भोजन के घटक अध्याय 1 में हमने उन खाद्य पदाथो± की सूची बनाइर् थी, जिन्हें हम खाते हैं। भारत के विभ्िान्न भागांे में खाए जाने वाले भ्िान्न - भ्िान्न व्यंजनांे के बारे में भी हमने बताया था तथा इन्हें मानचित्रा में अंकित किया था। एक प्रकार के भोजन में चपाती, दाल और बैंगन का भरता हो सकता है तो दूसरे में चावल, सांबर तथा भ्िांडी हो सकती है। इसके अतिरिक्त अन्य भोजन में अप्पम, मछली तथा सब्िजयाँ हो सकती हैं। ियाकलाप 1 आमतौर पर हमारे आहार में अन्न से बना कम से कम एक व्यंजन होता है। दूसरे खाद्य पदाथो± में दाल या मांस का कोइर् व्यंजन तथा सब्जी हो सकती है। इसमें दही, मट्टòा तथा अचार भी शामिल हो सकते हैं। इस तरह के आहार के वुफछ उदाहरण सारणी 2.1 में दिए गए हैं। अध्याय 1 में प्रस्तावित ियाकलाप 2 में आपके द्वारा सारिणी में दशार्ए गए व्यंजन छाँटिए। इस सूची में वुफछ अन्य व्यंजन जोडि़ए तथा इसे सारणी 2.1 में दशार्इर् गइर् विध्ि से पूरा कीजिए। कभी - कभी हम अपने भोजन में वस्तुतः इन सभी व्यंजनों को नहीं ले पाते। यदि हम यात्रा में हों तब हम वही खा लेते हैं जो रास्ते में उपलब्ध् हो। हममें से वुफछ लोगों के लिए यह संभव नहीं हो पाता है कि इस तरह के विविध् व्यंजन हर समय खा सवेंफ। आहार में विभ्िान्न खाद्य पदाथो± के इस तरह के वितरण का कोइर् न कोइर् आधर होना चाहिए। क्या हमारे शरीर को विशेष प्रयोजन के लिए विभ्िान्न प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है? 2.1 विभ्िान्न प्रकार के खाद्य पदाथो± में क्या होता है? हम जानते हंै कि प्रत्येक व्यंजन एक या एक से अिाक प्रकार की कच्ची सामग्री से बना होता है, जो हमें पादपों या जंतुओं से मिलते हैं। इस कच्ची सामग्री के संघटक क्या हैं? इस कच्ची सामग्री में हमारे शरीर के लिए वुफछ आवश्यक घटक होते हंै। इन घटकांे को हम पोषक कहते हैं। हमारे भोजन में मुख्य पोषक कृ काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज - लवण हैं। इसके अतिरिक्त हमारे भोजन में रुक्षांश तथा जल भी शामिल हैं, जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता है। सारणी 2.1: विभ्िान्न क्षेत्रांे/राज्यों के वुफछ सामान्य भोजन क्षेत्रा/राज्य अन्न का व्यंजन दाल/मांस का व्यंजन सब्िजयाँ अन्य व्यंजन पंजाब मक्के की रोटी राजमा सरसों का साग दही, घी आंध््रप्रदेश चावल अरहर की दाल तथा रसम ;चारूद्ध वुंफदरू मट्टòा, घी, अचार क्या सभी खाद्य पदाथो± में ये सभी पोषक उपलब्ध् होते हंै? वुफछ साधरण विध्ियों से हम यह जान सकते हैं कि कच्ची सामग्री या पके हुए भोजन में कौन - सा एक या अध्िक पोषक उपस्िथत है। काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के परीक्षण, अन्य पोषकों के परीक्षणांे की अपेक्षा सरल हंै। आइए, हम इन परीक्षणांे को करके प्रेक्षणांे को सारणी 2.2 में लिखें। इन परीक्षणों को करने के लिए आपको आयोडीन, काॅपर सल्पेफट तथा काॅस्िटक सोडा विलयनों की आवश्यकता होगी। आपको वुफछ परखनलियों तथा एक ड्राॅपर की भी आवश्यकता होगी। इन परीक्षणांे को पके हुए भोजन तथा कच्ची सामग्री पर करंे। इन परीक्षणांे से प्राप्त प्रेक्षणांे को सारणी 2.2 में दशार्ए गए तरीके से लिख सकते हैं। इस सारणी में वुफछ खाद्य पदाथर् दशार्ए गए हैं। अपना परीक्षण इन पर या अन्य किसी उपलब्ध् खाद्य पदाथर् पर कर सकते हैं। इन परीक्षणांे को सावधनी से कीजिए और किसी भी रसायन को खाने या चखने का प्रयास मत कीजिए। यदि आवश्यक विलयन तत्काल उपलब्ध् नहीं हैं तो आपके अध्यापक निम्न विध्ि से उन्हें तैयार करा सकते हैं। आइए, विभ्िान्न खाद्य पदाथो± की जाँच करके देखें कि किसमें काबोर्हाइड्रेट उपस्िथत हैं। काबोर्हाइड्रेट कइर् प्रकार के होते हैं। हमारे भोजन में पाए जाने वाले मुख्य काबोर्हाइड्रेट, मंड तथा शवर्फरा के रूप में होते हैं। यदि किसी खाद्य पदाथर् में मंड है तो हम इसका आसानी से परीक्षण कर सकते हंै। आयोडीन का तनु विलयन बनाने के लिए जल से आधी भरी परखनली में वुफछ बूँदें टिंचर आयोडीन की मिला दीजिए। काॅपर सल्पफेट विलयन, 100 मिलीलीटर जल में 2 ग्राम काॅपर सल्पफेट घोलने से बन जाता है। 100 मिलीलीटर जल में 10 ग्राम काॅस्िटक सोडा घोलने से हमें अभीष्ठ काॅस्िटक सोडा विलयन मिल जाएगा। ियाकलाप 2 मंड के लिए परीक्षण परीक्षण के लिए खाद्य पदाथर् या कच्ची सामग्री की अल्प मात्रा लीजिए। इसमें तनु आयोडीन विलयन की 2 या 3 बँूदें डालिए ;चित्रा 2.1द्ध। खाद्य पदाथर् के रंग में होने वाले परिवतर्न को देख्िाए। क्या यह नीला या काला हो गया है? यह नीला या काला रंग, मंड की उपस्िथति दशार्ता है। इस परीक्षण को किसी अन्य खाद्य पदाथर् के साथ दोहराइए और जाँच कीजिए कि किसमें मंड है। अपने प्रेक्षणों को सारणी 2.2 में लिख्िाए। प्रोटीन के लिए परीक्षण प्रोटीन के परीक्षण के लिए किसी खाद्य पदाथर् की थोड़ी मात्रा लीजिए। जिस खाद्य पदाथर् का परीक्षण करना है, यदि वह ठोस है तो पहले उसका पेस्ट अथवा चूणर् बनाने की आवश्यकता होती है। खाद्य पदाथर् की थोड़ी मात्रा को पीसकर या मसलकर उसके चूणर् को एक सापफ परखनली में डाल दें और दस बूँद जल डालकर उसे अच्छी तरह हिलाएँ। अब ड्राॅपर की सहायता से परखनली में दो बूँद काॅपर सल्पेफट वफा विलयन तथा दस बँूद कास्िटक सोडा वफा विलयन डालिए ;चित्रा 2.2द्ध। अच्छी तरह हिलाकर वुफछ मिनट के लिए परखनली को रख दीजिए। आपने क्या देखा? क्या परखनली का पदाथर् बैंगनी रंग का हो गया? बैंगनी रंग खाद्य पदाथर् में प्रोटीन की उपस्िथति दशार्ता है। अब, आप इस परीक्षण को किसी दूसरे खाद्य पदाथर् के साथ दोहरा सकते हैं। वसा के लिए परीक्षण खाद्य पदाथर् की अल्प मात्रा लीजिए। इसे एक कागश के टुकड़े में लपेटकर वूफटिए। ध्यान रखें, कागश पफट न जाए। अब कागश को सीध कीजिए और ध्यानपूवर्क देख्िाए। क्या इस पर तेल के ध्ब्बे हैं? कागश को किसी प्रकाश के सामने लाएँ। क्या आपको इस ध्ब्बे से होकर आने वाला धुँध्ला प्रकाश दिखाइर् देता है? सारिणी 2.2: खाद्य पदाथो± मंे उपस्िथत पोषक खाद्य पदाथर् मंड ;उपस्िथतद्ध प्रोटीन ;उपस्िथतद्ध वसा ;उपस्िथतद्ध कच्चा आलू हाँ दूध् हाँ मूँगपफली हाँ बिना पका चावल ;चूणर्द्ध पका हुआ चावल सूखा नारियल बिना पकी अरहर की दाल ;चूणर्द्ध पकी हुइर् दाल किसी सब्जी का एक टुकड़ा किसी पफल का एक टुकड़ा उबला अंडा ;सप़्ोफद भागद्ध कागश पर तेल का ध्ब्बा खाद्य पदाथर् में वसा की उपस्िथति दशार्ता है। खाद्य पदाथर् में कभी - कभी जल की भी वुफछ मात्रा हो सकती है। इस दशा में, इन पदाथो± को कागश पर ध्ीरे - ध्ीरे रगडि़ए और वुफछ समय के लिए कागश को सुखा दीजिए ताकि यदि खाद्य पदाथर् से वुफछ जल आया हो तो वह सूख जाए। इसके बाद यदि कागश पर तेल का कोइर् ध्ब्बा न रहे तो, यह पता चलता है कि खाद्य पदाथर् में वसा उपस्िथत नहीं है। ये परीक्षण क्या दशार्ते हंै? क्या वसा, प्रोटीन तथा मंड उन सभी खाद्य पदाथो± में उपस्िथत है जिनका आपने परीक्षण किया है? क्या एक खाद्यपदाथर् में एक से अध्िक पोषक तत्त्व उपस्िथत होते हैं? क्या आपने कोइर् ऐसा खाद्य पदाथर् पायाजिसमें इनमें से कोइर् भी पोषक तत्त्व उपस्िथत न हो? हमने तीन पोषकों कृ काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के लिए खाद्य पदाथो± का परीक्षण किया था। विटामिन तथा खनिज लवण जैसे अन्य पोषक भी हमारे विभ्िान्न खाद्य पदाथो± में उपस्िथत रहते हैं। इन सभी पोषकों की हमें क्यांे आवश्यकता होती है? 2.2 विभ्िान्न पोषक हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं? काबोर्हाइड्रेट मुख्य रूप से हमारे शरीर को उफजार् प्रदान करते हैं। वसा से भी उफजार् मिलती है। वास्तविकता यह है कि काबोर्हाइड्रेट की तुलना में वसा की समान मात्रा से हमें अध्िक ऊजार् प्राप्त होती है। वसा और भोजन के घटक चित्रा 2.6 विटामिन । के वुफछ स्रोत यकृत चित्रा 2.7 विटामिन ठ के वुफछ स्रोत मिचर् अमरूदसंतरा टमाटर नींबू आँवला चित्रा 2.8 विटामिन ब् के वुफछ स्रोत चित्रा 2.9 विटामिन क् के वुफछ स्रोत की अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। विटामिन । हमारी त्वचा तथा आँखों को स्वस्थ रखता है। विटामिन ब् बहुत - से रोगों से लड़ने में हमारी मदद करता है। विटामिन क् हमारी अस्िथयों और दाँतांे के लिए वैफल्िसयम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता है। विभ्िान्न विटामिनों से भरपूर भोजन, चित्रा 2.6 से चित्रा 2.9 में दिखाए गए हैं। विज्ञान आयोडीन के वुफछ स्रोत पफास्पफोरस के वुफछ स्रोत लोह के वुफछ स्रोत वैफल्िसयम के वुफछ स्रोत चित्रा 2.10 वुफछ खनिज - लवणों के स्रोत हमारे शरीर को खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती है। शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक खनिज लवण आवश्यक हैं। विभ्िान्न खनिज लवणों के वुफछ स्रोतों को चित्रा 2.10 में दशार्या गया है। अिाकांश खाद्य पदाथो± में एक से अध्िक पोषक होते हैं। आपने भी सारणी 2.2 में प्रेक्षणांे को लिखते समय इस बात को अवश्य देखा होगा। पिफर भी किसी कच्ची सामग्री में एक निश्िचत पोषक की मात्रा दूसरे पोषकों की मात्रा से अिाक हो सकती है। उदाहरणतः चावल में काबोर्हाइड्रेट की मात्रा दूसरे पोषकों से अध्िक होती है। इस आधर पर हम यह कह सकते हैं कि चावल काबोर्हाइड्रेट समृ( भोजन है। इन पोषकों के अलावा हमारे शरीर को आहारी रेशों तथा जल की भी आवश्यकता होती है। आहारी रेशे रुक्षांश के नाम से भी जाने जाते हैं। हमारे खाने में रुक्षांश की पूतिर् मुख्यतः पादप उत्पादों से होती है। रुक्षांश के मुख्य स्रोत साबुत खाद्यान्न, दाल, आलू, ताशे पफल और सब्िजयाँ हैं। रुक्षांश हमारे शरीर को कोइर् पोषक प्रदान नहीं करते हैं, पिफर भी यह हमारे भोजन का आवश्यक अवयव है और इसका आयतन बढ़ा देते हैं। रुक्षांश बिना पचे भोजन को बाहर निकालने में हमारे शरीर की सहायता करता है। 13 जल भोजन में उपस्िथत पोषकों को अवशोष्िात करने में हमारे शरीर की सहायता करता है। यह वुफछ अपश्िाष्ट - पदाथो±, जैसे कि मूत्रा तथा पसीने को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। सामान्यतः हमारे शरीर को जितने जल की आवश्यकता होती है, वह हमें उन वस्तुओं से प्राप्त होता है जिन्हें हम द्रव रूप में लेते हैं, जैसे कि जल, दूध् और चाय आदि। इसके अतिरिक्त हम जो भी भोजन पकाते हैं उसमें भी पानी का प्रयोग किया जाता है। आइए देखंेे कि क्या कोइर् अन्य स्रोत हमारे शरीर को जल प्रदान करता है? ियाकलाप 3 एक टमाटर अथवा नींबू जैसा कोइर् पफल लें। इसे छोटे - छोटे हिस्सों में काट लें। क्या ऐसा करते समय आपके हाथ गीले होते हैं? जब भी आपके घर में किसी पफल या सब्जी को काटा, छीला या मसला जाता है तब ध्यानपूवर्क उसका निरीक्षण करें। क्या ऐसा करते समय आपको किसी ऐसे ताशे पफल या सब्जी के बारे में पता चलता है जिसमें पानी की मात्रा नहीं होती? हम देखते हैं कि कइर् खाद्य पदाथो± में जल होता है। वुफछ सीमा तक हमारे शरीर के लिए आवश्यक जल की पूतिर् इसी जल से हो जाती है। इसके अतिरिक्त कइर् खाद्य पदाथो± को पकाते समय हम उसमें जल डालते हैं। 2.3 संतुलित आहार सामान्यतः पूरे दिन में जो वुफछ भी हम खाते हैं, उसे आहार कहते हैं। हमारे शरीर की वृि और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हमारे आहार में वे सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में होने चाहिए जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता है। कोइर् भी पोषक तत्व न आवश्यकता से अध्िक हो और न ही कम। हमारे आहार में पयार्प्त मात्रा में रुक्षांश तथा जल भी होना चाहिए। इस प्रकार के आहार वफो संतुलित आहार कहते हैं। क्या आप सोचते हैं कि प्रत्येक आयु वगर् के लोगांे को एक ही प्रकार के आहार की आवश्यकता होती है? क्या आप यह भी सोचते हैं कि हमारा संतुलित आहार हमारे शारीरिक कायर् पर निभर्र करता है? एक सप्ताह की अवध्ि में आप जो भी खाते हैं, उसका एक चाटर् तैयार कीजिए। जाँच कीजिए कि प्रतिदिन जो भोजन आप करते हैं क्या उसमेंसभी पोषक तत्त्व उपस्िथत हैं? दालें, मूँगपफली, सोयाबीन, अंवुफरित बीज ;मूँग व चनाद्ध, किण्िवत भोजन ;दक्ष्िाण भारतीय भोजन जैसे, इडलीद्ध, आटे का मिश्रण ;मिस्सी रोटी, थेपला - अनाजव दालों से बनाद्ध केला, पालक, सत्तू, गुड़, उपलब्ध् सब्िजयाँ तथा इसी प्रकार के अन्य भोजन, कइर् पोषक उपलब्ध् कराते हैं। इसलिए कोइर् व्यक्ित अल्प व्यय में भी संतुलित आहार खा सकता है। उचित प्रकार का भोजन करना ही पयार्प्त नहीं है। इसे उचित तरीके से पकाना भी चाहिए ताकि इसके पहेली यह जानने के लिए उत्सुक है कि क्या जंतुओं के भोजन में भी ये सभी अवयव होते हैं और क्या उन्हें भी संतुलित भोजन की आवश्यकता है। पोषक तत्त्व नष्ट न हों। क्या आप जानते हैं कि पकाते समय वुफछ पोषक नष्ट हो जाते हैं? छिलका उतार कर यदि सब्िजयों और पफलों को धोया जाता है तो यह संभव है कि उनके वुफछ विटामिन नष्ट हो जाएँ। सब्िजयों और पफलों की त्वचा में कइर् महत्वपूणर् विटामिन तथा खनिज - लवण होते हैं। चावल और दालों को बार - बार धेने से उनमें उपस्िथत विटामिन और वुफछ खनिज - लवण अलग हो सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि पकाने से भोजन का स्वाद बढ़ता है तथा इसे पचाने में आसानी होती है। इसकेसाथ - साथ पकाने में वुफछ पोषक तत्त्वों की हानि भी हो सकती है। यदि भोजन पकाने में अत्यध्िक जल का उपयोग किया जाता है और बाद में उसे पेंफक दिया जाता है तो कइर् लाभदायक प्रोटीन तथा खनिज - लवणों की हानि हो जाती है। पकाने में विटामिन ब् आसानी से गमीर् से नष्ट हो जाता है। क्या यह उचित नहीं होगा कि हम अपने आहार में पफल और कच्ची सब्िजयों को सम्िमलित करें? बूझो ने सोचा कि हर समय वसायुक्त खाना ही सवोर्तम भोजन है। एक कटोरी काबोर्हाइड्रेटयुक्त भोजन की अपेक्षा एक कटोरी वसायुक्त भोजनअिाक ऊजार् देगा। क्या ऐसा नहीं होता? अतः उसने तली हुइर् चीजें समोसा, पूरी, मलाइर्, रबड़ी, पेड़ा आदि प्रचुर वसायुक्त भोजन ही खाया और इसके अलावा वुफछ नहीं खाया। क्या आप सोचते हैं कि वह ठीक था? निःसंदेह, नहीं। इतना अध्िक वसायुक्त भोजन खाना हमारे लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। हमारे भोजन में वसा की मात्रा अत्यध्िक मोटापे का कारण बनती है। 2.4 अभावजन्य रोग एक व्यक्ित खाने के लिए पयार्प्त भोजन पा रहा है, लेकिन कभी - कभी उसके भोजन में किसी विशेष पोषक की कमी हो जाती है। यदि यह कमी लंबी अवध्ि तक रहती है तो वह व्यक्ित उसके अभाव से ग्रसित हो सकता है। एक या अध्िक पोषक तत्त्वों काअभाव हमारे शरीर में रोग अथवा विकृतियाँ उत्पन्न कर सकता है। वे रोग जो लंबी अवध्ि तक पोषकों के अभाव के कारण होते हैं, उन्हें अभावजन्य रोग कहते हंै। यदि कोइर् व्यक्ित अपने भोजन में पयार्प्त प्रोटीन नहीं ले रहा है तो उसे वुफछ रोग हो सकते हैं जैसे वृि का अवरु( होना, चेहरे पर सूजन, बालों के रंग का उड़ना, त्वचा की बीमारियाँ और पेचिश आदि। यदि प्रोटीन तथा काबोर्हाइड्रेट दोनों ही किसी व्यक्ित के आहार से एक लंबे समय तक अनुपस्िथत रहें तो उसकी वृि पूरी तरह से अवरु( हो जाएगी। ऐसा व्यक्ित बहुत दुबला - पतला हो जाएगा। वह इतना दुबर्ल हो जाएगा कि चलने में भी असमथर् होगा। विभ्िान्न विटामिनों और खनिज लवणों के अभावसे विभ्िान्न रोग अथवा विकृतियाँ हो सकती हैं। इनमें से वुफछ सारणी 2.3 में दशार्ए गए हैं। सभी अभावजन्य रोगों की रोकथाम संतुलित आहार लेने से की जा सकती है। इस अध्याय में हमने स्वयं से यह जानने की कोश्िाश की कि विभ्िान्न क्षेत्रों के भोजन में इतनी अध्िक विविध्ता होते हुए भी आहार में पोषकतत्त्वों का वितरण सामान्य है। यह वितरण हमारेभोजन में आवश्यक पोषक तत्त्वों की उपस्िथति सुनिश्िचत करता है। संतुलित आहार उफजार् पोषक स्कवीर् मंड विटामिन 1.हमारे भोजन के मुख्य पोषक तत्त्वों के नाम लिख्िाए। 2.निम्नलिख्िात के नाम लिख्िाएः ;कद्धपोषक जो मुख्य रूप से हमारे शरीर को उफजार् देते हैं। ;खद्ध पोषक जो हमारे शरीर की वृि और अनुरक्षण के लिए आवश्यक हंै। ;गद्धवह विटामिन जो हमारी अच्छी दृष्िट के लिए आवश्यक है। ;घद्ध वह खनिज जो अस्िथयों के लिए आवश्यक है। 3.दो ऐसे खाद्य पदाथो± के नाम लिख्िाए जिनमें निम्न पोषक प्रचुर मात्रा मंे उपलब्ध् होते हैंः ;कद्ध वसा ;खद्ध मंड ;गद्ध आहारी रेशे ;घद्ध प्रोटीन 4.इनमें सही कथन कोे ;√द्ध अंकित कीजिए: ;कद्धकेवल चावल खाने से हम अपने शरीर की पोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। ; द्ध ;खद्ध संतुलित आहार खाकर अभावजन्य रोगों की रोकथाम की जा सकती है। ; द्ध ;गद्धशरीर के लिए संतुलित आहार में नाना प्रकार के खाद्य पदाथर् होने चाहिए। ; द्ध ;घद्ध शरीर को सभी पोषक तत्त्व उपलब्ध् कराने के लिए केवल मांस पयार्प्त है। ; द्ध 5.रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएः ;कद्ध - - - - - - - - - - - - - - - - - - विटामिन क् के अभाव से होता है। ;खद्ध - - - - - - - - - - - - - - - - - - की कमी से बेरी - बेरी नामक रोग होता है। ;गद्धविटामिन ब् के अभाव से - - - - - - - - - - - - - - - - - - नामक रोग होता है। ;घद्ध हमारे भोजन में - - - - - - - - - - - - - - - - - - के अभाव से रतौंध्ी होती है।

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