ज् ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज् अऋाइर्सवाँ पाठ गधा और सियार;चित्राकथा 2द्ध 1.गधा और सियार में अच्छी मित्राता थी। वे दोनों एक साथ रहते, एक साथ भोजन की खोज में निकलते। 2.चाँदनी रात थी, दोनों भोजन की खोज में निकले। 3.वे ककड़ी के खेत के पास पहुँचे। 4.ककड़ी देखकर उनकी भूख और तेज हो गइर्। वे दोनों खेत के भीतर पहुँचे। 136 दूवार् 5.पेट भर ककड़ी खाने के बाद दोनों खुश6.सियार ने गधे को समझाने कीहुए। सियार साधरण खुशी को महत्त्व नहीं कोश्िाश की। देता था, वह चुप रहाऋ लेकिन गधा चुप मुँह न खोलना। किसान जग गयानहीं रह सका। तो लेने के देने पड़ जाएँगे।‘मित्रा मजा आ गया! अब गाना गाने का मन हो रहा है।’ 7 किंतु मैं खुश हूँ। अब मैं खुशी में गाना गाए बिना नहीं 8.किसान गध्े की हेंचू - हेंचू आवाज सुनकर जाग गया। रह सकता। लगता है, खेत में गधे आ गए हैं। गधे ने सियार की बात नहीं मानी। वह शोर से गाने लगा। 1. नीचे दिए गए कथन किसके हैं? 1.अब गाना गाने का मन हो रहा है। 2.जो लोग खाने के बाद गाते नहीं, वे लोग अच्छे नहीं होते। 3.धैयर् के साथ रहकर उचित समय को पहचानने की बुि तुझमें नहीं है। 4.खुशी को भोजन की तरह पचाना आवश्यक है। 2. चित्राकथा के आधर पर निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर दो 1.सियार ने गधे को गाना गाने से मना क्यों किया? 2.ककड़ी खाने के बाद गाना गाने की गलती गधे ने क्यों की? 3.गधे ने कष्ट में पड़कर सियार से कौन - सी बुिमानी सीखी?

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