इमारतें देखने में बड़ा मशा आता है। सैलजाμअरे बाप रे! कितना बड़ा दिखता है यह किला। श्रीध्रμऔर कितनी ऊँचाइर् पर हैै। कल्याणीμअरे, यह दरवाशा भी तो देखो। कभी देखा है इतना लंबा - चैड़ा गेट? सैलजाμबहुत भारी भी लगता है। पता नहीं कितने लोग मिलकर खोलते बंद करते होंगे इसे! कल्याणीμगेट पर ये नुकीले लोहे के भाले जैसे क्या दिख रहे हैं? ये क्यों लगाए गए होंगे? सैलजाμइतनी मोटी - मोटी दीवारें भी तो देखो। श्रीध्रμकभी इतनी चैड़ी दीवार नहीं देखी! कल्याणीμयह दीवार कहीं - कहीं गोलाइर् में आगे की तरपफ निकली हुइर् है?़दीदीμयह बुजर् है। देखो, बुजर् दीवार से श्यादा उँफचे हैं। इस किले की बाहरी दीवार में 87 बुजर् हैं। मोटी दीवारें, लंबा - चैड़ा गेटसुकानतो देबनाथऔर इतने सारे बुजर्! सुरक्षा के कितने कड़े इंतशाम थे!इस बड़े से गेट में यह छोटा दरवाशा क्यों बना है? 87 बुजर् छेद सोचो ऽ इतने सारे बुजर् क्यों बनाए गए होंगे? ऽ बुजर् में ये बड़े - बडे़ छेद क्यों बने होंगे? ऽ सीध्ी - सपाट दीवार से झाँकने में और एक उँफचे बुजर् से झाँकने में क्या अंतर होगा? ऽ बुजर् के पीछे खड़े हुए छेदों में से देखने वाले सिपाहियों को हमला करने में क्या मदद मिलती होगी? किले में कितना वुफछ सैलजाμक्या यह किला राजा ने अपने रहने के लिए बनवाया होगा? यह कितना पुराना होगा? कल्याणीμबाहर लिखा था कि सन् 1518 से 1687 तक यहाँ वुफतुबशाही सुल्तानों ने एक के बाद एक राज किया। दीदीμहाँ उससे भी पहले सन् 1200 में यह किला मि‘ी का बना था और यहाँ दूसरे राजाओं का राज था। सैलजाμअरे, इस बोडर् पर किले का नक्शा है। श्रीध्रμइस नक्शे में कितने सारे बाग और कारखाने दिख रहे हैं। और देखो, किले के अंदर कइर् सारे महल भी हंै। सैलजाμइसका मतलब तो यहाँ पर सुलतान के अलावा और भी बहुत - से लोग रहते होंगे। किसान और कारखानों में काम करने वाले लोग भी तो रहते होंगे। कल्याणीμपिफर यह तो पूरा शहर ही होता होगा। सुलतान का महल श्रीध्रμये सीढि़याँ तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं। सैलजाμउस शमाने में भी दो मंिाला इमारतें थीं। कल्याणीμअब तो यह टूटी - पूफटी हालत में है, लेकिन अंदाशा तो होता है कि इसमें कितने राजीव सिंह बड़े - बड़े हाॅल और कमरे होंगे। श्रीध्रμऔर यह देखो, दीवारों पर कितनी बारीक और खूबसूरत नक्काशी की गइर् है। कल्याणीμएक छत पर हमने प़्ाफव्वारे जैसा भी तो देखा था। दीदीμ हाँ, इस किले में कइर् बडे़ - बड़े टैंक और प़्ाफव्वारे थे जिनमें हर समय पानी चलता रहता था। वाह! उस शमाने की इंजीनियरिंग सोचो, आज भी इंजीनियर जब मकान बनाते हैं तो कइर् जगह बरसातों में सीलन आ जाती है। यहाँ तो छत पर पानी के प़्ाफव्वारे चलते थे। तब भी ये इमारतें कितनी समझ से बनाइर् गइर् थीं। सोचें कि 500 साल पहले लोग वैफसे रहते थे। दिमाग में कइर् सारे सवाल आते हैं, जैसेμपानी इतनी उँफचाइर् पर वैफसे चढता होगा? तुम भी अनुमान लगाओ। सोचो और चचार् करो ऽ पफव्वारे वैफसे चलते होंगे? ़ऽ हवा और रोशनी का क्या इंतशाम होता होगा? ऽ चित्रा में दीवार पर की गइर् नक्काशी को ध्यान से देखो। इतनी सुंदर और बारीक नक्काशी करने में किन औशारों का इस्तेमाल होता होगा? ऽ हमारे देश में आज भी कइर् जगह बिजली नहीं है। पर जिनजगहों पर बिजली है अगर वहाँ एक हफ्ऱते तक बिजली न आए तो कौन - कौन से कामों के लिए बहुत मुश्िकल होगी। राजीव सिंह बोलती इमारतें 89 ़कहाँ है पूवर् - पश्िचम? तुम जिस जगह पर हो वहाँ पर सूरज किस तरपफ से़उगता है और किस तरप़्ाफ डूबता है? पता करो कि तुम जहाँ खड़े हो वहाँ से पूवर् दिशा में क्या - क्या है? तुम्हारेपश्िचम में क्या - क्या है? अब पता करो कि तुम्हारे उत्तर और दक्ष्िाण में क्या - क्या है? बताओ और लिखो गोलकोंडा के नक्शे को देखोμचारों दिशाएँ तीर के निशान से दिखाइर् गइर् हैं। ऽ अगर तुम बोडली दरवाशे से किले के अंदर देख रहे हो तो कटोरा हौश किस दिशा में है? ऽ अगर कोइर् बंजारा दरवाशे से अंदर आ रहा है तो कटोरा हौश उसकी किस दिशा में होगा? ऽ बाला हिसार से तुम किस दिशा में चलोगे कि मोती महल पहुँच जाओ? ऽ किले की बाहरी दीवार पर कितने दरवाशे दिख रहे हैं? ऽ गिनकर बताओ किले में कितने महल हैं? ऽ पानी के लिए क्या - क्या इंतशाम दिख रहे हैं? जैसे - बावड़ी, वुँफए, हौश। नक्शे में एक सेंटीमीटर शमीन पर 110 मीटर की दूरी दिखाता है। अब बताओμ ऽ नक्शे में पफतेह दरवाशे से बाला हिसाऱसे.मी. की दूरी पर है। शमीन पर यह दूरीमीटर होगी। ऽ मकइर् दरवाशे से पफतेह दरवाशा कितनी दूर है?़गोलकोंडा किले का नक्शा ये हमले क्यों? हम बातें कर ही रहे थे कि श्रीध्र ने तोप दिखाने के लिए हमें आवाश दी। तोप को देखने की उत्सुकता में हम सब भी तेशी से वहाँ पहुँचे। सैलजाμयह तोप तो वुफतुबशाही सुल्तान की ही होगी। दीदीμतोप का इस्तेमाल औंरगशेब ने किया था। जानते हो, औंरगशेब बादशाह की पूरी प़्ाफौज बंदूकों और तोपों के साथ यहाँ हमला करने आइर् थी। पर वह किले में घुस भी नहीं पाइर् उसकी पूरी सेना आठ महीनों तक बाहर ही बैठी रही। सैलजाμदिल्ली से इतनी दूर यहाँ तक प़्ाफौज तोपों के साथ क्यों आइर् होगी? दीदीμबादशाह हो या राजा, सभी का यही खेल था। अपना राज पैफला सवेंफ, छोटे - छोटे राजाओं और सुलतानों से अपना रिश्ता जोड़ सवेंफ और उन्हें अपने इलाके में शामिल कर सवेंफ। इसके लिए कभी तो दोस्ती और चापलूसी से काम चलाते थे। कभी परिवार में शादी कराकर या पिफर हमला करके। कल्याणीμइतनी तोपों और बंदूकों के साथ भी बादशाह की सेना अंदर क्यों नहीं घुस पाइर्? सैलजाμइतनी सारी मोटी - मोटी दीवारें नहीं देखीं? और नक्शे में तो दीवार से लगी एक लंबी गहरी खाइर् भी दिखती है। तो सेना अंदर वैफसे आती? श्रीध्रμअगर सेना किसी दूसरी तरपफ से आने की कोश्िाश करती तो भी यहाँ बुजर् पर बैठे़़सिपाहियों को दूर - दूर तक सब वुफछ सापफ नशर आ जाता। मुश्िकल तो हुआ होगा हमला करना! कल्याणीμ सोचो! प़्ाफौज, घोड़ों और हाथ्िायों पर सवार, हाथों में बंदूवेंफ लिए आगे बढ़ रही है। यहाँ सुलतान के प़्ाफौजी बंदूकों के साथ तैनात हैं। सैलजाμओहो! पता नहीं इस लड़ाइर् में दोनों तरप़्ाफ के कितने ही सिपाही और लोग मारे गए होंगे। हमले होते ही क्यों हैं? राजीव सिंह श्रीध्रμअरे, तोप तो बहुत पुरानी बात हुइर्। आजकल तो बहुत सारे देशों के पास न्यूक्िलयर बम हैं। इससे तो एक ही बार में कितनी तबाही हो सकती है। चचार् करो ऽ क्या तुमने हाल ही में सुना है कि किसी देश ने दूसरे देश पर हमला किया हो? ऽ पता करो कि यह हमला क्यों हुआ होगा? ऽ किस तरह के हथ्िायार इस्तेमाल किए गए थे? ऽ किस - किस तरह का नुकसान हुआ? पता करो श्रीध्र ने किले में जो तोप देखी थी, वह काँसे की बनी है। ऽ तुमने कभी काँसे की कोइर् चीश देखी है? क्या? काँसे की चीशें हशारों साल पहले से आदिवासी बनाते आए हैं। आज भी सोचकर हैरानी होती है कि गहरी खानों में से ताँबा और टिन वैफसे निकालते, पिघलाते होंगे। पिफर वैफसे उनसे सुंदर - सुंदर चीशें बनाते होंगे। ऽ तुम्हारे घर में या आस - पास काँसे की कौन - कौन - सी चीशें थीं या आज भी हैं? रंग से पहचानने की कोश्िाश करो कि कौन - सी चीश ताँबे की, पीतल की और काँसे की बनी है? पानी का इंतशाम यह चित्रा उस शमाने की बहुत पुरानी पेटिंग को देखकर बनाया गया है। सोचो, बैलों का इस्तेमाल क्यों हो रहा है? अंदाशा लगाओ कि बैलों के घूमने से इस डंडे के ठीक नीचे लगा ड्रम किस दिशा में घूमेगा। उसके साथ लगा दाँतेदार पहिया पिफर किस दिशा में घूमेगा? हाथ के इशारे से बताओ। देखो, दाँतेदार पहिए से लगा डंडा शमीन के नीचे से जाकर किस पहिए से जुड़ा है? बैलों के घूमने से डिब्बों की माला पानी को वैफसे उफपर चढ़ाती है? अब क्या वुफछ पता चला कि किस तरह पानी को वुँफए से निकालकर टैंकों में भरा जाता होगा? आज भी हमें किले की दीवार में मि‘ी के पाइप दिखते हैं। इन्हीं के जरिये महल में जगह - जगह पानी पहुँचाया जाता होगा। ऽ तुमने इस तरह एक - दूसरे से जुड़े पहियों का इस्तेमाल होते हुए और कहाँ देखा है? जैसेμसाइकिल में गियर या और कहीं? ऽ अपने आस - पास देखो और पता करो कि आज शमीन के नीचे से पानी को उफपर तक वैफसे - वैफसे चढ़ाया जाता है? ऽ बिजली से पानी को उफपर तक वैफसे चढ़ाया जाता है? बिना बिजली के पानी को उफपर वैफसे चढ़ाएँगे? हाल किया बेहाल क्यों? आवाशें निकालते और उनकी गूँज सुनते हुए सभी इस मेहराब के नीचे से गुशर रहे थे। श्रीध्रμपत्थरों के नीचे इस सुरंग जैसी जगह में बहुत ठंडी हवा आ रही है। सैलजाμलिखा हुआ था कि यहाँ पफौजी रहते थे।़श्रीध्रμअरे यह देखो, यह बोडर् भी है। पिफर भी इस दीवार का क्या हाल है? सैलजाμओ हो! मैं तो सोचकर ही सिहर जाती हूँ कि इस दीवार ने सैकड़ों सालों में क्या - क्या नशारे देखे होंगेμकितने ही सुलतान और उनकी बेगम, हाथी, घोड़े और न जाने क्या - क्या! पर हम लोगों ने वुफछ ही सालों में इसका क्या हाल कर दिया है। कल्याणीμपता नहीं लोग इन दीवारों को अपने नाम लिख - लिखकर गंदा क्यों कर देते हैं? आँखें बंद करके पहुँचो उस शमाने में! मान लो कि तुम उसी समय में हो, जब गोलकोंडा में पूरा का पूरा शहर बसा था। अब इन सवालों के बारे में सोचो और अपनी क्लास में बताओ। चाहो तो ग्रुप में नाटक भी कर सकते हो। ऽ सुलतान अपने महल में क्या कर रहे हैं? उनके कपड़े वैफसे हैं? उनके सामने कौन - कौन से पकवान पेश हो रहे हैं? लेकिन बेचारे हैं किन पिफव्रफों में? और हाँ, किस भाषा में बातचीत कर रहे हैं? ऽ उनके महल पर प़्ाफव्वारे तो चल ही रहे होंगे न! अंदर से महल आलीशान परदों और कालीनों के साथ वैफसा लग रहा है? और गुलाब, चमेली के पूफलों की खुशबू कहाँ से आ रही है? ऽ किस - किस चीश के कारखाने देख पा रहे हो? कारखानों में कितने लोग काम कर रहे हैं? उन लोगों ने वैफसे कपड़े पहन रखे हैं? कितनी देर काम करते होंगे? ऽ अरे, वहाँ देखो। वह कारीगर पत्थरों को छैनी और हथौड़ों से काट - काटकर कितनी सुंदर नक्काशी कर रहा है। क्या पत्थरों की ध्ूल से कारीगर को कोइर् दिक्कत हो रही है? म्यूिायम पहुँचे गोलकोंडा देखकर वापसी में ये बच्चे हैदराबाद के म्यूिायम ;संग्रहालयद्ध में भी गए। म्यूिायम में बहुत पुरानी चीशें रखी होती हैं। इस म्यूिायम में गोलकोंडा किले के आसपास खुदाइर् के दौरान मिली चीशें भी थीं। जैसे - बतर्न, औशार, शेवर, हथ्िायार वगैरह। सैलजाμअरे, ये बतर्नों के टुकड़े भी सँभालकर इस शीशे की अलमारी में क्यों रखे हुए हैं? वह देखो, वह छोटी - सी प्लेट तो काँसे की है। वह नीला टुकड़ा तो चीनी मिट्टी का लगता है। दीदीμइन्हीं सब चीशों से तो पता चलता है कि उस शमाने में लोग वैफसे रहते थे, किन - किन चीशों का इस्तेमाल करते थे और क्या - क्या बनाते थे। सोचो अगर यह सब सँभालकर नहीं रखा होता तो क्या तुम आज उस शमाने के बारे में इतना वुफछ जान पाते? लिखो ऽ तुमने आसपास किस - किस तरह के बतर्नों का इस्तेमाल होते देखा है? ऽ अपने दादा - दादी से पता करो कि उनके समय में और किस - किस तरह के बतर्न इस्तेमाल में लाए जाते थे? ऽ क्या तुम भी कभी किसी म्यूिायम में गए हो या उसके बारे में सुना है? वहाँ क्या - क्या होता है? इमारत का सवेर् लिखो ऽ क्या तुम्हारे घर के आस - पास कोइर् ऐसी पुरानी इमारत है, जिसे देखने के लिए लोग आते हैं? यदि है, तो कौन - सी? ऽ क्या तुम कभी कोइर् ऐसी ही पुरानी इमारत देखने कहीं दूर गए हो? कौन - सी? वह तुम्हें क्या वुफछ बोलती - सी लगी? क्या जान पाए उस समय के बारे में जब वह इमारत बनी थी? ऽ वह कितनी पुरानी है? तुम्हें वैफसे पता लगा? ऽ वह किस चीश से बनी है? ऽ किस रंग की है? ऽ क्या उसमें वुफछ खास तरह के डिशाइन बने हैं? यहाँ बनाओ। ऽ उसमें कौन लोग रहते होंगे? ऽ वहाँ क्या - क्या काम होता होगा? ऽ क्या अभी भी उसमें लोग रहते हैं? तुम भी अपना म्यूिायम बनाओ रजनी केरल के मल्लापुरम िालेेवफ एक सरकारी स्वूफल में पढ़ाती हैं। उन्होंने अपनी क्लास के बच्चों के साथ मिलकर अपने और आस - पास के बहुत - से घरों से पुरानी - पुरानी चीशें जमा की। जैसे,ँμपुरानी छडि़याँ, छत्रिायाफ ;चप्पलद्ध, बतर्न, ँलकड़ी की खड़ाउवगैरह। उन्होंने आजकल ये सब चीशें जैसी होती हैं वह भी देखा। पिफर बच्चों ने और रजनी ने मिलकर एक प्रदशर्नी लगाइर् जिसे आस - पास के लोग भी देखने आए। तुम भी यह कर सकते हो। चित्रा को देखो और बताओ यह लगभग पाँच सौ साल पुरानी पेंटिंग है जिसमें दिखाया गया है कि आगरे का किला किस तरह बनाया जा रहा था। लोग किस - किस तरह के काम करते नशर आ रहे हैं? कितनी औरतें और कितने मदर् काम कर रहे हैं? देखो यह भारी खंभा ढलान पर वैफसे उफपर ले जा रहे हैं? भारी चीश ढलान पर चढ़ानी आसाना होती है या सीध्ी उफपर ले जानी। क्या मशक में भरकर पानी ले

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