क्लास में पाटीर् छु‘ियों के बाद आज स्वूफल खुला है। सभी बच्चे आपस में छु‘ियों के बारे में बातें कर रहे हैं। मीना आरती की हथेली देखकर बोली, फ्तुमने मेंहदी कब लगाइर्?य् फ्मामा की शादी में,य् आरती ने बताया। फ्वहाँ तो बहुत मशा आया होगा,य् डेविड बोला। फ्हाँ! सबसे श्यादा मशा तो खाने में आया। वहाँ हम सब भाइर् - बहन और रिश्तेदार एक साथ बैठकर खाते थे,य् आरती खुशी से चहकी। फ्क्यों न हम भी स्वूफल में ऐसा ही वुफछ करें?य् रेहाना बोली। फ्हाँ, हम क्लास में मिलकर पाटीर् शरूर कर सकते हैं। कितना मशा आएगा, तब!य् डेविड ने सुझाया। फ्हमारी काॅलोनी में सभी त्योहारों पर पाटीर् होती है। सब घरों से पैसे इकऋे कर लेते हैं। वुफछ खाना साथ मिलकर बनाते हैं और वुफछ बाशार से लाते हैं,य् रेहाना ने कहा। फ्पाटीर् करने के लिए त्योहार क्यों? शनिवार को आध्ी छु‘ी है। उसी दिन पाटीर् करते हैं,य् रीना बोली। सबने मिलकर तय किया कि पाटीर् के लिए कौन क्या - क्या लाएगा। पाटीर् में बहुत मशा आया। तरह - तरह की खाने की चीशें थीं। सब ने मिलकर बहुत - से खेल खेले। नाच - गाना भी हुआ। बच्चों ने यह तय किया कि वे अकसर मिलकर पाटीर् किया करेंगे। काॅपी में लिखो झ् क्या तुम्हें मिल - जुलकर खाना अच्छा लगता है? झ् कौन - कौन - से मौकों पर तुम सब मिलकर खाते हो? झ् क्या तुमने कभी क्लास में पाटीर् की है? कब की थी और उसके लिए क्या - क्या किया था? झ् पाटीर् में तुम और तुम्हारे साथी क्या - क्या चीशें लाए थे? झ् तुम सभी ने क्या - क्या खाया? झ् तुमने अपनी क्लास पाटीर् में किन - किन को बुलाया था? झ् क्या ऐसा भी हुआ है कि स्वूफल में काम करने वाले वुफछ लोगों को तुम नहीं बुला पाए? वे कौन थे? झ् क्या तुमने अपनी क्लास पाटीर् में विशेष कपड़े पहने थे? झ् पाटीर् को मशेदार बनाने के लिए क्या - क्या किया जा सकता है? चचार् करो। अध्यापक के लिएμकक्षा में पाटीर् करवाने का एक कारण बच्चों को मिल - जुलकर, एक साथ बैठकर खाने के अवसर देना है। इसके लिए बच्चों को नाच - गाना, नाटक जैसे कायर्व्रफम तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है। आस - पास बीहू का त्योहार सोनमोनी जल्दी से उठी और भागी - तनवीर, प़फातिमा और मशानी के पास। आज बीहू त्योहार जो मनाया जा रहा हैμचावल की नइर् प़फसल कटी है न! चारों सहेलियाँ मस्ती में गीत गाने और भेला - घर बनाने लगीं। सभी मिलकर बीहू की तैयारियों की बातें कर रही हैं। पढ़ो, इनकी बातचीत। सोनमोनी μ जल्दी करो! रात के भोज से पहले घास और बाँस से भेेला - घर बनाकर तैयार करना है। तनवीर μ आज तो पूरे गाँव के लोग रात को एक साथ खाना खाएँगे। भइर्, ‘उरुका’ जो है! प़फातिमा μ भोज की तैयारियाँ शुरू हो गईं क्या? सोनमोनी μ हाँ! हाँ! सभी परिवारों ने पैसे मिला कर ‘बोरा’ चावल, रात को जलाने के लिए लकड़ी, बाँस और मेशी का इंतशाम किया है। हरिया और भादिया ने पैसे तो नहीं दिए हैं, पर वे सारा काम करवा रहे हैं। प़फातिमा μ माँस, मछली और सब्िशयों का क्या हुआ? सोनमोनी μ वुफछ लोग यही सब खरीदने गए हुए हैं। बोरा चावल भ्िागो दिया है। पीठा बनाने के लिए पूरा गाँव काम में लगा हुआ है। वुफछ खाना पका रहे हैं और वुफछ शकरकंदी भून रहे हैं। वुफछ लोग रात को खाना ख्िालाने में लगेंगे। शाम को सभी को चाय और पीठा भी देंगे। अध्यापक के लिएμ ‘उरुका’, बीहू से पिछले दिन की शाम को कहते हैं। ‘बोरा’ और ‘चेवा’ चावलों के दो प्रकार हैं, जो पकने के बाद चिपचिपे हो जाते हैं। इसे असम में खाया जाता है। बच्चों को नक्शें में असम ढूँढ़ने के लिए प्रेरित करें। तनवीर μ रात के खाने में ‘चेवा’ चावल भी मिलेगा न? मुझे वह बहुत ही पसंद है। प़फातिमा μ वैफसे पकाएँगे चेवा चावल? सोनमोनी μ ‘ताओ’ ;कड़ाहीद्ध को आग पर रखकर उसमें पानी उबालेंगे और उस पर रखेंगे भीगे हुए चावलों से भरी हुइर् कड़ाही। पिफर उसे केले के पत्तों से ढँक देंगे। थोड़ी देर में हो जाएगा चेवा चावल तैयार। बताओ झ् बीहू त्योहार कहाँ मनाया जाता है? आस - पास भेला - घर बन कर तैयार हो गया। अब ये सहेलियाँ भागीं तैयार होने के लिए। थोड़ी ही देर में गाँव के सब लोग भी आ गए। श्यादातर औरतों ने पीले कपड़े पहने थे। रंग - बिरंगी मेखला चादर पहने चारों सहेलियाँ भी भेला - घर के पास पहुँच गईं। ढोल बजने लगा और सभी मस्ती में झूमते हुए गीत गाने लगे। भेला - घर जलाया गया। उसके चारों ओर सभी खूब नाचे। पिफर सब शमीन परभेला घर बैठ गए। उन्हें केले के पत्तों पर खाना परोसा पता लगाओ और करो झ् अंदाशा लगाकर बताओ कि इस भोज में लगभग कितने लोगों ने एक साथ खाना खाया होगा। झ् क्या तुमने कभी बीहू नृत्य देखा है? वैफसा लगा? झ् पता करोμतुम्हारी क्लास के बच्चे कौन - कौन से त्योहार मनाते हैं और उन त्योहारों पर क्या खास खाया जाता है। झ् त्योहार पर खाने की चीश कौन बनाता है? झ् क्या तुम किसी त्योहार या अवसर पर वुफछ खास तरह के या खास रंग के कपड़े पहनते हो? उन कपड़ों के चित्रा अपनी काॅपी में बनाओ। झ् क्या तुम त्योहारों पर वुफछ खास तरह के गाने गाते हो? वुफछ गीत सीखकर क्लास में सुनाओ। झ् त्योहारों पर होने वाले वुफछ खास नृत्य सीखो। पिफर स्वूफल की सुबह की सभा में ये नृत्य अपने दोस्तों के साथ करके दिखाओ। झ् अपनी उम्र के बच्चों के साथ मिलकर क्या तुम वुफछ खास करते हो, जैसे कोइर् खेल, गप - शप, सिनेमा देखना या वुफछ और? मिड - डे मील दोपहर का एक बजने वाला है। पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। हम बच्चों का ध्यान पढ़ाइर् पर कम और बाहर बरामदे से आने वाली खाने की खुशबू पर श्यादा है। टन्..टन्..टन्...! आख्िारी घंटी बज ही गइर्। सभी बच्चे बाहर की ओर भागे। वुफछ खाने के बतर्नों की तरप़फ तो वुफछ हाथ धेने। मास्टर मोशाय ने सभी को आँगन के कोने में लगे पानी के हैंडपंप की तरप़फ भेजा। फ्आनंदो! देखो तो, सब ठीक से तो हाथ धे रहे हैं न!य् उन्होंने कहा। हाथ धेकर हम सभी ने कतार में खड़े होकर खाना लिया। वुफछ ने अपने डिब्बे में, तो वुफछ ने थाली में। इसके बाद सब एक बड़ा गोला बनाकर बैठ गए। खाने से पहले सबने मिलकर गाया - साथ हम खेलें, साथ हम खाएँ, साथ करेंगे अच्छे काम, और रहें हम हर दम साथ। हफ्ऱते के हर दिन दोपहर के खाने में क्या मिलेगा, यह दीदी मोनी के आॅपि़फस के बाहर लिखा होता है। कभी भात - शुक्तो ;चावल और रसेवाली सब्शीद्ध, तो कभी लूची और छोला - दाल। कभी मिष्टी मिल जाए, तो क्या मशे! दोपहर के खाने के समय हमारे स्वूफल में एक और मशेदार बात होती है। गोले में रोश जगह बदलकर अलग - अलग बच्चों के साथ बैठना होता है। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है। कइर् बच्चों से पहचान हो जाती है और कइर् नए दोस्त भी बन जाते हैं। आस - पास पहले कभी - कभी भात मेें कंकड़ होते थे, तो कभी दाल कच्ची। तब लोगों ने कहाμहमारे बच्चे ऐसा खाना नहीं खाएँगे। दीदी मोनी ने समझायाμहम सभी को मिलकर देखना चाहिए कि खाना साप़फ - सुथरा, ठीक से पका हुआ, गरम और ताशा हो। दोपहर का खाना सभी बच्चों को मिलना ही चाहिए। बच्चों के घरों से लोगों ने मदद करने की ठानी। अब सब ठीक है। गरमा - गरम, पका हुआ खाना, वह भी सभी को एक साथ! कभी - कभी जितना खाना मिलता है, उससे छोटे बच्चों का पेट तो भर जाता है, पर मेरा और मेरे दोस्तोें का नहीं। आजकल तो स्वूफलों में भोजन मिलता है, पर पहले ऐसा नहीं था। जब मेरी दीदी प्राइमरी स्वूफल में पढ़ती थी, तब खाना नहीं दिया जाता था। कइर् बच्चे तो सुबह बिना खाए ही स्वूफल जाते थे। खाली पेट, और दिन - भर पढ़ाइर्μवे वैफसे करते होंगे? पता करो और काॅपी में लिखो झ् तुम भी अपने स्वूफल के खाने के बारे में बताओ। अगर तुम्हारे स्वूफल में खाना नहीं मिलता, तो किसी ऐसे दोस्त से पूछो, जिसके स्वूफल में मिलता है। लिखोμ झ् भोजन किस समय मिलता है? झ् तुम्हें यह खाना वैफसा लगता है? झ् जितना खाना मिलता है, क्या उससे तुम्हारा पेट भर जाता है? झ् क्या अपना बतर्न साथ लाते हो या स्वूफल से मिलता है? झ् स्वूफल में दोपहर के खाने में क्या - क्या मिलता है? झ् खाना कौन परोसता है? झ् क्या तुम्हारे टीचर तुम्हारे साथ खाते हैं? ़झ् हफ्रते भर के खाने के बारे में क्या स्वूफल के बोडर् पर लिखा होता है? झ् बुध्वार और शुक्रवार को दोपहर के खाने में तुम्हें क्या मिलेगा? झ् अगर तुम्हें अपने स्वूफल में मिलने वाले खाने की सूची में बदलाव करने का मौका मिले, तो क्या - क्या बदलना चाहोगे? तुम क्या - क्या खाना पसंद करोगे। अपने खाने की सूची बनाओ। दिन खाने की चीश सोमवार बुध्वार शुव्रफवार

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