10गति एवं दूरियों का मापन पहेली तथा बूझो की कक्षा के सभी बच्चों के बीच ग्रीष्मावकाश में भ्रमण किए गए स्थानों के बारे में सामान्य चचार् हो रही थी। एक बच्चा अपने पैतृक गाँव पहले रेलगाड़ी, पिफर बस और अंत में बैलगाड़ी का उपयोग करके गया था। एक विद्याथीर् ने वायुयान से यात्रा की थी। एक अन्य विद्याथीर् ने अवकाश के अनेक दिन अपने चाचा जी की नाव में सैर करके मछली पकड़ने में व्यतीत किए थे। इसके पश्चात् अध्यापक ने विद्याथ्िार्यों से समाचारपत्रा के उन लेखों को पढ़ने के लिए कहा जिनमें उन छोटे पहियों वाले वाहनों के बारे में वणर्न है, जो मंगल ग्रह की ध्रती पर चले थे और प्रयोग भी किए। इन वाहनों को मंगल तक ले जाने का कायर् अंतरिक्षयान द्वारा किया गया था। इसी बीच पहेली प्राचीन भारत के बारे में कहानियाँ पढ़ती रही तथा अब वह यह जानना चाहती है कि प्राचीन काल में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा वैफसे करते थे? 10.1 यातायात की कहानी प्राचीन काल में लोगों के पास यातायात के कोइर् साधन नहीं थे। वे पैदल चलते थे तथा अपना सामान या तो अपनी पीठ पर अथवा पशुओं की पीठ पर लादकर ले जाते थे। प्राचीन काल में जल मागो± में आने - जाने के लिए नावों का उपयोग किया जाता था। आरंभ में लकड़ी के लऋों से जिनमें खोखली गुहिका बनाइर् जा सके, नावें बनाइर् जाती थीं। इसके पश्चात् लोगों ने लकड़ी के विभ्िान्न टुकड़ों को आपस में जोड़कर नाव की आवृफति बनाना सीख लिया। ये नावें जल मंेरहने वाले जीवों की आवृफतियों के सदृश थीं। अध्याय 8 एवं 9 में मछलियों की धरा रेखीय आवृफति से संबंिात चचार् को याद कीजिए। पहिए के आविष्कार ने यातायात की प्रणाली में अत्यंत महत्वपूणर् परिवतर्न किए। पिछले हशारांे वषोर्ं में पहिए के डिशाइन में सुधार किए गए हैं। पहियों पर चलने वाले वाहनों को खींचने के लिए पशुओं का उपयोग किया जाता था। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक भी लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन के लिए पशु - शक्ित पर निभर्र करते थे। वाष्प - इंजन के आविष्कार से एक नए शक्ित - स्रोत का समावेश हुआ। वाष्प - इंजन से चालित सवारी - गाडि़यांे तथा माल - गाडि़यांे के डिब्बों के लिए रेल की पटरियों का निमार्ण किया गया। इसके पश्चात् स्वचालित वाहन आए। जल पर परिवहन के साध्न के रूप में मोटर से चलने वाली नाव और जहाशों का उपयोग होने लगा। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ के वषो± में वायुयान का विकास हुआ जिनमें बाद में सुधर किए गए और इन्हें यात्राी तथा सामान ले जाने योग्य बनाया गया। विद्युत - रेलगाड़ी, एकल - रेल ;एक पटरी रेलद्ध, पराध्वनिक ;सुपरसोनिकद्ध वायुयान तथा अंतरिक्षयान बीसवीं शताब्दी के वुफछ योगदान हैं। चित्रा 10.1 में परिवहन के विभ्िान्न साध्न दशार्ए गए हैं। इन्हें प्राचीनतम से अत्याधुनिक परिवहन के साध्नांे के सही क्रम में व्यवस्िथत कीजिए। क्या इनमें परिवहन का कोइर् ऐसा प्राचीन साध्न भी हैं जिसे आजकल उपयोग में नहीं लाया जाता है? 10.2. आपने कितनी दूरी तय की? यह डेस्क कितना चैड़ा है? लोग यह वैफसे पता लगाते थे कि वे कितनी दूर चले हैं? आप यह वैफसे पता लगाएँगे कि आप अपने स्वूफल तक की दूरी पैदल चलकर तय कर सकते हैं अथवा स्वूफल पहँुचने के लिए आपको बस अथवा रिक्शे की आवश्यकता होगी? जब आपको वुफछ खरीदना होता है, तब क्या आपके लिए बाशार तक पैदल जाना संभवहोता है? आप इन प्रश्नों के उत्तर वैफसे जानेंगे? कोइर् स्थान कितना दूर है, यह प्रायः जानना महत्वपूणर् होता है, ताकि हम यह अनुमान लगा सवेंफ कि वहाँ पहँुचने के लिए हम वैफसे जाएँगें कृ पैदल चलकर, बस से, रेलगाड़ी से, पानी के जहाश से, वायुयान से अथवा कोइर् अंतरिक्षयान लेना होगा! कभी - कभी ऐसी वस्तुएँ भी होती हैं, जिनकी लंबाइर् अथवा चैड़ाइर् जानने की हमें आवश्यकता होती है। पहेली तथा बूझो की कक्षा के कमरे में बड़े - बड़े डेस्क हैं जिन पर दो - दो विद्याथीर् बैठते हैं। पहेली तथा बूझो एक डेस्क पर साथ - साथ बैठते हैं, परंतु बहुधा उनमें इस बात को लेकर झगड़ा होता रहता है कि उसका दूसरा साथी डेस्क के अध्िक भाग का उपयोग कर रहा है। अध्यापक के सुझाव पर उन्होंने डेस्क की लंबाइर् मापने का निश्चय किया। डेस्क के ठीक मध्य में एकचिÉ बनाया तथा डेस्क को दो बराबर भागों में बाँटने के लिए एक रेखा खींची। ये दोनों ही अपने मित्रों के साथ गिल्ली - डंडा खेलने के शौकीन हैं और बूझो तो सदैव ही अपने पास एक गिल्ली और एक डंडा रखता है। चित्रा 10.2 गिल्ली तथा डंडे से डेस्क की लंबाइर् मापना यहाँ चित्रा 10.2 में देख्िाए। उन्होंने गिल्ली और डंडे का उपयोग करके डेस्क की लंबाइर् मापने का प्रयास वैफसे किया है। ऐसा लगता है कि डेस्क की लंबाइर्, दो डंडों की लंबाइर् तथा दो गिल्िलयों की लंबाइर् के योग के बराबर है। डेस्क के मध्य में रेखा खींचने पर दोनों प्रसन्न दिखाइर् देते हैं क्योंकि दोनों को आध - आधा डेस्क मिल गया है, जिसमें डेस्क का आध भाग, लंबाइर् में, एक डंडे और एक गिल्ली की लंबाइर् के बराबर है। वुफछ दिनों के बाद खींची गइर् रेखा मिट जाती है। बूझो का पुराना गिल्ली - डंडा खो गया है। अब उसके पास गिल्ली - डंडे का नया सेट है। अब देख्िाए वे गिल्ली - डंडे के नए सेट का उपयोग करके डेस्क की लंबाइर् किस प्रकार मापते दिखाइर् देते हैं ;चित्रा 10.3द्ध। चित्रा 10.3 गिल्ली - डंडे के किसी भ्िान्न सेट से डेस्क की लंबाइर् मापना विज्ञान हैलो! अब जब डेस्क की लंबाइर् गिल्ली - डंडे के नए सेट से मापी गइर् तब डेस्क की लंबाइर् ऐसी प्रतीत हुइर् जैसे यह लगभग दो डंडों तथा एक गिल्ली की लंबाइयों के बराबर हो परंतु पिफर भी डेस्क का वुफछ भाग बच जाता है। यह तो एक गिल्ली की लंबाइर् से कम है! अब क्या करें? आप पहेली और बूझो को क्या सुझाव देंगे ताकि वे डेस्क की पूरी लंबाइर् माप लें। क्या वे लंबाइर् मापने के लिए िकेट के विकेट तथा गुल्िलयों का उपयोग कर सकते हैं अथवा आप सोचते हैं कि ऐसा करने से वैसी ही समस्या उत्पन्न हो सकती है? वह एक कायर् कर सकते हैं, एक छोटी डोरी लेंऔर इस पर दो चिÉ लगाएँ। यह डोरी की एक लंबाइर् होगी। वे डेस्क की चैड़ाइर् डोरी की लंबाइर् के पदांे में माप सकते हैं ;चित्रा 10.4द्ध। वे इस डोरी का उपयोग डोरी की लंबाइर् से कम दूरियांे को मापने में किस प्रकार कर सकते हैं? वे डोरी को मोड़ कर ‘डोरी की लंबाइर्’ का आधा ;क्द्ध, एक चैथाइर् ;क्द्ध तथा आठवां भाग ;1ध्द्ध कर सकते हैं। अब संभवतः पहेली8तथा बूझो डेस्क की यथाथर् लंबाइर् इस डोरी की सहायता से माप सकते हैं। आप यह भी कह सकते हैं कि इन्हें अपने ज्यामिति - बाॅक्स के पैमाने को उपयोग करके अपनी समस्या हल करनी चाहिए। हाँ, वास्तव में ऐसा किया जा सकता है। बूझो ने यह पढ़ा है कि जब ऐसे मानक पैमाने नहीं थे तब लोग दूरियाँ वैफसे मापते थे तथा वह स्वयं भी ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हमें लंबाइर् अथवा दूरियाँ मापने की आवश्यकता होती है। दशीर् कपड़े की लंबाइर् यह जानने के लिए मापता है कि वह कपड़ा कुतार् सीने के लिए पयार्प्त है अथवा नहीं। बढ़इर् किसी अलमारी की लंबाइर् तथा चैड़ाइर् इसलिए मापता है ताकि वह यह जान सके कि इस अलमारी के दरवाशे को बनाने के लिए कितनी लकड़ी की आवश्यकता होगी। किसी किसान को अपने खेत की लंबाइर् तथा चैड़ाइर् अथवा उसके क्षेत्रापफल जानने की इसलिए आवश्यकता होती है ताकि वह यह जान जाए कि वह अपने खेत में कितने बीज बो सकता है तथा उसे अपनी पफसलांे के लिए कितने जल की आवश्यकता होगी। यदि आप से पूछा जाए कि आपकी लंबाइर् कितनी है तब आप एक ऐसी सरल रेखा की लंबाइर् बताएँगे जो आपके सिर से आपके पैर की एड़ी तक की रेखीय लंबाइर् के बराबर है। यह झाड़ू कितनी लंबी है? यह डेस्क कितना चैड़ा है?दिल्ली, लखनऊ से कितनी दूर है? पृथ्वी से चंद्रमा कितनी दूर है? इन सभी प्रश्नों में एक बात समान है। ये सभी दो स्थानों के बीच की दूरी से संबंध्ित हैं। दो स्थान, मेश के दो किनारों की तरह, पास - पास हो सकते हैं। इसके विपरीत दो स्थान जम्मू और कन्यावुफमारी की तरह, एक - दूसरे से बहुत दूर भी हो सकते हैं। आइए, अब हम वुफछ मापन यह जानने के लिए करते हैं कि जब हम दूरियाँ अथवा लंबाइयाँमापते हैं, तो हमें सही रूप में क्या करना आवश्यक होता है? 10.3 वुफछ मापन ियाकलाप 1 आप इस ियाकलाप को समूह में एक - एक करके कीजिए। अपने पैर की लंबाइर् को लंबाइर् का एक मात्राक मानकर अपनी कक्षा के कमरे की लंबाइर् तथा गति एवं दूरियों का मापन 97 चैड़ाइर् मापिए। इन्हें मापते समय यह संभव है कि आपको यह पता चले कि वुफछ भाग मापने से बच गया है तथा यह भाग आपके पैर की लंबाइर् से छोटा है। पहले ही की भाँति अपने पैर के भाग की लंबाइर् मापने के लिए किसी डोरी का उपयोग कीजिए। अपने प्रेक्षणों को सारणी 10.1 में लिख्िाए। सारणी 10.1: कक्षा की लंबाइर् और चैड़ाइर् विद्याथीर् का नाम कक्षा के कमरे कीलंबाइर् मापना कक्षा केकमरे कीचैड़ाइर् ियाकलाप 2 समूह में कायर् कीजिए। आप में प्रत्येक अपने बालिश्त को मानक मात्राक मानकर अपनी कक्षा के कमरे में रखी मेश अथवा डेस्क की चैड़ाइर् माप सकते हैं ;चित्रा 10.5द्ध। चित्रा 10.5 मेज की चैड़ाइर् को बालिश्त से मापना मापन के लिए यहाँ भी आप यह पाते हैं कि आपको अपनी एक बालिश्त के बराबर लंबी डोरी तथा इस डोरी की लंबाइर् के अंश भागों की आवश्यकता होती है। अपने प्रेक्षणों को सारणी 10.2 में लिख्िाए। हम देखते हैं कि मापन का अथर् किसी अज्ञात राश्िा की उसी प्रकार की वुफछ ज्ञात राश्िा से तुलना करना है। इस ज्ञात निश्िचत राश्िा को मात्राक कहते हैं। किसी माप के परिणाम को दो भागों में व्यक्त किया जाता है। एक भाग संख्या है। दूसरा भाग ली गइर् माप का मात्राक होता है। उदाहरण के लिए ियाकलाप 1 में यदि कक्षा के कमरे की लंबाइर् आपके 12 पैर की लंबाइर् के बराबर है तो 12 एक संख्या है तथा ‘पैर की लंबाइर्’ एक मात्राक है जिसे मापन के लिए चुना गया है। सारणी 10.2: मेश की चैड़ाइर् मापना मेश की चैड़ाइर् बालिश्तों किसने मापी? की संख्या अब सारणी 10.1 तथा 10.2 में अंकित सभी मापों का अध्ययन कीजिए। क्या प्रत्येक पैर द्वारा मापी गइर् कमरे की लंबाइर् के ये सभी माप बराबर हैं? क्या सभी के द्वारा अपनी - अपनी बालिश्तांे से मापी गइर् मेश की चैड़ाइर् की माप बराबर है? शायद ये परिणाम भ्िान्न - भ्िान्न हो सकते हैं, क्योंकि आपकी बालिश्त लंबाइर् में आपके मित्रों की बालिश्तों से भ्िान्न हो सकती है। इसी प्रकार सभी विद्याथ्िार्यों के पैर की लंबाइयों में भी वुफछ अंतर हो सकता है। इसलिए जब आप अपने बालिश्तों या पैरों की लंबाइर् को मात्राक की भाँति उपयोग करके किए गए माप को किन्ही अन्य व्यक्ितयों को बताते हैं, तो वे यह नहीं समझ पाते कि यह लंबाइर् वास्तव में कितनी है, क्योंकि वास्तविक लंबाइर् जानने के लिए बालिश्त अथवा पैर की लंबाइर् जानना आवश्यक है। अतः हम देखते हैं कि हमें मापन के वुफछ ऐसे मात्राकों की आवश्यकता है, जो सभी व्यक्ितयों के लिए समान हों। 10.4 मापन के मानक मात्राक प्राचीन काल में पैर की लंबाइर्, अंगुली की चैड़ाइर् तथा एक कदम की दूरी, इन सभी मापों का मात्राक के रूप में सामान्य उपयोग होता था। विज्ञान चित्रा 10.6 मीटर पैमाना तथा 15 सेंटीमीटर पैमाना हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने अवश्य ही लंबाइर् के बहुत अच्छे मापन का उपयोग किया होगा, क्यांेकि यह खुदाइर् में प्राप्त परिशु( ज्यामितीय रचनाओं को देखने से प्रमाण्िात होता है। कोहनी से अंगुली के छोर तक की लंबाइर् जिसे हाथ कहते हैं, लंबाइर् के मात्राक के रूप में प्राचीनमिड्ड में उपयोग किया जाता था जिसे संसार के अन्य भागांे में भी मान्यता प्राप्त थी। संसार के विभ्िान्न भागों में लोग लंबाइर् के मात्राक के रूप में ‘पफुट’ का उपयोग करते थे। अलग - अलग क्षेत्रों में पुफट की लंबाइर् थोड़ी भ्िान्न थी। लोग एक गश कपड़ा पैफली बाँह के सिरे से अपने ठोड़ी तक मापते थे। रोमवासी अपने पग अथवा कदमों से लंबाइर् मापते थे। प्राचीन भारत में छोटी लंबाइयों को मापने के लिए अंगुल अथवा मुऋी का उपयोग किया जाता था। आज भी भारत के कइर् शहरों में हम पुष्प विव्रेफताओं को पुष्प हारों को बेचते समय अपनी भुजाओें का उपयोग लंबाइर् के मात्राक के रूप में करते हुए देख सकते हैं। सुविधनुसार शरीर के ऐसे बहुत - से भागांे का मात्राकों के रूप में उपयोग होता रहा है। तथापि प्रत्येक व्यक्ित के शरीर की आमापों में थोड़ी भ्िान्नता हो सकती है। शायद इसी कारण भीमापन में उलझनें आइर् होंगी। वषर् 1790 में, Úांसीसियों ने मापन की एक मानक प्रणाली की रचना की जिसे ‘मीटरी प(ति’ कहते हैं। एक समानता के लिए समस्त संसार के वैज्ञानिकों ने मापन के मानक मात्राकों के एक सेट को स्वीकार कर लिया है। आजकल जिस मात्राक - प्रणाली का उपयोग हो रहा है, उसे ‘अंतरार्ष्ट्रीय मात्राक प्रणाली’ ;ैण्प्ण्मात्राकद्ध कहते हैं। लंबाइर् का ैण्प्ण् मात्राक मीटर है। चित्रा 10.6 में मीटर पैमाना दिखाया गया है। इसमें आपके ज्यामिति - बाॅक्स का 15 सेंटीमीटर पैमाना भी दिखाया गया है। प्रत्येक मीटर ;उद्ध को 100 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें संेटीमीटर ;बउद्ध कहते हैं। एक सेंटीमीटर के दस बराबर भाग होते हैं जिन्हें मिलीमीटर ;उउद्ध कहते हैं। इस प्रकार, 1उ त्र 100 बउ 1बउ त्र 10 उउ लंबी दूरियों के मापन के लिए मीटर एक सुविधाजनक मात्राक नहीं है। इसके लिए हम एक बड़े मात्राक को परिभाष्िात करते हैं। इसे किलोमीटर ;ाउद्ध कहते हैं। 1 ाउ त्र 1000 उ अब हम अपने सभी मापन ियाकलापों को मानक पैमानों का उपयोग करके दोहरा सकते हैं तथा लंबाइयों को ैण्प्ण् मात्राकों में माप सकते हैं। ऐसा करने से पहले हमें दूरियाँ तथा लंबाइयाँ मापने का सही ढंग जानना आवश्यक है। 10.5 लंबाइर् की यथाथर् ;परिशु(द्ध माप अपने दैनिक जीवन में हम विविध् प्रकार की मापक युक्ितयों का उपयोग करते हैं। लंबाइर् मापने के लिए हम मीटर पैमाने का उपयोग करते हैं। दशीर् मापक पफीते का उपयोग करता है, जबकि कपड़े के व्यापारी मीटर छड़ काम में लाते हैं। किसी वस्तु की लंबाइर् मापने के लिए आपको किसी उपयुक्त युक्ित का चयन करना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी वृक्ष का घेर अथवा अपने सीने ;वक्षद्ध की माप के लिए आप मीटर पैमाने का उपयोग नहीं कर सकते। ऐसी मापों के लिए मापक पफीता अध्िक सुविधजनक होता है। गति एवं दूरियों का मापन 99 ;इद्ध छोटी लंबाइयाँ जैसे, आपकी पेंसिल की लंबाइर्, मापने के लिए आप अपने ज्यामिति - बाॅक्स के 15 सेंटीमीटर पैमाने को काम में ला सकते हैं। ;ंद्ध चित्रा 10.7 मापी जाने वाली लंबाइर् के अनुदिश पैमाना रखने की ;ंद्ध सही तथा ;इद्ध गलत विध्ि लंबाइर् मापते समय हमें निम्नलिख्िात सावधानियाँ बरतने की आवश्यकता होती है - 1. चित्रा 10.7 में दिखाए अनुसार पैमाने को वस्तु के संपवर्फ में इसकी लंबाइर् के अनुदिश रख्िाए। 2. वुफछ पैमानों के सिरे टूटे हो सकते हैं। आप इन पैमानों के शून्यांक स्पष्ट नहीं देख सवेंफगे। ख्;चित्रा 10.8 ;ंद्ध, ऐसे प्रकरणों में, पैमाने के शून्यांक से माप लेने से बचिए। आप पैमाने का कोइर् अन्य पूणा±क, जैसे 1.0 सेंटीमीटर ख्;चित्रा 10.8 ;इद्ध, काम में ला सकते हैं। तब आपको दूसरे सिरे के पाठ्यांक से इस पूणा±क के पाठ्यांक को घटाना चाहिए। उदाहरण के लिए चित्रा 10.8 ;इद्ध में एक सिरे का पाठ्यांक 1.0 सेंटीमीटर तथा दूसरे सिरे का पाठ्यांक 14ण्3 बउ है। अतः वस्तु की लंबाइर् ;14ण्3 बउ 1ण्0बउद्ध त्र 13ण्3 बउ है। ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 10.8 टूटे किनारे वाले पैमाने को रखने की ;ंद्ध सही तथा ;इद्ध गलत विध्ि 3. माप लेने के लिए आँख की सही स्िथति भी महत्वपूणर् होती है। चित्रा 10.9 में दशार्ए अनुसार आपकी आँख, जिस बिंदु की माप ली जानी है उसके ठीक सामने होनी चाहिए। स्िथति ठ आँख की सही स्िथति है। ध्यान दीजिए ठ से देखने पर पाठ्यांक 7ण्5 बउ है। स्िथतियों । तथा ब् से पाठ्यांक भ्िान्न हो सकते हैं। ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध चित्रा 10.9 पैमाने के उचित पाठ्यांक के लिए आँख की स्िथति ियाकलाप 3 अपने सहपाठी की ऊँचाइर् पहले बालिश्तों और पिफर मीटर पैमाने का उपयोग करके मापिए। इसके लिए विज्ञान सारणी 10.3: ऊँचाइर् का मापन उफँचाइर् किसने मापी ऊँचाइर्बालिश्त में ऊँचाइर्सेंटीमीटर में अपने सहपाठी को दीवार के साथ पीठ रखकर खड़ा होने के लिए कहिए। उसके सिर से ठीक उफपर दीवारपर एक चिÉ अंकित कीजिए। अब पफशर् से दीवार परबने इस चिÉ तक की दूरी पहले अपने बालिश्त से और पिफर मीटर पैमाने से मापिए। अन्य सभी विद्याथ्िार्यों से इस लंबाइर् को इसी प्रकार मापने के लिए कहिए। सभी प्रेक्षण सारणी 10.3 में लिख्िाए। विभ्िान्न विद्याथ्िार्यों के द्वारा प्राप्त परिणामों का ध्यान से अध्ययन कीजिए। काॅलम - 2 में परिणाम एक - दूसरे से भ्िान्न हो सकते हैं क्योंकि विद्याथ्िार्यों के बालिश्तों की लंबाइर् एक - दूसरे से भ्िान्न हो सकती है। अब काॅलम - 3 के परिणामों को देख्िाए जिसमें सभी मापें मानक पैमाने द्वारा ली गइर् हैं। ये परिणाम एक - दूसरे के बहुत समीप हो सकते हैं? परंतु क्या ये एक - दूसरे के ठीक - ठीक बराबर हैं? यदि नहीं, तो आपके विचार से यह अंतर क्यों है? आख्िार सभी एक ही पैमाने का उपयोग कर रहे हैं, भ्िान्न - भ्िान्न बालिश्तों का उपयोग तो कर नहीं रहे। यह अंतर प्रेक्षण लेने में होने वाली छोटी त्राुटियों के कारण हो सकता है। मापन की इन त्राुटियों को जानने और व्यवहार में लानेके महत्त्व के बारे में उच्च कक्षाआंे में सीखेंगें। 10.6 किसी वक्र - रेखा की लंबाइर् मापना हम किसी वक्र - रेखा की लंबाइर् सीध्े ही मीटर पैमाने का उपयोग करके नहीं माप सकते। वक्र - रेखा की लंबाइर् मापने के लिए हम धगे का उपयोग कर सकते हैं। गति एवं दूरियों का मापन ियाकलाप 4 वक्र रेखा ।ठ ;चित्रा 10.10द्ध की लंबाइर् मापने के लिए किसी धगे का उपयोग कीजिए। धागे के एक सिरे पर गाँठ बाँध्िए। इस गाँठ को बिंदु । पर रख्िाए। अब धगे को अपनी अंगुली तथा अंगुठे द्वारा तना हुआ रखकर इसके छोटे भाग को रेखा के अनुदिश रख्िाए। इस बिंदु पर अपने एक हाथ से धगे को थामिए। अपने दूसरे हाथ से धगे के और थोड़े भाग को वक्र - रेखा के अनुदिश पैफलाइए। इस प्रिया को दोहराते हुए वक्र - रेखा के बिंदु ठ तक पहँुचिए। धगे का जो भाग बिंदु ठ पर है वहाँ एक चिÉ अंकित कीजिए। अब इस धगे को मीटर - पैमाने के अनुदिश पैफलाइए। धगे के आरंभ में बँध्ी गाँठ तथा इस परबने अंतिम चिÉ के बीच की लंबाइर् मापिए। यह माप वक्र - रेखा ।ठ की लंबाइर् है। चित्रा 10.10 धगे की सहायता से किसी वक्र - रेखा की लंबाइर् मापना हमने देखा कि यह सुनिश्िचत करने के लिए कि हम दूरियों तथा लंबाइयों की यथाथर् माप ले रहे हैं, हमें बहुत - सी सावधनियाँ बरतनी पड़ती हैं। मापन के लिए वुफछ मानक युक्ितयांे तथा मापन परिणामों को व्यक्त करने के लिए हमें वुफछ मानक मात्राकों की आवश्यकता होती है। 10.7 हमारे चारों ओर गतिशील वस्तुएँ ियाकलाप 5 उन वस्तुओं के बारे में सोचिए जो आपने हाल ही में देखी हैं। इनकी सूची सारणी 10.4 में बनाइए। स्वूफल 101 सारणी 10.4: विराम और गतिशील वस्तुएँ विराम में वस्तु गतिशील वस्तु घर एक उड़ती चिडि़या मेश घड़ी में सेकंड की सुइर् घड़ी का बस्ता, मच्छर, मेश, डेस्कों पर बैठे व्यक्ित,इधर - उधर जाते लोग। इसके अतिरिक्त तितलियाँ, वुफत्ते, गाय, आपका हाथ, छोटा बच्चा, जल में मछली, घर, .पैफक्ट्री, पत्थर, घोड़ा, गेंद, बल्ला, चलती रेलगाड़ी, सिलाइर् मशीन, दीवार घड़ी, घड़ी की सुइयाँ भी हो सकती हैं। आप जितनी लंबी सूची बना सकते हों, बनाइए। इनमें से कौन गतिशील है और कौन विराम में है? आपने यह वैफसे सुनिश्िचत किया कि कोइर् वस्तु गति में है अथवा विराम में है? आपने यह देखा होगा कि चिडि़या वुफछ समय पश्चात् पहले वाले स्थान पर दिखाइर् नहीं देती, जबकि मेश उसी स्थान पर है। इस आधर पर आपने यह सुनिश्िचत किया होगा कि कोइर् वस्तु गति में है अथवा विराम में है। आइए, हम किसी चींटी की गति को ध्यान से देखते हैं। ियाकलाप 6 पफशर् पर कागश की एक बड़ी शीट पैफलाकर इस पर वुफछ चीनी रख्िाए। चींटियाँ इस चीनी की ओर आकष्िार्त होंगी तथा आप शीघ्र ही इस कागश की शीट पर बहुत - सी चींटियों को रेंगते हुए देखेंगे। किसी एक चींटी के लिए जब वह कागश की शीट पर तुरंत रेंग चुकी हो पेंसिल से उसकी स्िथतियों के निकट छोटे - छोटेचिÉ अंकित कीजिए ;चित्रा 10.11द्ध। जैसे - जैसे यहकागश पर रेंगती जाए आप इसकी स्िथतियों पर चिÉ अंकित करते जाइए। वुफछ समय के पश्चात् कागश की शीट को इध्र - उध्र हिलाकर इस पर से चीनी एवं चींटियाँ हटा दीजिए। उन विभ्िान्न बिंदुओं, जिन्हें आपने कागश पर अंकित किया था, को तीरों द्वारा जोड़कर चींटी की गति की दिशा दशार्इए। वह हर बिंदु जिसे आपने अंकित किया है वुफछ सेवंफडों के समय अंतराल में चींटी ने कहाँ - कहाँ गति की, को दशार्ता है। गति किसी वस्तु की स्िथति में किसी प्रकार के परिवतर्न जैसी दिखाइर् देती है, क्या आप ऐसा नहीं मानते? ियाकलाप 5 में वस्तुओं के समूह बनाते समय आपने घड़ी, सिलाइर् की मशीन अथवा बिजली का पंखा जैसी वस्तुओं को किस समूह में रखा था? क्या ये वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति कर रही हैं? नहीं! क्या आप इनके किसी भाग में कोइर् गति देखते हैं? पंखें की पंखुडि़याँ अथवा घड़ी की सुइयाँ वैफसी गति करती हैं? क्या यह गति रेलगाड़ी की गति जैसी ही है? आइए, अब हम वुफछ प्रकार की गतियाँ देखते हैं जिनसे हमें इन विभ्िान्न प्रकार की गतियों को समझने में सहायता मिलेगी। विज्ञान 10.8 गति के प्रकार आपने सीध्ी सड़क पर किसी वाहन की गति, किसी परेड में सिपाहियों के माचर् - पास्ट की गति अथवा किसी गिरते पत्थर की गति का प्रेक्षण किया होगा ;चित्रा 10.12द्ध। यह किस प्रकार की गति है? 100उ दौड़ प्रतियोगिता में धवक भी सरल रेखा के अनुदिश दौड़ते हैं। क्या आप अपने चारों ओर देखकर इसी प्रकार के और अध्िक उदाहरण सोच सकते हैं? इन सभी उदाहरणों में हम यह देखते हैं कि वस्तुएँ सरल रेखा के अनुदिश गति कर रही हैं। इस प्रकार की गति को सरल रेखीय गति कहते हैं। ियाकलाप 7 एक पत्थर लीजिए। इससे एक धगा बाँध्िए तथा अपने हाथ से इसे तेशी से घुमाइए। पत्थर की गति कोध्यान से देख्िाए। हम देखते हैं कि पत्थर वृत्तीय पथ के अनुदिश गति कर रहा है। गति एवं दूरियों का मापन ;इद्ध ;बद्ध चित्रा 10.13 वतुर्ल गति करती वुफछ वस्तुएँ इस गति में पत्थर की आपके हाथ से दूरी समान रहती है। इस प्रकार की गति को वतुर्ल गति कहते हैं ;चित्रा 10.13द्ध। बिजली के पंखें की पंखुडि़यों पर अंकित किसीचिÉ की गति किसी घड़ी के सेवंफड की सुइर् की गति वतुर्ल गति के उदाहरण हैं। बिजली का पंखा अथवा घड़ी स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति नहीं कर रहे हैं। परंतु पंखे की पंखुडि़याँ घूणर्न करती हैं तथा ऐसा ही घड़ी की सुइयाँ भी करती हैं। यदि हम पंखें की पंखुडि़यांे अथवा घड़ी की सुइयांे पर कहीं किसीप्रकार का कोइर् चिÉ अंकित कर दें तो घूणर्न करते समय भी पंखें अथवा घड़ी के वेंफद्रसे इस चिÉ की दूरी समान रहेगी। 103 वुफछ प्रकरणों में कोइर् वस्तु एक निश्िचत समय अंतराल के बाद अपनी गति को दोहराती है। इस प्रकार की गति को आवतीर् गति कहते हैं। डोरी से बँध हुआ वही पत्थर लीजिए जिसे आपने ियाकलाप 7 में उपयोग किया था। अब डोरी को अपने हाथ में थामिए तथा पत्थर को डोरी से लटकने दीजिए। दूसरे हाथ से पत्थर को एक तरपफ खींचिए और पिफर स्वतंत्रा गति करने के लिए छोड़ दीजिए। यह एक लोलक है। यह लोलक मनोरंजन के साथ - साथ आवतीर् गति को समझने में हमारी सहायता करेगा। किसी लोलक की गति, वृक्ष की शाखाओं का इध्र - उध्र लहराना, झूला झूलते बच्चे की गति, सितार की डोरियों की गति, बजते समय ढोलों ;अथवा तबलोंद्ध के पृष्ठ की गति ये सभी आवतीर् गति के उदाहरण हैं जिनमें वस्तुएँ एक निश्िचत समय अंतराल के बाद अपनी गति को दोहराती हैं ;चित्रा 10.14द्ध। क्या आपने ियाकलाप 5 के एक भाग के रूप में सिलाइर् की मशीन का प्रेक्षण किया था? आपने ध्यान दिया होगा कि सिलाइर् मशीन अपनी इसी अवस्िथति पर रहती है जबकि उसका पहिया वतुर्ल गति में होता है। इसमें एक सुइर् भी होती है जो जबतक पहिया घूणर्न करता है, तब तक निरंतर ऊपर - नीचे गति करती रहती है, क्या ऐसा नहीं है? यहाँ सुइर् आवतीर् गति कर रही है। ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;मद्ध चित्रा 10.14 आवतीर् गति के उदाहरण क्या आपने पफशर् पर लुढ़कती किसी गेंद की गति़का ध्यानपूवर्क प्रेक्षण किया है? यहाँ गेंद किसी प़्ाफशर् पर लुढ़कती और घूणर्न करती हुइर् आगे की ओर गति करती है। इस प्रकार गेंद सरल रेखीय गति के साथ - साथ घूणर्न गति भी करती है। क्या आप ऐसे अन्य उदाहरण बता सकते हैं जिनमें वस्तु की गति विभ्िान्न प्रकार की गतियों से मेल करती है? इस अध्याय के अंतगर्त हमने बहुत से मापन - ियाकलाप किए हैं तथा वुफछ प्रकार की गतियों के विज्ञान विषय में चचार् की है। हमने देखा कि समय के साथ स्िथति में परिवतर्न को गति कहते हैं। स्िथति में हुए इस परिवतर्न को हम दूरी - मापन द्वारा ज्ञात कर सकते हैं। इससे हमें यह जानकारी मिलती है कि कोइर् वस्तु कितनी ध्ीमी अथवा तीव्र गति कर रही है। पफशर् पर ़घोंघे का रेंगना, तितली का एक पुष्प से दूसरे पुष्प पर वतुर्ल गति गति ैप् मात्राक मापन के मात्राक मंडराना, नदी का चिकनी गोल गुटिकाओं के उफपर अपने पथ के अनुदिश प्रवाहित होना, वायुयान का वायुमें उँफचाइयों पर उड़ना - जेट पथ चिÉ बनाना, पृथ्वी के परितः चंद्रमा द्वारा गति करना, हमारे शरीर में रुिार का परिसंचरण आदि सभी उदाहरण हमारे चारों ओर अनेक स्थानों पर होने वाली गतियों को दशार्ते हैं। 1.वायु, जल तथा थल पर उपयोग किए जाने वाले परिवहन के साध्नों में प्रत्येक के दो उदाहरण लिख्िाए। 2.रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;कद्ध एक मीटर में - - - - - - - - - - - - - - - - - - सेंटीमीटर होते हैं। ;खद्ध पाँच किलोमीटर में - - - - - - - - - - - - - - - - - - मीटर होते हैं। ;गद्ध झूले पर किसी बच्चे की गति - - - - - - - - - - - - - - - - - - होती है। ;घद्ध किसी सिलाइर् मशीन की सुइर् की गति - - - - - - - - - - - - - - - - - - होती है। ;घद्ध किसी साइकिल के पहिए की गति - - - - - - - - - - - - - - - - - - होती है। 3.पग अथवा कदम का उपयोग लंबाइर् के मानक मात्राक के रूप में क्यों नहीं किया जाता? 4.निम्नलिख्िात को लंबाइर् के बढ़ते परिमाणों में व्यवस्िथत कीजिए। 1 मीटर, 1 सेंटीमीटर, 1 किलोमीटर, 1 मिलीमीटर 5.किसी व्यक्ित की लंबाइर् 1.65 मीटर है। इसे सेंटीमीटर तथा मिलीमीटर में व्यक्त कीजिए। 6.राध के घर तथा उसके स्कूल के बीच की दूरी 3250 मीटर है। इस दूरी को किलोमीटर में व्यक्त कीजिए। 7.किसी स्वेटर बुनने की सलाइर् की लंबाइर् मापते समय स्केल पर यदि इसके एक सिरे का पाठ्यांक 3.0 सेंटीमीटर तथा दूसरे सिरे का पाठ्यांक 33.1 सेंटीमीटर है तो सलाइर् की लंबाइर् कितनी है? 8.किसी चलती हुइर् साइकिल के पहिए तथा चलते हुए छत के पंखे की गतियों में समानताएँ तथा असमानताएँ लिख्िाए। 9.आप दूरी मापने के लिए किसी लचीले पफीते का उपयोग क्यों नहीं करते? यदि आप किसी दूरी को लचीले पफीते से मापें तो अपनी माप को किसी अन्य को बताने में आपको जो समस्याएँ आएँगी उनमें से वुफछ समस्याएँ लिख्िाए। 10.आवतीर् गति के दो उदाहरण लिख्िाए। विज्ञान

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