ग्लोब: अक्षांश एवं देशांतर पिछले अध्याय में आप पढ़ चुके हैं कि हमारी पृथ्वी गोलाकार नहींहै। यह उत्तर एवं दक्ष्िाण ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा मध्य में थोड़ी उभरी हुइर् है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह वैफसी दिखती है? इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपनी कक्षा में सावधानीपूवर्क ग्लोब को देख्िाए। ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है ;चित्रा 2.1द्ध।अक्ष ग्लोब विभ्िान्न आकार एवं प्रकार के हो सकते हैं - बड़े ग्लोब, जो आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान नहीं ले जाए जा सकतेऋ पाॅकेट में रखने योग्य छोटे ग्लोब तथा गुब्बारे जैसे ग्लोब, जिनमें हवा भरी जा सकती है एवं आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाए जा सकते हैं। ग्लोब स्िथर नहीं होते हैं। इसे उसी प्रकार घुमाया जा सकता है, जैसे चित्रा 2ण्1 रू ग्लोब आओ वुफछ करके सीखें एक बड़ा सा गोलाकार आलू, या गेंद लें। स्वेटर बुनने वाली सलाइर् को इसके अंदर घुसा दें। यह सलाइर् ग्लोब पर दशार्ए गए अक्ष के अनुरूप है। अब आप इस आलू या गेंद को उसके अक्ष पर बाएँ से दाएँ घुमा सकते हैं। वुफम्हार का पहिया या लट्टू घूमता है। ग्लोब पर देशों, महाद्वीपों तथा महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है। पृथ्वी के समान किसी गोले पर किसी बिंदु की स्िथति का वणर्न करना कठिन है। अब प्रश्न यह उठता है कि इस पर किसी स्थान की स्िथति वैफसे बताइर् जा सकती है? इसके लिए हमें वुफछ बिंदुओं एवं रेखाओं के संदभर् की आवश्यकता होती है। आप देखेंगे कि एक सुइर् ग्लोब में झुकी हुइर् अवस्था में स्िथत होती है, जिसे अक्ष कहा जाता है। ग्लोब पर वे दो बिंदु जिनसे होकरसुइर् गुजरती है, उत्तर तथा दक्ष्िाण ध्रुव हैं। ग्लोब को इस सुइर् के चारों ओर पृथ्वी की भाँति पश्िचम से पूवर् की ओर घुमाया जा सकता है। लेकिन याद रखें इन दोनों में एक अंतर है। पृथ्वी पर वास्तव में ऐसी कोइर् सुइर् नहीं होती है। यह अपने अक्ष पर चारों ओर घूमती है, जो एक काल्पनिक रेखा है। एक अन्य काल्पनिक रेखा भी ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटती है। इसे विषुवत्् वृत्त कहा जाता है। पृथ्वी के उत्तर मेंस्िथत आधे भाग को उत्तरी गोलाधर् तथा दक्ष्िाण वाले आधे भाग को दक्ष्िाणी गोलाधर् कहा जाता है। ये दोनों बराबर केआधे भाग होते हैं। इस प्रकार, विषुवत््् वृत्त पृथ्वी पर एककाल्पनिक वृत्त बनाती है एवं यह पृथ्वी पर विभ्िान्नस्थानों की स्िथति बताने का सबसे महत्त्वपूणर् संदभर् बिंदुहै। विषुवत्् वृत्त से ध्रुवों तक स्िथत सभी समानांतर वृत्तों को अक्षांश ;समानांतरद्ध रेखाएँ कहा जाता है। अक्षांशों को अंश में मापा जाता है।विषुवत् वृत्त शून्य अंश अक्षांश को दशार्ती है। चूँकि,विषुवत् वृत्त से दोनों तरपफ ध्रुवों के बीच की दूरी पृथ्वीके चारों ओर के वृत्त का एक चैथाइर् है, अतः इसका माप होगा 360 अंश का 1/4, यानी 90 अंश। इस प्रकार 90 अंशउत्तरी अक्षांश उत्तर ध्रुव को दशार्ता है तथा 90 अंश दक्ष्िाणी अक्षांश दक्ष्िाण ध्रुव को।इस प्रकार विषुवत् वृत्त के उत्तर की सभी समानांतर रेखाओं कोउत्तरी अक्षांश कहा जाता है तथा विषुवत् वृत्त के दक्ष्िाण स्िथत सभी समानांतर रेखाओं को दक्ष्िाणी अक्षांश कहा जाता है।इसलिए प्रत्येक अक्षांश के मान के साथ उसकी दिशा यानी उत्तर या दक्ष्िाण को भी लिखा जाता है। सामान्यतः, इसे उ. या द. अक्षर से व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्रª में चंद्रपुर एवं ब्राजील ;दक्ष्िाण अमेरिकाद्ध में बेलो होरिशोंटे दोनों एक ही अक्षांश 20 अंश पर स्िथत हैं। लेकिनचन्द्रपुर विषुवत् वृत्त के 20 अंश उत्तर में एवं बेलोहोरिशोंटे विषुवत् वृत्त के 20 अंश दक्ष्िाण में स्िथत है। इसलिए हम कहते हैं कि चंद्रपुर 20° उ. अक्षांश पर तथा बेलो होरिशोंटे 20° द. अक्षांश पर स्िथत है। चित्रा2.2 से स्पष्ट है कि जैसे - जैसे हम विषुवत् वृत्त से दूर जाते हैं अक्षांशों का आकार घटता जाता है। महत्त्वपूणर् अक्षांश ;समानांतरद्ध रेखाएँ विषुवत् वृत्त ;0°द्ध, उत्तर ध्रुव ;90° उ.द्ध तथा दक्ष्िाण ध्रुव ;90° द.द्ध के अतिरिक्त चार महत्त्वपूणर् अक्षांश ;समानांतरद्ध रेखाएँ और भी हैं। ये हैं - क्या आप जानते हैं? अपने स्थान से ध्रुव तारे का कोण मापकर आप अपने स्थान का अक्षांश जान सकते हैं। चित्रा 2ण्3 रूमहत्त्वपूणर् अक्षांश एवं ताप कटिबंध चित्रा 2ण्4 रू ;बद्ध तिरछी सतह पर टाॅचर् का प्रकाश कम तेश, परंतु अिाक क्षेत्रा में पैफलता है। 1. उत्तरी गोलाधर् में कवर्फ रेखा ;23क्° उ.द्ध, 2दक्ष्िाणी गोलाधर् में मकर रेखा ;23क्° द.द्ध,3. विषुवत् वृत्त के 66क्° उत्तर में उत्तर ध्ु्रव वृत्त, 4. विषुवत् रेखा के 66क्° दक्ष्िाण में दक्ष्िाण ध्ु्रव वृत्त। पृथ्वी के ताप कटिबंध कवर्फ रेखा एवं मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों परसूयर् वषर् में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है। इसलिए इस क्षेत्रा में सबसे अिाक उफष्मा प्राप्त होती है तथा इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। कवर्फ रेखा तथा मकर रेखा के बाद किसी भीअक्षांश पर दोपहर का सूयर् कभी भी सिर के ऊपर नहीं होता है। ध्रुव की तरपफ सूयर् की किरणें तिरछी होती जाती हैं। इस प्रकार, उत्तरी गोलाधर् में कवर्फ रेखा एवंउत्तर ध्ु्रव वृत्त तथा दक्ष्िाणी गोलाधर् में मकर रेखा एवं दक्ष्िाण ध्ु्रव वृत्त के बीच वाले क्षेत्रा का तापमान मध्यम रहता है। इसलिए इन्हें, शीतोष्ण कटिबंध कहा जाता है। उत्तरी गोलाधर् में उत्तर ध््रव वृत्त एवं उत्तरी ध्रुव तथा ुीगोलाधर् में दक्ष्िण्व वृत्त एवं दक्ष्िाणी ध्ववेदक्ष्िाणाा ध््रुाु्रफ बीच के क्षेत्रा में ठंड बहुत होती ह। क्यांेैकि, यहँासूयर् क्ष्िातिज से ज़्यादा ऊपर नहीं आ पाता है। इसलिए ये शीत कटिबंध कहलाते हैं। देशांतर क्या हैं? किसी स्थान की स्िथति को बताने के लिए उस स्थान के अक्षांश के अतिरिक्त वुफछ और जानकारियों की आवश्यकता भी होती है। आप देख सकते हैं कि प्रशांत महासागर में स्िथत टोंगा द्वीप एंव हिंद महासागर में स्िथत माॅरीशस द्वीप एक ही अक्षांश ;20°00श् द.द्ध पर स्िथत हैं। उनकी सही स्िथति जानने के लिए यह पता करनाहोगा कि उत्तर ध्रुव को दक्ष्िाण ध्रुव से जोड़ने वाली संदभर् रेखा से पूवर् या पश्िचम की ओर इन स्थानों की दूरी कितनी हैंा रखाम्योत्तर? इन सदभ्र्ेाओं को देशांतरीय यपृथ्वी: हमारा आवास कहते हैं तथा उनके बीच की दूेेंंेंरी का दशातर वफ अशा म मापा जाता है। प्रत्येक अंश को मिनट में तथा मिनट को सेवेंफड में विभाजित किया जाता है। ये अधर्वृत्त हैं तथा उनके बीच की दूरी ध्रुवों की तरपफ बढ़ने पर घटती जाती है एवं ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, जहाँ सभी देशांतरीययाम्योत्तर आपस में मिलती हैं।अक्षांश ;समानांतरद्ध रेखाओं से भ्िान्न सभी देशांतरीय याम्योत्तरों की लंबाइर् समान होती है। इसलिए इन्हें सिपर्फ मुख्य संख्याओं में व्यक्त करना कठिन था। तब सभी देशों ने निश्चय किया कि ग्रीनिच, जहाँ बि्रटिशराजकीय वेधशाला स्िथत है, से गुजरने वाली याम्योत्तर से पूवर् औरपश्िचम की ओर गिनती शुरू की जाए। इस याम्योत्तर को प्रमुखयाम्योत्तर कहते हैं। इसका मान 0° देशांतर है तथा यहाँ से हम 180° पूवर् या 180° पश्िचम तक गणना करते हैं। प्रमुखयाम्योत्तर तथा 180° याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को दो समान भागों, पूवीर् गोलाधर् एवं पश्िचमी गोलाधर् में विभक्त करती है। इसलिए किसी स्थान के देशांतर के आगे पूवर् के लिए अक्षर पू. तथा पश्िचम के लिए अक्षर प. का उपयोग करते हैं। यह जानना रोचक होगा कि 180° पूवर् और 180° पश्िचम याम्योत्तर एक ही रेखा पर स्िथत हैं। अब ग्लोब पर अक्षांश ;समानांतरद्ध रेखाओं एवंदेशांतरीय याम्योत्तरों के द्वारा बनी गि्रड को देखो। अगर आपको किसी स्थान के अक्षांश एवं देशांतर की सही जानकारी हो तो ग्लोब पर आप उस स्थान का पता आसानी से लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, असम में धुबरी 26° उ. अक्षांश एवं 90° पू. देशांतर पर स्िथत है। अब उस बिंदु को देखें जहाँ ये दोनों रेखाएँ एक दूसरे को काटती हैं। यह बिंदु धुबरी की सही स्िथति होगा। इसको समझने के लिए कागश पर समान दूरी वाली क्षैतिज तथाऊध्वार्धर रेखाएँ खींचिए ;चित्रा 2.7द्ध। ऊध्वार्धर रेखाओं को संख्या1, 2, 3, 4 से तथा क्षैतिज रेखाओं को क, ख, ग, घ, घ अक्षरों सेव्यक्त करंे। जिन बिंदुओं पर ये ऊध्वार्धर एवं क्षैतिज रेखाएँ एक दूसरेको काटती हैं, वहाँ वुफछ छोटे वृत्त खींचिए। इन छोटे वृत्तों को अ, ब, स, द तथा ध नामों से व्यक्त कीजिए।मान लीजिए कि ऊध्वार्धर रेखाएँ पूवर् देशांतरों एवं क्षैतिज रेखाएँउत्तरी अक्षांशों को व्यक्त करती हैं। आओ वुफछ करके सीखें एक वृत्त खींचिए। मान लीजिए कि प्रमुख याम्योत्तर इसे दो बराबर भागों में बाँटती है। पूवीर् गोलाधर् एवं पश्िचमी गोलाधर् को रँगकर नामांकित कर दीजिए। उसी प्रकार एक दूसरा वृत्त खींचिए, जिसे विषुवत् वृत्त दो बराबर भागों में बाँटे। अब उत्तरी गोलाधर् एवं दक्ष्िाणी गोलाधर् को रँग दीजिए। चित्रा 2ण्6 रू गि्रड चित्रा 2ण्7 रू विश्व के समय क्षेत्रा पृथ्वी: हमारा आवास अब आप देखेंगे कि वृत्त अ ख° उत्तरी अक्षांश तथा 1° पूवीर् देशांतर पर स्िथत है।कअन्य वृत्तों की स्िथति ज्ञात करंे। देशांतर और समय ख गसमय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा एवं ग्रहों की गति है। सूयोर्दय एवं सूयार्स्त प्रतिदिन होता है। अतः स्वाभाविक ही घ है कि यह पूरे विश्व में समय निधार्रण का सबसे अच्छा साधन है। घ स्थानीय समय का अनुमान सूयर् के द्वारा बनने वाली परछाइर्ं से लगाया जा सकता है, जो दोपहर में सबसे छोटी एवं सूयोर्दय तथा सूयार्स्त के समय सबसे लंबी होती है।ग्रीनिच पर स्िथत प्रमुख याम्योत्तर पर सूयर् जिस समय आकाश केसबसे उफँचे बिंदु पर होगा, उस समय याम्योत्तर पर स्िथत सभी स्थानों पर दोपहर होगी। चूँकि, पृथ्वी पश्िचम से पूवर् की ओर चक्कर लगाती है, अतः वे स्थान जो ग्रीनिच के पूवर् में हैं, उनका समय ग्रीनिच समय से आगे होगा तथा जो पश्िचम में हैं, उनका समय पीछे होगा ;चित्रा 2.8द्ध। समय के अंतर की दर की गणना निम्नलिख्िात वििा से की जा सकती है। पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर 360° घूम जाती है, अथार्त् वह 1 घंटे में 15° एवं 4 मिनट में 1° घूमती है। इस प्रकार जब ग्रीनिच में दोपहर के 12 बजते हैं, तब ग्रीनिच से 15° पूवर् में समय होगा 15 4 त्र60 मिनट अथार्त्, ग्रीनिच के समय से 1 घंटा आगे, अथार्त् वहाँ दोपहर का 1 बजा होगा। लेकिन ग्रीनिच से 15° पश्िचम का समय ग्रीनिच समय से 1 घंटा पीछे होगा यानी, वहाँ सुबह के 11 बजे होंगे। इसी प्रकार जब ग्रीनिच पर दोपहर के 12 बजे होंगे उस समय 180° पर मध्य रात्रिा होगी। किसी भी स्थान पर जब सूयर् आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होता है, दोपहर में उस समय घड़ी में दिन के 12 बजते हैं। इस प्रकार, घड़ी के द्वारा दिखाया गया समय उस स्थान का स्थानीय समय होगा।आप देख सकते हैं कि दिए गए देशांतरीय याम्योत्तर पर सभी स्थानों का स्थानीय समय समान है। हम मानक समय क्यों मानते हैं? अलग - अलग याम्योत्तर पर स्िथत स्थानों के स्थानीय समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए, बहुत से देशांतरों से होकर गुजरने वाली रेलगाडि़यों के लिए समय - सारणी तैयार करना कठिन होगा। भारत में गुजरात के द्वारका तथा असम के डिब्रूगढ़ के स्थानीय समय में लगभग 1 घंटा 45 मिनट का अंतर होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि देशके मध्य भाग से होकर गुजरने वाली किसी याम्योत्तर के स्थानीयसमय को देश का मानक समय माना जाए। इस याम्योत्तर रेखा के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है। भारत में 82क्° पू.;82° 30श् पू.द्ध को मानक याम्योत्तर माना गया है। इसयाम्योत्तर के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है। इसे भारतीय मानक समय के नाम से जाना जाता है। कबीर भोपाल के निकट एक छोटे से नगर में रहता है। वह अपने मित्रा आलोक से कहता है कि वे लोग आज रात्रिा में नहीं सो पाएँगे।भारत एवं इंग्लैंड के बीच एक िकेट मैच लंदन में 2 बजे अपराÉ में शुरू होगा। अथार्त् भारत के समयानुसार मैच शाम के 7ः30 बजे शुरू होगा तथा देर रात्रिा में समाप्त होगा। क्या आप जानते हैं कि भारत एवं इंग्लैंड के बीच समय में क्या अंतर है? भारत ग्रीनिच के पूवर् 82° 30श् पू. में स्िथत है तथा यहाँ का समय ग्रीनिच समय से 5 घंटा 30 मिनट आगे है। इसलिए जब लंदन में दोपहर के 2 बजे हांेगे, तब भारत में शाम के 7ः30 बजे होंगे। वुफछ देशों का देशांतरीय विस्तार अिाक होता है, जिसके कारण वहाँ एक से अिाक मानक समय अपनाए गए हैं। उदाहरण के लिए, रूस में 11 मानक समयों को अपनाया गया है। पृथ्वी को एक - एक घंटे वालसमय क्षेत्रों में बाँटा गया है। इस प्रकार प्रत्येक समय - क्षेत्रा 15° देशांतर तक के क्षेत्रा को घेरता है। 1ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए। ;पद्ध पृथ्वी का सही आकार क्या है? ;पपद्ध ग्लोब क्या है? ;पपपद्ध कवर्फ रेखा का अक्षांशीय मान क्या है? ;पअद्ध पृथ्वी के तीन ताप कटिबंध् कौन - से हैं? ;अद्ध अक्षांश एवं देशांतर रेखाएँ क्या हैं? ;अपद्ध ऊष्मा की सबसे अिाक मात्रा उष्ण कटिबंध क्यों प्राप्त करते हैं? ;अपपद्ध जब भारत में शाम के 5ः30 बजते हैं, तब लंदन में दोपहर के 12 क्यों बजते हैं? 2ण् सही उत्तर चिित ;ऽद्ध कीजिए। ;पद्ध प्रमुख याम्योत्तर का मान है - क.90° ख.0° ग.60° ;पपद्ध शीत कटिबंध किसके नजदीक पाया जाता है? क.ध्रुवों ख. विषुवत् वृत्त ग. कवर्फ रेखा ;पपपद्ध देशांतरों की वुफल संख्या है - क.360 ख.180 ग.90 ;पअद्ध दक्ष्िाण ध्ु्रव वृत्त स्िथत है - क. उत्तरी गोलाधर् में ख. दक्ष्िाणी गोलाधर् में ग. पूवीर् गोलाधर् में ;अद्ध गि्रड किसका जाल है - क. अक्षांशों ;समानांतरद्ध रेखाओं एवं देशांतरीय याम्योत्तरों का ख. कवर्फ रेखा एवं मकर रेखा का ग.उत्तर ध्रुव एवं दक्ष्िाण ध्रुव का 3ण् खाली स्थान भरें। ;पद्ध मकर रेखा ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ पर स्िथत है। ;पपद्ध भारत का मानक याम्योत्तर ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। ;पपपद्ध 0° याम्योत्तर को ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ के नाम से जाना जाता है। ;पअद्ध देशांतरों के बीच की दूरी ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ की तरपफ घटती जाती है। ;अद्ध उत्तर ध्ु्रव वृत्त ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ गोलाधर् में स्िथत है। 1ण् पृथ्वी के अक्ष, विषुवत् वृत्त, कवर्फ रेखा एवं मकर रेखा, उत्तर ध्ु्रव वृत्त तथा दक्ष्िाणध्ु्रव वृत्त को दशार्ते हुए एक चित्रा बनाएँ। 1ण् काडर् बोडर् पर समान आकार ;लगभग 3 से.मी. त्रिाज्या वालेद्ध के 6 वृत्त बनाकर उन्हें काट लंे। उसके व्यासों ;उ. द., पू. प.द्ध तथा 23क्° कोणों को वृत्त के प्रत्येक भाग में चिित करंे जैसा कि चित्रा में दिखाया गया है। अब उ. एवं द. रेखा परउन वृत्तों को एक - दूसरे के ऊपर रखकर उ. द. रेखा को सिल दें। अब 12 अधर्वृत्त बनते हैं। मान लंे कि एक अधर् वृत्त ग्रीनिच याम्योत्तर ;प्रमुख याम्योत्तरद्ध जो 0° को दशार्ता है। यहाँ से छठा अधर् वृत्त 180° याम्योत्तर होगा। दोनों तरपफ 0° तथा 180° के बीच पाँच अधर् वृत्त होंगे, जो 180° की दूरी पर पूवर् एवं पश्िचम देशांतर हैं। ध्रुवों को दिखाने के लिए उ. द. रेखा के दोनों छोरों पर पिन लगा दंे। पूवर् - पश्िचम बिंदुओं को छूता हुआ एक रबरबैंड लगा दंे, जो कि विषुवत् वृत्त को दशार्एगा। पू. प. बिंदुओं के 23)° उत्तर एवं दक्ष्िाण बिंदुओं पर दो रबरबैंड लगा दंे, जो कटिबंधों को दशार्एँगे। पृथ्वी: हमारा आवास

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