मैं हूँ चेतनदास। सालों पहले मैं तुम्हारे जैसे छोटे - छोटे बच्चों को पढ़ाता था। आजकल अपने बीते हुए दिनों के बारे में लिखता हूँ। आज मैं तुम्हें अपने बारे में बताता हूँ। एक बड़ा बदलाव बात तब की है, जब मैं नौ वषर् का था। समझो लगभग साठ साल पहले। उस समय हम डेरा गाशीखान में रहते थे। अब वह जगह पाकिस्तान में है। आस - पास बहुत गड़बड़ हो रही थी, पर उस समय मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया था। बस, बाबा ने बताया कि हमें अपना गाँव छोड़कर दूसरी अध्यापक के लिएμइस पाठ को शुरू करने से पहले बच्चों को अँग्रेशों से भारत की आशादी और देश के बँटवारे के इतिहास के बारे में बताया जा सकता है। नक्शे में भारत और पाकिस्तान दिखाएँ। जगह जाना है। मुझे अपना घर, अपना गाँव छोड़ना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा था। वहीं तो थे मेरे सारे दोस्त! मैं, बाबा, अम्मा, मेरे तीन छोटे भाइर् - बहन और आस - पास के बहुत सारे लोग रेलगाड़ी में बैठकर दिल्ली आ गए। लोग बातें करते थे कि हमारा देश दो हिस्सों में बँट गया हैμभारत और पाकिस्तान। भारत में रहने वाले बहुत सारे लोग भी पाकिस्तान चले गए थे। हम कुछ दिन वैंफप में रहे। वैंफप एक बड़े से मैदान में बड़े - बड़े तंबू लगाकर बना था। एक नइर् शुरुआत एक दिन बाबा ने बताया कि हमें सोहना गाँव में शमीन मिली है। अब हम वहीं अपना घर बनाएँगे। मैं बहुत खुश था। बाबा और अम्मा ने मिलकर घर बनाया। हम बच्चे भी कहाँ पीछे रहने वाले थे! बाबा ने पास से ही मि‘ी खोदी। हमने परात भर - भर कर माँ को पकड़ाइर्। गुडि़या ने अम्मा के साथ मिलकर उसमें भूसा मिलाया। बाबा ने दीवारें बनाईं। हम आस - पास के घरों से गोबर ले आए। अम्मा ने उसे मि‘ी में मिलाया और शमीन पर लिपाइर् की। बिलवुफल वैसे ही, जैसे वे पुराने घर में करती थीं। अम्मा कहतीं थीं कि इससे मि‘ी में कीड़ा नहीं लगता। बस अब छत बनानी रहती थी। बाबा ने लकड़ी के पफ‘े जोड़ - जोड़ कर एक प्ऱेफम बनाया और उसे चारों दीवारों पर टिका दिया। लकड़ी को दीमक न लग जाए, इसके लिए नीम और कीकर की लकडि़याँ इस प्ऱेफम पर बिछा दीं। अम्मा ने पुरानी बोरियाँ इस पर बिछा कर मि‘ी से लेप कर दिया। आस - पास के श्यादातर सभी घर ऐसे ही बने थे। पर मुझे अपना घर सबसे अच्छा लगता थाμवह बिलकुल हमारे पुराने घर जैसा जो था। पता करो और लिखो झ् अपने घर में दादा - दादी या उनकी उम्र के किसी बड़े व्यक्ित से पता करो कि जब वे 8 - 9 वषर् के थे, तब μ झ् वे कहाँ रहते थे? झ् उनका घर किन - किन चीशों से बना था? झ् क्या उनके घर में टाॅयलेट था? झ् उनके घर में खाना कहाँ बनता था? झ् चेतनदास का घर बनाने मंे मि‘ी का भरपूर इस्तेमाल हुआ। क्यों? अध्यापक के लिएμसोहना गाँव हरियाणा में है। बच्चों को नक्शे में हरियाणा ढूँढइस ओर दिलाया जा सकता है कि सोहना गाँव के अध्िकतर घर बनाने में, आस - पास आसानी से मिलने वाली चीशें इस्तेमाल हुईं थीं। आस - पास मिलने वाली इन चीशों और उनके इस्तेमाल पर कक्षा में चचार् करें। ़ने को कहें। उनका ध्यान मकान में बदलाव समय बहुत जल्दी बीत गया। मेरी पढ़ाइर् पूरी हो गइर् और नौकरी भी लग गइर्। अम्मा - बाबा चाहते थे कि मैं शादी कर लूँ। सोचा, शादी से पहले घर की थोड़ी मरम्मत करवा लें। एक कमरा और डलवा लें। शहर में सीमेंट का बहुत चलन था। कहते थे, इससे मकान में बहुत मशबूती रहती है। मैंने, बाबा और अम्मा की सलाह से नए कमरे की छत लोहे और सीमेंट से पक्की बनवाईं। बाशार में तब कच्ची ईंटें भी मिलती थीं। कमरे की दीवारें हमने इन ईंटों से बनवा लीं। इससे यह प़्ाफायदा ़हुआ कि इन्हें हर हफ्रते लीपना नहीं पड़ता था। साल में एक बार इन दीवारों की चूने से पुताइर् कर लेते थे। हमने आँगन में छोटी - सी पक्की रसोइर् भी बनवाइर्। उसमें एक तरपफ मि़‘ी का चूल्हा बना था और दूसरी तरपफ़बरतन रखने की जगह। पिफर मेरी शादी हो गइर्। मेरी पत्नी सुमन इसी घर में दुलहन बनकर आइर् थी। वह रसोइर् में नीचे बैठकर रोटियाँ पकाती और पूरा परिवार चटाइर् पर बैठकर एक साथ खाना खाता। सच, वे दिन भी क्या दिन थे! गाँव के लोग तब टाॅयलेट के लिए खेतों में जाते थे। कुछ लोगों ने इसके लिए घर में ही इंतशाम किया हुआ था। हमने भी वैसा ही किया। पिछवाड़े में कच्ची ईंटें लगाकर एक छोटा - सा टाॅयलेट बनवा लिया। झ् चेतनदास बताते हैं कि टाॅयलेट की सपफाइर् और मल - मूत्रा उठाने के लिए बस्ती़से लोग आते थे। उन्हें घर के किसी और हिस्से में आने - जाने की मनाही थी। झ् जो लोग टाॅयलेट का उपयोग करते थे, वे ही उसे सापफ क्यों नहीं करते थे?़चचार् करो। झ् क्या तुम्हारे घर में टाॅयलेट है? उसे कौन साप़्ाफ करता है? और भी बदलाव मेरे दो बेटे और एक बेटी उसी घर में पैदा हुए। समय वैफसे बीतता गया, पता ही नहीं चला। बच्चों की पढ़ाइर् पूरी हो गइर्। पंद्रह साल पहले हमने बेटी सिम्मी की शादी पलवल में कर दी। जब राजू की शादी की बात चली, तो सभी को लगा कि नइर् दुलहन के आने से पहले पूरे घर को पक्का करा लें। तब तक हमारे गाँव में पक्की ईंटों का चलन शुरू हो चुका था। इसलिए दीवारें पक्की ईंटों से बनवाइर्ं और छत पर लेंटर डलवा लिया। प़्ाफशर् भी माबर्ल के दाने और सीमेंट से पक्का बनवा लिया। टाॅयलेट में भी ऐसा इंतशाम करा दिया कि मल - मूत्रा पाइपों से बाहर निकल जाए। रसोइर्घर पहले से बड़ा करवाया। राजू की बहू अब बैठकर मि‘ी के चूल्हे पर नहीं बल्िक खड़े होकर गैस - स्टोव पर खाना बनाती है। अध्यापक के लिएμबच्चों से पूछा जा सकता है कि वे दूसरों से टाॅयलेट साप़फ करवाने के बारे में क्या सोचते हैं। क्या वे ऐसी किसी जगह के बारे में जानते हैं, जहाँ आज भी ऐसा होता है। नइर् - नइर् चीज़ें मेरे छोटे बेटे मोन्टू की जब नौकरी लगी, तो वह दिल्ली जाकर बस गया। अब उसका पूरा परिवार दिल्ली में ही रहता है। मैं और सुमन कभी मोन्टू के पास दिल्ली में रहते हैं, तो कभी राजू के पास सोहना में। मैं सोहना से जब दिल्ली जाता हूँ, तो रास्ते में गुड़गाँव शहर पड़ता है। मेरे देखते - ही - देखते, इतने सालों में यहाँ कितनी सारी बड़ी - बड़ी इमारतें बन गइर् हैं और वे भी कितनी उफँची - उफँची! कुछ साल पहले राजू ने दोबारा टाॅयलेट बनवाया। उसने बाथरूम में रंगीन टाइलें भी लगवा लीं। नहाने की जगह पर प्ि़ाफशूल इतना पैसा खचर् किया। मैं अब 70 वषर् का हूँ। इतने सालों में मैंने अपने घर में ही कितने बदलाव देखे हैं। पता नहीं, मेरे पोता - पोती बड़े होकर कहाँ रहना चाहेेंगे और वैफसा होगा उनका घर! पता नहीं, डेरा गाशीखान में अब वैफसे मकान होंगे! मेरे सभी दोस्त भी कहाँ होंगे? झ् तुम्हारा अपना मकान किन - किन चीशों से बना है? झ् पता करो तुम्हारे दोस्त का मकान किन - किन चीशों से बना है? दोनों में क्या कोइर् अंतर है? लिखो। झ् तुम्हारे अनुसार चेतनदास जी के पोता - पोती बड़े होकर वैफसे मकान में रहेंगे? झ् तुम बड़े होकर कहाँ और वैफसे मकान में रहना पसंद करोगे? झ् तुमने अपने दादा - दादी या उनकी उम्र के किसी बड़े व्यक्ित के बचपन के समय मकान बनाने में इस्तेमाल हुइर् चीशें लिखी थीं। क्या उनमें से वुफछ चीशें तुम्हारा घर बनाने में भी इस्तेमाल हुईं हैं? कौन - कौन सी? चित्रा को देखो। इनमें से वुफछ लोगों को इनके काम के अनुसार खास नाम से बुलाया जाता है, जैसेμलकड़ी का काम करने वाले को बढ़इर् कहते हैं। झ् तुम्हारे यहाँ लकड़ी का काम करने वालों को क्या कहते हैं? चित्रा को देखकर तालिका में लिखो, लोग क्या - क्या काम कर रहे हैं? वे किन - किन औशारों का इस्तेमाल कर रहे हैं? काम औशार किस नाम से बुलाया जाता है? 1 2 3 4 क्या तुम अपने आस - पास ऐसे लोगों को जानते हो, जो ऐसे कामों से जुड़े हैं? उनसे बात करके उनके काम के बारे में जानो। इसके बारे में अपने दोस्तों से चचार् करो। झ् अपनी अध्यापिका या घर वालों के साथ, किसी ऐसी जगह जाओ, जहाँ कोइर् बि¯ल्डग बन रही हो। वहाँ काम कर रहे लोगों से बात करो और इन प्रश्नों के उत्तर पता करके लिखोμ झ् वहाँ क्या बन रहा है? झ् वहाँ कितने लोग काम कर रहे हैं? झ् वे क्या - क्या काम कर रहे हैं? झ् वहाँ कितनी औरतें और कितने आदमी हैं? अध्यापक के लिएμतुम्हारे स्वूफल के आस - पास यदि कोइर् इमारत या मकान बन रहा हो, तो वहाँ बच्चों को ले जाया जा सकता है। झ् क्या वहाँ बच्चे भी काम कर रहे हैं? वे क्या काम कर रहे हैं? झ् काम कर रहे लोगोें को रोश के कितने रुपये मिलते हैं? किन्हीं तीन लोगों से पूछो। झ् काम कर रहे लोग कहाँ रहते हैं? झ् जो बि¯ल्डग बन रही है, उसे बनाने में क्या - क्या चीशें इस्तेमाल हो रही हैं? झ् पूरी बि¯ल्डग बनने में अंदाश से कितने ट्रक इटें और कितनी सीमेंट की बोरियाँ लगेंगी?±झ् बि¯ल्डग बनाने का सामान किन - किन वाहनों में भरकर आता हैμट्रक, रेहड़ी या किसी और तरह? सूची बनाओ। झ् इनकी कीमत पता करोμ एक बोरी सीमेंट एक पक्की ईंट एक बड़ा ट्रक रेतअध्यापक के लिएμअगर हो सके, तो जहाँ इमारत बन रही है, वहाँ बच्चों को ले जाएँ या वहाँ काम कर रहे वुफछ लोगों को अपने स्वूफल में बुलाएँ। उनके काम और औशारों के बारे में उनसे बातचीत करंे। झ् अपनी मशीर् से वुफछ और प्रश्न पूछकर उनके उत्तर लिखो। झ् झ् झ् साठ सालों में चेतनदास का मकान बनाने में जिन - जिन चीशों का इस्तेमाल हुआ, उन्हें सही व्रफम से लिखोμ आओ घर बनाएँ झ् कक्षा के बच्चे 3 - 4 समूह में बँट जाएँ। हर समूह अलग - अलग तरह के मकान का माॅडल बनाएं। तुम इन चीशों का इस्तेमाल कर सकते होμमि‘ी, लकड़ी, कपड़ों के टुकड़े, जूते के डिब्बे, रंगीन कागश, माचिस की डिब्बी और रंग। झ् सभी घरों को एक साथ रख कर एक बस्ती बनाओ।

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