रोश की तरह आज पिफर मैरीटा के घर में बहस शुरू हो गइर् कि टी.वी. पर कौन - सा प्रोग्राम देखें? मैरीटा का भाइर् वि्रफकेट मैच देखना चाहता है, जबकि छोटी सूसन, अपने पसंदीदा गाने का प्रोग्राम। मम्मी और आंटी वैसे तो गहरे दोस्त हैं, पर उनकी पसंद अलग - अलग है। मम्मी समाचार देखना चाहतीं हैं, जबकि आंटी एक सीरियल। मैरीटा काटूर्न देखना चाहती है और डैडी को पुफटबाल मैच देखना है। डैडी कहते हैं कि वे बस शाम को ही टी.वी. देख पाते हैं। आख्िार सबको पुफटबाल मैच ही देखना पड़ा। आस - पास बताओ झ् क्या तुम्हारे घर में भी पंखा, टी.वी., समाचारपत्रा, वुफसीर् या किसी और चीश को लेकर झगड़े होते हैं? झ् तुम्हारे घर के ऐसे झगड़े कौन सुलझाता है? झ् अपने घर के ऐसे झगड़ों के बारे में कोइर् मशेदार किस्सा सुनाओ। झ् क्या तुमने कहीं और एक ही चीश के लिए लोगों को आपस में झगड़ते देखा है? किस बात पर? अलग क्यों? शाम के सात बजे हैं। प्रतिभा अपनी सहेली के घर से भागी - भागी अपने घर जा रही है। नुक्कड़ पर उसके भाइर् संदीप और संजय दोस्तों के साथ खेलने में लगे हैं। उन्हें घर पहुँचने की कोइर् जल्दी नहीं है। उन्हें देर से घर पहुँचने पर कोइर् नहीं टोकता। प्रतिभा को यह बात ठीक नहीं लगती। उस के लिए एक नियम और उसके भाइयों के लिए दूसरा। पर वह क्या करे? बताओ झ् क्या तुम्हारे या किसी दोस्त के परिवार में ऐसी बातें होती हैं? तुम इस बारे में क्या सोचते हो? झ् क्या लड़वफा - लड़की और आदमी - औरत के लिए अलग - अलग नियम होने चाहिएँ? दुनिया मेरे घर में झ् सोचोμअगर लड़कियों के लिए बनाए गए नियम, लड़कों पर और लड़कों के लिए बनाए गए नियम लड़कियों पर लागू हों, तो क्या होगा? पिलू मामी एक दिन पफली, नाशू और उनके दोस्त पिलू मामी के साथ समुद्र तट पर घूमने गए। पानी और रेत में खूब खेलने के बाद बच्चों ने आकाशी झूले में चक्कर लगाए, भेलपूरी खाइर् और गुब्बारे भी खरीदे। बाद में सभी ने मशे से ठंडी - ठंडी वुफल्प़फी खाइर्। वुफल्प़फी वाले ने गलती से सात के बजाए पाँच कुल्प़फी के ही पैसे माँगे। बच्चों ने सोचा ‘चलो पैसे बच गए।’ पर पिलू मामी ने वुफल्प़फीवाले को सही हिसाब समझाया और सात वुफल्िप़फयों के ही पैसे दिए। उस दिन बच्चों ने पिलू मामी से जो बात सीखी, उसे शायद वे कभी नहीं भूलेंगे। झ् अपनी कल्पना से, इस कहानी का अंत बदलकर काॅपी में लिखो। आस - पास झ् क्या तुम्हारे परिवार में भी कोइर् पिलू मामी की तरह है? कौन? झ् अगर पिलू मामी कम पैसे देकर वहाँ से चलीं जातीं, तो बच्चे इस बारे में क्या सोचते? तुम इस बारे में क्या सोचते हो? मैं क्या करूँ? अक्षय को अपनी दादी - माँ से बहुत लगाव है। वे भी उसे बहुत प्यार करतीं हैं। वे उससे खूब रोचक बातें करतीं हैं। वे अक्षय के दोस्त अनिल को पसंद करतीं हैं, पर वे अक्षय को एक बात बार - बार समझातीं हैं μ उसे कभी भी अनिल के घर का खाना नहीं खाना, पानी तक नहीं पीना है। वे कहतीं हैं कि अनिल के परिवार वाले उनके परिवार से बहुत अलग हंै। एक दिन अनिल के घर के पास वाले बड़े मैदान में वाॅलीबाल का मैच हुआ। उस दिन बहुत गमीर् थी। मैच के बाद सभी प्यासे और थके थे। अनिल सबको अपने घर ले गया। सब दोस्तों को अनिल की माँ ने पानी दिया। जब अनिल ने अक्षय के हाथ में पानी का गिलास थमाया, तो अचानक उसे दादी की चेतावनी याद आ गइर्। हाथ में गिलास लिए अनिल को देख, अक्षय को समझ नहीं आया कि वह क्या करे। दुनिया मेरे घर में बताओ झ् तुम्हें क्या लगता है, अक्षय क्या करेगा? झ् अक्षय उलझन में क्यों पड़ गया? झ् अक्षय की दादी - माँ ने उसे अनिल के घर का पानी तक पीने के लिए मना क्यों किया होगा? झ् क्या तुम किसी ऐसे व्यक्ित को जानते हो, जो अक्षय की दादी - माँ की तरह ही सोचते हैं? झ् क्या तुम अक्षय की दादी - माँ से सहमत हो? झ् तुम्हारी राय में अक्षय को क्या करना चाहिए? ़किसका फैसला? धेंडू का परिवार बहुत बड़ा है। परिवार के रुपए - पैसे और खेतीबाड़ी का सारा काम बड़े काका ही सँभालते हैं। परिवार के छोटे - बड़े सभी निणर्य वे ही लेते हैं। अभी तक तो धेंडू खेत में काम करता था। पर, अब वह वुफछ नया करना चाहता है। वह बैंक से वुफछ पैसे उधर लेकर आटे की चक्की लगाना चाहता है। गाँव में एक भी चक्की नहीं है। धोंडू को पूरा यवफीन है कि उसके नए काम से परिवार को प़फायदा होगा। उसने बाबा को तो मना लिया है, पर बड़े काका उसकी एक भी सुनने को तैयार नहीं हैं। अध्यापक के लिएμइन उदाहरणों के द्वारा बच्चों का ध्यान उन बातों की तरप़फ खींचा जा सकता है, जो हमारे परिवार और समाज में सामान्यतः होती हैं। इन सभी बातों का हम पर गहरा असर होता है। बच्चों को इन बातों के बारे में सोचने और स्वयं के विचार बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। उनके विचारों पर कक्षा में चचार् करवाइर् जा सकती है। आस - पास बताओ झ् तुम धेंडू की जगह होते तो क्या करते? झ् क्या तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है कि तुम वुफछ करना चाहते हो, पर घर के बड़ों ने मना किया हो? झ् तुम्हारे घर में शरूरी प़ैफसले कौन लेता है? तुम्हें इस बारे में क्या लगता है? झ् अगर तुम्हारे परिवार में या रिश्तेदारी में हमेशा एक ही व्यक्ित अपनी बात मनवाता रहे, तो तुम्हें वैफसा लगेगा? मुझे यह अच्छा नहीं लगता! मीना और रितु स्टापू खेल कर घर लौट रहे थे। फ्चलो न, मेरे घर चलो,य् मीना ने रितु को खींचते हुए कहा। फ्तुम्हारे मामा तो घर पर नहीं होंगे? अगर वे होंगे, तो मैं नहीं आउफँगी,य् रितु ने जवाब दिया। फ्पर क्यों? मामा को तो तुम अच्छी लगती हो। कह रहे थे μ अपनी सहेली रितु को घर लाना। मैं दोनों को खूब सारी चाॅकलेट ख्िालाउफँगा।य् रितु ने मीना से अपना हाथ छुड़ाया और बोली, फ्तुम्हारे मामा से मुझे डर लगता है। हाथ भी पकड़ते हैं, तो मुझे अच्छा नहीं लगता।य् यह कहकर रितु अपने घर चली गइर्। अध्यापक के लिएμवुफछ बच्चों के अनुभव रितु की तरह के हो सकते हैं। कक्षा में इन पर चचार् होने से बच्चों को अपने अनुभवों के बारे में सोचने का मौका मिलेगा। इससे उनका ध्ीरज भी बँध्ेगा और श्िाक्षक के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा। शरूरत के अनुसार, बच्चों से व्यक्ितगत रूप से बात की जा सकती है। अगर स्वूफल में बच्चों के सलाहकार ;काउंसलरद्ध हों, तो उनकी मदद भी ली जा सकती है। दुनिया मेरे घर में बताओ झ् क्या तुम्हें भी कभी किसी का छूना बुरा लगा है? किसका छूना तुम्हें अच्छा नहीं लगा? झ् अगर तुम रितु की जगह होते, तो क्या करते? झ् ऐसा होने पर और क्या किया जा सकता है?

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