आज मुझे मुंबइर् आए एक महीना हो गया हैै। माँ तभी से अस्पताल में भतीर् है। उनके इलाज के लिए ही तो हम गाँव से मुंबइर् आए हैं। मुंबइर् एक बड़ा शहर ! मुझे ध्ीरे - ध्ीरे शहर की आदत पड़ गइर् है। पर आज भी वह दिन याद है, जब माँ और मैं, मुंबइर् स्टेशन पर टेªन से उतरे थे। कितनी भीड़ थी। मैंने प़फटाप़फट माँ का हाथ पकड़ लिया था। मैं सोच रही थी इतनी भीड़ में मामा वैफसे दिखाइर् देंगे। तभी पीछे से शोर से आवाश आइर्, फ्नंदिता! नंदिता!!य् मुड़कर देखा तो मामा ही थे। अध्यापक के लिएμमाँ के भाइर् को मामा कहते हैं। बच्चों से पूछिए कि वे अपनी माँ के भाइर् को क्या कहते हैं। स्टेशन से मामा के घर की ओर चले, पर यह क्या? पिफर से इतनी भीड़ वाला इलाका। संकरी गली के दोनों तरप़फ साथ - साथ सटी हुइर् झुग्िगयाँ। उसी गली से होते हुए हम मामा के घर पहुँचे। यहाँ एक कमरे में मामा, मामी, उनकी दो बेटियाँ और बेटा रहते हैं, और अब मैं भी। वहीं बैठना, वहीं सोना, वहीं पकाना और वहीं नहाना। हमारे गाँव के घर में भी एक ही कमरा है, पर रसोइर्घर और नहाने की जगह अलग - अलग है। बाहर आँगन भी है। पानी की किल्लत मैं, मामी और सीमा के साथ सुबह चार बजे उठकर नल पर पानी भरने जाती हूँ। बाप रे! वहाँ पानी के लिए कितने झगड़े होते हैं। अगर पहुँचने में देर हो गइर् तो समझो, दिन भर का पानी भरा नहीं जाएगा। हमारे गाँव के घर में भी नल नहीं है। गाँव में तालाब बीस मिनट की दूरी पर है। गमिर्यों में कभी - कभी तालाब का पानी अध्यापक के लिएμमाँ के भाइर् की पत्नी को मामी कहते हैं। बच्चों से पूछिए की वे अपने इलाके में उन्हें क्या कहते हैं। सूख जाता है। तब घंटा - भर चल कर नदी से पानी लाना पड़ता है। पर पानी के लिए इतने झगड़े तो नहीं होते। मामा की गली के एक कोने पर टाॅयलेट बना है। गली के सभी लोग वहीं जाते हैं। इतनी गंदगी और बदबू! वहाँ जाने पर मुझे पहले तो मितली आती थी। अकसर वहाँ पानी भी नहीं होता। पानी साथ ही ले जाना पड़ता है। अब तो इस सबकी आदत पड़ गइर् है। गाँव में तो सब खुली जगह पर जाते हैं, लेकिन उसके लिए आदमी और औरतों की जगह अलग - अलग हैं। लिखो झ् नंदिता को गाँव से माँ को मुंबइर् क्यों लाना पड़ा? झ् मामा की बस्ती के टाॅयलेट में जाने पर नंदिता को पहले मितली आती थी। क्यों? झ् नंदिता को अपने और मामा के घर में क्या अंतर लगा? झ् बस्ती के नल से पानी भरने और गाँव में पानी भरने में नंदिता को क्या अंतर लगा? झ् तुम्हारे अनुसार, क्या नंदिता के मामा की बस्ती में बिजली होगी? सीख ही लिया मैं रोश माँ से मिलने बस से अस्पताल जाती हूँ। शुरू में तो बसों में भीड़ देखकर हिम्मत ही नहीं पड़ती थी, उनमें चढ़ने की। आदत जो नहीं थी। डर भी लगता था। पर अब ठीक है। मुझे समझ आ गया है कि वैफसे लाइन में लगना है, कितने का टिकट लेना है, कहाँ उतरना है। बस्ती से वुफछ दूर एक उँफची बि¯ल्डग है। वहीं सात घरों में मामी सप़फाइर् और बतर्न धेने का काम करती हैं। एक दिन मैं भी मामी के साथ वहाँ गइर्। देखने पर पहले मुझे लगा कि एक ही बड़ा घर है। पर नहीं, वे तो एक के ऊपर एक बने ़बहुत सारे घर थे। मैं सोच रही थी कि इतनी सारी सीढि़याँ वैफसे चढूँगी। पर वहाँ लिफ्रट भी लगी थी - एक बड़े से लोहे के पिंजरे जैसी। पंखा, घंटी और बल्ब सभी लगे थे उसमें। हम कितने सारे लोग उसमें घुस गए। बटन दबाया और झट पहुँच गए ऊपर। सच बताऊँ, मुझे पहले बहुत डर लगा था। बताओ दूसरे घर में मामी सबसे पहले मुझे बबलू के घर ले गइर्। उसका घर बारहवीं मंिाल पर था। कितना बड़ा घर था! बैठक, खाने का कमरा, सोने का कमरा - सब अलग और रसोइर् भी अलग। वहाँ टाॅयलेट भी घर के अंदर ही था। मामी को बबलू के घर काम करने में टाइम तो बहुत लगा, पर खास परेशानी नहीं हुइर्। रसोइर्घर में ही नल लगा था और झर - झर पानी बह रहा था। बबलू ने नहाने के लिए पानी की बालटी लगाइर् और टी.वी. देखने बैठ गया। कितना पानी बेकार बह गया! यह मुझे अच्छा नहीं लगा। मैंने जाकर नल बंद कर दिया। बबलू के घर में बड़ी - बड़ी काँच की ख्िाड़कियाँ थीं। मामी ने मुझे ख्िाड़की से नीचे देखने को कहा। बबलू के घर की ख्िाड़कियों से मामा की बस्ती दिखाइर् दे रही थी। बस्ती तो दिखाइर् दी, पर पता नहीं चल रहा था कि मामा का घर कौन - सा है। ऊपर से नीचे, सब वुफछ ख्िालौने की तरह छोटा - छोटा लग रहा था। मुझे डर भी कितना लगा था, ऊपर से बहुत नीचे झाँकने में। झ्शुरू में नंदिता को मुंबइर् में क्या - क्या करने में डर लगता था? अध्यापक के लिएμपाठ में मामा की बस्ती और उफँची बिल्िंडग के बीच के अंतर की बात की गइर् है। इनके कारणों पर चचार् करते समय बच्चों को उनके अनुभवों से और भी अंतर और उसके कारणों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। झ्मामा के घर और बिल्िडंग के मकानों में क्या - क्या अंतर है?मामा की बस्ती के घर ऊँची बिल्िंडग में बने घर झ् यह अंतर क्यों है? चचार् करो। अपने बारे में बताओ झ् इनमें से तुम्हारा घर किसके जैसा है? उस पर गोला लगाओ। नंदिता मामा बबलू किसी और तरह का झ् तुम्हारे घर में पानी कहाँ से आता है? झ् क्या तुम्हारे घर में बिजली का कनेक्शन है? यदि हाँ, तो एक दिन में बिजली कितने घंटे आती है? झ् तुम्हारे घर के पास कौन - सा अस्पताल है? झ् नीचे दी गइर् जगहें तुम्हारे घर से लगभग कितनी दूर हैं? समय ;मिनटों मेंद्ध दूरी ;कि.मी.द्ध बस स्टाॅप स्वूफल बाशार पोस्टआॅपि़फस अस्पताल झ् तुम्हारे इलाके में बने अलग - अलग तरह के घरों का चित्रा काॅपी में बनाओ। एक नइर् चिंता मामा ने कहा था कि वे मुझे मुंबइर् घुमाने ले जाएँगे। बस्ती के बच्चे चैपाटी की बहुत बातें करते हैं। सुना है, वहाँ बड़े - बड़े पि़फल्म स्टार भी रहते हैं। काश, जब हम वहाँ जाएँ, तो मुझे भी कोइर् पि़फल्म स्टार दिख जाए! पर आजकल मामा इतने परेशान हैं कि उनसे घुमाने के लिए ले जाने को नहीं कह ़सकती। पिछले हफ्रते वुफछ लोग बस्ती खाली करने का नोटिस दे गए थे। अब यहाँ बड़ा होटल बनेगा। मामा ने बताया था कि पिछले दस सालों में उन्हें तीसरी बात नोटिस मिला है। जो लोग यहाँ रह रहे हैं, उन्हें अपना घर बनाने के लिए कोइर् दूसरी जगह दी जा रही है। इस झुग्गी के बदले जो जगह मिली है, वह शहर से बहुत दूर है। समझो, शहर का दूसरा कोना। वहाँ न पीने का पानी है, न बिजली। पता नहीं, वहाँ कोइर् बस भी जाती है या नहीं! मामा इतनी दूर से काम पर वैफसे आएँगे? कितना श्यादा पैसा लगेगा और कितना श्यादा टाइम भी और मामी, उनको वहाँ काम मिलेगा भी या नहीं! अगर मामा नइर् जगह चले गए, तो मैं माँ से मिलने वैफसे आऊँगी? माँ तो अभी पूरी तरह से ठीक भी नहीं हुईं। अध्यापक के लिएμनंदिता के मामा के परिवार की तरह ही कइर् लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ते है। कक्षा में इनके कारणोें पर चचार् करवाइर् जा सकती है। इस बदलाव से उन परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चचार् हो सकती है। काॅपी में लिखो

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