंदर प्रवेश करता है? अब बोतल को थोड़ा - सा तिरछा कीजिए। क्या अब पानी बोतल में प्रवेश करता है? क्या आप बोतल में से वुफछ बुलबुले बाहर आते देखते हैं या बुदबुदाहट सुनाइर् देती है? क्या अब आप अनुमान लगा सकते हैं कि बोतल के अंदर क्या था?हाँ! आप सही हैंे। यह वायु है जो कि बोतल में उपस्िथत थी। बोतल पूरी तरह से किसी भी प्रकार खाली नहीं थी। वास्तव में इसे उलटने पर भी यह पूरी तरह से वायु से भरी हुइर् थी। इसलिए आप देखते हैं कि जब बोतल उल्टी स्िथति में होती है, पानी बोतल में प्रवेश नहीं करता क्योंकि वायु के निकलने के लिए कोइर् जगह नहीं होती। जब बोतल को तिरछा करते हैं तो वायु बुलबुलों के रूप में बाहर आती है और वायु के निकलने से खाली हुए भाग में पानी भर जाता है। यह ियाकलाप दशार्ता है कि वायु स्थान घेरती है। यह बोतल के पूरे स्थान में भर जाती है। यह हमारे चारों ओर उपस्िथत है। वायु का कोइर् रंग नहीं होता। हम इसके आर - पार देख सकते हंै। यह पारदशीर् होती है। हमारी पृथ्वी वायु की एक पतली परत से घ्िारी हुइर् है। इस परत का विस्तार पृथ्वी की सतह सेकइर् किलोमीटर ऊपर तक है तथा इसे वायुमंडल कहते हैं।पवर्तारोही ऊँचे पवर्तों पर चढ़ते समय आॅक्सीजन का सिलिंडर अपने साथ क्यों ले जाते हैं ;चित्रा 15.5द्ध? चित्रा 15.5 पवर्तारोही अपने साथ आॅक्सीजन का सिलिंडर ले जाते हैं 15.2 वायु किससे बनी है? अठारहवीं शताब्दी तक लोग सोचते थे कि वायु केवल एक ही पदाथर् है। प्रयोगों से यह सि( हो गया है कि वास्तव में ऐसा नहीं है। वायु अनेक गैसों का एक मिश्रण है। यह मिश्रण किस प्रकार का है? आइए, एक - एक करके इस मिश्रण के मुख्य अवयवों के बारे में पता लगाते हैं। जलवाष्प हमने पहले पढ़ा है कि वायु में जलवाष्प विद्यमान होती है। हमने यह भी देखा है कि जब वायु किसी ठंडे पृष्ठ के संपवर्फ में आती है तो इसमें उपस्िथत जलवाष्प ठंडी होेकर संघनित हो जाती है तथा जलकी बूँदें ठंडे पृष्ठ पर दिखाइर् देती हैं। प्रकृति में जलचक्र के लिए वायु में जलवाष्प का उपस्िथत होना अनिवायर् है। आॅक्सीजन ियाकलाप 3 अपने श्िाक्षक की उपस्िथति में दो उथले पात्रों में दोसमान आकार की मोमबिायों को बीचों - बीच लगाइए।अब पात्रों में वुफछ पानी डाल दें। अब मोमबिायाँ जलाएँतथा चित्रा 15.6 के अनुसार प्रत्येक मोमबत्ती के ऊपर विज्ञान चित्रा 15.6 वायु में आॅक्सीजन है एक - एक गिलास उलटकर रख दें। ;एक गिलास दूसरेसे बड़ा होद्ध। ध्यानपूवर्क देख्िाए कि जलती हुइर् मोमबिायों और पानी की सतह को क्या हुआ?क्या मोमबिायाँ जलती रहती हैं या बुझ जाती हैं? क्या गिलासों के अंदर जल का स्तर एक समान रहता है?मोमबत्ती का जलना निश्चय ही वायु के किसी अवयव की उपस्िथति के कारण संभव है। क्या ऐसा नहीं है? क्या भ्िान्न - भ्िान्न लंबाइर् के दो गिलासों से अपने प्रेक्षण में कोइर् अंतर आता है? इसका क्या कारण हो सकता है? जलने की िया केवल आॅक्सीजन की उपस्िथति में ही संभव है। हम देखते हंै कि वायु का एक अवयव आॅक्सीजन है। अब, वायु और इसी कारण उसके आॅक्सीजन अवयव हमारे प्रयोग में लाए गए गिलास में सीमित मात्रा में हैं। जब यह आॅक्सीजनजलती हुइर् मोमबत्ती के द्वारा प्रयोग कर ली जाती हैतो मोमबत्ती अध्िक समय तक नहीं जल पाती है तथावह बुझ जाती है। इसके अतिरिक्त, जैसे ही मोमबत्तीबुझती है, जल ऊपर चढ़ जाता है। तथापि, जल केऊपर उठने की घटना को मोमबत्ती के गलने में प्रयुक्त आॅक्सीजन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। नाइट्रोजन मोमबत्ती के बुझने के बाद भी क्या आपने यह देखा कि वायु का एक बड़ा भाग अब भी गिलास में शेष रह जाता है? यह सूचित करता है कि वायु के वुफछ अवयव जलने में सहायक नहीं होते। वायु का एक हमारे चारों ओर वायु बड़ा भाग ;जो मोमबत्ती के जलने में उपयोग नहीं हुआद्ध नाइट्रोजन कहलाता है। यह वायु का लगभग 4/5वां भाग घेरता है। काबर्न डाइआॅक्साइड एक बंद कमरे में जब कोइर् पदाथर् जल रहा होता है तो शायद आपने घुटन महसूस की होगी। यह घुटन कमरे में काबर्न डाइआॅक्साइड की अध्िक मात्रा एकत्रा होने के कारण हुइर् जो कि लगातार किसी वस्तु के जलने के कारण बनती है। हमारे चारों ओर की वायु का एक छोटा अवयव काबर्न डाइआॅक्साइड होता है। पादप एवं जंतु श्वसन प्रिया में आॅक्सीजन का उपयोग करते हैं और काबर्न डाइआॅक्साइड बनाते हैं। जलने पर आॅक्सीजन का उपयोग कर मुख्यतः काबर्न डाइआॅक्साइड तथा वुफछ अन्य गैसें बनाते हैं। ध्ूल तथा ध्ुआँ ईंध्न तथा पदाथो± के जलने से ध्ुआँ भी उत्पन्न होता है। ध्ुएँ में वुफछ गैसें एवं सूक्ष्म ध्ूल कण होते हैं जो प्रायः हानिकारक होते हैं। इस कारण आप कारखानों में लंबी चिमनियाँ देखते हैं। ये चिमनियाँ हानिकारक ध्ुएँ तथा गैसों को हमारी नाक से तो दूर ले जाती हैं लेकिन आकाश में उड़ते हुए पक्ष्िायों के बिलवुफल नशदीक ले जाती हैं! वायु में ध्ूल के कण सदैव उपस्िथत रहते हैं। ियाकलाप 4 अपने विद्यालय/घर में ध्ूप वाला एक कमरा खोजिए। सारे दरवाशे तथा ख्िाड़कियाँ बंद कर दें तथा पदेर् आदि डालकर कमरे में पूरा अंध्ेरा कर दें। जिस दिशा से सूयर् का प्रकाश आ रहा है, उस ओर के दरवाशे या ख्िाड़की को बिलवुफल थोड़ा - सा खोलें जिससे सूयर् का प्रकाश एक पतली - सी झिरीर् के द्वारा कमरे के अंदर आ सके। अंदर आती हुइर् सूयर् की किरणों को सावधनीपूवर्क देख्िाए। 149 चित्रा 15.7 वायु में ध्ूल के कणों की उपस्िथति का सूयर् के प्रकाश में अवलोकन क्या आप यह देखते हैं कि सूयर् की किरणों में वुफछ छोटे - छोटे चमकीले कण तेशी से घूम रहे हैं ;चित्रा 15.7द्ध? ये कण क्या हैं?अत्यध्िक सदिर्यों में आपने पेड़ की पिायों से छनकर आते हुए सूयर् के प्रकाश किरणपुंज को देखा होगा, जिसमें ध्ूल - कण नृत्य करते प्रतीत होते हैं। यह दशार्ता है कि वायु में धूल के कण भी उपस्िथत होते हैं। वायु में ध्ूल के कण समय तथा स्थान के साथ बदलते रहते हैं। जब हम नाक से साँस लेते हैं तो हम वायु अंदर लेते हैं। ध्ूल के कणों को श्वसन - तंत्रा में जाने से रोकने के लिए हमारी नाक में छोटे - छोटे बाल तथा श्लेष्मा उपस्िथत होते हंै। क्या आप उस पल को याद कर सकते हैं जब आपके अभ्िाभावक ने आपको मुँह से साँस लेने के कारण डाँटा हो? अगर आप मुँह से साँस लेंगे तो चित्रा 15.8 भीड़ भरे चैराहे पर एक पुलिसकमीर् द्वारा मुखौटा पहनकर यातायात नियंत्राण हानिकारक ध्ूल के कण आपके शरीर में प्रवेश कर जाएँगे। इससे हम यह निष्कषर् निकालते हैं कि वायु में वुफछ गैसें, जल - वाष्प तथा ध्ूल के कण विद्यमान होते हैं। वायु में मुख्यतः नाइट्रोजन, आॅक्सीजन, थोड़ी मात्रा में काबर्न डाइआॅक्साइड तथा इससे भी कम मात्रा में अन्य गैसों का मिश्रण होता है। तथापि वायु की संरचना में स्थानीय भ्िान्नता हो सकती है। हम देखते हैं कि वायु में नाइट्रोजन तथा आॅक्सीजन की मात्रा अध्िक होती है। वास्तव में ये दोनों गैसंे मिलकर वायु का 99ः भाग बनाती हंै। शेष 1ः में काबर्न डाइआॅक्साइड, वुफछ अन्य गैसें, जलवाष्प तथा धूल के कण होते हैं ;चित्रा 15.9द्ध। 15.3 पानी तथा मिट्टðी में रहने वाले जीवों और पौधें को आॅक्सीजन वैफसे मिल पाती है? ियाकलाप 5 बीकर या किसी काँच के बतर्न में थोड़ा पानी लीजिए।इसको त्रिापाद स्टैंड के ऊपर रखकर धीरे - ध्ीरे गमर् करें। पानी के उबलने से पहले सावधानीपूवर्क पात्रा हमारे चारों ओर वायु के अंदर की सतह को देख्िाए। क्या आप छोटे - छोटे बुलबुले इससे चिपके हुए देखते हैं ;चित्रा 15.10द्ध? ये बुलबुले पानी में घुली हुइर् वायु के कारण बनते हैं। जब आप पानी गमर् करते हैं तो घुली हुइर् वायु बुलबुलों के रूप में बाहर आती है। आप पानी को यदि और गमर् करते हैं तो पानी वाष्प में परिवतिर्त हो जाता है और अंततः उबलने लगता है। हमने अध्याय 8 तथा 9 में पढ़ा है कि जो जीव पानी में रहते हैं, वे श्वसन के लिए पानी में घुली हुइर् आॅक्सीजन का उपयोग करते हैं। जो जीव गहरी मि‘ी के अंदर रहते हैं, उन्हें भी साँस लेने के लिए आॅक्सीजन की आवश्यकता होती है, क्या ऐसा नहीं है? वे सभी श्वसन - िया के लिए आवश्यक वायु कहाँ से प्राप्त करते हैं? ियाकलाप 6 एक बीकर या काँच के गिलास में सूखी मि‘ी का एक ढेला लीजिए। इसमें पानी डालिए और अवलोकन कीजिए कि क्या होता है ;चित्रा 15.11द्ध? क्या आप मि‘ी से बुलबुले निकलते हुए देखते हैं? ये बुलबुले संकेत करते हैं कि मि‘ी में वायु होती है। जब मि‘ी के ढेले पर पानी डाला जाता है तो उसमें विद्यमान वायु विस्थापित हो जाती है जो बुलबुलों के रूप में दिखाइर् देती है। मि‘ी के अंदर पाए जाने वाले जीव एवं पौधें की जड़ें श्वसन के 151 चित्रा 15.11 मि‘ी में वायु होती है लिए इसी वायु का उपयोग करते हैं। मि‘ी के जीव गहरी मि‘ी में बहुत - सी माँद तथा छिद्र बना लेते हैं। इन छिद्रों के द्वारा वायु को अंदर व बाहर जाने के लिए जगह उपलब्ध् हो जाती है। लेकिन जब भारी वषार् हो जाती है तो इन छिद्रों एवं माँदों में वायु की जगह पानी भर जाता है। इस स्िथति में शमीन के अंदर रहने वाले जीवों को साँस लेने के लिए शमीन पर आना पड़ता है। क्या यही कारण है कि वेंफचुए केवल भारी वषार् के समय पर ही शमीन से बाहर आते हैं? क्या आपने कभी यह सोचा है कि सारे जीवों के द्वारा आॅक्सीजन का उपयोग करने के बावजूद वायुमंडल की आॅक्सीजन समाप्त क्यों नहीं होती? वायुमंडल में आॅक्सीजन को प्रतिस्थापित कौन करता हैै? 15.4 वायुमंडल में आॅक्सीजन वैफसे प्रतिस्थापित होती है? अध्याय 7 में हम प्रकाश - संश्लेषण के बारे में पढ़ चुके हंै। इस प्रिया में पौध्े अपना भोजन स्वयं बनाते हैं तथा इसके साथ ही आॅक्सीजन उत्पन्न होती है। पौध्े श्वसन में आॅक्सीजन का उपयोग करते हैं, परंतु उपयोग की गइर् आॅक्सीजन की तुलना में वे अिाक आॅक्सीजन उत्पन्न करते हैं। इसलिए हम यह कहते हैं कि पौध्े आॅक्सीजन उत्पन्न करते हैं। यह वास्तविकता है कि जंतु पौधें के बिना जीवित नहीं रह सकते। पौधें एवं जंतुओं के द्वारा श्वसन तथा पौधें के द्वारा प्रकाश संश्लेषण से बना रहता है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पौध्े तथा जंतु एक - दूसरे पर निभर्र हैं। अब हम यह अनुभव कर सकते हैं कि पृथ्वी पर जीवन के लिए वायु अत्यंत महत्वपूणर् है। क्या वायु के वुफछ अन्य उपयोग भी हैं? क्या आपने पवन - चक्की के बारे में सुना है? चित्रा 15.12 को देख्िाए। वायु पवन - चक्की को घुमाती है। पवन - चक्की का उपयोग ट्यूबवैल से पानी निकालने तथा आटा - चक्की को चलाने में होता है। पवन - चक्की विद्युत भी उत्पन्न करती है। वायु नावों को खेने में, ग्लाइडर, पैराशूट तथा हवाइर् जहाश को चलाने में सहायता करती है। पक्षी, चमगादड़ तथा कीड़े वायु की उपस्िथति के कारण ही उड़ पाते हैं। वायु बहुत - से पौधें के बीजों तथा पूफलों के पराग - कणों को इधर - उधर पैफलाने में सहायक होती है। जलचक्र में वायु एक महत्वपूणर् भूमिका निभाती है। विज्ञान वायुमंडल काबर्न डाइआॅक्साइड वायु की संरचना आॅक्सीजन नाइट्रोजन ध्ुआँ पवन - चक्की 1.वायु के संघटक क्या हैं? 2.वायुमंडल की कौन - सी गैस श्वसन के लिए आवश्यक है? हमारे चारों ओर वायु 153 3.आप यह वैफसे सि( करंेगे कि वायु ज्वलन में सहायक होती है। 4.आप यह कैसे दिखाएँगे कि वायु जल में घुली होती है? 5.रुइर् का ढेर जल में क्यों सिवुफड़ जाता है? 6.पृथ्वी के चारों ओर की वायु की परत - - - - - - - - - - - - - - कहलाती है। 7.हरे पौधें को भोजन बनाने के लिए वायु के अवयव - - - - - - - - - - - - - - की आवश्यकता होती है। 8.पाँच ियाकलापों की सूची बनाइए, जो वायु की उपस्िथति के कारण संभव है। 9.वायुमंडल में गैसों के आदान - प्रदान में पौध्े तथा जंतु एक - दूसरे की किस प्रकार सहायता करते हैं? विज्ञान

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