दुनिया के प्राचीनतम ग्रंथों में एक शायद तुमने वेदों के बारे में सुना होगा। वेद चार हैं μ ट्टग्वेद, सामवेद, यजुवेर्द तथा अथवर्वेद। सबसे पुराना वेद है, ट्टग्वेद जिसकी रचना लगभग 3500 साल पहले हुइर्। ट्टग्वेद में एक हशार से श्यादा प्राथर्नाएँ हैं जिन्हें, सूक्त कहा गया है। सूक्त का मतलब है, अच्छी तरह से बोला गया। ये विभ्िान्न देवी - देवताओं की स्तुति में रचे गए हैं। इनमें से तीन देवता बहुत महत्वपूणर् हैं: अग्िन, इन्द्र और सोम। अग्िन आग के देवता, इन्द्र यु( के देवता हैं और सोम एक पौध है, जिससे एक खास पेय बनाया जाता था। वैदिक प्राथर्नाओं की रचना ट्टष्िायों ने की थी। आचायर् विद्याथ्िार्यों को इन्हें अक्षरों, शब्दों और वाक्यों में बाँटकर, सस्वर पाठ द्वारा वंफठस्थ करवाते थे। अध्िकांश सूक्तों के रचयिता, सीखने और सिखाने वाले पुरुष थे। कुछ प्राथर्नाओं की रचना महिलाओं ने भी की थी। ट्टग्वेद की भाषा प्राक् संस्वृफत या वैदिक संस्वृफत कहलाती है। तुम स्वूफल में जो संस्वृफत पढ़ती हो उससे यह भाषा थोड़ी भ्िान्न है। 43 ऽ क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें संस्वृफत और अन्य भाषाएँ संस्वृफत भाषा भारोपीय ;भारतμयूरोपीयद्ध भाषा - परिवार का हिस्सा है। भारत की कइर् भाषाएँ - असमिया, गुजराती, हिंदी, कश्मीरी और सिंध्ी, एश्िायाइर् भाषाएं जैसे पफारसी तथा यूरोप की बहुत - सी भाषाएँ जैसे - ़अंग्रेशी, प.्रफांसीसी, जमर्न, यूनानी, इतालवी, स्पैनिश आदि इसी परिवार से जुड़ी हुइर् हैं। उन्हें एक भाषा - परिवार इसलिए कहा जाता है क्योंकि आरंभ मंे उनमें कइर् शब्द एक जैसे थे। उदाहरण के लिए ‘मातृ’ ;संस्वृफतद्ध, माँ ;हिंदीद्ध और ‘मदर’ ;अंग्रेशीद्ध शब्द को देखो। क्या तुम्हें इनमंे कोइर् समानता नशर आती है? उपमहाद्वीप मेें दूसरे भाषा - परिवारों की भी भाषाएँ बोली जाती हैं। उदाहरण के लिए पूवोर्त्तर प्रदेशों में तिब्बत - बमार् परिवार की भाषाएँ बोली जाती हैं। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम, द्रविड़ भाषा - परिवार की भाषाएँ हैं। जबकि झारखंड और मध्य भारत के कइर् हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाएँ आॅस्ट्रोμएश्िायाटिक परिवार से जुड़ी हैं। उन भाषाओं की सूची बनाओ जिनके बारे में तुमने सुन रखा है। उनके भाषा - परिवारों को पहचानने की कोश्िाश करो। हम जिन किताबों को पढ़ते हैं वे लिखी और छापी गइर् हैं। ट्टग्वेद का उच्चारण किया जाता था और श्रवण किया जाता था न कि पढ़ा जाता था। रचना के कइर् सदियों बाद इसे पहली बार लिखा गया। इसे छापने का काम तो मुश्िकल से दो सौ साल पहले हुआ। इतिहासकार )ग्वेद का अध्ययन वैफसे करते हैं? इतिहासकार, पुरातत्त्ववेत्ताओं की तरह ही अतीत के बारे में जानकारी इकट्टòी करते हैं। लेकिन भौतिक अवशेषों के अलावा वे लिख्िात स्रोतों का भी उपयोग करते हैं। चलो देखते हैं कि वे ट्टग्वेद का अध्ययन वैफसे करते हैं। ट्टग्वेद के कुछ सूक्त वात्तार्लाप के रूप में हैं। विश्वामित्रा नामक ट्टष्िा और देवियों के रूप में पूजित दो नदियों ;व्यास और सतलुजद्ध के बीच यह संवाद एक ऐसे ही सूक्त का अंश है। इन दोनों नदियों को मानचित्रा 1 ;पृष्ठ 2द्ध में खोजें तथा पिफर पढ़ें। „ 44 हमारे अतीतदृप् ट्टग्वेद की पाण्डुलिपि का एक पन्ना। भूजर् वृक्ष की छाल पर लिखी यह पाण्डुलिपि कश्मीर में पाइर् गइर् थी। लगभग 150 वषर्पहले ट्टग्वेद को सबसे पहली बार छापने के लिए इसका उपयोग किया गया था। इसी पाण्डुलिपि को देखकर अंग्रेशी अनुवाद तैयार हुआ। यह पाण्डुलिपि पुणे, महाराष्ट्र के एक पुस्तकालय में सुरक्ष्िात है। विश्वामित्रा और नदियाँ विश्वामित्रा μ हे नदियांे, अपने बछड़ों को चाटती हुइर् दो दमकती गायों की तरह, दो पुफतीर्ले घोड़ों की चाल से पहाड़ों से नीचे आओ। इन्द्र द्वारा दी हुइर् शक्ित से स्पूफतर् तुम रथों की गति से सागर की ओर बह रही हो। तुम जल से परिपूणर् हो और एक - दूसरे से मिल जाना चाहती हो। नदियाँ μ जल से परिपूणर् हम देवताओं के बनाए रास्ते पर चलती हैं। एक बार निकलने पर हमें रोका नहीं जा सकता। हे ट्टष्िा, तुम हमसे प्राथर्ना क्यों कर रहे हो? विश्वामित्रा μ हे बहनों, मुझ गायक की प्राथर्ना सुनो। मंै रथों और गाडि़यों सहित बहुत दूर से आया हूँ। वृफपा करके अपने जल को हमारे रथों और गाडि़यों की ध्ुरियों के ऊपर न उठाओ ताकि हम आसानी से उस पार जा सकें। नदियाँ μ हम तुम्हारी प्राथर्ना सुनेंगे, जिससे तुम सब सुरक्ष्िात उस पार जा सको। इतिहासकार यह बताते हैं कि यह प्राथर्ना उस क्षेत्रा में रची गइर् होगी जहाँ ये नदियाँ बहती हैं। वे यह भी सुझाते हैं कि जिस समाज में ट्टष्िा रहते थे वहाँ घोड़ों और गायों को बहुत महत्त्व दिया जाता था। इसीलिए नदियों की तुलना घोड़ों और गायों से की गइर् है। क्या तुम्हें लगता है कि रथ भी महत्वपूणर् थे? अपने जवाब के लिए कारण बताओ। प्राथर्ना की पंक्ितयों को दुबारा पढ़कर यह बताओ कि उनमें परिवहन के लिए किन - किन साध्नों का उल्लेख है। ट्टग्वेद की प्राथर्नाओं में अन्य दूसरी नदियों खासकर सरस्वती, सिन्ध्ु और उसकी सहायक नदियों का भी िाक्र है। गंगा और यमुना का उल्लेख सिप.र्फ एक बार हुआ है। मानचित्रा 1 को देखो और ऐसी पाँच नदियों की सूची बनाओ जिनके नाम ट्टग्वेद में नहीं हैं। 45 ऽ क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें „ 46 हमारे अतीतदृप् मवेशी, घोड़े और रथ ट्टग्वेद में मवेश्िायों, बच्चों ;खासकर पुत्रोंद्ध और घोड़ों की प्राप्ित के लिए अनेक प्राथर्नाएँ हैं। घोड़ों को लड़ाइर् में रथ खींचने के काम में लाया जाता था। इन लड़ाइर्यों में मवेशी जीत कर लाए जाते थे। लड़ाइर्याँ वैसे शमीन के लिए भी लड़ी जाती थीं जहाँ अच्छे चारागाह हों या जहाँ पर जौ जैसी जल्दी तैयार हो जाने वाली प.फसलों को उपजाया जा सकता हो। वुफछ लड़ाइर्याँ पानी के स्रोतों और लोगों को बंदी बनाने के लिए भी लड़ी जाती थीं। यु( में जीते गए ध्न का कुछ भाग सरदार रख लेते थे तथा कुछ हिस्सा पुरोहित को दिया जाता था। शेष ध्न आम लोगों में बाँट दिया जाता था। कुछ ध्न यज्ञ करने के लिए भी प्रयुक्त होता था। यज्ञ की आग में आहुति दी जाती थी। ये आहुतियाँ देवी - देवताओं को दी जाती थीं। घी, अनाज और कभी - कभी जानवरों की भी आहुति दी जाती थी। अध्िकांश पुरुष इन यु(ों में भाग लेते थे। कोइर् स्थायी सेना नहीं होती थी, लेकिन लोग सभाओं में मिलते - जुलते थे और यु( व शांति के विषय में सलाह - मशविरा करते थे। वहाँ ये ऐसे लोगों को अपना सरदार चुनते थे जो बहादुर और वुफशल यो(ा हों। लोगों की विशेषता बताने वाले शब्द लोगोें का वगीर्करण काम, भाषा, परिवार या समुदाय, निवास स्थान या सांस्कृतिक परंपरा के आधर पर किया जाता रहा है। ट्टग्वेद में लोगों की विशेषता बताने वाले कुछ शब्दों को देखो। ऐसे दो समूह हैं जिनका वगीर्करण काम के आधर पर किया गया है। पुरोहित जिन्हें कभी - कभी ब्राह्मण कहा जाता था तरह - तरह के यज्ञ और अनुष्ठान करते थे। दूसरे लोग थे - राजा। ये राजा वैसे नहीं थे जिनके बारे में तुम बाद में पढ़ोगी। ये न तो बड़ी राजधनियों और महलों में रहते थे, न इनके पास सेना थी, न ही ये कर वसूलते थे। प्रायः राजा की मृत्यु के बाद उसका बेटा अपने आप ही शासक नहीं बन जाता था। पिछले अनुभाग को एक बार पिफर पढ़ो और यह पता लगाने की कोश्िाश करो कि राजा क्या करते थे। जनता या पूरे समुदाय के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल होता था। एक था जन जिसका प्रयोग हिंदी व अन्य भाषाओं में आज भी होता है। दूसरा था विश् जिससे वैश्य शब्द निकला है। इस विषय पर तुम अध्याय 6 में विस्तार से पढ़ोगी। ट्टग्वेद में विश् और जनों के नाम मिलते हैं। इसलिए हमें पुरू - जन या विश्, भरत - जन या विश्, यदु - जन या विश् जैसे कइर् उल्लेख मिलते हैं। तुम्हें इनमें से कोइर् नाम जाना - पहचाना लगता है? जिन लोगों ने इन प्राथर्नाओं की रचना की वे कभी - कभी खुद को आयर् कहते थे तथा अपने विरोध्ियों को दास या दस्यु कहते थे। दस्यु वे लोग थे जो यज्ञ नहीं करते थे और शायद दूसरी भाषाएँ बोलते थे। बाद के समय में दास ;स्त्राीलिंगः दासीद्ध शब्द का मतलब गुलाम हो गया। दास वे स्त्राी और पुरुष होते थे जिन्हें यु( में बंदी बनाया जाता था। उन्हें उनके मालिक की जायदाद माना जाता था। जो भी काम मालिक चाहते थे उन्हें वह सब करना पड़ता था। जिस युग में उपमहाद्वीप के उत्तर - पश्िचम में ट्टग्वेद की रचना हो रही थी उसी समय दूसरी जगहों पर एक अलग तरह का विकास हो रहा था। देखो, वहाँ क्या हो रहा था। खामोश प्रहरीμ कहानी महापाषाणों की अगले पृष्ठ के चित्रों को देखो। ये श्िालाखण्ड महापाषाण ;महा: बड़ा, पाषाण: पत्थरद्ध नाम से जाने जाते हैं। ये पत्थर दप.फन करने की जगह पर लोगों द्वारा बड़े करीने से लगाए गए थे। महापाषाण कब्रें बनाने की प्रथा लगभग 3000 साल पहले शुरू हुइर्।यह प्रथा दक्कन, दक्ष्िाण भारत, उत्तर - पूवीर् भारत और कश्मीर में प्रचलित थी। कुछ महत्वपूणर् महापाषाण पुरास्थल मानचित्रा 2 में दिखाए गए हैं। कुछमहापाषाण शमीन के ऊपर ही दिख जाते हैं। वुफछ महापाषाण शमीन के भीतर भी होते हैं। 47 ऽ क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें कइर् बार पुरातत्त्वविदों को गोलाकार सजाए हुए पत्थर मिलते हैं। कइर् बार अकेला खड़ा हुआ पत्थर मिलता है। ये ही एकमात्रा प्रमाण हैं जो शमीन के नीचे कब्रों को दशार्ते हैं। महापाषाणों के निमार्ण के लिए लोगों को कइर् तरह के काम करने पड़ते थे। हमने जो कायो± की सूची बनाइर् है उन्हें क्रमब( करो। गîक्के खोदना, श्िालाखंडों को ढो कर लाना, बड़े पत्थरों को तराशना और मरे हुए को दप.फनाना।ऊपरः इस तरह के महापाषाण को ताबूत शवाधन ;सिस्टद्ध इन सब कब्रों में कुछ समानताएँ हैं। सामान्यतः मृतकों को खास किस्म कहा जाता है। यहाँ दिखाए गए के मिट्टðी के बतर्नों के साथ दप.फनाया जाता था जिन्हें काले - लाल मिट्टðी केसिस्ट में एक पोटर् - होल ;बड़ा बतर्नों ;ब्लैक एण्ड रेड वेयरद्ध के नाम से जाना जाता है। इनके साथ हीसुराखद्ध है जो शायद पत्थरों से बने हुए कमरे में जाने का मिले हैं लोहे के औशार और हथ्िायार, घोड़ों के कंकाल और सामान तथा रास्ता था। पत्थर और सोने के गहने। क्या हड़प्पा के शहरों में लोहे का प्रयोग होता था? महापाषाण कब्रों से मिले लोहे के सामान बाईं ओरः घोड़े के लिए सामान नीचे बाईं ओरः वुफल्हाडि़याँ नीचेः एक कटार „ 48 हमारे अतीतदृप् लोगों की सामाजिक असमानताओं के बारे में पता करना पुरातत्त्वविद् यह मानते हैं कि वंफकाल के साथ पाइर् गइर् चीशें मरे हुए व्यक्ित की ही रही होंगी। कभी - कभी एक कब्र की तुलना में दूसरी कब्र में श्यादा चीशें मिलती हैं। मानचित्रा 2 पर ;पृष्ठ 14द्ध ब्रह्मगिरि को खोजो। यहाँ एक व्यक्ित की कब्र में 33 सोने के मनके और शंख पाए गए हैं। दूसरे वंफकालों के पास सिप.फ वुफछ मिट्टर्ðी के बतर्न ही पाए गए। यह दपफनाए गए लोगों की़सामाजिक स्िथति में भ्िान्नता को दशार्ता है। कुछ लोग अमीर थे तो कुछ लोग गरीब, वुफछ लोग सरदार थे तो दूसरे अनुयायी। क्या वुफछ कब्रगाहें खास परिवारों के लिए थीं? कभी - कभी महापाषाणों में एक से अध्िक वंफकाल मिले हैं। वे यह दशार्ते हैं कि शायद एक ही परिवार के लोगों को एक ही स्थान पर अलग - अलग समय पर दप.फनाया गया था। बाद में मरने वाले लोगों को पोटर् - होल के रास्ते कब्रों में लाकर दप.फनाया जाता था। ऐसे स्थान पर गोलाकार लगाए गए पत्थर या चट्टðान चिÉों का काम करते थे, जहाँ लोग आवश्यकतानुसार शवों को दपफनाने दुुबारा आ सकते थे।़इनामगाँव के एक विश्िाष्ट व्यक्ित की कब्र मानचित्रा 2 में ;पृष्ठ 14द्ध इनामगाँव को खोेजो। यह भीमा की सहायक नदी घोड़ के किनारे एक जगह है। इस जगह पर 3600 से 2700 साल पहले लोग रहते थे। यहाँ वयस्क लोगों को प्रायः गîक्के में सीध लिटा कर दप़्ाफनाया जाता था। उनका सिर उत्तर की ओर होता था। कइर् बार उन्हें घर के अंदर ही दप.फनाया जाता था। ऐसे बतर्न जिनमें शायद खाना और पानी हांे, दप.फनाए गए शव के पास रख दिए जाते थे। एक आदमी को पाँच कमरों वाले मकान के आँगन में, चार पैरों वाले मिट्टðी के एक बड़े से संदूक में दप.फनाया गया था। बस्ती के बीच में बसा 49 ऽ क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें यह घर गाँव के सबसे बड़े घरों में एक था। इस घर में एक अनाज का गोदाम भी था। शव के पैर मुड़े हुए थे। क्या तुम्हें लगता है कि यह किसी सरदार का शव था? अपने जवाब का कारण बताओ। क्या बताते हैं हमें वंफकालों के अध्ययन छोटे आकार के आधर पर एक बच्चे के वंफकाल को आसानी से पहचाना जा सकता है। लेकिन एक बच्चे और बच्ची के वंफकाल के बीच कोइर् बड़ा प.फवर्फ नहीं होता। क्या हम यह पता लगा सकते हैं कि वंफकाल किसी पुरुष का था या स्त्राी का? कभी - कभी लोग वंफकाल के साथ मिले सामानों के आधर पर इसका अंदाजा लगाते हैं। उदाहरण के लिए यदि वंफकाल के साथ गहने मिलते हैं तो कइर् बार उसे महिला का वंफकाल मान लिया जाता है। लेकिन ऐसी समझ के साथ समस्याएँ हैं। अक्सर पुरुष भी आभूषण पहनते थे। वंफकाल का लिंग पहचानने का बेहतर तरीका उसकी हिóयों की जाँच है। चूँकि महिलाएँ बच्चों को जन्म देती हंै इसलिए उनका कटि - प्रदेश या वूफल्हा पुरुषों से श्यादा बड़ा होता है। ये समझ वंफकालों के आध्ुनिक अध्ययन पर आधरित है। आज से लगभग 2000 साल पहले चरक नाम के प्रसि( वैद्य हुए थे। उन्होंनें चिकित्सा शास्त्रा पर चरक संहिता नाम की किताब लिखी। वे कहते हैं कि मनुष्य के शरीर में 360 हिóयाँ होती हैं। यह आध्ुनिक शरीर रचना विज्ञान की 206 हिóयों से कापफी श्यादा हंै। सम्भवतः चरक ने अपनी गिनती में दाँत, हिóयों के जोड़ और काटिर्लेज को जोड़कर यह संख्या बताइर् थी। तुम्हारे अनुसार शरीर के बारे में उन्होंने इतनी विस्तृत जानकारी वैफसे इकट्टòा की होगी? इनामगाँव के लोगों के काम - ध्ंध्े इनामगाँव में पुरातत्त्वविदों को गेहूँ, जौ, चावल, दाल, बाजरा, मटर और तिल के बीज मिले हंै। कइर् जानवरों की हिóयाँ भी मिली हैं। कइर् हिóयों पर काटने के निशान से यह अंदाजा होता है कि लोग इन्हें खाते होंगे। गाय, बैल, भैंस, बकरी, भेड़, वुफत्ता, घोड़ा, गध, सूअर, साँभर, चितकबरा हिरण, वृफष्ण - मृग, खरहा, नेवला, चिडि़याँ, घडि़याल, कछुआ, केकड़ा और मछली की हिóयाँ भी पाइर् गइर् हैं। ऐसे साक्ष्य मिले हैं कि बेर, आँवला, जामुन, खजूर और कइर् तरह की रसभरियाँ एकत्रा की जाती थीं।„ 50 हमारे अतीतदृप् इस प्रमाण के आधर पर इनामगाँव में लोगों के काम - ध्ंधें की एक सूची बनाओ। अन्यत्रा एटलस में चीन को देखो। लगभग 3500 साल पहले हम यहाँ की लेखन कला के सबसे पुराने उदाहरण पाते हैं। यह जानवरों की हिóयों पर लिखा गया था। इन्हें भविष्यवाणी करने वाली हिóयाँ कहा जाता है, क्योंकि यह मान्यता थी कि ये भविष्य बताती हैं। राजा लोग लिपिकारों से इन हिóयों पर सवाल लिखवाते थे μ क्या वे युद्व जीतेंगे? क्या प.óफसलें अच्छी हांेगी? क्या उन्हें पुत्रा होंगे? पिफर इन हियों को आग में डाल दिया जाता था जहाँ इनमें गमीर् से चटक कर दरारें पड़ जाती थीं। भविष्यवक्ता इन दरारों को बड़े ध्यान से देखकर भविष्यवाणी करने की कोश्िाश करते थे। जैसा शायद तुम भी सोच रही होगी ये भविष्यवक्ता कभी - कभी गलती भी करते थे। ये राजा शहरों में महल बनाकर रहते थे। उन्होंने बेशुमार दौलत इकट्टòी कर ली थी जिनमें बड़े - बड़े नक्काशी किए हुए काँसे के बतर्न शामिल थे। लेकिन वे लोहे का इस्तेमाल करना नहीं जानते थे। ट्टग्वेद के राजा और इन राजाओं के बीच कोइर् एक प.फवर्फ बताओ। कल्पना करो तुम 3000 वषर् पहले के इनामगाँव में रहती हो। पिछली रात सरदार की मृत्यु हो गइर्। आज, तुम्हारे माता - पिता दप.फन की तैयारी कर रहे हैं। यह बताते हुए सारे दृश्य का वणर्न करो कि अंतिम संस्कार के लिए वैफसे भोजन तैयार किया जा रहा है। तुम्हें क्या लगता है, खाने में क्या दिया जाएगा? ऽ वेदोें की रचना का 1ण् निम्नलिख्िात को सुमेल करो:प्रारंभ ;लगभग 3500 साल सूक्त सजाए गए पत्थर पहलेद्ध रथ अनुष्ठान ऽ महापाषाणों के निमार्ण यज्ञ अच्छी तरह से बोला गयाकी शुरुआत ;लगभग 3000 साल दास यु( में प्रयोग किया जाता था पहलेद्ध महापाषाण गुलाम ऽ इनामगाँव में वृफषकों का निवास 2ण् वाक्यों को पूरा करो ;3600 से 2700 साल कृकृकृकृकृकृकृकृकृपहलेद्ध ;कद्ध के लिए दासों का इस्तेमाल किया जाता था। ऽ चरक ;लगभग 2000 कृकृकृकृकृकृकृकृकृ;खद्ध में महापाषाण पाए जाते हैं।साल पहलेद्ध ;गद्ध शमीन पर गोले में लगाए गए पत्थर या चट्टðान कृकृकृकृकृकृकृकृकृ का काम करते थे। ;घद्ध पोटर् - होल का इस्तेमाल कृकृकृकृकृकृकृकृकृ के लिए होता था। ;घद्ध इनामगाँव के लोग कृकृकृकृकृकृकृकृकृ खाते थे। 3ण् आज हम जो किताबें पढ़ते हैं वे ट्टग्वेद से वैफसे भ्िान्न हंै? 4ण् पुरातत्त्वविद् कब्रों में दप.फनाए गए लोगों के बीच सामाजिक अंतर का पता वैफसे लगाते हैं? 5ण् एक राजा का जीवन दास या दासी के जीवन से वैफसे भ्िान्न होता था? „ 52 हमारे अतीतदृप् 6ण् पता करो कि तुम्हारे विद्यालय के पुस्तकालय में ध्मर् के विषय पर किताबें हैं या नहीं। उस संग्रह से किन्हीं पाँच पुस्तकों के नाम बताओ। 7ण् एक याद की हुइर् कविता या गीत लिखो। तुमने उस कविता या गीत को सुनकर याद किया था या पढ़कर? 8ण् ट्टग्वेद में लोगों का वगीर्करण उनके कायर् या उनकी भाषा के आधर पर किया जाता है। नीचे की तालिका में तुम छः परिचित लोगों के नाम भरो। इनमें तीन पुरुष और तीन महिला होने चाहिए। प्रत्येक का पेशा और भाषा लिखो। क्या तुम उस विवरण में वुफछ और जोड़ना चाहोगी? नाम कायर् भाषा अन्य 53 „क्या बताती हैं हमें किताबें और वफब्रें ़

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