चुसकिट का सपना चुसकिट के लिए आज बहुत - बहुत खास दिन हैμइतना खास कि उसे रात को नींद ही नहीं आइर्। जानते हो क्यों? चुसकिट दस साल की हो गइर् है, पर आज पहली बार स्वूफल जा रही है। कितने सालों से वह इस दिन का इंतशार कर रही थी। स्वूफल चुसकिट के घर से बहुत श्यादा दूर नहीं है। वहाँ पहुँचने के लिए बस बड़ी सड़क से होकर, झील के साथ - साथ चलते जाओ। पोपलर के पेड़ के पास से झील पार कर लो। पिफर थोड़ी - सी चढ़ाइर् और पहुँच गए स्वूफल। लद्दाख के ‘स्िकटपो पुल’ गाँव के सभी बच्चे ऐसे ही स्वूफल पहुँचते हैं, बस चुसकिट को छोड़कर। कोश्िाश हुइर् कामयाब आस - पास झ् तुम स्वूफल वैफसे जाते हो? झ् पता करो, लद्दाख कहाँ है। वह वैफसा इलाका है? पहले - पहले तो चुसकिट को भी पता नहीं था कि वह दूसरे बच्चों से वैफसे अलग है। ध्ीरे - ध्ीरे उसे लगने लगा कि वह अन्य बच्चों की तरह सभी काम नहीं कर पाती। कारण, उसकी टाँगें। उसके जन्म के समय से ही उसकी टाँगों में खराबी थी। चुसकिट की कुसीर् चुसकिट पूरा - पूरा दिन ख्िाड़की के पास बैठी ड्राॅइंग बनाती रहती थी। उसकी माँ ;आमा - लेद्ध कहती थी कि वह सबसे सुंदर ड्राॅइंग बनाती है। इससे चुसकिट खुश हो जाती थी। एक दिन उसके पिताजी ;आबा - लेद्ध उसके लिए पहियों वाली वुफसीर् ले आए। चुसकिट ने शल्दी ही अपनी वुफसीर् को आगे - पीछे घुमाना सीख लिया। चुसकिट की खुशी का कोइर् ठिकाना न था। अब उसके पिताजी को उसे हर जगह उठाकर नहीं ले जाना पड़ता था। जब मन करता, वह आमा - ले से कहती कि वे उसे उस वुफसीर् पर बिठा दें। पिफर वह अपनी वुफसीर् चलाकर बाहर आँगन में आ जाती। चुसकिट हर सुबह बच्चों को देखती थी। बच्चे हँसते - खेलते, मशे करते हुए स्वूफल जाते थे। उसका भी मन करता था कि काश! वह भी उनमें शामिल हो जाए। कोश्िाश हुइर् कामयाब एक दिन अब्दुल उसके घर चिट््ठी पहुँचाने आया, तो उसने पूछा, फ्चुसकिट तुम स्वूफल क्यों नहीं आती?य् चुसकिट ने बहुत उदास होकर जवाब दिया, फ्आबा - ले, मुझे रोश - रोश उठाकर स्वूफल नहीं ले जा सकते। मैं अपनी वुफसीर् चलाकर भी नहीं जा सकती। स्वूफल जाने का रास्ता इतना ऊबड़ - खाबड़ जो है। मैं नदी भी वैफसे पार कर सकती हूँ?य् अब्दुल ने पूछा, फ्पर क्या तुम स्वूफल जाना चाहती हो?य् चुसकिट का मन उछल पड़ा। वह बोली, फ्क्यों नहीं, क्यों नहीं! मैं भी तुम सब की तरह स्वूफल जाना चाहती हूँ, पढ़ना चाहती हूँ, खेलना चाहती हूँ...य् मेमे - ले ;दादाजीद्ध ने उसे, उसी समय टोक दिया। वे बोले, फ्चुसकिट सपने देखना छोड़ दो। तुम जानती हो, यह मुमकिन नहीं है।य् झ् तुम्हें स्वूफल में क्या - क्या करना अच्छा लगता है? झ् तुम्हें क्या स्वूफल जाना अच्छा लगता है? झ् यदि तुम कभी स्वूफल नहीं जा पाते, तो तुम्हें वैफसा लगता? एक उपाय अब्दुल चुसकिट के घर से चला गया, पर वह उसके बारे में सोचता रहा। उसने एक बहुत बढि़या तरीका सोचा, चुसकिट को स्वूफल पहुँचाने का। पिफर क्या था! वह हैडमास्टर साहब और सब अध्यापकों के पीछे पड़ गया और अपनी बात मनवाकर ही रहा। अब उन सब का एक ही काम थाμचुसकिट की परेशानी को आसानी में बदलना। उन्होंने मिलकर तरीका ढूँढ़ लिया, जिससे चुसकिट अपनी पहियों वाली वुफसीर् को स्वूफल के रास्ते पर चला सके। आस - पास इसके लिए ऊबड़ - खाबड़ रास्ते को समतल करना था। बच्चों की एक टोली उसके घर के सामने वाली ऊबड़ - खाबड़ शमीन को ठीक करने में लग गइर्। दूसरा टोली नदी के पास वाली शमीन को। परंतु अभी एक समस्या और थीμचुसकिट नदी वैफसे पार करेगी? इसके लिए बड़े बच्चों ने अध्यापकों की मदद ली। उन्होंने लकड़ी की पफ‘ियों से नदी पर पुलिया बनाइर्। बच्चों ने हँसते - खेलते, खुशी - खुशी यह काम किया, क्योंकि वे सभी चाहते थे कि चुसकिट स्वूफल जाए। चुसकिट के आमा - ले और आबा - ले भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। उन्होंने सभी को गरमागरम चाय पिलाइर् और बिस्वुफट ख्िालाए। वहीं बैठे चुसकिट के मेमे - ले की आँखों में खुशी के आँसू थे। इसलिए नहीं कि वे दुखी थे परंतु इसलिए कि वे बहुत खुश थे। शाम होते - होते सारा काम हो गया। सभी बच्चे बहुत खुश थे। पर सबसे श्यादा खुश थीμचुसकिट। उसका सपना अब पूरा होने वाला था। कोश्िाश हुइर् कामयाब और आज वह दिन आ ही गया! चुसकिट जल्दी - जल्दी तैयार हो रही है। स्वूफल जाने के लिए। वह अब और इंतशार नहीं कर सकती! बताओ झ् चुसकिट किस - किस की मदद से स्वूफल पहुँच पाइर्? झ् अगर तुम अब्दुल होते, तो तुम क्या - क्या करते? झ् चुसकिट स्वूफल तो पहुँच गइर्। पर स्वूफल के अंदर उसे वुफछ परेशानियाँ हो सकती हैं? कौन - कौन सी? अगर तुम चुसकिट के दोस्त होते, तो उसकी मदद वैफसे - वैफसे करते? झ् क्या तुम्हारे स्वूफल में पहियों वाली वुफसीर् के लिए रैंप बने हैं? झ् क्या तुम्हारे घर के आस - पास कोइर् ऐसा बच्चा रहता है, जिसे किन्हीं कारणों से स्वूफल जाने में परेशानी हो रही हो? क्या तुम उस बच्चे की मदद करना चाहोगे? वैफसे? झ् अपने घर के आस - पास की इमारतों को देखो। क्या उनमें पहियों वाली वुफसीर् अंदर ले जाने की सुविध है? आओ, बना कर देखें झ् रैंप और पहियों वाली वुफसीर् का चित्रा काॅपी में बनाओ। झ् तुम भी अपना एक पुल बनाओ। इसके लिए सामान तुम्हें अपने आस - पास ही मिल सकता है, जैसेμ आइसव्रफीम की डंडियाँ, प्लास्िटक के चम्मच, छोटी डंडियाँ, रस्सी, सुतली आदि। अपने सारे दोस्तों को भी पुल बनाने के लिए कहो। झ् अब समूह के साथ मिलकर एक माॅडल बनाओ। माॅडल में खेत, नदियाँ, पवर्त, सड़क और रेल की पटरियाँ बनाओ। इसके लिए तुम चिकनी मिट्टी, रेत, वंफकड़ - पत्थर के टुकड़े, टहनी आदि काम में ले सकते हो। अब इस माॅडल में अलग - अलग जगहों पर पुल रखो। आस - पास चुसकिट को स्कूल पहुँचाओ।

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