वस्तुओं को गिनना अब हमारे लिए सरल है। अब हम वस्तुओं को बड़ी संख्याओं में गिन सकते हैं, जैसे कि एक स्वूफल के विद्याथ्िार्यों की संख्या, और इन संख्याओं को संख्यांकों ;दनउमतंसेद्ध द्वारा निरूपित कर सकते हैं। हम उपयुक्त संख्या नामों ;दनउइमत दंउमेद्ध का प्रयोग करके बड़ी संख्याओं से संबंध्ित सूचनाएँ भी दे सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हम हमेशा से ही बड़ी राश्िायों के बारे में वातार्लाप या संकेतों द्वारा सूचना देना जानते थे। कइर् हशार वषर् पहले, लोग केवल छोटी संख्याओं के बारे में ही जानते थे। ध्ीरे - ध्ीरे उन्होंने बड़ी संख्याओं के साथ कायर् करना सीखा। उन्होंने बड़ी संख्याओं को संकेतों से व्यक्त करना भी सीखा। यह सब मानव प्राण्िायों के सामूहिक प्रयासों के कारण संभव हो सका। उनका रास्ता सरल नहीं था और उन्हें इस पूरे रास्ते में संघषर् करना पड़ा। वास्तव में, संपूणर् गण्िात के विकास को इसी रूप में समझा जा सकता है। जैसे - जैसे मानव ने उन्नति की, वैसे - वैसे गण्िात के विकास की आवश्यकता बढ़ती गइर् और इसके परिणामस्वरूप गण्िात में विकास और तेशी से हुआ। हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं और उनके बारे में अनेक बातें जानते हैं। संख्याएँ प्रत्यक्ष वस्तुओं को गिनने में हमारी सहायता करती हैं। संख्याएँ हमारी सहायता यह बताने में करती हैं कि वस्तुओं का कौन - सा संग्रह ;बवससमबजपवदद्ध बड़ा है और वस्तुओं को पहले, दूसरे इत्यादि व्रफम में व्यवस्िथत करने में भी सहायता करती हैं। संख्याओं का विभ्िान्न संदभो± में और अनेक प्रकारों से प्रयोग किया जाता है। विभ्िान्न स्िथतियों के बारे में सोचिए जहाँ हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं। भ्िान्न पाँच स्िथतियों को लिख्िाए जिनमें हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं। हम संख्याओं के साथ कायर् करने का आनंद प्राप्त कर चुके हैं। हम इनके साथ योग, व्यवकलन ;घटानेद्ध, गुणा और भाग की संवि्रफयाएँ भी कर चुके हैं। हम संख्या अनुव्रफमों ;ेमुनमदबमेद्ध में प्रतिरूपों ;चंजजमतदेद्ध को देख चुके हैं और संख्याओं के साथ अनेक 1ण्2ण्1 आप कितनी संख्याएँ बना सकते हैं? मान लीजिए हमारे पास अंक 7, 8, 3 और 5 हैं। हमें इन अंकों से चार अंकों वालीभ्िान्न - भ्िान्न ऐसी संख्याएँ बनाने को कहा जाता है कि एक संख्या में कोइर् भी अंक दोबारान आए ;अथार्त् किसी भी अंक की पुनरावृिा न होद्ध। इस प्रकार, संख्या 7835 तो बनाइर् जासकती है, परंतुु 7735 नहीं। इन 4 अंकों से जितनी संख्याएँ बना सकते हैं, बनाइए।आपको सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या कौन सी प्राप्त होती है? यहाँ सबसे बड़ीसंख्या 8753 है और सबसे छोटी संख्या 3578 है। दोनों में अंकों के व्रफम के बारे में सोचिए।क्या आप बता सकते हैं कि दिए गए अंकों से सबसे बड़ी संख्या किस प्रकार ज्ञात की जा सकती है? अपनी प्रवि्रफया को लिख्िाए। ;बद्ध अंक 9 सदैव सौ के सबसे बड़ी स्थान पर रहे। सबसे छोटी ;कद्ध अंक 1 सदैव हशार के सबसे बड़ी स्थान पर रहे। सबसे छोटी 4. मान लीजिए, आप दो अंक 2 और 3 लेते हैं। इन अंकों को समान बार दोहराते हुए, चार अंकांेकी संख्याएँ बनाइए। कौन सी संख्या सबसे बड़ी है? कौन सी संख्या सबसे छोटी है? आप ऐसी वुफल कितनी संख्याएँ बना सकते हैं? उचित व्रफम में खड़े होना: 1.इनमें कौन सबसे लंबा है? 2.इनमें कौन सबसे छोटा है? ;ंद्धक्या आप इन्हें इनकी लंबाइयों के बढ़ते हुए व्रफम में खड़ा कर सकते हैं? ;इद्धक्या आप इन्हें इनकी लंबाइयों के घटते हुए व्रफम में खड़ा कर सकते हैं? क्या खरीदें? सोहन और रीता एक अलमारी खरीदने गए। वहाँ कइर् अलमारियाँ उपलब्ध् थीं जिन पर उनके मूल्यों की पचिर्याँ लगी हुइर् थीं। आरोही व्रफम ;।ेबमदकपदह वतकमतद्ध: आरोही या बढ़ते हुए व्रफम का अथर् है सबसे छोटे से प्रारंभ कर सबसे बड़े तक व्यवस्िथत करना। अवरोही व्रफम ;क्मेबमदकपदह वतकमतद्ध: अवरोही व्रफम या घटते हुए व्रफम का अथर् है सबसे बड़े से प्रारंभ कर सबसे छोटे तक व्यवस्िथत करना। 1ण्2ण्2 अंकों का स्थानांतरण क्या आपने सोचा है कि यदि किसी संख्या के अंकों के स्थान परस्पर बदल दिए जाएँ तो क्या होगा? सोचिए कि 182 क्या बन जाएगा। यह 821 जैसी बड़ी हो सकती है अथवा 128 जैसी छोटी। यही प्रवि्रफया 391 के साथ करके देख्िाए। अब आगे दिए हुए प्रश्नों पर ध्यान दीजिए। तीन भ्िान्न - भ्िान्न अंकों की कोइर् संख्या लीजिए और सौ के स्थान के अंक को इकाइर् के स्थान के अंक से बदलिए। ;ंद्धक्या नयी संख्या पहली संख्या से बड़ी है? ;इद्धक्या नयी संख्या पहली संख्या से छोटी है? इस प्रकार बनने वाली संख्याओं को आरोही और अवरोही दोनों व्रफमों में लिख्िाए। पहले 795 पहली और तीसरी टाइलों को परस्पर बदलने पर बाद में 597 विभ्िान्न अंक लेकर यदि आप पहली और तीसरी टाइलों ;अंकोंद्ध को परस्पर बदलते हैं, तो किस स्िथति में संख्या बड़ी हो जाती है? किस स्िथति में संख्या छोटी हो जाती है? यह प्रवि्रफया चार अंकों की कोइर् संख्या लेकर दोहराइए। 1ण्2ण्3 संख्या 10000 का प्रवेश हम जानते हैं कि 99 से आगे दो अंकों वाली कोइर् संख्या नहीं है। 99 दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या है। इसी प्रकार 999 तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या है और चार अंकों की सबसे बड़ी संख्या 9999 है। यदि हम 9999 में 1 जोड़ें, तो हमें क्या प्राप्त होगा? इस प्रतिरूप को देख्िाए 9 ़ 1 त्र 10 त्र 10 × 1 99 ़ 1 त्र 100 त्र 10 × 10 999 ़ 1 त्र 1000 त्र 10 × 100 हम देखते हैं कि एक अंक की सबसे बड़ी संख्या ़ 1 त्र दो अंकों की सबसे छोटी संख्या, दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या ़ 1 त्र तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या, तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या ़ 1 त्र चार अंकों की सबसे छोटी संख्या। तब हम क्या यह नहीं सोच सकते कि चार अंकों की सबसे बड़ी संख्या में 1 जोड़ने पर, हमें पाँच अंकों की सबसे छोटी संख्या प्राप्त होगी, अथार्त् 9999 ़1 त्र 10000 होगा। इस प्रकार, 9999 से ठीक आगे आने वाली संख्या 10000 है। इसे दस हशार कहते हैं। साथ ही, हम सोच सकते हैं कि 10000 त्र 10 × 1000 होगा। 1ण्2ण्4 स्थानीय मान पर पुनदर्ृष्िट आप स्थानीय मान के बारे में बहुत पहले पढ़ चुके हैं तथा 78 जैसी दो अंकों की संख्या का प्रसारित रूप आपको अवश्य याद होगा। यह इस प्रकार है: 78 त्र 70 ़ 8 त्र 7 × 10 ़ 8 इसी प्रकार, आपको तीन अंकों की संख्या जैसे 278 का प्रसारित रूप भी याद होगा। यह इस प्रकार है: 278 त्र200 ़ 70 ़ 8 त्र 2 × 100 ़ 7 × 10 ़ 8 हम कहते हैं कि 8 इकाइर् के स्थान पर है, 7 दहाइर् के स्थान पर है और 2 सौ के स्थान पर है। बाद में, हमने इसी अवधरणा को चार अंकों की संख्या के लिए भी लागू कर लिया था। उदाहरणाथर्, 5278 का प्रसारित रूप है: 5278 त्र5000 ़ 200 ़ 70 ़ 8 त्र 5 × 1000 ़ 2 × 100 ़ 7 × 10 ़ 8 यहाँ, इकाइर् के स्थान पर 8, दहाइर् के स्थान पर 7, सौ के स्थान पर 2 और हशार के स्थान पर 5 है। संख्या 10000 ज्ञात हो जाने पर, हम इस अवधरणा को और आगे लागू कर सकते हैं। हम पाँच अंकों की संख्या जैसे 45278 को इस प्रकार लिख सकते हैं: 45278 त्र 4 ×10000 ़ 5 × 1000 ़ 2 × 100 ़ 7 × 10 ़ 8 यहाँ हम कहते हैं कि इकाइर् के स्थान पर 8, दहाइर् के स्थान पर 7, सौ के स्थान पर 2, हशार के स्थान पर 5 और दस हशार के स्थान पर 4 है। इस संख्या को पैंतालीस हशारदो सौ अठहत्तर पढ़ा जाता है। क्या अब आप 5 अंकों की सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्याएँ लिख सकते हैं?6 1ण्2ण्5 संख्या 100000 का प्रवेश पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या कौन सी है? पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या में 1 जोड़ने पर छः अंकों की सबसे छोटी संख्या प्राप्त होनी चाहिए। अथार्त् 99ए999 ़ 1 त्र 1ए00ए000 इस संख्या को एक लाख नाम दिया जाता है। एक लाख 99999 के ठीक आगे आने वाली संख्या है। साथ ही, 10ए000 × 10 त्र 1ए00ए000 अब हम 6 अंकों की संख्याएँ और उनके प्रसारित रूप लिख सकते हैं। जैसे: 2ए46ए853 त्र 2 × 1ए00ए000 ़ 4 × 10ए000 ़ 6 × 1ए000 ़ 8 × 100 ़ 5 × 10 ़3 × 1 इस संख्या में, इकाइर् के स्थान पर 3, दहाइर् के स्थान पर 5, सौ के स्थान पर 8, हशार के स्थान पर 6, दस हशार के स्थान पर 4 और लाख के स्थान पर 2 है। इस संख्या का नाम दो लाख छियालीस हशार आठ सौ तिरपन है। प्रतिरूप को पूरा कीजिए: 9 ़ 1 त्र10 99 ़ 1 त्र100 999 ़ 1 त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 9ए999 ़ 1 त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 99ए999 ़ 1 त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 9ए99ए999 ़ 1 त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 99ए99ए999 ़ 1 त्र 1ए00ए00ए000 याद रख्िाए: 1 सौ त्र 10 दहाइयाँ 1 हशार त्र 10 सौ त्र 100 दहाइयाँ 1 लाख त्र 100 हशार त्र 1000 सौ 1 करोड़ त्र 100 लाख त्र 10ए000 हशार अनेक विभ्िान्न स्िथतियों में हमारे सम्मुख बड़ी संख्याएँ आती हैं। उदाहरणाथर्, आपकी कक्षा के बच्चों की संख्या दो अंकों की होगी, जबकि आपके स्वूफल के वुफल बच्चों की संख्या 3 या 4 अंकों की होगी। पास के शहर में रहने वाले लोगों की संख्या और अध्िक बड़ी होगी। क्या यह 5 या 6 या 7 अंकों की संख्या है? क्या आप अपने राज्य में रहने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानते हैं? इस संख्या में कितने अंक होंगे? गेहूँ से भरी एक बोरी में दानों ;हतंपदेद्ध की संख्या क्या होगी? यह एक 5 अंकों की संख्या या 6 अंकों की संख्या या और बड़ी संख्या होगी? 1.2.7 बड़ी संख्याएँ पढ़ने और लिखने में एक सहायता निम्नलिख्िात संख्याओं को पढ़ने का प्रयत्न कीजिए: ;ंद्ध 279453 ;इद्ध 5035472 ;बद्ध152700375 ;कद्ध 40350894 क्या आपको वुफछ कठिनाइर् हुइर्? आपको ऐसा करने में क्या कठिनाइर् हुइर्? कभी - कभी बड़ी संख्याओं के पढ़ने और लिखने में वुफछ सूचक ;पदकपबंजवतेद्ध लगे होतेहैं। शगुफ्रता भी सूचकों का प्रयोग करती है जो उसे बड़ी संख्याओं को पढ़ने और लिखने में सहायता करते हैं। उसके ये सूचक, संख्याओं को प्रसारित रूप में लिखने में भी सहायक होते हैं। उदाहरणाथर्, वह 257 में इकाइर् के स्थान, दहाइर् के स्थान और सौ के स्थान पर अंकों को ज्ञात करके उन्हें सारणी में व्ए ज् और भ् के नीचे निम्न प्रकार से लिखती हैः भ्ज् व् प्रसारित रूप 2 5 7 2 × 100 ़ 5 × 10 ़ 7 × 1 इसी प्रकार, 2902 के लिए वह प्राप्त करती है: ज्ीभ् ज् व् प्रसारित रूप 2 9 0 2 2 ×1000 ़ 9 × 100 ़ 0 × 10 ़ 2 × 1 वह इस अवधरणा को लाखों तक की संख्याओं के लिए लागू करती है, जैसा कि नीचे दीहुइर् सारणी में देखा जा सकता है। ;हम इन्हें शगुफ्रता के खाने या बाॅक्स ;ठवगमेद्ध कहेंगेद्ध। ध्यान से देख्िाए और रिक्त स्थानों पर छूटी हुइर् प्रविष्िटयों को भरिए: इसी प्रकार, हम करोड़ों तक की संख्याओं को सम्िमलित कर सकते हैं, जैसा कि नीचे दिखाया गया है: संख्या ज्स्ं स्ं ज्ज्ी ज्ी भ् ज् व् संख्या नाम प्रसारित रूप 7ए34ए543 7 3 4 5 4 3 सात लाख चैंतीस हशार पाँच सौ तैंतालीस ................ 32ए75ए829 3 2 7 5 8 2 9 .................... 3 × 10ए00ए000 ़ 2 × 1ए00ए000 ़ 7 × 10ए000 ़ 5 × 1000 ़ 8 × 100 ़ 2 × 10 ़ 9×1 संख्या ज्ब्त ब्त ज्स्ं स्ं ज्ज्ी ज्ी भ् ज् व् संख्या नाम 2ए57ए34ए543 65ए32ए75ए829 .6 2 5 5 3 7 2 3 7 4 5 5 8 4 2 3 9 ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ पैंसठ करोड़ बत्तीसलाख पचहत्तर हशार आठ सौ उनतीस आप संख्याओं के प्रसारित रूप में लिखने के लिए अन्य तालिकाओं का प्रारूप भी बना सकते हैं। अल्प विरामों ;बवउउंेद्ध का प्रयोग आपने ध्यान दिया होगा कि उपरोक्त तालिकाओं में बड़ी संख्याओं के लिखने में हमने अल्प विरामों का प्रयोग किया है। बड़ी संख्याओं को पढ़ने और लिखने में अल्प विराम हमारी बड़ी सहायता करते हैं। संख्यांकन की भारतीय प(ति ;प्दकपंद ेलेजमउ व िदनउमतंजपवदद्ध में हम इकाइर्, दहाइर्, सौ ;सैकड़ाद्ध, हशारों का प्रयोग करते हैं तथा आगे लाखों और करोड़ों का प्रयोग करते हैं। हशारों, लाखों और करोड़ों को प्रदश्िार्त करने के लिए अल्प विरामों का प्रयोग किया जाता है। पहला अल्प विराम सौ के स्थान ;दाएँ से चलते हुए तीसरे अंकद्ध के बाद आता है और हशारों को प्रदश्िार्त करता है। दूसरा अल्प विराम अगले दो अंकों ;दाएँ से पाँचवें अंकद्ध के बाद आता है। यह दस हशार के स्थान के बाद आता है और लाखों को प्रदश्िार्त करता है। तीसरा अल्प विराम अन्य दो अंकों ;दाएँ से सातवें अंकद्ध के बाद आता है। यह दस लाख के स्थान के बाद आता है और करोड़ों को प्रदश्िार्त करता है। उदाहरणाथर्, 5ए 08ए 01ए 592 संख्याओं के नाम लिखते समय, हम अल्प3ए 32ए 40ए 781 विरामों का प्रयोग नहीं करते हैं।7ए 27ए 05ए 062 उफपर दी हुइर् संख्याओं को पढ़ने का प्रयत्न कीजिए। इसी रूप में पाँच और संख्याओं को लिख्िाए और पिफर उन्हें पढि़ए। अंतरार्ष्ट्रीय संख्यांकन प(ति संख्यांकन की अंतरार्ष्ट्रीय ;प्दजमतदंजपवदंसद्ध प(ति में, इकाइर्, दहाइर्, सौ, हशारों और आगे मिलियनों ;उपससपवदेद्ध का प्रयोग किया जाता है। हशारों और मिलियनों को प्रदश्िार्त करने के लिए अल्प विरामों का प्रयोग किया जाता है। अल्प विराम दाएँ से प्रत्येक तीसरे अंक के बाद आता है। पहला अल्प विराम हशारों को प्रदश्िार्त करता है और दूसरा अल्प विराम मिलियनों को प्रदश्िार्त करता है। उदाहरणाथर्, संख्या 50, 801, 592 को अंतरार्ष्ट्रीय प(ति में पचास मिलियन आठ सौ एक हशार पाँच सौ बानवे पढ़ा जाता है। भारतीय प(ति में, यह पाँच करोड़ आठ लाख एक हशार पाँच सौ बानवे है। कितने लाख से एक मिलियन बनता है? कितने मिलियन से एक करोड़ बनता है? तीन बड़ी संख्याओं को लीजिए। इन्हें भारतीय और अंतरार्ष्ट्रीय दोनों संख्यांकन प(तियों में व्यक्त कीजिए। इसमें आपकी रुचि हो सकती हैः सौ मिलियनों से बड़ी संख्याओं को व्यक्त करने के लिए, अंतरार्ष्ट्रीय प(ति में बिलियनों ;ठपससपवदेद्ध का प्रयोग किया जाता है। 1 बिलियन त्र 1000 मिलियन क्या आप जानते हैं? भारत की जनसंख्या में इस प्रकार वृि हुइर् है: 1921.1931 के अंतराल में करीब 27 मिलियनय 1931.1941 के अंतराल में करीब 37 मिलियनय 1941.1951 के अंतराल में करीब 44 मिलियनय 1951.1961 के अंतराल में करीब 78 मिलियनय 1991दृ2001 के अंतराल में कितनी वृि हुइर्। इस जानकारी को प्राप्त करने का प्रयत्न कीजिए। क्या आप जानते हैं कि इस समय भारत की जनसंख्या कितनी है? पता करने का प्रयत्न कीजिए। क्या आप संख्यांक लिखने में मेरी सहायता कर सकते हैं? एक संख्या के संख्यांक लिखने के लिए आप पुनः बक्सों का प्रयोग कर सकते हैंः ;ंद्ध बयालीस लाख सत्तर हशार आठ। ;इद्ध दो करोड़ नब्बे लाख पचपन हशार आठ सौ। ;बद्ध सात करोड़ साठ हशार पचपन। 1. रिक्त स्थानों को भरिए: ;ंद्ध 1 लाख त्र ऋऋऋऋऋऋऋ दस हशार ;इद्ध 1 मिलियन त्र ऋऋऋऋऋऋऋ सौ हशार ;बद्ध 1 करोड़ त्र ऋऋऋऋऋऋऋ दस लाख ;कद्ध 1 करोड़ त्र ऋऋऋऋऋऋऋ मिलियन ;मद्ध 1 मिलियन त्र ऋऋऋऋऋऋऋ लाख 2ण् सही स्थानों पर अल्प विराम लगाते हुए, संख्यांकों को लिख्िाए: ;ंद्ध तिहत्तर लाख पचहत्तर हशार तीन सौ सात ;इद्ध नौ करोड़ पाँच लाख इकतालीस ;बद्ध सात करोड़ बावन लाख इक्कीस हशार तीन सौ दो ;कद्ध अट्ठावन मिलियन चार सौ तेइर्स हशार दो सौ दो ;मद्ध तेइर्स लाख तीस हशार दस 3ण् उपयुक्त स्थानों पर अल्प विराम लगाइए और संख्या नामों को भारतीय संख्यांकन प(ति में लिख्िाए: ;ंद्ध 87595762 ;इद्ध 8546283 ;बद्ध 99900046 ;कद्ध 98432701 4ण् उपयुक्त स्थानों पर अल्प विराम लगाइए और संख्या नामों को अंतरार्ष्ट्रीय संख्यांकन प(ति में लिख्िाए: ;ंद्ध 78921092 ;इद्ध 7452283 ;बद्ध 99985102 ;कद्ध 48049831 1ण्3 व्यावहारिक प्रयोग में बड़ी संख्याएँ पिछली कक्षाओं में, हम पढ़ चुके हैं कि लंबाइर् के एक मात्राक ;या इकाइर्द्ध ;नदपजद्ध के लिए संेटीमीटर ;सेमीद्ध का प्रयोग किया जाता है। पेंसिल की लंबाइर्, अपनी पुस्तक या अभ्यास - पुस्ितका की चैड़ाइर् इत्यादि मापने के लिए हम सेंटीमीटर का प्रयोग करते हैं। हमारे रूलर पर सेंटीमीटर के चिह्न अंकित होते हैं। परंतुु, एक पेंसिल की मोटाइर् मापने के लिए हम पाते हैं कि सेंटीमीटर एक बड़ा मात्राक है। अतः पेंसिल की मोटाइर् दशार्ने के लिए, हम एक छोटे मात्राक मिलीमीटर ;मिमीद्ध का प्रयोग करते हैं। ;ंद्ध 10 मिलीमीटर त्र 1 सेंटीमीटर अपनी कक्षा के कमरे की लंबाइर् या स्कूल के भवन की लंबाइर् मापने के लिए, हम पाते हैं कि सेंटीमीटर एक बहुत छोटा मात्राक है। अतः इस कायर् के लिए हम मीटर का प्रयोग करते हैं। ;इद्ध 1 मीटर त्र 100 सेंटीमीटर त्र 1000 मिलीमीटर यदि हमें दो शहरों, जैसे - दिल्ली - मुंबइर् या दिल्ली - कोलकाता के बीच की दूरियाँ बतानी हों, तो मीटर भी एक बहुत छोटा मात्राक होता है। इसके लिए हम एक बड़े मात्राक किलोमीटर ;किमीद्ध का प्रयोग करते हैं। ;बद्ध 1 किलोमीटर त्र 1000 मीटर कितने मिलीमीटरों से 1 किलोमीटर बनता है? चूँकि 1 मीटर त्र 1000 मिमी, इसलिए 1 किमी त्र 1000 मी त्र 1000 × 1000 मिमी त्र 10ए00ए000 मिमी 1 किलोग्राम त्र 1000 ग्राम बीमार पड़ने पर जो दवाइर् की गोली ली जाती है, क्या उसके भार पर कभी आपने ध्यान दिया है? यह बहुत कम होता है। यह भार मिलीग्राम ;मिग्राद्ध में होता है। 1 ग्राम त्र 1000 मिलीग्राम पानी वाली एक साधरण बाल्टी की धरिता ;बंचंबपजलद्ध प्रायः कितनी होती है? यह प्रायः 20 लीटर होती है। धरिता को लीटर में दशार्या जाता है, परंतुु कभी - कभी हमें एक छोटे मात्राक की भी आवश्यकता पड़ती है। यह मात्राक मिलीलीटर है। बालों के तेल, सपफाइर् करने़वाले द्रव या एक साॅफ्रट डिªंक ;पेयद्ध की बोतलों पर जो मात्रा लिखी होती है वह उनके अंदर भरे द्रव की मात्रा को मिलीलीटर में दशार्ती है। 1 लीटर त्र 1000 मिलीलीटर ध्यान दीजिए कि इन सभी मात्राकों में, हम वुफछ सवर्निष्ठ शब्दों जैसे किलो, मिली और सेंटी को पाते हैं। आपको याद रखना चाहिए कि किलो का अथर् है हशार और यह इनमें सबसे बड़ा है और मिली का अथर् है हशारवाँ भाग और यह सबसे छोटा है। किलो 1000 गुना दशार्ता है, जबकि मिली हशारवाँ भाग दशार्ता है। अथार्त् 1 किलोग्राम त्र 1000 ग्राम और 1 ग्राम त्र 1000 मिलीग्राम है। इसी प्रकार, सेंटी सौवाँ भाग दशार्ता है। अथार्त् 1 मीटर त्र 100 सेंटीमीटर है। जोड़, घटा, गुणा और भाग पर हम अनेक प्रश्न कर चुके हैं। यहाँ हम ऐसे वुफछ और प्रश्न करेंगे। प्रारंभ करने से पहले निम्नलिख्िात उदाहरणों को देख्िाए तथा प्रश्नों के विश्लेषण का अनुसरण कीजिए और देख्िाए कि इन्हें किस प्रकार हल किया गया है। उदाहरण 1 रू वषर् 1991 में सुंदरनगर की जनसंख्या 2ए35ए471 थी। वषर् 2001 में पता चला कि जनसंख्या में 72ए958 की वृि हो गइर्। वषर् 2001 में इस शहर की जनसंख्या क्या थी? हल रू 2001 में इस शहर की जनसंख्या त्र 1991 में जनसंख्या ़ जनसंख्या में वृि त्र 2ए35ए471 ़ 72ए958 अब, 235471 ़ 72958 308429 सलमा ने इन संख्याओं को इस प्रकार जोड़ा: 235471 त्र 200000 ़ 35000 ़ 471 त्र 72958 त्र 72000 ़ 958 और पिफर 200000 ़ 107000 ़ 1429 त्र 308429 तथा मेरी ने इस जोड़ को इस प्रकार किया: 200000 ़ 35000 ़ 400 ़ 71 ़ 72000 ़ 900 ़ 58 त्र 308429 उत्तर: 2001 में शहर की जनसंख्या 3ए08ए429 थी। तीनों विध्ियाँ सही हैं। उदाहरण 2रूकिसी राज्य में, वषर् 2002 - 2003 में 7ए43ए000 साइकिलें बेची गईं। वषर् 2003 - 04 में बेची गइर् साइकिलों की संख्या8ए00ए100 थी।किस वषर् में अध्िक साइकिलें बेची गईं और कितनी अध्िक बेची गईं? हल रूस्पष्ट है कि संख्या 8ए00ए100 संख्या 7ए43ए000 से अध्िक है। अतः, उस राज्य में वषर् 2003 - 04 में वषर् 2002 - 03 से अिाक साइकिलें बेची गईं। अब, 800100 दृ 743000 057100 जोड़ कर उत्तर की जाँच कीजिए: 743000 ़ 57100 800100 ;उत्तर सही हैद्ध क्या आप इसे करने के और भी तरीके सोच सकते हैं?उत्तर: वषर् 2003 - 04 में 57ए100 साइकिलें अध्िक बेची गईं। उदाहरण 3रूएक शहर में समाचार पत्रा प्रतिदिन छपता है। एक प्रति में 12 पृष्ठ होते हैं। प्रतिदिन इस समाचार पत्रा की 11ए980 प्रतियाँ छपती हैं। प्रतिदिन सभी प्रतियों के लिए कितने पृष्ठ छपते हैं? हल रूप्रत्येक प्रति में 12 पृष्ठ हैं। अतः, 11ए980 प्रतियों में 12 × 11ए980 पृष्ठ होंगे। यह संख्या क्या होगी? 1ए00ए000 से अध्िक या कम। अब, 11980 ×12 23960 ़ 119800 143760 उत्तर: प्रतिदिन सभी प्रतियों के लिए 1ए43ए760 पृष्ठ छपते हैं।16 उदाहरण 4रू अभ्यास - पुस्ितकाएँ बनाने के लिए कागश की 75ए000 शीट ;ेीममजद्ध उपलब्ध् हैं। प्रत्येक शीट से अभ्यास - पुस्ितका के 8 पृष्ठ बनते हैं। प्रत्येक अभ्यास - पुस्ितका में 200 पृष्ठ हैं। उपलब्ध् कागश से कितनी अभ्यास - पुस्ितकाएँ बनाइर् जा सकती हैं? हल रू प्रत्येक शीट से 8 पृष्ठ बनते हैं। अतः, 75ए000 शीटों से 8 × 75ए000 पृष्ठ बनेंगे। 75000 ×8 600000 इस प्रकार, अभ्यास - पुस्ितका बनाने के लिए 6ए00ए000 पृष्ठ उपलब्ध् हैं। अबए 200 पृष्ठों से एक अभ्यास - पुस्ितका बनती है। अतःए 6ए00ए000 पृष्ठों से 6ए00ए000 झ् 200 अभ्यास - पुस्ितकाएँ बनेंगी। 3000 अबए 200 600000द्ध 600 0000 उत्तर: 3ए000 अभ्यास - पुस्ितकाएँ। प्रश्नावली 1ण्2 1ण् किसी स्कूल में चार दिन के लिए एक पुस्तक प्रदशर्नी आयोजित की गइर्। पहले, दूसरे, तीसरे और अंतिम दिन ख्िाड़की पर व्रफमशः 1094ए 1812ए 2050 और 2751 टिकट बेचे गए। इन चार दिनों में बेचे गए टिकटों की वुफल संख्या ज्ञात कीजिए। 2ण् शेखर एक प्रसि( वि्रफकेट ख्िालाड़ी है। वह टैस्ट मैचों में अब तक 6980 रन बना चुका है। वह 10ए000 रन पूरे करना चाहता है। उसे कितने और रनों की आवश्यकता है? 3ण् एक चुनाव में, सपफल प्रत्याशी ने 5ए77ए500 मत प्राप्त किए, जबकि उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी ने 3ए48ए700 मत प्राप्त किए। सपफल प्रत्याशी ने चुनाव कितने मतों से जीता? 4ण् कीतिर् बुक - स्टोर ने जून के प्रथम सप्ताह में 2ए85ए891 रु मूल्य की पुस्तवंेफ बेचीं। इसी माह के दूसरे सप्ताह में 4ए00ए768 रु मूल्य की पुस्तकें बेची गईं। दोनों सप्ताहों में वुफल मिलाकर कितनी बिव्रफी हुइर्? किस सप्ताह में बिव्रफी अध्िक हुइर् और कितनी अध्िक? 5ण् अंकों 6ए 2ए 7ए 4 और 3 में से प्रत्येक का केवल एक बार प्रयोग करते हुए बनाइर् जा सकने वाली सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याओं का अंतर ज्ञात कीजिए। 6ण् एक मशीन औसतन एक दिन में 2ए825 पेंच बनाती है। जनवरी 2006 में उस मशीन ने कितने पेंच बनाए? 7ण् एक व्यापारी के पास 78ए592 रु थे। उसने 40 रेडियो खरीदने का आॅडर्र दिया तथा प्रत्येक रेडियो का मूल्य 1200 रु था। इस खरीदारी के बाद उसके पास कितनी ध्नराश्िा शेष रह जाएगी? 8ण् एक विद्याथीर् ने 7236 को 56 के स्थान पर 65 से गुणा कर दिया। उसका उत्तर सही उत्तर से कितना अध्िक था? ;संकेत: दोनों गुणा करना आवश्यक नहींद्ध। 9ण् एक कमीश सीने के लिए 2 मी 15 सेमी कपड़े की आवश्यकता है। 40 मी कपड़े में से कितनी कमीशें सी जा सकती हैं और कितना कपड़ा शेष बच जाएगा? 10ण् दवाइयों को बक्सों में भरा गया है और ऐसे प्रत्येक बक्स का भार 4 किग्रा 500 ग्रा है। एक वैन ;टंदद्ध में जो 800 किग्रा से अध्िक का भार नहीं ले जा सकती, ऐसे कितने बक्से लादे जा सकते हैं? 11ण् एक स्कूल और किसी विद्याथीर् के घर के बीच की दूरी 1 किमी 875 मी है। प्रत्येक दिन यह दूरी दो बार तय की जाती है। 6 दिन में उस विद्याथीर् द्वारा तय की गइर् वुफल दूरी ज्ञात कीजिए। 12ण् एक बतर्न में 4 ली 500 मिली दही है। 25 मिली धरिता वाले कितने गिलासों में इसे भरा जा सकता है? 1ण्3ण्1 आकलन समाचार 1ण् भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक हाॅकी मैच को जिसे स्टेडियम में 51ए000 दशर्कों ने देखा और विश्व - भर में40 मिलियन लोगों ने टेलीविज़्ान पर देखा, हार - जीत का प़्ौफसला न हो सका। 2ण् भारत और बंगलादेश के तटवतीर्य क्षेत्रों में आए एक चव्रफवाती तूपफान में लगभग़2000 व्यक्ितयों की मृत्यु हो गइर् और 50000 से अध्िक घायल हुए। 3ण् रेलवे द्वारा प्रतिदिन63ए000 किलोमीटर से अध्िक रेलपथ पर 13 मिलियन से अिाक यात्राी यात्रा करते हैं। क्या हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि इन समाचारों में जितने व्यक्ित कहे गए हैं वहाँ ठीक उतने ही व्यक्ित थे? उदाहरणाथर्, ;1द्ध में, क्या स्टेडियम में ठीक 51ए000 दशर्क थे? अथवा क्या टेलीविज़्ान पर ठीक 40 मिलियन लोगों ने मैच देखा? स्पष्टतः, नहीं। शब्द लगभग स्वयं यह दशार्ता है कि व्यक्ितयों की संख्याएँ इन संख्याओं के निकटतम थीं। स्पष्ट रूप से, 51000 संख्याओं 50800 या 51300 में से कोइर् भी संख्या हो सकती है, परंतु 70000 नहीं होगी। इसी प्रकार, 40 मिलियन का अथर् 39 मिलियन से बहुत अध्िक और 41 मिलियन से वुफछ कम हो सकता18 है। परंतु निश्चय ही इसका अथर् 50 मिलियन नहीं है। इसी प्रकार, भारतीय रेलवे द्वारा यात्रा करने वाले यात्रिायों की वास्तविक संख्या दी हुइर् संख्या के बराबर नहीं हो सकती है, परंतुु इससे वुफछ अिाक या कम हो सकती है। इन उदाहरणों में दी गइर् संख्याओं को ठीक - ठीक गिनकर ;या यथाथर् रूप सेद्ध नहीं लिखा गया है, बल्िक ये उस संख्या के बारे में अनुमान देने वाले आकलन ;मेजपउंजमद्ध हैं। चचार् कीजिए कि इनसे क्या सुझाव मिलते हैं। हम सन्िनकट ;ंचचतवगपउंजमद्ध मान कहाँ निकालते हैं? अपने घर पर होने वाले एक बड़े उत्सव की कल्पना कीजिए। पहला काम जो आप करेंगे वह यह होगा कि आप यह पता करेंगे कि आपके घर पर लगभग कितने मेहमान आ सकते हैं। क्या आप मेहमानों की ठीक ;मगंबजद्ध संख्या का विचार लेकर प्रारंभ कर सकते हैं? व्यावहारिक रूप से यह असंभव है। हमारे देश के वित्त मंत्राी प्रति वषर् बजट पेश करते हैं। मंत्राी महोदय ‘श्िाक्षा’ मद के अंतगर्त वुफछ राश्िा का प्रावधन रखते हैं। क्या यह राश्िा यथाथर् रूप से सही होगी? यह उस वषर् देश में श्िाक्षा पर व्यय होने वाली आवश्यक ध्नराश्िा का केवल एक विवेकसंगत अच्छा अनुमान या आकलन ;मेजपउंजमद्ध हो सकता है। उन स्िथतियों के बारे में सोचिए जहाँ आपको ठीक - ठीक संख्याओं की आवश्यकता पड़ती है तथा इनकी उन स्िथतियों से तुलना कीजिए जहाँ आप केवल एक सन्िनकट आकलित ;मेजपउंजमकद्ध संख्या से ही काम चला लेते हैं। ऐसी स्िथतियों के तीन उदाहरण दीजिए। 1ण्3ण्2 सन्िनकटन द्वारा निकटतम दहाइर् तक आकलन निम्नलिख्िात चित्रा को देख्िाए: ;ंद्ध ज्ञात कीजिए कि कौन - से झंडे 270 की तुलना में 260 के अध्िक समीप हैं। ;इद्ध ज्ञात कीजिए कि कौन - से झंडे 260 की तुलना में 270 के अध्िक समीप हैं। पटरी की संख्याओं 10, 17 और 20 के स्थानों को देख्िाए। क्या संख्या 17 संख्या 10 के अध्िक निकट है या 20 के? 17 और 20 के बीच का रिक्त स्थान 17 और 10 के बीच के रिक्त स्थान की तुलना में कम है। इसलिए, हम 17 को निकटतम दहाइर् तक 20 के रूप में सन्िनकटित करते हैं। अब 12 को लीजिए। यह भी 10 और 20 के बीच स्िथत है। परंतुु 12 संख्या 20 की तुलना में 10 से अध्िक निकट है। इसलिए हम 12 को निकटतम दहाइर् तक 10 के रूप में सन्िनकटित करते हैं। आप 76 वफो निकटतम दहाइर् तक किस प्रकार सन्िनकटित करेंगे? क्या यह 80 नहीं है? हम देखते हैं कि संख्याएँ 1ए2ए3 और 4 संख्या 10 की तुलना में संख्या 0 के अध्िक निकट हैं। इसलिए हम इन्हें 0 के रूप में सन्िनकटित करते हैं। संख्याएँ 6ए 7ए 8 और 9 संख्या 10 के अध्िक निकट हैं। इसलिए हम इन्हें 10 के रूप में सन्िनकटित करते हैं। संख्या 5, संख्याओं 0 और 10 से बराबर की दूरी पर है। यह सामान्य परिपाटी है कि इसे 10 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। 1ण्3ण्3 सन्िनकटन द्वारा निकटतम सैकड़े तक आकलन संख्या 410 संख्या 400 के अध्िक निकट है या 500 के अध्िक निकट है? 410ए संख्या400 के अध्िक निकट ;समीपद्ध है, इसलिए इसे निकटतम सौ तक 400 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। संख्या 889ए संख्याओं 800 और 900 के बीच में है। यह 900 के अध्िक निकट है। इसलिए, इसे निकटतम सौ तक 900 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। संख्याएँ 1 से 49, संख्या 100 की तुलना में, संख्या 0 के अध्िक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 0 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। 51 से 99 तक की संख्याएँ 0 की तुलना में 100 से अध्िक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 100 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। संख्या 50 संख्याओं 0 और 100 से बराबर दूरी पर है। सामान्य परिपाटी के अनुसार, इसे 100 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। जाँच कीजिए कि निम्नलिख्िात सन्िनकटन ;सैकड़े तकद्ध सही हैं या नहीं: 841 800य 9537 9500य 49730 49700य 2546 2500य 286 300य 5750 5800य 168 200य 149 100य 9870 9800ण् उन्हें सही कीजिए जो गलत हैं। 1ण्3ण्4 सन्िनकटन द्वारा निकटतम हशार तक आकलन हम जानते हैं कि 1 से 499 तक की संख्याएँ 1000 की तुलना में 0 के अध्िक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 0 के रूप में सन्िनकटित करते हैं। 501 से 999 तक की संख्याएँ 0 की तुलना में 1000 के अध्िक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 1000 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। संख्या 500 को भी 1000 के रूप में सन्िनकटित किया जाता है। निम्नलिख्िात सन्िनकटनों की जाँच कीजिए और उन्हें सही कीजिए जो गलत हैं। 2573 3000य 53552 53000य 6404 6000य 65437 65000य 7805 7000य 3499 4000 1ण्3ण्5 संख्या संवि्रफयाओं के परिणामों का आकलन हम संख्याओं को किस प्रकार जोड़ते हैं? हम संख्याओं को एक एल्गोरिथ्म ;ंसहवतपजीउद्ध ;दी हुइर् विध्िद्ध का चरणब( रूप से प्रयोग करते हुए जोड़ते हैं। हम संख्याओं को यह ध्यान रखते हुए लिखते हैं कि एक ही स्थान ;इकाइर्, दहाइर्, सौ इत्यादिद्ध के अंक एक ही स्तंभ ;ब्वसनउदद्ध में रहें। उदाहरणाथर्, 3946 ़ 6579 ़ 2050 को निम्न रूप में लिखते हैं: ज्ज्ी ज्ी भ् ज् व् 3 9 4 6 6 5 7 9 ़ 2 0 5 0 पिफर हम इकाइर् वाले स्तंभ की संख्याओं को जोड़ते हैं। यदि आवश्यक हो, तो हम एक उचित संख्या को हासिल के रूप में दहाइर् के स्थान पर ले जाते हैं, जैसे कि इस स्िथति में है। पिफर हम इसी प्रकार दहाइर् के स्तंभ की संख्याओं को जोड़ते हैं और ऐसा आगे चलतारहता है। आप शेष प्रश्न को स्वयं पूणर् कर सकते हैं। इस प्रवि्रफया में स्पष्टतः समय लगता है।अनेक स्िथतियों में, हमें उत्तरों को अध्िक तीव्रता से ज्ञात करने की आवश्यकता होती है। उदाहरणाथर्, जब आप किसी मेले या बाज़्ाार में वुफछ ध्नराश्िा लेकर जाते हैं, तो आवफषर्क वस्तुओं की किस्मों और मात्राओं को देखकर वहाँ आप सोचते हैं कि सभी को खरीद लियाजाए। आपको तुरंत यह निणर्य लेने की आवश्यकता होती है कि आप किन - किन वस्तुओं कोखरीद सकते हैं। इसके लिए आपको आवश्यक ध्नराश्िा का आकलन करने की आवश्यकतापड़ती है, जो उन वस्तुओं के मूल्यों का योग होती है जिन्हें आप खरीदना चाहते हैं।किसी विशेष दिन, एक व्यापारी को दो स्थानों से ध्नराश्िा प्राप्त होनी है। एक स्थान सेप्राप्त होने वाली ध्नराश्िा 13,569 रु है और अन्य स्थान से प्राप्त होने वाली ध्नराश्िा 26,785रु है। उसे शाम तक किसी अन्य व्यक्ित को 37,000 रु देने हंै। वह संख्याओं को उनकेनिकटतम हशारों तक सन्िनकटित करता है और तुरंत कच्चा या रपफ ;तवनहीद्ध उत्तर निकाललेता है। वह खुश हो जाता है कि उसके पास पयार्प्त ध्नराश्िा है।क्या आप सोचते हैं कि उसके पास पयार्प्त ध्नराश्िा होगी? क्या आप बिना यथाथर् योग किए यह बता सकते हैं? शीला और मोहन को अपना मासिक बजट बनाना है उन्हें परिवहन, स्कूल की आवश्यकताओं, किराने का सामान, दूध्वे इन सभी पर होने वाले व्ययों का आकलन करते हैं औरमहीने में उन्हें घूमने भी जाना है और उपहार भी खरीदने हैं।जानकारी है तथा अन्य नियमित व्ययों की भी जानकारी है। इसऔर कपड़ों पर होने वाले अपने मासिक व्यय के बारे में भीउन्हें जोड़कर देखते हैं कि जो राश्िा उनके पास है वह पयार्प्त है या नहीं। क्या वे हशारों तक सन्िनकटित करेंगे, जैसा कि व्यापारी ने किया था? ऐसी पाँच और स्िथतियों के बारे में सोचिए और चचार् कीजिए, जहाँ हमें योग या अंतरोंका आकलन करना पड़ता है। क्या हम इन सभी में एक ही स्थान तक सन्िनकट मान ज्ञात करते हैं? जब आप संख्याओं के परिणामों का आकलन करते हैं, तो उसके लिए कोइर् निश्िचत नियमनहीं है। यह विध्ि इस पर निभर्र करती है कि परिशु(ता की वांछित मात्रा कितनी है, आकलनकितनी जल्दी चाहिए तथा सबसे महत्त्वपूणर् बात है कि अनुमानित उत्तर कितना अथर्पूणर् होगा। 1ण्3ण्6 योग अथवा अंतर का आकलन जैसा कि हमने उफपर देखा, हम एक संख्या को किसी भी स्थान तक सन्िनकटित करसकते हैं। व्यापारी ने ध्नराश्िा को निकटतम हशारों तक सन्िनकटित किया और संतुष्ट हो गयाकि उसके पास पयार्प्त ध्नराश्िा है। इसलिए जब आपको किसी योग अथवा अंतर का आकलनकरना है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि आप क्यों सन्िनकटित कर रहे हैं और इसलिएकिस स्थान तक आपको सन्िनकटित करना है। निम्नलिख्िात उदाहरणों को देख्िाए: उदाहरण 5रू 5ए290 ़ 17ए986 का आकलन कीजिए। हल रू हम देखते हैं कि 17ए986 झ 5ए290 है। हम निकटतम हशारों तक सन्िनकटित करते हैं। 17ए986 सन्िनकटित होता है 18ए000 ़5ए290 सन्िनकटित होता है ़ 5ए000 आकलित योग त्र 23ए000 क्या यह विध्ि काम करती है? आप यथाथर् उत्तर ज्ञात करके जाँच कर सकतेहैं कि यह आकलन विवेकपूणर् है या नहीं।उदाहरण 6रू 5ए673 दृ 436 का आकलन कीजिए। हल रू प्रारंभ में, हम हशारों तक सन्िनकटित करते हैं। ;क्यों?द्ध 5ए673 सन्िनकटित होता है 6ए000 दृ 436 सन्िनकटित होता है दृ0 आकलित अंतर त्र 6ए000 यह विवेकपूणर् आकलन नहीं है। यह विवेकपूणर् क्यों नहीं है? निकटतम22 आकलन प्राप्त करने के लिए, आइए प्रत्येक संख्या को निकटतम सौ तकसन्िनकटित करने का प्रयत्न करें। 5ए673 सन्िनकटित होता है 5ए700 दृ 436 सन्िनकटित होता है दृ 400 आकलित अंतर त्र 5ए300 यह एक अच्छा और अध्िक अथर्पूणर् आकलन है। 1ण्3ण्7 आकलन करना: गुणनपफल हम गुणनपफल का किस प्रकार आकलन करते हैं? 19 × 78 के लिए आकलन क्या है? स्पष्ट है कि यह गुणनपफल 2000 से कम है। क्यों? यदि हम 19 का निकटतम दहाइर् तक मान निकालें, तो हमें 20 प्राप्त होता है और पिफर 78 का निकटतम दहाइर् तक मान निकालें, तो 80 प्राप्त होता है। अब 20 × 80 त्र 1600 है। 63 × 182 को देख्िाए। यदि हम दोनों संख्याओं का निकटतम सौ तक का मान निकालें, तो हमें 100 × 200 त्र 20ए000 प्राप्त होता है। यह वास्तविक गुणनपफल से बहुत अध्िक है। इसलिए अब हम क्या करें? एक अध्िक विवेकपूणर् आकलन ज्ञात करने के लिए हम 63 और 182 दोनों को निकटतम दहाइर् तक सन्िनकटित करते हैं। ये व्रफमशः 60 और 180 हैं। इसे हम 60 × 180 अथार्त् 10ए800 प्राप्त करते हैं। यह एक अच्छा आकलन है, परंतु यह इतनी जल्दी प्राप्त नहीं होता है। यदि हम 63 को निकटतम दहाइर् तक 60 लें और 182 को निकटतम सौ तक 200 लें, तो हमें 60 × 200 त्र 12ए000 प्राप्त होता है, यह गुणनपफल का एक अच्छा आकलन है और जल्दी भी प्राप्त हो जाता है। सन्िनकटन का व्यापक नियम यह है कि प्रत्येक गुणा की जाने वाली संख्या को उसके सबसे बड़े स्थान तक सन्िनकटित कीजिए और सन्िनकटित संख्याओं को गुणा कर दीजिए। इस प्रकार, उपरोक्त उदाहरण में हमने 63 को दहाइर् तक और 182 को सौ तक सन्िनकटित किया है। अब उपरोक्त नियम का प्रयोग करके, 81 × 479 का आकलन कीजिए। 479 सन्िनकटित होता है 500 के ;सौ तक सन्िनकटितद्ध 81 सन्िनकटित होता है 80 के ;दहाइर् तक सन्िनकटितद्ध अतः, आकलित गुणनपफल त्र 500 × 80 त्र 40ए000 है। आपके लिए आकलनों का एक महत्त्वपूणर् उपयोग यह है कि आप अपने उत्तरों की जाँच कर सकते हैं। मान लीजिए आपने 37 × 1889 ज्ञात किया है, परंतुु आप निश्िचत नहीं हंै कि उत्तर सही है या नहीं। इस गुणनपफल का एक तुरंत ;जल्दीद्ध प्राप्त होने वाला और विवेकपूणर् आकलन 40 × 2000 त्र 80000 है। यदि आपका उत्तर 80ए000 के निकट है, तो संभवतःआपका उत्तर सही है। दूसरी ओर, यदि यह 8000 या 8ए00ए000 के निकट है, तो आपके गुणा करने में अवश्य ही वुफछ गलती हुइर् है। प्रश्नावली 1ण्3 1ण् व्यापक नियम का प्रयोग करते हुए, निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का आकलन कीजिए: ;ंद्ध 730 ़ 998 ;इद्ध 796 दृ 314 ;बद्ध 12ए904 ़ 2ए888 ;कद्ध 28ए292 दृ 21ए496 जोड़ने, घटाने और उनके परिणामों के आकलन के दस और उदाहरण बनाइए। 2ण् एक मोटेतौर पर ;त्वनहीद्ध आकलन ;सौ तक सन्िनकटनद्ध और एक निकटतम आकलन ;दस तक सन्िनकटनद्ध दीजिए: ;ंद्ध 439 ़ 334 ़ 4ए317 ;इद्ध 1ए08ए734 दृ 47ए599 ;बद्ध 8325 दृ 491 ;कद्ध 4ए89ए348 दृ 48ए365 ऐसे चार और उदाहरण बनाइए। 3ण् व्यापक नियम का प्रयोग करते हुए, निम्नलिख्िात गुणनपफलों का आकलन कीजिए: ;ंद्ध 578 × 161 ;इद्ध 5281 × 3491 ;बद्ध 1291 × 592 ;कद्ध 9250 × 29 ऐसे चार और उदाहरण बनाइए। 1ण्4 कोष्ठकों का प्रयोग सुमन ने बाशार से 6 अभ्यास - पुस्ितकाएँ खरीदीं जिनका मूल्य 10 रु प्रति पुस्ितका था। उसकी बहन सामा ने इसी प्रकार की 7 अभ्यास - पुस्ितकाएँ खरीदी। उनके द्वारा दी गइर् वुफल ध्नराश्िा ज्ञात कीजिए। सीमा ने ध्नराश्िा इस प्रकार मीरा ने ध्नराश्िा इस प्रकार परिकलित की परिकलित की 6 × 10 ़ 7 × 10 6 ़ 7 त्र13 त्र 60 ़ 70 और 13 × 10 उत्तर त्र 130 रु उत्तर त्र 130 रु आप देख सकते हैं कि सीमा और मीरा के उत्तर प्राप्त करने की विध्ियों में वुफछ अंतरहै, परंतु दोनों के उत्तर समान हैं और प्राप्त परिणाम सही है। क्यों? सीमा ने कहा कि मीरा ने 7 ़ 6 × 10 करके उत्तर प्राप्त किया है। अप्पू बताता है कि 7 ़ 6 × 10 त्र 7 ़ 60 त्र 67 है। लेकिन मीरा ने जो उत्तर प्राप्त किया है वह यह नहीं है। बस तीनों विद्याथीर् उलझन में पड़ जाते हैं। ऐसी स्िथतियों में उलझन दूर करने के लिए हम कोष्ठकों ;इतंबामजेद्ध का प्रयोग कर24 सकते हैं। हम कोष्ठकों का प्रयोग करके 6 और 7 को मिलाकर एक समूह बना सकते हैं, जो दशार्एगा कि इस समूह को एक अकेली संख्या समझा जाए। जिससे उत्तर इस प्रकार प्राप्त होता है: ;6 ़ 7द्ध × 10 त्र 13 × 10 यह वही है जो मीरा ने किया है। उसने पहले 6 और 7 को जोड़ा और पिफर प्राप्त योग को 10 से गुणा कर दिया। कोष्ठकों का प्रयोग यह स्पष्ट रूप में हमें बताता है कि पहले कोष्ठकों ; द्ध के अंदर दी हुइर् संख्याओं को एक अकेली संख्या के रूप में बदलिए और पिफर बाहर दी हुइर् संवि्रफया कीजिए जो यहाँ 10 से गुणा करना है। 1ण्4ण्1 कोष्ठकों का प्रसार ;खोलनाद्ध ;हटानाद्ध अब देख्िाए कि किस प्रकार कोष्ठकों के प्रयोग और उनके प्रसार ;खोलने या हटानेद्ध से, हमें अपने कायर् को व्रफमब( रूप से करने में सहायता मिलती है। क्या आप सोचते हैं कि कोष्ठकों का बिना प्रयोग किए जिन चरणों का हम पालन कर रहे हैं उन्हें समझ पाएँगे? ;पद्ध 7 × 109 त्र 7 × ;100 ़ 9द्ध त्र 7 × 100 ़ 7 × 9 त्र 700 ़ 63 त्र 763 ;पपद्ध102 × 103 त्र ;100 ़ 2द्ध × ;100 ़ 3द्ध त्र 100 × 100 ़ 2 × 100 ़ 100 × 3 ़ 2 × 3 त्र 10ए000 ़ 200 ़ 300 ़ 6 त्र 10ए000 ़ 500 ़ 6 त्र 10ए506 ;पपपद्ध17 × 109 त्र;10 ़ 7द्ध × 109 त्र 10 × 109 ़ 7 × 109 त्र 10 × ;100 ़ 9द्ध ़ 7 × ;100 ़ 9द्ध त्र 10 × 100 ़ 10 × 9 ़ 7 × 100 ़ 7 × 9 त्र 1000 ़ 90 ़ 700 ़ 63 त्र 1ए790 ़ 63 त्र 1ए853 1ण्5 रोमन संख्यांक अभी तक हम हिंदू - अरेबिक संख्यांकों ;भ्पदकप ।तंइपब छनउमतंसेद्ध की प(ति का ही प्रयोग करते रहे हैं। यह एकमात्रा संख्यांक प(ति नहीं है। संख्यांक लिखने की पुरानी प(तियों में से एक प(ति रोमन संख्यांकों ;त्वउंद छनउमतंसेद्ध की प(ति है। यह प(ति अभी भी अनेक स्थानों पर प्रयोग की जाती है। उदाहरणाथर्, हम घडि़यों में रोमन संख्यांकों का प्रयोग देख सकते हैं। इनका प्रयोग स्कूल की समय - सारणी में कक्षाओं के लिए भी किया जाता है, इत्यादि। ऐसे तीन और उदाहरण ज्ञात कीजिए जहाँ रोमन संख्यांकों का प्रयोग होता है। रोमन संख्यांक प्ए प्प्ए प्प्प्ए प्टए टए टप्ए टप्प्ए टप्प्प्ए प्ग्ए ग् व्रफमशः संख्याएँ 1ए2ए3ए4ए5ए6ए7ए8ए9 और 10 व्यक्त करते हैं। इसके बाद 11 के लिए ग्प् और 12 के लिए ग्प्प्एण्ण्ण् 20 के लिए ग्ग् का प्रयोग होता है। इस प(ति के वुफछ और संख्यांक संगत हिंदू - अरेबिक संख्यांकों के साथ इस प्रकार हैंः प्टग्स् ब्क्ड 1 5 10 50 100 500 1000 इस प(ति के नियम इस प्रकार हैं: ;ंद्ध यदि किसी संकेत की पुनरावृिा होती है, तो जितनी बार वह आता है उसका मान उतनी ही बार जोड़ दिया जाता है। अथार्त् प्प् बराबर 2 हैए ग्ग् बराबर 20 है और ग्ग्ग् बराबर 30 है। ;इद्ध कोइर् संकेत तीन से अध्िक बार नहीं आता है। परंतु संकेतोंटए स् और क् की कभी पुनरावृिा नहीं होती है। ;बद्ध यदि छोटे मान वाला कोइर् संकेत एक बड़े मान वाले संकेत के दाईं ओर जाता है, तो बड़े मान में छोटे मान को जोड़ दिया जाता है। जैसे: टप् त्र 5 ़ 1 त्र 6 ग्प्प्त्र 10 ़ 2 त्र 12 स्ग्ट त्र 50 ़ 10 ़ 5 त्र 65 ;कद्ध यदि छोटे मान वाला कोइर् संकेत बड़े मान वाले किसी संकेत के बाईं ओर आता है, तो बड़े मान में से छोटे मान को घटा दिया जाता है। जैसे: प्ट त्र 5 दृ 1 त्र 4 प्ग् त्र 10 दृ 1 त्र 9 ग्स् त्र 50 दृ 10 त्र 40 ग्ब् त्र 100 दृ 10 त्र 90 ;मद्ध संकेतों टए स् और क् को कभी भी बड़े मान वाले संकेत के बाईं ओर नहीं लिखा जाता है। अथार्त् टए स् और क् के मानों को कभी भी घटाया नहीं जाता है। संकेतप् को केवल ट और ग् में से घटाया जा सकता है। संकेत ग् को केवल स्ए ड और ब् में से ही घटाया जा सकता है। इन नियमों का पालन करने से, हमंे प्राप्त होता है: 1त्रप् 20 त्रग्ग् 2त्रप्प् 30 त्र ग्ग्ग् 3त्रप्प्प् 40 त्र ग्स् 4त्रप्ट 50 त्रस् 5त्रट 60 त्रस्ग् 6त्रटप् 70 त्र स्ग्ग् 7 त्र टप्प् 80 त्र स्ग्ग्ग् 8त्रटप्प्प् 90 त्र ग्ब् 9त्रप्ग् 100त्रब् 10 त्र ग् ;ंद्ध उपरोक्त सारणी में छूटी हुइर् संख्याओं को रोमन प(ति में लिख्िाए। ;इद्ध ग्ग्ग्ग्ए टग्ए प्ब्ए ग्टट ण्ण्ण् इत्यादि, नहीं लिखे जाते हैं। क्या आप बता सकते हैं क्यों? उदाहरण 7रूनिम्नलिख्िात को रोमन संख्यांकों में लिख्िाए: ;ंद्ध 69 ;इद्ध 98 हल रू;ंद्ध 69 त्र 60 ़ 9 ;इद्ध 98त्र 90 ़ 8 त्र ;50 ़ 10द्ध ़ 9 त्र ;100 दृ 10द्ध ़ 8 त्र स्ग् ़ प्ग् त्र ग्ब् ़ टप्प्प् इसलिए 69 त्र स्ग् प्ग् इसलिए 98 त्र ग्ब्टप्प्प् हमने क्या चचार् की? 1ण् दो संख्याओं में वही संख्या बड़ी होती है, जिसमें अंकों की संख्या अध्िक होती है। यदि दोनों में अंकों की संख्या समान है, तब हम उनके सबसे बाएँ स्िथत अंकों की तुलना करते हैं और जिस संख्या में यह अंक बड़ा होगा वही बड़ी भी होगी। अगर ये अंक भी समान हैं, तब हम इसी प्रकार अंकों की तुलना करते जाते हैं। 2ण् दिए गए अंकों से संख्या बनाते समय, ध्यान रखना चाहिए कि संख्या को किन प्रतिबंधों के साथ बनाना है। जैसे अंकों 7, 8, 3 व 5 से, किसी भी अंक को बिना दोहराए, चार अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या बनाने के लिए सबसे बडे़ अंक 8 को सबसे बाईं ओर रखना होगा और पिफर उससे छोटे अंक रखते जाएँगे। 3ण् चार अंकों की सबसे छोटी संख्या 1000 है। जिसका अथर् है कि तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या 999 होगी। पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या 10,000 ;दस हशारद्ध है, जिसका अथर् है कि चार अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या 9999 है। इसी प्रकार आगे, छः अंकों की छोटी से छोटी संख्या 1,00,000 ;एक लाखद्ध है जिसका अथर् है कि पाँच अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या 99999 है। यही व्रफम और बड़ी संख्याओं के लिए भी लागू होता है। 4ण् अल्पविरामों का प्रयोग, संख्याओं के लिखने तथा पढ़ने में सहायता करता है। भारतीय संख्यांकन प(ति में पहला अल्पविराम दाईं ओर से प्रारंभ कर तीन अंकों बाद और बाकी दो - दो अंकों बाद लगाए जाते हैं और ये अल्पविराम व्रफमशः हशार, लाख व करोड़ को अलग - अलग करते हैं। अंतरार्ष्ट्रीय संख्यांकन प(ति में अल्पविराम दाईं ओर से प्रारंभ कर तीन - तीन अंकों के बाद लगाए जाते हैं। तीन और छः अंकों के बाद अल्पविराम व्रफमशः हशार व मिलियन को अलग - अलग करते हैं। 5ण् दैनिक जीवन में अनेक स्थानों पर हमें बड़ी - बड़ी संख्याओं की भी आवश्यकता होती है। जैसे किसी विद्यालय में विद्याथ्िर्ायों की संख्या, गाँव या शहर की जनसंख्या बड़े - बड़े लेन - देन में ध्न तथा दो बड़े शहरों के बीच की दूरी। 6ण् याद रख्िाए किलो का अथर् है - हशार, सेंटी का अथर् है - सौवाँ भाग तथा मिली का अथर् है - हशारवाँ भाग, इस प्रकार 1 किलोमीटर त्र 1000 मीटरए 1 मीटर त्र 100 सेंटीमीटर त्र 1000 मिलीमीटर 7ण् अनेक स्िथतियों में हमें पूणर्तया सही - सही संख्याओं की आवश्यकता नहीं होती बल्िक एक उपयुक्त आकलन से ही काम चल सकता है। जैसे एक अंतरार्ष्ट्रीय हाॅकी मैच के दशर्कों की संख्या बताने के लिए कह देते हैं कि लगभग 51,000 दशर्कों ने मैच देखा। यहाँ हमें दशर्कों की सही संख्या की आवश्यकता नहीं है। 8ण् आकलन में किसी संख्या को एक वांछित मात्रा तक परिशु( करना होता है। जैसे 4117 का सन्िनकटन, हशारों में 4000 तथा सैकड़ों में 4100 किया जा सकता है, जो आवश्यकता पर निभर्र करता है। 9ण् अनेक स्िथतियों में हमें संख्याओं पर संवि्रफयाओं के पफलस्वरूप प्राप्त परिणामों का भी आकलन उपयोगी सि( होता है। ऐसे आकलनों में हम पहले प्रयोग होने वाली संख्याओं को सन्िनकटित कर शीघ्रता से परिणाम प्राप्त कर लेते हैं। 28

>Chapter_1>

अध्याय 1


अपनी संख्याओं की जानकारी



1.1 भूमिका


वस्तुओं को गिनना अब हमारे लिए सरल है। अब हम वस्तुओं को बड़ी संख्याओं में गिन सकते हैं, जैसे कि एक स्कूल के विद्यार्थियों की संख्या, और इन संख्याओं को संख्यांकों (numerals) द्वारा निरूपित कर सकते हैं। हम उपयुक्त संख्या नामों (number names) का प्रयोग करके बड़ी संख्याओं से संबंधित सूचनाएँ भी दे सकते हैं।

एेसा नहीं है कि हम हमेशा  से ही बड़ी राशियों  के बारे में वार्तालाप या संकेतों द्वारा सूचना देना जानते थे। कई हज़ार वर्ष पहले, लोग केवल छोटी संख्याओं के बारे में ही जानते थे। धीरे-धीरे उन्होंने बड़ी संख्याओं के साथ कार्य करना सीखा। उन्होंने बड़ी संख्याओं को संकेतों से व्यक्त करना भी सीखा। यह सब मानव प्राणियों के सामूहिक प्रयासों के कारण संभव हो सका। उनका रास्ता सरल नहीं था और उन्हें इस पूरे रास्ते में संघर्ष करना पड़ा। वास्तव में, संपूर्ण गणित के विकास को इसी रूप में समझा जा सकता है। जैसे-जैसे मानव ने उन्नति की, वैसे-वैसे गणित के विकास की आवशयकता बढ़ती गई और इसके परिणामस्वरूप गणित में विकास और तेज़ी से हुआ।

हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं और उनके बारे में अनेक बातें जानते हैं। संख्याएँ प्रत्यक्ष वस्तुओं को गिनने में हमारी सहायता करती हैं। संख्याएँ हमारी सहायता यह बताने में करती हैं कि वस्तुओं का कौन-सा संग्रह (collection) बड़ा है और वस्तुओं को पहले, दूसरे इत्यादि क्रम में व्यवस्थित करने में भी सहायता करती हैं। संख्याओं का विभिन्न संदर्भों में और अनेक प्रकार से प्रयोग किया जाता है। विभिन्न स्थितियों के बारे में सोचिए जहाँ हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं। भिन्न पाँच स्थितियों को लिखिए जिनमें हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं।

हम संख्याओं के साथ कार्य करने का आनंद प्राप्त कर चुके हैं। हम इनके साथ योग, व्यवकलन (घटाने), गुणा और भाग की संक्रियाएँ भी कर चुके हैं। हम संख्या अनुक्रमों (sequences) में प्रतिरूपों (patterns) को देख चुके हैं और संख्याओं के साथ अनेक रुचिपूर्ण बातें कर चुके हैं। इस अध्याय में, हम कुछ समीक्षा और पुनरावलोकन के साथ इन रुचिपूर्ण बातों पर और आगे कदम बढ़ाएँगे।


1.2 संख्याओं की तुलना


चूँकि हम संख्याओं की तुलना पहले भी बहुत कर चुके हैं, आइए देखें कि क्या हमें याद है कि दी गई संख्याओं में कौन सी संख्या सबसे बड़ी है?

(i) 92, 392, 4456, 89742 7

(ii) 1902, 1920, 9201, 9021, 92107

तो, हम यहाँ उत्तर जानते हैं।

अपने मित्रों में चर्चा कीजिए और पता कीजिए कि किसी संख्या समूह में वे सबसे बड़ी संख्या किस प्रकार ज्ञात करते हैं।

60

क्या आप तुरंत ज्ञात कर सकते हैं कि प्रत्येक पंक्ति में कौन सी संख्या सबसे बड़ी है और कौन सी संख्या सबसे छोटी है?

1. 382, 4972, 18, 59785, 750         उत्तर: 59785 सबसे बड़ी है और 18 सबसे छोटी है।

2. 1473, 89423, 100, 5000, 310      उत्तर: ____________________

3. 1834, 75284, 111, 2333, 450      उत्तर: ____________________

4. 2853, 7691, 9999, 12002, 124      उत्तर: ____________________

क्या यह सरल था? यह सरल क्यों था?

यहाँ हमने केवल अंकों की संख्या को देखकर ही उत्तर ज्ञात कर लिया। सबसे बड़ी संख्या में अधिकतम हज़ार थे और सबसे छोटी संख्या सैकड़ों (सौ) अथवा दहाइयों (दस) में थी।

इसी प्रकार के पाँच और प्रशन बनाइए और उन्हें हल करने के लिए अपने मित्रों को दीजिए।

हम 4875 और 3542 की तुलना किस प्रकार करते हैं? यहाँ यह अधिक कठिन नहीं है।

इन दोनों संख्याओं में अंकों की संख्या समान है। ये दोनों हज़ारों में हैं। परंतुु 4875 में हज़ार के स्थान पर अंक, 3542 के हज़ार के स्थान के अंक से बड़ा है। अत: 3542 से 4875 बड़ी है।

अब बताइए कि कौन सी संख्या बड़ी है; 4875 या 4542? यहाँ भी दोनों संख्याओं में अंकों की संख्या समान (बराबर) है। साथ ही, दोनों में हज़ार के स्थान पर समान अंक हैं। अब हम क्या करते हैं? हम अगले अंक की ओर बढ़ते हैं, अर्थात् सौ के स्थान पर आने वाले अंकों को देखते हैं। 4875 में सौवें स्थान वाला अंक 4542 के सौवें स्थान वाले अंक से बड़ा है। अत: संख्या 4542 से संख्या 4875 बड़ी है।

यदि दोनों संख्याओं में सौ के स्थान वाले अंक भी समान होते, तो हम क्या करते?

4875 और 4889 की तुलना कीजिए।

4875 और 4879 की तुलना कीजिए।

60

प्रत्येक समूह में सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याएँ ज्ञात कीजिए:

(a) 4536, 4892, 4370, 4452

(b) 15623, 15073, 15189, 15800

(c) 25286, 25245, 25270, 25210

(d) 6895, 23787, 24569, 24659

इसी प्रकार के पाँच प्रशन और बनाइए और हल करने के लिए अपने मित्रों को दीजिए।


1.2.1 आप कितनी संख्याएँ बना सकते हैं?

मान लीजिए हमारे पास अंक 7, 8, 3 और 5 हैं। हमें इन अंकों से चार अंकों वाली भिन्न-भिन्न एेसी संख्याएँ बनाने को कहा जाता है कि एक संख्या में कोई भी अंक दोबारा न आए (अर्थात् किसी भी अंक की पुनरावृत्ति न हो)। इस प्रकार, संख्या 7835 तो बनाई जा सकती है, परंतुु 7735 नहीं। इन 4 अंकों से जितनी संख्याएँ बना सकते हैं, बनाइए।

आपको सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या कौन सी प्राप्त होती है? यहाँ सबसे बड़ी संख्या 8753 है और सबसे छोटी संख्या 3578 है। दोनों में अंकों के क्रम के बारे में सोचिए। क्या आप बता सकते हैं कि दिए गए अंकों से सबसे बड़ी संख्या किस प्रकार ज्ञात की जा सकती है? अपनी प्रक्रिया को लिखिए।

60

1. बिना पुनरावृत्ति किए, दिए हुए अंकों का प्रयोग करके चार अंकों की सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याएँ बनाइए:

(a) 2, 8, 7, 4

(b) 9, 7, 4, 1

(c) 4, 7, 5, 0

(d) 1, 7, 6, 2

(e) 5, 4, 0, 3

(संकेत : 0754 तीन अंकों की संख्या है।)

2. किसी एक अंक का दो बार प्रयोग करके चार अंकों की सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याएँ बनाइए:

(a) 3, 8, 7

(b) 9, 0, 5

(c) 0, 4, 9

(d) 8, 5, 1

(संकेत : प्रत्येक स्थिति में सोचिए कि आप किस अंक का दो बार प्रयोग करेंगे।)

3. दिए हुए प्रतिबंधों के साथ, किन्हीं चार अंकों का प्रयोग करके, 4 अंकों की सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याएँ बनाइए:

(a) अंक 7 सदैव इकाई के स्थान पर रहे।  

17

 सबसे बड़ी

सबसे छोटी

(ध्यान दीजिए, अंक 0 से संख्या प्रारंभ नहीं हो सकती। क्यों?)

(b) अंक 4 सदैव दहाई के  स्थान पर रहे।  26

 सबसे बड़ी

सबसे छोटी

(c) अंक 9 सदैव सौ के स्थान पर रहे।  27


(d) अंक 1 सदैव हज़ार के 

स्थान पर रहे। 

4. मान लीजिए, आप दो अंक 2 और 3 लेते हैं।इन अंकों को समान बार दोहराते हुए, चार अंकों की संख्याएँ बनाइए। कौन सी संख्या सबसे बड़ी है? कौन सी संख्या सबसे छोटी है? आप एेसी कुल कितनी संख्याएँ बना सकते हैं?

उचित क्रम में खड़े होना:

1. इनमें कौन सबसे लंबा है?

2. इनमें कौन सबसे छोटा है?

(a) क्या आप इन्हें इनकी लंबाइयों के बढ़ते हुए क्रम में खड़ा कर सकते हैं?

(b) क्या आप इन्हें इनकी लंबाइयों के घटते हुए क्रम में खड़ा कर सकते हैं?

28

क्या खरीदें?

सोहन और रीता एक अलमारी खरीदने गए। वहाँ कई अलमारियाँ उपलब्ध थीं जिन पर उनके मूल्यों की पर्चियाँ लगी हुई थीं।

29

(a) क्या आप इनके मूल्यों को बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कर सकते हैं?

(b) क्या आप इनके मूल्यों को घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कर सकते हैं?

इसी प्रकार की पाँच और स्थितियों को सोचिए जहाँ आप तीन या अधिक राशियों की तुलना करते हैं।

आरोही क्रम (Ascending order): आरोही या बढ़ते हुए क्रम का अर्थ है सबसे छोटे से प्रारंभ कर सबसे बड़े तक व्यवस्थित करना।

अवरोही क्रम (Descending order): अवरोही क्रम या घटते हुए क्रम का अर्थ है सबसे बड़े से प्रारंभ कर सबसे छोटे तक व्यवस्थित करना।

60

1. निम्नलिखित संख्याओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(a) 847, 9754, 8320, 571

(b) 9801, 25751, 36501, 38802

2. निम्नलिखित संख्याओं को अवरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(a) 5000, 7500, 85400, 7861

(b) 1971, 45321, 88715, 92547

आरोही/अवरोही क्रमों के एेसे ही दस उदाहरण और बनाइए और उन्हें आरोही/अवरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।


1.2.2 अंकों का स्थानांतरण

क्या आपने सोचा है कि यदि किसी संख्या के अंकों के स्थान परस्पर बदल दिए जाएँ तो क्या होगा?

सोचिए कि 182 क्या बन जाएगा। यह 821 जैसी बड़ी हो सकती है अथवा 128 जैसी छोटी। यही प्रक्रिया 391 के साथ करके देखिए।

अब आगे दिए हुए प्रशनों पर ध्यान दीजिए। तीन भिन्न-भिन्न अंकों की कोई संख्या लीजिए और सौ के स्थान के अंक को इकाई के स्थान के अंक से बदलिए।

(a) क्या नयी संख्या पहली संख्या से बड़ी है?

(b) क्या नयी संख्या पहली संख्या से छोटी है?

इस प्रकार बनने वाली संख्याओं को आरोही और अवरोही दोनों क्रमों में लिखिए।

Img01

विभिन्न अंक लेकर यदि आप पहली और तीसरी टाइलों (अंकों) को परस्पर बदलते हैं, तो

किस स्थिति में संख्या बड़ी हो जाती है?

किस स्थिति में संख्या छोटी हो जाती है?

यह प्रक्रिया चार अंकों की कोई संख्या लेकर दोहराइए।


1.2.3 संख्या 10000 का प्रवेशा

हम जानते हैं कि 99 से आगे दो अंकों वाली कोई संख्या नहीं है। 99 दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या है। इसी प्रकार 999 तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या है और चार अंकों की सबसे बड़ी संख्या 9999 है। यदि हम 9999 में 1 जोड़ें, तो हमें क्या प्राप्त होगा?

इस प्रतिरूप को देखिए

9 + 1 = 10 = 10 × 1

99 + 1 = 100 = 10 × 10

999 + 1 = 1000 = 10 × 100

हम देखते हैं कि

एक अंक की सबसे बड़ी संख्या + 1 = दो अंकों की सबसे छोटी संख्या,

दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या + 1 = तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या,

तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या + 1 = चार अंकों की सबसे छोटी संख्या।

तब हम क्या यह नहीं सोच सकते कि चार अंकों की सबसे बड़ी संख्या में 1 जोड़ने पर, हमें पाँच अंकों की सबसे छोटी संख्या प्राप्त होगी, अर्थात् 9999 +1= 10000 होगा। इस प्रकार, 9999 से ठीक आगे आने वाली संख्या 10000 है। इसे दस हज़ार कहते हैं। साथ ही, हम सोच सकते हैं कि 10000 = 10 × 1000 होगा।


1.2.4 स्थानीय मान पर पुनदृष्टि

आप स्थानीय मान के बारे में बहुत पहले पढ़ चुके हैं तथा 78 जैसी दो अंकों की संख्या का प्रसारित रूप आपको अवशय याद होगा। यह इस प्रकार है:

78 = 70 + 8

= 7 × 10 + 8

इसी प्रकार, आपको तीन अंकों की संख्या जैसे 278 का प्रसारित रूप भी याद होगा। यह इस प्रकार है:

278 = 200 + 70 + 8

= 2 × 100 + 7 × 10 + 8

हम कहते हैं कि 8 इकाई के स्थान पर है, 7 दहाई के स्थान पर है और 2 सौ के स्थान पर है।

बाद में, हमने इसी अवधारणा को चार अंकों की संख्या के लिए भी लागू कर लिया था।

उदाहरणार्थ, 5278 का प्रसारित रूप है:

5278 = 5000 + 200 + 70 + 8

= 5 × 1000 + 2 × 100 + 7 × 10 + 8

यहाँ, इकाई के स्थान पर 8, दहाई के स्थान पर 7, सौ के स्थान पर 2 और हज़ार के स्थान पर 5 है।

संख्या 10000 ज्ञात हो जाने पर, हम इस अवधारणा को और आगे लागू कर सकते हैं। हम पाँच अंकों की संख्या जैसे 45278 को इस प्रकार लिख सकते हैं:

45278 = 4 × 10000 + 5 × 1000 + 2 × 100 + 7 × 10 + 8

यहाँ हम कहते हैं कि इकाई के स्थान पर 8, दहाई के स्थान पर 7, सौ के स्थान पर 2, हज़ार के स्थान पर 5 और दस हज़ार के स्थान पर 4 है। इस संख्या को पैंतालीस हज़ार दो सौ अठहत्तर पढ़ा जाता है। क्या अब आप 5 अंकों की सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्याएँ लिख सकते हैं?

60

संख्याओं को पढ़िए और जहाँ-जहाँ रिक्त स्थान हैं उनके नाम लिखिए और प्रसारित रूप में लिखिए:

31


पाँच अंकों वाली पाँच और संख्याएँ लिखिए, उन्हें पढ़िए और उनको प्रसारित रूप में लिखिए।


1.2.5 संख्या 100000 का प्रवेशा

पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या कौन सी है? पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या में 1 जोड़ने पर छ: अंकों की सबसे छोटी संख्या प्राप्त होनी चाहिए। अर्थात्

99,999 + 1 = 1,00,000

इस संख्या को एक लाख नाम दिया जाता है। एक लाख 99999 के ठीक आगे आने वाली संख्या है।

साथ ही, 10,000 × 10 = 1,00,000

अब हम 6 अंकों की संख्याएँ और उनके प्रसारित रूप लिख सकते हैं। जैसे:

2,46,853 = 2 × 1,00,000 + 4 × 10,000 + 6 × 1,000 + 8 × 100+ 5 × 10 +3 × 1

इस संख्या में, इकाई के स्थान पर 3, दहाई के स्थान पर 5, सौ के स्थान पर 8, हज़ार के स्थान पर 6, दस हज़ार के स्थान पर 4 और लाख के स्थान पर 2 है। इस संख्या का नाम दो लाख छियालीस हज़ार आठ सौ तिरपन है।

60

संख्याओं को पढ़कर उन्हें रिक्त स्थानों में प्रसारित रूप में और उनके नाम लिखिए:

32


1.2.6 बड़ी संख्याएँ

यदि हम 6 अंकों की सबसे बड़ी संख्या में 1 जोड़ें, तो हमें 7 अंकों की सबसे छोटी संख्या प्राप्त होती है, जिसे दस लाख कहते हैं।

6 अंकों की सबसे बड़ी संख्या और 7 अंकों की सबसे छोटी संख्या लिखिए।

7 अंकों की सबसे बड़ी संख्या और 8 अंकों की सबसे छोटी संख्या लिखिए।
8 अंकों की सबसे छोटी संख्या
एक करोड़ है।

प्रतिरूप को पूरा कीजिए:33

9 + 1 = 10

99 + 1 = 100

999 + 1 = _______

9,999 + 1 = _______

99,999 + 1 = _______

9,99,999 + 1 = _______

99,99,999 + 1 = 1,00,00,000



1. 10 – 1 क्या है?

2. 100 – 1 क्या है?

3. 10,000 – 1 क्या है?

4. 1,00,000 – 1 क्या है?

5. 1,00,00,000 – 1 क्या है?

(संकेत: प्रतिरूप को पहचानिए)

अनेक विभिन्न स्थितियों में हमारे सम्मुख बड़ी संख्याएँ आती हैं। उदाहरणार्थ, आपकी कक्षा के बच्चों की संख्या दो अंकों की होगी, जबकि आपके स्कूल के कुल बच्चों की संख्या 3 या 4 अंकों की होगी। पास के शहर में रहने वाले लोगों की संख्या और अधिक बड़ी होगी।

क्या यह 5 या 6 या 7 अंकों की संख्या है? क्या आप अपने राज्य में रहने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानते हैं?

इस संख्या में कितने अंक होंगे?

गेहूँ से भरी एक बोरी में दानों (grains) की संख्या क्या होगी? यह एक 5 अंकों की संख्या या 6 अंकों की संख्या या और बड़ी संख्या होगी?

1. एेसे पाँच उदाहरण दीजिए जहाँ गिनी जाने वाली वस्तुओं की संख्या 6 अंकों की संख्या से अधिक होगी।

2. 6 अंकों की सबसे बड़ी संख्या से प्रारंभ करते हुए, अवरोही क्रम में पिछली पाँच संख्याएँ लिखिए।

3. 8 अंकों की सबसे छोटी संख्या से प्रारंभ करते हुए, आरोही क्रम में अगली पाँच संख्याएँ लिखिए और उन्हें पढ़िए।


1.2.7 बड़ी संख्याएँ पढ़ने और लिखने में एक सहायता

निम्नलिखित संख्याओं को पढ़ने का प्रयत्न कीजिए:

(a) 279453

(b) 5035472

(c) 152700375

(d) 40350894

क्या आपको कुछ कठिनाई हुई?

आपको एेसा करने में क्या कठिनाई हुई?

कभी-कभी बड़ी संख्याओं के पढ़ने और लिखने में कुछ सूचक (indicators) लगे होते हैं। शगुफ्ता भी सूचकों का प्रयोग करती है जो उसे बड़ी संख्याओं को पढ़ने और लिखने में सहायता करते हैं। उसके ये सूचक, संख्याओं को प्रसारित रूप में लिखने में भी सहायक होते हैं। उदाहरणार्थ, वह 257 में इकाई के स्थान, दहाई के स्थान और सौ के स्थान पर अंकों को ज्ञात करके उन्हें सारणी में O, T और H के नीचे निम्न प्रकार से लिखती है:

H   T   O       प्रसारित रूप

2    5   7         2 × 100 + 5 × 10 + 7 × 1

इसी प्रकार, 2902 के लिए वह प्राप्त करती है:

Th   H   T   O        प्रसारित रूप

  2    9    0   2          2 × 1000 + 9 × 100 + 0 × 10 + 2 × 1

वह इस अवधारणा को लाखों तक की संख्याओं के लिए लागू करती है, जैसा कि नीचे दी हुई सारणी में देखा जा सकता है। (हम इन्हें शगुफ्ता के खाने या बॉक्स (Boxes) कहेंगे)। ध्यान से देखिए और रिक्त स्थानों पर छूटी हुई प्रविज़्टियों को भरिए:

35


इसी प्रकार, हम करोड़ों तक की संख्याओं को सम्मिलित कर सकते हैं, जैसा कि नीचे दिखाया गया है:

36

आप संख्याओं को प्रसारित रूप में लिखने के लिए अन्य तालिकाओं का प्रारूप भी बना सकते हैं।

अल्प विरामों (commas) का प्रयोग

आपने ध्यान दिया होगा कि उपरोक्त तालिकाओं में बड़ी संख्याओं के लिखने में हमने अल्प विरामों का प्रयोग किया है। बड़ी संख्याओं को पढ़ने और लिखने में अल्प विराम हमारी बड़ी सहायता करते हैं। संख्यांकन की भारतीय पद्धति (Indian system of numeration) में हम इकाई, दहाई, सौ (सैकड़ा), हज़ारों का प्रयोग करते हैं तथा आगे लाखों और करोड़ों का प्रयोग करते हैं। हज़ारों, लाखों और करोड़ों को प्रदर्शित करने के लिए अल्प विरामों का प्रयोग किया जाता है। पहला अल्प विराम सौ के स्थान (दाएँ से चलते हुए तीसरे अंक) के बाद आता है और हज़ारों को प्रदर्शित करता है। दूसरा अल्प विराम अगले दो अंकों (दाएँ से पाँचवें अंक) के बाद आता है। यह दस हज़ार के स्थान के बाद आता है और लाखों को प्रदर्शित  करता है। तीसरा अल्प विराम अन्य दो अंकों (दाएँ से सातवें अंक) के बाद आता है। यह दस लाख के स्थान के बाद आता है और करोड़ों को प्रदर्शित करता है।

उदाहरणार्थ,

5, 08, 01, 592

3, 32, 40, 781

7, 27, 05, 062

संख्याओं के नाम लिखते समय, हम अल्प विरामों का प्रयोग नहीं करते हैं।

ऊपर दी हुई संख्याओं को पढ़ने का प्रयत्न कीजिए। इसी रूप में पाँच और संख्याओं को लिखिए और फिर उन्हें पढ़िए।

अंतराष्ट्रीय संख्यांकन पद्धति

संख्यांकन की अंतराष्ट्रीय (International) पद्धति में, इकाई, दहाई, सौ, हज़ारों और आगे मिलियनों (millions) का प्रयोग किया जाता है। हज़ारों और मिलियनों को प्रदर्शित करने के लिए अल्प विरामों का प्रयोग किया जाता है। अल्प विराम दाएँ से प्रत्येक तीसरे अंक के बाद आता है। पहला अल्प विराम हज़ारों को प्रदर्शित करता है और दूसरा अल्प विराम मिलियनों को प्रदर्शित करता है। उदाहरणार्थ, संख्या 50, 801, 592 को अंतराष्ट्रीय पद्धति में पचास मिलियन आठ सौ एक हज़ार पाँच सौ बानवे पढ़ा जाता है। भारतीय पद्धति में, यह पाँच करोड़ आठ लाख एक हज़ार पाँच सौ बानवे है।

कितने लाख से एक मिलियन बनता है?

कितने मिलियन से एक करोड़ बनता है?

तीन बड़ी संख्याओं को लीजिए। इन्हें भारतीय और अंतराष्ट्रीय दोनों संख्यांकन पद्धतियों में व्यक्त कीजिए।

इसमें आपकी रुचि हो सकती है:

सौ मिलियनों से बड़ी संख्याओं को व्यक्त करने के लिए, अंतराष्ट्रीय पद्धति में बिलियनों (Billions) का प्रयोग किया जाता है।

1 बिलियन = 1000 मिलियन

1991–2001 के अंतराल में कितनी वृद्धि हुई। इस जानकारी को प्राप्त करने का प्रयत्न कीजिए। क्या आप जानते हैं कि इस समय भारत की जनसंख्या कितनी है? पता करने का प्रयत्न कीजिए।

क्या आप जानते हैं?

भारत की जनसंख्या में इस प्रकार वृद्धि हुई है:

1921-1931 के अंतराल में करीब 27 मिलियन;

1931-1941 के अंतराल में करीब 37 मिलियन;

1941-1951 के अंतराल में करीब 44 मिलियन;

1951-1961 के अंतराल में करीब 78 मिलियन;




1. इन संख्याओं को बक्सों का प्रयोग करते हुए लिखिए और फिर प्रसारित रूप में लिखिए:

(i) 475320

(ii) 9847215

(iii) 97645310

(iv) 30458094

(a) इनमें कौन-सी संख्या सबसे छोटी है?

(b) इनमें कौन-सी संख्या सबसे बड़ी है?

(c) इन संख्याओं को आरोही और अवरोही क्रमों में व्यवस्थित कीजिए।

2. निम्नलिखित संख्याओं को देखिए:

(i) 527864

(ii) 95432

(iii) 18950049

(iv) 70002509

(a) इन संख्याओं को बक्सों का प्रयोग करते हुए लिखिए और फिर अल्प विरामों का प्रयोग करते हुए लिखिए।

(b) इन संख्याओं को आरोही और अवरोही क्रमों में व्यवस्थित कीजिए।

3. एेसी ही तीन और बड़ी संख्याएँ लेकर इस प्रक्रिया को दोहराइए।

क्या आप संख्यांक लिखने में मेरी सहायता कर सकते हैं?

एक संख्या के संख्यांक लिखने के लिए आप पुन: बक्सों का प्रयोग कर सकते हैं:

(a) बयालीस लाख सत्तर हज़ार आठ।

(b) दो करोड़ नब्बे लाख पचपन हज़ार आठ सौ।

(c) सात करोड़ साठ हज़ार पचपन।


1. आपके पास 4, 5, 6, 0, 7 और 8 के अंक हैं। इनका प्रयोग करते हुए 6 अंकों की पाँच संख्याएँ बनाइए।

(a) पढ़ने में सरलता के लिए अल्प विराम लगाइए।

(b) इन्हें आरोही और अवरोही क्रमों में व्यवस्थित कीजिए।

2. अंकों 4, 5, 6, 7, 8 और 9 का प्रयोग कर 8 अंकों की कोई तीन संख्याएँ बनाइए। पढ़ने में सरलता के लिए, अल्प विरामों का प्रयोग कीजिए।

3. अंकों 3, 0 और 4 का प्रयोग कर 6 अंकों की पाँच संख्याएँ बनाइए। अल्प विरामों का भी प्रयोग कीजिए।



प्रशनावली 1.1

1. रिक्त स्थानों को भरिए:

(a) 1 लाख = _______ दस हज़ार

(b) 1 मिलियन = _______ सौ हज़ार

(c) 1 करोड़ = _______ दस लाख

(d) 1 करोड़ = _______ मिलियन

(e) 1 मिलियन = _______ लाख

2. सही स्थानों पर अल्प विराम लगाते हुए, संख्यांकों को लिखिए:

(a) तिहत्तर लाख पचहत्तर हज़ार तीन सौ सात

(b) नौ करोड़ पाँच लाख इकतालीस

(c) सात करोड़ बावन लाख इक्कीस हज़ार तीन सौ दो

(d) अट्ठावन मिलियन चार सौ तेईस हज़ार दो सौ दो

(e) तेईस लाख तीस हज़ार दस

3. उपयुक्त स्थानों पर अल्प विराम लगाइए और संख्या नामों को भारतीय संख्यांकन पद्धति में लिखिए:

(a) 87595762

(b) 8546283

(c) 99900046

(d) 98432701

4. उपयुक्त स्थानों पर अल्प विराम लगाइए और संख्या नामों को अंतराष्ट्रीय संख्यांकन पद्धति में लिखिए:

(a) 78921092

(b) 7452283

(c) 99985102

(d) 48049831


1.3 व्यावहारिक प्रयोग में बड़ी संख्याएँ

पिछली कक्षाओं में, हम पढ़ चुके हैं कि लंबाई के एक मात्रक (या इकाई) (unit) के लिए सेंटीमीटर (सेमी) का प्रयोग किया जाता है। पेंसिल की लंबाई, अपनी पुस्तक या अभ्यास-पुस्तिका की चौड़ाई इत्यादि मापने के लिए हम सेंटीमीटर का प्रयोग करते हैं। हमारे रूलर पर सेंटीमीटर के चिह्न अंकित होते हैं। परंतुु, एक पेंसिल की मोटाई मापने के लिए हम पाते हैं कि सेंटीमीटर एक बड़ा मात्रक है। अत: पेंसिल की मोटाई दर्शाने के लिए, हम एक छोटे मात्रक मिलीमीटर (मिमी) का प्रयोग करते हैं।

(a) 10 मिलीमीटर = 1 सेंटीमीटर

अपनी कक्षा के कमरे की लंबाई या स्कूल के भवन की लंबाई मापने के लिए, हम पाते हैं कि सेंटीमीटर एक बहुत छोटा मात्रक है। अत: इस कार्य के लिए हम मीटर का प्रयोग करते हैं।

(b) 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर = 1000 मिलीमीटर

यदि हमें दो शहरों, जैसे – दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-कोलकाता के बीच की दूरियाँ बतानी हों, तो मीटर भी एक बहुत छोटा मात्रक होता है। इसके लिए हम एक बड़े मात्रक किलोमीटर (किमी) का प्रयोग करते हैं।

(c) 1 किलोमीटर = 1000 मीटर

कितने मिलीमीटरों से 1 किलोमीटर बनता है?

चूँकि 1 मीटर = 1000 मिमी, इसलिए

1 किमी = 1000 मी = 1000 × 1000 मिमी = 10,00,000 मिमी


1. कितने सेंटीमीटरों से एक किलोमीटर बनता है?

2. भारत के पाँच बड़े शहरों के नाम लिखिए। उनकी जनसंख्या पता कीजिए। इन शहरों में से प्रत्येक युग्म शहरों के बीच की दूरी भी किलोमीटरों में पता कीजिए।

हम बाज़ार में गेहूँ या चावल खरीदने जाते हैं। हम इन्हें किलोग्राम (किग्रा) में खरीदते हैं। परंतु अदरक या मिर्च जैसी वस्तुओं की हमें अधिक मात्रा में आवशयकता नहीं होती है। हम इन्हें ग्राम (ग्रा) में खरीदते हैं। हम जानते हैं कि

1 किलोग्राम = 1000 ग्राम

बीमार पड़ने पर जो दवाई की गोली ली जाती है, क्या उसके भार पर कभी आपने ध्यान दिया है? यह बहुत कम होता है। यह भार मिलीग्राम (मिग्रा) में होता है।

1 ग्राम = 1000 मिलीग्राम



1. कितने मिलीग्राम से एक किलोग्राम बनता है?

2. दवाई की गोलियों के एक बक्से में 2,00,000 गोलियाँ हैं, जिनमें प्रत्येक का भार 20 मिग्रा है। इस बक्से में रखी सभी गोलियों का कुल भार ग्रामों में कितना है और किलोग्रामों में कितना है?

पानी वाली एक साधारण बाल्टी की धारिता (capacity) प्राय: कितनी होती है? यह प्राय: 20 लीटर होती है। धारिता को लीटर में दर्शाया जाता है, परंतुु कभी-कभी हमें एक छोटे मात्रक की भी आवशयकता पड़ती है। यह मात्रक मिलीलीटर है। बालों के तेल, सफ़ाई करने वाले द्रव या एक सॉफ्ट ड्रिंक (पेय) की बोतलों पर जो मात्रा लिखी होती है वह उनके अंदर भरे द्रव की मात्रा को मिलीलीटर में दर्शाती है।

1 लीटर = 1000 मिलीलीटर

ध्यान दीजिए कि इन सभी मात्रकों में, हम कुछ सर्वनिज़्ठ शब्दों जैसे किलो, मिली और सेंटी को पाते हैं। आपको याद रखना चाहिए कि किलो का अर्थ है हज़ार और यह इनमें सबसे बड़ा है और मिली का अर्थ है हज़ारवाँ भाग और यह सबसे छोटा है। किलो 1000 गुना दर्शाता है, जबकि मिली हज़ारवाँ भाग दर्शाता है। अर्थात् 1 किलोग्राम = 1000 ग्राम और 1 ग्राम = 1000 मिलीग्राम है।

इसी प्रकार, सेंटी सौवाँ भाग दर्शाता है। अर्थात् 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर है।


एक बस ने अपनी यात्रा प्रारंभ की और 60 किमी/घंटा की चाल से विभिन्न स्थानों पर पहुँची। इस यात्रा को नीचे दर्शाया गया है।

(i) A से D तक जाने में बस द्वारा तय की गई कुल दूरी ज्ञात कीजिए।38

(ii) D से G तक जाने में बस द्वारा तय की गई कुल दूरी ज्ञात कीजिए।

(iii) बस द्वारा तय की गई कुल दूरी ज्ञात कीजिए।

(iv) क्या आप C से D तक और D से E तक की दूरियों का अंतर ज्ञात कर सकते हैं?

(v) बस द्वारा निम्नलिखित यात्रा में लिया समय ज्ञात कीजिए:

(a) A से B तक

(b) C से D तक

 (c) E से G तक

(d) कुल यात्रा

39


40

(a) क्या आप रमन द्वारा पिछले वर्ष बेचे गए सेब और संतरों का कुल भार ज्ञात कर
सकते हैं?

सेबों का भार = __________ किग्रा

संतरों का भार = __________ किग्रा

अत:, कुल भार = __________ किग्रा + _____ किग्रा = _____किग्रा

उत्तर: संतरों और सेबों का कुल भार = _________

(b) क्या आप रमन द्वारा सेबों को बेचने से प्राप्त कुल धनराशि ज्ञात कर सकते हैं?

(c) क्या आप रमन द्वारा सेबों और संतरों को बेचने से प्राप्त कुल धनराशि ज्ञात कर
सकते हैं?

(d) रमन द्वारा प्रत्येक वस्तु के बेचने से प्राप्त धनराशियों को दर्शाने वाली एक सारणी बनाइए। धनराशियों की इन प्रविज़्टियों को अवरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए। वह कौन-सी वस्तु है जिससे रमन को सबसे अधिक धनराशि प्राप्त हुई? यह धनराशि क्या है?

जोड़, घटा, गुणा और भाग पर हम अनेक प्रशन कर चुके हैं। यहाँ हम एेसे कुछ और प्रशन करेंगे। प्रारंभ करने से पहले निम्नलिखित उदाहरणों को देखिए तथा प्रशनों के विशलेज़ण का अनुसरण कीजिए और देखिए कि इन्हें किस प्रकार हल किया गया है।

उदाहरण 1 : वर्ष 1991 में सुंदरनगर की जनसंख्या 2,35,471 थी। वर्ष 2001 में पता चला कि जनसंख्या में 72,958 की वृद्धि हो गई। वर्ष 2001 में इस शहर की जनसंख्या क्या थी?

हल : 2001 में इस शहर की जनसंख्या

= 1991 में जनसंख्या + जनसंख्या में वृद्धि

= 2,35,471 + 72,958

अब,

    235471

+ 72958


  308429


सलमा ने इन संख्याओं को इस प्रकार जोड़ा : 235471 = 200000 +

35000 + 471, 72958 = 72000 + 958 और फिर 200000 + 107000 + 1429 = 308429 तथा मेरी ने इस जोड़ को इस प्रकार किया: 200000 + 35000 + 400 + 71 + 72000 + 900 + 58 = 308429

उत्तर: 2001 में शहर की जनसंख्या 3,08,429 थी।

तीनों विधियाँ सही हैं।

उदाहरण 2 : किसी राज्य में, वर्ष 2002-2003 में 7,43,000 साइकिलें बेची गईं। वर्ष 2003-04 में बेची गई साइकिलों की संख्या 8,00,100 थी। किस वर्ष में अधिक साइकिलें बेची गईं और कितनी अधिक बेची गईं?

हल : स्पष्ट है कि संख्या 8,00,100 संख्या 7,43,000 से अधिक है। अत:, उस 18
राज्य में वर्ष 2003-04 में वर्ष 2002-03 से अधिक साइकिलें बेची गईं। अब,

    800100

- 743000


    057100


जोड़ कर उत्तर की जाँच कीजिए:

   743000

+ 57100


   800100 (उत्तर सही है)


क्या आप इसे करने के और भी तरीके सोच सकते हैं?

उत्तर: वर्ष 2003-04 में 57,100 साइकिलें अधिक बेची गईं।

उदाहरण 3 : एक शहर में समाचार पत्र प्रतिदिन छपता है। एक प्रति में 12 पृष्ट होते हैं। प्रतिदिन इस समाचार पत्र की 11,980 प्रतियाँ छपती हैं। प्रतिदिन सभी प्रतियों के लिए कितने पृष्ट छपते हैं?

हल : प्रत्येक प्रति में 12 पृष्ट हैं।

अत:, 11,980 प्रतियों में 12 × 11,980 पृष्ट होंगे।

यह संख्या क्या होगी? 1,00,000 से अधिक या कम।

अब,

   11980

     × 12


   23960

 + 119800


  143760


उत्तर: प्रतिदिन सभी प्रतियों के लिए 1,43,760 पृष्ट छपते हैं।

उदाहरण 4 : अभ्यास-पुस्तिकाएँ बनाने के लिए कागज़ की 75,000 शीट (sheet) उपलब्ध हैं। प्रत्येक शीट से अभ्यास-पुस्तिका के 8 पृष्ट बनते हैं। प्रत्येक अभ्यास-पुस्तिका में 200 पृष्ट हैं। उपलब्ध कागज़ से कितनी अभ्यास-पुस्तिकाएँ बनाई जा सकती हैं?

हल : प्रत्येक शीट से 8 पृष्ट बनते हैं।

अत:, 75,000 शीटों से 8 × 75,000
पृष्ट बनेंगे।

75000

     × 8


600000


इस प्रकार, अभ्यास-पुस्तिका बनाने के लिए 6,00,000 पृष्ट उपलब्ध हैं।

अब, 200 पृष्टों से एक अभ्यास-पुस्तिका बनती है।

अत:, 6,00,000 पृष्टों से 6,00,000 ÷ 200 अभ्यास-पुस्तिकाएँ बनेंगी।

43

उत्तर: 3,000 अभ्यास-पुस्तिकाएँ।


प्रशनावली 1.2

1. किसी स्कूल में चार दिन के लिए एक पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की गई। पहले, दूसरे, तीसरे और अंतिम दिन खिड़की पर क्रमशा: 1094, 1812, 2050 और 2751 टिकट बेचे गए। इन चार दिनों में बेचे गए टिकटों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए।

2. शेखर एक प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी है। वह टैस्ट मैचों में अब तक 6980 रन बना चुका है। वह 10,000 रन पूरे करना चाहता है। उसे कितने और रनों की आवशयकता है?

3. एक चुनाव में, सफल प्रत्याशाी ने 5,77,500 मत प्राप्त किए, जबकि उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी ने 3,48,700 मत प्राप्त किए। सफल प्रत्याशाी ने चुनाव कितने मतों से जीता?

4. कीर्ति बुक-स्टोर ने जून के प्रथम सप्ताह में 2,85,891 मूल्य की पुस्तकें बेचीं। इसी माह के दूसरे सप्ताह में 4,00,768 मूल्य की पुस्तकें बेची गईं। दोनों सप्ताहों में कुल मिलाकर कितनी बिक्री हुई? किस सप्ताह में बिक्री अधिक हुई और कितनी अधिक?

5. अंकों 6, 2, 7, 4 और 3 में से प्रत्येक का केवल एक बार प्रयोग करते हुए, पाँच अंकों की बनाई जा सकने वाली सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्याओं का अंतर ज्ञात कीजिए।

6. एक मशाीन औसतन एक दिन में 2,825 पेंच बनाती है। जनवरी 2006 में उस मशाीन ने कितने पेंच बनाए?

7. एक व्यापारी के पास 78,592 थे। उसने 40 रेडियो खरीदने का अॉर्डर दिया तथा प्रत्येक रेडियो का मूल्य 1200 था। इस खरीदारी के बाद उसके पास कितनी धनराशि शेज़ रह जाएगी?

8. एक विद्यार्थी ने 7236 को 56 के स्थान पर 65 से गुणा कर दिया। उसका उत्तर सही उत्तर से कितना अधिक था? (संकेत: दोनों गुणा करना आवशयक नहीं)।

9. एक कमीज़ सीने के लिए 2 मी 15 सेमी कपड़े की आवशयकता है। 40 मी कपड़े में से कितनी कमीज़ें सी जा सकती हैं और कितना कपड़ा शेष बच जाएगा?

10. दवाइयों को बक्सों में भरा गया है और एेसे प्रत्येक बक्स का भार 4 किग्रा 500ग्रा है। एक वैन (Van) में जो 800 किग्रा से अधिक का भार नहीं ले जा सकती, एेसे कितने बक्से लादे जा सकते हैं?

11. एक स्कूल और किसी विद्यार्थी के घर के बीच की दूरी 1 किमी 875 मी है। प्रत्येक दिन यह दूरी दो बार तय की जाती है। 6 दिन में उस विद्यार्थी द्वारा तय की गई कुल दूरी ज्ञात कीजिए।

12. एक बर्तन में 4 ली 500 मिली दही है। 25 मिली धारिता वाले कितने गिलासों में इसे भरा जा सकता है?


1.3.1 आकलन

समाचार

1. भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक हॉकी मैच को जिसे स्टेडियम में लगभग 51,000 दर्शकों   ने देखा और विशव-भर में 40 मिलियन लोगों ने टेलीविज़न पर देखा, हार-जीत का फ़ैसला न हो सका।

2. भारत और बंगलादेशा के तटवर्तीय क्षेत्रों में आए एक चक्रवाती तूफ़ान में लगभग 2000 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई और 50000 से अधिक घायल हुए।

3. रेलवे द्वारा प्रतिदिन 63,000 किलोमीटर से अधिक रेलपथ पर 13 मिलियन से अधिक यात्री यात्रा करते हैं।

क्या हम विशवास के साथ कह सकते हैं कि इन समाचारों में जितने व्यक्ति कहे गए हैं वहाँ ठीक उतने ही व्यक्ति थे? उदाहरणार्थ,

(1) में, क्या स्टेडियम में ठीक 51,000 दर्शक  थे? अथवा

Page-16.jpgक्या टेलीविज़न पर ठीक 40 मिलियन लोगों ने मैच देखा?


स्पष्टत:,  नहीं। शब्द लगभग स्वयं यह दर्शाता है कि व्यक्तियों की संख्याएँ इन संख्याओं के निकटतम थीं। स्पष्ट रूप से, 51000 संख्याओं 50800 या 51300 में से कोई भी संख्या हो सकती है, परंतु 70000 नहीं होगी। इसी प्रकार, 40 मिलियन का अर्थ 39 मिलियन से बहुत अधिक और 41 मिलियन से कुछ कम हो सकता है। परंतु निशचय ही इसका अर्थ 50 मिलियन नहीं है।

इसी प्रकार, भारतीय रेलवे द्वारा यात्रा करने वाले यात्रियों की वास्तविक संख्या दी हुई संख्या के बराबर नहीं हो सकती है, परंतुु इससे कुछ अधिक या कम हो सकती है।

इन उदाहरणों में दी गई संख्याओं को ठीक-ठीक गिनकर (या यथार्थ रूप से) नहीं लिखा गया है, बल्कि ये उस संख्या के बारे में अनुमान देने वाले आकलन (estimate) हैं।

चर्चा कीजिए कि इनसे क्या सुझाव मिलते हैं।

हम सन्निकट (approximate) मान कहाँ निकालते हैं? अपने घर पर होने वाले एक बड़े उत्सव की कल्पना कीजिए। पहला काम जो आप करेंगे वह यह होगा कि आप यह पता करेंगे कि आपके घर पर लगभग कितने मेहमान आ सकते हैं। क्या आप मेहमानों की ठीक (exact) संख्या का विचार लेकर प्रारंभ कर सकते हैं? व्यावहारिक रूप से यह असंभव है।

हमारे देशा के वित्त मंत्री प्रति वर्ष बजट पेशा करते हैं। मंत्री महोदय ‘शिक्षा’ मद के अंतर्गत कुछ राεशा का प्रावधान रखते हैं। क्या यह राεशा यथार्थ रूप से सही होगी? यह उस वर्ष देशा में शिक्षा  पर व्यय होने वाली आवशयक धनराशि का केवल एक विवेकसंगत अच्छा अनुमान या आकलन (estimate) हो सकता है।

उन स्थितियों के बारे में सोचिए जहाँ आपको ठीक-ठीक संख्याओं की आवशयकता पड़ती है तथा इनकी उन स्थितियों से तुलना कीजिए जहाँ आप केवल एक सन्निकट आकलित (estimated) संख्या से ही काम चला लेते हैं। एेसी स्थितियों के तीन उदाहरण दीजिए।


1.3.2 सन्निकटन द्वारा निकटतम दहाई तक आकलन

निम्नलिखित चित्र को देखिए :

Fig_8

(a) ज्ञात कीजिए कि कौन-से झंडे 270 की तुलना में 260 के अधिक समीप हैं।

(b) ज्ञात कीजिए कि कौन-से झंडे 260 की तुलना में 270 के अधिक समीप हैं।

पटरी की संख्याओं 10, 17 और 20 के स्थानों को देखिए। क्या संख्या 17 संख्या 10 के अधिक निकट है या 20 के? 17 और 20 के बीच का रिक्त स्थान 17 और 10 के बीच के रिक्त स्थान की तुलना में कम है। इसलिए, हम 17 को निकटतम दहाई तक 20 के रूप में सन्निकटित करते हैं।

Fig_5

अब 12 को लीजिए। यह भी 10 और 20 के बीच स्थित है। परंतुु 12 संख्या 20 की तुलना में 10 से अधिक निकट है। इसलिए हम 12 को निकटतम दहाई तक 10 के रूप में सन्निकटित करते हैं।

आप 76 को निकटतम दहाई तक किस प्रकार सन्निकटित करेंगे? क्या यह 80 नहीं है?

हम देखते हैं कि संख्याएँ 1,2,3 और 4 संख्या 10 की तुलना में संख्या 0 के अधिक निकट हैं। इसलिए हम इन्हें 0 के रूप में सन्निकटित करते हैं। संख्याएँ  6, 7, 8 और 9 संख्या 10 के अधिक निकट हैं। इसलिए हम इन्हें 10 के रूप में सन्निकटित करते हैं। संख्या 5, संख्याओं 0 और 10 से बराबर की दूरी पर है। यह सामान्य परिपाटी है कि इसे 10 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।


इन संख्याओं को निकटतम दहाई तक सन्निकटित कीजिए:

28       32      52       41      39       48

64      59      99      215    1453    2936


1.3.3 सन्निकटन द्वारा निकटतम सैकड़े तक आकलन


संख्या 410 संख्या 400 के अधिक निकट है या 500 के अधिक निकट है?

410, संख्या 400 के अधिक निकट (समीप) है, इसलिए इसे निकटतम सौ तक 400 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।

संख्या 889, संख्याओं 800 और 900 के बीच में है।

यह 900 के अधिक निकट है। इसलिए, इसे निकटतम सौ तक 900 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।

संख्याएँ 1 से 49, संख्या 100 की तुलना में, संख्या 0 के अधिक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 0 के रूप में सन्निकटित किया जाता है। 51 से 99 तक की संख्याएँ 0 की तुलना में 100 से अधिक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 100 के रूप में सन्निकटित किया जाता है। संख्या 50 संख्याओं 0 और 100 से बराबर दूरी पर है। सामान्य परिपाटी के अनुसार, इसे 100 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।

जाँच कीजिए कि निम्नलिखित सन्निकटन (सैकड़े तक) सही हैं या नहीं:

841 800; 

 9537 9500;

49730 49700;

2546 2500;

286 300;

5750 5800;

168 200;

149 100;

9870 9800.

उन्हें सही कीजिए जो गलत हैं।


1.3.4 सन्निकटन द्वारा निकटतम हज़ार तक आकलन

हम जानते हैं कि 1 से 499 तक की संख्याएँ 1000 की तुलना में 0 के अधिक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 0 के रूप में सन्निकटित करते हैं। 501 से 999 तक की संख्याएँ 0 की तुलना में 1000 के अधिक निकट हैं। इसलिए, इन्हें 1000 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।

संख्या 500 को भी 1000 के रूप में सन्निकटित किया जाता है।

निम्नलिखित सन्निकटनों की जाँच कीजिए और उन्हें सही कीजिए जो गलत हैं।

2573 3000;

53552 53000;

6404 6000;

 65437 65000;

7805 7000;

3499 4000



दी हुई संख्या को निकटतम दहाई, सौ, हज़ार और दस हज़ार तक सन्निकटित कीजिए:

47


1.3.5 संख्या संक्रियाओं के परिणामों का आकलन

हम संख्याओं को किस प्रकार जोड़ते हैं? हम संख्याओं को एक एल्गोरिथ्म (algorithm) (दी हुई विधि) का चरणबद्ध रूप से प्रयोग करते हुए जोड़ते हैं। हम संख्याओं को यह ध्यान रखते हुए लिखते हैं कि एक ही स्थान (इकाई, दहाई, सौ इत्यादि) के अंक एक ही स्तंभ (Column) में रहें। उदाहरणार्थ, 3946 + 6579 + 2050 को निम्न रूप में लिखते हैं:

TTh      Th      H      T      O

               3        9     4        6

              6        5      7        9

    +       2         0      5       0




फिर हम इकाई वाले स्तंभ की संख्याओं को जोड़ते हैं। यदि आवशयक हो, तो हम एक उचित संख्या को हासिल के रूप में दहाई के स्थान पर ले जाते हैं, जैसे कि इस स्थिति में है। फिर हम इसी प्रकार दहाई के स्तंभ की संख्याओं को जोड़ते हैं और एेसा आगे चलता रहता है। आप शेष  प्रशन को स्वयं पूर्ण कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में स्पष्टत: समय लगता है।

अनेक स्थितियों में, हमें उत्तरों को अधिक तीव्रता से ज्ञात करने की आवशयकता होती है। उदाहरणार्थ, जब आप किसी मेले या बाज़ार में कुछ धनराशि लेकर जाते हैं, तो आकर्ज़क वस्तुओं की किस्मों और मात्राओं को देखकर वहाँ आप सोचते हैं कि सभी को खरीद लिया जाए। आपको तुरंत यह निर्णय लेने की आवशयकता होती है कि आप किन-किन वस्तुओं को खरीद सकते हैं। इसके लिए आपको आवशयक धनराशि का आकलन करने की आवशयकता पड़ती है, जो उन वस्तुओं के मूल्यों का योग होती है जिन्हें आप खरीदना चाहते हैं।

किसी विशोज़ दिन, एक व्यापारी को दो स्थानों से धनराशि प्राप्त होनी है। एक स्थान से प्राप्त होने वाली धनराशि 13,569 है और अन्य स्थान से प्राप्त होने वाली धनराशि 26,785 है। उसे शाम तक किसी अन्य व्यक्ति को 37,000 देने हैं। वह संख्याओं को उनके निकटतम हज़ारों तक सन्निकटित करता है और तुरंत कच्चा या रफ (rough) उत्तर निकाल लेता है। वह खुशा हो जाता है कि उसके पास पर्याप्त धनराशि है।Page-19.jpg

क्या आप सोचते हैं कि उसके पास पर्याप्त धनराशि होगी? क्या आप बिना यथार्थ योग किए यह बता सकते हैं?

शीला और मोहन को अपना मासिक बजट बनाना है उन्हें परिवहन, स्कूल की आवशयकताओं, किराने का सामान, दूध और कपड़ों पर होने वाले अपने मासिक व्यय के बारे में भी जानकारी है तथा अन्य नियमित व्ययों की भी जानकारी है। इस महीने में उन्हें घूमने भी जाना है और उपहार भी खरीदने हैं। वे इन सभी पर होने वाले व्ययों का आकलन करते हैं और उन्हें जोड़कर देखते हैं कि जो राεशा उनके पास है वह पर्याप्त है या नहीं।

क्या वे हज़ारों तक सन्निकटित करेंगे, जैसा कि व्यापारी ने किया था?

एेसी पाँच और स्थितियों के बारे में सोचिए और चर्चा कीजिए, जहाँ हमें योग या अंतरों का आकलन करना पड़ता है।

क्या हम इन सभी में एक ही स्थान तक सन्निकट मान ज्ञात करते हैं?

जब आप संख्याओं के परिणामों का आकलन करते हैं, तो उसके लिए कोई निεशचत नियम नहीं है। यह विधि इस पर निर्भर करती है कि परिशाुद्धता की वांछित मात्रा कितनी है, आकलन कितनी जल्दी चाहिए तथा सबसे महत्त्वपूर्ण बात है कि अनुमानित उत्तर कितना अर्थपूर्ण होगा।


1.3.6 योग अथवा अंतर का आकलन

जैसा कि हमने ऊपर देखा, हम एक संख्या को किसी भी स्थान तक सन्निकटित कर सकते हैं। व्यापारी ने धनराशि को निकटतम हज़ारों तक सन्निकटित किया और संतुज़्ट हो गया कि उसके पास पर्याप्त धनराशि है। इसलिए जब आपको किसी योग अथवा अंतर का आकलन करना है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि आप क्यों सन्निकटित कर रहे हैं और इसलिए किस स्थान तक आपको सन्निकटित करना है। निम्नलिखित उदाहरणों को देखिए:

उदाहरण 5 : 5,290 + 17,986 का आकलन कीजिए।

हल : हम देखते हैं कि 17,986 > 5,290 है।

हम निकटतम हज़ारों तक सन्निकटित करते हैं।

17,986 सन्निकटित होता है      18,000

+5,290 सन्निकटित होता है     + 5,000

आकलित योग                          = 23,000

क्या यह विधि काम करती है? आप यथार्थ उत्तर ज्ञात करके जाँच कर सकते हैं कि यह आकलन विवेकपूर्ण है या नहीं।

उदाहरण 6 : 5,673 – 436 का आकलन कीजिए।

हल : प्रारंभ में, हम हज़ारों तक सन्निकटित करते हैं। (क्यों?)

5,673 सन्निकटित होता है        6,000

– 436 सन्निकटित होता है    –      0

आकलित अंतर                         = 6,000

यह विवेकपूर्ण आकलन नहीं है। यह विवेकपूर्ण क्यों नहीं है? निकटतम आकलन प्राप्त करने के लिए, आइए प्रत्येक संख्या को निकटतम सौ तक सन्निकटित करने का प्रयत्न करें।

5,673 सन्निकटित होता है          5,700

– 436 सन्निकटित होता है   –     400

आकलित अंतर                         = 5,300

यह एक अच्छा और अधिक अर्थपूर्ण आकलन है।


1.3.7 आकलन करना: गुणनफल

हम गुणनफल का किस प्रकार आकलन करते हैं?

19 × 78 के लिए आकलन क्या है?

स्पष्ट है कि यह गुणनफल 2000 से कम है। क्यों? यदि हम 19 का निकटतम दहाई तक मान निकालें, तो हमें 20 प्राप्त होता है और फिर 78 का निकटतम दहाई तक मान निकालें, तो 80 प्राप्त होता है। अब 20 × 80 = 1600 है।

63 × 182 को देखिए।

यदि हम दोनों संख्याओं का निकटतम सौ तक का मान निकालें, तो हमें 100 × 200 = 20,000 प्राप्त होता है। यह वास्तविक गुणनफल से बहुत अधिक है। इसलिए अब हम क्या करें? एक अधिक विवेकपूर्ण आकलन ज्ञात करने के लिए हम 63 और 182 दोनों को  निकटतम दहाई तक सन्निकटित करते हैं। ये क्रमशा: 60 और 180 हैं। इसे हम60 × 180 अर्थात् 10,800 प्राप्त करते हैं। यह एक अच्छा आकलन है, परंतु यह इतनी जल्दी प्राप्त नहीं  होता है। यदि हम 63 को निकटतम दहाई तक 60 लें और 182 को निकटतम सौ तक 200 लें, तो हमें 60 × 200 = 12,000 प्राप्त होता है, यह गुणनफल का एक अच्छा आकलन है और जल्दी भी प्राप्त हो जाता है।

सन्निकटन का व्यापक नियम यह है कि प्रत्येक गुणा की जाने वाली संख्या को उसके सबसे बड़े स्थान तक सन्निकटित कीजिए और सन्निकटित संख्याओं को गुणा कर दीजिए। इस प्रकार, उपरोक्त उदाहरण में हमने 63 को दहाई तक और 182 को सौ तक सन्निकटित किया है।

अब उपरोक्त नियम का प्रयोग करके, 81 × 479 का आकलन कीजिए।

479 सन्निकटित होता है 500 के (सौ तक सन्निकटित)

81 सन्निकटित होता है 80 के (दहाई तक सन्निकटित)

अत:, आकलित गुणनफल = 500 × 80 = 40,000 है।

Try_these1

निम्नलिखित गुणनफलों का आकलन कीजिए:

(a) 87 × 313

 (b) 9 × 795

(c) 898 × 785

 (d) 958 × 387

एेसे ही पाँच और प्रशन बनाइए और उन्हें हल कीजिए।

आपके लिए आकलनों का एक महत्त्वपूर्ण उपयोग यह है कि आप अपने उत्तरों की जाँच कर सकते हैं। मान लीजिए आपने 37 × 1889 ज्ञात किया है, परंतुु आप निεशचत नहीं हैं कि उत्तर सही है या नहीं। इस गुणनफल का एक तुरंत (जल्दी) प्राप्त होने वाला और विवेकपूर्ण आकलन 40 × 2000 = 80000 है। यदि आपका उत्तर 80,000 के निकट है, तो संभवत: आपका उत्तर सही है। दूसरी ओर, यदि यह 8000 या 8,00,000 के निकट है, तो आपके गुणा करने में अवशय ही कुछ गलती हुई है।


प्रशनावली 1.3

1. व्यापक नियम का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित में से प्रत्येक का आकलन कीजिए:

(a) 730 + 998 (b) 796 – 314

(c) 12,904 + 2,888 (d) 28,292 – 21,496

जोड़ने, घटाने और उनके परिणामों के आकलन के दस और उदाहरण बनाइए।

2. एक मोटेतौर पर (Rough) आकलन (सौ तक सन्निकटन) और एक निकटतम आकलन (दस तक सन्निकटन) दीजिए:

(a) 439 + 334 + 4,317 (b) 1,08,734 – 47,599

(c) 8325 – 491 (d) 4,89,348 – 48,365

एेसे चार और उदाहरण बनाइए।

3. व्यापक नियम का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित गुणनफलों का आकलन कीजिए:

(a) 578 × 161 (b) 5281 × 3491

(c) 1291 × 592 (d) 9250 × 29

एेसे चार और उदाहरण बनाइए।



1.4 कोष्ठकों का प्रयोग


मीरा ने बाज़ार से 6 अभ्यास-पुस्तिकाएँ खरीदीं जिनका मूल्य ₹10 प्रति पुस्तिका था। उसकी बहन सीमा ने इसी प्रकार की 7 अभ्यास-पुस्तिकाएँ खरीदीं। उनके द्वारा दी गई कुल धनराशि ज्ञात कीजिए।

55

आप देख सकते हैं कि सीमा और मीरा के उत्तर प्राप्त करने की विधियों में कुछ अंतर है, परंतु दोनों के उत्तर समान हैं और प्राप्त परिणाम सही है। क्यों?

सीमा ने कहा कि मीरा ने 7 + 6 × 10 करके उत्तर प्राप्त किया है।

अप्पू बताता है कि 7 + 6 × 10 = 7 + 60 = 67 है। लेकिन मीरा ने जो उत्तर प्राप्त किया है वह यह नहीं है। बस तीनों विद्यार्थी उलझन में पड़ जाते हैं।

एेसी स्थितियों में उलझन दूर करने के लिए हम कोष्ठकों (brackets) का प्रयोग कर सकते हैं। हम कोष्ठकों का प्रयोग करके 6 और 7 को मिलाकर एक समूह बना सकते हैं, जो दर्शाएगा कि इस समूह को एक अकेली संख्या समझा जाए। जिससे उत्तर इस प्रकार प्राप्त होता है:

(6 + 7) × 10 = 13 × 10

यह वही है जो मीरा ने किया है। उसने पहले 6 और 7 को जोड़ा और फिर प्राप्त योग को 10 से गुणा कर दिया।

कोष्ठकों का प्रयोग यह स्पष्ट रूप में हमें बताता है कि पहले कोज़्ठकों ( ) के अंदर दी हुई संख्याओं को एक अकेली संख्या के रूप में बदलिए और फिर बाहर दी हुई संक्रिया कीजिए जो यहाँ 10 से गुणा करना है।

60

1. कोष्ठकों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए व्यंजक लिखिए:

(a) नौ और दो के योग की चार से गुणा।

(b) अठारह और छ: के अंतर को चार से भाग।

(c) पैंतालीस को तीन और दो के योग के तिगुने से भाग देना।

2. (5 + 8) × 6 के लिए तीन विभिन्न स्थितियाँ लिखिए।

(एेसी एक स्थिति है: सोहनी और रीता ने 6 दिन कार्य किया। सोहनी 5 घंटे प्रतिदिन कार्य करती है और रीता 6 घंटे प्रतिदिन कार्य करती है। दोनों ने एक सप्ताह में कुल कितने घंटे कार्य किया?)

3. निम्नलिखित के लिए पाँच स्थितियाँ लिखिए, जहाँ कोष्ठकों का प्रयोग आवशयक हो:

(a) 7(8 – 3) (b) (7 + 2) (10 – 3)


1.4.1 कोष्ठकों का प्रसार (खोलना) (हटाना)


अब देखिए कि किस प्रकार कोष्ठकों के प्रयोग और उनके प्रसार (खोलने या हटाने) से, हमें अपने कार्य को क्रमबद्ध रूप से करने में सहायता मिलती है। क्या आप सोचते हैं कि कोष्ठकों का बिना प्रयोग किए जिन चरणों का हम पालन कर रहे हैं उन्हें समझ पाएँगे?

(i) 7 × 109 = 7 × (100 + 9) = 7 × 100 + 7 × 9 = 700 + 63 = 763

(ii) 102 × 103 = (100 + 2) × (100 + 3)

                      = 100 × 100 + 2 × 100 + 100 × 3 + 2 × 3

                      = 10,000 + 200 + 300 + 6 = 10,000 + 500 + 6

                       = 10,506

(iii) 17 × 109 = (10 + 7) × 109 = 10 × 109 + 7 × 109

                      = 10 × (100 + 9) + 7 × (100 + 9)

                      = 10 × 100 + 10 × 9 + 7 × 100 + 7 × 9

                  = 1000 + 90 + 700 + 63 = 1,790 + 63 = 1,853


1.5 रोमन संख्यांक

अभी तक हम हिंदू-अरेबिक संख्यांकों (Hindu Arabic Numerals) की पद्धति का ही प्रयोग करते रहे हैं।Fig_7 यह एकमात्र संख्यांक पद्धति नहीं है। संख्यांक लिखने की पुरानी पद्धतियों में से एक पद्धति रोमन संख्यांकों (Roman Numerals) की पद्धति है। यह पद्धति अभी भी अनेक स्थानों पर प्रयोग की जाती है। उदाहरणार्थ, हम घड़ियों में रोमन संख्यांकों का प्रयोग देख सकते हैं। इनका प्रयोग स्कूल की समय-सारणी में कक्षाओं के लिए भी किया जाता है, इत्यादि।

एेसे तीन और उदाहरण ज्ञात कीजिए जहाँ रोमन संख्यांकों का प्रयोग होता है।

रोमन संख्यांक

I, II, III, IV, V, VI, VII, VIII, IX, X

क्रमशा: संख्याएँ 1,2,3,4,5,6,7,8,9 और 10 व्यक्त करते हैं। इसके बाद 11 के लिए XI और 12 के लिए XII,... 20 के लिए XX का प्रयोग होता है।

इस पद्धति के कुछ और संख्यांक संगत हिंदू-अरेबिक संख्यांकों के साथ इस प्रकार हैं:

53

(a) यदि किसी संकेत की पुनरावृत्ति होती है, तो जितनी बार वह आता है उसका मान उतनी ही बार जोड़ दिया जाता है। अर्थात् II बराबर 2 है, XX बराबर 20 है और XXX बराबर 30 है।

(b) कोई संकेत तीन से अधिक बार नहीं आता है। परंतु संकेतों V, L और D की कभी पुनरावृत्ति नहीं होती है।

(c) यदि छोटे मान वाला कोई संकेत एक बड़े मान वाले संकेत के दाईं ओर जाता है, तो बड़े मान में छोटे मान को जोड़ दिया जाता है। जैसे:

VI = 5 + 1 = 6              XII = 10 + 2 = 12

LXV = 50 + 10 + 5 = 65

(d) यदि छोटे मान वाला कोई संकेत बड़े मान वाले किसी संकेत के बाईं ओर आता है, तो बड़े मान में से छोटे मान को घटा दिया जाता है। जैसे:

IV = 5 – 1 = 4                      IX = 10 – 1 = 9

XL = 50 – 10 = 40             XC = 100 – 10 = 90

(e) संकेतों V, L और D को कभी भी बड़े मान वाले संकेत के बाईं ओर नहीं लिखा जाता है। अर्थात् V, L और D के मानों को कभी भी घटाया नहीं जाता है।

संकेत I को केवल V और X में से घटाया जा सकता है। संकेत X को केवल L, M और C में से ही घटाया जा सकता है।

इन नियमों का पालन करने से, हमें प्राप्त होता है:

54


(a) उपरोक्त सारणी में छूटी हुई संख्याओं को रोमन पद्धति में लिखिए।

(b) XXXX, VX, IC, XVV ... इत्यादि, नहीं लिखे जाते हैं। क्या आप बता सकते हैं क्यों?

उदाहरण 7 : निम्नलिखित को रोमन संख्यांकों में लिखिए:

(a) 69 (b) 98

हल : (a) 69 = 60 + 9 

= (50 + 10) + 9 

= LX + IX                

(b) 98 = 90 + 8

= (100 – 10) + 8

= XC + VIII

इसलिए 69 = LX IX       इसलिए 98 = XCVIII


रोमन पद्धति में लिखिए

1. 73

2. 92



हमने क्या चर्चा की?

1. दो संख्याओं में वही संख्या बड़ी होती है, जिसमें अंकों की संख्या अधिक होती है। यदि दोनों में अंकों की संख्या समान है, तब हम उनके सबसे बाएँ स्थित अंकों की तुलना करते हैं और जिस संख्या में यह अंक बड़ा होगा वही बड़ी भी होगी। अगर ये अंक भी समान हैं, तब हम इसी प्रकार अंकों की तुलना करते जाते हैं।

2. दिए गए अंकों से संख्या बनाते समय, ध्यान रखना चाहिए कि संख्या को किन प्रतिबंधों के साथ बनाना है। जैसे अंकों 7, 8, 3 व 5 से, किसी भी अंक को बिना दोहराए, चार अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या बनाने के लिए सबसे बड़े अंक 8 को सबसे बाईं ओर रखना होगा और फिर उससे छोटे अंक रखते जाएँगे।

3. चार अंकों की सबसे छोटी संख्या 1000 है। जिसका अर्थ है कि तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या 999 होगी। पाँच अंकों की सबसे बड़ी संख्या 10,000 (दस हज़ार) है, जिसका अर्थ है कि चार अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या 9999 है।

इसी प्रकार आगे, छ: अंकों की छोटी से छोटी संख्या 1,00,000 (एक लाख) है जिसका अर्थ है कि पाँच अंकों की बड़ी से बड़ी संख्या 99999 है। यही क्रम और बड़ी संख्याओं के लिए भी लागू होता है।

4. अल्पविरामों का प्रयोग, संख्याओं के लिखने तथा पढ़ने में सहायता करता है। भारतीय संख्यांकन पद्धति में पहला अल्पविराम दाईं ओर से प्रारंभ कर तीन अंकों बाद और बाकी दो-दो अंकों बाद लगाए जाते हैं और ये अल्पविराम क्रमशा: हज़ार, लाख व करोड़ को अलग-अलग करते हैं। अंतराष्ट्रीय संख्यांकन पद्धति में अल्पविराम दाईं ओर से प्रारंभ कर तीन-तीन अंकों के बाद लगाए जाते हैं। तीन और छ: अंकों के बाद अल्पविराम क्रमशा: हज़ार व मिलियन को अलग-अलग करते हैं।

5. दैनिक जीवन में अनेक स्थानों पर हमें बड़ी-बड़ी संख्याओं की भी आवशयकता होती है। जैसे किसी विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या, गाँव या शहर की जनसंख्या बड़े-बड़े लेन-देन में धन तथा दो बड़े शहरों के बीच की दूरी।

6. याद रखिए किलो का अर्थ है–हज़ार, सेंटी का अर्थ है–सौवाँ भाग तथा मिली का अर्थ है–हज़ारवाँ भाग, इस प्रकार 1 किलोमीटर = 1000 मीटर, 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर = 1000 मिलीमीटर

7. अनेक स्थितियों में हमें पूर्णतया सही-सही संख्याओं की आवशयकता नहीं होती बल्कि एक उपयुक्त आकलन से ही काम चल सकता है। जैसे एक अंतराष्ट्रीय हॉकी मैच के दर्शकों की संख्या बताने के लिए कह देते हैं कि लगभग 51,000 दर्शकों ने मैच देखा। यहाँ हमें दर्शकों की सही संख्या की आवशयकता नहीं है।

8. आकलन में किसी संख्या को एक वांछित मात्रा तक परिशाुद्ध करना होता है। जैसे 4117 का सन्निकटन, हज़ारों में 4000 तथा सैकड़ों में 4100 किया जा सकता है, जो आवशयकता पर निर्भर करता है।

9. अनेक स्थितियों में हमें संख्याओं पर संक्रियाओं के फलस्वरूप प्राप्त परिणामों का भी आकलन उपयोगी सिद्ध होता है। एेसे आकलनों में हम पहले प्रयोग होने वाली संख्याओं को सन्निकटित कर शीघ्रता से परिणाम प्राप्त कर लेते हैं।

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