जैसा कि आप जानते हैं, पृथ्वी की गति दो प्रकार की हैμ घूणर्न एवं परिक्रमण। पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूणर्न कहलाता है। सूयर् के चारों ओर एक स्िथर कक्ष में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं। पृथ्वी का अक्ष एक काल्पनिक रेखा है, जो इसके कक्षीय सतह से 66)° का कोण बनाती है। वह समतल जो कक्ष के द्वारा बनाया जाता है, उसे कक्षीय समतल कहते हैं। पृथ्वी सूयर् से प्रकाश प्राप्त करती है। पृथ्वी का आकार गोले के समान है, इसलिए एक समय में सिपर्फ इसके आध्े भाग पर ही सूयर् की रोशनी प्राप्त होती है ;चित्रा 3.2द्ध। सूयर् की ओर वाले भाग में दिन होता है, जबकि दूसरा भाग जो सूयर् से दूर होता है वहाँरात होती है। ग्लोब पर वह वृत्त जो दिन तथा रात को विभाजित करता है उसे प्रदीप्ित वृत्त कहते हैं। यह वृत्त अक्ष के साथ नहीं मिलता है जैसा कि आप चित्रा 3.2 में देख सकते हैं। पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 24 घंटे का समय लेती है। घूणर्नके समय काल को पृथ्वी दिन कहा जाता है। यह पृथ्वी की दैनिक गति है। चित्रा 3ण्1 रू पृथ्वी के अक्ष का झुकाव तथा 3 पृथ्वी की गतियाँ आओ वुफछ करके सीखंे पृथ्वी को दशार्ने के लिए एक गेंद लें तथा सूयर् को दशार्ने के लिए एक जलती हुइर् मोमबती। गेंद पर शहर ग् को दिखाने के लिए निशान लगाइए। अब गेंद को इस प्रकार रखें कि शहर ग् में अंध्ेरा हो। गेंद को अब बाएँ से दाएँ घुमाइए। जैसे ही आप गेंद को थोड़ा घुमाते हैं तो शहर में सूयोर्दय होगा। अगर गेंद को आप घुमाना जारी रखते हैं बिंदु ग् ध्ीरे - ध्ीरे सूयर् से दूर चला जाता है। यह सूयार्स्त है। कक्षीय समतल चित्रा 3ण्2 रू घूणर्न के कारण पृथ्वी पर दिन एवं रात अगर पृथ्वी घूणर्न नहीं करे तो क्या होगा? सूयर् के तरपफ वाले पृथ्वी के भाग में हमेशा दिन होगा जिसके कारण उस भाग में गमीर् लगातार पड़ेगी। दूसरे भाग में हमेशा अँध्ेरा रहेगा एवं पूरे समय ठंड पड़ेगी। इस तरह की अवस्था में जीवन संभव नहीं हो पाएगा। पृथ्वी की दूसरी गति जो सूयर् के चारों ओर कक्ष में होती है उसे परिक्रमण कहा जाता है। पृथ्वी एक वषर् या 365( दिन में सूयर् का एक चक्कर लगाती है। हम लोग एक वषर् 365 दिन का मानते हैं तथा सुविध के लिए 6 घंटे को इसमें नहीं जोड़ते हैं। चित्रा 3ण्3 रू पृथ्वी का परिक्रमण एवं )तुएँ चार वषो± में प्रत्येक वषर् के बचे हुए 6 घंटे मिलकर एक दिन यानी 24 घंटे के बराबर हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त दिन को पफरवरी के महीने में जोड़ा जाता है। इस प्रकार प्रत्येक चैथे वषर् पफरवरी माह 28 के बदले 29 दिन का होता है। ऐसा वषर् जिसमें 366 दिन होते हैं उसे लीप वषर् कहा जाता है। पता लगाइए कि अगला लीप वषर् कब होगा? चित्रा 3.3 से स्पष्ट है कि पृथ्वी दीघर्वृत्ताकार पथ पर सूयर् के चारों ओर चक्कर लगाती है। ध्यान दीजिए कि पृथ्वी पूरे कक्ष में एक ही दिशा में झुकी हुइर् है। सामान्यतः एक वषर् को गमीर्, सदीर्, वसंत एवं शरद् )तुओं में बाँटा जाता है। )तुओं में परिवतर्न सूयर् के चारों ओर पृथ्वी की स्िथति में परिवतर्न के कारण होता है। पृथ्वी: हमारा आवास

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