़ ओमना और उसकी पक्की सहेली राधा बहुत खुश थीं। वे साथ - साथ ट्रेन से केरल जो जा रही थीं। ओमना जा रही थी अपनी नानी के घर और राधा अपने परिवार के साथ मनाने। ओमना के अप्पा ही गए थे, दोनों परिवारों के लिए टिकट बुक कराने। सफ़र से दो दिन पहले ही राधा साइकिल से गिर गइर् और उसके दायंे पैर की हंी टूट गइर्। डाॅक्टर ने छहके लिए उसकी दाइर् टाँग पर पलस्तर चढ़ा दिया और चलने - फिरने के लिए भी मना कर दिया। राधा के परिवार को अपनी टिकटें रद्द करानी पड़ीं। राधा और ओमना बहुत उदास हो गईं। कितनी तैयारी की थी, दोनों ने मिलकर। राधा की माँ ने एक उपाय सुझाया। उन्होंने ओमना से कहा, ‘‘तुम अपने पूरे सफ़र की बातें डायरी में लिखती रहना। जब तुम वापिस आओगी, तब राधा तुम्हारी डायरी पढ़ लेगी। इससे तुम कोइर् बात भूलोगी नहीं और सफ़र में तुम्हारा समय भी अच्छा बीतेगा।’’ दोनों सहेलियों को यह बात अच्छी लगी। ओमना ने सफ़र में अपने साथ एक काॅपी रख ली और रास्ते की सभी बातें लिखती रही। ओमना की डायरी के कुछ पन्ने तुम भी पढ़ो। आस - पास ओमना की डायरी16 मइर् दोपहर का समय था। स्टेशन पर पहुँचते ही हमने सबसे पहले अपने नाम ‘रिशवेर्शन चाटर्’ में देखे। जल्दी ही टेªन प्लेटप़फाॅमर् पर आ पहुँची। हमने देखा कि ट्रेन तो पहले से ही भरी हुइर् थी। आज सुबह - सुबह ही यह ट्रेन गाँध्ीधम, कच्छ से चली थी। ट्रेन के पहुँचते ही हलचल सी मच गइर्। एक ही दरवाशे से वुफछ लोग उतर रहे थे, तो वुफछ चढ़ने के लिए धक्का - मुक्की कर रहे थे। हम भी जैसे - तैसे चढ़ ही गए और अपनी सीट ढूँढ़कर अपना सामान सीट के नीचे रख दिया। ट्रेन के चलने से पहले सभी अपनी - अपनी सीटों पर बैठ चुके थे। वुफछ देर बाद टिकट - चेकर आया और उसने सभी की टिकटें देखीं। वह यह देख रहा था कि सभी ठीक सीटों पर बैठे हैं या नहीं। अम्मा और अप्पा को नीचे वाली बथर् मिली, उन्नी और मुझे बीच वाली। सबसे उफपर वाली बथर् पर काॅलेज केओमना का सप़फर दो लड़के हैं। पास ही बैठे परिवार के दोनों बच्चे हमारे जितने ही लग रहे हैं। मैं उनसे बात शरूर करूँगी, पर थोड़ी देर बाद। मैं अब ख्िाड़की के पास बैठी यह सब लिख रही हूँ। अम्मा ने खाने का डिब्बा खोल लिया है। ढोकला, चटनी, नींबू वाले चावल और मिठाइर्μकितनी सारी चीशें लाइर् हैं अम्मा! मेरे मुँह में तो पानी आ रहा है। बाकी बातें अब बाद में ही लिखूँगी। झ् ट्रेन के डिब्बे के दरवाशे पर ध्क्का - मुक्की क्यों हो रही थी? झ् क्या तुमने कभी ट्रेन में सप़फर किया है? कब? झ् अगर तुम सप़फर पर जाओ, तो खाने - पीने का क्या - क्या सामान ले जाना पसंद करोगे? क्यों? झ् टिकट - चेकर के क्या - क्या काम होते हैं? झ् तुम टिकट - चेकर को वैफसे पहचानोगे? आस - पास दोपहर का खाना खाकर वुफछ लोग सो गए, पर मुझे नींद नहीं आइर्। मैं ख्िाड़की से बाहर16 मइर् देखती रही। यहाँ बाहर सूखे, भूरे मैदान दिखाइर् पड़े। कहीं - कहीं छोटे - छोटे गाँव भी दिखे। लग रहा था, जैसे सभी भाग रहे हैं। पता है, जब ट्रेन इतनी तेशी से चलती है, तो बाहर की सभी चीजें उलटी दिशा में भागती दिखाइर् देती हैं! वुफछ समय पहले बहुत गमीर् थी। अब शाम हो गइर् है और हलकी - हलकी हवा चल रही है। बाहर आसमान संतरी रंग का दिखाइर् दे रहा है, सूरज जो डूब रहा है। मैंने अहमदाबाद में कभी डूबते सूरज पर ध्यान ही नहीं दिया! हम अभी - अभी वलसाड़ स्टेशन से निकले हैं। वहाँ ट्रेन दो ही मिनट के लिए रुकी थी। स्टेशन पर खाने - पीने की चीशें बेचने वालों का बहुत शोर थाμ फ्चाय! गरम, चाय!य्,ओमना का सप़फर एक तरप़फ से आवाश आ रही थी, फ्बटाटा - वड़ा! बटाटा - वड़ा!, पूरी - साग!य्,फ्दूध्! ठंडा, दूध!य् लोग प्लेटप़फाॅमर् पर खाने की चीशें खरीद और बेच रहे थे। हमने तो ख्िाड़की से ही केले और चीवूफ खरीद लिए थे। झ् ओमना ने ख्िाड़की से बाहर क्या देखा? झ् रेलवे स्टेशन पर क्या - क्या चीशें बिकती हैं? मैंने साथ बैठे बच्चों से दोस्ती कर ली है। वे हैंμसुनील और एन। वे अपनी दादी के घर कोशीकोड जा रहे हैं। सुनील ने मुझे कहानी की16 मइर् वुफछ किताबें पढ़ने को दीं। मैं थोड़ी देर पहले बाथरूम में हाथ - मुँह धेने गइर् थी, पर वहाँ पानी खत्म हो गया था। किसी ने कहा कि अब पानी अगले स्टेशन पर ही भरा जाएगा। अध्यापक के लिएμगाँध्ीधम, अहमदाबाद और वलसाड़ गुजरात में हैं। कोशीकोड केरल में है। बच्चों को नक्शे पर गुजरात और केरल दिखाने से उन्हें यह बात समझने में आसानी होगी कि यह सप़फर बहुत लंबा है। आस - पास झ्ट्रेन के बाथरूम में पानी खत्म क्यों हो गया? चचार् करो। झ्कल्पना करो कि अब तुम्हें ट्रेन में एक लंबे सप़फर पर जाना है। तुम अपने साथ मनोरंजन के लिए क्या - क्या सामान ले जाना चाहोगे? झ्चित्रों को पहचान कर लिखो, रेलवे स्टेशन पर ये लोग क्या काम करते हैं? चचार् करो।

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