तब गेहूँ के खेतों में दाना चुगने ढेरों तीतर आ जाते हैं। श्िाकारी इस बात को जानते हैं। इसलिए वे सुबह - सुबह ही तीतर मारने चले आते हैं। पिछले साल भी श्िाकारियों ने इसी तरह बहत से तीतर मारे थे। वुफछ तीतर तो वेुउठा ले गए, बाकी को वहीं छोड़ गए। खेतों को काटते समय किसानों को बहु़त से मरे और जख्मी तीतर मिले। बिशन ने सोचा, फ्कितना दुख पहुँचाने वाला काम करते हैं ये श्िाकारी!य् वह समझ गया कि श्िाकारी ही तीतरों पर गोलियाँ चला रहे हैं। इसलिए वह पेड़ों के बीच से निकलकर खेतों के किनारे - किनारे चलने लगा। वह चलते - चलते सोच रहा था कि इन श्िाकारियों को सबक सिखाया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें वैफसे सबक सिखाया जाए, यह उसकी समझ में नहीं आ रहा था। तभी उसके पाँव के पास सरसराहट - सी हुइर्। उसने देखा एक घायल तीतर गेहँू की बालियों के बीच पँफसा छटपटा रहा है। बिशन वहीं घुटनों के बल बैठ गया उसने घायल तीतर को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन घबराया हुआ तीतर छिटककर खेत के और अंदर चला गया। बिशन जानता था कि श्िाकारी इस तीतर को ढूँढ़ नहीं पाएँगे और घायल तीतर यहीं तड़प - तड़पकर मर जाएगा। उसने स्वेटर उतारा और मौका देखकर तीतर पर डाल दिया। तीतर स्वेटर में पँफस गया तो बिशन ने उसे पकड़ लिया। बिशन ने उसे अपने सीने से चिपका लिया और खेत में से निकलकर पहाड़ी की ओर भागने लगा। वह इतना तेज़ चल रहा था मानो उसके पंख लग गए हों। ़कनर्ल दत्ता के घर के रास्ते में एक तरपफ गेहूँ के खेत थे और दूसरी तरपफ वँफटीले तारों की़बाड़। बिशन वैसे तो वँफटीले तारों की बाड़ में से होकर निकल सकता था, परंतु इस समय वह दोनों हाथों से तीतर को पकड़े हुए था। तीतर को सँभालना बहुत शरूरी था। इसलिए वह खेतों के साथ - साथ छिप - छिपकर चलने लगा ताकि श्िाकारी उसे देख न लें। वह वुफछ ही दूर गया कि पीछे से भारी - सी आवाज़ आइर्, फ्लड़के, रुक जा, नहीं तो मैं गोली मार दूँगा।य् लेकिन बिशन नहीं रुका। वह चुपचाप चलता रहा। फ्रुकता है या नहीं?य् उस आदमी ने दुबारा चिल्लाकर कहा। तब तक बिशन वँफटीले तारों के पास आ गया था। उसका दिल तेज़ ी से धड़कने लगा। आगे बढ़ना मुश्िकल लग रहा था। लेकिन पिफर भी वह रुका नहीं और न ही उसने कोइर् जवाब दिया। तभी बिशन को भारी - भरकम जूतों की आवाज़ सुनाइर् दी, जो तेशी से उसके पास आती जा रही थी। पीछे से आ रहा श्िाकारी गुस्से में शोर - शोर से चिल्ला रहा था, फ्मैं तुझे देख लूँगा, तू मेरा श्िाकार चुराकर नहीं ले जा सकता!य् बिशन के लिए आगे निकल भागने का रास्ता नहीं था। अगर वह सड़क से जाता तो श्िाकारी को सापफ दिखाइर् दे जाता। इसलिए उसने खेतों के छोटे रास्ते़से जाना तय किया। खेतों से आगे के रास्ते में काँटेदार झाडि़याँ थीं। बिशन उसी रास्ते पर घुटनों के बल चलने लगा। बहुत सँभलकर चलने पर भी उसके हाथ - पाँव पर काँटों की बहुत - सी खरोंचें उभर आईं। खरोंचों से खून भी निकलने लगा। उसकी कमीज़ की एक आस्तीन भी पफट गइर्। वह जानता था कि कमीज़ पफटने पर उसे माँ से डाँट खानी पड़ेगी। पर बिशन को इस बात का संतोष था कि वह अब तक तीतर की जान बचाने में कामयाब रहा। झाड़ी से बाहर आकर वह सोचने लगा कि वैफसे पहाड़ी के कोने - से पिफसलकर नीचे पहँचा जाए, लेकिनुउस कोने में घास बहुत श्यादा थी और ओस के कारण पिफसलन भी। बिशन थककर वहीं एक किनारे बैठ गया। अभी वह बैठा ही था कि उसे पाँवों की आहट सुनाइर् दी। आहट सुनते ही वह उठकर दौड़ पड़ा। दौड़ते - दौड़ते वह आधी पहाड़ी पार कर चुका था। उसके कपड़े पसीने से तर - ब - तर हो गए, पिफर भी वह रुकानहीं और किसी तरह कनर्ल दत्ता के प़्ाफामर् हाउस के पिछवाड़े पहँच ही गया।ुपिछवाड़़़़े दरवाशा खुला था। उसने ताड के पेड का सहारा लिया और पफामर् हाउस के अंदर पहु़ँच गया। तीतर को वह बडी सावधानी के साथ अपने सीने से लगाए हुए था। प़्ाफामर् हाउस में खामोशी थी। बस, रसोइर् घर से प्रेशर वुफकर की सीटी की आवाज़ आ रही थी। मु£गयाँ अभी अपने दड़बे में थीं और गुलाब चंद सामने का बरामदा सापफ कर रहा था।़अचानक कनर्ल साहब का अल्सेश्िायन वुफत्ता ज़ ोर - ज़ ोर से भौंकने लगा। वह किसी अजनबी को देखकर ही इस तरह भौंकता है। बिशन समझ गया कि श्िाकारी इधर ही आ रहे हैं। उसने इधर - उधर देखा ताकि वह तीतर को कहीं अच्छी तरह से छिपा सके। एक ओर शेड के नीचे बहत सारा कबाडपड़़ा था। उसी में एक टूटी टोकरी बिशनुको दिखाइर् दे गइर्। फ्ये ठीक हैय् सोचते हुए उसने तीतर को टोकरी में रखकर स्वेटर से ढक दिया। घायल तीतर घबराया हु़आ था इसलिए वह चुपचाप पडा रहा। तीतर को छुपाने के बाद बिशन ने सोचा कि अब बाहर चलकर देखना चाहिए। पर वह श्िाकारियों के सामने भी नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए उसने छत पर चढ़कर बैठना ठीक समझा। बिना सीढ़ी के छत पर चढ़ना उसके लिए बहुत आसान काम था। वह अकसर इस शेड की ढलवाँ छत के सहारे उफपर चढ़ जाता था। बिशन लकड़ी के खंभे पर बंदर की तरह छलाँग लगाकर लटक गया और उफपर की ओर ख्िासकते - ख्िासकते छत पर जा पहुँचा। खपरैल की ढलावदार छत थी, इसलिए वह चिमनी के पीछे छिपकर बैठ गया ताकि वह किसी और को दिखाइर् न दे, लेकिन वह स्वयं सब वुफछ देख सके। उसने देखा कि दो श्िाकारी इधर ही चले आ रहे हैं और उनको देखकर कनर्ल साहब काअल्सेश्िायन वुफत्ता ज़ ोर - ज़ ोर से भौंक रहा है।कनर्ल ने वुफत्ते को डाँटा, फ्चुप रहो।य् पर वह न माना। पिछले दोनों पाँवों पर खड़े हो वह उछल - उछलकर भौंकने लगा। वे दोनों श्िाकारी करीब आ गए तो कनर्ल ने रौबदार आवाज़ में पूछा, फ्कौन हो तुम? यहाँ किसलिए आए हो?य् फ्साहब, हम श्िाकारी हैं! हर साल यहाँ श्िाकार के लिए आते हैं।य् फ्अच्छा... तो तुम्हीं लोगों की गोलियों की आवाज़ ें गूँज रही थीं सुबह से!य् फ्जी हाँ, हमारे पास लाइसेंस वाली बंदूवेंफ हैं। सरपंच माधो ¯सह भी हमें जानता है।य् फ्तो तुम हर साल तीतरों का श्िाकार करते हो,य् कनर्ल ने मज़ ाक - सा उड़ाते हुए कहा। फ्जी हाँ, तीतर भी मार लेते हैं कभी - कभी। अभी - अभी एक लड़का हमारे श्िाकार तीतर को लेकर आपके यहाँ आ छिपा है, हम उसे ही ढूँढ़ रहे हैं।य् फ्अच्छा, तुम जो इतने सारे तीतर मारते हो उनका क्या करते हो?य् कनर्ल साहब ने पूछा। फ्सीधी - सी बात है साहब, खाते हैं।य् दूसरे श्िाकारी ने जवाब दिया। पिफर वुफछ रुककर बोला, फ्अब तो उस लड़के को ढुँढ़वा दीजिए साहब! वह इधर ही कहीं छुप गया है।य्कनर्ल दत्ता ने उनकी बात पर कोइर् ध्यान नहीं दिया और गुस्से से कहा, फ्वैफसे हो तुम लोग, हर साल आकर इतने तीतर मार डालते हो! वुफछ को खा लेते हो, और बाकी को घायल करके यहाँ तड़प - तड़पकर मरने के लिए छोड़ जाते हो। जब पफसल कटती है तब ढेरों मरे ह़ए तीतर मिलते हैं।य्ुकनर्ल दत्ता की बात सुनकर वे दोनों वुफछ घबरा गए। उन्हें उम्मीद नहीं थीकि कनर्ल इस तरह उन्हें डाँट देंगे। कनर्ल दत्ता ने उन्हें इतना ही कहकर नहीं छोड़ा, आगे बोले, पक्ष्िायों को मारने और उससे श्यादा उन्हें घायल करके छोड़ जाने में तो कोइर् बहादुरी नहीं है। अब तुम दोनों यहाँ से जा सकते हो। यहाँ तुम्हारा कोइर् तीतर - वीतर नहीं है। अब जाते क्यों नहीं, खड़े क्यों हो? बिशन चिमनी के पीछे से सब देख और सुन रहा था। वे दोनों श्िाकारी बिना वुफछ बोले मुड़े और वापस चल दिए।कनर्ल दत्ता ने गुलाब चंद से दवाइर् छिड़कने वाली मशीन लाने को कहा। तभी बिशन छप्पर से शेड पर होता हुआ नीचे वूफद पड़ा। उसने तीतर को उठा लिया और घर में घुसते ही मालकिन को पुकारने लगा, फ्बहूजी! बहूजी! जल्दी आइए, यह बहुत शख्मी है, आकर इसे देख्िाए!य् बिशन की आवाज़ुसुनकर कनर्ल दत्ता भी अंदर जा पहँचे और बोले, फ्अच्छा! तो तीतर चुराने वाला लड़का तू ही था!य् फ्क्या करता बाबूजी, इसे बहुत चोट लगी है! अगर मैं न लाता तो यह मर जाता!य् फ्अब तू इसका क्या करेगा?य् फ्इसे पालूँगा बाबूजी,य् बिशन ने कहा। कनर्ल साहब मुस्करा दिए। उन्होंने घायल तीतर को देखा। उसका एक पंख टूट गया था। अब शायद ही वह उड़ सके। फ्जाओ, दवाइयों का बक्सा लेकर आओ।य् बिशन दौड़कर बक्सा ले आया।़कनर्ल दत्ता ने तीतर के पैरों का शख्म सापफ किया। पिफर दवाइर् लगा दी। पंख को पैफलाकर टेप लगा दिया ताकि वह श्यादा हिले - डुले नहीं। पिफर उन्होंने बिशनसे कहा, फ्बिशन, अगर तुम इसे गेंदे के पत्तों का रस दिन में दो - तीन बार पिलाओगे तो यह जल्दी ठीक हो जाएगा।य् तब तक बहूजी एक कटोरी में दलिया ले आईं और तीतर को दलिया ख्िालाते हुए बोलीं, फ्इसे रोश दलिया भी ख्िालाना बिशन, तीतर को दलिया बहुत पसंद होता है।य् फ्तब तो यह बिशन के पीछे - पीछे ही घूमता रहेगा,य् कनर्ल ने हँसते हए कहा।ुफ्अच्छा बिशन, तुम जानते हो तीतर वैफसे बोलता है?य् बहूजी ने पूछा। बिशन ने अपने हाथों को मुँह पर रखकर तीतर की आवाश निकाली,फ्क्वाक... क्वाक... क्वाक...य् कनर्ल दत्ता ठहाका मारकर हँस पड़े। बहूजी भी मुँह पर पल्लू रखकर हँसने लगीं। बिशन भी हँसता हुआ हिरन की तरह छलाँगें लगाता तीतर के साथ वहाँ से अपने घर की ओर भाग चला। प्रतिभा नाथ कहानी से 1.फ्जी हाँ, हमारे पास लाइसेंस वाली बंदूवेंफ हैं। सरपंच माधो¯सह भी हमें जानता है।य् श्िाकारियों ने कनर्ल साहब से क्या सोचकर ऐसा कहा होगा? 2. बिशन घायल तीतर को क्यों बचाना चाहता था? 3. घायल तीतर को बचाने के लिए उसे किस तरह की परेशानियाँ हइर्?ु4.घायल तीतर अगर तुम्हें मिला होता, तो क्या तुम उसे पालते या अच्छा होने पर छोड़ देते? क्यों? भाषा की बात 1. इन वाक्यों को अपने शब्दों में लिखोμ ऽ सुबह की हल्की धूप में खेत सुनहरे दिखाइर् दे रहे थे। ऽ वह इतना तेज़ चल रहा था मानो उसके पंख लग गए हों। 2. फ्तीतर स्वेटर में पँफस गया तो बिशन ने उसे पकड़ लिया और अपने सीने से चिपका लियाय्।ऊपर लिखे वाक्य में ‘उसे’ शब्द का इस्तेमाल ‘तीतर’ के लिए किया गया है। एक ही संज्ञा का बार - बार इस्तेमाल करने की बजाय उसकी जगह पर वुफछ ख़ास शब्दों का प्रयोग किया जाता है। ऐसे शब्दों को सवर्नाम कहते हैं। नीचे लिखे वाक्यों में सवर्नाम का ठीक रूप छाँटकर लिखो। ;कद्ध मास्टर साहब ने अप्पाराव को .................पास बुलाकर कहा, ...............कल...............घर आना। ;मैं, अपना, तुमद्ध ;खद्ध सेंटीला .................घर नागालैंड के किस शहर में है? ;तुमद्ध ;गद्ध सुध ने ................बुआ से पूछा, पापा ...................कितने बड़े हैं? ;आपद्ध ;घद्ध मोहन को समझ में नहीं आ रहा कि .................क्या करना चाहिए? ;वहद्ध;घद्ध विमल ने अप़्ाफसर को याद दिलाया कि चार बजे बैठक में जाना है। ;आप, वहद्ध 3. इन वाक्यों को पूरा करोμ ;कद्ध वह इतना धीरे चल रहा था, मानो ;खद्ध रात में चमकते तारे ऐसे दिख रहे थे, मानो ;गद्ध तुम तो मंगल ग्रह के बारे में ऐसे बता रहे हो, मानो .......................;घद्ध बिल्ली चूहे को ऐसी ललचाइर् नशरों से देख रही थी, मानो ............प़्ाफसलों के इदर् - गिदर् 1.इस कहानी में सेबों के खेत और सीढ़ीनुमा खेत का िाक्र आया है। अनुमान लगाकर बताओ कि यह कहानी भारत के किस भौगोलिक क्षेत्रा की होगी और वहाँ सीढ़ीनुमा खेती क्यों की जाती होगी? 2.फ्सेबों के बाग में कीटनाशक दवा का छिड़काव हो रहा था।य् यों तो कीटनाशक दवाएँ पफलों, सब्िशयों और अनाज की प़्ाफसलों को कीड़ा लगने से बचाती हैं, पर ;कद्ध ये कीटनाशक दवाएँ कीड़ों को नष्ट करती हैं। इनसे इनका सेवन करने से क्या हमें भी नुकसान होता होगा? पता करो और कक्षा में बातचीत करो। ;खद्ध ऐसे में पफलों और सब्िशयों का इस्तेमाल करने से पहले किन बातों को ध्यान में रखना शरूरी होगा? तुम्हारे आस - पास 1.कनर्ल दत्ता ने घायल तीतर को गेंदें की पिायों का रस पिलाने के लिए कहा। पत्तों काइस्तेमाल कइर् कामों के लिए होता है। नीचे लिखी पिायों का इस्तेमाल किसलिए होता है? तुलसी नीम मीठा नीम आम अमरूद तेजपत्ता केला सागवान 2.फ्कनर्ल साहब के कहने पर बिशन दौड़कर ‘दवाइयों का बक्सा’ ले आया।य् इसे तुम ‘प्राथमिक चिकित्सा बाॅक्स/पफस्टर् एड बाॅक्स’ के नाम से जानते होंगे।़;कद्ध इस बक्से में क्या - क्या चीशें होती हैं? ;खद्ध इसका इस्तेमाल कब - कब किया जाता है? 3. तुमने पयार्वरण अध्ययन में पढ़ा होगा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आमतौर पर छतें ढलावदार बनाइर् जाती हैं। सोचकर बताओ कि ऐसा क्यों किया जाता है। पहाड़ी इलाका इस कहानी में पहाड़ी, घाटी शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। पहाड़ी इलाके से जुड़े हुए और शब्द सोच कर लिखो। जैसेμढलान, चट्टðान आदि। तीतर 1.पहेली μ तीतर के दो पीछे तीतर, तीतर के दो आगे तीतर, बोलो कितने तीतर? 2.यहाँ तीतर का प़्ाफोटो दिया गया है। गौर से देखो और उसका वणर्न करो। चैथी में तुम यह कर चुके हो। 3.तीतर के बारे में और जानकारी इकऋा करो। जैसे μ तीतर का घोंसला, वह क्या खाता है आदि। रात भर बिलखते - चिंघाडघाड़ते रहे उड़ीसा राज्य के सिम्प्लीपाल टाइगर रिजवर् में इस बच्चे ने जंगल की घास - पत्ती को मुँह लगाना शुरू कर दिया था। झाडि़यों, पेड़ों और पगडंडियों को जानने - पहिचानने की स्वाभाविक इच्छा उसमें पैदा हो चुकी थी। एक सुबह वह अपनी टोली से ज़ रा अलग होकर नाले की तरफ़ जा रहा था। रात का दौरा लगाने के बाद इस इलाके का शेर वहीं सो रहा था। वह बच्चे पर झपट पड़ा। बच्चा चिं घाड़ा, उसकी चिं घाड़ सुन कर सभी हाथी उसे बचाने दौड़े। बड़े हाथ्िायों के सामने शेर

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