गुड़ और चीनी के तिलवुफट को बड़े चाव से खाया। खाते - खाते मैं सोच रही थी कि कितनी अलग है न यह ख्िाचड़ी जो अभी हम मना रहे हैं। स्वूफल में हम जो ख्िाचड़ी मनाते थे उसकी अलग ही मस्ती हुआ करती थी। छुट्टð़ी का दिन, नाव में बैठकर गंगा नदी की सैर और पिफर टापू पर बालू मंे दौडते हुए पतंग उड़ाना या उड़ाने की कोश्िाश करना। कितना मजा आता था। इध्र हम़पतंग उड़ाते थे और वहीं थोड़ी दूर पर गुरुजी, विमला दिद्दा, आनंद जी, झिलमिट भैया सब मिलकर ईंट से बने चूल्हे पर बड़े - बड़े कड़ाहों में ख्िाचड़ी बनाते थे। हम भी बीच - बीच में अपनी पतंगों को सुस्ताने का मौका देते हुए मटर और प्याज छीलने बैठ जाते। वैसी ख्िाचड़ी पिफर दुबारा खाने को नहीं मिली। वाकइर्, ढंग वैफसा भी हो, पर है ये खुश्िायों का त्योहार! जनवरी माह के मध्य में भारत के लगभग सभी प्रांतों में पफसलों से जुड़़ा कोइर् - न - कोइर् त्योहार मनाया जाता है। कोइर् प़्ाफसलों के तैयार हो जाने पर खुशी बाँटता है तो वुफछ लोग इस उम्मीद में खुश होते हैं कि अब पाला कम होगा, सूरज की गमीर् बढ़ने से खेतों में खड़ी प़्ाफसल तेजी से बढ़ेगी। सभी प्रांतों औऱइलाकों का अपना रंग और अपना ढंग नज़र आता है। इस दिन सब लोग अच्छी पैदावार की उम्मीद और प़़्ाफसलों के घर में आने की खुशी का इजहार करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश में मकर - संक्रांति या तिल संक्रांत, असम में बीहू, केरल में ओणम, तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, झारखंड में सरहुल, गुजरात में पतंग का पवर् सभी खेती और पफसलों से जुड़़े त्योहार हैं। इन्हें जनवरी से मध्य अप्रैल तक अलग - अलग समय मनाया जाता है। झारखंड में सरहुल बड़े जोशो - खरोश के साथ मनाया जाता है। चार दिनों तक इसका जश्न चलता रहता है। अलग - अलग जनजातियाँ इसे अलग - अलग समय में मनाती हैं। संथाल लोग पफरवरी - माचर् में, तो ओरांव लोग इसे माचर् - अपै्रल में मनाते हैं। आदिवासी आमतौर पर प्रवृफति की पूजा करते हैं। सरहुेल के दिन विशेष रूप सही खुशनुमा हो जाता है। स्त्राी - पुरुष दोनों ही ढोल - म‘साल’ वेफ पेड़फ पेड़की पूजा की जाती है। यही समय है जब साल वों में पूफल आने लगते हैं और मौसम बहेुत ंजीरे वुफमाउँफ में मकर संक्रांति को घुघुतिया भी कहते हैं। इस दिन आटे और गुड़ को गूँध्कर पकवान बनाए जाते हैं। इन पकवानों को तरह - तरह के आकार दिए जाते हैं जैसे - डमरू, तलवार, दाडि़म का पूफल आदि। पकवान को तलने के बाद एक माला में पिरोया जाता है। माला के बीच में संतरा और गन्ने की गंडेरी पिरोइर् जाती है। यह काम बच्चे बहुत रुचि और उत्साह के साथ करते हैं। सुबह बच्चों को माला दी जाती है। बहुत ठंड के कारण पक्षी पहाड़ों से चले जाते हैं। उन्हें बुलाने के लिए बच्चे इस माला से पकवान तोड़ - तोड़कर पक्ष्िायों को ख्िालाते हैं और गाते हैं - कौआ आओ घुघूत आओ ले कौआ बड़ौ म वैफ दे जा सोने का घड़ौ खा लै पूरी म वैफ दे जा सोने की छुरी इसके साथ ही जिस चीश की कामना हो, वह माँगते हैं। है न कितने अलग - अलग अंदाज मकर - संक्रांति को मनाने के। कहीं दूध,़चावल और गुड़ की खीर बनती है तो कोइर् पाँच प्रकार के नए अनाज की ख्िाचड़ी बनाता है। कहीं - कहीं लोगों का सैलाब नदी में स्नान के लिए उमड़ पड़ता है। लोग ठंड से ठिठुरते रहेंगे पर बप़़्ाफीर्ले पानी में कम - से - कम एक डुबकी तो जरूर लगाएँगे। हाल यह होता है कि इन जगहों पर तिल रखने की भी जगह नहीं होती। तिल से याद आया मकर संक्रांति के दिन पानी में तिल डालकर स्नान करना, तिल दान करना, आग में तिल डालना, तिल के पकवान बनाना विशेष महत्व रखता है। तुम्हारे घर या इलाके में इस त्योहार को वैफसे मनाया जाता है? इसे ख्िाचड़ी, पोंगल, मकर - संक्रांति या वुफछ और कहा जाता है? या तुम प़्ाफसलों से जुड़े कोइर् और त्योहार मनाती हो? यदि तुम आपस में बात करो तो तुम्हें यह जानकर हैरानी होगी कि कइर् बार एक ही इलाके में रहने वाले लोग भी इस त्योहार को अलग - अलग ढंग से मनाते हैं। मौसम का अंदाज़ 1ण् फ्ख्िाचड़ी में अइसन जाड़ा हम पहिले कब्बो ना देखनीं।य् यहाँ तुम ‘ख्िाचड़ी’ से क्या मतलब निकाल रही हो? 2ण् क्या कभी ऐसा हो सकता है कि सूरज बिल्वुफल ही न निकले? अगर ऐसा हो तो अपने साथ्िायों के साथ बातचीत करके लिखो। 3ण् बाहर देखने से समय का अंदाज़्ा क्यों नहीं हो पा रहा था? जिनके पास घड़ी नहीं होती वे समय का अनुमान किस तरह से लगाते हैं? तुम्हारी ज़ुबान ;कद्ध फ्आज इर् लोग के उठे के नइर्खे का?य्;खद्ध फ्जा भाग के देख केरा के पत्ता आइल की ना?य् इन वाक्यों को अपने घर की भाषा में लिखो। भारत तेरे रंग अनेक ़1.विविध्ता हमारे देश की पहचान है। पफसलों का त्योहार हमारे देश के विविध् रंग - रूपों का एक उदाहरण है। नीचे विविधता के वुफछ और उदाहरण दिए गए हैं। पाँच - पाँच बच्चों का समूह एक - एक उदाहरण ले और उस पर जानकारी इकट्टòाफोटोग्राप़़्ी करे। ;जानकारी चित्रा, पफ, कहानी, कविता, सूचनापरक सामग्री के रूप में हो सकती है।द्ध हर समूह इस जानकारी को कक्षा में प्रस्तुत करे। ऽ भाषा ऽ कपड़े ऽ नया वषर् ऽ भोजन ऽ लोक कला ऽ लोक संगीत 2. तुम्हें कौन - सा त्योहार सबसे अच्छा लगता है और क्यों? इस दिन तुम्हारी दिनचयार् क्या रहती है? अन्न के बारे में ;कद्ध प़् ुत महत्व होता है। तिल का किन - किन रूपोंाफसल के त्योहार पर ‘तिल’ का बहमें इस्तेमाल किया जाता है? पता करो। ;खद्ध तुम जानती हो कि तिल से तेल बनता है? और किन चीज़्ाों से तेल बनता है और वैफसे? हो सके तो तेल की दुकान में जाकर पूछो।

RELOAD if chapter isn't visible.