ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिनमें हम पदाथो± के किसी मिश्रण से पदाथो± को पृथक करते हुए देखते हैं।चाय बनाते समय चाय की पिायों को द्रव से चालनित्रा ;छलनीद्ध द्वारा पृथक किया जाता है ;चित्रा 5.1द्ध। चित्रा 5.1 चाय की पिायों को चालनित्रा ;छलनीद्ध द्वारा पृथक करना सस्य कतर्न के समय अनाज को डंडियों से पृथक करते हैं। मक्खन को पृथक करने के लिए दूध् या दही का मंथन किया जाता है ;चित्रा 5.2द्ध। जैसा कि हमने अध्याय 3 में सीखा है कि रेशों से बीजों को पृथक करने के लिए हम कपास को ओटते हैं। कदाचित् आपने नमकीन दलिया अथवा पोहा खाया होगा। यदि आपने यह पाया होगा कि इसमें मिचर् है, तो खाने से पहले उन्हें सावधनीपूवर्क बाहर निकाल दिया होगा। कल्पना कीजिए कि एक टोकरी में आम और अमरूद भरे हैं और आपसे इन्हें पृथक करने के लिए कहा गया है, तो आप क्या करेंगे? इसके लिए आप एक प्रकार के पफलों को उठाकर किसी पृथक बतर्न में रख देंगे, क्या यह सही है? चित्रा 5.2 दूध् या दही का मंथन करके मक्खन निकाला जाता है। ऐसा करना सरल प्रतीत होता है, परंतु, यदि पृथक किए जाने वाले पदाथर् आम या अमरूदों की तुलना में बहुत छोटे हों तो उन्हें पृथक करने के लिए क्या करना होगा? कल्पना कीजिए, यदि आपको रेत और नमक के मिश्रण से भरा कोइर् गिलास दिया जाता है, तो मिश्रण से रेत के कणों को हाथ से बीनकर पृथक करने की सोचना भी असंभव है। ियाकलाप 1 सारणी 5.1: हम पदाथो± को पृथक क्यों करते हैं? पृथक्करण प्रक्रम उद्देश्य जिसके लिए हम पृथक्करण करते हैं पृथक्कृत अवयवों का हम क्या करते हैं? चावलों से पत्थरों को पृथक करना दो भ्िान्न परंतु उपयोगी पदाथो± को पृथक करना हम ठोस अवयव को पेंफक देते हैं। मक्खन प्राप्त करने के लिए दूध् का मंथन अनुपयोगी अवयवों को दूर करना हम अशुियों को पेंफक देते हैं। चाय की पिायाँ पृथक करना हानिकारक अवयवों अथवा अशुियों को दूर करना हम दोनों अवयवों का उपयोग करते हैं प्रक्रम का उसके उद्देश्य तथा पृथक्कृत अवयवों के उपयोग के ढंग से मिलान कर सकते हैं? हम देखते हैं कि किसी पदाथर् का उपयोग करने से पहले हमें उसमें मिश्रित हानिकारक तथा अनुपयोगी पदाथो± को पृथक करने की आवश्यकता होती है। कभी - कभी हम उपयोगी पदाथो± को भी पृथक करते हैं जिनकी हमंे अलग से उपयोग करने की आवश्यकता होती है। पृथक किए जाने वाले पदाथो± के कणों के आमाप अथवा द्रव्य भ्िान्न हो सकते हैं। ये ठोस, द्रव या गैस भी हो सकते हैं। इसलिए हम किन्हीं पदाथो± के ऐसे मिश्रण का पृथक्करण वैफसे करते हैं जिनके गुणधमो± मंे अत्यिाक भ्िान्नता है। 5.1 पृथक्करण की विध्ियाँ अब हम पदाथो± के पृथक्करण की वुफछ साधारण वििायों का उल्लेख करेंगे। इनमें से कइर् विध्ियों का उपयोग आपने अपने दैनिक ियाकलापों में किया होगा। हस्त चयन ियाकलाप 2 दुकान से खरीदे गए अनाज का एक पैकेट कक्षा में लाइए। अब अनाज को कागश की शीट पर पैफलाइए। क्या आप कागश पर एक ही प्रकार के अन्न कण पाते हैं? क्या इसमें पत्थर के टुकड़े, भूसी, टूटे हुए अन्न कण तथा अन्य खाद्य कण हैं? अब, अपने हाथ से पत्थर के टुकड़े, भूसे तथा अन्य अन्न कणों को इससे पृथक कीजिए। हस्त चयन की इस वििा का उपयोग गेहूँ, चावल तथा दालों से वुðफछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूसे को पृथक करने में किया जा सकता है ;चित्रा 5.3द्ध। ऐसी अशुियों की मात्रा प्रायः बहुत अिाक नहीं होती है। ऐसी स्िथतियों में हस्त - चयन द्वारा पदाथो± को पृथक करना एक सुविधाजनक वििा लगती है। चित्रा 5.3 अनाज से पत्थर के टुकड़ों का हस्त चयन थ्रेश्िांग आपने खेत अथवा खलिहानों में गेहूँ या चावल की सूखी डंडियों के गऋर देखे होंगे। डंडियों से अनाज को विज्ञान तोड़ना असंभव होगा। अन्नकणों को उनकी डंडियों से हवा में वंफधे की ऊँचाइर् तक ले जाकर थोड़ा - सा टेढवैफसे पृथक किया जाता है? कीजिए ताकि मिश्रण धीरे - ध्ीरे नीचे पिफसलेे। ़ा अलग करने से पहले धूप में सुखाया जाता है। प्रत्येक डंडी पर अन्नकण चिपके होते हैं। खेतों में रखे सैकड़ों गऋरों पर चिपके अन्नकणों की संख्या कीकल्पना कीजिए। कृषक अन्नकणों की डंडियों के इतने डालियों के गऋरों से अनाज को वैफसे पृथक करते हैं? आमों तथा अमरूदों को वृक्षों से तोड़ा जा सकता है। परंतु अन्नकण आम और अमरूदों की तुलना में बहुत छोटे होते हैं। इसलिए इनको इनकी डंडियों से अथवा समाचारपत्रा के ऊपर रख्िाए। मिश्रण को ध्यान से देख्िाए। क्या आप दोनों अवयवों को आसानी से पृथक कर सकते हैं? क्या दोनों अवयवों के कणों के आमाप समान हैं? क्या हस्त - चयन द्वारा इन अवयवों को पृथक करना संभव है? अब, आप इस मिश्रण को खुले मैदान में ले जाइएतथा किसी ऊँचे समतल स्थान पर खड़े हो जाइए। मिश्रण को प्लेट में अथवा समाचारपत्रा पर रख्िाए। जिस प्लेट अथवा समाचारपत्रा पर मिश्रण रखा है, उसे पकड़करडंडियों से अन्नकणों अथवा अनाश को पृथक करने के प्रक्रम को थ्रेश्िांग कहते हैं। इस प्रक्रम में डंडियों को पीटकर अन्नकणों को पृथक किया जाता है;चित्रा 5.4द्ध। कभी - कभी थ्रेश्िांग का कायर् बैलों की सहायता से किया जाता है। अत्यध्िक मात्रा के अन्नकणों को डंडियों से पृथक करने के लिए थ्रेश्िांग मशीनों का उपयोग भी किया जाता है। निष्पावन ियाकलाप 3 सूखे रेत तथा बुरादे अथवा सूखी पिायों के पाउडर का एक मिश्रण बनाइए। इस मिश्रण को किसी प्लेट क्या होता है? क्या दोनों अवयव रेत एवं बुरादा;या सूखी पिायों का पाउडरद्ध एक ही स्थान पर गिरते हंै? क्या कोइर् अवयव ऐसा है जो वायु द्वारा दूर उड़कर गिरता है? क्या वायु, मिश्रण के दोनों अवयवों को पृथक करने में सपफल हुइर्? किसी मिश्रण के अवयवों को इस प्रकार पृथक करने की विध्ि निष्पावन कहलाती है। निष्पावन का उपयोग पवनों अथवा वायु के झोंकों द्वारा मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है। साधरणतया किसान इस विध्ि का उपयोग हल्के भूसे को भारी अन्नकणों से पृथक करने के लिए करते हंै ;चित्रा 5.5द्ध। चित्रा 5.5 निष्पावन भूसे के हल्के कण पवन के साथ उड़कर दूर एकत्रा हो जाते हैं, जबकि भारी अन्नकण पृथक होकर निष्पावन प्लेटपफामर् के निकट एक ढेर बना लेते हैं। अलग हुए भूसे को पशुओं के चारे सहित अन्य कइर् प्रयोजनों में प्रयोग किया जाता है। चालन कभी - कभी हमें आटे से व्यंजन बनाने की इच्छा होती है। हमें इसमें उपस्िथत चोकर तथा अन्य अशुियों को पृथक करने की आवश्यकता होती है। तब हम क्या करते हैं? इसके लिए हम चालनी ;छन्नीद्ध का उपयोग करते हैं तथा उसमें आटा चित्रा 5.6 चालन आटे के छोटे कण चालनी के छिद्रों द्वारा निकल जाते हैं जबकि बड़ी अशुियाँ चालनी में रह जाती हैं। प्रायः आटे की मिल में गेहूँ को पीसने से पहले पत्थरों तथा भूसे जैसी अशुियों को हटाया जाता है। साधारणतया गेहूँ की बोरी को एक तिरछी चालनी पर डाला जाता है। चालन द्वारा पत्थर, डंडियाँ तथा भूसा जो निष्पावन तथा थ्रेश्िांग के बाद गेहूँ में रह जाते हैं, को दूर किया जाता है। आपने इसी प्रकार के बड़े - बड़े चालनों को भवन निमार्ण वाले स्थानों पर रेत से वंफकड़ तथा पत्थर पृथक करने के लिए उपयोग में लाते हुए देखा होगा ;चित्रा 5.7द्ध। ियाकलाप 4 कक्षा में एक चालनी ;छन्नीद्ध तथा थोड़ा - सा आटा घर से लाइए। चालन द्वारा आटे से अशुियों को पृथक कीजिए। अब चाक का पाउडर बनाइए तथा उसको आटे के साथ मिलाइए। इस मिश्रण का चालन कीजिए। क्या हम चालन द्वारा चाक पाउडर तथा आटा पृथक कर सकते हैं? चालन विध्ि का उपयोग मिश्रण के दो ऐसे अवयवों, जिनकी आमापों में अंतर हो, को पृथक करने में किया जाता है। अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन कभी - कभी मिश्रण के अवयवों को निष्पावन अथवा हस्त चयन द्वारा पृथक करना संभव नहीं होता। उदाहरण के लिए चावल तथा दाल में धूल, मि‘ी जैसे हल्के कण हो सकते हैं। चावल तथा दालों को पकाने से पहले इस प्रकार की अशुियाँ वैफसे पृथक करते हंै? प्रायः पकाने से पहले चावल या दालों को जल से धेया जाता है। जब आप चावल या दाल में जल डालते हैं तब उन पर चिपकी हुइर् अशुियाँ जैसे मिट्टðी व ध्ूल के कण पृथक हो जाते हैं। ये अशुियाँ जल में चली जाती हैं जिससे जल थोड़ा मटियाला हो जाता है। अब सोचिए, बतर्न की तली में कौन डूबेगा μ चावल या ध्ूल? क्यों? क्या आपने देखा है कि बतर्न को थोड़ा - सा टेढ़ा करके जल को बाहर गिराया जाता है? मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रक्रम को अवसादन कहते हैं। अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मि‘ी सहित उड़ेलने की िया को निस्तारण कहते हैं ;चित्रा 5.8द्ध। आइए, अब हम ऐसे अन्य मिश्रणों का पता लगाते हैं जिसमें अवयवों को अवसादन तथा निस्तारण विध्ि द्वारा पृथक किया जा सकता है। चित्रा 5.8 किसी मिश्रण के दो अवयवों को अवसादन तथा निस्तारण द्वारा पृथक करना यही सि(ांत ऐसे द्रवों के मिश्रण को पृथक करने में भी उपयोग में लाया जाता है जो आपस में मिश्रित नहीं होते। उदाहरण के लिए, तेल तथा जल को उनके मिश्रण से इसी विध्ि द्वारा पृथक किया जा सकता है। यदि द्रव के ऐसे मिश्रणों को वुफछ समय के लिए रखा रहने दिया जाए तो वे दो पृथक - पृथक परतों में बँटजाते हैं। इसके बाद जो अवयव ऊपरी परत बनाता है उसेे निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं। में डाल दीजिए। क्या चाय की सारी पिायाँ छन्नी में रह जाती हैं? इस प्रक्रम को निस्यंदन ;पिफल्टर करनाद्ध कहते हैं ;चित्रा 5.1द्ध। अब सोचिए, तैयारचाय से चाय की पिायाँ पृथक करने में निस्तारण और निस्यंदन में से कौन - सी विध्ि अच्छी है? आइए, अब हम अपने उपयोग में आने वाले जल के उदाहरण पर विचार करते हैं। क्या हम सभी को, हर समय, पीने के लिए सुरक्ष्िात जल मिलता है? कभी - कभी नलों से गंदला जल प्राप्त होता है। तालाबों तथा नदियों से एकत्रिात किया गया जल भी पंकिल हो सकता है, विशेषकर बरसात के बाद। आइए, अब हम यह देखें कि क्या हम पृथक्करण की वुफछ विध्ियों द्वारा जल से मि‘ी जैसी अविलेय अशुियाँ दूर कर सकते हैं? ियाकलाप 5 तालाब या नदी का पंकिल जल लीजिए। यदि यह न मिल सके तो एक गिलास जल में थोड़ी मि‘ी मिला दंे। इसे आध्े घंटे के लिए छोड़ दें। जल का सावधानीपूवर्क प्रेक्षण कीजिए तथा अपने प्रेक्षणों को लिख्िाए। क्या गिलास की तली में वुफछ मि‘ी बैठ गइर् है? ऐसा क्यों हुआ है? इस प्रक्रम को आप क्या कहेंगे? अब जल को बिना हिलाए गिलास को थोड़ातिरछा कीजिए। इस गिलास के ऊपर के जल को दूसरे गिलास में उड़ेलिए ;चित्रा 5.8द्ध। आप इस प्रक्रम को क्या कहेंगे? क्या दूसरे गिलास का जल अब भी पंकिल अथवा भूरे रंग का है? अब इसका निस्यंदन कीजिए। क्या आइए, पिफर से ठोस तथा द्रव के किसी मिश्रण चाय वाली छन्नी ने यह कायर् किया? आइए, कपडे़पर विचार करें। चाय तैयार करने के बाद आप चायकी पिायाँ पृथक करने के लिए क्या करते हैं? निस्तारण की विध्ि अपनाइए। इसके द्वारा वफछ ुसहायता मिलती है। परंतु क्या आपको चाय में वुफछपिायाँ अब भी मिलती हैं? अब चाय को एक छन्नी पदाथो± का पृथक्करण की सहायता से जल को निस्यंदन करने का प्रयास करते हैं। कपड़े के टुकड़े में बुने हुए तागों के बीच में छोटे - छोटे छिद्र अथवा रंध््र होते हैं। कपड़े के इन्हीं छिद्रों का उपयोग निस्यंदक के रूप में किया जा सकता है। यदि जल अब भी पंकिल है, तो अशुियों को जल भाप में बदल जाता है तथा अदृश्य हो जाता है? .िपफल्टर - पत्रा द्वारा निस्यंदित कर सकते हैं जिसमें और भी छोटे रंध््र हो सकते हैं। .िपफल्टर - पत्रा एक ऐसा निस्यंदक होता है जिसमें अत्यंत सूक्ष्म छिद्र होते हैं। चित्रा 5.9 में .िपफल्टर - पत्रा के उपयोग से संबंिात विभ्िान्न चरण दशार्ए गए हैं। .िुपफल्टर - पत्रा को शंवफ के रूप में मोड़कर कीप में लगा दिया जाता है ;चित्रा 5.10द्ध। इसके पश्चात मिश्रण को पिफल्टर - पत्रा के ऊपर उड़ेलते हैं। मिश्रण के ठोस कण इसके छिद्रों से नहीं गुजर पाते तथा .िपफल्टर - पत्रा पर ही रह जाते हंै। चित्रा 5.9 शंवुफ ;कोनद्ध बनाने चित्रा 5.10 .िपफल्टर - पत्रा के लिए .िके उपयोग से निस्यंदनपफल्टर - पत्रा को मोड़ना साधारणतयाः, पफलों तथा सब्िशयों के रसों को पीने से पहले उनसे बीजों तथा ठोस कणों को पृथक किया जाता है। निस्यंदन वििा का उपयोग घरों पर पनीर बनाने में भी होता है। आपने देखा होगा कि पनीर बनाने के लिए दूध को उबालने से पहले उसमें नींबू का रस मिलाया जाता है। इससे पनीर के ठोस कणों तथा द्रव का मिश्रण प्राप्त होता है। पनीर को इस मिश्रण से कपड़े या छन्नी से .िपफल्टर करके पृथक किया जाता है। वाष्पन ियाकलाप 6 बीकर में वुफछ जल गमर् कीजिए। जल को उबलने दीजिए। यदि आप निरंतर गमर् करते हैं तो क्या संपूणर् अब दूसरे बीकर के जल में दो चम्मच नमक डालिए तथा अच्छी तरह हिलाइए। क्या आप जल के रंग में कोइर् परिवतर्न देखते हैं? विलोडि़त करने के बाद क्या आप बीकर में कोइर् नमक देखते हो? नमक के जल से भरे बीकर को गमर् कीजिए ;चित्रा 5.11द्ध। जल को उबलकर उड़ने दीजिए। बीकर में क्या बचता है? चित्रा 5.11 नमकयुक्त जल से भरे बीकर को गरम करना इस ियाकलाप में हमने मिश्रण से जल तथा नमक को पृथक करने के लिए वाष्पन की प्रिया का प्रयोग किया है। जल को उसके वाष्प में परिवतर्न करने की प्रिया को वाष्पन कहते हैं। जहाँ पर जल होता है वाष्पन की प्रिया निरंतर होती रहती है। आपके विचार से नमक कहाँ से आता है? समुद्र के जल में अत्यध्िक मात्रा में लवण मिश्रित होते हैं। इन्हीं लवणों में से एक लवण साधरण नमक है। जब समुद्र के जल को बड़े - बड़े उथले गइों में भरकर छोड़ दिया जाता है तो सूयर् के प्रकाश से जल गमर् होकर वाष्पन द्वारा ध्ीरे - ध्ीरे वाष्प में बदलने लगता है। वुफछ समय बाद सारा जल वाष्िपत हो जाता है तथा ठोस लवण नीचे बच जाते हैं ;चित्रा 5.12द्ध। तत्पश्चात इन लवणों के मिश्रण का शोध्न करके साधरण नमक प्राप्त किया जाता है। पृथक्करण की एक से अध्िक विध्ियों का उपयोग हमने पदाथो± को पृथक करने की वुफछ वििायों के बारे में अध्ययन किया है। प्रायः किसी मिश्रण में उपस्िथत विभ्िान्न अवयवों को पृथक करने में केवल एक वििा का उपयोग पयार्प्त नहीं होता। ऐसी स्िथति में हमें एक से अिाक विध्ियों का उपयोग करने की आवश्यकता होती है। ियाकलाप 7 रेत और नमक का मिश्रण लीजिए। इसे आप वैफसे पृथक करेंगे? हमने पहले भी देखा है कि हस्त चयन विध्ि, इसके पृथक्करण के लिए व्यावहारिक नहीं होगी। इस मिश्रण को बीकर में रख्िाए तथा इसमें वुफछ जल मिलाइए। इसके बाद बीकर को वुफछ समय के लिए एक ओर रख दीजिए। क्या आप यह देखते हैं कि रेत बीकर की तली में बैठ रहा है। इसे निस्तारण या निस्यंदन द्वारा पृथक कर सकते हैं। निस्तारित द्रव में क्या है? क्या आप सोचते है कि इस जल में वही नमक है जो कि आरंभ में मिश्रण में था? अब इस निस्तारित द्रव से नमक व जल को पृथक करना है। इस द्रव को किसी केतली में भरकर इसका ढक्कन बंद करिए। अब वुफछ समय तक केतली को गमर् कीजिए। क्या आप केतली वफी टोंटी से भाप निकलती देखते हैं? पदाथो± का पृथक्करण एक धतु की प्लेट लीजिए जिस पर वुफछ बपर्फरखी हो। प्लेट को केतली की टोंटी के ठीक ऊपर पकडि़ए जैसा कि चित्रा 5.13 में दशार्या गया है। आप क्या देखते हैं? केतली के सारे जल को भाप में बदलने दीजिए। जब भाप ब.र्पफ से ठंडी की गइर् प्लेट के संपवर्फ में आती है तो वह संघनित होकर द्रव जल बन जाती है। प्लेट के नीचे से बूँद - बूँद होकर नीचे गिरने वाला यह जल संघनन द्वारा भाप बना है। जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवतिर्त होने की प्रिया को संघनन कहते हैं। क्या आपने कभी जिस पात्रा में दूध् को थोड़ी देर पहले उबाला गया था उस पर ढकी प्लेट पर संघनित जल की बूँदों को देखा है। जब सारा जल वाष्िपत हो जाता है तो पिफर, केतली में पीछे क्या छूट जाता हैै? इस प्रकार हमने मिश्रण से नमक, रेत तथा जल को निस्तारण, निस्यंदन, वाष्पन तथा संघनन विध्ियों का प्रयोग कर सपफलतापूवर्क पृथक किया है। पहेली को रेत से नमक की पुनः प्राप्ित की समस्या है। उसने नमक के संपूणर् पैकेट को रेत की थोड़ी मात्रा में मिलाया था। पिफर उसने ियाकलाप 7 में सुझाइर् गइर् विध्ि द्वारा नमक को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। परंतु उसने यह पाया कि वह तो लिए गए नमक के केवल थोड़े भाग की ही पुनः प्राप्ित कर पाइर् है। उससे कहाँ त्राुटि हुइर् होगी? क्या जल किसी पदाथर् की कितनी भी मात्रा को घोल सकता है? अध्याय 4 में हमने पाया कि कइर् पदाथर् जल में घुलकर विलयन बनाते हैं। तब हम उन पदाथो± को जल में विलेयी कहते हैं। यदि हम जल की मात्रा निश्िचत रखकर उस पदाथर् की मात्रा निरंतर बढ़ाते जाएँ, तो क्या होगा? ियाकलाप 8 इस कायर् के लिए आपको एक बीकर अथवा गिलास, एक चम्मच, नमक तथा जल की आवश्यकता होगी। आध कप जल बीकर में उड़ेलिए। एक चम्मच नमक इसमें डालकर तब तक विलोडि़त कीजिए जब तक कि यह पूरी तरह से न घुल जाए ;चित्रा 5.14द्ध। अब पिफर एक चम्मच नमक डालिए और भली - भाँति विलोडित़कीजिए। इसी प्रकार एक - एक चम्मच करके नमक मिलाते तथा विलोडि़त करते जाइए। वुफछ चम्मच भर नमक मिलाने के बाद क्या आप यह पाते हैं कि वुफछ अविलेयी नमक बच जाता है और बीकर की तली में बैठ जाता है? यदि हाँ, तो इसका अथर् यह हुआ कि अब इस जल में अध्िक नमक नहीं घुल सकता। अब यह विलयन संतृप्त विलयन कहलाता है। यहाँ एक संकेत है जो यह बताता है कि उस समय संभवतः क्या गलत हुआ जब पहेली ने रेत में अध्िक मात्रा में मिले नमक की पुनः प्राप्ित का प्रयास किया था। कदाचित् नमक की मात्रा संतृप्त विलयन बनाने के लिए आवश्यक मात्रा से बहुत अध्िक थी। अविलेय नमक रेत के साथ मिला रह गया है जिसे पुनः प्राप्त नहीं किया जा सका। वह अध्िक मात्रा मंे जल का उपयोग करके अपनी समस्या हल कर सकती थी। कल्पना कीजिए कि उसके पास मिश्रण में सारे नमक को घोलने के लिए पयार्प्त मात्रा में जल नहीं है। क्या किसी अन्य उपाय द्वारा जल की उसी मात्रा में, संतृप्त विलयन बनने से पूवर्, पहले से अध्िक नमक घोला जा सकता है। आइए हम पहेली की सहायता करने का प्रयास करें। ियाकलाप 9 बीकर में वुफछ जल लीजिए तथा उसमें तब तक नमक मिलाइए जब तक कि इसमें और नमक न घुल सके। इस प्रकार हमें नमक का जल में संतृप्त विलयन प्राप्त होता है। अब इस संतृप्त विलयन में कम मात्रा में नमक मिलाइए और इसे गमर् कीजिए। आप क्या पाते हैं? बीकर की तली वाले नमक का क्या हुआ? क्या अब यह घुल गया है? यदि हाँ, तो क्या इस विलयन को गमर् करने पर इसमें और अिाक नमक घोला जा सकता है? इस गमर् विलयन को ठंडा होने दीजिए। क्या बीकर की तली में नमक पुनः बैठता दिखाइर् देता है? यह ियाकलाप सुझाता है कि गमर् करने पर नमक की अध्िक मात्रा घोली जा सकती है। क्या जल में विभ्िान्न विलेय पदाथो± की समान मात्रा घुलती है? आइए पता लगाते हैं। ियाकलाप 10 दो गिलास लीजिए और प्रत्येक में आध कप पानी भरिए। एक गिलास में एक चम्मच नमक मिलाइए और सारणी: 5.2 इस ियाकलाप को चीनी से दोहराइए। आप इसको पदाथर् नमक चीनी जल में घुलने वाले पदाथर् की मात्रा ;चम्मचों की संख्याद्ध जल में विलेय अन्य पदाथो± से भी दोहरा सकते हैं। सारणी 5.2 से आप क्या जानकारी प्राप्त करते हैं? क्या आपने पाया कि जल विभ्िान्न पदाथो± की भ्िान्न - भ्िान्न मात्रा को घोलता है? हमने पदाथो± के पृथक्करण की वुफछ विध्ियांे के विषय मेें चचार् की है। इस अध्याय में प्रस्तुत पृथक्करण की वििायांे का उपयोग विज्ञान प्रयोगशालाआंे में भी तब तक विलोडित कीजिए, जब तक कि वह घुल न किया जाता है। ़जाए। एक - एक चम्मच नमक की मात्रा विलयन संतृप्त हमने यह भी सीखा कि पदाथर् को द्रव में घोलने होने तक डालते जाइए। नमक के चम्मचों की संख्या, से विलयन बनता है यदि विलयन में और पदाथर् न जो कि घोली गइर् है, को सारणी 5.2 में लिख्िाए। अब घुल सवेंफ तो यह संतृप्त विलयन कहलाता है। मंथन संघनन निस्तारण वाष्पन निस्यंदन संतृप्त विलयन अवसादन चालन विलयन थ्रेश्िांग हस्त चयन निष्पावन ऽ द्रव तथा उसमें अविलेय पदाथर् के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है। ऽ किसी द्रव को उसी वाष्प में परिवतिर्त करने की प्रिया को वाष्पन कहते हैं। वाष्पन की विध्ि का उपयोग द्रव में घुले ठोस को पृथक करने में किया जा सकता है। ऽ जिस विलयन में कोइर् पदाथर् और अध्िक न घुल सके वह उस पदाथर् का संतृप्त विलयन होता है। ऽ किसी पदाथर् के विलयन को गमर् करने पर उसमें और अध्िक पदाथर् घोला जा सकता है। ऽ जल विलेय पदाथो± की विभ्िान्न मात्राएँ घोलता है। 1 हमंे किसी मिश्रण के विभ्िान्न अवयवांे को पृथक करने की आवश्यकता क्यों होती है? दो उदाहरण लिख्िाए। 2 निष्पावन से क्या अभ्िाप्राय है? यह कहाँ उपयोग किया जाता है? 3 पकाने से पहले दालों के किसी नमूने से आप भूसे एवं धूल के कण वैफसे पृथक करेंगे? 4 छालन से क्या अभ्िाप्राय है? यह कहाँ उपयोग होता है? 5 रेत और जल के मिश्रण से आप रेत तथा जल को वैफसे पृथक करेंगे? 6 आटे और चीनी के मिश्रण से क्या चीनी को पृथक करना संभव है? अगर हाँ, तो आप इसे वैफसे करेंगे? 7 पंकिल जल के किसी नमूने से आप स्वच्छ जल वैफसे प्राप्त करेंगे? 8 रिक्त स्थानों को भरिए: ;कद्ध धान के दानों को डंडियों से पृथक करने की विध्ि को - - - - - - - - - - - - - - - - - - कहते हैं। ;खद्ध किसी एक कपड़े पर दूध् को उड़ेलते हैं तो मलाइर् उस पर रह जाती है। पृथक्करण की यह प्रिया - - - - - - - - - - - - - - - - - - कहलाती है। ;गद्ध समुद्र के जल से नमक - - - - - - - - - - - - - - - - - - प्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है। ;घद्ध जब पंकिल जल को पूरी रात एक बाल्टी में रखा जाता है तो अशुियाँ तली में बैंठ जाती हैं।इसके पश्चात स्वच्छ जल को ऊपर से पृथक कर लेते हैं। इसमें उपयोग होने वाली पृथक्करण की प्रिया को - - - - - - - - - - - - - - - - - - कहते हैं। 9. सत्य अथवा असत्य? ;कद्ध दूध् और जल के मिश्रण को निस्यंदन द्वारा पृथक किया जा सकता है। ;खद्ध नमक तथा चीनी के मिश्रण को निष्पावन द्वारा पृथक कर सकते हैं। ;गद्ध चाय की पिायों को चाय से पृथक्करण निस्यंदन द्वारा किया जा सकता है। ;घद्ध अनाज और भूसे का पृथक्करण निस्तारण प्रक्रम द्वारा किया जा सकता है। 10.जल में चीनी तथा नींबू का रस मिलाकर श्िावंफजी बनाइर् जाती है। आप ब.पर्फ डालकर इसे ठंडा करना चाहते हैं, इसके लिए श्िाकंजी में ब.पर्फ चीनी घोलने से पहले डालेंगे या बाद में? किस प्रकरण में अध्िक चीनी घोलना संभव होगा? ‘निस्पावन करने वाले’ गुस्ताव कोरबेट की एक पेंटिंग ;1853द्ध। मुसी डे बीयस आटर््स, नान्ते ;प्रफांसद्ध के सौजन्य से।

RELOAD if chapter isn't visible.