हम अपने चारों ओर अनेक प्रकार की रंग - बिरंगी वस्तुएँ देखते हैं। स्वूफल जाते समय हम अनेक वस्तुएँ जैसे कृ कारें, बसें, साइकिलें, वृक्ष, जंतु तथा कभी - कभी वुफछ पुष्प देखते हैं। आपके विचार से हम इन वस्तुओं को वैफसे देखते हैं? रात्रिा के समय जब पूणर् अंध्कार हो तब इन्हीं स्थानों के बारे में विचार कीजिए। आप क्या देखेंगे? मान लीजिए रात्रिा के समय आप पूणर्तः अंधेरे कमरे में जाते हैं। क्या आप कमरे में रखी हुइर् किसी भी वस्तु को देख पाते हैं?लेकिन, जब आप कोइर् टाॅचर् अथवा मोमबत्ती जलाते हैं तो उस कमरे में रखी हुइर् वस्तुओं को देख सकते हैं। क्या ऐसा नहीं है? बिना प्रकाश के वस्तुओं को नहीं देख सकते। प्रकाश, वस्तुओं को देखने में हमारी सहायता करता है। टाॅचर् का बल्ब एक ऐसी वस्तु है, जो स्वयं प्रकाश देता है। सूयर् आकाश में एक ऐसा पिंड है जो पृथ्वी को प्रकाश्िात करता है। दिन के समय हम इसी प्रकाश में वस्तुओं को देखते हैं। जो वस्तुएँ सूयर् की तरह स्वयं प्रकाश का उत्सजर्न करती हैं उन्हें दीप्त पिंड कहते हैं। वुफसीर्, चित्रा अथवा जूते जैसी वस्तुओं के बारे में आप क्या कहेंगे? इन्हें आप तभी देख सकते हैं जब प्रकाश एक दीप्त वस्तु ;जैसे - सूयर्, टाॅचर् अथवा विद्युत का प्रकाशद्ध से इन वस्तुओं पर पड़ता है, तब हमारी आँखों की ओर आता है। 11.1 पारदशीर्, अपारदशीर् तथा पारभासी वस्तुएँ याद कीजिए, हमने अध्याय 4 में वस्तुओं को पारदशीर्, अपारदशीर् तथा पारभासी के रूप में समूहों में बाँटा है। यदि हम किसी वस्तु के आर - पार नहीं देख सकते हैं, तो वह अपारदशीर् वस्तु है। यदि आप किसी वस्तु के आर - पार देख सकते हैं तो वह वस्तु प्रकाश को अपने अंदर से होकर जाने देती है। ऐसी वस्तु को पारदशीर् कहते हैं। वुफछ वस्तुओं से आर - पार देख तो सकते हैं परंतु बहुत स्पष्ट नहीं, ऐसी वस्तुओं को पारभासी कहते हैं। ियाकलाप 1 अपने चारों ओर देख्िाए और दैनिक जीवन की जितनी अिाक से अिाक वस्तुएँ एकत्रा कर सकते हैं, कीजिए जैसे - रबड़, प्लास्िटक स्केल, पेन, पेंसिल, नोटबुक, कागश की शीट, अनुरेखण कागश अथवा कपड़े का टुकड़ा। इन सभी वस्तुओं के आर - पार किसी दूर रखी हुइर् वस्तु को देखने का प्रयास कीजिए ;चित्रा 11.1द्ध। क्या दूर रखी वस्तु से आने वाला प्रकाश इन वस्तुओं के आर - पार चलकर आपकी आँखों तक पहुँच चित्रा 11.1 वस्तुओं का यह देखने के लिए प्रेक्षण करना कि वे प्रकाश को अपने में से जाने देती हैं अथवा नहीं सारणी 11.1वस्तु/पदाथर् पेंसिल रबड़ की गेंद लिखने के कागश की शीट वस्तु के पार देखना संभव ;पूणर्तः/ अपारदशीर्/पारदशीर्/आंश्िाक/बिल्वुफल नहींद्ध पारभासी;टिप्पणीद्ध वस्तु पूणर् विश्वास नहीं अपने प्रेक्षणों को सारणी 11.1 के अनुसार लिख्िाए। हम देखते हैं कि किसी वस्तु अथवा पदाथर् का अपारदशीर्, पारदशीर् अथवा पारभासी होना इस पर निभर्र करता है कि वह वस्तु अपने अंदर से होकर प्रकाश को पूणर्तः, आंश्िाक रूप से अथवा बिलवुफल नहीं गुजरने देती। 11.2 छायाएँ वास्तव में क्या होती हैं? ियाकलाप 2 अब प्रत्येक अपारदशीर् वस्तु को धूप में जमीन से वुफछऊँचाइर् पर एक - एक करके पकडि़ए। धरती पर आप क्या देखते हैं? आप जानते हैं कि धरती पर बने ये गहरे काले धब्बे वस्तुओं की छाया के कारण हैं। कभी - कभी आप वस्तु की छाया देखकर वस्तु को पहचान सकते हैं ;चित्रा 11.2द्ध। मैदान में कागश की एक शीट बिछाइए । किसी सामान्य जानकार अपारदशीर् वस्तु को किसी ऊँचाइर् पर चित्रा 11.2 कभी - कभी वस्तु की छाया, वस्तु की आकृति के बारे में बताती है हाथ में इस प्रकार पकडि़ए कि उसकी छाया शमीन पर बिछी कागश की शीट पर पड़े। जब आप वस्तु को पकड़े हुए हों तो उस समय अपने किसी मित्रा से छाया की बाहरी रेखा खींचने के लिए कहिए। इसी प्रकार अन्य वस्तुओं की छायाओं की बाहरी रेखाएँ खींचिए। अब अपने वुफछ अन्य मित्रों से छायाओं की बाहरी रेखाएँ देखकर वस्तुओं को पहचानने के लिए कहिए। वे कितनी वस्तुओं की सही पहचान कर सकते हैं? क्या आप अपनी छाया किसी अंधेरे कमरे में अथवा रात्रिा में जब कोइर् प्रकाश नहीं होता है, देखते हैं? क्या आपको उस समय भी कोइर् छाया दिखाइर् देती है, जब कमरे में प्रकाश स्रोत के अतिरिक्त अन्य वुफछ नहीं होता है? ऐसा प्रतीत होता है कि छाया देखने के लिए हमें कोइर् प्रकाश स्रोत तथा प्रकाश के पथ में कोइर् अपारदशीर् वस्तु चाहिए। क्या इसके अतिरिक्त कोइर् अन्य वस्तु भी चाहिए? ियाकलाप 3 यह एक ऐसा ियाकलाप है जिसे आपको अंधेरे में करना होगा। शाम होते ही अपने वुफछ मित्रों के साथएक टाॅचर् तथा गत्ते की एक बड़ी शीट लेकर किसी खुले मैदान में जाइए। टाॅचर् को शमीन के समीप ले जाकर उफपर की ओर इस तरह से जलाएँ जिससे टाॅचर् का प्रकाश आपके मित्रा के चेहरे पर पड़े। अब आपके पास प्रकाश स्रोत तथा प्रकाश के पथ के अनुदिश एक अपारदशीर् वस्तु ;आपका मित्राद्ध है। यदि विज्ञान आपके मित्रा के पीछे पेड़, इमारत अथवा कोइर् अन्य वस्तु न हो तो क्या तब भी आपको अपने मित्रा के सिर की छाया दिखाइर् देगी? इसका अथर् यह नहीं हैं कि वहाँ छाया नहीं है। वास्तव में टाॅचर् का प्रकाश आपके मित्रा के सिर से पार नहीं होता है।अब किसी अन्य मित्रा से कहें कि गत्ते की शीट को आपके मित्रा के पीछे पकड़े। क्या अब छाया शीट पर बनती है ;चित्रा 11.3द्ध? इस प्रकार छाया केवल परदे पर ही दिखाइर् दे सकती है। शमीन, कमरे की दीवार, इमारतें अथवा इस प्रकार की अन्य सतहें, आपको दैनिक जीवन में दिखाइर् देने वाली अनेक छायाओं के लिए परदे की तरह कायर् करती हैं। छायाओं से हमें वस्तुओं की आकृतियों के बारे में वुफछ जानकारी प्राप्त होती है। कभी - कभी तो छायाहम सभी को वस्तु की आकृति के बारे में भ्रमित भी कर सकती है। चित्रा 11.4 मंे वुफछ छायाएँ दिखाइर् गइर् हैं जिन्हें हम अपने हाथों से बना कर विविध जानवरों की छाया होने का भ्रम उत्पन्न कर सकते हैं। है ना ये मशेदार बात! ियाकलाप 4 स्वूफल के मैदान में धूप में एक वुफसीर् रख्िाए। आप वुफसीर् की छाया से क्या अवलोकन करते हैं?क्या छाया से वुफसीर् की सही आकृति का ज्ञान होता है? यदि आप वुफसीर् को थोड़ा - सा घुमा दें तोवुफसीर् की छाया की आकृति में किस प्रकार का परिवतर्न होता है? एक पतली नोटबुक लेकर उसकी छाया को देख्िाए। इसके पश्चात् एक आयताकार डिब्बा लीजिए औरउसकी छाया देख्िाए। क्या दोनों छायाएँ समान आकृति की प्रतीत होती हैं? विभ्िान्न रंगों के पुष्प अथवा अन्य वस्तुएँ लेकर उनकी छायाओं का अवलोकन कीजिए। उदाहरण के लिए लाल गुलाब अथवा पीला गुलाब ले सकते हैं। जब वस्तुओं के रंग भ्िान्न - भ्िान्न होते हैं तो क्या उनकी छायाओं के रंग भी भ्िान्न - भ्िान्न दिखाइर् पड़ते हैं? एक लंबा बाॅक्स लीजिए तथा पृथ्वी पर बनी उसकी छाया को ध्यान से देख्िाए। जब आप बाॅक्स को इधर - उधर गति कराते हैं तो उस समय आप छाया के आकार में होने वाले परिवतर्न को देख सकते हैं। बाॅक्स की छाया कब सबसे छोटी बनती है, तब जब आप बाॅक्स के बड़े पफलक को सूयर् के 109प्रकाश - छायाएँ एवं परावतर्न सामने रखते हैं अथवा जब आप छोटे पफलक को काले रंग के कपड़े से ढक लीजिए। अब सूची छिद्र सूयर् के सामने रखते हैं? वैफमरे से दूर की वस्तुएँ जैसे पेड़ अथवा इमारतों को आइए, इस लंबे बाॅक्स का प्रयोग सरल वैफमरा देखने का प्रयत्न करंे। सुनिश्िचत करें कि जिस वस्तु बनाने में करें। को आप सूची छिद्र वैफमरे से देखना चाहते हैं, वह सूयर् की तेज ध्ूप मंे रखी हो। अब छोटे बाॅक्स को सूची11.3 सूची छिद्र वैफमरा छिद्र बने बड़े बाॅक्स मंे आगे - पीछे तब तक ख्िासकाएँनिःसंदेह वैफमरा बनाने के लिए हमें बहुत - सी जटिल जब तक दूसरे छोर पर लगे हुए ट्रेसिंग पेपर पर तस्वीरसामग्री चाहिए। लेकिन यदि हम केवल सरल सूची न मिले।छिद्र वैफमरा ही बनाना चाहते हैं, तब ऐसा नहीं है। क्या सूची छिद्र वैफमरों के प्रतिबिंब अपनी छायाओं ियाकलाप 5 से भ्िान्न हैं? दो ऐसे बाॅक्स लीजिए जिनमें से एक बाॅक्स दूसरे के सूची छिद्र वैफमरे से सूयर् के तीव्र प्रकाश में सड़क भीतर बिना अंतराल के ख्िासक सके। दोनों बाॅक्सों पर गतिमान वाहनों एवं व्यक्ितयों को देखें। का एक - एक छोटा पफलक काट दीजिए। बड़ा बाॅक्स क्या वैफमरे के द्वारा देखे गए चित्रा, दूसरी ओर की लेकर इसके दूसरे छोटे पफलक के बीचोंबीच एक वस्तुआंे के रंगों को दशार्ते हैं? क्या प्रतिबिंब सीधे हैं छोटा छिद्र बनाइए ख्चित्रा 11.5;ंद्ध,। इसी प्रकार छोटेअथवा उल्टे? आश्चयर् - आश्चयर्! बाॅक्स के दूसरे छोटे पफलक पर एक वगार्कार आकृति आइए, अब अपने सूची छिद्र वैफमरे से सूयर् का ;जिसकी भुजा लगभग 5 बउ से 6 बउ होद्ध प्रतिबिंब बनाएँ। इसके लिए हमें थोड़ी - सी भ्िान्नकाटिए। इस कटे भाग पर ट्रेसिंग पेपर ;पारभासी व्यवस्था चाहिए। हमें गत्ते की एक बड़ी शीट परदाद्ध चिपकाकर ढक दीजिए ख्चित्रा 11.5 ;इद्ध,। चाहिए जिसके मध्य मंे छोटा सा सूची छिद्र हो।छोटे बाॅक्स को बड़े बाॅक्स में इस प्रकार ख्िासकाइए गत्ते की शीट को सूयर् की तरपफ इस तरह पकड़ें कि कि छोटे बाॅक्स का पारभासी टेªसिंग पेपर वाला परदा उसकी छाया सापफ क्षेत्रा में बने। क्या आप सूयर् काबड़े बाॅक्स के भीतर हो ख्चित्रा 11.5 ;बद्ध, आपका वृत्ताकार प्रतिबिंब गत्ते की शीट की छाया के मध्य सूची छिद्र वैफमरा उपयोग के लिए तैयार है। में देखते हैं? सूची छिद्र वैफमरा लेकर छोटे बाॅक्स के खुले हुए अपनी जगह से सूयर् ग्रहण के समय सूयर् का सूची सिरे से देखें। अपने सिर तथा सूची छिद्र वैफमरे को छिद्र प्रतिबिंब देखें। सूयर् ग्रहण से पहले सूची ;बद्ध चित्रा 11.5 सपीर् सूची छिद्र वैफमरा विज्ञान छिद्र तथा परदे को इस तरह सुव्यवस्िथत करें कि सूयर् का प्रतिबिंब परदे पर साप़्ाफ बने। सूयर् ग्रहण आरंभ होने पर सूयर् का प्रतिबिंब देखंे। आप अवलोकन करेंगे कि ग्रहण प्रारंभ होने पर सूयर् के प्रतिबिंब का एक भाग धीरे - धीरे काला होता जाता है। हमें सूयर् को सीधे कदापि नहीं देखना चाहिए। ये हमारी आँखों के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है।प्रकृति में भी एक रोचक सूची छिद्र वैफमरा है। कभी - कभी हम ऐसे वृक्ष के नीचे से गुशरते हैं,जिसमें ढेरांे पिायाँ होती हैं, तब हमें उस पेड़ के नीचे सूयर् के प्रकाश के ध्ब्बे दिखाइर् देते हैं ;चित्रा 11.6द्ध। चित्रा 11.6 प्राकृतिक सूची छिद्र वैफमरा। वृक्ष के नीचे सूयर् के प्रतिबिंब वास्तव मंे ये वृत्ताकार प्रतिबिंब सूयर् के सूची छिद्रप्रतिबिंब होते हैं। पिायों के बीच के खाली स्थान सूची छिद्र की भाँति व्यवहार करते हंै। इन खाली स्थानों में सभी प्रकार की अनियमित आवृफतियाँ हो सकती हैं,परंतु हम सूयर् के वृत्ताकार प्रतिबिंब ही देख सकते हैं। आगामी सूयर् ग्रहण के समय सूयर् के प्रतिबिंबों को देखने का प्रयास करें। यह अत्यंत रोचक हो सकता है! बूझो के मस्ितष्क में एक विचार है। हमने अपने सूची छिद्र वैफमरे से सड़क पर चलते लोगों के उल्टे प्रकाश - छायाएँ एवं परावतर्न प्रतिबिंब देखे थे। सूयर् के प्रतिबिंबों के साथ क्या होता है? क्या वे प्रतिबिंब भी हमें उल्टे दिखाइर् दिए थे? पहेली का वुफछ अन्य विचार है। निश्चय ही ये सब परिणाम, जो हम देख रहे हैं जैसे - छायाओं का बनना, सूची छिद्र प्रतिबिंब आदि तभी संभव हैं जब प्रकाश केवल सरल रेखा में गमन करे। ियाकलाप 6 आइए, पाइप का छोटा टुकड़ा अथवा रबड़ की लंबीनली लें। कमरे में एक तरपफ एक मोमबत्ती जलाकरमेश के ऊपर रखें। अब कमरे में दूसरी तरपफ खड़े होकर पाइप से मोमबत्ती को देखें ख्चित्रा 11.7 ;ंद्ध,। क्या मोमबत्ती दिखाइर् देती है? जब आप मोमबत्ती को देख रहे हों तब पाइप को थोड़ा - सा मोडि़ए ख्चित्रा 11.7 ;इद्ध,। क्या अब मोमबत्ती दिखाइर् देती है? पाइप को अपने दाईं या बाईं ओर घुमाइए। क्या अबआप मोमबत्ती को देख सकते हैं? आप इससे क्या निष्कषर् निकालते हैं? यह दशार्ता है कि प्रकाश एक सरल रेखा में गमन करता है, क्या ऐसा नहीं है? इस कारण जब कोइर् 111 अपारदशीर् वस्तु इसे रोकती है तो उस वस्तु की छाया बनती है। 11.4 दपर्ण तथा परावतर्न हम सभी, घर पर दपर्णों का प्रयोग करते हैं। आप दपर्ण में अपने चेहरे को देखते हैं। जो आप देखते हैं वह दपर्ण में आपवेफ चेहरे का परावतर्न है। हम दपर्ण के सामने रखी हुइर् वस्तुओं का परावतर्न भी दपर्ण में देखते हैं। कभी - कभी हम झील अथवा तालाब के पानी में पेड़ों, इमारतों तथा अन्य वस्तुओं का परावतर्न देखते हैं। ियाकलाप 7 यह ियाकलाप रात्रिा के समय अथवा एक अंधेरे कमरे में किया जाना चाहिए। अपने किसी मित्रा से कहिए कि वह एक हाथ में दपर्ण लेकर कमरे के एक कोने में खड़ा हो जाए। एक हाथ में टाॅचर् लेकर आप कमरे के दूसरे कोने में खड़े हो जाएँ। टाॅचर् के काँच को अपनी अंगुलियों से ढक लीजिए तथा टाॅचर् को जलाएँ। किरण पुंज प्राप्त करने के लिए अपनी अंगुलियों के बीच वुफछ जगह छोड़ें। प्रकाश पुंज को आपके मित्रा के द्वारा पकड़े हुए दपर्ण पर डालिए। क्या आप दूसरी तरपफ प्रकाश वफा धब्बा देखते हैं ;चित्रा 11.8द्ध? अब टाॅचर् की दिशा इस प्रकार समायोजित कीजिए कि प्रकाश का ध्ब्बा कमरे में खड़े किसी दूसरे मित्रा के उफपर पड़े।यह ियाकलाप सुझाता है कि दपर्ण अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश की दिशा को बदल देता है। यहाँ वणर्न किया गया ियाकलाप यह दशार्ता है कि प्रकाश सरल रेखा के अनुदिश गमन करता हुआ दपर्ण से परावतिर्त हो जाता है। ियाकलाप 8 एक बड़ी थमोर्कोल की शीट के एक किनारे पर एक वंफघी तथा इसके दूसरे किनारे पर ;चित्रा 11.9द्ध में दशार्ए अनुसार एक दपर्ण लगाइए। दपर्ण तथा वंफघी के बीच कागश की गहरी रंगीन शीट बिछाइए। इसे सूयर् के प्रकाश में रख्िाए अथवा वंफघी के सामने टाॅचर् चित्रा 11.9 सरल रेखा मंे चलता हुआ तथा दपर्ण से परावतिर्त होता प्रकाश आप क्या अवलोकन करते हो? क्या आप ;चित्रा 11.9द्ध में दशार्ए जैसा पैटनर् प्राप्त करते हैं? इस ियाकलाप से हमें यह ज्ञात होता है कि प्रकाश किस प्रकार गमन करता है तथा यह किस प्रकार दपर्ण से परावतिर्त होता है। विज्ञान दीप्त दपर्ण अपारदशीर् सूची छिद्र वैफमरा परावतर्न छाया 1.नीचे दिए गए बाॅक्सों के अक्षरों को पुनव्यर्वस्िथत करके एक ऐसा वाक्य बनाइए जिससे हमें अपारदशीर् वस्तुओं के बारे में जानकारी मिलने में सहायता हो सके। 113प्रकाश - छायाएँ एवं परावतर्न 2.नीचे दी गइर् वस्तुओं अथवा पदाथोर् को अपारदशीर्, पारदशीर् अथवा पारभासी तथा दीप्त अथवाअदीप्त में वगीर्कृत कीजिएः वायु, जल, चट्टðान का टुकड़ा, ऐलुमिनियम शीट, दपर्ण, लकड़ी का तख्ता, पाॅलीथीन शीट, ब्क्ए धुआँ, समतल काँच की शीट, वुफहरा, लाल तप्त लोहे का टुकड़ा, छाता, प्रकाशमानप्रतिदीप्त नलिका, दीवार, काबर्न पेपर की शीट, गैस बनर्र की ज्वाला, गत्ते की शीट, प्रकाशमान टाॅचर्, सेलोपेफन शीट, तार की जाली, मिट्टðी के तेल का स्टोव, सूयर्, जूगनू, चंद्रमा। 3.क्या आप ऐसी आकृति बनाने के बारे में सोच सकते हैं जो एक ढंग से रखे जाने पर वृत्ताकार छाया बनाए तथा दूसरे ढंग से रखे जाने पर आयताकार छाया बनाए? 4.किसी अंधेरे कमरे में यदि आप अपने चेहरे के सामने कोइर् दपर्ण रखें तो क्या आप दपर्ण में अपना परावतर्न देखेंगे? विज्ञान विचारणीय बातें 1.अपारदशीर् वस्तुएँ छायाएँ बनाती हैं, क्या ऐसा नहीं है? अब यदि हम कोइर् पारदशीर् वस्तु धूपमें लेकर खड़े हो जाएँ तो क्या हमें धरती पर उसकी छाया दिखाइर् देगी, जिससे हमें यह संकेतमिले कि हम हाथ में वुफछ पकड़े हुए हैं? 2.हमने देखा कि अपारदशीर् वस्तुआंे के रंगांे को बदलने से उनकी छायाआंे के रंग में कोइर्परिवतर्न नहीं होता है। जब हम विभ्िान्न रंगांे के प्रकाश को अपारदशीर् वस्तुआंे पर डालते हैंतब क्या होता हैं? आप ऐसा टाॅचर् के पृष्ठ को पारदशीर् रंगीन कागश से ढककर कर सकतेहैं। ;क्या आपने कभी सूयार्स्त के समय सायंकालीन छायाओं के रंग देखे हैं?द्ध पढ़ने योग्य बातें रुडियाडर् किपलिंग्स की रचना जस्ट सो स्टोरी विशेषतः कहानी ‘‘हाउ दि लिओपाडर् गोट इट्सस्पोट्स’’ में उन्होंने धरीदार, चित्तीदार, दाग - ध्ब्बे वाली परछाइयों का वणर्न किया है। यहाँ उसकहानी से एक उ(रण है जिसमें बहुत - सी परछाइयाँ बताइर् गइर् हैं। . . . कभी बहुत दिनांे के बाद उन्होंने एक बड़े, उफँचे, खोतरो से पूणर् लंबे वृक्षांे के जंगल मेंधरियाँ चित्ते, ध्ब्बे तथा बिंदु, आड़ी तिरछी रेखाएँ, पफलकनुमा और गैर पफलकनुमा जैसीपरछाइयाँ देखीं। ;सशक्तता से कहें तथा देखें कि जंगल अवश्य इतने छायाकारी होते हैंद्ध। लिओपाडर् ने कहा, ‘यह क्या है!’, ‘इतना अध्िक अंध्ेरा, तब भी प्रकाश के पुंज!’ 115प्रकाश - छायाएँ एवं परावतर्न

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