एक माँ की बेबसी इस कविता को पढ़ते समय, आँखों के सामने कइर् चित्रा बनते हैं। बचपन का चित्रा, बचपन के खास समयμखेल और साथ्िायों का चित्रा, उन साथ्िायों मेें एक खास साथी रतन का और एक माँ का चित्रा। इसे पढ़ो और महसूस करो। कविता धीरे - ध्ीरे पढ़ने की चीज़्ा है। उसे मन में उतरने में काप़फी समय लगता है। कभी - कभी तो बरसों बाद हम बचपन की पढ़ी कविता पढ़ते हैं तो लगता हैμपहली बार पढ़ा है इसे। कविता पढ़ने के बाद मन के किसी कोने में घर बना लेती हैं। किसी मौके पर वह उभर आती है। कविता, कहानी, सबके साथ यह होता है। इसीलिए हमें इससे चिंतित होने की ज़्ारूरत नहीं कि कविता एक बार में पूरी तरह समझ में आ रही है या नहीं। अगर उससे सिप़र्फ एक चित्रा ही उभरता है तो भी कविता कामयाब है। न जाने किस अदृश्य पड़ोस से निकल कर आता था वह खेलने हमारे साथμ रतन, जो बोल नहीं सकता था खेलता था हमारे साथ एक टूटे ख्िालौने की तरह देखने में हम बच्चों की ही तरह था वह भी एक बच्चा। लेकिन हम बच्चों के लिए अजूबा था क्योंकि हमसे भ्िान्न था। थोड़ा घबराते भी थे हम उससे क्योंकि समझ नहीं पाते थे उसकी घबराहटों को, न इशारों में कही उसकी बातों को, न उसकी भयभीत आँखों में हर समय दिखती उसके अंदर की छटपटाहटों को। जितनी देर वह रहता पास बैठी उसकी माँ निहारती रहती उसका खेलना। अब जैसे - जैसे वुफछ बेहतर समझने लगा हूँ उनकी भाषा जो बोल नहीं पाते हैं याद आती रतन से अिाक उसकी माँ की आँखों में झलकती उसकी बेबसी। राजेश जोशी कविता से 1.यह बच्चा कवि के पड़ोस में रहता था, पिफर भी कविता ‘अदृश्य पड़ोस’ से शुरु होती है। इसके कइर् अथर् हो सकते हैं, जैसेμ ;कद्ध कवि को मालूम नहीं था कि यह बच्चा ठीक - ठीक किस घर में रहता था। ;खद्ध पड़ोस में रहने वाले बाकी बच्चे एक - दूसरे से बातें करते थे, पर यह बच्चा बोल नहीं पाता था, इसलिए पड़ोसी होने के बावजूद वह दूसरे बच्चों के लिए अनजाना था। इन दो में से कौन - सा अथर् तुम्हें ज्यादा सही लगता है? क्या कोइर् और अथर् भी हो सकता है?़2.‘अंदर की छटपटाहट’ उसकी आँखों में किस रूप में प्रकट होती थी? ;कद्ध चमक के रूप में ;खद्ध डर के रूप में ;गद्ध जल्दी घर लौटने की इच्छा के रूप में तरह - तरह की भावनाएँ 1. नीचे लिखी भावनाएँ कब या कहाँ महसूस होती हैं? ;कद्ध छटपटाहट ऽ अधीरता μ कहीं जाने की जल्दी हो और जाना संभव न हो जैसेμस्वूफल की छुट्टð़ी में अभी कापफी देर हो, पर घर पर ऐसा कोइर् मेहमान आने वाला हो जिसे तुम बहुत पसंद करते हो ऽ इच्छा μ किसी चीज को पाने की इच्छा हो पर वह तुरंत न मिल सकती हो़जैसे भूख लगी हो, पर खाना तैयार न हो ऽ संदेश μ हम कोइर् संदेश देना चाह रहे हों पर दूसरे समझ न पा रहे हांे जैसे श्िाक्षक से कहना हो कि घंटी बज गइर् है, अब पढ़ाना बंद करें, पर उन्हें घंटी सुनाइर् न दी हो इनमें से कौन - सा अथर् या संदभर् इस बच्चे पर लागू होता है? ;खद्ध घबराहट हमें जब किसी बात की आशंका हो तो घबराहट महसूस होती है। जैसेμ ;कद्ध अँधेरा होेने वाला हो और हम घर से काप़्ाफी दूर हों या अकेले हों ;खद्ध समय कम हो और हमें कोइर् काम पूरा कर लेना होμ जैसे परीक्षा में देखा जाता है ;गद्ध यह डर हो कि दूसरे के मन में क्या चल रहा है जैसेμपापा को मालूम चल गया हो कि काँच का गिलास तुमसे टूटा है 2. जो बच्चा बोल नहीं सकता, वह किस - किस बात की आशंका से ‘घबराहट’ महसूस कर सकता है? 3. फ्थोड़ा घबराते भी थे हम उससे, क्योंकि समझ नहीं पाते थे उसकी घबराहटों कोय् ऽ रतन क्या सोचकर घबराता होगा? ऽ अपने दोस्तों से पूछकर पता करो, कौन क्या सोचकर और किस काम को करने में घबराता है। कारण भी पता करो। दोस्त/सहेली किस बात से घबराने का कारण का नाम घबराता है? ................... ...................... ............................... ................... ...................... ............................... ................... ...................... ............................... ................... ...................... ............................... भाषा के रंग 1.कवि ने इस बच्चे को ‘टूटे ख्िालौने’ की तरह बताया है। जब कोइर् ख्िालौना टूट जाता है तो वह उस तरह से काम नहीं कर पाता जिस तरह से पहले करता था। संदभर् के अनुसार खाली स्थान भरो। ख्िालौना टूटने का कारण नतीजा गाड़ी गुडि़या गेंद जोकर पहिया निकल जाने पर सीटी निकल जाने पर .................................चाबी निकल जाने पर चल नहीं पाती ........................................................................ 2.‘बेबस’ शब्द ‘बे’ और ‘वश’ को जोड़कर बना है। यहाँ बे का अथर् ‘बिना’ है। नीचे दिए शब्दों में यही ‘बे’ छिपा है। इस सूची में तुम और कितने शब्द जोड़ सकती हो? बेजान बेचैन बेसहारा बेहिसाब देखने के तरीके 1. इस कविता में देखने से संबंध्ित कइर् शब्द आए हैं। ऐसे छह शब्द छाँटकर लिखो। 2.फ्माँ की आँखों में झलकती उसकी बेबसीय् आँखें बहत वुफछ कहती हैं। वे तरह - तरह के भाव लिए हुुए होती हैं। नीचे ऐसी वुफछ आँखों का वणर्न है। इनमें से कौन - सी नज़्ारें तुम पहचानते हो - ऽ सहमी नज़्ारें ऽ प्यार भरी नज़्ारें ऽ क्रोध् भरी आँखें ऽ उनींदी आँखें ऽ शरारती आँखें ऽ डरावनी आँखें 3.नीचे आँखों से जुड़े वुफछ मुहावरे दिए गए हैं। तुम इनका प्रयोग किन संदभो± में करोगे? ऽ आँख दिखाना ़ऽ आँख का ताराऽ नजर चुराना ऽ नज़्ारें पेफर लेना ऽ आँख पर पदार् पड़ना माँ फ्याद आती रतन से अध्िक उसकी माँ की आँखों में झलकती उसकी बेबसीय् 1.रतन की माँ की आँखों में किस तरह की बेबसी झलकती होगी? 2.अपनी माँ के बारे में सोचते हुए नीचे लिखे वाक्यों को पूरे करोμ ;कद्ध मेरी माँ बहत खुश होती हैं जबु;गद्ध मेरी माँ चाहती है कि मैं ;खद्ध माँ मुझे इसलिए डाँटती हैं क्योंकि त बेबस हो जाती है जब ..........................................;घद्ध माँ उस समय बहु़.................................................................;डद्ध मैं चाहती/ता हूँ कि मेरी माँ

RELOAD if chapter isn't visible.