12विद्युत् तथा परिपथ हम विद्युत््् का उपयोग अपने बहुत से कायो± को आसान बनाने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए हम विद्युत्् का उपयोग वुफएँ से पंप द्वारा जल बाहर निकालने अथवा शमीन की सतह से जल को छत पर रखी हुइर् टंकी में पहुँचाने के लिए करते हैं। अन्य कौन - कौन से कायर् हैं, जिनके लिए आप विद्युत््् का उपयोग करते हैं? उनमें से वुुफछ को सूचीब( कर अपनी नोटबुक में लिख्िाए। क्या आपकी सूची में प्रकाश के लिए विद्युत्् का उपयोग सम्िमलित है? सूरज छिपने के बाद भी विद्युत्हमारे घरों, सड़कों, दफ्रतरों तथा पैफक्िट्रयों को प्रकाश्िात करती है। यह रात में लगातार काम करने में हमारी सहायता करती है। विद्युत्् हमें बिजली घर से प्राप्त होती है। पिफर भी विद्युत् की आपूतिर् ठप्प हो सकती है या कइर् स्थानों पर अनुपलब्ध् हो सकती है। ऐसी स्िथति में प्रकाश के लिए टाॅचर् का उपयोग करते हैं। टाॅचर् में एक बल्ब होता है। जब इसका स्िवच दबाते हैं, तब यह प्रकाश देने लगता है। टाॅचर् को विद्युत् कहाँ से मिलती है? 12.1 विद्युत् - सेल टाॅचर् के बल्ब को विद्युत््, विद्युत् - सेल से मिलती है। विद्युत्् - सेल का उपयोग विद्युत् - स्रोत के रूप में अलामर् घड़ी, कलाइर् घड़ी, रेडियो, वैफमरा तथा अन्य युक्ितयों में किया जाता है। क्या आपने कभी विद्युत्् - सेल को ध्यानपूवर्क देखा है? आपने यह देखा होगा कि इसके एक ओर धतु की टोपी तथा दूसरी ओर धतु की डिस्क ;चिकाद्ध होती है ;चित्रा 12.1द्ध। क्या आपनेविद्युत्् - सेल के ऊपर एक धन चिÉ ;़द्ध तथा एक )ण चिÉ ;दृद्ध देखा है? विद्युत् - सेल में धातु की टोपीधनात्मक सिरा तथा धातु की डिस्क ट्टणात्मक सिरा चित्रा 12.1 विद्युत् - सेल कहलाता है। सभी विद्युत् - सेलों में दो सिरे होते हैं, जिनमें एक ध्नात्मक ;टमिर्नलद्ध सिरा तथा दूसराट्टणात्मक होता है। विद्युत् - सेल मंे संचित रासायनिक पदाथो± से सेल विद्युत् उत्पन्न करता है। जब विद्युत् - सेल में संचित रासायनिक - पदाथर् इस्तेमाल कर लिए जाते हैं तब विद्युत्् - सेल, विद्युत् पैदा करना बंद कर देता है। तब तंतु ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 12.2 ;ंद्ध टाॅचर् का बल्ब और ;इद्ध उसका भीतरी दृश्य उस विद्युत् - सेल को एक नए विद्युत् - सेल से बदलना पड़ता है। टाॅचर् के बल्ब में काँच का एक बाहरी आवरण, धातु की सतह पर चिपका होता है ख्;चित्रा 12.2 ;ंद्ध,। बल्ब के काँच के आवरण के अंदर क्या होता है? ियाकलाप 1 एक टाॅचर् लीजिए तथा इसके बल्ब के भीतर देख्िाए। आप अपने अध्यापक की सहायता से इस बल्ब को टाॅचर् से बाहर भी निकाल सकते हैं। आप क्या देखते हैं? क्या आप काँच के बल्ब के मध्य एक पतला तार देखते हैं ख्चित्रा 12.2 ;इद्ध,? अब टाॅचर् का स्िवच दबाइए तथा देख्िाए कि बल्ब का कौन - सा भाग दीप्त है। प्रकाश उत्सजिर्त करने वाले पतले तार को बल्ब का तंतु कहते हैं। यह तंतु दो मोटे तारों के बीच लगा होता है जिसे चित्रा 12.2 ;इद्ध में दशार्या गया है। ये मोटे तार तंतु को आधार प्रदान करते हंै। इन मोटे तारों में से एक मोटा तार बल्ब की सतह पर धतु के ढाँचे से जुड़ा हुआ होता है ख्चित्रा 12.2 ;इद्ध,। दूसरा मोटा तार आधर वंेफद्र पर धातु की नोक से जुड़ा होता है। बल्ब के आधार पर धतु का ढाँचा तथा धतु की नोक, बल्ब के दो टमिर्नल हंै। ये दोनों टमिर्नल इस प्रकार लगाए जाते हैं कि ये एक - दूसरे को न छुएँ। घरों में उपयोग होने वाले विद्युत् - बल्बों की भी ऐसी ही संरचना होती है। इस प्रकार विद्युत् - सेल तथा विद्युत् तथा परिपथ चेतावनी: विद्युत् - सेल के दो टमिर्नलों से जुड़े तारों को स्िवच तथा बल्ब जैसी युक्ित को बीच में जोड़े बिना आपस में कदापि न मिलाएँ। यदि आप ऐसा करेंगे, तो विद्युत् - सेल के रासायनिक - पदाथर् बड़ी तेशी से खचर् हो जाएँगे और सेल कायर् करना बंद कर देगा। विद्युत् - बल्ब दोनों में ही दो - दो टमिर्नल होते हैं। इनमें ये दो टमिर्नल क्यों होते हैं? 12.2 विद्युत् - सेल से जुड़ा हुआ बल्ब आइए, विद्युत् - सेल का उपयोग करके एक बल्ब को दीप्ितमान करने का प्रयास करते हैं। ऐसा हम किस प्रकार करते हैं? ियाकलाप 2 विभ्िान्न रंगों के प्लास्िटक का आवरण चढ़े विद्युत्् - तार के चार टुकड़े लीजिए। प्रत्येक तार के टुकड़े के दोनों सिरों से प्लास्िटक आवरण को हटा दीजिए। इस प्रकार दोनों सिरों पर धतु का तार अनावरित हो जाएगा। दो तारों के अनावरित भागों को विद्युत् - सेल तथा दूसरे दो को बल्ब से ;चित्रा 12.3 तथा 12.4 में दशार्ए गए अनुसारद्ध जोड़ दीजिए। ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;मद्ध ;द्धि चित्रा 12.5 विद्युत् - सेल तथा बल्ब को जोड़ने की विभ्िान्न व्यवस्थाएँ बल्ब के साथ तारों को जोड़ने के लिए आप विद्युत््रोध्ी टेप ;बिजली के मिस्ित्रायों द्वारा उपयोग की जाने वालीद्ध और सेल के लिए रबड़ बैंड या टेप का उपयोग कर सकते हैं। अब बल्ब तथा विद्युत् - सेल को अलग - अलग छः भ्िान्न ढंगों से जोडि़ए, जैसा कि चित्रा 12.5 ;ंद्ध से 12.5 ;द्धि में दशार्या गया है। प्रत्येक व्यवस्था में देख्िाए कि बल्ब दीप्त है या नहीं। प्रत्येक व्यवस्था के लिए ‘हाँ’ या ‘नहीं’ लिख्िाए।अब उन व्यवस्थाओं को ध्यानपूवर्क देख्िाए जिनमें बल्ब दीप्त होता है। इन व्यवस्थाओं की तुलना दूसरी व्यवस्थाओं से कीजिए जिनमें बल्ब दीप्त नहीं होता है। क्या आप इस अंतर का कारण ज्ञात कर सकते हंै? चित्रा 12.5 ;ंद्ध में विद्युत् - सेल के एक टमिर्नल से प्रारंभ करके, अपनी पेंसिल की नोक को तार के अनुदिश बल्ब तक लाइए। अब बल्ब के दूसरे टमिर्नल से प्रारंभ करके, विद्युत्् - सेल से जुड़े दूसरे तार के अनुदिश पेंसिल की नोंक को लाइए। इस कायर् को चित्रा 12.5 की तरह शेष व्यवस्थाओं के लिए दोहराइए। क्या उन व्यवस्थाओं में बल्ब दीप्त होता है, जिनमें सेल के एक टमिर्नल से वापस दूसरे टमिर्नल तकपहुँचने में पेंसिल को ऊपर उठाना पड़ता है? 12.3 विद्युत् - परिपथ ियाकलाप 2 में आपने विद्युत्् - सेल के एक टमिर्नल को तार द्वारा बल्ब से होते हुए विद्युत्् - सेल के दूसरे टमिर्नल से जोड़ा। ध्यान दीजिए कि चित्रा 12.5 ;ंद्ध विज्ञान तथा चित्रा 12.5 ;द्धि की व्यवस्थाओं में विद्युत्् - सेल के दो टमिर्नल, बल्ब के दो टमिर्नलों से जोड़े गए हैं। इस प्रकार की व्यवस्था विद्युत्् - परिपथ का एक उदाहरण है। विद्युत्् - परिपथ, विद्युत्् - सेल के दो टमिर्नलों के बीच विद्युत्् - प्रवाह ;विद्युत्् - धाराद्ध के संपूणर् पथ को दशार्ता है। बल्ब केवल तभी दीप्त होता है जब परिपथ में विद्युत्् - धरा प्रवाहित होती है। किसी विद्युत्् - परिपथ में चित्रा 12.6 में दशार्ए गए अनुसार, विद्युत्् - धरा की दिशा विद्युत्् - सेल के ;़द्ध टमिर्नल से ;दृद्ध टमिर्नल की ओर होती है। जब बल्ब के टमिर्नलों को तार के द्वारा विद्युत्् - सेल के टमिर्नलों से जोड़ा जाता है तो बल्ब के तंतु से होकर विद्युत्् - धरा प्रवाहित होती है। यह बल्ब को दीप्ितमान करती है। कभी - कभी विद्युत्् - बल्ब, विद्युत्् - सेल से जुड़े होने पर भी दीप्त नहीं होता। ऐसा बल्ब के फ्रयूश होने केकारण हो सकता है। .फ्रयूश बल्ब को ध्यानपूवर्क देख्िाए। क्या इसका तंतु अक्षुण है? विद्युत्् बल्ब कइर् कारणों से .फ्रयूश हो सकता है। इनमें से एक कारण है, बल्ब के तंतु का खंडित होना। बल्ब का तंतु खंडित होने के कारण, विद्युत्् - सेल के टमिर्नलों के बीच विद्युत्् - धारा का परिपथ टूट जाताहै। इसलिए .फ्रयूश - बल्ब के तंतु से विद्युत्् - धरा प्रवाहित न होने के कारण यह दीप्ितमान नहीं होता है। क्या अब आप यह बता सकते हंै कि चित्रा 12.5 ;इद्ध, ;बद्ध, ;कद्ध तथा ;मद्ध में आपके प्रयास करने पर भी बल्ब दीप्ितमान क्यों नहीं होता है? अब हमें ज्ञात है कि विद्युत् - सेल का उपयोग कर, बल्ब को दीप्ितमान वैफसे किया जाता है। क्या आप अपने लिए एक टाॅचर् बनाना पसंद करंेगे? ियाकलाप 3 एक टाॅचर् - बल्ब तथा तार का एक टुकड़ा लीजिए। पहले की तरह तार के दोनों सिरों से प्लास्िटक आवरण को हटाइए। चित्रा 12.7 में दशार्ए अनुसार तार के एक सिरे को बल्ब के धतु के ढाँचे के चारों ओर चित्रा 12.7 घर में तैयार की गइर् टाॅचर् लपेटिए। तार के दूसरे सिरे को रबड़ बैंड की सहायतासे विद्युत्् - सेल के ट्टणात्मक टमिर्नल से जोडि़ए। अब बल्ब के आधर की नोक अथार्त् इसके टमिर्नल को विद्युत्् - सेल के धनात्मक टमिर्नल पर रख्िाए। क्या बल्ब दीप्ितमान होता है? अब बल्ब को विद्युत्् - सेल विद्युत् तथा परिपथ 119 के टमिर्नल से हटाइए। क्या बल्ब अभी भी प्रकाश्िात है? क्या यह टाॅचर् को ‘आॅन’ व ‘आॅपफ’ करने के समान नहीं है? 12.4 विद्युत् - स्िवच घर में तैयार की गइर् टाॅचर् को ‘आॅन’ अथवा ‘आॅपफ’ करने में विद्युत्् - बल्ब को विद्युत - सेल की नोक से स्पशर् कराते अथवा हटाते हंै। यह एक साधारण विद्युत्् - स्िवच था, इसे उपयोग करना सुविधाजनक नहीं है। हम अपने उपयोग के लिए दूसरा सरल एवं सुविधजनक स्िवच बना सकते हंै। ियाकलाप 4 आप दो ड्राॅइंग पिन, एक सुरक्षा पिन ;या पेपर क्िलपद्ध दो तार तथा थमोर्कोल या लकड़ी के बोडर् से एक विद्युत्् - स्िवच तैयार कर सकते हैं। सुरक्षा पिन की रिंग में एक ड्राॅइंग पिन लगाकर इसे थमोर्कोल शीट पर गाड़ दीजिए, जैसा कि चित्रा 12.8 में दिखाया गया है। यह सुनिश्िचत कीजिए कि सुरक्षा पिन आसानी चित्रा 12.8 साधरण स्िवच से घूम सके। अब दूसरी ड्राॅइंग पिन को थमोर्कोल शीट पर इस तरह लगाएँ कि सुरक्षा पिन का स्वंतत्रा सिरा इसे स्पशर् कर सके। इस प्रकार जुड़ा हुआ सुरक्षा पिन, इस ियाकलाप में आपका स्िवच होगा। अब विद्युत्् - सेल बल्ब तथा स्िवच को चित्रा 12.9 में दशार्ए अनुसार जोड़कर परिपथ को पूरा कीजिए। सुरक्षा पिन को इस तरह घुमाएँ कि उसका स्वतंत्रा सिरा दूसरे ड्राॅइंग पिन को छुए। आप क्या देखते हैं? अब सुरक्षा पिन को ड्राॅइंग पिन से हटाइए। क्या बल्ब अब भी जलता रहता है? जब सुरक्षा पिन दोनों ड्राॅइंग पिनों से स्पशर् करता है तब वह दोनों ड्राॅइंग पिनों के बीच के रिक्त स्थान को भरता है। तब इस स्िथति में स्िवच को ‘आॅन’ कहते हैं ;चित्रा 12.10द्ध। चूंकि सुरक्षापिन का पदाथर् विद्युत्् - धारा को अपने में से प्रवाहित होने देता है, अतः विद्युत् - परिपथ पूरा हो जाता है, इस तरह बल्ब दीप्ितमान होता है। चित्रा 12.9 स्िवच सहित विद्युत - परिपथ चित्रा 12.10 आॅन स्िथति में स्िवच इसके विपरीत, जब सुरक्षा पिन दूसरी ड्राॅइंग पिन से स्पशर् नहीं करती तो विद्युत् - बल्ब दीप्ितमान नहीं होता। इस तरह ड्राॅइंग पिनों के बीच का रिक्त स्थान बंद नहीं होता है तथा परिपथ पूरा नहीं होता। इस दशा ;स्िथतिद्ध में स्िवच ‘आॅपफ’ कहलाता है, जैसा - कि चित्रा 12.9 में दशार्या गया है। स्िवच एक सरल युक्ित है जो परिपथ को जोड़ या तोड़ सकती है। घरों में स्िवच का उपयोग बल्ब को दीप्ितमान करने तथा अन्य युक्ितयों को चलाने के विज्ञान लिए करते हंै। यद्यपि घरों में उपयोग होने वाले स्िवच इसी सि(ांत पर कायर् करते हैं पर उनके डिशाइन जटिल होते हंै। 12.5 विद्युत् - चालक तथा विद्युत् - रोध्क हमने अपने सभी ियाकलापों में परिपथ को पूरा करने के लिए धातु के तार उपयोग किए थे। मान लीजिए परिपथ बनाने के लिए धतु के तारों के स्थान पर हम सूती धगे का उपयोग करते हैं। क्या आप सोचते हैं इस अवस्था में भी बल्ब दीप्तमान होगा? विद्युत्् - धरा के प्रवाह के लिए परिपथ में किस प्रकार के पदाथो± का उपयोग किया जा सकता है। आइए इसका पता लगाते हैं। ियाकलाप 5 ियाकलाप 4 के लिए प्रयुक्त विद्युत्् - परिपथ से स्िवच को अलग कीजिए। ऐसा करने से आपको चित्रा 12.12 ;ंद्ध के अनुसार दो स्वतंत्रा तारों के सिरे मिल जाएंँगे। इन तारों के दोनों सिरों को एक - दूसरे के समीप लाएँ ताकि ये एक - दूसरे को स्पशर् करें। क्या बल्ब जल उठता है? अब आप इस व्यवस्था को पदाथो± के परीक्षण के लिए प्रयोग में ला सकते हंै कि ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 12.12 ;ंद्ध चालक परीक्ष्िात्रा 12.12 ;इद्ध जब चालक - परीक्ष्िात्रा चाबी के संपवर्फ में होता है तो बल्ब के जलने की जाँच करना जाँच करने के लिए विभ्िान्न प्रकार के पदाथो± जैसे कृ सिक्के, काॅवर्फ, रबड़, काँच, चाबियाँ, पिन, प्लास्िटकका स्केल, लकड़ी का गुटका, ऐलुमिनियम की पत्ती,मोमबत्ती, सिलाइर् मशीन की सुइर्, थमोर्कोल, कागश तथा पेंसिल की लीड आदि एकत्रिात कीजिए। चालक - परीक्ष्िात्रा के तारों के स्वतंत्रा सिरों को प्रत्येक नमूने से बारी - बारी से स्पशर् करें ख्चित्रा 12.12 ;इद्ध,। ध्यान रख्िाए कि दोनों तार एक - दूसरे को स्पशर् न करंे। क्या हर बार बल्ब जलता है? सारणी 12.1 के समान अपनी नोटबुक में एक सारणी बनाइए तथा अपने प्रेक्षणों को अंकित कीजिए। सारिणी 12.1: विद्युत् - चालक एवं विद्युत् - रोधक स्िवच के स्थान परउपयोग की गइर् वस्तु पदाथर् जिसका यह बना है बल्ब जलता है ;हाँ/नहींद्ध चाबी धतु हाँ रबड़;इरेशरद्ध रबड़ नहीं स्केल प्लास्िटक माचिस की तीली लकड़ी काँच की चूड़ी काँच लोहे की कील धतु आप क्या पाते हैं? परीक्षण के लिए उपयोग किए गए वुफछ पदाथोर्ं से तारों के स्वतंत्रा सिरे लगाने पर बल्ब दीप्ितमान नहीं होता है। इसका अथर् यह है कि ये पदाथर् विद्युत्् - धरा को अपने अंदर से प्रवाहित नहीं होने देते। इसके विपरीत बल्ब के जलने से यह पता चलता है कि वुफछ पदाथर्, अपने अंदर से विद्युत्् - धारा का प्रवाह होने देते हैं। जो पदाथर् विद्युत्् - धरा का प्रवाह होने देते हैं वे विद्युत् - चालक हंै। विद्युत् - रोधक अपने अंदर से विद्युत्् - धारा को प्रवाहित नहीं होने देते। सारणी 12.1 की सहायता से उन पदाथोर्± के नाम बताइए जो विद्युत् - चालक हैं और उन पदाथोर्± के जो विद्युत् - रोधक हैं। विद्युत् - चालक - - - - - - - - - - - , - - - - - - - - - - - , - - - - - - - - - विद्युत् - रोध्क - - - - - - - - - - - , - - - - - - - - - - - , - - - - - - - - - आपने क्या निष्कषर् निकाला है? कौन - से पदाथर् विद्युत् - चालक हैं और कौन - से विद्युत् - रोध्क? अध्याय 4 के उन पदाथो± को स्मरण करें जो चमकदार होते हैं। क्या वे विद्युत् - चालक हैं? अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि तारों को बनाने के लिए ताँबा, ऐलुमिनियम तथा अन्य धातुएँ क्यों प्रयुक्त की जाती हैं? आइए ियाकलाप 4 को स्मरण करें जिसमें हमने स्िवच के साथ एक परिपथ बनाया था ;चित्रा 12.9द्ध। जब स्िवच खुली स्िथति में था तब क्या दो ड्राॅइंग पिन थमोर्कोल शीट से जुड़े हुए नहीं थे? परंतु आप जानते हैं कि थमोर्कोल एक विद्युत् - रोध्क है। रिक्त स्थान में जब वायु होती है तब क्या होता है? चूँकि स्िवच के दो ड्राॅइंग पिन के बीच में जब केवल वायु थी तो बल्ब दीप्ितमान नहीं होता है। इसका तात्पयर् है कि वायु भी विद्युत्् - रोधक है। विद्युत्् - चालक तथा विद्युत्् - रोध्क हमारे लिए समान रूप से महत्वपूणर् हंै। स्िवच, विद्युत्् प्लग, साॅकेट सुचालक पदाथो± से बनाए जाते हैं। दूसरी ओर विद्युत्् - तारों, प्लगके ऊपर के भाग, स्िवच तथा विद्युत्् - उपकरणों के अन्य भाग जिन्हें लोग स्पशर् कर सकते हैं। इनको बनाने के लिए रबड़ तथा प्लास्िटक का उपयोग होता है। चेतावनी: आपका शरीर विद्युत्् का बहुत अच्छाचालक है। अतः विद्युत् उपकरणों का उपयोग करतेसमय सावधनी बरतिए। बल्ब तंतु विद्युत् - चालक विद्युत् - सेल विद्युत् - परिपथ विद्युत् - रोध्क स्िवच टमिर्नल विज्ञान 1.रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;कद्ध एक युक्ित जो परिपथ को तोड़ने के लिए उपयोग की जाती हैै, - - - - - - - - - - - - - - - - - - कहलाती है। ;खद्ध एक विद्युत् - सेल में - - - - - - - - - - - - - - - - - - टमिर्नल होते हैं। 2.निम्नलिख्िात कथनों पर ‘सही’ या ‘गलत’ का चिÉ लगाइए। ;कद्ध विद्युत् - धरा धतुओं से होकर प्रवाहित हो सकती है। ;खद्ध विद्युत् - परिपथ बनाने के लिए धतु के तारों के स्थान पर जूट की डोरी प्रयुक्त की जा सकती है। ;गद्ध विद्युत् - धरा थमोर्कोल की शीट से होकर प्रवाहित हो सकती है। 3.व्याख्या कीजिए कि चित्रा 12.13 में दशार्इर् गइर् व्यवस्था में बल्ब क्यों नहीं दीप्ितमान होता है? 4.चित्रा 12.14 में दशार्ए गए आरेख को पूरा कीजिए और बताइए कि बल्ब को दीप्ितमान करने के लिए तारों के स्वतंत्रा सिरों को किस प्रकार जोड़ना चाहिए? 5.विद्युत् - स्िवच को उपयोग करने का क्या प्रयोजन है? वुफछ विद्युत् - साध्ित्रांे के नाम बताइए जिनमें स्िवच उनके अंदर चित्रा 12.14ही निमिर्त होते हैं। विद्युत् तथा परिपथ 123 चित्रा 12.15 8.किसी वस्तु के साथ ‘‘चालक - परीक्ष्िात्रा’’ का उपयोग करके यह देखा गया कि बल्ब दीप्ितमान होता है। क्या इस वस्तु का पदाथर् विद्युत् - चालक है या विद्युत् - रोध्क? व्याख्या कीजिए। 9.आपके घर में स्िवच की मरम्मत करते समय विद्युत् - मिस्तरी रबड़ के दस्ताने क्यों पहनता है? व्याख्या कीजिए। 10.विद्युत् - मिस्तरी द्वारा उपयोग किए जाने वाले औशार, जैसे कृ पेचकस और प्लायसर् के हत्थों पर प्रायः प्लास्िटक या रबड़ के आवरण चढ़े होते हंै। क्या आप इसका कारण समझा सकते हंै? विज्ञान

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