एक मुलाकात हमने अप़्ाफसाना और उसकी नागपाड़ा बास्केटबाॅल टीम के बारे में अखबार में पढ़ा। तब सोचा कि क्यों न हम इस टीम की लड़कियों से मिलें और तुम सभी से इनकी पहचान कराएँ। हम मुंबइर् के विक्टोरिया टमिर्नल ;रेलवे स्टेशनद्ध पर उतरकर चल पड़े नागपाड़ा की तरप़्ाफ। स्टेशन से पैदल चलो तो नागपाड़ा लगभग बीस मिनट की दूरी पर है। हमने वहाँ अपफसाना और नागपाड़ा बास्केटबाॅल एसोसिएशन की लड़कियों से़बातें कीं। तुम भी पढ़ो, इनसे हुइर् हमारी एक मुलाकात। मिलो इस अनोखी टीम से! अपफसाना, शरीन, खुशनूर, आप़़्ाफरीन से। ये लड़कियाँ पहले तो शरा चुपचाप थीं, जब शुरू हुईं तो बस...! शरीन ने शुरुआत की। फ्मेरा घर हमारे इस ग्राउंड के बिल्वुफल सामने है। मेरा भाइर् भी यहाँ खेलता है। मैं अपनी बाल्कनी में खड़े - खड़े लड़कों का खेल देखती रहती। तब मैं सातवीं में पढ़ती थी। जब लड़कों का मैच होता तो बहुत सारे लोग देखने आते। जीतने वाली टीम को बहुत सराहा जाता। ख्िालाडि़यों को सभी ‘चीयसर्’ करते और उनकी हिम्मत बढ़ाते। यह सब देखकर मुझे लगता, क्यों न मैं भी खेलँू? क्या मुझे भी अपना हुनर सबके सामने दिखाने का मौका मिलेगा? तब मैंने हमारे ‘कोच’ को वुफछ डरते हुए पूछा। वे मेरे पापा के अच्छे दोस्त भी हैं। उन्होंने कहा, फ्क्यों नहीं? अगर तुम वुफछ और लड़कियों को साथ में ले आओ, तो हम तुम्हें भी सिखाएँगे। पिफर तुम्हारी भी टीम बनेगी।य् पता करो ऽ क्या तुम्हारे घर के आस - पास भी कोइर् खेलने की जगह है? ऽ वहाँ कौन - कौन - से खेल खेले जाते हैं? कौन - कौन खेलता है? ऽ क्या वहाँ तुम्हारी उम्र के बच्चों को भी खेलने का मौका मिलता है? ऽ वहाँ खेल के अलावा और क्या - क्या होता है? हमने पूछा - क्या खेल की शुरुआत करना आसान था? बताओ ऽ क्या तुम्हारे घर में किसी ने तुम्हें वुफछ खेलने से रोका है? कौन - कौन - से खेल? ऽ किसने रोका? क्यों? पिफर तुमने क्या किया? ऽ क्या किसी ने तुम्हारी मदद की, खेलने के लिए प्रोत्साहित किया? हमने कहाμअपनी टीम के बारे में बताओ एक लड़कीμशुरुआत में हमें थोड़ा अजीब लगता था। यहाँ पर लड़कियों की यह पहली टीम है न! जब हम यहाँ पै्रक्िटस करते थे तो वुफछ लोग देखने आते। उन्हें लगता कि लड़कियाँ वैफसे बास्केटबाॅल खेल रही हैं? मगर अब कोइर् इतने अचरज से नहीं देखता। अब सब मानने लगे हैं कि हम भी अच्छा खेल सकती हैं। एक लड़कीμहम लड़कों की टीम के साथ भी खेलते हैं। तब हम चाहते हैं कि लड़के भी हमें ख्िालाडि़यों की नशर से देखें। हम लड़कियाँ है, इसलिए हमें कोइर् छूट न मिले। कभी - कभी लड़के हमारे खेल की नकल करते हैं, तब हमें गुस्सा आता है। पर हम उसे एक चैलेंज की तरह लेकर अपनी गलतियाँ सुधरते हैं। अगर लड़के चीटिंग करते हैं तो हम उन्हें डाँट भी देते हैं। चचार् करो ऽ क्या तुम्हारे इलाके या स्वूफल में लड़के और लड़कियाँ अलग - अलग तरह के खेल खेलते हैं? अगर हाँ, तो लड़के क्या खेलते हैं और लड़कियाँ क्या खेलती हैं? ऽ तुम क्या सोचते हो कि लड़के - लड़कियों के खेल और खेलने के तरीकों में कोइर् अंतर होता है? ऽ तुम्हें क्या लगता है, लड़के - लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए या नहीं? हमने कहाμअपनी टीम के बारे में और बताओ एक लड़कीμहमारी टीम बहुत खास है। हमारी टीम में एकता है। झगड़ा हो जाए तो जल्दी ही सुलझा लेते हैं। जल्दी ही भूल भी जाते हैं। साथ में मिलकर रहना हमने यहाँ सीखा। हमारी टीम में से वुफछ लड़कियों को मुंबइर् शहर की तरप़्ाफ से खेलने का मौका मिला। यह मैच शोलापुर में हुआ था। शरीनμजब हम मैच खेलने शोलापुर गए तो उस टीम की बाकी लड़कियाँ अलग - अलग जगहों से आइर् थीं। वे हम से ठीक से बात भी नहीं करती थीं। हम से जूनियर की तरह बतार्व करती थीं। हमंे बराबर खेलने का मौका भी नहीं देती थीं। हमें बहुत बुरा लगता था। उस टीम में आपसी सहयोग बिल्वुफल भी नहीं था। मैच के दौरान जब मैंने बाॅल को टीम की एक लड़की की तरपफ पेंफका, तो वह ठीक़से पकड़ नहीं पाइर्। पिफर मुझे ही डाँटने लगी कि मेरी ही गलती है। ऐसी ही गलतपफहमी में हम वह मैच हार गए। मगर हमारी अपनी टीम में ऐसा नहीं होता है। हम एक - दूसरे की गलती सँभाल लेते हैं। अगर खेल में दूसरे की गलती के कारण गोल न बना पाएँ, तो भी हम चिढ़ते नहीं हैं। सोचते हैंμ‘कोइर् बात नहीं! अगली बार क्लास या मोहल्ले की टीम में खेला है? किसके साथ? कौन - सा खेल? ऽ टीम के लिए खेलना या अपने लिए खेलने में क्या अंतर है? तुम्हें क्या अच्छा लगता है? क्यों? ऽ तुम्हारी टीम अपफसाना के शोलापुर वाली टीम जैसी है या नागपाड़ा की टीम़जैसी? क्यों? ऽ टीम में रहते हुए भी टीम के लिए खेलना या सिपर्फ अपने लिए खेलने में़से तुम्हें क्या अच्छा लगता है? क्यों? हमने कहाμयहाँ तक पहुँचे हो, अब आगे क्या? ऽ हम भारत के वि्रफकेट ख्िालाडि़यों के बारे में जानते हैं, उन्हें चाहते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या किसी और खेल के भारतीय ख्िालाडि़यों को भी ऐसे ही सब जानते और चाहते हैं? ;हाँ या नहींद्ध। तुम्हें इसके बारे में क्या लगता है? जैसे भारत के पुफटबाॅल या कबड्डी टीम के ख्िालाडि़यों को तुम पहचानते हो? हमने पूछा - क्या वुफछ और भी परेशानियाँ आईं? एक लड़कीμअब शरीन के छोटे भाइर् को ही देखो। यह सिपर्फ पाँच - छः साल़का है। वह भी बोलता है, फ्मम्मी तुम दीदी को क्यों भेजती हो? दीदी अच्छी नहीं लगती ग्राउंड में खेलते हुए।य् अगर उससे पूछो कि तू खुद खेलेगा? तो चचार् करो ऽ लड़कियों को पढ़ाइर्, खेल या उनकी पसंद के कामों से रोका जाए तो क्या होगा? ऽ अगर तुम्हें किसी खेल या ड्रामे में शामिल होने से रोका जाए तो तुम्हें वैफसा लगेगा? ऽ खेल के क्षेत्रा में तुमने किन - किन महिला ख्िालाडि़यों के बारे में सुना है? कौन - कौन और किस खेल में हैं? ऽ तुमने खेल के अलावा और किस क्षेत्रा में पहचान बनाने वाली महिलाओं के बारे में सुना है? ऽ तुम्हें क्या लगता है कि पहचान बनाने वाली महिलाओं के नाम पुरुष या लड़कों के नामों की अपेक्षा कम जाने जाते हैं? ऐसा क्यों? ऽ अगर सभी लड़कियों को खेल या ड्रामे का मौका न दिया जाए तो ऐसी दुनिया तुम्हें वैफसी लगेगी? ऐसा ही सभी लड़कों के साथ हो हमने कहाμतुम्हारे बारे में अखबार में आया। अब इस किताब में भी तुम्हारे बारे में छपेगा। यह सोचकर तुम्हें वैफसा लगता है? सब लड़कियाँμ हाँ, हमारी भी यही इच्छा है। कोच सर इस टीम की शुरुआत करने वाले और इन्हें खेल सिखाने वाले नूर खान ने बतायाμइस इलाके में यह एक ही ग्राउंड है, खेलने के लिए। मुंबइर् की यह जगह बहुत भीड़भाड़ वाली है। वहीं है हमारा छोटा - सा मैदानμबच्चूखान प्ले ग्राउंड। मुस्तप़्ाफा खान नाम के एक आदमी हमारे यहाँ रहते थे। उनसे सब बहुत डरते थे। मगर बच्चे उन्हें बेहद चाहते थे। इसलिए उन्हें सब बच्चूखान कहने लगे। तब इस जगह पर आज जैसा ग्राउंड नहीं था। यहीं मि‘ी के मैदान में वे बच्चों को खेल सिखाते। उन बच्चों में हम भी थे। बच्चूखान की लगन से ही हमारे यहाँ के कइर् लोग आज विदेशों की टीमों के साथ मैच खेलते हैं। हमने भी बच्चूखान की तरह अपने इलाके के बच्चों को तैयार किया है। आज हमारी टीम में कइर् अंतरार्ष्ट्रीय ख्िालाड़ी हैं। वुफछ ख्िालाडि़यों को अजुर्न पुरस्कार भी मिला है। नूर खान ने बताया, फ्पिछले वुफछ सालों से हमने यहाँ की लड़कियों की टीम भी तैयार की हंै। हमारी लड़कियाँ महाराष्ट्र के लिए भी खेलती हैं। सभी बहुत मेहनत करती हैं। हमारे लड़के - लड़कियाँ अलग - अलग तरह के परिवारों से आते हैं। कोइर् छोटे घर से तो कोइर् थोड़े बड़े। कोइर् उदूर् मीडियम से तो कोइर् अँग्रेशी। मगर यहाँ आकर ये सब एक टीम बनाते हैं।य् सोचकर लिखो ऽ अखबार की रिपोटर् में लिखा था, फ्अप़्ाफसाना दीवार पफाँद चुकी है। लिंग - भेद की दीवार भी जो इसकी माँ ने खड़ी की है।य् सोचकर अपने शब्दों में लिखो कि वह कौन - सी दीवार थी। लिंग - भेद का क्या मतलब होगा?

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