उत्तरांचल में पहाड़ों के बीच में एक ऐसी ही जगह है, जहाँ पूफल ही पूफल होते हैं। यह ‘पूफलों की घाटी’ कहलाती है। कहीं झाडि़यों में लगे लाल पूफल ़नशर आते हैं, तो कहीं पत्थरों के बीच सपेफद पूफल झाँकते हुए मिलते हैं। पीले - पीले पूफलों के लंबे - चैड़े कालीन जैसे मैदान भी हैं। और कहीं - कहीं अचानक घास के बीच छोटे - छोटे तारों जैसे नीले पूफल दिखाइर् देते हैं। यह सब सपने जैसा लगता है न? हाँ, इस घाटी में भी इतने सारे पूफल साल में ़वुफछ ही हफ्रतों के लिए ख्िालते हैंै। आँखें बंद करके कल्पना करो कि तुम भी ऐसी ही किसी जगह पर पहुँच गए हो। वैफसा लगा? कौन - कौन सा गाना गाने का दिल चाह रहा है? तुम उनमें से वुफछ गाकर सुनाओ। झ् क्या तुमने कहीं बहुत सारे पूफल लगे देखे हैं? कहाँ? झ् तुमने कितने रंगों के पूफल देखे हैं? उनके रंगों के नाम लिखो। झ् किस - किस रंग के पूफल देखे हैं? गिनती ही करते रह गए न? क्या तुम्हारे घर में वुफछ ऐसी चीशें हैं, जिनपर पूफलों के डिशाइन बने हों, जैसेμ कपड़े, चादर, पूफलदान आदि? झ् नीचे एक खाने में एक सुंदर - सा डिशाइन बना है। अपने - आप कोइर् डिशाइन बनाकर रंग भरो। यहाँ दिखाए गए डिशाइन को ‘मधुबनी’ कहते हैं। यह चित्राकला बहुत पुरानी है। पता है इस चित्राकला का नाम मध्ुबनी क्यों पड़ा? बिहार में मध्ुबनी नाम का एक िाला है। त्योहारों और खुशी के मौकों पर वहाँ घर की दीवारों पर और आँगन में इस तरह के चित्रा बनाए जाते हैं। यह चित्रा पीसे हुए चावल के घोल में रंग मिलाकर बनाए जाते हैं। ये रंग भी खास तरह के होते हैं। इन्हें बनाने के लिए नील, हल्दी, पूफल - पेड़ों के रंग आदि को इस्तेमाल में लाया जाता है। चित्रों में इंसान, जानवर, पेड़, पूफल, पंछी, मछलियाँ और अन्य कइर् जीव - जंतु साथ में बनाए जाते हैं। झ् अपने दोस्तों के बनाए डिशाइन भी देखो। अध्यापक के लिएμबच्चों को नक्शे में उत्तरांचल ढूँढ़ने के लिए प्रेरित करें। तुम नीचे दिए गए पूफलों में से जिनको पहचानते हो, उन पर ;3द्धनिशान लगाओ। अगर पता हो, तो उनके नाम चित्रा के नीचे लिखो। झ् उफपर दिए गए पूफलों में से और जिन पूफलों को तुम जानते हो, उनमें से दो पूफलों के नाम बताओ जोμ झ्पेड़ों पर लगते हैं झ्झाडि़यों पर लगते हैं झ्बेल पर लगते हैं झ्पानी के पौधें पर उगते हैं झ्सिप़र्फ रात में ख्िालते हैं झ्दिन में ख्िालते हैं, रात में बंद हो जाते हैं झ् जिनको तुम आँखें बंद करके भी खुशबू से पहचान सकते हो झ् जो किसी खास महीने में ही लगते हैं झ् जो साल भर ख्िालते हैं क्या ऐसे पेड़ - पौध्े भी हैं, जिन पर पूफल कभी नहीं आते। पता करके लिखो। यह क्यों ? झ् क्या तुमने इस तरह की तख्ती कहीं लगी देखी है? झ् क्या तख्ती लगी होने के बाद भी लोग पूफल तोड़ लेते हैं? झ् तुम्हें क्या लगता है, वे ऐसा क्यों करते हैं? झ् क्या उन्हें ऐसा करना चाहिए? झ् अगर सब लोग ऐसा करने लगें, तो क्या होगा? जो बच्चे पूफल ला सकते हैं, वे कक्षा में एक - दो पूफल लाएँ। ध्यान रहे कि पेड़ - पौधों से गिरे हुए पूफल ही इकऋे करने हैं। तोड़ने नहीं हैं। तीन - चार बच्चों के समूह बनाओ और किसी एक पूफल को ध्यान से देखो और लिखोμ झ् पूफल किस रंग का है? झ् इसकी खुशबू वैफसी है? झ् आकार वैफसा है? घंटी जैसा, कटोरी जैसा, ब्रुश जैसा या वुफछ और? झ् क्या ये पूफल गुच्छे में हैं? झ् इसकी पँखुडि़याँ कितनी हैं? झ् पँखुडि़याँ आपस में जुड़ी हैं या अलग - अलग हैं? झ् पँखुडि़यों के बाहर क्या तुम्हें हरी पत्ती जैसा वुफछ नशर आ रहा है? ये कितने हैं? झ् पँखुडि़यों के अंदर, बीच में क्या वुफछ पतली सी चीशें दिखाइर् दे रही हैं? ये किस रंग की हैं?झ् उनको छूने से क्या वुफछ पाउडर जैसा हाथ में लग रहा है? ख्िालती कलियाँ ! तुमने कलियाँ भी देखी होंगी। अगर स्वूफल में या घर के आस - पास कहीं पूफल के पौध्े हों, तो उनकी कलियाँ भी देखो। झ् कली और पूफल में क्या - क्या अंतर है? झ् किसी पौध्े की कली एवं उसके पूफल का चित्रा अपनी काॅपी में बनाओ। झ् क्या तुम बता सकते हो कि एक कली कितने दिनों में ख्िालकर पूफल बनती होगी? चलो जानने की कोश्िाश करें। झ्किसी एक पौध्े पर लगी कली चुनो और उसे रोश देखो। उस पौध्े का नाम भी लिखो। झ्जब तुमने कली देखी, तो तारीख थी और वह कली जब पूफल बनी तो तारीख थी । कली को पूफल बनने में कितने दिन लगे? झ्अपने दोस्तों से पूछो, उन्होंने कौन - कौन से पूफल देखे? उनकी कलियों को पूफल बनने में कितना समय लगा? झ्तुम यह भी देख सकते हो कि वह पूफल कितने दिनों में मुरझाया? खाए भी जाते हैं फूल ! तुमने पूफलों का कहाँ - कहाँ इस्तेमाल देखा है? क्या तुम जानते हो पूफल खाए भी जाते हैं? बहुत से पूफलों की सब्शी बनती है। उत्तर प्रदेश में रहने वाली पिफरोशा और नीलिमा को कचनार के पूफलों की सब्शी बहुत पसंद है। केरल की यामिनी अपनी अम्मा से केले के पूफलों की सब्शी बनाने की प़फरमाइश करती है। महाराष्ट्र की ममता और ओमर को सहजन के पूफलों के पकौड़े बहुत पसंद हैं। झ् क्या तुम्हारे घर में भी किसी पूफल की सूखी सब्शी, सालन ;तरीदार सब्शीद्ध या चटनी बनाइर् जाती है? झ् पता करो, कौन - से पूफल की? दवाइर् में भी ! बहुत - सी दवाइयों में भी पूफलों का इस्तेमाल होता है। झ् किन्हीं दो पूफलों के नाम पता करो, जो दवाइयों में इस्तेमाल होते हैं? झ् तुम्हारे यहाँ गुलाब जल कहाँ - कहाँ इस्तेमाल होता है? दवाइर् में, मिठाइयों में, लस्सी में या कहीं और? पता करो और कक्षा में एक - दूसरे को बताओ। खुशबू और रंग बहुत - से पूफलों, जैसेμगुलदावरी, शीनिया से रंग भी बनाए जाते हैं। उन रंगों से कपड़े भी रंगे जाते हैं।झ् तुम ऐसे और पूफलों के नाम पता करो, जिनसे रंग बनता है। झ् क्या तुम ऐसा कोइर् रंग सोच सकते हो, जिस रंग का कोइर् पूफल ही न होता हो? झ् ऐसे वुफछ पूफलों वेेफ नाम लिखो, जिनसे तुम्हें लगता है इत्रा बनाया जाता होगा। क्या तुमने कभी इत्रा की शीशी खुलने पर उसकी खुशबू का मशा लिया है। क्या तुम जानते हो μ इत्रा की एक छोटी - सी शीशी भी बहुत सारे पूफलों से बनती है। उत्तर प्रदेश का वफन्नौज िाला इत्रा के लिए मशहूर है। यहाँ पर पास के इलाकों से ट्रकों में भर कर पूफल लाए जाते हैं। पिफर उनसे इत्रा, गुलाब जल और केवड़ा तैयार किया जाता है। वफन्नौज में इस काम में हशारों लोग लगे हुए हैं। अध्यापक के लिएμबच्चों को नक्शे में उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र ढूँढ़ने को कहें। बच्चों को बताएँ कि इत्रा पूफलों का शु( अवर्फ होता है। झ् क्या तुमने कभी पूफलों पर कोइर् गीत पढ़ा या सुना है? इस गीत को गाओ। फ्अच्छी मालन, मेरे बन्ने का बना ला सेहरा, बागे जन्नत गइर् मालन मेरी पूफलों के लिए, पूफल न मिलें तो कलियों का बना ला सेहरा।य् बताओ झ् क्या तुम बता सकते हो कि उफपर दिया गया गीत कब गाया जाता होगा? झ् क्या तुम्हें या घर में किसी और को ऐसे गीत आते हैं? झ् पूफलों के बारे में गीत, कविता आदि इकट्ठी करो। उनको कागश पर लिखकर कक्षा में लगाओ। झ् वुफछ अवसरों पर क्या तुम्हारे घर के बड़े कोइर् खास पूफल इस्तेमाल करते हैं? पता करो और तालिका में लिखो। अवसर खास पूफल का नाम अध्यापक के लिएμबन्ना - दूल्हा। बच्चों से पूछें कि उनके इलाके में ‘बन्ने’ को क्या कहते हैं? हाँ भइर्! अगर इतने सारे इस्तेमाल होंगे, तो बहुत सारे पूफल भी तो चाहिएँ। बहुत जगह पूफलों की खेती होती है। मीलों तक पैफले हुए पूफलों के खेत। सोचो कितने सुंदर लगते होंगे! कुछ और जानें क्या तुमने कहीं पर किसी को पूफल बेचते देखा है? यदि तुम्हारे आस - पास कहीं वुफछ लोग पूफल बेचते हैं, तो उनसे ये सवाल पूछो और लिखोμ झ् वे कौन - कौन से पूफल बेचते हैं? उनमें से तीन पूफलों के नाम पूछकर लिखो। और किस तरह से झ् वुफछ पूफलों का अलग - अलग तरह से इस्तेमाल होता है, जैसे - गेंदा और गुलाब के पूफल, खुले और माला दोनों ही तरह से इस्तेमाल होते हैं। झ्अलग - अलग रूपों में पूफलों के दाम पता करो और लिखो। झ्एक माला झ्एक लड़ी झ्एक पूफल झ् क्या इन पूफल बेचने वालों ने गुलदस्ता या पूफलों की चादर बनाना किसी से सीखा है? किससे? झ्क्या वे चाहेंगे कि उनके परिवार के और लोग भी यह काम करें? क्यों? चलो यह करें तुम पाँच या छह के समूह में बँटकर यह कर सकते हो। झ् पेड़ - पौधें से गिरे हुए पूफलों को इकऋा करो और क्लास में लाओ। झ् इन पूफलों को पुराने अखबार के पन्नों के बीच में ठीक से पैफला कर रखो। झ् हर परत में पूफल इस तरह रखना कि एक - दूसरे से चिपके नहीं। झ् अब इस अखबार को किसी भारी चीश से दबा कर दस - पंद्रह दिन के लिए एक ही जगह रखा रहने दो। झ् इसके बाद पूफलों को ध्यान से निकालो और किसी पुरानी काॅपी या पुराने अखबार में चिपकाओ। इन पूफलों को पन्नों पर अलग - अलग तरीके से चिपकाया जा सकता है। झ् तुम इन सूखे हुए पूफलों से सुंदर काडर् भी बना सकते हो। अध्यापक के लिएμबच्चों को नशदीक से पूफलों को देखने के लिए प्रेरित करें। पूफलों को अलग - अलगगुणों, जैसे - रंग, पिायाँ, गुच्छेदार या खुले, इत्यादि के आधर पर समूहीकरण करने में मदद करें।

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