ज् ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज् सत्ताइर्सवाँ पाठ ;चित्राकथा 1द्ध 130 दूवार् 5.उसे नेवले पर गुस्सा आता रहता था। स्त्राी को संदेह था कि नेवला उसकी बेटी से जलता है और इसलिए वह चुपचाप बैठा रहता है। तुम मेरी रानी बेटी से क्यों जलते हो? 6.पति के मन में नेवले के प्रति कोइर् संदेह नहीं था। वह पत्नी को समझाता, नेवला मेरी बेटी से क्यों जलेगा? ये दोनों हमारी संतानें हैं। तुम तो हमारे बेटे हो। अपनी छोटी बहन से प्यार जताओ, उसके साथ खेलो । 7.एक दिन ...जब स्त्राी घड़ा लेकर वुफएँ से पानी भरने के लिए जाने लगी, उसने अपने पति से कहाμ सुनो... मैं पानी लेने जा रही हूँ 8.जाते - जाते उसने पति को सावधन किया। तुम बिटिया का ध्यान रखना। नेवले का क्या भरोसा? 132 1.नीचे दिए गए कथन किसके हैं? कथन 1.तू तो मेरा राजा बेटा है। 2.सुनो ..., मैं पानी लेने जा रही हूँ। 3.अपनी बहन का ध्यान रखना। 4.माँ मुझ पर बहुत प्रसÂ होगी। 5.हाय! हाय! यह मैंने क्या कर डाला। 6.कोइर् भी काम सोच - समझकर ही करना चाहिए। 2.प्रश्नों के उत्तर दो 1.स्त्राी के मन में नेवले के बारे में क्या संदेह था? 2.पति ने पत्नी को नेवले के बारे में क्या समझाया? 3.जब साँप बच्ची के पालने की ओर आता दिखा तो नेवले ने क्या किया? 4.स्त्राी पूफट - पूफटकर क्यों रोने लगी? 5.दंपति, नेवले को जीवन भर क्यों नहीं भूल पाए?

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