रंग - बिंरगे पंख तुम्हारे, सबके मन को भाते हैं। कलियाँ देख तुम्हें खुश होतीं पूफल देख मुस्काते हैं।। रंग - बिंरगे पंख तुम्हारे, सबका मन ललचाते हैं। पास नहीं क्यों आती तितली, दूर - दूर क्यों रहती हो? पूफल - पूफल के कानों में जा ध्ीरे - से क्या कहती हो? संुदर - संुदर प्यारी तितली, आँखों को तुम भाती हो। इतनी बात बता दो हमको हाथ नहीं क्यों आती हो? इस डाली से उस डाली पर उड़ - उड़कर क्यों जाती हो? पूफल - पूफल का रस लेती हो, हमसे क्यों शरमाती हो? नमर्दाप्रसाद खरे शब्दाथर् भाना - अच्छा लगना हाथ न आना - पकड़ में न आना कानों में कहना - ध्ीरे से कहना ललचाना - लुभाना भावाथर् इस कविता में तितली से बात की गइर् है और उसके लुभावने रूप का चित्रा खींचा गया है। 1.कविता की पंक्ितयाँ पूरी करो 1.रंग - बिंरगे पंख तुम्हारे, सबके मन को भाते हैं। 2.पास नहीं क्यों आती तितली 3.पूफल - पूफल के कानों में जा 4.इस डाली से उस डाली पर 5.हमसे क्यों शरमाती हो? 3.निम्नलिख्िात शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो रंग - बिंरगा कानों में कहना हाथ न आना शरमाना 4.कविता के आधर पर निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर दो 1.तितली के पंख वैफसे होते हैं? 2.कविता मंे तितली को क्या कहकर बुलाया गया है? 3.कलियाँ और पूफल तितली को देखकर क्या करते हैं? 4.तितली उड़ - उड़कर कहाँॅ जाती है? योग्यता विस्तार ऽ विद्याथीर् अपनी भाषा में रचित इसी प्रकार की कोइर् कविता कक्षा में सुनाएँ।

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