6 पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप आपने इसमें वुफछ स्थलरूपों को जरूर देखा होगा जो चित्रा 6.1 में दिखाए गए हैं। आप देखेंगे कि पृथ्वी की सतह सभी जगह एकसमान नहीं है। पृथ्वी पर अनगिनत प्रकार के स्थलरूप हैं। स्थलमंडल केवुफछ भाग ऊँचे - नीचे तथा वुफछ समतल होते हैं। ये स्थलरूप दो प्रियाओं के परिणामस्वरूप बनते हैं। आपको यह जानकर आश्चयर् होगा कि मैदान जिस पर आप खड़े हैं, उसमें धीरे - धीरे गति हो रही है। पृथ्वी के अंदर लगातार गति हो रही है। प्रथम या आंतरिक प्रिया के कारण बहुत से स्थानों पर पृथ्वी कीसतह कहीं ऊपर उठ जाती है तो कही धँस जाती है। चित्रा 6ण्1 रू विभ्िान्न स्थलरूप क्या आप जानते हैं? पहाड़ी वह स्थलीय भाग है जो कि आस - पास की भूमि से ऊँची उठी होती है। 600 मीटर से अिाकऊँचाइर् एवं खड़ी ढाल वाली पहाड़ी को पवर्त कहा जाता है। 8,000 मीटरसे ऊँचे वुफछ पवर्तों के नाम बताएँ। कहा जाता है। बहुत से पवर्तीय तंत्रा समानांतर शृंखलाओं के क्रम मेंहोते हैं जो सैकड़ों किमी. में पैफले होते हैं। हिमालय, आल्प्स तथाक्रमशः एश्िाया, यूरोप तथा दक्ष्िाण अमेरिका की पवर्त शृंखलाएँतार्ंे की ऊँचाइर् एवं आकार में भ्िान्नता होती है।पवर्त तीन प्रकार के होते हैं - वलित पवर्त, भ्रंशोत्थ पवर्त तथा ज्वालामुखी पवर्त। हिमालय तथा आल्प्स वलित पवर्त हैं जिनकीसतह उफबड़ - खाबड़ तथा श्िाखर शंक्वाकार है। भारत की अरावलीशृंखला विश्व की सबसे पुरानी वलित पवर्त शृंखला है। अपरदन कीशृंखला घ्िास गइर् है। उत्तरी अमेरिका केअप्लेश्िायन तथा रूस ;चित्रा 5.1द्ध के यूराल पवर्त गोलाकार दिखाइर्देते हैं एवं इनकी ऊँचाइर् कम है। ये बहुत पुराने वलित पवर्त हैं।जब बहुत बड़ा भाग टूट जाता है तथा ऊध्वार्धर रूप से विस्थापितहो जाता है तब भ्रंशोत्थ पवर्तों का निमार्ण होता है। ऊपर उठे हुएखंड को उत्खंड ;हास्टर्द्ध तथा नीचे धँसे हुए खंडों को द्रोण्िाका भं्रश;ग्राबेनद्ध कहा जाता है। यूरोप कीराइर्न घाटी तथा वाॅसजेस पवर्त इसतरह के पवर्त तंत्रा के उदाहरण हैं।एटलस में दिए गए विश्व मानचित्रासे उनकी स्िथति को देख्िाए तथाइस प्रकार की भू - आवृफतियों के वुफछऔर उदाहरणों का पता लगाइए।ज्वालामुखी पवर्त ज्वालामुखीियाओं के कारण बनते हैं। अप्रफीकाका माउंट किलिमंजारो तथा जापानका फ्रयूजियामा इस तरह के पवर्तोंपवर्त बहुत लाभदायक होते हैं।पवर्त जल के संग्रहागार होते हैं। बहुत - सी नदियों का स्रोत पवर्तों मेंस्िथत हिमानियों में होता है। जलाशयों के जल को लोगों तक पहुँचायाजाता है। पवर्तों के जल का उपयोग सिंचाइर् तथा पनबिजली केउत्पादन में भी किया जाता है। नदी घाटियाँ तथा वेदिकाएँ वृफष्िा केलिए उपयुक्त होती हैं। पवर्तों में अलग - अलग प्रकार की वनस्पतियाँतथा जीव - जंतु पाए जाते हैं। वनों से हमें ईंधन, चारा, आश्रय तथा दूसरेउत्पाद जैसे गोंद, रेजिन इत्यादि प्राप्त होते हैं। सैलानियों के लिएपवर्तीय भाग उपयुक्त स्थान हैं। वे पवर्तों की यात्रा उनकी प्रावृफतिकसुंदरता को देखने के लिए करते हैं। विभ्िान्न प्रकार के खेलऋ जैसे - क्या आप जानते हैं? प्रशांत महासागर में स्िथत माॅनाकी पवर्त ;हवाइर् द्वीपद्ध सागर की सतहके नीचे स्िथत है। इसकी ऊँचाइर् ;10,205 मीटरद्ध एवरेस्ट श्िाखर से भी अिाक है। चित्रा 6ण्4 रू ज्वालामुखी पवर्त पैराग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, रिवर रािंटग तथा स्कीइंग पवर्तों केप्रचलित खेल हैं। क्या आप हिमालय में स्िथत वुफछ ऐसे स्थानों केनाम बता सकते हैं जहाँ ये खेले जाते हैं? पठारपठार उठी हुइर् एवं सपाट भूमि होती है। यह आस - पास के क्षेत्रों सेइस खेल का नाम बताएँ। अध्िक उठा हुआ होता है तथा इसका ऊपरी भाग मेज के समानसपाट होता है। किसी पठार के एक या एक सेअिाक किनारे होते हैं जिनके ढाल खड़े होते हैं।पठारों की ऊँचाइर् प्रायः वुफछ सौ मीटर से लेकरकइर् हजार मीटर तक हो सकती है। पवर्तों की तरहपठार भी नये या पुराने हो सकते हैं। भारत में दक्कन पठार पुराने पठारों में से एक है। केन्या,तंजानिया तथा युगांडा का पूवीर् अप्रफीकी पठारएवं आस्ट्रेलिया का पश्िचमी पठार इस प्रकार केउदाहरण हैं। तिब्बत का पठार ;चित्रा 5.1द्ध विश्वका सबसे ऊँचा पठार है, जिसकी ऊँचाइर् माध्यसमदु्र तल से 4,000 से 6,000 मीटर तक है।पठार बहुत उपयोगी होते हैं क्योंकि उनमें खनिजों की प्रचुरताहोती है। यही कारण है कि विश्व के बहुत से खनन क्षेत्रा पठारी भागोंमें स्िथत हैं। अप्रफीका का पठार सोना एवं हीरों के खनन के लिएप्रसि( है। भारत में छोटानागपुर के पठार में लोहा, कोयला तथामैंगनीज के बहुत बड़े भंडार पाए जाते हैं। पृथ्वी: हमारा आवास पठारी क्षेत्रों में बहुत से जलप्रपात हो सकते हैं, क्योंकि यहाँ नदियाँ ऊँचाइर् से गिरती हैं। भारत में,छोटानागपुर पठार पर स्वणर्रेखा नदी पर स्िथत हुंडरू जलप्रपात तथा कनार्टक में जोग जलप्रपात, इस प्रकारके जलप्रपातों के उदाहरण हैं। लावा पठार में काली मिट्टðी की प्रचुरता होती है, जो उपजाऊ है एवं खेतीके लिए कापफी अच्छी होती है। कइर् पठारों में रमणीय स्थल होते हैं, जो पयर्टकों को आक£षत करते हैं। मैदान मैदान समतल भूमि के बहुत बड़े भाग होते हैं। वे सामान्यतः माध्य समुद्री तल से 200 मीटर से अिाकऊँचे नहीं होते हैं। वुफछ मैदान कापफी समतल होते हैं। वुफछ उ£मल तथा तरंगित हो सकते हैं। अिाकांशमैदान नदियों तथा उनकी सहायक नदियों के द्वारा बने हैं। नदियाँ पवर्तों के ढालों पर नीचे की ओर बहतीहैं तथा उन्हें अपरदित कर देती हैं। वे अपरदित पदाथोंर् को अपनेे साथ आगे की ओर ले जाती हैं। अपनेसाथ ढोए जाने वाले पदाथो±ऋ जैसे - पत्थर, बालू तथा सिल्ट को वे घाटियों में निक्षेपित कर देती हैं। इन्हींनिक्षेपों से मैदानों का निमार्ण होता है।सामान्यतः मैदान बहुत अिाक उपजाऊ होते हैं। यहाँ परिवहन के साधनों का निमार्ण करना आसानहोता है। इसलिए ये मैदान विश्व के सबसे अिाक जनसंख्या वाले भाग होते हैं। नदियों के द्वारा बनाए गएवुफछ बड़े मैदान एश्िाया तथा उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं। एश्िाया में स्िथत भारत में गंगा एवं ब्रह्मपुत्राका मैदान तथा चीन में यांगत्से नदी का मैदान इसके प्रमुख उदाहरण हैं।मैदान मनुष्यों के रहने के लिए सबसे उपयोगी क्षेत्रा होते हैं। यहाँ की जनसंख्या बहुत अिाक होती है,क्योंकि मकानों के बनाने तथा खेती के लिए यहाँ समतल भूमि की प्रचुरता होती है। उपजाऊ मिट्टी केकारण यह भाग खेती के लिए कापफी उपयुक्त होता है। भारत में गंगा का मैदान देश में सबसे अिाकजनसंख्या वाला क्षेत्रा है। चित्रा6ण्6 रू मैदान पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप स्थलरूप एवं लोग स्थलरूपों की विभ्िान्नता के अनुरूप ही मानव विभ्िान्न प्रकार से जीवनयापन करते हैं। पवर्तीय क्षेत्रों काजीवन कठिन होता है। मैदानी क्षेत्रों का जीवन पवर्तीय क्षेत्रों की तुलना में सरलहोता है। मैदानों में पफसलें उगाना, घर बनाना या सड़वेंफ बनाना, पवर्तीय क्षेत्रों कीतुलना में अध्िक आसान होता है। विभ्िान्न प्रकार के स्थलरूपों पर रहने वालेलोगों के रहन - सहन के तरीकों में वुफछ अंतर होता है। क्या आप उनमें से वुफछअंतरों को बता सकते हैं? कभी - कभी प्रावृफतिक आपदाएँऋ जैसे - भूवंफप, ज्वालामुखीउद्गार, तूप़फान या बाढ़ बहुत विनाश कर देते हैं। इन आकस्िमक घटनाओं के बारेमें जागरूकता पैदा करके हम इनमें आने वाले खतरों को कम कर सकते हैं।हम कितने तरीकों से जल एवं स्थल कोउपयोग में ला सकते हैं इसका पता हम अपनेआस - पास के क्षेत्रा से लगा सकते हैं। प्रायः हमचित्रा 6ण्7 रू रस्सी सेबना पुल ;अरुणाचलस्थल का उपयोग गलत तरीके से करते हैं, जैसेप्रदेशद्ध उपजाऊ भूमि पर मकानों का निमार्ण करना। इसीप्रकार हम लोग वूफड़ा किसी भी भूमि पर यापानी में पेंफक देते हैं जो कि उन्हें गंदा कर देता है। हमें प्रवृफति के इसमहत्त्वपूणर् वरदान का उपयोग इस प्रकार नहीं करना चाहिए। उपलब्ध भूमिकेवल हमारे ही उपयोग के लिए नहीं है। यह हमारा कतर्व्य है कि हमआगे आने वाली पीढि़यों के लिए पृथ्वी को सुरक्ष्िात रखें। 1ण् चित्रा संख्या 1 - 10 को ध्यान से देख्िाए और प्रत्येक के लिए एक - एक वाक्य लिख्िाए। 2ण् चित्रा संख्या 1, 2 तथा 7 में दिखाए गए स्थलरूपों के नाम बताइए। 3ण् चित्रा संख्या 9 में दिखाए गए स्थल का उपयोग किस कायर् के लिए हो रहा है? 4ण् चित्रा संख्या 3, 6, 8 तथा 9 में आपको कौन - सी गतिवििायाँ दिखाइर् दे रही हैं? पृथ्वी: हमारा आवास 5ण् चित्रा संख्या 4 और 5 में किस प्रकार के घरदिखाइर् दे रहे हैं? 6ण् चित्रा संख्या 3 तथा 8 में दिखाइर् गइर् जलक्रीड़ाओंके बारे में बताइए। 7ण् चित्रा संख्या 1 तथा 10 में दिखाए गए परिवहन केसाधनों के बारे में बताइए। पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप 1ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए। ;पद्ध प्रमुख स्थलरूप कौन - कौन से हैं? ;पपद्ध पवर्त एवं पठार में क्या अंतर है? ;पपपद्ध पवर्तों के विभ्िान्न प्रकार कौन - कौन से हैं? ;पअद्ध मनुष्यों के लिए पवर्त किस प्रकार उपयोगी हैं? ;अद्ध मैदानों का निमार्ण किस प्रकार होता है? ;अपद्ध नदियों द्वारा निमिर्त मैदान सघन जनसंख्या वाले होते हैं, क्यों? ;अपपद्ध पवर्तों में जनसंख्या कम होती है, क्यों? 2ण् सही उत्तर चिित ;ऽद्ध कीजिए। ;पद्ध पवर्त पठारों से भ्िान्न होते हैं - क.ऊँचाइर् ख.ढाल ग.अभ्िामुखता ;पपद्ध हिमानी कहाँ पाइर् जाती हैं? क. पवर्तों में ख. मैदानों में ग.पठारों में ;पपपद्ध दक्कन पठार कहाँ स्िथत है? क.केन्या ख. आस्ट्रेलिया ग.भारत ;पअद्ध यांगत्से नदी कहाँ बहती है? क.दक्ष्िाण अमेरिका ख.आस्ट्रेलिया ग.चीन यूरोप की एक महत्त्वपूणर् पवर्त शृंखला कौन - सी है?;अद्ध क.एंडीश ख.आल्प्स ग.राॅकीश 3ण् खाली स्थान भरें। ;पद्ध समतल भूमि वाले विस्तृत क्षेत्रा को ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ कहते हैं। ;पपद्ध हिमालय एवं आल्प्स ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ पवर्तों के उदाहरण हैं। ;पपपद्ध ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ क्षेत्रों में खनिजों की प्रचुरता होती है। ;पअद्ध ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ पवर्तों का एक क्रम है। ;अद्ध ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ क्षेत्रा वृफष्िा के लिए सबसे अिाक उत्पादक क्षेत्रा होते हैं। मानचित्रा कायर् 1ण् विश्व के मानचित्रा पर निम्नलिख्िात को चिित कीजिए:अ. पवर्त शृंखलाएँ: हिमालय, राॅकीश तथा एंडीशब. पठार: तिब्बत

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