क्या बताती हैं प्रशस्ितयाँ दरअसल अरविन्द गुप्तवंश के प्रसि( राजा समुद्रगुप्त की भूमिका अदा करने जा रहा था। समुद्रगुप्त के बारे में हमें एक लंबे अभ्िालेख से पता चलता है। वास्तव में यह उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा संस्कृत में लिखी एक कविता है। इसे करीब 1700 साल पहले लिखा गया। इलाहाबाद में अशोक - स्तम्भ पर इसकी खुदाइर् की गइर् थी। यह एक विशेष किस्म का अभ्िालेख है, जिसे प्रशस्ित कहते हैं। यह एक संस्कृत शब्द है, जिसका अथर् ‘प्रशंसा’ होता है। प्रशस्ितयाँ लिखने का प्रचलन पहले भी था। जैसे तुमने अध्याय 10 में गौतमी - पुत्रा श्री सातकणीर् की प्रशस्ित के बारे में पढ़ा। परन्तु गुप्तकाल में इनका महत्त्व और बढ़ गया। समुद्रगुप्त की प्रशस्ित आओ देखें, समुद्रगुप्त की प्रशस्ित हमें क्या बताती है। कवि ने इसमें राजा की एक यो(ा, यु(ों को जीतने वाले राजा, विद्वान तथा एक उत्वृफष्ट कवि के रूप में भरपूर प्रशंसा की है। यहाँ तक कि उसे इर्श्वर के बराबर बताया गया है। प्रशस्ित में लंबे - लंबे वाक्य दिए गए हैं। यहाँ वैसे ही एक वाक्य का अंश दिया गया हैः 111 ऽ वीणा बजाने वाला राजा। समुद्रगुप्त के वुफछ अन्य गुणों को सिक्कों पर दिखाया गया है जैसे इस सिक्के में उन्हें वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। „ 112 हमारे अतीतदृप् यो(ा समुद्रगुप्त जिनका शरीर यु( मैदान में वुफठारों, वुफल्हाडि़यों, तीरों, भालों, बछो±, तलवारों, लोहे की गदाओं, नुकीले तीरों तथा अन्य सैकड़ों हथ्िायारों से लगे घावों के दाग से भरे होने के कारण अत्यंत सुंदर दिखता है। यह वणर्न तुम्हें उस राजा के बारे में क्या बताता है? राजा किस प्रकार यु( लड़ते थे? अगर तुम मानचित्रा 7 ;पृष्ठ 113द्ध को गौर से देखो तो पाओगे कि एक क्षेत्रा को हरे रंग से रंगा गया है। तुम्हें पूवीर् समुद्र तट के साथ - साथ एक क्रम में लाल बिंदु दिखंेगे। उसी तरह वुफछ क्षेत्रा बैंगनी और नीले रंग के भी मिलेंगे। यह मानचित्रा इस प्रशस्ित में प्राप्त जानकारियों के आधर पर बनाया गया है। हरिषेण चार विभ्िान्न प्रकार के राजाओं और उनके प्रति समुद्रगुप्त की नीतियों का वणर्न करते हैं। 1ण् मानचित्रा में हरे रंग का क्षेत्रा आयार्वत्तर् के उन नौ शासकों का है, जिन्हें समुद्रगुप्त ने हराकर उनके राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। 2ण् इसके बाद दक्ष्िाणापथ के बारह शासक आते हैं। इनमें से वुफछ की राजधनियों को दिखाने के लिए मानचित्रा पर लाल बिंदु दिए गए हैं। इन सब ने हार जाने पर समुद्रगुप्त के सामने समपर्ण किया था। समुद्रगुप्त ने उन्हें पिफर से शासन करने की अनुमति दे दी। 3ण् पड़ोसी देशों का आंतरिक घेरा बैंगनी रंग से रंगा गया है। इसमें असम, तटीय बंगाल, नेपाल और उत्तर - पश्िचम के कइर् गण या संघ ;अध्याय 6 याद करोद्ध आते थे। ये समुद्रगुप्त के लिए उपहार लाते थे, उनकी आज्ञाओं का पालन करते थे तथा उनके दरबार में उपस्िथत हुआ करते थे। 4ण् बाह्य इलाके के शासक, जिन्हें नीले रंग से रंगा गया है संभवतः वुफषाण तथा शक वंश के थे। इसमें श्रीलंका के शासक भी थे। इन्होंने समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्रिायों का विवाह उससे किया। मानचित्रा में प्रयाग ;इलाहाबाद का पुराना नामद्ध, उज्जैन तथा पाटलिपुत्रा ;पटनाद्ध ढूँढ़ो। ये गुप्त शासन के महत्वपूणर् वेंफद्र थे। आयार्वत्तर् तथा दक्ष्िाणापथ के राज्यों के साथ समुद्रगुप्त के व्यवहार में क्या अंतर था? क्या इस अंतर के पीछे तुम्हें कोइर् कारण दिखाइर् देता है? वंशावलियाँ अध्िकांश प्रशस्ितयाँ शासकांे के पूवर्जों के बारे में भी बताती हंै। यह प्रशस्ित भी समुद्रगुप्त के प्रपितामह, पितामह यानी कि परदादा, दादा, पिता और माता के बारे में बताती है। उनकी माँ वुफमार देवी, लिच्छवि गण की थीं और पिता चन्द्रगुप्त गुप्तवंश के पहले शासक थे, जिन्होंने महाराजािाराज जैसी बड़ी उपाध्ि धरण की। समुद्रगुप्त ने भी यह उपाध्ि धरण की। उनके दादा और परदादा का महाराजा के रूप में ही उल्लेख है। इससे यह आभास मिलता है कि ध्ीरे - ध्ीरे इस वंश का महत्त्व बढ़ता गया। इन उपाध्ियों को महत्त्व के हिसाब से सजाओ। राजा, महाराज - अिाराज, महा - राजा। समुद्रगुप्त के बारे में हमें उनके बाद के शासकों, जैसे उनके बेटे चन्द्रगुप्त द्वितीय की वंशावली ;पूवर्जों की सूचीद्ध से भी जानकारी मिलती है। उनके बारे में अभ्िालेखों तथा सिक्कों से पता चलता है। उन्होंने पश्िचम भारत में सैन्य अभ्िायान में अंतिम शक शासक को परास्त किया। बाद में ऐसा विश्वास किया जाने लगा कि उनका दरबार विद्वानों से भरा था। कवि कालिदास और खगोलशास्त्राी आयर्भटð उनके दरबार में थे। इनके विषय में और जानकारी अध्याय 12 में मिलेगी। हषर्वध्र्न तथा हषर्चरित जिस तरह गुप्त वंश के शासकों के बारे में अभ्िालेखों तथा सिक्कों से पता चलता है, उसी तरह वुफछ अन्य शासकों के बारे में उनकी जीवनी से पता चलता है। ऐसे ही एक राजा हषर्वध्र्न थे, जिन्होंने करीब 1400 साल पहले शासन किया। उनके दरबारी कवि बाणभट्टð ने संस्कृत में उनकी जीवनी हषर्चरित लिखी है। इसमें हषर्वध्र्न की वंशावली देते हुए उनके राजा बनने तक का वणर्न है। चीनी तीथर्यात्राी श्वैन त्सांग, जिनके बारे में तुमने अध्याय 10 में पढ़ा है, कापफी समय के लिए हषर् के दरबार में रहे। उन्होंने वहाँ जो वुफछ देखा, उसका विस्तृत विवरण दिया है। „ 114 हमारे अतीतदृप् हषर् अपने पिता के सबसे बड़े बेटे नहीं थे पर अपने पिता और बड़े भाइर् की मृत्यु हो जाने पर थानेसर के राजा बने। उनके बहनोइर् कन्नौज ;मानचित्रा 7, पृष्ठ 113द्ध के शासक थे। जब बंगाल के शासक ने उन्हें मार डाला, तो हषर् ने कन्नौज को अपने अध्ीन कर लिया और बंगाल पर आक्रमण कर दिया। मगध् तथा बंगाल को जीतकर उन्हें पूवर् में जितनी सपफलता मिली थी, उतनी सपफलता अन्य जगहों पर नहीं मिली। जब उन्होंने नमर्दा नदी को पार कर दक्कन की ओर आगे बढ़ने की कोश्िाश की तब चालुक्य नरेश, पुलकेश्िान द्वितीय ने उन्हें रोक दिया। मानचित्रा 8 ;पृष्ठ 136द्ध देखो और सूची बनाओ कि जब हषर्वध्र्न ;कद्ध बंगाल तथा ;खद्ध नमर्दा तक गए हांेगे तो आज के किन - किन राज्यों से गुजरे हांेगे? पल्लव, चालुक्य और पुलकेश्िान द्वितीय की प्रशस्ितयाँ इस काल में पल्लव और चालुक्य दक्ष्िाण भारत के सबसे महत्वपूणर् राजवंश थे। पल्लवों का राज्य उनकी राजधनी काँचीपुरम के आस - पास के क्षेत्रों से लेकर कावेरी नदी के डेल्टा तक पैफला था, जबकि चालुक्यों का राज्य कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्िथत था। चालुक्यों की राजधनी ऐहोल थी। यह एक प्रमुख व्यापारिक वेंफद्र था ;मानचित्रा 7, पृष्ठ 113द्ध। ध्ीरे - ध्ीरे यह एक धमिर्क वेंफद्र भी बन गया जहाँ कइर् मंदिर थे। पल्लव और चालुक्य एक - दूसरे की सीमाओं का अतिक्रमण करते थे। मुख्य रूप से राजधनियों को निशाना बनाया जाता था जो समृ( शहर थे। पुलकेश्िान द्वितीयसबसे प्रसि( चालुक्य राजा थे। उनके बारे में हमें उनके दरबारी कवि रविकीतिर् द्वारा रचित प्रशस्ित से पता चलता है। इसमें उनके पूवर्जों, खासतौर से पिछली चार पीढि़यों के बारे में बताया गया है। पुलकेश्िान द्वितीय को अपने चाचा से यह राज्य मिला था। 115 ऽ रविकीतिर् के अनुसार उन्होंने पूवर् तथा पश्िचम दोनों समुद्रतटीय इलाकांे में अपने अभ्िायान चलाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने हषर् को भी आगे बढ़ने से रोका। हषर् का अथर् ‘आनंद’ होता है। कवि का कहना है कि इस पराजय के बाद हषर् अब ‘हषर्’ नहीं रहा। पुलकेश्िान द्वितीय ने पल्लव राजाके ऊपर भी आक्रमण किया, जिसे काँचीपुरम की दीवार के पीछे शरण लेनी पड़ी। पर चालुक्यों की विजय अल्पकालीन थी। लड़ाइर् से दोनों वंश दुबर्ल होते गए। पल्लवों और चालुक्यों को अन्ततः राष्ट्रवूफट तथा चोलवंशों ने समाप्त कर दिया। इनके बारे में तुम कक्षा सात में पढ़ोगे। वे कौन - से अन्य शासक थे जो तटों पर अपना नियंत्राण करना चाहते थे? ;अध्याय 10 देखोद्ध इन राज्यों का प्रशासन वैफसे चलता था? पहले के राजाओं की तरह इन राजाओं के लिए भूमि कर सबसे महत्वपूणर् बना रहा। प्रशासन की प्राथमिक इकाइर् गाँव होते थे। लेकिन ध्ीरे - ध्ीरे कइर् नए बदलाव आए। राजाओं ने आ£थक, सामाजिक, राजनीतिक या सैन्य शक्ित रखने वाले लोगों का समथर्न जुटाने के लिए कइर् कदम उठाए। उदाहरण के तौर पर: ऽ वुफछ महत्वपूणर् प्रशासकीय पद आनुवंश्िाक बन गए अथार्त् बेटे अपने पिता का पद पाते थे जैसे कि कवि हरिषेण अपने पिता की तरह महादंडनायक अथार्त् मुख्य न्याय अध्िकारी थे। ऽ कभी - कभी, एक ही व्यक्ित कइर् पदांे पर कायर् करता था जैसे कि हरिषेण एक महादंडनायक होने के साथ - साथ वुफमारामात्य अथार्त् एक महत्वपूणर् मंत्राी तथा एक संध्ि - विग्रहिक अथार्त् यु( और शांति के विषयों का भी मंत्राी था। ऽ संभवतः वहाँ के स्थानीय प्रशासन में प्रमुख व्यक्ितयों का बहुत बोलबाला था। इनमें नगर - श्रेष्ठी यानी मुख्य बैंकर या शहर का व्यापारी, साथर्वाह यानी व्यापारियों के कापि.फले का नेता, प्रथम - वुफलिक अथार्त् मुख्य श्िाल्पकार तथा कायस्थों यानी लिपिकों के प्रधन जैसे लोग होते थे। „ 116 हमारे अतीतदृप् इस तरह की नीतियाँ वुफछ हद तक प्रभावशाली होती थीं, पर समय के साथ - साथ इनमें से वुफछ व्यक्ित इतने अध्िक शक्ितशाली हो जाते थे कि अपना स्वतंत्रा राज्य स्थापित कर लेते थे। सोचकर बताओ कि अप.फसरों का पद आनुवंश्िाक कर देने में क्या - क्या पफायदे और क्या - क्या नुकसान हो सकते थे? एक नए प्रकार की सेना वुफछ राजा अभी भी पुराने राजाओं की तरह एक सुसंगठित सेना रखते थे, जिसमें हाथी, रथ, घुड़सवार और पैदल सिपाही होते थे पर इसके साथ - साथ वुफछ सेनानायक भी होते थे, जो आवश्यकता पड़ने पर राजा को सैनिक सहायता दिया करते थे। इन सेनानायकों को कोइर् नियमित वेतन नहीं दिया जाता था। बदले में इनमें से वुफछ को भूमिदान दिया जाता था। दी गइर् भूमि से ये कर वसूलते थे जिससे वे सेना तथा घोड़ों की देखभाल करते थे। साथ ही वे इससे यु( के लिए हथ्िायार जुटाते थे। इस तरह के व्यक्ित सामंत कहलाते थे। जहाँ कहीं भी शासक दुबर्ल होते थे, ये सामंत स्वतंत्रा होने की कोश्िाश करते थे। दक्ष्िाण के राज्यों में सभाएँ पल्लवों के अभ्िालेखों में कइर् स्थानीय सभाओं की चचार् है। इनमें से एक था ब्राह्मण भूस्वामियों का संगठन जिसे सभा कहते थे। ये सभाएँ उप - समितियों के शरिए सिंचाइर्, खेतीबाड़ी से जुड़े विभ्िान्न काम, सड़क निमार्ण, स्थानीय मंदिरों की देखरेख आदि का काम करती थीं। जिन इलाकों के भूस्वामी ब्राह्मण नहीं थे वहाँ उर नामक ग्राम सभा के होने की बात कही गइर् है। नगरम व्यापारियों के एक संगठन का नाम था। संभवतः इन सभाओं पर ध्नी तथा शक्ितशाली भूस्वामियों और व्यापारियों का नियंत्राण था। इनमें से बहुत - सी स्थानीय सभाएँ शताब्िदयों तक काम करती रहीं। उस शमाने में आम लोग जनसाधरण के जीवन की थोड़ी बहुत झलक हमें नाटकों तथा वुफछ अन्य ड्डोतों से मिलती है। चलो, इसके वुफछ उदाहरण देखते हैं। कालिदास अपने नाटकों में राज - दरबार के जीवन के चित्राण के लिए प्रसि( है। इन नाटकों में एक रोचक बात यह है कि राजा और अध्िकांश ब्राह्मणों को संस्कृत बोलते हुए दिखाया गया है जबकि अन्य लोग तथा महिलाएँ प्राकृत बोलते हुए दिखाए गए हैं। उनका सबसे प्रसि( नाटक अभ्िाज्ञान - शावुफन्तलम् दुष्यंत नामक एक राजा और शवुफन्तला नाम की एक युवती की प्रेम कहानी है। इस नाटक मंे एक गरीब मछुआरे के साथ राजकमर्चारियों के दुव्यर्वहार की बात कही गइर् है। एक मछुआरे को एक अंगूठी मिली एक मछुआरे को एक कीमती अंगूठी मिली। यह अंगूठी राजा ने शवुफन्तला को भेंट की थी, पर दुघर्टनावश उसे एक मछली निगल गइर्। जब मछुआरा इस अंगूठी को लेकर राजमहल पहुँचा तो द्वारपाल ने उस पर चोरी का आरोप लगाया और मुख्य पुलिस अध्िकारी भी बहुत बुरी तरह से पेश आया। राजा उस अंगूठी को देखकर बहुत खुश हुए और उन्होंने मछुआरे को इनाम दिया। पुलिसवाला और द्वारपाल मछुआरे से इनाम का वुफछ हिस्सा हड़पने के लिए उसके साथ शराबखाने चल पड़े। आज अगर किसी गरीब आदमी को वुफछ मिलता है और वह पुलिस में खबर करता है तो क्या उसके साथ इसी तरह का बतार्व किया जाएगा? एक प्रसि( व्यक्ित का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में उपदेश दिए और एक राजा का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में अपने अभ्िालेख लिखवाए। ;अध्याय 7 तथा 8 देखो।द्ध „ 118 हमारे अतीतदृप् चीनी तीथर्यात्राी पफा - श्िाएन का ध्यान उन लोगों की दुगर्ति पर भी गया, जिन्हें ऊँचे और शक्ितशाली लोग अछूत मानते थे। इन्हें शहरों के बाहर रहना पड़ता था। वे लिखते हंै - फ्अगर इन लोगों को शहर या बाशार के भीतर आना होता था तो सभी को आगाह करने के लिए ये लकड़ी के एक टुकड़े पर चोट करते रहते थे। यह आवाश सुनकर लोग सतवर्फ होकर अपने को, छू जाने से या किसी भी प्रकार के संपवर्फ से बचाते थे।य् एक जगह बाणभट्टð द्वारा अभ्िायान पर निकली राजा की सेना का बड़ा सजीव चित्राण किया गया है। राजा की सेना राजा बड़ी मात्रा में साशो - सामान लेकर यात्रा करते थे। इनमें हथ्िायारों के अतिरिक्त, रोशमरार् के उपयोग में आने वाली चीशें, जैसे बतर्न, असबाब ;जिसमें सोने के पायदान भी शामिल थेद्ध, खाने - पीने का सामान ;बकरी, हिरण, खरगोश, सब्िशयाँ, मसालेद्ध आदि, विभ्िान्न प्रकार की चीशें शामिल होती थीं। ये सारी चीशें ठेलेगाडि़यों पर या उँफटों तथा हाथ्िायों जैसे सामान ढोने वाले जानवरों की पीठ पर लादकर ले जायी जाती थीं। इस विशाल सेना के साथ - साथ संगीतकार नगाड़े, बिगुल तथा तुरही बजाते हुए चलते रहते थे। रास्ते में पड़ने वाले गाँव वालों को उनका सत्कार करना पड़ता था। वे दही, गुड़ तथा पूफलों का उपहार लाते थे तथा जानवरों को चारा भी देते थे। वे राजा से भी मिलना चाहते थे, ताकि अपनी श्िाकायत या कोइर् अनुरोध् उनके सामने रख सवेंफ। पर ये सेनाएँ अपने पीछे विनाश और विध्वंस की निशानी छोड़ जाती थीं। अक्सर गाँव वालों की झोपडि़याँ हाथी वुफचल डालते थे और व्यापारियों के कापि.फलों में जुते बैल, इस हलचल भरे माहौल से डरकर भाग खड़े होते थे। बाणभट्टð लिखते हैं - फ्पूरी दुनिया ध्ूल के गतर् में डूब जाती थी।य् सेना के साथ ले जाइर् जाने वाली चीशों की सूची बनाओ। ग्रामवासी राजा के लिए क्या - क्या लेकर आते थे? अन्यत्रा मानचित्रा 6 ;पृष्ठ 84 - 85द्ध में अरब ढूँढ़ो। मरुभूमि होते हुए भी सदियों से अरब, यातायात का एक बड़ा वेंफद्र था। दरअसल, अरब व्यापारी तथा नाविकों ने भारत और यूरोप ;देखो पृष्ठ सं. 100द्ध के बीच समुद्री व्यापार बढ़ाने में एक महत्वपूणर् भूमिका निभाइर् थी। अरब में रहने वाले अन्य लोगों में बेदुइन थे, जो घुमक्कड़ कबीले होते थे। ये मुख्य रूप से ऊँटों पर आश्रित होते थे, क्योंकि यह एक ऐसा मशबूत जानवर है, जो मरुभूमि में भी स्वस्थ रह सकता है। लगभग 1400 साल पहले पैगम्बर मुहम्मद ने अरब में इस्लाम नामक एक नए ध्मर् की शुरुआत की। इर्साइर् ध्मर् की तरह इस्लाम ने भी अल्लाह को सवोर्परि माना है, उनके बाद सभी को समान माना गया है। यहाँ इस्लाम ध्मर् के पवित्रा ग्रंथ वुफरान का एक अंश दिया गया है: फ्मुसलमान स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, विश्वास रखने वाले स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, भक्त स्ित्रायांे और पुरुषों के लिए, सच्चे स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, ध्ैयर्वान और स्िथर मन के स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, दान देने वाले स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, उपवास रखने वाले स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, अपनी पवित्राता बनाए रखने वाले स्ित्रायों और पुरुषों के लिए, अल्लाह को हमेशा याद करने वाले स्ित्रायों और पुरुषों के लिए - अल्लाह ने इन सब के लिए ही क्षमा और पुरस्कार रखा है।य् अगले सौ सालों के दौरान इस्लाम उत्तरी अप़्रफीका, स्पेन, इर्रान और भारत में पैफल गया। अरब नाविक, जो इस उपमहाद्वीप की तटीय बस्ितयों से पहले से ही परिचित थे, अब अपने साथ इस नए ध्मर् को भी ले आए। अरब के सिपाहियों ने करीब 1300 साल पहले स्िंाध् ;आज के पाकिस्तान मेेंद्ध को जीत लिया था। मानचित्रा 6 में उन रास्तों को ढूँढ़ो जिनसे नाविक तथा सिपाही इस उपमहाद्वीप में आए होंगे। उपयोगी शब्द कल्पना करो प्रशस्ित हषर्वध्र्न की सेना अगले हफ्र.ते तुम्हारे गाँव आने वाली है। तुम्हारे माता - पिता इसके आयार्वत्तर् लिए तैयारी कर रहे हैं। वणर्न करो कि वे क्या - क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हैं।दक्ष्िाणापथ वंशावली आनुवंश्िाक पदाध्िकारी सामंत सभा 1ण् सही या गलत बताओः नगरम ;कद्ध हरिषेण ने गौतमी पुत्रा श्री सातकणीर् की प्रशंसा में प्रशस्ित लिखी। ;खद्ध आयार्वत्तर् के शासक समुद्रगुप्त के लिए भेंट लाते थे। „ 120 हमारे अतीतदृप् ;गद्ध दक्ष्िाणापथ में बारह शासक थे। वुफछ महत्वपूणर् ;घद्ध गुप्त शासकों के नियंत्राण में दो महत्वपूणर् केन्द्र तक्षश्िाला औरतिथ्िायाँ मदुरै थे। ऽ गुप्त वंश की शुरुआत ;1700 साल पहलेद्ध;घद्ध ऐहोल पल्लवांे की राजधनी थी। ऽ हषर्वध्र्न का शासन;चद्ध दक्ष्िाण भारत में स्थानीय सभाएँ सदियों तक काम करती रहीं। ;1400 साल पहलेद्ध 2ण् ऐसे तीन लेखकों के नाम बताओ, जिन्होंने हषर्वध्र्न के बारे में लिखा। 3ण् इस युग में सैन्य संगठन में क्या बदलाव आए? 4ण् इस काल की प्रशासनिक व्यवस्था में तुम्हें क्या - क्या नइर् चीशें दिखती हैं? 5ण् तुम्हें क्या लगता है कि समुद्रगुप्त की भूमिका अदा करने के लिए अरविन्द को क्या - क्या करना पड़ेगा? 6ण् क्या प्रशस्ितयों को पढ़कर आम लोग समझ लेते होंगे? अपने उत्तर के कारण बताओ। 7ण् अगर तुम्हें अपनी वंशावली बनानी हो, तो तुम उसमें किन लोगों को शामिल करोगे? कितनी पीढि़यों को तुम इसमें शामिल करना चाहोगे? एक चाटर् बनाओ और उसे भरो। 8ण् आज यु( का असर जनसाधरण पर किस तरह पड़ता है?

RELOAD if chapter isn't visible.