लोहे के औशार और खेती लोहे का प्रयोग आज एक आम बात है। लोहे की चीशें हमारी रोशमरार् की िंादगी का हिस्सा बन गइर् हैं। इस उपमहाद्वीप में लोहे का प्रयोग लगभग 3000 साल पहले शुरू हुआ। महापाषाण कब्रों में लोहे के औशार और हथ्िायार बड़ी संख्या में मिले हैं। इनके बारे में तुम अध्याय 5 में पढ़ चुके हो। करीब 2500 वषर् पहले लोहे के औशारों के बढ़ते उपयोग का प्रमाण मिलता है। इनमें जंगलों को साप.फ करने के लिए वुफल्हाडि़याँ और जुताइर् के लिए हलों के पफाल शामिल हैं। अध्याय 6 में तुमने पढ़ा था कि लोहे के पफाल के इस्तेमाल से वृफष्िा उत्पादन बढ़ गया। वृफष्िा उत्पादन बढ़ाने के लिए उठाए गए अन्य कदम: ¯सचाइर् समृ( गाँवों के बिना राजाओं तथा उनके राज्यों का बने रहना मुश्िकल था। जिस तरह वृफष्िा के विकास में नए औशार तथा रोपाइर् ;अध्याय 6द्ध महत्वपूणर् कदम थे, उसी तरह ¯सचाइर् भी कापफी उपयोगी साबित हुइर्। इस समय ¯सचाइर् के लिए नहरें, वुफएँ, तालाब तथा वृफत्रिाम जलाशय बनाए गए। औशारों की सूची में इन चित्रों के नाम चुनो दृ हँसिया, वुफल्हाड़ी, और सँड़सी। लोहे की ऐसी पाँच चीशों की सूची बनाओ जिनका प्रयोग तुम रोश करते हो। 87 ऽ इस चाटर् में तुम्हें ¯सचाइर् से आए परिवतर्न दिखाए गए हैं। खाली स्थानों में सही वाक्य भरो: ऽ लोगों द्वारा परिश्रम किया गया। ऽ किसानों को लाभ मिला, क्योंकि अब उत्पादन की अनिश्िचतता घटी। ऽ कर अदा करने के लिए किसानों को उत्पादन बढ़ाना था। ऽ राजाओं ने ¯सचाइर् की योजना बनाइर् और ध्न खचर् किया। 1ण् राजा को सेना, महल और किले बनवाने के लिए ध्न चाहिए। 3ण् 2ण् वे किसानों से कर लेते हैं। 4ण् यह ¯सचाइर् से ही संभव था। 5ण् 6ण् 7ण् वृफष्िा उत्पादन बढ़ा। 8ण् राजस्व भी बढ़ा। 9ण् गाँवों में कौन रहते थे? इस उपमहाद्वीप के दक्ष्िाणी तथा उत्तरी हिस्सों के अध्िकांश गाँवों में कम से कम तीन तरह के लोग रहते थे। तमिल क्षेत्रा में बड़े भूस्वामियों को वेल्लला, साधरण हलवाहों को उणवार और भूमिहीन मशदूर, दास कडैसियार और अदिमइर् कहलाते थे। देश के उत्तरी हिस्से में, गाँव का प्रधन व्यक्ित ग्राम - भोजक कहलाता था। अक्सर एक ही परिवार के लोग इस पद पर कइर् पीढि़यों तक बने „ 88 हमारे अतीतदृप् रहते थे। यानी कि यह पद आनुवंश्िाक था। ग्राम - भोजक के पद पर आमतौर पर गाँव का सबसे बड़ा भू - स्वामी होता था। साधरणतया इनकी शमीन पर इनके दास और मशदूर काम करते थे। इसके अतिरिक्त प्रभावशाली होने के कारण प्रायः राजा भी कर वसूलने का काम इन्हें ही सौंप देते थे। ये न्यायाध्ीश का और कभी - कभी पुलिस का काम भी करते थे। ग्राम - भोजकों के अलावा अन्य स्वतंत्रा वृफषक भी होते थे, जिन्हें गृहपति कहते थे। इनमें श्यादातर छोटे किसान ही होते थे। इसके अतिरिक्त वुफछ ऐसे स्त्राी - पुरुष थे, जिनके पास अपनी शमीन नहीं होती थी। इनमें दास कमर्कार आते थे, जिन्हें दूसरों की शमीन पर काम करके अपनी जीविका चलानी पड़ती थी। अध्िकांश गाँवों में लोहार, वुफम्हार, बढ़इर् तथा बुनकर जैसे वुफछ श्िाल्पकार भी होते थे। प्राचीनतम तमिल रचनाएँ तमिल की प्राचीनतम रचनाओं को संगम साहित्य कहते हैं। इनकी रचना करीब 2300 साल पहले की गइर्। इन्हें संगम इसलिए कहा जाता है क्योंकि मदुरै ;देखो मानचित्रा 7, पृष्ठ 113द्ध के कवियों के सम्मेलनों में इनका संकलन किया जाता था। गाँव में रहने वालों के जिन तमिल नामों का उल्लेख यहाँ किया गया है, वे संगम साहित्य में पाए जाते हैं। नगर: क्या कहती हैं कहानियाँ, यात्रा - विवरण,मू£तकलाएँ और पुरातत्त्व तुमने जातकों के बारे में सुना होगा। ये वो कहानियाँ हैं, जो आम लोगों में प्रचलित थीं। बौ( भ्िाक्खुओं ने इनका संकलन किया। यहाँ एक जातक कथा दी गइर् है, जिसमें यह बताया गया है कि एक निध्र्न किस तरह ध्ीरे - ध्ीरे ध्नी बन जाता है। 89 ऽ खुशहाल गाँव और समृ( शहर एक निध्र्न की चतुराइर् एक शहर में एक गरीब युवक रहता था। उसके पास एक मरे चूहे के अलावा वुफछ नहीं था। उसने उस चूहे को एक सिक्के में एक भोजनालय वाले की बिल्ली के लिए बेच दिया। पिफर एक दिन बड़ी शोर की आँध्ी आइर्। राजा का बगीचा टूटी टहनियों और पत्तों से भर गया। उनका माली इसे साप.फ करने की बात से परेशान हो उठा। युवक ने माली से कहा कि अगर लकडि़याँं और पत्ते उसे मिल जाएँ तो वह बगीचे की सप.फाइर् कर सकता है। माली तुरंत मान गया। युवक ने पास खेल रहे बच्चों को यह कह कर इकट्टòा कर लिया कि प्रत्येक टहनी और पत्ते के बदले में उन्हें एक - एक मिठाइर् मिलेगी। देखते ही देखते उन्होंने बगीचे से एक - एक तिनका चुनकर गेट के पास इकटòा कर दिया। तभी उध्र से राजा का वुफम्हार बतर्नों को पकाने के लिए ईंध्न की तलाश में गुजरा। उसने पूरे ढेर को खरीद लिया। इस तरह युवक के पास वुफछ और पैसे हो गए। अब उस युवक ने एक और योजना बनाइर्। एक बड़े बतर्न में पानी भरकर वह नगर के द्वार पर गया और वहाँ उसने घास काटने वाले 500 लोगों को पानी पिलाया। खुश होकर उन लोगों ने कहा, फ्तुमने हमारे लिए इतना अच्छा काम किया बताओ अब हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं?य् उसने कहा, फ्मैं आपको यह तब बताऊँगा जब मुझे आपकी सहायता की शरूरत होगी।य् उसके बाद उसने एक व्यापारी से दोस्ती की। एक दिन उस व्यापारी ने बताया, फ्कल एक घोड़े का व्यापारी 500 घोड़ों के साथ शहर में आ रहा है।य् यह सुनकर उस युवक ने उन घास काटने वालों के पास जाकर कहा, फ्वृफपया, तुम सब एक - एक घास का गट्टòर मुझे दो और अपनी घास तब तक मत बेचो, जब तक मेरी न बिक जाए।य् उन्होंने उसे घासों के 500 गट्टòर दे दिए। जब घोड़े के व्यापारी को कहीं भी घास न मिली तो उसने इस युवक की घास एक हशार सिक्के में खरीद ली। इस कहानी में आए व्यक्ितयों के व्यवसायों की सूची बनाओ। प्रत्येक के लिए यह तय करो कि वे ;कद्ध शहर में, ;खद्ध गाँव में, या पिफर ;गद्ध शहर तथा गाँव दोनों में रहते थे। घोड़े का व्यापारी शहर में क्यों आया होगा? क्या महिलाएँ कहानी में बताए व्यवसायों को अपना सकती थीं? उत्तर के कारण बताओ। प्राचीन नगरों के जीवन के बारे में हमंे वुफछ अन्य स्रोतों से भी पता चल सकता है। शहरों, गाँवों या पिफर जंगलों के जीवन से जुड़ी घटनाओं को मू£तकार कलात्मक ढंग से उकेरते थे। इन मू£तयों को ऐसी इमारतों की रे¯लग, खंभों या प्रवेश - द्वारों पर सजाया जाता था जहाँ लोग आते थे। „ 90 हमारे अतीतदृप् दिल्ली में मिला वलयवूफप। हड़प्पा की जल निकास व्यवस्था से यह वैफसे भ्िान्न है? अध्याय 6 में व£णत अनेक शहर, महाजनपदों की राजधानी थे। जैसा कि तुमने पढ़ा इनमें से वुफछ शहर परकोटों से घ्िारे होते थे। जैसा कि तुम उफपर के चित्रा में देख रहे हो, अनेक शहरों में वलयवूफप मिले हैं। ये वलयवूफप गुसलखाने, नाली या वूफड़ेदान के लिए प्रयुक्त होते थे। प्रायः ये वलयवूफप लोगों के घरों मंे होते थे। महलों, बाशारों या आम घरों के अवशेष बहुत कम मिले हैं। संभवतः लकड़ी, मिट्टðी व कच्ची ईंटों या छप्पर से बने होने के कारण ये श्यादा समय तक टिक न पाए हों। भविष्य में पुरातत्त्वविद् इनकी खोज कर सकते हैं। प्राचीन शहरों के बारे में वहाँ गए नाविकों तथा यात्रिायों के विवरणों द्वारा भी पता चलता है। ऐसा ही एक विस्तृत विवरण किसी अज्ञात यूनानी नाविक का है। जिन - जिन नीचेः साँची की मू£तकला। यह मध्य प्रदेश स्िथत साँची के स्तूप की मू£तकला का नमूना है। इसमें शहर के जीवन का एक दृश्य है। तुम अध्याय 12 में साँची के बारे में पढ़ोेगे। इन दीवारों को देखो। क्या वे ईंट की बनी हैं या पिफर लकड़ी या पत्थर से? क्या इसकी रे¯लग लकड़ी की बनी हैं? इन इमारतों की छतों का वणर्न करो। पत्तनों पर वह गया, उन सभी के बारे में उसने लिखा है। मानचित्रा 7 ;पृष्ठ 113द्ध में भरूच ढूँढ़ो। अब उसके द्वारा दिए गए वणर्न को पढ़ो। सिक्के पृष्ठ 90 पर दी गइर् कहानी में तुमने देखा कि किस तरह सिक्कों के आधर पर सम्पिा का मूल्यांकन किया गया। पुरातत्त्वविदों को इस युग के हशारों सिक्के मिले हैं। सबसे पुराने आहत सिक्के थे, जो करीब 500 साल चले। इसका चित्रा नीचे दिया गया है। चाँदी या सोने के सिक्कों पर विभ्िान्न आवृफतियों को आहत कर बनाए जाने के कारण इन्हें आहत सिक्का कहा जाता था। „ 92 हमारे अतीतदृप् विनिमय के अन्य साध्न संगम साहित्य की इस छोटी सी कविता को पढ़ो। खेतों के सप.ेफद धन गाडि़यों पर लादे जा रहे हैं नमक के लिए, लंबे - लंबे रास्ते चाँदनी सी सप.ेफद रेत पर परिवार को समेटे कहीं पीछे छूट न जाएँ। शहरों से नमक के सौदागरों के यूँ चले जाने से सिप.र्फ सन्नाटा रह जाता है। समुद्र के किनारे नमक का बहुत श्यादा उत्पादन होता था। व्यापारी किस चीश से इसका विनिमय करते हैं? वे किस तरह यात्रा कर रहे हैं? नगर: अनेक गतिविध्ियों के वेंफद्र अक्सर नगर कइर् कारणों से महत्वपूणर् हो जाते थे। उदाहरण के लिए मथुरा ;मानचित्रा 7, पृष्ठ 113द्ध को देखो। यह 2500 साल से भी श्यादा समय से एक महत्वपूणर् नगर रहा है क्योंकि यह यातायात और व्यापार के दो मुख्य रास्तों पर स्िथत था। इनमें से एक रास्ता उत्तर - पश्िचम से पूरब की ओर, दूसरा उत्तर से दक्ष्िाण की ओर जाने वाला था। शहर के चारों ओर किलेबंदी थी, इसमें अनेक मंदिर थे। आस - पास के किसान तथा पशुपालक शहर में रहने वालों के लिए भोजन जुटाते थे। मथुरा बेहतरीन मू£तयाँ बनाने का वेंफद्र था। लगभग 2000 साल पहले मथुरा वुफषाणों की दूसरी राजधनी बनी। इसके बारे में तुम अगले अध्याय में पढ़ोगे। मथुरा एक ध£मक वेंफद्र भी रहा है। यहाँ बौ( विहार और जैन मंदिर हैं। यह वृफष्ण भक्ित का एक महत्वपूणर् वेंफद्र था। 93 ऽ खुशहाल गाँव और समृ( शहर „ 94 हमारे अतीतदृप् मथुरा में प्रस्तर - खंडों तथा मू£तयों पर अनेक अभ्िालेख मिले हैं। आमतौर पर ये संक्ष्िाप्त अभ्िालेख हैं, जो स्ित्रायांे तथा पुरुषों द्वारा मठों या मंदिरों को दिए जाने वाले दान का उल्लेख करते हैं। प्रायः शहर के राजा, रानी, अिाकारी, व्यापारी तथा श्िाल्पकार इस प्रकार के दान करते थे। उदाहरण के लिए मथुरा के अभ्िालेख में सुनारों, लोहारों, बुनकरों, टोकरी बुनने वालों, माला बनाने वालों और इत्रा बनाने वालों के उल्लेख मिलते हैं। मथुरा के लोगों के व्यवसायों की एक सूची बनाओ। एक ऐसे व्यवसाय का नाम बताओ जो हड़प्पा में नहीं था। श्िाल्प तथा श्िाल्पकार पुरास्थलों से श्िाल्पों के नमूने मिले हैं। इनमें मिट्टðी के बहुत ही पतले और सुंदर बतर्न मिले हैं, जिन्हें उत्तरी काले चमकीले पात्रा कहा जाता है क्योंकि ये श्यादातर उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में मिले हैं तथा ये प्रायः काले रंग के होते हैं, और इनमें एक खास चमक होती है। ध्यान रहे कि अन्य दूसरे श्िाल्पों के अवशेष नहीं बचे होंगे। जैसे कि विभ्िान्न ग्रंथों से हमें पता चलता है कि कपड़ों का उत्पादन बहुत महत्वपूणर् था। उत्तर में वाराणसी और दक्ष्िाण में मदुरै इसके प्रसि( वेंफद्र थे। यहाँ स्त्राी - पुरुष दोनों काम करते थे। अनेक श्िाल्पकार तथा व्यापारी अपने - अपने संघ बनाने लगे थे, जिन्हें श्रेणी कहते थे। श्िाल्पकारों की श्रेण्िायों का काम प्रश्िाक्षण देना, कच्चा माल उपलब्ध् कराना तथा तैयार माल का वितरण करना था। जबकि व्यापारियों की श्रेण्िायाँ व्यापार का संचालन करती थीं। श्रेण्िायाँ बैंकों के रूप में काम करती थीं, जहाँ लोग पैसे जमा रखते थे। इस ध्न का निवेश लाभ के लिए किया जाता था। उससे मिले लाभ का वुफछ हिस्सा जमा करने वाले को लौटा दिया जाता था या पिफर मठ आदि ध£मक संस्थानों को दिया जाता था। सूत कातने और बुनने के नियम ये नियम अथर्शास्त्रा के हैं। अध्याय 8 में अथर्शास्त्रा का उल्लेख किया गया है। इसमें वणर्न किया गया है कि किस प्रकार एक विशेष पदाध्िकारी की देखरेख में कारखानों में सूत की कताइर् और बुनाइर् की जाती थी। ऊन, पेड़ों की छाल, कपास, पटुआ तथा सन को तैयार करने के काम में विध्वाओं, सक्षम - अक्षम महिलाओं, भ्िाक्खुण्िायों, वृ(ा वेश्याओं, राजा की अवकाशप्राप्त दासियों, सेविकाओं और अवकाशप्राप्त देवदासियों को लगाया जा सकता है। इन्हें इनके काम के और गुणवत्ता के अनुसार पारिश्रमिक देना चाहिए। जिन महिलाओं को बाहर निकलने की अनुमति नहीं है, वे अपनी दासियों को भेजकर कच्चे माल को मंगवा सकती हैं और पिफर तैयार माल उन्हें भ्िाजवा सकती हैं। वे औरतें, जो कारखाने तक जा सकती हैं, उन्हें अपना माल कारखाने तक तड़के ले जाना पड़ता था, जहाँ उन्हें पारिश्रमिक मिलता था। इस समय माल को अच्छी तरह जाँचने के लिए रोशनी रहती है। अगर निरीक्षक उस औरत की तरप.फ देखता है या इध्र - उध्र की बातें करता है, तो उसे सशा मिलनी चाहिए। अगर औरत ने अपना काम पूरा नहीं किया, तो उसे जुमार्ना देना होगा, इसके लिए उसका अंगूठा भी काटा जा सकता है। उन महिलाओं की सूची बनाओ जिन्हें निरीक्षक नियुक्त कर सकता था। क्या काम करने के दौरान महिलाओं को मुश्िकलें झेलनी पड़ती थीं? सूक्ष्म निरीक्षण: अरिकामेडु मानचित्रा 7 ;पृष्ठ 113द्ध में अरिकामेडु ;पुदुच्चेरी मेंद्ध ढूँढ़ो। पृष्ठ 96 में रोम के बारे में दी जानकारी पढ़ो। लगभग 2200 से 1900 साल पहले अरिकामेडु एक पत्तन था, यहाँ दूर - दूर से आए जहाशों से सामान उतारे जाते थे। यहाँ ईंटों से बना एक ढाँचा मिला है जो संभवतः गोदाम रहा हो। यहाँ भूमध्य - सागरीय क्षेत्रा के एंपफोरा जैसे पात्रा मिले हैं। इनमें शराब या तेल जैसे तरल पदाथर् रखे जा सकते थे। इनमेें दोनों तरप.फ से पकड़ने के लिए हत्थे लगे हैं। साथ ही यहाँ ‘एरेटाइन’ जैसे मुहर लगे लाल - चमकदार बतर्न भी मिले हैं। इन्हें इटली के एक शहर के नाम पर ‘एरेटाइन’ पात्रा के नाम से जाना जाता है। इसे मुहर लगे साँचे पर गीली चिकनी मिट्टðी को दबा कर बनाया जाता था। वुफछ 95 ऽ ऐसे बतर्न भी मिले हैं, जिनका डिशाइन तो रोम का था, किन्तु वे यहीं बनाए जाते थे। यहाँ रोमन लैंप, शीशे के बतर्न तथा रत्न भी मिले हैं। साथ ही छोटे - छोटे वुफण्ड मिले हैं, जो संभवतः कपड़े की रंगाइर् के पात्रा रहे होंगे। यहाँ पर शीशे और कइर् बतर्नों पर ब्राह्मी लिपि में अध्र् - बहुमूल्य पत्थरों से मनके बनाने के पयार्प्त साक्ष्य अभ्िालेख मिले हैं। प्रारंभ में मिले हैं।तमिल भाषा के लिए इसी लिपि का प्रयोग किया जाता रोम के साथ संबंध् दशार्ने वाले साक्ष्य की सूचीथा। इसीलिए इन्हें तमिल ब्राह्मी बनाओ।अभ्िालेख भी कहा जाता है। अन्यत्रा मानचित्रा 6 ;पृष्ठ 84द्ध में रोम को ढूँढ़ो। यह यूरोप के सबसे पुराने शहरों में से एक है। इसका विकास लगभग तभी हुआ, जब गंगा के मैदान के शहर बस रहे थे। रोम एक बहुत बड़े साम्राज्य की राजधनी था। यह यूरोप, उत्तरी अप़्रफीका तथा पश्िचमी एश्िाया तक पैफला साम्राज्य था। इसके सबसे महत्वपूणर् शासकों में से एक आॅगस्टस ने करीब 2000 साल पहले शासन किया था। उसने कहा था कि रोम ईंटों का शहर था, जिसे मैंने संगमरमर का बनवाया। आॅगस्टस और उसके बाद के शासकों ने कइर् मंदिर तथा महल भी बनवाए। आॅगस्टस ने बड़े - बड़े रंगमंडल ;एम्िपफथ्िायेटरद्ध बनवाए। इनमें चारों तरप.फ दशर्कों के बैठने की सीढ़ीनुमा जगहें होती थीं। यहाँ लोग विभ्िान्न प्रकार के कायर्क्रम देख सकते थे। उन्होंने स्नानागार भी बनवाए जहाँ स्ित्रायों तथा पुरुषों के लिए अलग - अलग समय निधर्रित थे। यहाँ लोग एक - दूेेेेैेेे़ ेसर स मिलत थ, आर आराम करत थ। बड - बड़ जलवाही सेतु ;एक्वाडक्टद्ध के शरिए शहर के स्नानागारों, पफव्वारों तथा गुसलखानों के लिए पानी लाया जाता था। ये बड़े खुले रंगमंडल ;एम्िपफीथ्िायेटरद्ध और जलवाही सेतु इतने दिनों तक वैफसे बचे रहे? „ 96 हमारे अतीतदृप् कल्पना करो तुम बेरिगाज़ा में रहते हो और प त्तन देखने निकले हो। तुमको क्या - क्या देखने को मिला? 1ण् खाली जगहों को भरो: ;कद्ध तमिल में बड़े भूस्वामी को कृकृकृकृकृकृकृकृ कहते थे। कृकृकृकृकृकृकृकृ;खद्ध ग्राम - भोजकों की शमीन पर प्रायःद्वारा खेती की जाती थी। कृकृकृकृकृकृकृकृ;गद्ध तमिल में हलवाहे को कहते थे। कृकृकृकृकृकृकृकृ;घद्ध अध्िकांश गृहपति भूस्वामी होते थे। 2ण् ग्राम - भोजकों के काम बताओ। वे शक्ितशाली क्यों थे? 3ण् गाँवों तथा शहरों दोनों में रहने वाले श्िाल्पकारों की सूची बनाओ। 4ण् सही जवाब ढूँढ़ो: ;कद्ध वलयवूफप का उपयोग ऽ नहाने के लिए ऽ कपड़े धेने के लिए ऽ ¯सचाइर् के लिए ऽ जल निकास के लिए किया जाता था। ;खद्ध आहत सिक्के ऽ चाँदी ऽ सोना ऽ टिन ऽ हाथी दाँत के बने होते थे। ऽ उपमहाद्वीप में लोहे के प्रयोग की शुरुआत ;करीब 3000 साल पहलेद्ध ऽ लोहे के प्रयोग में बढ़ोतरी, नगर, आहत सिक्के ;करीब 2500 साल पहलेद्ध ऽ संगम साहित्य की रचना की शुरुआत ;करीब 2300 साल पहलेद्ध ऽ अरिकामेडु का पत्तन ;करीब 2200 तथा 1900 साल पहलेद्ध 97 ऽ ;गद्ध मथुरा महत्वपूणर् ऽ गाँव ऽ पत्तन ऽ ध£मक वेंफद्र ऽ जंगल क्षेत्रा था। ;घद्ध श्रेणी ऽ शासकों ऽ श्िाल्पकारों ऽ वृफषकों ऽ पशुपालकों का संघ होता था। 5ण् पृष्ठ 87 पर दिखाए गए लोहे के औशारों में कौन खेती के लिए महत्वपूणर् होंगे? अन्य औशार किस काम में आते होंगे? 6ण् अपने शहर की जल निकास व्यवस्था की तुलना तुम उन शहरों की व्यवस्था से करो, जिनके बारे में तुमने पढ़ा है। इनमें तुम्हें क्या - क्या समानताएँ और अंतर दिखाइर् दिए? 7ण् अगर तुमने किसी श्िाल्पकार को काम करते हुए देखा है तो वुफछ वाक्यों में उसका वणर्न करो ;संकेत: उन्हें कच्चा माल कहाँ से मिलता है, किस तरह के औशारों का प्रयोग करते हैं, तैयार माल का क्या होता है, आदिद्ध 8ण् अपने शहर या गाँव के लोगों के कायो±ें की एक सूची बनाओ। मथुरा में किए जाने वाले कायो± से ये कितने समान और कितने भ्िान्न हैं? „ 98 हमारे अतीतदृप्

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