आरंभ्िाक मानव: आख्िार वे इध्र - उध्र क्यों घूमते थे? हम उन लोगों के बारे में जानते हैं, जो इस उपमहाद्वीप में बीस लाख साल पहले रहा करते थे। आज हम उन्हें आखेटक - खाद्य संग्राहक के नाम से जानते हैं। भोजन का इंतशाम करने की विध्ि के आधर पर उन्हें इस नाम से पुकारा जाता है। आमतौर पर खाने के लिए वे जंगली जानवरों का श्िाकार करते थे,मछलियाँ और चिडि़या पकड़ते थे, पफल - मूल, दाने, पौध्े - पिायाँ, अंडे इकऋा किया करते थे। हमारे उपमहाद्वीप जैसे गमर् देशों में पेड़ - पौधें की अनगिनत प्रजातियाँ मिलती हैं। इसीलिए पेड़ - पौधें से मिलने वाले खाद्य पदाथर् भोजनके अत्यंत महत्वपूणर् ड्डोत थे। लेकिन यह सब कर पाना बिल्वुफल आसान नहीं था। ऐसे कइर् जानवर हैं, जो हमसे श्यादा तेश भाग सकते हैं और बहुत - से जानवर हम से श्यादा ताकतवर भी होते हैं। जानवरों के श्िाकार, चिडि़या या मछलियाँ पकड़ने के लिए बड़ा सतवर्फ, जागरूक और तेश होना पड़ता है। पेड़ - पौधें से खाना जुटाने के लिए यह जानना जरूरी होता है, कि कौन - से पेड़ - पौध्े खाने योग्य होते हैं, क्योंकि कइर् तरह के पौध्े विषैले भी होते हैं। साथ ही पफलों के पकने के समय की जानकारी भी शरूरी होती है। 11 ऽ „ 12 हमारे अतीतदृप् ऐसे समुदायों में रहने वाले बच्चों के ज्ञान और गुणों का वणर्न करो। क्या तुममें ऐसे गुण और ज्ञान हैं? आखेटक - खाद्य संग्राहक समुदाय के लोगों के एक जगह से दूसरी जगह पर घूमते रहने के पीछे कम से कम चार कारण हो सकते हैं। पहला कारण यह कि अगर वे एक ही जगह पर श्यादा दिनों तक रहते तो आस - पास के पौधें, पफलों और जानवरों को खाकर समाप्त कर देते थे। इसलिए और भोजन की तलाश में इन्हें दूसरी जगहों पर जाना पड़ता था। दूसरा कारण यह कि जानवर अपने श्िाकार के लिए या पिफर हिरण और मवेशी अपना चारा ढूँढ़ने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाया करते हैं। इसीलिए, इन जानवरों का श्िाकार करने वाले लोग भी इनके पीछे - पीछे जाया करते होंगे। तीसरा कारण यह कि पेड़ों और पौधें में पफल - पूफल अलग - अलग मौसम में आते हैं, इसीलिए लोग उनकी तलाश में उपयुक्त मौसम के अनुसार अन्य इलाकों में घूमते होंगे। और चैथा कारण यह है कि पानी के बिना किसी भी प्राणी या पेड़ - पौधे का जीवित रहना संभव नहीं होता और पानी झीलों, झरनों तथा नदियों में ही मिलता है। यद्यपि कइर् नदियों और झीलों का पानी कभी नहीं सूखता, वुफछ झीलों और नदियों में पानी बारिश के बाद ही मिल पाता है। इसीलिए ऐसी झीलों और नदियों के किनारे बसे लोगों को सूखे मौसम में पानी की तलाश में इध्र - उध्र जाना पड़ता होगा। इसके अलावा लोग अपने नाते - रिश्तेदारों या मित्रों से मिलने भी जाया करते होंगे। यहाँ यह स्मरण रखना शरूरी है, कि ये सभी लोग पैदल यात्रा किया करते थे। तुम स्वूफल वैफसे जाते हो? तुम्हें अपने घर से स्वूफल पैदल जाने में कितना समय लगता है? अगर तुम बस या साइकिल से जाओ तो स्वूफल पहुँचने में कितना समय लगेगा? आरंभ्िाक मानव के बारे में जानकारी वैफसे मिलती है? पुरातत्त्वविदों को वुफछ ऐसी वस्तुएँ मिली हैं जिनका निमार्ण और उपयोग आखेटक - खाद्य संग्राहक किया करते थे। यह संभव है कि लोगों ने अपने काम के लिए पत्थरों, लकडि़यों और हंियों के औशार बनाए हों। इनमें से पत्थरों के औशार आज भी बचे हैं। यहाँ पत्थरों के औशारों के वुफछ उपयोग बताए गए हैं। ऐसे कामों की एक सूची बनाओ जिनमें इस तरह के औशार काम आते हैं। बताओ कि इनमें सेकौन - कौन से काम सामान्य पत्थरों से किए जा सकते हैं। कारण सहित उत्तर दो। इनमें से वुफछ औशारों का उपयोग पफल - पूफल काटने, हंियाँ और मांस काटने तथा पेड़ों की छाल और जानवरों की खाल उतारने के लिए किया जाता था। वुफछ के साथ हंियों या लकडि़यों के मुऋे लगा कर भाले और बाण जैसे हथ्िायार बनाए जाते थे। वुफछ औशारों से लकडि़याँ काटी जाती थीं। लकडि़यों का उपयोग ईंध्न के साथ - साथ झोपडि़याँ और औशार बनाने के लिए भी किया जाता था। घ पत्थर से बने औशार ;कद्ध ये पत्थरों से बने प्राचीनतम औशार हैं। ;खद्ध इन्हें कइर् हशार साल बाद बनाया गया। ;गद्ध इन्हें और बाद में बनाया गया। ;घद्ध इन्हें लगभग 10 हशार साल पहले बनाया गया था। ;घद्ध और ये गुटिका ;प्रावृफतिक पत्थरद्ध हैं। पत्थर के औशारों का उपयोग बाएँ: इंसान के खाने योग्य जड़ों को खोदने के लिए किया जाता था, और दाएँ: जानवरों की खाल से बने वस्त्रों को सिलने के लिए किया जाता था। 13 ऽ रहने की जगह निधर्रित करना मानचित्रा 2 को देखो। लाल त्रिाकोण वाले स्थान वे पुरास्थल हैं जहाँ पर आखेटक - खाद्य संग्राहकों के होने के प्रमाण मिले हैं। इनके अलावा भी और कइर् स्थानों पर आखेटक - खाद्य संग्राहक रहते थे। मानचित्रा में सिपर्फ वुफछ़गिने - चुने स्थान ही चिित किए गए हैं। कइर् पुरास्थल नदियों और झीलों के किनारे पाए गए हैं। चूंकि पत्थर के उपकरण बहुत महत्वपूणर् थे इसलिए लोग ऐसी जगह ढूँढ़ते रहते थे, जहाँ अच्छे पत्थर मिल सवेंफ। जहाँ लोग पत्थरों से औशार बनाते थे, उन स्थलों को उद्योग - स्थल कहते हैं। हमें इन उद्योग - स्थलों के बारे में जानकारी वैफसे मिलती है? आमतौर पर हमें ऐसी जगहों पर पत्थर के बड़े - बड़े टुकड़े मिलते हैं, और ऐसे उपकरण मिलते हैं, जिन्हें लोग इन स्थलों पर छोड़ गए होंगे क्योंकि वे ठीक नहीं बने होंगे। साथ ही औशार बनाने के बाद पत्थरों के टूटे - पूफटे टुकड़े भी इन स्थलों पर मिलते हैं। कभी - कभी लोग इन स्थलों पर वुफछ श्यादा समय तक रहा करते थे। ऐसे स्थलों को आवासीय और उद्योग - स्थल कहते हैं। भीमबेटका ;आध्ुनिक मध्य प्रदेशद्ध आवासीय पुरास्थल उन्हें कहते हैं जहाँ लोग रहा करते थे। इनमें गुपफाओं और कन्दराओं जैसे वे स्थल होते हैं, जिन्हें यहाँ दशार्या गया है। लोग इन गुपफाओं में इसलिए रहते थे, क्योंकि यहाँ उन्हें बारिश, ध्ूप और हवाओं से राहत मिलती थी। ऐसी प्रावृफतिक गुपफाएँ ¯वध्य और दक्कन के पवर्तीय इलाकों में मिलती हैं जो नमर्दा घाटी के पास हैं। क्या तुम बता सकते हो कि रहने के लिए लोगों ने यह जगह क्यों चुनी होगी? पाषाण उपकरण वैफसे बनाए जाते थे। इसके लिए अपनाइर् गइर् दो तकनीकों में से एक यहाँ दशार्इर् गइर् है। बताओ यह कौन - सी तकनीक है। „ 16 हमारे अतीतदृप् अगर तुम्हें अपने निवास स्थान के बारे में बताना पड़े तो तुम इनमें से कौन - सा नाम चुनोगे? ;कद्धआवास ;खद्ध उद्योग - स्थल ;गद्धआवास और उद्योग - स्थल ;घद्ध अन्य पुरास्थल पुरास्थल उस स्थान को कहते हैं जहाँ औशार, बतर्न और इमारतों जैसी वस्तुओें के अवशेष मिलते हैं। ऐसी वस्तुओं का निमार्ण लोगों ने अपने काम के लिए किया था और बाद में वेउन्हें वहीं छोड़ गए। ये शमीन के ऊपर, अन्दर, कभी - कभी समुद्र और नदी के तल में भी पाए जाते हैं। इन पुरास्थलों के बारे में आपको अगले अध्यायों में बताया जाएगा। पाषाण औशारों का निमार्ण पाषाण उपकरणों को प्रायः दो तरीकों से बनाया जाता था। 1ण् पत्थर से पत्थर को टकराना। यानी जिस पत्थर से कोइर् औशार बनाना होता था, उसे एक हाथ में लिया जाता था, और दूसरे हाथ से एक पत्थर का हथौड़ी जैसा इस्तेमाल होता था। इस तरह आघात करने वाले पत्थर से दूसरे पत्थर पर तब तक शल्क निकाले जाते हैं जब तक वांछित आकार वाला उपकरण न बन जाए। 2ण् दूसरे तरीके को ‘दबाव शल्क - तकनीक’ कहा जाता है। इसमें क्रोड को एक स्िथर सतह पर टिकाया जाता है और इस क्रोड पर हîóी या पत्थर रखकर उस पर हथौड़ीनुमा पत्थर से शल्क निकाले जाते हैं जिससे वांछित उपकरण बनाए जाते हैं। आग की खोज मानचित्रा 2 में वुफरनूल गुपफा ढूँढ़ो ;पृष्ठ 14द्ध। यहाँ राख के अवशेष मिले हैं। इसका मतलब यह है कि आरंभ्िाक लोग आग जलाना सीख गए थे। आग का इस्तेमाल कइर् कायो± के लिए किया गया होगा जैसे कि प्रकाश के लिए, मांस पकाने के लिए और खतरनाक जानवरों को दूर आदि भगाने के लिए। आज हम आग का उपयोग किसलिए करते हैं? बदलती जलवायु लगभग 12,000 साल पहले दुनिया की जलवायु में बड़े बदलाव आए और गमीर् बढ़ने लगी। इसके परिणामस्वरूप कइर् क्षेत्रों में घास वाले मैदान बनने लगे। इससे हिरण, बारह¯सघा, भेड़, बकरी और गाय जैसे उन जानवरों की संख्या बढ़ी, जो घास खाकर िान्दा रह सकते हैं। जो लोग इन जानवरों का श्िाकार करते थे, वे भी इनके पीछे आए और इनके खाने - पीने की आदतों और प्रजनन के समय की जानकारी हासिल करने लगे। हो सकता है कि तब लोग इन जानवरों को पकड़ कर अपनी शरूरत के अनुसार पालने की बात सोचने लगे हों। साथ ही इस काल मेंमछली भी भोजन का महत्वपूणर् ड्डोत बन गइर्। इसी दौरान उपमहाद्वीप के भ्िान्न - भ्िान्न इलाकों में गेहूँ, जौ और धन जैसे अनाज प्रावृफतिक रूप से उगने लगे थे। शायद महिलाओं, पुरुषांे और बच्चों ने इन अनाजों को भोजन के लिए बटोरना शुरू कर दिया होगा। नाम और तिथ्िायाँ हम जिस काल के बारे में पढ़ रहे हैं, पुरातत्त्वविदों ने उनके बड़े - बड़े नाम रखे हैं। आरंभ्िाक काल को वेपुरापाषाण काल कहते हैं। यह दो शब्दों पुरा यानी ‘प्राचीन’, और पाषाण यानी ‘पत्थर’ से बना है। यह नामपुरास्थलों से प्राप्त पत्थर के औशारों के महत्त्व को बताता है। पुरापाषाण काल बीस लाख साल पहले से 12,000साल पहले के दौरान माना जाता है। इस काल को भी तीन भागों में विभाजित किया गया है: ‘आरंभ्िाक’, ‘मध्य’एवं ‘उत्तर’ पुरापाषाण युग। मानव इतिहास की लगभग 99 प्रतिशत कहानी इसी काल के दौरान घटित हुइर्।जिस काल में हमें पयार्वरणीय बदलाव मिलते हैं, उसे ‘मेसोलिथ’ यानी मध्यपाषाण युग कहते हैं। इसकासमय लगभग 12,000 साल पहले से लेकर 10,000 साल पहले तक माना गया है। इस काल के पाषाण औशारआमतौर पर बहुत छोटे होते थे। इन्हें ‘माइक्रोलिथ’ यानी लघुपाषाण कहा जाता है। प्रायः इन औशारों में हंियों या लकडि़यों के मुऋे लगे हँसिया और आरी जैसे औशार मिलते थे। साथ - साथ पुरापाषाण युग वाले औशार भीइस दौरान बनाए जाते रहे।पृष्ठ 13 पर बने चित्रा देखो। इस दौरान बनाए गए औशारों में तुम्हें कोइर् बदलाव दिखाइर् देता है?अगले युग की शुरुआत लगभग 10,000 साल पहले से होती है। इसे नवपाषाण युग कहा जाता है। अगलेअध्याय में तुम नवपाषाण युग के बारे में पढ़ोगे।नवपाषाण का क्या मतलब होता होगा?हमने वुफछ स्थानों के नाम दिए हैं। अगले अध्यायों में तुम्हें ऐसे अनेक नाम मिलेंगे। अक्सर हम पुराने स्थानोंके लिए उन नामों का प्रयोग करते हैं, जो आज प्रचलित हैं, क्योंकि हमें ज्ञात नहीं है कि उस काल में इनकेक्या नाम रहे होंगे। साथ ही वे यह भी सीखने लगे होंगे कि यह अनाज कहाँ उगते थे और कब पककर तैयार होते थे। ऐसा करते - करते लोगों ने इन अनाजांेको खुद पैदा करना सीख लिया होगा। शैल चित्राकला: इनसे हमें क्या पता चलता है? एक शैल चित्रा। सजीव चित्राण किया गया है। जिन गुपफाओं में लोग रहते थे, उनमें से वुफछ की दीवारों पर चित्रा मिले हैं। गुपफाओं से मिले चित्रा हैं। इनमें जंगली जानवरों का बड़ी वुफशलता से इनमें वुफछ सुन्दर उदाहरण मध्य प्रदेश और दक्ष्िाणी उत्तर प्रदेश की इस चित्रा के बारे में बताओ। कौन क्या करता था? हमने पढ़ा कि आरंभ्िाक लोग श्िाकार तथा पफल - मूल का संग्रह किया करते थे। वे पत्थरों के औशार और गुपफाओं में चित्रा बनाते थे। क्या हमें कोइर् ऐसे साक्ष्य मिलते हैं जिनसे पता चले कि महिलाएँ श्िाकार करती थीं या पुरुष औशार बनाते थे या पिफर महिलाएँ चित्राकारी करती थीं और पुरुष पफल - मूल इकऋा करते थे? वास्तव में, हमें इसका ज्ञान नहीं है। लेकिन दो बातें हो सकती हैं। महिला और पुरुष दोनों ने मिलकर कइर् काम एक साथ किया होगा। यह भी संभव है, कि वुफछ तरह के काम केवल महिलाएँ करती थीं और वुफछ केवल पुरुष। इसके अलावा उपमहाद्वीप के अलग - अलग क्षेत्रों में अलग - अलग परम्पराएँ भी रही होंगी। भारत में शुतुरमुगर्! भारत में पुरापाषाण युग के दौरान शुतुरमुगर् होते थे। महाराष्ट्र के पटने पुरास्थल से शुतुरमुगर् के अंडों के अवशेष मिले हैं। इनके वुफछ छिलकों पर चित्रांकन भी मिलता है। इन अंडों से मनके भी बनाए जाते थे। इन मनकों का उपयोग किसलिए किया गया होगा? आज हमें शुतुरमुगर् कहाँ मिलते हैं? हुँस्गी का सूक्ष्म - निरीक्षण मानचित्रा 2 पर हुँस्गी ढूँढि़ए ;पृष्ठ 14द्ध। यहाँ पर पुरापाषाण युग के कइर् पुरास्थल मिले थे। वुफछ पुरास्थलों से अलग - अलग कायो± में लाए जाने वाले „ 18 हमारे अतीतदृप् कइर् प्रकार के औशार मिले थे। ये संभवतः आवास और उद्योग - स्थल रहे होंगे। वुफछ छोटे पुरास्थलों में भी औशारों के बनाए जाने के प्रमाण मिले हैं। इनमेें से वुफछ पुरास्थल झरनों के निकट थे। अध्िकांश औशार चूना - पत्थरों से बनाए जाते थे। क्या तुम दूसरे प्रकार के पुरास्थलों के नाम बता सकते हो? अन्यत्रा अपने एटलस में प्रफांस ढूँढ़ो। यह चित्रा प्रफांस की एक गुपफा का है। इस पुरास्थल की खोज लगभग 100 साल पहले चार स्वूफली छात्रों ने की थी। इस तरह के चित्रा लगभग 20,000 साल पहले से लेकर 10,000 साल पहले के बीच बनाए गए होंगे। इनमें कइर् जानवरों के चित्रा हैं। इनमें जंगली घोड़े, गाय, भैंस, गैंडा, रेनडीयर, बारह¯सघा और सूअरों को गहरे - चमकीले रंगों से चित्रिात किया गया है। इन रंगों को लौह - अयस्क और चारकोल जैसे खनिज पदाथो± से बनाया जाता था। यह संभव है कि इन चित्रों को उत्सवों के अवसर पर बनाया जाता था या पिफर इन्हें श्िाकारियों द्वारा श्िाकार पर निकलने से पहले वुफछ अनुष्ठानों के लिए बनाया गया होगा। क्या तुम इन्हें बनाने का कोइर् और कारण बता सकते हो? कल्पना करो तुम आज से 12,000 साल पहले पत्थर की एक गुपफा में रहते हो। पृष्ठ 15 पर देखो। तुम्हारे मामा गुपफा की एक भीतरी दीवार पर चित्रा बना रहे हैं और तुम उनकी सहायता करना चाहते हो। तुम रंग बनाओगे, रेखाएँ खींचोगे या पिफर उनमें रंग भरोगे? तुम्हारे मामा तुम्हें कौन - कौन सी कहानियाँ सुनाएँगे? ऽ मध्यपाषाण युग ;12,000 - 10,000 साल पहलेद्ध ऽ नवपाषाण युग का आरंभ ;10,000 साल पहलेद्ध 1ण् इन वाक्यों को पूरा करो। ;कद्ध आखेटक - खाद्य संग्राहक गुपफाओं में इसलिए रहते थे क्योंकि कृकृकृ। ;खद्ध घास वाले मैदानों का विकास कृकृकृकृकृकृकृकृकृ साल पहले हुआ। ;गद्ध आरंभ्िाक लोगों ने गुपफाओं की कृकृकृकृकृकृकृकृकृ पर चित्रा बनाए। ;घद्ध हुँस्गी में कृकृकृकृकृकृकृकृकृ से औशार बनाए जाते थे। 2ण् उपमहाद्वीप के आध्ुनिक राजनीतिक मानचित्रा को पृष्ठ 136 पर देखो। उन राज्यों को ढूँढ़ो जहाँ भीमबेटका, हुँस्गी और वुफरनूल स्िथत हैं। क्या तुषार की रेल इन जगहों के पास से होकर गइर् होगी? 3ण् आखेटक - खाद्य संग्राहक एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों घूमते रहते थे? उनकी यात्रा और आज की हमारी यात्रा के कारणों में क्या समानताएँ या क्या भ्िान्नताएँ हैं? „ 20 हमारे अतीतदृप् 4ण् आज तुम पफल काटने के लिए कौन - से औशार चुनोगे? वह औशार किस चीश से बना होगा? 5ण् आखेटक - खाद्य संग्राहक आग का उपयोग किन - किन चीशों के लिए करते थे? क्या तुम आज आग का उपयोग इनमें से किसी चीश के लिए करोगे! 6ण् अपनी पुस्ितका के पन्ने पर एक लाइन खींचकर इसके दो खाने बनाओ। बाएँ खाने में, उन खाद्य पदाथो± की सूची बनाओ, जिन्हें आखेटक - खाद्य संग्राहक खाते थे ;पृष्ठ 11 पर देखोद्ध और दाएँ खाने में तुम जो चीशें खाते हो उनमें से वुफछ के नाम लिखो। क्या तुम्हें इन दोनों में कोइर् समानता या भेद दिखाइर् देता है? 7ण् यदि तुम्हारे पास कोइर् गुटिका ;प्रावृफतिक पत्थर का टुकड़ा, जैसे कि ;पृष्ठ 13 पर दिखाया गया हैद्ध हो तो उसे किस काम के लिए इस्तेमाल करोगे? 8ण् ऐसे दो काम लिखो जिन्हें आज महिलाएँ और पुरुष दोनों करते हैं। दो ऐसे काम बताओ जिन्हें सिपर्फ महिलाएँ ही करती हैं और दो वे जिन्हें सिप़्ार्फ पुरुष़ही करते हैं। अपनी सूची की अपने दो साथ्िायों की सूचियों से तुलना करो। क्या तुम्हें इनमें कोइर् समानता या भेद दिखाइर् दे रहा है?

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