चिऋी में है मन का प्यार चिऋी है घर का अखबार इस में सुख - दुख की हैं बातें प्यार भरी इस में सौगातें कितने दिन कितनी ही रातें तय कर आइर् मीलों पार। यह आइर् मम्मी की चिऋी लिखा उन्होंने प्यारी कि‘ी मेहनत से तुम पढ़ना बेटी पढ़ - लिखकर होगी होश्िायार। पापा पोस्ट काडर् लिखते हैं। जब आता है बड़ा लिपफापफा समझो चाचा का उपहार। छोटा - सा कागश बिन पैर करता दुनिया भर की सैर नए - नए संदेश सुनाकर जोड़ रहा है दिल के तार। प्रकाश मनु शब्दाथर् भावाथर् चिऋी में मन का प्यार है। वह घर का अखबार भी है। इसमें सुख - दुख की बातें और प्यार भरी सौगातें होती हैं। चिऋी मीलों दूर पहुँच जाती है। मम्मी की चिऋी आइर् है। उन्होंने लिखा है कि प्यारी बिटिया कि‘ी तुम मेहनत से पढ़ना - लिखना। पढ़ - लिखकर तुम होश्िायार हो जाओगी। पापा पोस्टकाडर् में घर भर की बातें लिखकर भेजते हैं। जब बड़ा लिपफापफा आता है तो समझो चाचा का उपहार आ गया। छोटा - सा कागश बिना हाथ पैर के दुनिया की सैर करता है। नए - नए संदेश सुनाकर चिऋी दिल के तारों को जोड़ती है। 1.कविता की पंक्ितयाँ पूरी करो 1.चिऋी में है मन का प्यार ...................................2.मेहनत से तुम पढ़ना बेटी 3.छोटा - सा कागश बिन पैर 2.समान अथर् वाले शब्दों को रेखा खींचकर मिलाओ 3.निम्नलिख्िात शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो सैर संदेश उपहार 4.कविता के आधर पर निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर दो 1.चिऋी को घर का अखबार क्यों कहा गया है? 2.चिऋी बिना पैर, दुनिया की सैर वैफसे कर लेती है? 3.मम्मी ने चिऋी में क्या लिखा है?

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