ज्यामिति का एक लंबा और शानदार ;बहुमूल्यद्ध इतिहास है। शब्द ‘ज्यामिति’ ;ळमवउमजतलद्ध यूनानी शब्द जिओमीट्रोन ;ळमवउमजतवदद्ध का अंग्रेजी तुल्य है। जिया ;ळमवद्ध का अथर् है ‘भूमि’ और ‘मीट्रोन ;डमजतवदद्ध का अथर् है ‘मापना’। इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन समय में ज्यामितीय अवधरणाएँ संभवतः कला, वास्तु - कला या श्िाल्प - कला ;।तबीपजमबजनतमद्ध और भूमि मापन की आवश्यकताओं के कारण विकसित हुईं। इनमें वे अवसर भी सम्िमलित हैं जब खेतिहर की भूमि की परिसीमाओं ;इवनदकंतपमेद्ध को बिना किसी श्िाकायत की संभावना रखते हुए, अंकित किया जाता था। वैभवपूणर् राजभवनों, मंदिरों, झीलों, बाँधें और नगरों के निमार्णों, कला और वास्तुकला ;या श्िाल्पद्ध ने इन अवधरणाओं को और उजागर किया। आजकल भी कला, मापन, वास्तुकला, इंजीनियरिंग ;मदहपदममतपदहद्ध, कपड़ों के डिशाइन इत्यादि के सभी रूपों में ज्यामितीय अवधरणाओं का प्रभाव देखा जा सकता है। आप विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं, जैसेμबक्स ;पेेटीद्ध, मश, पुस्तक, अपने स्कूल में लंच ले जाने के लिए खाने के डिब्बे, गेंद जिससे आप खेलते हैं, आदि को देखते हैं और उनका प्रयोग भी करते हैं। इन सभी वस्तुओं के भ्िान्न - भ्िान्न आकार ;ेींचमेद्ध होते हैं। जो रूलर ;तनसमतद्ध आप प्रयोग करते हैं और पेंसिल जिससे आप लिखते हैं वे सीध्ी ;ेजतंपहीजद्ध हैं। एक चूड़ी, एक रुपये का सिक्का या एक गेंद के चित्रा गोल ;तवनदकद्ध प्रतीत होते हैं। यहाँ आप वुफछ रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ेंगे, जो आपके चारों ओर उपस्िथत आकारों के बारे में अध्िक जानकारी प्राप्त करने में आपकी सहायता करेंगे। 4ण्2 बिंदु कागश पर एक पेंसिल के नुकीले सिरे से एक चिह्न ;कवजद्ध अंकित कीजिए। सिरा जितना नुकीला होगा, चिह्न उतना ही सूक्ष्म ;छोटाद्ध होगा। लगभग एक बिना दिखाइर् देने वाला सूक्ष्म चिह्न आपको एक बिंदु की अवधरणा का आभास कराएगा। बिंदु ;चवपदजद्ध एक स्िथति ;या अवस्िथतिद्ध ;सवबंजपवदद्ध निधर्रित करता है। बिंदु के लिए वुफछ उदाहरण इस प्रकार हैं: परकार का सिरा पेंसिल का नुकीला एक सुइर् का सिरा नुकीला सिरा यदि आप किसी कागश पर, मान लीजिए, तीन बिंदु अंकित करें, तो आपको इनमें भेद बताने की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए, इन्हें अंग्रेज़्ाी के बड़े अक्षर ।ए ठए ब् इत्यादि से व्यक्त किया जाता है। इन बिंदुओं को बिंदु ।ए बिंदु ठ और बिंदु ब् पढ़ा जाता है। 4ण्3 रेखाखंड एक कागश को मोडि़ए और पिफर उसे खोल लीजिए। क्या आपको कोइर् मोड़ का निशान दिखाइर् देता है? इससे एक रेखाखंड ;सपदम ेमहउमदजद्ध की अवधरणा का आभास होता है। इसके दो अंत बिंदु ;मदक चवपदजेद्ध । और ठ हैं। एक पतला धगा ;या डोरीद्ध लीजिए। इसके दोनों सिरों को कसकर पकडि़ए ताकि धगे में कोइर् ढील न रहे। यह एक रेखाखंड निरूपित करता है। हाथों से पकड़े हुए सिरे इस रेखाखंड के अंत बिंदु हैं। रेखाखंड के वुफछ उदाहरण निम्नलिख्िात हैं: एक बक्स का किनारा एक ट्यूबलाइट एक पोस्टकाडर् का किनारा अपने आस - पास से रेखाखंडों के वुफछ और उदाहरण देने का प्रयत्न कीजिए। ठ एक कागश पर दो बिंदु । और ठ अंकित कीजिए। इन दोनों बिंदुओं को सभी संभव रास्तों से जोड़ने का प्रयत्न कीजिए ;आवृफति 4.1द्ध। । । से ठ तक का सबसे छोटा रास्ता क्या है? । और ठ को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा रास्ता ;इसमें बिंदु । और ठ भी सम्िमलित हैंद्ध, जो संलग्न आवृफति 4.1 में दशार्या गया है, एक रेखाखंड है। इसे ।ठ या ठ। से व्यक्त किया जाता है। बिंदु । और ठ इस रेखाखंड के अंत बिंदु हैं। 4ण्4 एक रेखा कल्पना कीजिए कि । से ठ तक के रेखाखंड ;अथार्त् ।ठ द्ध को । से आगे एक दिशा में और ठ से आगे दूसरी दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत किया गया है ;आवृफति को देख्िाएद्ध। आपको रेखा ;सपदमद्ध का एक उदाहरण प्राप्त हो जाएगा। क्या आप सोचते हैं कि आप कागश पर पूरी रेखा खींच सकते हैं? नहीं। ;क्यों?द्ध ेननत दो बिंदुओं । और ठ से होकर जाने वाली रेखा को ।ठ से निरूपित करते हैं। यह दोनों दिशाओं में अनिश्िचत रूप से विस्तृत होती है। इस पर असंख्य बिंदु स्िथत होते हैं। ;इनके बारे में सोचिएद्ध रेखा को निश्िचत करने के लिए, दो बिंदु पयार्प्त हैं। हम कहते हैं कि दो बिंदु एक रेखा निधर्रित ;कमजमतउपदमद्ध करते हैं। ेननतसंलग्न आवृफति ;आवृफति 4.3द्ध रेखा च्फ की है। कभी - कभी एक रेखा को स जैसे अक्षर से भी व्यक्त किया जाता है। आवृफति 4ण्3 4ण्5 प्रतिच्छेदी रेखाएँ संलग्न आवृफति 4.4 कोेऔर स2दख्िाए। इसमें दो रेखाएँ स1 दशार्इर् गइर् हैं। ये दोनों रेखाएँ बिंदु च् से होकर जाती हैं। हम कहते हैं कि रेखाएँ स1 और स2 बिंदु च् पर प्रतिच्छेद ;पदजमतेमबजद्ध करती हैं। यदि दो रेखाओं में एक उभयनिष्ठ बिंदु हो, तो वे प्रतिच्छेदी रेखाएँ ;पदजमतेमबजपदह सपदमेद्ध आवृफति 4ण्4 कहलाती हैं। प्रतिच्छेदी रेखाओं के वुफछ उदाहरण निम्न हैं: आपकी अभ्यास पुस्ितका केअंग्रेशी वणर्मालापरस्पर काटती हुइर्दो संलग्न किनारे का अक्षर ग् सड़वेंफ आवृफति 4ण्5 प्रतिच्छेदी रेखाओं के युग्मों के वुफछ और उदाहरण ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए। एक कागश लीजिए। इसे दो बार मोडि़ए ;और मोड़ के निशान बनाइएद्ध ताकि दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ प्राप्त हो जाएँ और चचार् कीजिए: ;ंद्ध क्या दो रेखाएँ एक से अध्िक बिंदुओं पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं? ;इद्ध क्या दो से अध्िक रेखाएँ एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं? 4ण्6 समांतर रेखाएँ आइए, आवृफति 4.6 में दशार्इर् गइर् मेज़्ा को देखें। इसका उफपरी सिरा ।ठब्क् सपाट ;थ्संजद्ध है। क्या आप वुफछ रेखाखंड और बिंदु देख पा रहे हैं? क्या यहाँ प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं? आवृफति 4ण्6 ेननत ेननत हाँ, ।ठ और ठब् बिंदु ठ पर प्रतिच्छेद करती हैं। कौन - सी रेखाएँ । पर प्रतिच्छेद करती हैं? कौन - सी रेखाएँ ब् पर प्रतिच्छेद करती हैं और कौन - सी रेखाएँ क् पर प्रतिच्छेद करती हैं? क्या रेखाएँ ।क् और ब्क् परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं? क्या रेखाएँ ।क् और ठब् परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं? आपने देखा कि मेेज़्ा के उफपरी पृष्ठ पर वुफछ रेखाएँ हैं जो परस्पर प्रतिच्छेद नहीं ेननत ेननत करतीं ;उन्हें कितना भी बढ़ाया जाएद्ध। ।क् और ठब् ऐसी रेखाओं का एक युग्म बनाती हैं। मेेज़्ा के उफपरी सिरे पर क्या आप रेखाओं का कोइर् ऐसा ही अन्य युग्म ;जो कहीं नहीं मिलतीद्ध बता सकते हैं? ऐसी रेखाएँ ;जैसी मेेज़्ा में उफपरी सिरे पर हैंद्ध जो प्रतिच्छेद नहीं करतीं समांतर रेखाएँ ;चंतंससमस सपदमेद्ध कहलाती हंै। सोचिए, चचार् कीजिए और लिख्िाए: आप समांतर रेखाओं को और कहाँ देखते हैं? इनके 10 उदाहरण ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए। ेननत ेननत यदि दो रेखाएँ ।ठ और ब्क् समांतर हों, तो हम इन्हें सांकेतिक रूप में ।ठ द्यद्य ब्क् लिखते ह।ैंयदि दो रेखाएँ स1 और स2 समांतर हैं, तो हम स1 द्यद्य स2 लिखते हैं। क्या आप नीचे दी आवृफति में समांतर रेखाएँ बता सकते हैं? रूलर ;स्केलद्ध के सम्मुख किनारे रेल की पटरी ख्िाड़की की सलाखें 4ण्7 किरण किरण ;तंलद्ध के लिए वुफछ निम्नलिख्िात माॅडल हैं: एक लाइट हाउस से टाॅचर् से निकली सूयर् की किरणेंनिकली हुइर् प्रकाश की प्रकाश की किरणेंकिरणें किरण रेखा का एक भाग होता है। यह एक बिंदु से प्रारंभ होती है ;जिसे प्रारंभ्िाक बिंदु ;पदपजपंस चवपदजद्ध कहते हैंद्ध और एक दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत होती है। यहाँ दाईं ओर किरण की दी हुइर् आवृफति ;आवृफति 4.7द्ध को देख्िाए। इस किरण पर दो बिंदु दशार्ए गए हैं। ये हैं: ;ंद्ध।ए जो प्रारंभ्िाक बिंदु है। ;इद्धच्ए जो किरण पर एक अन्य बिंदु है।हम इसे ।च्से व्यक्त करते हैं। आवृफति 4ण्7सोचिए, चचार् कीजिए और लिख्िाए:यदि च्फएक किरण है, तो ;ंद्ध इसका प्रारंभ्िाक बिंदु क्या है? ;इद्ध बिंदु फ किरण पर कहाँ स्िथत होता है? ;बद्ध क्या हम कह सकते हैं कि फ इस किरण का प्रारंभ्िाक बिंदु है? संलग्न आवृफति 4.9 में, एक किरण व्। दी है। यह व् से प्रारंभ होती है और । से होकर जाती है। यह किरण बिंदु ठ से होकर भी जाती है। क्या आप इसे व्ठ भी कह सकते हैं? क्यों? आवृफति 4ण्9 यहाँ व्। और व्ठ एक ही किरण को दशार्ते हैं। क्या हम किरण व्। को किरण ।व् लिख सकते हैं? क्यों या क्यों नहीं? पाँच किरणें खींचिए और उनके उचित नाम लिख्िाए। इन किरणों के सिरे पर लगे तीर क्या दशार्ते हैं? प्रश्नावली 4ण्1 1ण् संलग्न आवृफति का प्रयोग करके, निम्न के नाम लिख्िाए: ;ंद्ध पाँच बिंदु ;इद्ध एक रेखा ;बद्ध चार किरणें ;कद्ध पाँच रेखाखंड 2ण् संलग्न आवृफति में दी हुइर् रेखा के सभी संभव प्रकारों के नाम लिख्िाए। आप इन चार बिंदुओं में से किसी भी बिंदु का प्रयोग कर सकते हैं। 3ण् संलग्न आवृफति को देखकर नाम लिख्िाए: ;ंद्ध रेखाएँ जिसमें बिंदु म् सम्िमलित हैं ;इद्ध । से होकर जाने वाली रेखा ;बद्ध वह रेखा जिस पर व् स्िथत है ;कद्ध प्रतिच्छेदी रेखाओं के दो युग्म 4ण् निम्नलिख्िात से होकर कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं? ;ंद्ध एक बिंदु ;इद्ध दो बिंदु 5ण् निम्नलिख्िात स्िथतियों में से प्रत्येक के लिए एक रपफ ;त्वनहीद्ध आवृफति बनाइए और उचित रूप से उसे नामांकित कीजिए: ;ंद्ध बिंदु च् रेखाखंड ।ठ पर स्िथत है। ;इद्ध रेखाएँ ग्ल् और च्फ बिंदु ड पर प्रतिच्छेद करती हैं। ;बद्ध रेखा स पर म् और थ् स्िथत हैं, परंतु क् स्िथत नहीं है। ेननत ेननत ;कद्ध व्च् और व्फ बिंदु व् पर मिलती हैं। ेनननत 6ण् रेखा डछ की संलग्न आवृफति को देख्िाए। इस आवृफति के संदभर् में बताइए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं या असत्य: ेनननत ;ंद्ध फए डए व्ए छ और च् रेखा डछ पर स्िथत बिंदु हैं। ेनननत ;इद्ध डए व् और छ रेखाखंड डछ पर स्िथत बिंदु हैं। ेनननत ;बद्ध ड और छ रेखाखंड डछ के अंत बिंदु हंै।श्रळश्र ;कद्ध व् और छ रेखाखंड व्च् के अंत बिंदु हैं। ;मद्ध ड रेखाखंड फव् के दोनों अंत बिंदुओं में से एक बिंदु है। श्रळश्र ;द्धि ड किरण व्च् पर एक बिंदु है।श्रश्रळश्र श्रळ;हद्ध किरण व्च् किरण फच् से भ्िान्न है। श्रळश्र ;ीद्ध किरण व्च् वही है जो किरण व्ड है।श्रळश्र ;पद्ध किरण व्ड किरण व्च् के विपरीत ;व्चचवेपजमद्ध नहीं है।श्रळश्र ;रद्ध व् किरण व्च् का प्रारंभ्िाक बिंदु नहीं है। ;ाद्ध छ किरण छच् और छड का प्रारंभ्िाक बिंदु है। 4ण्8 वव्रफ क्या आपने कभी कागश पर पेंसिल से टेढ़ी - मेढ़ी रेखाएँ खींची हैं। ऐसा करने पर जोआवृफतियाँ प्राप्त होती हैं वे वव्रफ ;बनतअमेद्ध कहलाते हैं। इनमें से वुफछ आवृफतियों ;कतंूपदहद्ध को आप कागश पर बिना पेंसिल उठाए औररूलर का प्रयोग किए बना सकते हैं। ये सभी आवृफतियाँ वव्रफ हैं ;आवृफति 4.10द्ध। आम भाषा में ‘वव्रफ’ का अथर् होता है ‘सीध नहीं’। गण्िात में वव्रफ सीध्ी भी होसकती है, जैसा कि उफपर ख्;आवृफति 4ण्10 ;पअद्ध, में दशार्या गया है। ध्यान दीजिए कि आवृफति 4.10 में वव्रफ ;पपपद्ध और ;अपपद्ध स्वयं अपने को काट रही हैं,जबकि ;पद्धए ;पपद्धए ;अद्ध और ;अपद्ध में वव्रफ स्वयं को नहीं काटते हैं। यदि कोइर् वव्रफ स्वयं को न काटे, तो वह सरल वव्रफ ;ैपउचसम ब्नतअमेद्ध कहलाती हंै। ;अद्ध ;अपद्ध ;अपपद्ध आवृफति 4ण्10 पाँच, सरल वव्रफ बनाइए और पाँच वव्रफ बनाइए जो सरल न हों। अब इन्हें देखें ;आवृफति 4.11द्ध संलग्न आवृफति ;आवृफति 4.11द्ध में दी हुइर् दोनों वव्रफों में क्या अंतर है? पहली, अथार्त् आवृफति 4.11 ;पद्ध वव्रफ एक खुली ;व्चमद ब्नतअमद्ध है, और दूसरी, ;अथार्त् आवृफति 4.11 ;पपद्ध वव्रफ एक बंद वव्रफ ;ब्सवेमक ब्नतअमद्ध है। क्या आप आवृफति 4.10 ;पद्धए ;पपद्धए ;अद्ध और ;अपद्ध में, बंद वव्रफ और खुली आवृफति 4ण्11 वव्रफ बता सकते हैं? एक आवृफति में स्िथतियाँ एक टेनिस कोटर् ;ज्मददपे ब्वनतजद्ध में कोटर् रेखा उसे तीन भागों में बाँटती है। ये भाग हैं: रेखा के एक ओर, रेखा पर और रेखा के दूसरी ओर। आप एक ओर से दूसरी ओर बिना रेखा को पार किए नहीं जा सकते हैं। आपके घर की परिसीमा ;ठवनदकंतलद्ध घर को सड़क से अलग करती है। आप परिसर के ‘अंदर’, बाड़े की ‘परिसीमा’ और परिसर के ‘बाहर’ की बात करते हैं। इसी प्रकार, एक बंद वव्रफ से संबंध्ित तीन भाग होते हैं, जो एक - दूसरे से पृथक ;अलग - अलगद्ध होते हैं। ;पद्ध वव्रफ का अभ्यंतर ;पदजमतपवतद्ध ;अंदर का भागद्ध ;पपद्ध वव्रफ की परिसीमा ;इवनदकंतलद्ध ;वव्रफ परद्ध ;पपपद्ध वव्रफ का बहिभार्ग ;मगजमतपवतद्ध ;बाहर का भागद्ध आवृफति 4ण्12 82 सम्मुख आवृफति 4.12 में, । वव्रफ के अभ्यंतर में है, ब् उसके बहिभार्ग में है औरठ स्वयं वव्रफ की परिसीमा पर स्िथत है। वव्रफ के अभ्यंतर और उसकी परिसीमा को मिलाकर उस वव्रफ का क्षेत्रा ;तमहपवदद्ध कहा जाता है। जो आपने बंद वव्रफ खींचा है, उसमें तीन क्षेत्रों को दशार्या गया है। 4ण्9 बहुभुज नीचे दी हुइर् आवृफतियों 4.13 ;पद्धए ;पपद्धए ;पपपद्धए ;पअद्ध और ;अद्ध को देख्िाए: ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध ;अद्ध आवृफति 4ण्13 आप इनके बारे में क्या कह सकते हैं? क्या ये बंद आवृफतियाँ ;वव्रफद्ध हैं? यह एक दूसरे से किस प्रकार भ्िान्न हैं? आवृफति 4.13 ;पद्धए ;पपद्धए ;पपपद्ध और ;पअद्ध में वुफछ विशेषता हैं। यह केवल रेखाखंडों से ही बनी हैं। ऐसी आवृफतियाँ बहुभुज ;चवसलहवदेद्ध कहलाती हैं। अतः, एक आवृफति बहुभुज होती है, जब वह एक सरल बंद आवृफति हो और केवल रेखाखंडों से ही बनी हो। दस अलग - अलग आवृफतियों वाले बहुभुज बनाइए। निम्न की सहायता से एक बहुभुज बनाने का प्रयत्न कीजिए। 1ण् माचिस की पाँच तीलियाँ 2ण् माचिस की चार तीलियाँ 3ण् माचिस की तीन तीलियाँ 4ण् माचिस की दो तीलियाँ उपरोक्त में से किस स्िथति में यह संभव नहीं हुआ? क्यों? भुजाएँ, शीषर् और विकणर् संलग्न आवृफति 4.14 को देख्िाए। इसको बहुभुज कहने के लिए वुफछ कारण दीजिए। एक बहुभुज को बनाने वाले रेखाखंड उसकी भुजाएँ ;ेपकमेद्ध कहलाती हैं। बहुभुज ।ठब्क्म् की भुजाओं के नाम क्या हैं? ;ध्यान दीजिए कि कोनों ;बवतदमतेद्ध को किस व्रफम में लेकर बहुभुज का नाम लिखा गया है।द्ध इसकी भुजाएँ ।ठए ठब्ए ब्क्ए क्म् और म्। हैं। दो भुजाएँ जहाँ मिलती हैं उस बिंदु को बहुभुज का शीषर् ;अमतजमगद्ध कहते हैं। आवृफति 4ण्14 भुजाएँ ।म् और म्क् बिंदु म् पर मिलती हैं, इसलिए म् बहुभुज ।ठब्क्म् का एक शीषर् है। ठ और ब् इसके अन्य दो शीषर् हैं। क्या आप इन बिंदुओं पर मिलने वाली भुजाओं के नाम लिख सकते हैं? क्या आप उपरोक्त बहुभुज ।ठब्क्म् के अन्य शीषो± के नाम लिख सकते हैं? कोइर् भी दो भुजाएँ जिनमें एक उभयनिष्ठ अंत बिंदु ;बवउउवद मदक चवपदजद्ध हो बहुभुज की आसन्न भुजाएँ ;ंकरंबमदज ेपकमेद्ध कहलाती हैं। क्या।ठ और ठब् आसन्न भुजाएँ हैं? ।म् और क्ब् के बारे में आप क्या कह सकते हैं? बहुभुज की एक ही भुजा के अंत बिंदु आसन्न शीषर् ;ंकरंबमदज अमतजपबमेद्ध कहलाते हैं। शीषर् म् और क् आसन्न शीषर् हैं, जबकि शीषर्। और क् आसन्न शीषर् नहीं हैं। क्या आप बता सकते हैं कि क्यों? उन शीषो± को लीजिए जो आसन्न नहीं हैं। ऐसे शीषो± को मिलाने से बने रेखाखंड बहुभुज के विकणर् ;कपंहवदंसेद्ध कहलाते हैं। संलग्न आवृफति में, रेखाखंड ।ब्ए ।क्ए ठक् ए ठम् और ब्म् बहुभुज के विकणर् हैं। क्या रेखाखंड ठब् एक विकणर् हैं? क्यों या क्यों नहीं? आवृफति 4ण्15 क्या आप आसन्न शीषो± को जोड़कर विकणर् प्राप्त कर सकते हैं। आवृफति ।ठब्क्म् ;आवृफति 4.15द्ध के सभी भुजाओं, आसन्न भुजाओं और आसन्न शीषो± के नाम लिख्िाए। एक बहुभुज ।ठब्क्म्थ्ळभ् बनाइए और उसवफी सभी भुजाओं, आसन्न भुजाओं तथा शीषो± सहित विकणो± के नाम लिख्िाए। प्रश्नावली 4ण्2 1ण् नीचे दी हुइर् वव्रफों को ;पद्ध खुली या;पपद्ध बंद वव्रफों के रूप में वगीर्वृफत कीजिए: ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध 84 ;कद्ध ;मद्ध 2ण् निम्न को स्पष्ट करने के लिए रपफ आवृफतियाँ बनाइए: ;ंद्ध खुला वक्र ;इद्ध बंद वव्रफ 3ण् कोइर् भी बहुभुज खींचिए और उसके अभ्यंतर को छायांकित ;ेींकमद्ध कीजिए। 4ण् संलग्न आवृफति को देखकर निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए: ;ंद्ध क्या यह एक वव्रफ है? ;इद्ध क्या यह बंद है? 5ण् रपफ आवृफतियाँ बनाकर, यदि संभव हो तो निम्न को स्पष्ट कीजिए: ;ंद्ध एक बंद वव्रफ जो बहुभुज नहीं है। ;इद्ध केवल रेखाखंडों से बनी हुइर् खुली वव्रफ ;बद्ध दो भुजाओं वाला एक बहुभुज 4ण्10 कोण जब कोने ;बवतदमतद्ध बनते हैं, तो कोण ;ंदहसमेद्ध भी बनते हैं। यहाँ एक आवृफति 4.16 दी है, जहाँ एक बक्स ;ठवगद्ध का उफपरी सिरा कब्जा लगे एक दरवाज़्ो की तरह है। बक्स के किनारे ;मकहमद्ध ।क् और दरवाजे के किनारे़ ।च् की दो किरणों आवृफति 4ण्16 ।क् और ।च् के रूप में कल्पना की जा सकती है। इन दोनों किरणों में एक उभयनिष्ठअंत बिंदु ;या प्रारंभ्िाक बिंदुद्ध । है, यह कहा जाता है कि ये दो किरणें एक कोण बना रही हैं। उभयनिष्ठ प्रारंभ्िाक बिंदु वाली दो किरणों से एक कोण बनता है। कोण को बनाने वाली दोनों किरण उसकी भुजाएँ ;।तउे या ेपकमेद्ध कहलाती हैं। उभयनिष्ठ प्रारंभ्िाक बिंदु कोण का शीषर् ;अमतजमगद्ध कहलाता है। संलग्न आवृफति में, किरण व्च् और व्फ से बने एक कोण को दशार्या गया है। कोण को दशार्ने के लिए शीषर् पर एक छोटे वव्रफ का प्रयोग किया गया है। व् इस कोण का शीषर् है। इस कोण की भुजाएँ क्या हैं? क्या आवृफति 4ण्17 ये किरणें व्च् और व्फ नहीं हैं? इस कोण को हम किस प्रकार नामांकित कर सकते हैं? इसे हम केवल यह कह सकते हैं कि यह व् पर एक कोण है और अध्िक विश्िाष्टता के लिए, हम कोण की दोनों भुजाओं पर एक - एक बिंदु लेकर और उसके शीषर् को लेकर कोण का नाम लिख सकते हैं। इस प्रकार, इस कोण को कोण च्व्फ नाम देना एक अच्छा तरीका है। हम इसे ∠च्व्फ से व्यक्त करते हैं। सोचिए, चचार् कीजिए और लिख्िाए: संलग्न आवृफति 4.18 को देख्िाए। इस कोण का क्या नाम है? क्या हम इसे ∠च् कह सकते हैं? परंतु किस कोण को ∠च् कहेंगे? ∠च् से हमारा क्या तात्पयर् है? क्या एक कोण को केवल उसके शीषर् द्वारा नामांकित करना यहाँ सहायक होगा? क्यों नहीं? ∠च्का अथर् यहाँ ∠।च्ठ या ∠ब्च्ठ या ∠।च्ब् हो सकता है। इसलिए यहाँ और अध्िक सूचना की आवश्यकता है। आवृफति 4ण्18ध्यान दीजिए कि कोण को लिखते समय उसके शीषर् के अक्षर को सदैव बीच में लिखा जाता है। कोइर् कोण, मान लीजिए, ∠।ठब् लीजिए। नननत ठ। को परिसीमा लेकर उस भाग को छायांकित कीजिएनननत जिस ओर ठब् स्िथत है। नननत अब ठब् को परिसीमा लेकर उस भाग को दूसरे रंगनननत से छायांकित कीजिए जिस ओर ठ। स्िथत है। दोनों प्रकार के छायांकित भागों में उभयनिष्ठ भाग ∠।ठब् का अभ्यंतर है ;आवृफति 4.19द्ध। ;ध्यान दें कि अभ्यंतर एक सीमित क्षेत्रा नहीं है। यह अनिश्िचत रूप से विस्तृत है, क्योंकि कोणों की दोनांे भुजाएँ अनिश्िचत आवृफति 4ण्19रूप से अपनी - अपनी एक ओर विस्तृत हंै।द्ध संलग्न आवृफति 4.20 में, ग् कोण के अभ्यंतर में स्िथत है। र् कोण के अभ्यंतर में स्िथत नहीं है। यह कोण के बहिभार्ग में स्िथत है। बिंदु ै स्वयं∠च्फत् पर स्िथत है। अतः कोण से संबंध्ित भी तीन क्षेत्रा होते हैं। प्रश्नावली 4ण्3 आवृफति 4ण्20 1ण् नीचे दी आवृफति में, कोणों के नाम लिख्िाए: क् । 2ण् संलग्न आवृफति में, वे बिंदु लिख्िाए जो ;ंद्ध ∠क्व्म् के अभ्यंतर में स्िथत हैं। ;इद्ध ∠म्व्थ् के बहिभार्ग में स्िथत हैं। ;बद्ध ∠म्व्थ् पर स्िथत हैं। 3 दो कोणों की रपफ आवृफतियाँ खींचिए जिससे ;ंद्ध उनमें एक बिंदु उभयनिष्ठ हो। ;इद्ध उनमें दो बिंदु उभयनिष्ठ हों। ;बद्ध उनमें तीन बिंदु उभयनिष्ठ हों। ;कद्ध उनमें चार बिंदु उभयनिष्ठ हों। ;मद्ध उनमें एक किरण उभयनिष्ठ हो। 4ण्11 त्रिाभुज त्रिाभुज ;जतपंदहसमद्ध एक तीन भुजाओं वाला बहुभुज होता है। वास्तव में, यह सबसे कम भुजाओं वाला बहुभुज है। संलग्न आवृफति 4.21 में दिए त्रिाभुज को देख्िाए। हम त्रिाभुज ।ठब् के लिए सांकेतिक रूप से Δ।ठब् लिखते हैं। Δ।ठब् में कितनी भुजाएँ हैं? इसमें कितने कोण हैं? इस त्रिाभुज की तीन भुजाएँ ।ठए ठब् और ब्। हैं। इसके तीन कोण हैं: ∠ठ।ब् ए ∠ठब्। और ∠।ठब् । बिंदु ।एठ और ब् इस त्रिाभुज के शीषर् कहलाते हैं। 87 एक बहुभुज होने के कारण, एक त्रिाभुज का एक बहिभार्ग और एक अभ्यंतर होता है। संलग्न आवृफति 4.22 में, च् त्रिाभुज के अभ्यंतर में स्िथत है, त् त्रिाभुज के बहिभार्ग में स्िथत है आरै फ स्वयं त्रिाभुज पर स्िथत है। आवृफति 4ण्22प्रश्नावली 4ण्4 1ण् त्रिाभुज।ठब् का एक रपफ चित्रा खींचिए। इस त्रिाभुज के अभ्यंतर में एक बिंदुच् अंकित कीजिए और उसके बहिभार्ग में एक बिंदु फ अंकित कीजिए। बिंदु । इसके अभ्यंतर में स्िथत है या बहिभार्ग में स्िथत है? ।2ण् ;ंद्ध संलग्न आवृफति में तीन त्रिाभुजों की पहचान कीजिए। ;इद्ध सात कोणों के नाम लिख्िाए। ;बद्ध इसी आवृफति में छः रेखाखंडों के नाम लिख्िाए। ;कद्ध किन दो त्रिाभुजों में ठ ∠ठ उभयनिष्ठ है? 4ण्12 चतुभुर्ज चार भुजाओं वाला बहुभुज एक चतुभुर्ज ;फनंकतपसंजमतंसद्ध कहलाता है। इसकी चार भुजाएँ और चार कोण होते हैं। एक त्रिाभुज की ही तरह, आप इसके अभ्यंतर को देख सकते हैं। उस विध्ि को देख्िाए जिस व्रफम में चतुभुर्ज के शीषो± के नाम लिखे जाते हैं। चतुभुर्ज ।ठब्क् ;आवृफति 4.23द्ध की चार भुजाएँ ।ठ ए ठब्ए ब्क् और क्। हैं। इसके चार कोण हैं: ∠। ए ∠ठ ए ∠ब् और ∠क् । क् आवृफति 4ण्23 यह चतुभुर्ज च्फत्ै है। क्या यह चतुभुर्ज च्फत्ै है?88 किसी चतुभुर्ज ।ठब्क् में, ।ठ और ठब् आसन्न भुजाएँ हैं। क्या आप आसन्न भुजाओं के अन्य युग्म लिख सकते हैं? ब्इस चतुभुर्ज में, ।ठ और क्ब् सम्मुख भुजाएँ ;व्चचवेपजम ेपकमेद्ध हैं। सम्मुख भुजाओं के अन्य युग्म के नाम लिख्िाए। ∠। और ∠ब् चतुभुर्ज ।ठब्क् के सम्मुख कोण क् ;व्चचवेपजम ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। इसी प्रकार, ∠क् और ∠ठ भी सम्मुख कोण हैं। स्वाभाविक है कि ∠। और ∠ठ आसन्न कोण ;ंकरंबमदज ंदहसमेद्ध । हैं। अब आप आसन्न कोणों के अन्य युग्म लिख सकते हैं। प्रश्नावली 4ण्5 1ण् चतुभुर्ज च्फत्ै का एक रपफ चित्रा खींचिए। इसके विकणर्खींचिए। इनके नाम लिख्िाए। क्या विकणो± का प्रतिच्छेदबिंदु चतुभुर्ज के अभ्यंतर में स्िथत है या बहिभार्ग में स्िथत है? 2ण् चतुभुर्ज ज्ञस्डछ का एक रपफ चित्रा खींचिए। बताइए: ;ंद्ध सम्मुख भुजाओं के दो युग्म ;इद्ध सम्मुख कोणों के दो युग्म ;बद्ध आसन्न भुजाओं के दो युग्म ;कद्ध आसन्न कोणों के दो युग्म 3ण् खोज कीजिए: पटि्टयाँ और उन्हें बाँध्ने की वस्तुएँ लेकर एक त्रिाभुज बनाइए और एक चतुभुर्ज बनाइए।त्रिाभुज के किसी एक शीषर् पर पटि्टयों कोे अंदर की ओर दबाने का प्रयत्न कीजिए। यहीकायर् चतुभुर्ज के लिए भी कीजिए। क्या त्रिाभुज में कोइर् परिवतर्न आया? क्या चतुभुर्ज में कोइर्परिवतर्न हुआ? क्या त्रिाभुज एक दृढ़ ;तपहपकद्ध आवृफति है? क्या कारण है कि विद्युत टावरों;म्समबजतपब ज्वूमतेद्ध जैसी संरचनाओं में त्रिाभुजीय आकारों का प्रयोग किया जाता है, चतुभुर्जीयआकारों का नहीं? 4ण्13 वृत्त आप अपने पयार्वरण में अनेक वस्तुएँ पाएँगे जो गोल होती हैं, जैसेμपहिया, चूड़ी, सिक्का इत्यादि। हम गोल आवृफतियों का अनेक प्रकार से प्रयोग करते हैं। एक भारी इस्पात की ट्यूब को खींचने की अपेक्षा लुढ़काना अध्िक सरल होता है। वृत्त ;बपतबसमद्ध एक सरल बंद वव्रफ है जो एक बहुभुज नहीं है। इसके वुफछ विश्िाष्ट गुण हैं। 89 ऽ एक चूड़ी या कोइर् और गोल वस्तु को कागश पर रख्िाए और उसके चारों ओरपेंसिल घुमाकर एक वृत्ताकार आवृफति बनाइए। ऽ यदि आपको एक वृत्ताकार बाग बनाना हो, तो आप वैफसे करेंगे?दो डंडी और एक डोरी लीजिए। भूमि पर एक डंडी को गाड़ दीजिए। यह खींचे जानेवाले वृत्त का केन्द्र ;बमदजतमद्ध है। डोरी के प्रत्येक सिरे पर एक पंफदा ;सववचद्ध बनाकरदो पंफदे प्राप्त कीजिए। एक पंफदे को केंद्र वाली पहली डंडी में डाल दीजिए और दूसरे पंफदे को दूसरी डंडी में डाल दीजिए। इन डंडियों को भूमि के उफध्वार्ध्र रख्िाए। डोरी कोतनी हुइर् रखते हुए, भूमि पर दूसरी डंडी को घुमाकर एक पथ बनाइए। आप एक वृत्त ;बपतबसमद्ध प्राप्त करेंगे। स्वाभाविक है कि वृत्त पर स्िथत प्रत्येक बिंदु वेंफद्र से बराबर ;या समानद्ध दूरी पर है। वृत्त के भाग संलग्न आवृफति 4.24 में वेेंफद्र ब् वाला एक वृत्त है। ।एच्एठएड वृत्त पर स्िथत वुफछ बिंदु हैं। आप देखेंगे कि ब्। त्र ब्ठ त्र ब्च् त्र ब्ड है। प्रत्येक रेखाखंड ब्। ए ब्ठए ब्च् या ब्ड वृत्त की एक त्रिाज्या ;तंकपनेद्ध है। त्रिाज्या वह रेखाखंड होता है जो वृत्त पर स्िथत बिंदु को उसके वेंफद्र से जोड़ता है। इसी आवृफति में ब्च् और ब्ड ऐसी त्रिाज्याएँ हैं कि बिंदु च्ए ब्ए ड एक ही रेखा में हैं। रेखाखंड च्ड वृत्त का एक व्यास ;कपंउमजमतद्ध कहलाता है।चित्रा 4ण्24 क्या वृत्त का व्यास उसकी त्रिाज्या का दोगुना है? हाँ। वृत्त पर स्िथत किन्हीं दो बिंदुओंको मिलाने वाला रेखाखंड वृत्त की एक जीवा ;बीवतकद्ध कहलाती है। इस प्रकार च्ठ वृत्त की एक जीवा है। क्या च्ड भी वृत्त की जीवा है? वृत्त के एक भाग को उसका चाप ;ंतबद्ध कहते हैं। यदि च् और फ वृत्त पर स्िथत बिंदु है, तो आपको चापच्फ प्राप्त होगा। हम इसे चित्रा 4ण्25च्फ से व्यक्त करते हैं ;आवृफति 4.25द्ध।किसी सरल बंद वव्रफ की ही तरह, आप एक वृत्त के अभ्यंतर और बहिभार्ग के बारेमें सोच सकते हैं। वृत्तीय क्षेत्रा का वह भाग जो दो त्रिाज्याओं और संगत चाप से घ्िारकर आधरभूत ज्यामितीय अवधरणाएँ बनता है एक त्रिाज्यखंड ;ेमबजवतद्ध कहलाता है। वृत्त कीएक जीवा और संगत चाप से घ्िारा वृत्तीय क्षेत्रा का भाग एक वृत्तखंड ;ेमहउमदज व िं बपतबसमद्ध कहलाता है। कोइर् भी वृत्ताकार वस्तु लीजिए। एक धगा लीजिए और उसे उस वस्तु के अनुदिश एक बार रखकर धगे की लंबाइर् को मापिए। धगे की यह लंबाइर् उस वस्तु के चारों ओर एक चक्कर लगाने में तय की गइर् दूरी है। यह लंबाइर् क्या व्यक्त चित्रा 4ण्26 करती है? वृत्त के अनुदिश चली गइर् दूरी उसकी परिध्ि ;बपतबनउमितमदबमद्ध कहलाती है। ऽ एक वृत्ताकार शीट ;ेीममजद्ध लीजिए। इसे मोड़कर दो आध्े भाग ;ींसअमेद्ध बनाइए। दबाकर मोड़ का निशान बनाइए औरशीट को खोल लीजिए। क्या आप देखते हैं कि वृत्तीय क्षेत्रा उसके व्यास द्वारा दो आध्े ;बराबरद्ध भागों में विभाजित हो गया है? वृत्त का एक व्यास उसे दो बराबर भागों में विभाजित करता है। प्रत्येक भाग एक अध्र्वृत्त ;ेमउपबपतबसमद्ध कहलाता है। एक अध्र्वृत्त वृत्त का आध भाग है। जिसमें वृत्त का व्यास ;उसके अंत बिंदुओं को छोड़ करद्ध सम्िमलित नहीं हैं। प्रश्नावली 4ण्6 1ण् संलग्न आवृफति देखकर लिख्िाए: ;ंद्ध वृत्त का वेंफद्र ;इद्ध तीन त्रिाज्याएँ ;बद्ध एक व्यास ;कद्ध एक जीवा ;मद्ध अभ्यंतर में दो बिंदु ;द्धि बहिभार्ग में एक बिंदु ;हद्ध एक त्रिाज्यखंड ;ीद्ध एक वृत्तखंड 2ण् ;ंद्ध क्या वृत्त का प्रत्येक व्यास उसकी एक जीवा भी होता है? ;इद्ध क्या वृत्त की प्रत्येक जीवा उसका एक व्यास भी होती है? 3ण् कोइर् वृत्त खींचिए और निम्न को अंकित कीजिए: ;ंद्ध उसका वेंफद्र ;मद्ध एक वृत्तखंड ;इद्ध एक त्रिाज्या ;द्धि उसके अभ्यंतर में एक बिंदु ;बद्ध एक व्यास ;हद्ध उसके बहिभार्ग में एक बिंदु ;कद्ध एक त्रिाज्यखंड ;ीद्ध एक चाप 4ण् सत्य या असत्य बताइए: ;ंद्ध वृत्त के दो व्यास अवश्य ही प्रतिच्छेद करेंगे। ;इद्ध वृत्त का वेंफद्र सदैव उसके अभ्यंतर में स्िथत होता है। हमने क्या चचार् की?1ण् बिंदु एक स्िथति निधर्रित करता है। इसे सामान्यतः अंग्रेजी के बड़े अक्षर से व्यक्त किया़जाता है।2ण् दो बिंदुओं को जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता एक रेखाखंड दशार्ता है। बिंदु । और ठ को मिलाने वाले रेखाखंड को ।ठ से दशार्ते हैं। ।ठ और ठ। दोनांे एक ही रेखाखंड को दशार्ते हैं।3ण् जब एक रेखाखंड जैसे ।ठ को दोनों तरपफ बिना किसी अंत के विस्तृत किया जाता है तो़ेननत हमें एक रेखा प्राप्त होती है। इसे ।ठ से व्यक्त किया जाता है। इसे कभी - कभी स जैसे अक्षर से भी व्यक्त किया जाता है।4ण् दो विभ्िान्न रेखाएँ जब एक दूसरे को किसी एक बिंदु पर मिलती या काटती हैं तो वे प्रतिच्छेदी रेखाएँ कहलाती हैं।5ण् दो रेखाएँ जब एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती अथार्त्नहीं काटती हैं, तो वे समांतर रेखाएँ कहलाती हैं।6ण् किरण रेखा का एक भाग होता है जो एक बिंदु से प्रारंभ होकर एक दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत होता है।7ण् कागश से बिना पेंसिल उठाए कोइर् भी आवृफति ;सीध्ी या टेढ़ीद्ध को एक वव्रफ कह सकते हैं। इस संदभर् में एक रेखा भी एक वव्रफ है।8ण् यदि कोइर् वव्रफ स्वयं को न काटे तो वह सरल वव्रफ ;ैपउचसम ब्नतअमद्ध कहलाती है।9ण् एक वव्रफ जिसके सिरे मिले हुए हों, बंद वव्रफ कहलाती हैऋ अन्यथा उसे खुली वव्रफ कहते हैं। 10ण् रेखाखंडों से बनी बंद आवृफति एक बहुभुज कहलाती है। यहाँμ ;पद्ध बहुभुज को बनाने वाले रेखाखंड उसकी भुजाएँ कहलाती हैं। ;पपद्ध कोइर् भी दो भुजाएँ जिनमें एक उभयनिष्ठ अंत बिंदु हो, बहुभुज की आसन्न भुजाएँ कहलाती हैं। 92 ;पपपद्ध दो भुजाएँ जहाँ मिलती हैं उस बिंदु को बहुभुज का शीषर् ;अमतजमगद्ध कहते हैं। ;पअद्ध बहुभुज की एक ही भुजा के अंत बिंदु आसन्न शीषर् ;ंकरंबमदज अमतजपबमेद्ध कहलाते हैं। ;अद्ध ऐसे शीषर् जो आसन्न नहीं हैं को मिलाने से बना रेखाखंड बहुभुज का विकणर् ;कपंहवदंसद्ध कहलाता है। 11ण् उभयनिष्ठ प्रारंभ्िाक बिंदु वाली दो किरणों से एक कोण बनता है। नननत नननत दो किरणें व्। और व्ठ कोण ∠।व्ठ बनाती हैं ;इसे ∠ठव्। भी लिख सकते हैंद्ध। कोण से संबंध्ित तीन क्षेत्रा हैं: कोण पर, कोण के अभ्यंतर और कोण के बहिभार्ग। 12ण् त्रिाभुज ;ज्तपंदहसमद्ध एक तीन भुजाओं वाला बहुभुज होता है। 13ण् चार भुजाओं वाला बहुभुज एक चतुभुर्ज ;फनंकतपसंजमतंसद्ध कहलाता है। इसको शीषो± के एक व्रफम के अनुसार नामांकित करना चाहिए। किसी चतुभुर्ज ।ठब्क् में, ।ठ और क्ब् तथा ।क् और ठब् सम्मुख भुजाओं के युग्म हैं। ∠। और ∠ब् तथा ∠ठ और ∠क् सम्मुख कोणों के युग्म हैं। ∠।और ∠ठ आसन्न कोण हैंऋ ऐसे ही आसन्न कोणों के तीन अन्य युग्म हैं। 14ण् एक निश्िचत बिंदु से समान दूरी पर चक्कर लगाने से बना बिंदुओं का पथ वृत कहलाता है। निश्िचत बिंदु वृत्त का वेंफद्र कहलाता है, निश्िचत दूरी ;समान दूरीद्ध त्रिाज्या कहलाती है तथावृत्त के चारों ओर चली गयी दूरी उसकी परिध्ि कहलाती है। वृत्त पर किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड वृत्त की एक जीवा ;बीवतकद्ध कहलाती है। वेंफद्र से होकर जाने वाली जीवा वृत का व्यास कहलाती है। वृत्तीय क्षेत्रा का वह भाग जो दो त्रिाज्याओं और संगत चाप से घ्िारकर बनता है एक त्रिाज्यखंड ;ेमबजवतद्ध कहलाता है। वृत्त की एक जीवाऔर संगत चाप से घ्िारा वृत्तीय क्षेत्रा का भाग एक वृत्तखंड ;ेमहउमदज व िं बपतबसमद्ध कहलाता है। वृत्त केएक व्यास के दोनों अंत बिंदु उसे दो बराबर भागों में विभाजित करते हैं। प्रत्येक भाग एक अध्र्वृत्त ;ेमउपबपतबसमद्ध कहलाता है।

>Chapter_4>



अध्याय4


आधारभूत ज्यामिति अवधारणाएँ


4.1 भूमिका

ज्यामिति का एक लंबा और शानदार (बहुमूल्य) इतिहास है। शब्द ‘ज्यामिति’ (Geometry) यूनानी शब्द जिओमीट्रोन (Geometron) का अंग्रेजी तुल्य है। जिया (Geo) का अर्थ है ‘भूमि’ और ‘मीट्रोन (Metron) का अर्थ है ‘मापना’। इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन समय में ज्यामितीय अवधारणाएँ संभवत: कला, वास्तु-कला या शिल्प-कला (Architecture) और भूमि मापन की आवश्यकताओं के कारण विकसित हुईं। इनमें वे अवसर भी सम्मिलित हैं जब खेतिहर की भूमि की परिसीमाओं (boundaries) को बिना किसी शिकायत की संभावना रखते हुए, अंकित किया जाता था। वैभवपूर्ण राजभवनों, मंदिरों, झीलों, बाँधों और नगरों के निर्माणों, कला और वास्तुकला (या शिल्प) ने इन अवधारणाओं को और उजागर किया। आजकल भी कला, मापन, वास्तुकला, इंजीनियरिंग (engineering), कपड़ों के डिज़ाइन इत्यादि के सभी रूपों में ज्यामितीय अवधारणाओं का प्रभाव देखा जा सकता है। आप विभिन्न प्रकार की वस्तुओं, जैसे–बक्स (पेटी), मेज़, पुस्तक, अपने स्कूल में लंच ले जाने के लिए खाने के डिब्बे, गेंद जिससे आप खेलते हैं, आदि को देखते हैं और उनका प्रयोग भी करते हैं। इन सभी वस्तुओं के भिन्न-भिन्न आकार (shapes) होते हैं। जो रूलर (ruler) आप प्रयोग करते हैं और पेंसिल जिससे आप लिखते हैं वे सीधी (straight) हैं। एक चूड़ी, एक रुपये का सिक्का या एक गेंद के चित्र गोल (round) प्रतीत होते हैं।


यहाँ आप कुछ रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ेंगे, जो आपके चारों ओर उपस्थित आकारों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में आपकी सहायता करेंगे।


4.2 बिंदु

कागज़ पर एक पेंसिल के नुकीले सिरे से एक चिह्न (dot) अंकित कीजिए। सिरा जितना नुकीला होगा, चिह्न उतना ही सूक्ष्म (छोटा) होगा। लगभग एक बिना दिखाई देने वाला सूक्ष्म चिह्न आपको एक बिंदु की अवधारणा का आभास कराएगा। बिंदु (point) एक स्थिति (या अवस्थिति) (location) निर्धारित करता है।


बिंदु के लिए कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं :

Img01

यदि आप किसी कागज़ पर, मान लीजिए, तीन बिंदु अंकित करें, तो आपको इनमें भेद बताने की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए, इन्हें अंग्रेज़ी के बड़े अक्षर A, B, C इत्यादि से व्यक्त किया जाता है।

इन बिंदुओं को बिंदु A, बिंदु B और बिंदु C पढ़ा जाता है।

बिंदु नि:संदेह बहुत छोटे होने चाहिए।

Try_these

1. अपनी पेंसिल के नुकीले सिरे से, एक कागज़ पर चार बिंदु अंकित कीजिए तथा उन्हें नाम A,C,P और H दीजिए। इन बिंदुओं को विभिन्न प्रकारों से नाम दीजिए। नाम देने का एक प्रकार संलग्न आकृति के अनुसार हो सकता है।

2. आसमान में एक तारा हमें एक बिंदु की अवधारणा का आभास कराता है। अपने दैनिक जीवन से इसी प्रकार की पाँच स्थितियाँ चुनकर दीजिए।



4.3 रेखाखंड

एक कागज़ को मोड़िए और फिर उसे खोल लीजिए। क्या आपको कोई मोड़ का निशान दिखाई देता है? इससे एक रेखाखंड (line segment) की अवधारणा का आभास होता है। इसके दो अंत बिंदु (end points) A और B हैं। एक पतला धागा (या डोरी) लीजिए। इसके दोनों सिरों को कसकर पकड़िए ताकि धागे में कोई ढील न रहे। यह एक रेखाखंड निरूपित करता है। हाथों से पकड़े हुए सिरे इस रेखाखंड के अंत बिंदु हैं।



रेखाखंड के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं :


एक बक्स का किनारा एक ट्यूबलाइट एक पोस्टकार्ड का किनारा अपने आस-पास से रेखाखंडों के कुछ और उदाहरण देने का प्रयत्न कीजिए।

एक कागज़ पर दो बिंदु A और B अंकित कीजिए। इन दोनों बिंदुओं को सभी संभव रास्तों से जोड़ने का प्रयत्न कीजिए (आकृति 4.1)।

आकृति 4.1

A से B तक का सबसे छोटा रास्ता क्या है?

A और B को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा रास्ता (इसमें बिंदु A और B भी सम्मिलित हैं), जो संलग्न आकृति 4.1 में दर्शाया गया है, एक रेखाखंड है। इसे से व्यक्त किया जाता है। बिंदु A और B इस रेखाखंड के अंत बिंदु हैं।

Try_these

1. संलग्न आकृति में दिए रेखाखंडों के नाम दीजिए (आकृति 4.2)। क्या A प्रत्येक रेखाखंड का एक अंत बिंदु है?

आकृति 4.2



4.4 एक रेखा

कल्पना कीजिए कि A से B तक के रेखाखंड (अर्थात् Img02) को A से आगे एक दिशा में और B से आगे दूसरी दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत किया गया है (आकृति को देखिए)। आपको रेखा (line) का एक उदाहरण प्राप्त हो जाएगा।

क्या आप सोचते हैं कि आप कागज़ पर पूरी रेखा खींच सकते हैं? नहीं।(क्यों?)


दो बिंदुओं A और B से होकर जाने वाली रेखा को  Img02 से निरूपित करते हैं। यह दोनों दिशाओं में अनिश्चित रूप से विस्तृत होती है। इस पर असंख्य बिंदु स्थित होते हैं। (इनके बारे में सोचिए)


रेखा को निश्चित करने के लिए, दो बिंदु पर्याप्त हैं। हम कहते हैं कि दो बिंदु एक रेखा निर्धारित (determine) करते हैं।


संलग्न आकृति (आकृति 4.3) रेखा  Img03 की है। कभी-कभी एक रेखा को l जैसे अक्षर से भी व्यक्त किया जाता है।

आकृति 4.3



4.5 प्रतिच्छेदी रेखाएँ


संलग्न आकृति 4.4 को देखिए। इसमें दो रेखाएँ l1 और l2 दर्शाई गई हैं। ये दोनों रेखाएँ बिंदु P से होकर जाती हैं। हम कहते हैं कि रेखाएँ l1 और l2 बिंदु P पर प्रतिच्छेद (intersect) करती हैं। यदि दो रेखाओं में एक उभयनिष्ट बिंदु हो, तो वे प्रतिच्छेदी रेखाएँ (intersecting lines) कहलाती हैं।

आकृति 4.4

प्रतिच्छेदी रेखाओं के कुछ उदाहरण निम्न हैं :

Img04

प्रतिच्छेदी रेखाओं के युग्मों के कुछ और उदाहरण ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए।

Try_these

एक कागज़ लीजिए। इसे दो बार मोड़िए (और मोड़ के निशान बनाइए) ताकि दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ प्राप्त हो जाएँ और चर्चा कीजिए :

(a) क्या दो रेखाएँ एक से अधिक बिंदुओं पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं?

(b) क्या दो से अधिक रेखाएँ एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं?


4.6 समांतर रेखाएँ

l

आइए, आकृति 4.6 में दर्शाई गई मेज़ को देखें। इसका ऊपरी सिरा ABCD सपाट (Flat) है। क्या आप कुछ रेखाखंड और बिंदु देख पा रहे हैं? क्या यहाँ प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं?

आकृति 4.6

हाँ, Img02 और  Img05 बिंदु B पर प्रतिच्छेद करती हैं। कौन-सी रेखाएँ A पर प्रतिच्छेद करती हैं? कौन-सी रेखाएँ C पर प्रतिच्छेद करती हैं और कौन-सी रेखाएँ D पर प्रतिच्छेदकरती हैं?


क्या रेखाएँ AD और CD  परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं?

क्या रेखाएँ AD और BC परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं?

आपने देखा कि मेेज़ के ऊपरी पृष्ट पर कुछ रेखाएँ हैं जो परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करतीं (उन्हें कितना भी बढ़ाया जाए)।  Img06 और  Img05 एेसी रेखाओं का एक युग्म बनाती हैं। मेेज़ के ऊपरी सिरे पर क्या आप रेखाओं का कोई एेसा ही अन्य युग्म (जो कहीं नहीं मिलती) बता सकते हैं?

एेसी रेखाएँ (जैसी मेेज़ में ऊपरी सिरे पर हैं) जो प्रतिच्छेद नहीं करतीं समांतर रेखाएँ (parallel lines) कहलाती हैं।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए :

आप समांतर रेखाओं को और कहाँ देखते हैं? इनके 10 उदाहरण ज्ञात करने का प्रयत्न कीजिए।

यदि दो रेखाएँ AB और CD समांतर हों, तो हम इन्हें सांकेतिक रूप में  Img02 | Img07 लिखते हैं।

यदि दो रेखाएँ l1 और l2 समांतर हैं, तो हम l1 || l2 लिखते हैं।

क्या आप नीचे दी आकृति में समांतर रेखाएँ बता सकते हैं?

Img08


4.7 किरण

किरण (ray) के लिए कुछ निम्नलिखित मॉडल हैं :

Img09

किरण रेखा का एक भाग होता है। यह एक बिंदु से प्रारंभ होती है (जिसे प्रारंभिक बिंदु (initial point) कहते हैं) और एक दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत होती है।

यहाँ दाईं ओर किरण की दी हुई आकृति (आकृति 4.7) को देखिए। इस किरण पर दो बिंदु दर्शाए गए हैं। ये हैं :

आकृति 4.7

(a) A, जो प्रारंभिक बिंदु है।

(b) P, जो किरण पर एक अन्य बिंदु है।

हम इसे Img10 से व्यक्त करते हैं।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए :


यदि  Img11 एक किरण है, तो

(a) इसका प्रारंभिक बिंदु क्या है?

(b) बिंदु Q किरण पर कहाँ स्थित होता है?

(c) क्या हम कह सकते हैं कि Q इस किरण का प्रारंभिक बिंदु है?

Try_these

1. सामने दी आकृति (आकृति 4.8) में दर्शाई गई किरणों के नाम लिखिए।

2. क्या T इन सभी किरणों का प्रारंभिक बिंदु है?

आकृति 4.8

संलग्न आकृति 4.9 में, एक किरण OA दी है। यह O से प्रारंभ होती है और A से होकर जाती है। यह किरण बिंदु B से होकर भी जाती है।

आकृति 4.9

क्या आप इसे Img12भी कह सकते हैं? क्यों?

यहाँ Img13 और  Img12 एक ही किरण को दर्शाते हैं।

क्या हम किरण  Img13 को किरण  Img14 लिख सकते हैं? क्यों या क्यों नहीं?

पाँच किरणें खींचिए और उनके उचित नाम लिखिए।

इन किरणों के सिरे पर लगे तीर क्या दर्शाते हैं?


प्रश्नावली 4.1

1. संलग्न आकृति का प्रयोग करके, निम्न के नाम लिखिए :


(a) पाँच बिंदु

(b) एक रेखा

(c) चार किरणें

(d) पाँच रेखाखंड

2. संलग्न आकृति में दी हुई रेखा के सभी संभव प्रकारों के नाम लिखिए। आप इन चार बिंदुओं में से किसी भी बिंदु का प्रयोग कर सकते हैं।


3. संलग्न आकृति को देखकर नाम लिखिए :


(a) रेखाएँ जिसमें बिंदु E सम्मिलित हैं

(b) A से होकर जाने वाली रेखा

(c) वह रेखा जिस पर O स्थित है

(d) प्रतिच्छेदी रेखाओं के दो युग्म

4. निम्नलिखित से होकर कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं?

(a) एक बिंदु (b) दो बिंदु

5. निम्नलिखित स्थितियों में से प्रत्येक के लिए एक रफ (Rough) आकृति बनाइए और उचित रूप से उसे नामांकित कीजिए :

(a) बिंदु P रेखाखंड पर स्थित है।

(b) रेखाएँ XY और PQ बिंदु M पर प्रतिच्छेद करती हैं।

(c) रेखा l पर E और F स्थित हैं, परंतु D स्थित नहीं है।

(d) Img17 और  Img18 बिंदु O पर मिलती हैं।

6. रेखा  Img23 की संलग्न आकृति को देखिए। इस आकृति के संदर्भ में बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य :


(a) Q, M, O, N और P रेखा  Img23 पर स्थित बिंदु हैं।

(b) M, O और N रेखाखंड  Img23 पर स्थित बिंदु हैं।

(c) M और N रेखाखंड  Img23 के अंत बिंदु हैं।

(d) O और N रेखाखंड  Img17 के अंत बिंदु हैं।

(e) M रेखाखंड के दोनों अंत बिंदुओं में से एक बिंदु है।

(f) M किरण पर एक बिंदु है।

(g) किरण  Img17 किरण  Img24 से भिन्न है।

(h) किरण  Img17 वही है जो किरण  Img25 है।

(i) किरण  Img25 किरण  Img17 के विपरीत (Opposite) नहीं है।

(j) O किरण  Img17 का प्रारंभिक बिंदु नहीं है।

(k) N किरण  Img26 और  Img27 का प्रारंभिक बिंदु है।


4.8 वक्र


क्या आपने कभी कागज़ पर पेंसिल से टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ खींची हैं। एेसा करने पर जो आकृतियाँ प्राप्त होती हैं वे वक्र (curves) कहलाते हैं।

इनमें से कुछ आकृतियों (drawing) को आप कागज़ पर बिना पेंसिल उठाए और रूलर का प्रयोग किए बना सकते हैं। ये सभी आकृतियाँ वक्र हैं (आकृति 4.10)।

आम भाज़ा में ‘वक्र’ का अर्थ होता है ‘सीधा नहीं’। गणित में वक्र सीधी भी हो सकती है, जैसा कि ऊपर [(आकृति 4.10 (iv)] में दर्शाया गया है।

ध्यान दीजिए कि आकृति 4.10 में वक्र (iii) और (vii) स्वयं अपने को काट रही हैं, जबकि (i), (ii), (v) और (vi) में वक्र स्वयं को नहीं काटते हैं। यदि कोई वक्र स्वयं को न काटे, तो वह सरल वक्र (Simple Curves) कहलाती हैं।

Img15
आकृति 4.10

पाँच, सरल वक्र बनाइए और पाँच वक्र बनाइए जो सरल न हों।

अब इन्हें देखें (आकृति 4.11)

आकृति 4.11

संलग्न आकृति (आकृति 4.11) में दी हुई दोनों वक्रों में क्या अंतर है? पहली, अर्थात् आकृति 4.11 (i) वक्र एक खुली (Open Curve) है, और दूसरी, (अर्थात् आकृति 4.11 (ii) वक्र एक बंद वक्र (Closed Curve) है। क्या आप आकृति 4.10 (i), (ii), (v) और (vi) में, बंद वक्र और खुली वक्र बता सकते हैं?


एक आकृति में स्थितियाँ

एक टेनिस कोर्ट (Tennis Court) में कोर्ट रेखा उसे तीन भागों में बाँटती है। ये भाग हैं : रेखा के एक ओर, रेखा पर और रेखा के दूसरी ओर। आप एक ओर से दूसरी ओर बिना रेखा को पार किए नहीं जा सकते हैं।

आपके घर की परिसीमा (Boundary) घर को सड़क से अलग करती है। आप परिसर के ‘अंदर’, बाड़े की ‘परिसीमा’ और परिसर के ‘बाहर’ की बात करते हैं।

इसी प्रकार, एक बंद वक्र से संबंधित तीन भाग होते हैं, जो एक-दूसरे से पृथक (अलग-अलग) होते हैं।

आकृति 4.12

(i) वक्र का अभ्यंतर (interior) (अंदर का भाग)

(ii) वक्र की परिसीमा (boundary) (वक्र पर)

(iii) वक्र का बहिर्भाग (exterior) (बाहर का भाग)

सम्मुख आकृति 4.12 में, A वक्र के अभ्यंतर में है, C उसके बहिर्भाग में है और B स्वयं वक्र की परिसीमा पर स्थित है।

वक्र के अभ्यंतर और उसकी परिसीमा को मिलाकर उस वक्र का क्षेत्र (region) कहा जाता है। जो आपने बंद वक्र खींचा है, उसमें तीन क्षेत्रों को दर्शाया गया है।


4.9 बहुभुज

नीचे दी हुई आकृतियों 4.13 (i), (ii), (iii), (iv) और (v) को देखिए :


आकृति 4.13

आप इनके बारे में क्या कह सकते हैं? क्या ये बंद आकृतियाँ (वक्र) हैं? यह एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं? आकृति 4.13 (i), (ii), (iii) और (iv) में कुछ विशेषता हैं। यह केवल रेखाखंडों से ही बनी हैं। एेसी आकृतियाँ बहुभुज (polygons) कहलाती हैं।

अत:, एक आकृति बहुभुज होती है, जब वह एक सरल बंद आकृति हो और केवल रेखाखंडों से ही बनी हो। दस अलग-अलग आकृतियों वाले बहुभुज बनाइए।

Do_this

निम्न की सहायता से एक बहुभुज बनाने का प्रयत्न कीजिए।

1. माचिस की पाँच तीलियाँ

2. माचिस की चार तीलियाँ

3. माचिस की तीन तीलियाँ

4. माचिस की दो तीलियाँ

उपरोक्त में से किस स्थिति में यह संभव नहीं हुआ? क्यों?


भुजाएँ, शीर्ष और विकर्ण

संलग्न आकृति 4.14 को देखिए। इसको बहुभुज कहने के लिए कुछ कारण दीजिए। एक बहुभुज को बनाने वाले रेखाखंड उसकी भुजाएँ (sides) कहलाती हैं।

बहुभुज ABCDE की भुजाओं के नाम क्या हैं?

(ध्यान दीजिए कि कोनों (corners) को किस क्रम में लेकर बहुभुज का नाम लिखा गया है।)


आकृति 4.14

इसकी भुजाएँ हैं।

दो भुजाएँ जहाँ मिलती हैं उस बिंदु को बहुभुज का शीर्ष (vertex) कहते हैं।

भुजाएँ और बिंदु E पर मिलती हैं, इसलिए E बहुभुज ABCDE का एक शीर्ष है। B और C इसके अन्य दो शीर्ष हैं। क्या आप इन बिंदुओं पर मिलने वाली भुजाओं के नाम लिख सकते हैं?

क्या आप उपरोक्त बहुभुज ABCDE के अन्य शीर्षों के नाम लिख सकते हैं?

कोई भी दो भुजाएँ जिनमें एक उभयनिष्ट अंत बिंदु (common end point) हो बहुभुज की आसन्न भुजाएँ (adjacent sides) कहलाती हैं।

क्या AB और BC आसन्न भुजाएँ हैं? AE और DC के बारे में आप क्या कह सकते हैं?

बहुभुज की एक ही भुजा के अंत बिंदु आसन्न शीर्ष (adjacent vertices) कहलाते हैं। शीर्ष E और D आसन्न शीर्ष हैं, जबकि शीर्ष A और D आसन्न शीर्ष नहीं हैं। क्या आप बता सकते हैं कि क्यों?


उन शीर्षों को लीजिए जो आसन्न नहीं हैं। एेसे शीर्षों को मिलाने से बने रेखाखंड बहुभुज के विकर्ण (diagonals) कहलाते हैं।

संलग्न आकृति में, रेखाखंड , और बहुभुज के विकर्ण हैं।

क्या रेखाखंड एक विकर्ण हैं? क्यों या क्यों नहीं?

आकृति 4.15

क्या आप आसन्न शीर्षों को जोड़कर विकर्ण प्राप्त कर सकते हैं।

आकृति ABCDE (आकृति 4.15) के सभी भुजाओं, आसन्न भुजाओं और आसन्न शीर्षों के नाम लिखिए।

एक बहुभुज ABCDEFGH बनाइए और उसकी सभी भुजाओं, आसन्न भुजाओं तथा शीर्षों सहित विकर्णों के नाम लिखिए।


प्रश्नावली 4.2

1. नीचे दी हुई वक्रों को (i) खुली या (ii) बंद वक्रों के रूप में वर्गीकृत कीजिए :

2. निम्न को स्पज़्ट करने के लिए रफ आकृतियाँ बनाइए :

(a) खुला वक्र (b) बंद वक्र

3. कोई भी बहुभुज खींचिए और उसके अभ्यंतर को छायांकित (shade) कीजिए।

4. संलग्न आकृति को देखकर निम्न प्र”नों के उत्तर दीजिए :


(a) क्या यह एक वक्र है?

(b) क्या यह बंद है?

5. रफ आकृतियाँ बनाकर, यदि संभव हो तो निम्न को स्पज़्ट कीजिए:

(a) एक बंद वक्र जो बहुभुज नहीं है।

(b) केवल रेखाखंडों से बनी हुई खुली वक्र

(c) दो भुजाओं वाला एक बहुभुज


4.10 कोण


जब कोने (corner) बनते हैं, तो कोण (angles) भी बनते हैं।

आकृति 4.16

यहाँ एक आकृति 4.16 दी है, जहाँ एक बक्स (Box) का ऊपरी सिरा कब्जा लगे एक दरवाज़े की तरह है। बक्स के किनारे (edge) AD और दरवाज़े के किनारे AP की दो किरणों Img28 और  Img29 के रूप में कल्पना की जा सकती है। इन दोनों किरणों में एक उभयनिष्ट अंत बिंदु (या प्रारंभिक बिंदु) A है, यह कहा जाता है कि ये दो किरणें एक कोण बना रही हैं।

उभयनिष्ट प्रारंभिक बिंदु वाली दो किरणों से एक कोण बनता है।

कोण को बनाने वाली दोनों किरण उसकी भुजाएँ (Arms या sides) कहलाती हैं। उभयनिष्ट प्रारंभिक बिंदु कोण का शीर्ष (vertex) कहलाता है।

संलग्न आकृति में, किरण Img17 और Img30 से बने एक कोण को दर्शाया गया है। कोण को दर्शाने के लिए शीर्ष पर एक छोटे वक्र का प्रयोग किया गया है। O इस कोण का शीर्ष है। इस कोण की भुजाएँ क्या हैं? क्या ये किरणें Img17 और  Img30 नहीं हैं?

Img16

इस कोण को हम किस प्रकार नामांकित कर सकते हैं? इसे हम केवल यह कह सकते हैं कि यह O पर एक कोण है और अधिक विशिज़्टता के लिए, हम कोण की दोनों भुजाओं पर एक-एक बिंदु लेकर और उसके शीर्ष को लेकर कोण का नाम लिख सकते हैं। इस प्रकार, इस कोण को कोण POQ नाम देना एक अच्छा तरीका है। हम इसे  ∠POQ से व्यक्त करते हैं।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए :

संलग्न आकृति 4.18 को देखिए। इस कोण का क्या नाम है? क्या हम इसे ∠P कह सकते हैं? परंतु किस कोण को ∠P कहेंगे? ∠P से हमारा क्या तात्पर्य है?

क्या एक कोण को केवल उसके शीर्ष द्वारा नामांकित करना यहाँ सहायक होगा? क्यों नहीं?

∠Pका अर्थ यहाँ  ∠APB या  ∠ CPB या  ∠ APC हो सकता है। इसलिए यहाँ और अधिक सूचना की आवश्यकता है।

ध्यान दीजिए कि कोण को लिखते समय उसके शीर्ष के अक्षर को सदैव बीच में लिखा जाता है।

कोई कोण, मान लीजिए,  ∠ABC लीजिए।


Img31 को परिसीमा लेकर उस भाग को छायांकित कीजिए जिस ओर  Img32 स्थित है।


अब  Img32 को परिसीमा लेकर उस भाग को दूसरे रंग से छायांकित कीजिए जिस ओर Img31 स्थित है।


दोनों प्रकार के छायांकित भागों में उभयनिष्ट भाग ∠ABC का अभ्यंतर है (आकृति 4.19)।

आकृति 4.19

(ध्यान दें कि अभ्यंतर एक सीमित क्षेत्र नहीं है। यह अनिश्चित  रूप से विस्तृत है, क्योंकि कोणों की दोनाें भुजाएँ अनिश्चित रूप से अपनी-अपनी एक ओर विस्तृत हैं।)

संलग्न आकृति 4.20 में, X कोण के अभ्यंतर में स्थित है। Z कोण के अभ्यंतर में स्थित नहीं है। यह कोण के बहिर्भाग में स्थित है। बिंदु S स्वयं∠ PQR पर स्थित है। अत: कोण से संबंधित भी तीन क्षेत्र होते हैं।

आकृति 4.20



प्रश्नावली 4.3


1. नीचे दी आकृति में, कोणों के नाम लिखिए :


2. संलग्न आकृति में, वे बिंदु लिखिए जो

(a) ∠DOE के अभ्यंतर में स्थित हैं।

(b) ∠EOF के बहिर्भाग में स्थित हैं।

(c) ∠EOF पर स्थित हैं।



3 दो कोणों की रफ आकृतियाँ खींचिए जिससे

(a) उनमें एक बिंदु उभयनिष्ट हो।

(b) उनमें दो बिंदु उभयनिष्ट हों।

(c) उनमें तीन बिंदु उभयनिष्ट हों।

(d) उनमें चार बिंदु उभयनिष्ट हों।

(e) उनमें एक किरण उभयनिष्ट हो।



4.11 त्रिभुज


त्रिभुज (triangle) एक तीन भुजाओं वाला बहुभुज होता है। वास्तव में, यह सबसे कम भुजाओं वाला बहुभुज है।

संलग्न आकृति 4.21 में दिए त्रिभुज को देखिए। हम त्रिभुज ABC के लिए सांकेतिक रूप से ABC लिखते हैं। ABC में कितनी भुजाएँ हैं? इसमें कितने कोण हैं?


आकृति 4.21

इस त्रिभुज की तीन भुजाएँ , और हैं। इसके तीन कोण हैं : ∠ BAC, ∠ BCA और ∠ABC। बिंदु A,B और C इस त्रिभुज के शीर्ष कहलाते हैं।

एक बहुभुज होने के कारण, एक त्रिभुज का एक बहिर्भाग और एक अभ्यंतर होता है। संलग्न आकृति
4.22 में,
P त्रिभुज के अभ्यंतर में स्थित है, R त्रिभुज के बहिर्भाग में स्थित है और Q स्वयं त्रिभुज पर स्थित है।

आकृति 4.22


प्रश्नावली 4.4

1. त्रिभुज ABC का एक रफ चित्र खींचिए। इस त्रिभुज के अभ्यंतर में एक बिंदु P अंकित कीजिए और उसके बहिर्भाग में एक बिंदु Q अंकित कीजिए। बिंदु A इसके अभ्यंतर में स्थित है या बहिर्भाग में स्थित है?

2. (a) संलग्न आकृति में तीन त्रिभुजों की पहचान कीजिए। (b) सात कोणों के नाम लिखिए। (c) इसी आकृति में छ: रेखाखंडों के नाम लिखिए। (d) किन दो त्रिभुजों में ∠B उभयनिष्ट है?



4.12 चतुर्भुज

चार भुजाओं वाला बहुभुज एक चतुर्भुज (Quadrilateral) कहलाता है। इसकी चार भुजाएँ और चार कोण होते हैं। एक त्रिभुज की ही तरह, आप इसके अभ्यंतर को देख सकते हैं।

उस विधि को देखिए जिस क्रम में चतुर्भुज के शीर्षों के नाम लिखे जाते हैं।


आकृति 4.23

चतुर्भुज ABCD (आकृति 4.23) की चार भुजाएँ , , और हैं। इसके चार कोण हैं :  ∠A, ∠B, ∠C और  ∠D।

Img19

किसी चतुर्भुज ABCD में, और आसन्न भुजाएँ हैं। क्या आप आसन्न भुजाओं के अन्य युग्म लिख सकते हैं?

इस चतुर्भुज में, और सम्मुख भुजाएँ (Opposite sides) हैं। सम्मुख भुजाओं के अन्य युग्म के नाम लिखिए।

∠A और  ∠C चतुर्भुज ABCD के सम्मुख कोण (Opposite angles) कहलाते हैं। इसी प्रकार,  ∠D और ∠B भी सम्मुख कोण हैं। स्वाभाविक है कि ∠A और  ∠B आसन्न कोण (adjacent angles) हैं। अब आप आसन्न कोणों के अन्य युग्म लिख सकते हैं।


प्रश्नावली 4.5

1. चतुर्भुज PQRS का एक रफ चित्र खींचिए। इसके विकर्ण खींचिए। इनके नाम लिखिए। क्या विकर्णों का प्रतिच्छेद बिंदु चतुर्भुज के अभ्यंतर में स्थित है या बहिर्भाग में स्थित है?



2. चतुर्भुज KLMN का एक रफ चित्र खींचिए। बताइए :

(a) सम्मुख भुजाओं के दो युग्म

(b) सम्मुख कोणों के दो युग्म

(c) आसन्न भुजाओं के दो युग्म

(d) आसन्न कोणों के दो युग्म

3. खोज कीजिए :

पट्टियाँ और उन्हें बाँधने की वस्तुएँ लेकर एक त्रिभुज बनाइए और एक चतुर्भुज बनाइए। त्रिभुज के किसी एक शीर्ष पर पट्टियों कोे अंदर की ओर दबाने का प्रयत्न कीजिए। यही कार्य चतुर्भुज के लिए भी कीजिए। क्या त्रिभुज में कोई परिवर्तन आया? क्या चतुर्भुज में कोई परिवर्तन हुआ? क्या त्रिभुज एक दृढ़ (rigid) आकृति है? क्या कारण है कि विद्युत टावरों (Electric Towers) जैसी संरचनाओं में त्रिभुजीय आकारों का प्रयोग किया जाता है, चतुर्भुजीय आकारों का नहीं?

4.13 वृत्त

आप अपने पर्यावरण में अनेक वस्तुएँ पाएँगे जो गोल होती हैं, जैसे–पहिया, चूड़ी, सिक्का इत्यादि। हम गोल आकृतियों का अनेक प्रकार से प्रयोग करते हैं। एक भारी इस्पात की ट्यूब को खींचने की अपेक्षा लुढ़काना अधिक सरल होता है।


वृत्त (circle) एक सरल बंद वक्र है जो एक बहुभुज नहीं है। इसके कुछ विशिष्ट गुण हैं।

Do_this

एक चूड़ी या कोई और गोल वस्तु को कागज़ पर रखिए और उसके चारों ओर पेंसिल घुमाकर एक वृत्ताकार आकृति बनाइए।

यदि आपको एक वृत्ताकार बाग बनाना हो, तो आप कैसे करेंगे?

Img20

दो डंडी और एक डोरी लीजिए। भूमि पर एक डंडी को गाड़ दीजिए। यह खींचे जाने वाले वृत्त का केन्द्र (centre) है। डोरी के प्रत्येक सिरे पर एक फंदा (loop) बनाकर दो फंदे प्राप्त कीजिए। एक फंदे को केंद्र वाली पहली डंडी में डाल दीजिए और दूसरे फंदे को दूसरी डंडी में डाल दीजिए। इन डंडियों को भूमि के ऊर्ध्वाधर रखिए। डोरी को तनी हुई रखते हुए, भूमि पर दूसरी डंडी को घुमाकर एक पथ बनाइए। आप एक वृत्त (circle) प्राप्त करेंगे।

स्वाभाविक है कि वृत्त पर स्थित प्रत्येक बिंदु केंद्र से बराबर (या समान) दूरी पर है।

वृत्त के भाग

संलग्न आकृति 4.24 में केेंद्र C वाला एक वृत्त है।

A, P, B, M वृत्त पर स्थित कुछ बिंदु हैं। आप


देखेंगे कि CA = CB = CP = CM है।

प्रत्येक रेखाखंड , , या वृत्त की एक त्रिज्या (radius) है। त्रिज्या वह रेखाखंड होता है जो वृत्त पर स्थित बिंदु को उसके केंद्र से जोड़ता है। इसी आकृति में और एेसी त्रिज्याएँ हैं कि बिंदु P, C, M एक ही रेखा में हैं। रेखाखंड वृत्त का एक व्यास (diameter) कहलाता है। क्या वृत्त का व्यास उसकी त्रिज्या का दोगुना है? हाँ। वृत्त पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड वृत्त की एक जीवा (chord) कहलाती है।

Img21

चित्र 4.24

इस प्रकार वृत्त की एक जीवा है। क्या भी वृत्त की जीवा है?

वृत्त के एक भाग को उसका चाप (arc) कहते हैं।

Img22

चित्र 4.25

यदि P और Q वृत्त पर स्थित बिंदु है, तो आपको चाप PQ प्राप्त होगा। हम इसे  Img33 से व्यक्त करते हैं (आकृति 4.25)।

किसी सरल बंद वक्र की ही तरह, आप एक वृत्त के अभ्यंतर और बहिर्भाग के बारे में सोच सकते हैं। वृत्तीय क्षेत्र का वह भाग जो दो त्रिज्याओं और संगत चाप से घिरकर बनता है एक त्रिज्यखंड (sector) कहलाता है। वृत्त की एक जीवा और संगत चाप से घिरा वृत्तीय क्षेत्र का भाग एक वृत्तखंड (segment of a circle) कहलाता है।

कोई भी वृत्ताकार वस्तु लीजिए। एक धागा लीजिए और उसे उस वस्तु के अनुदिश एक बार रखकर धागे की लंबाई को मापिए। धागे की यह लंबाई उस वस्तु के चारों ओर एक चक्कर लगाने में तय की गई दूरी है। यह लंबाई क्या व्यक्त करती है?

Ch-4_Fig-49

चित्र 4.26

वृत्त के अनुदिश चली गई दूरी उसकी परिधि (circumference) कहलाती है।


Do_this

  • एक वृत्ताकार शीट (sheet) लीजिए। इसे मोड़कर दो आधे भाग (halves) बनाइए। दबाकर मोड़ का निशान बनाइए और शीट को खोल लीजिए। क्या आप देखते हैं कि वृत्तीय क्षेत्र उसके व्यास द्वारा दो आधे (बराबर) भागों में विभाजित हो गया है? वृत्त का एक व्यास उसे दो बराबर भागों में विभाजित करता है। प्रत्येक भाग एक अर्धवृत्त (semicircle) कहलाता है।

एक अर्धवृत्त वृत्त का आधा भाग है। जिसमें वृत्त का व्यास (उसके अंत बिंदुओं को छोड़ कर) सम्मिलित नहीं हैं।




प्रश्नावली 4.6

1. संलग्न आकृति देखकर लिखिए :


(a) वृत्त का केंद्र

(b) तीन त्रिज्याएँ

(c) एक व्यास

(d) एक जीवा

(e) अभ्यंतर में दो बिंदु

(f) बहिर्भाग में एक बिंदु

(g) एक त्रिज्यखंड

(h) एक वृत्तखंड

2. (a) क्या वृत्त का प्रत्येक व्यास उसकी एक जीवा भी होता है?

(b) क्या वृत्त की प्रत्येक जीवा उसका एक व्यास भी होती है?

3. कोई वृत्त खींचिए और निम्न को अंकित कीजिए :

(a) उसका केंद्र (b) एक वृत्तखंड

(c) एक त्रिज्या (d) उसके अभ्यंतर में एक बिंदु

(e) एक व्यास (f) उसके बहिर्भाग में एक बिंदु

(g) एक त्रिज्यखंड (h) एक चाप

4. सत्य या असत्य बताइए :

(a) वृत्त के दो व्यास अवश्य ही प्रतिच्छेद करेंगे।

(b) वृत्त का केंद्र सदैव उसके अभ्यंतर में स्थित होता है।



हमने क्या चर्चा की?

1. बिंदु एक स्थिति निर्धारित करता है। इसे सामान्यत: अंग्रेज़ी के बड़े अक्षर से व्यक्त किया जाता है।

2. दो बिंदुओं को जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता एक रेखाखंड दर्शाता है। बिंदु A और B को मिलाने वाले रेखाखंड को से दर्शाते हैं। और दोनाें एक ही रेखाखंड को दर्शाते हैं।

3. जब एक रेखाखंड जैसे को दोनों तरफ़ बिना किसी अंत के विस्तृत किया जाता है तो हमें एक रेखा प्राप्त होती है। इसे  से व्यक्त किया जाता है। इसे कभी-कभी l जैसे अक्षर से भी व्यक्त किया जाता है।

4. दो विभिन्न रेखाएँ जब एक दूसरे को किसी एक बिंदु पर मिलती या काटती हैं तो वे प्रतिच्छेदी रेखाएँ कहलाती हैं।

5. दो रेखाएँ जब एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती अर्थात् नहीं काटती हैं, तो वे समांतर रेखाएँ कहलाती हैं।

6. किरण रेखा का एक भाग होता है जो एक बिंदु से प्रारंभ होकर एक दिशा में बिना किसी अंत के विस्तृत होता है।

7. कागज़ से बिना पेंसिल उठाए कोई भी आकृति (सीधी या टेढ़ी) को एक वक्र कह सकते हैं। इस संदर्भ में एक रेखा भी एक वक्र है।

8. यदि कोई वक्र स्वयं को न काटे तो वह सरल वक्र (Simple Curve) कहलाती है।

9. एक वक्र जिसके सिरे मिले हुए हों, बंद वक्र कहलाती है; अन्यथा उसे खुली वक्र कहते हैं।

10. रेखाखंडों से बनी बंद आकृति एक बहुभुज कहलाती है। यहाँ–

(i) बहुभुज को बनाने वाले रेखाखंड उसकी भुजाएँ कहलाती हैं।

(ii) कोई भी दो भुजाएँ जिनमें एक उभयनिष्ट अंत बिंदु हो, बहुभुज की आसन्न भुजाएँ कहलाती हैं।

(iii) दो भुजाएँ जहाँ मिलती हैं उस बिंदु को बहुभुज का शीर्ष (vertex) कहते हैं।

(iv) बहुभुज की एक ही भुजा के अंत बिंदु आसन्न शीर्ज़ (adjacent verticeे) कहलाते हैं।

(v) एेसे शीर्ष जो आसन्न नहीं हैं को मिलाने से बना रेखाखंड बहुभुज का विकर्ण (diagonal) कहलाता है।

11. उभयनिष्ट प्रारंभिक बिंदु वाली दो किरणों से एक कोण बनता है।

दो किरणें और कोण बनाती हैं (इसे भी लिख सकते हैं)।

कोण से संबंधित तीन क्षेत्र हैं :


कोण पर, कोण के अभ्यंतर और कोण के बहिर्भाग।

12. त्रिभुज (Triangle) एक तीन भुजाओं वाला बहुभुज होता है।

13. चार भुजाओं वाला बहुभुज एक चतुर्भुज (Quadrilateral) कहलाता है। इसको शीर्षों के एक क्रम के अनुसार नामांकित करना चाहिए।

किसी चतुर्भुज ABCD में, और तथा और सम्मुख भुजाओं के युग्म हैं। ∠A और  ∠C तथा  ∠B  और  ∠D सम्मुख कोणों के युग्म हैं।  ∠A और  ∠B आसन्न कोण हैं; एेसे ही आसन्न कोणों के तीन अन्य युग्म हैं।

14. एक निश्चित बिंदु से समान दूरी पर चक्कर लगाने से बना बिंदुओं का पथ वृत कहलाता है।

निश्चित बिंदु वृत्त का केंद्र कहलाता है, निश्चित दूरी (समान दूरी) त्रिज्या कहलाती है तथा वृत्त के चारों ओर चली गयी दूरी उसकी परिधि कहलाती है।

वृत्त पर किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड वृत्त की एक जीवा (chord) कहलाती है।

केंद्र से होकर जाने वाली जीवा वृत का व्यास कहलाती है। वृत्तीय क्षेत्र का वह भाग जो दो त्रिज्याओं और संगत चाप से घिरकर बनता है एक त्रिज्यखंड (sector) कहलाता है। वृत्त की एक जीवा और संगत चाप से घिरा वृत्तीय क्षेत्र का भाग एक वृत्तखंड (segment of a circle) कहलाता है। वृत्त के एक व्यास के दोनों अंत बिंदु उसे दो बराबर भागों में विभाजित करते हैं। प्रत्येक भाग एक अर्धवृत्त (semicircle) कहलाता है।



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